इंजन खराब होने से लेकर वारंटी खत्म होने तक… E20 Petrol पर सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों E20 Petrol को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। E20 पेट्रोल को लेकर पानी, इंजन डैमेज, माइलेज और वारंटी से जुड़े कई दावे भी किए जा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैल रहा है कि इसका इस्तेमाल करने पर वाहन का बीमा क्लेम या कंपनी की वारंटी खत्म हो सकती है। इस दावे के वायरल होने के बाद केंद्र सरकार ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की और लोगों से ऐसी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की।

सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सरकार ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। संबंधित बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन के उपयोग से न तो वाहन का बीमा प्रभावित होता है और न ही कंपनी की वारंटी पर कोई असर पड़ता है। सरकार की ओर से साझा की गई जानकारी में कहा गया कि बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से भारत में किसी भी वाहन के बीमा या कंपनी की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए इस तरह की अफवाहों पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिन गाड़ियों को E20 ईंधन के लिए तैयार किया गया है और जो तय मानकों को पूरा करती हैं, उनकी कंपनी वारंटी पहले की तरह जारी रहेगी। यानी E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले भी सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही कई गलत जानकारियों पर विस्तार से जवाब दिया था। सरकार ने एक विस्तृत जानकारी जारी कर इंजन की सुरक्षा, ईंधन की खपत, वाहन की वारंटी, माइलेज और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि E20 कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, यह योजना वैज्ञानिक अध्ययनों, तय सुरक्षा मानकों और कई देशों के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मंत्रालय ने बताया कि इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल दुनिया के कई देशों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों में भी यह ईंधन पहले से उपयोग में है। मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन के प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता और माइलेज में भी केवल मामूली बदलाव देखने को मिलता है।

सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव और वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर देश पर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयात का बोझ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Stock in Focus: ₹236 करोड़ का ऑर्डर और मिला, अब 6 जुलाई को फोकस में शेयर

Oswal Pumps Share Price: ओसवाल पंप्स को महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) से ₹235.92 करोड़ का ऑर्डर और मिला है। कंपनी को यह ऑर्डर पीएम कुसुम बी स्कीम (PM Kusum B Scheme) के तहत मिला है। कंपनी ने इसकी जानकारी शनिवार 4 जुलाई को एक्सचेंज फाइलिंग में दी। अब इसका असर कंपनी के शेयरों पर सोमवार 6 जुलाई को स्टॉक मार्केट खुलने पर शेयरों पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 3 जुलाई को बीएसई पर यह 2.01% की गिरावट के साथ ₹409.70% के भाव पर बंद हुआ था।

कैसा ऑर्डर मिला है Oswal Pumps को?

एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि उसे पूरे महाराष्ट्र में 10,000 ऑफ-ग्रिड DC सोलर फोटोवोल्टिक वॉटर पंपिंग सिस्टम (SPWPS) के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर करीब ₹235.92 करोड़ का है जिसमें जीएसटी भी शामिल गै। इस पर कंपनी को 60 दिनों के भीतर काम पूरा करना है।

इस प्रोजेक्ट में कंपनी महाराष्ट्र में चुने गए किसानों की जगहों पर पीएम कुसुम बी स्कीम की “मागेल त्याला सौर कृषि पंप” योजना के तहत 3 HP, 5 HP और 7.5 HP के सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम लगाएगी। कंपनी को 5 साल तक इनके वारंटी, रिपेयर और मेंटेनेंस सर्विसेज और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम का भी काम संभालना है। कंपनी के चेयरमैन और एमडी विवेक गुप्ता ने 10 हजार सोलर पंप्स के अतिरिक्त ऑर्डर्स मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि यह राज्य सरकार के साथ कंपनी की मजबूत और लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को दिखाता है जो राज्य के सोलर सिंचाई मिशन को आगे बढ़ा रही है

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

ओसवाल पंप्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है और कम ही समय में आधे से अधिक पूंजी घटा दी। पिछले सााल बीएसई पर 21 अगस्त 2025 को यह ₹889.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 7 ही महीने में यह 68.18% फिसलकर 16 मार्च 2026 को ₹283.05 के भाव पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर पर शेयर संभले और अब तक 30.91% रिकवर हो चुके हैं लेकिन एक साल के हाई से अब भी यह 53.94% नीचे है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पेट्रोल में एथेनॉल के बाद अब डीजल में Isobutanol ब्लेंडिंग ट्रायल शुरू, सामने आई ये जानकारी

पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग से E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद अब सरकार डीजल को लेकर भी एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत अब बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में अगला बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना बना रही है, ताकि विदेशों से तेल आयात पर देश की निर्भरता कम हो सके।

अब डीजल से Isobutanol Fuel बनाने जा रही सरकार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता। इसलिए इथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल बनाने पर काम किया जा रहा है, जिसे डीजल के साथ मिलाकर बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि आइसोब्यूटेनॉल भविष्य में डीजल का अच्छा विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। यह कदम देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और प्रदूषण कम करने वाले स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सरकार कर रही तैयारी 

नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल से दो जनरेटर सफलतापूर्वक चलाकर देखे हैं। इससे यह साबित हुआ है कि ऐसे इंजन बनाए जा सकते हैं, जो पूरी तरह इन ईंधनों पर काम करें। आइसोब्यूटेनॉल को नई पीढ़ी का बेहतर बायोफ्यूल माना जा रहा है। इसमें सामान्य बायोफ्यूल की तुलना में अधिक ऊर्जा होती है, यह इंजन के साथ बेहतर तरीके से काम करता है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। अधिकारियों का कहना है कि इसके इस्तेमाल से भारत का कच्चे तेल का आयात और घटेगा, साथ ही देश में बनने वाले बायोफ्यूल की मांग भी बढ़ेगी।

 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकार के E20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का समर्थन किया था। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों को भी खारिज किया था।

मंत्रालय ने साफ कहा कि इथेनॉल के इस्तेमाल से पानी की भारी कमी नहीं होती, न ही इससे वाहनों के इंजन खराब होते हैं। साथ ही, इससे गाड़ी की वारंटी या बीमा भी प्रभावित नहीं होता और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात भी सही नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, यह योजना वैज्ञानिक शोध, सुरक्षा मानकों और दुनिया के कई देशों के अनुभव के आधार पर तैयार की गई है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पहले, दिसंबर 2025 में ही हासिल कर लिया था। सरकार का कहना है कि इस योजना से देश ने 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा कच्चे तेल का आयात और कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है, वहीं किसानों की आय बढ़ाने में भी इस योजना ने अहम भूमिका निभाई है।

Amazon Prime Day 2026 Luggage Deals: ट्रॉली बैग खरीदने का सही मौका, बड़े ब्रांड्स पर 82% तक की छूट

ऑनलाइन सेल के दौरान ट्रॉली बैग या सूटकेस खरीदते समय सिर्फ सस्ता दाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। अलग-अलग कंपनियां अपने बैग की मजबूती, आसानी चलने वाले पहिए, मजबूत  बॉडी, ज्यादा जगह, हल्के वजन और सुरक्षा लॉक जैसी खूबियों का दावा करती हैं। इसलिए खरीदने से पहले सभी जरूरी बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

बैग खरीदते समय उसका आकार, पहियों की क्वालि, बाहरी मटेरियल, चेन की मजबूती, वारंटी और रिटर्न की सुविधा जरूर जांच लें। साथ ही यह भी देखें कि बैग डोमेस्टिक ट्रिप लिए बेहतर है या फॉरेन ट्रिप के लिए।

अगर आपकी यात्रा छोटी है या अक्सर ऑफिस के काम से सफर करते हैं, तो केबिन बैग अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, परिवार के साथ यात्रा करने वालों या बार-बार सफर करने वालों के लिए तीन बैग का सेट ज्यादा सुविधाजनक रहता है। मजबूत बाहरी बॉडी वाले बैग साफ रखना आसान होता है, जबकि कपड़े वाले बैग में सामान रखने के लिए ज्यादा लचीलापन मिलता है। इस तरह सही बैग चुनने के लिए कीमत के साथ-साथ उसकी क्वालिटी, स्टोरेज, वारंटी और मिलने वाली छूट का भी ध्यान रखें।

Safari Pentagon Pro 8 व्हील्स वाला 3 बैग का सेट:

Safari का यह लगेज सेट उन खरीदारों के लिए एक बढ़िया विकल्प है जिन्हें केबिन, मीडियम और बड़े ट्रॉली बैग एक साथ चाहिए।

  • यह क्यों सही है: इस लिस्ट में इसमें सबसे ज़्यादा डिस्काउंट मिल रहा है।
  • खूबियां: तीन बैग का सेट, 8 पहियों वाला मूवमेंट, हार्ड शेल, परिवार के इस्तेमाल के लिए अच्छा।
  • कमियां: रखने के लिए जगह चाहिए, रंग के विकल्प अलग-अलग हो सकते हैं।
  • इनके लिए सबसे अच्छा: परिवारों और लंबी यात्राओं के लिए।
  • VIP का यह सेट बहुत अच्छी सेल कीमत पर तीन हार्ड केस ट्रॉली बैग देता है।
  • यह क्यों सही है: यह खरीदारों को 81% की छूट पर पूरा लगेज सेट देता है।
  • खूबियां: हार्ड शेल, स्पिनर व्हील्स, कॉम्बिनेशन लॉक, 5 साल की वारंटी।
  • कमियां: कम रिव्यू, स्टॉक जल्दी बदल सकता है।
  • इनके लिए सबसे अच्छा: बजट का ध्यान रखने वाले यात्रियों के लिए।

Safari Thorium Neo 3 का सेट: बेहतरीन परफॉर्मेंस वाला ऑप्शन

  • Safari का यह सेट उन यात्रियों के लिए है जो ज़्यादा मजबूती और आसानी से चलने वाले बैग चाहते हैं।
  • यह क्यों सही है: इसमें पॉलीकार्बोनेट से बनी मज़बूत बनावट और 77% की ज़बरदस्त छूट मिलती है।
  • खूबियां: पॉलीकार्बोनेट शेल, स्पिनर व्हील्स, कॉम्बिनेशन लॉक, तीन साइज़।
  • कमियां: कुछ दूसरे सेट के मुकाबले कीमत ज़्यादा है, डिज़ाइन साधारण है।
  • इनके लिए सबसे अच्छा: अक्सर यात्रा करने वाले लोग।
  • VIP का यह लगेज सेट उन खरीदारों के लिए सही है जो ब्रांडेड हार्ड केस कॉम्बो चाहते हैं।
  • यह क्यों सही है: इसमें 76% की छूट के साथ तीन ट्रॉली बैग मिलते हैं।
  • खूबियां: हल्का वजन, हार्ड केस बॉडी, कॉम्बिनेशन लॉक, काम के साइज़।
  • कमियां: किफायती विकल्पों के मुकाबले कीमत ज़्यादा है, रंग के विकल्प सीमित हो सकते हैं।
  • इनके लिए सबसे अच्छा: परिवार के साथ पहले से तय की गई यात्रा।

Skybags Splash Set: सबसे स्टाइलिश ऑप्शन

  • यह प्रिंटेड Skybags सेट उन यात्रियों के लिए है जो ऐसा सामान चाहते हैं जो सबसे अलग दिखे।
  • यह क्यों बढ़िया है: इसमें स्टाइल, सामान रखने की जगह और 68% की छूट, सब कुछ एक ही कॉम्बो में मिलता है।
  • खूबियां: प्रिंटेड डिज़ाइन, 8 पहिए, कॉम्बिनेशन लॉक, 5 साल की वारंटी।
  • कमियां: प्रिंट शायद सबको पसंद न आए, हार्ड शेल पर खरोंच लग सकती है।
  • इनके लिए सबसे अच्छा: स्टाइल पसंद करने वाले यात्रियों के लिए।
  • यह बड़ा Skybags सॉफ्ट-साइडेड सूटकेस उन खरीदारों के लिए उपयोगी है जो कपड़े का सामान पसंद करते हैं।
  • यह क्यों बढ़िया है: यह किफायती है और अकेले या कभी-कभार यात्रा करने वालों के लिए सुविधाजनक है।
  • खूबियां: सॉफ्ट-साइडेड बॉडी, बड़ा साइज़, कम कीमत, आसानी से पैकिंग।
  • कमियां: झटकों से कम सुरक्षा, जल्दी गंदा हो सकता है।
  • इनके लिए सबसे अच्छा: अकेले यात्रा करने वालों के लिए।

American Tourister Ivy 2.0 3PC Set: सबसे अच्छा प्रीमियम ऑप्शन

  • अमेरिकन टूरिस्टर का यह सेट उन खरीदारों के लिए है जो एक जाने-माने लगेज ब्रांड का सामान चाहते हैं।
  • यह क्यों सही है: इसमें 65% की छूट के साथ हार्ड लगेज का पूरा सेट मिलता है।
  • खूबियां: भरोसेमंद ब्रांड, तीन साइज़, मज़बूत PP बॉडी, आसानी से चलने वाले पहिए।
  • कमियां: यहां सबसे ज़्यादा कीमत है, सफारी और VIP के मुकाबले छूट कम है।
  • इनके लिए सबसे अच्छा: प्रीमियम ब्रांड पसंद करने वाले खरीदार।

E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।

वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।

  • E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।

  • क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?

केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।

स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।

  • क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?

सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।

सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।

  • EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।

BaaS मॉडल के साथ Hyundai की Creta Electric लॉन्च, कीमत में आई भारी गिरावट

Hyundai Creta Electric: अगर आप इलेक्ट्रिक SUV खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, Hyundai Motor India Ltd ने Creta Electric के लिए ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ (BaaS) ओनरशिप मॉडल पेश किया है। इस कदम से इलेक्ट्रिक SUV की शुरुआती कीमत, बैटरी की लागत को छोड़कर, रेगुलर ₹18.03 लाख से घटकर ₹10.99 लाख (एक्स-शोरूम) हो गई है।

इस नई व्यवस्था के तहत, खरीदारों के पास गाड़ी अलग से खरीदने और बैटरी के लिए EMI प्लान (जो ₹3.9 प्रति किलोमीटर से शुरू होगा) चुनने का विकल्प होगा, जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की शुरुआती लागत कम हो जाएगी।

Hyundai का मकसद EV को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ऑटो कंपनियां भारत में ग्राहकों के सामने आने वाली सबसे बड़ी समस्या यानी ज्यादा शुरुआती कीमत को कम करने के लिए अलग-अलग ओनरशिप मॉडल अपना रही हैं। बैटरी की कीमत को गाड़ी की कीमत से अलग करने से शुरुआती खरीद लागत कम हो जाती है, जबकि गाड़ी की लिस्ट कीमत पर कोई असर नहीं पड़ता। इससे इलेक्ट्रिक वाहन ज्यादा किफायती और आसान हो जाते हैं।

फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लॉन्च के मौके पर Hyundai Motor India Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO तरुण गर्ग ने कहा, “हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक के लिए ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ (BaaS) की शुरुआत भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है।”

उन्होंने कहा, शुरुआती कीमत को काफी कम करके और फ्लेक्सिबल बैटरी रेंटल प्लान देकर देकर, हम ज्यादा ग्राहकों को भरोसे के साथ EV अपनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे वे हुंडई की भरोसेमंद तकनीक, सुरक्षा और इनोवेशन का लाभ उठा सकें।

क्रेटा इलेक्ट्रिक की कीमत अभी ₹18.02 लाख से ₹24.55 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है। यह दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आती है: एक 42 kWh यूनिट जिसकी ड्राइविंग रेंज 420 km बताई गई है, और दूसरी 51.4 kWh यूनिट जिसकी रेंज 510 km बताई गई है। यह SUV DC फास्ट चार्जिंग को भी सपोर्ट करती है, जिससे बैटरी को लगभग 39 मिनट में 10% से 80% तक तेजी से चार्ज किया जा सकता है।

इस मॉडल की अन्य खूबियों में व्हीकल-टू-लोड (V2L) क्षमता, हुंडई स्मार्टसेंस लेवल 2 ADAS, डिजिटल की, सिंगल ड्राइव (i-पेडल), एक्टिव एयर फ्लैप्स और 8 साल/1.6 लाख km की बैटरी वारंटी शामिल हैं।

Hyundai भारत में EV इकोसिस्टम को मजबूत करने की योजना बना रही है

अपने प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाने के साथ-साथ, हुंडई देश में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश कर रही है। फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अगले सात सालों में लगभग 600 फास्ट पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बना रही है। साथ ही, कंपनी ने पहले ही 183 जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है, जिसमें 214 DC चार्जर और 399 चार्जिंग पॉइंट शामिल हैं।

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Prime Day 2026: कल से शुरू हो रही मेगा सेल, जानिए कौन सा फोन है सबसे बेस्ट डील

अगर साल भर में किसी एक ऑनलाइन सेल का सबसे ज्यादा इंतजार किया जाता है, तो वह है Amazon Prime Day Sale। इस बार यह इवेंट और भी खास बन गया है क्योंकि Amazon अपने 10 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। 72 घंटे तक चलने वाली यह मेगा सेल ग्राहकों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है, जहां लाखों प्रोडक्ट्स पर भारी छूट देखने को मिलती है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी से लेकर होम अप्लायंसेज और गैजेट्स तक, हर कैटेगरी में आकर्षक डील्स मिल रही हैं।

इसके साथ ही बैंक ऑफर्स, एक्सचेंज बोनस और No Cost EMI जैसी सुविधाएं खरीदारी को और भी आसान और किफायती बना देती हैं। यही वजह है कि ये सेल हर साल ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए एक बड़ा अवसर बन जाती है।

Prime Day Sale 2026 कब है?

इस साल Amazon Prime Day Sale 4 जुलाई से 6 जुलाई 2026 तक चलेगी। सेल शुरू होने से पहले ही कई धमाकेदार डील्स सामने आ चुकी हैं, जिससे लोगों में खरीदारी को लेकर काफी उत्साह है।

खरीदने से पहले सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

आज हर ब्रांड अपने प्रोडक्ट को AI फीचर्स, कैमरा, बैटरी और डिजाइन के साथ “बेस्ट” बताता है। ऐसे में सिर्फ डिस्काउंट देखकर खरीदना सही नहीं होता। असली समझदारी ये है कि आप अपनी जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट चुनें और उसकी परफॉर्मेंस, अपडेट सपोर्ट और सर्विस पर ध्यान दें।

Quick Picks: सेल के टॉप प्रोडक्ट्स

इस बार कई कैटेगरी में बेहतरीन डील्स देखने को मिल रही हैं।

Best Overall: OnePlus 13

Budget Pick: iQOO Z10 Lite 5G

Premium Choice: Nothing Phone (3)

Smart Home: Amazon Echo Dot (5th Gen)

DIY Tool: Bosch GSB 600 Drill Kit

Study Device: Samsung Galaxy Tab S10 Lite

Nothing Phone (3)

Nothing Phone (3) इस सेल में एक खास आकर्षण है। ₹43,999 की कीमत पर मिलने वाला यह फोन Snapdragon 8s Gen 4, 50MP ट्रिपल कैमरा और 120Hz AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है। इसका यूनिक Glyph Design इसे भीड़ से अलग बनाता है।

iQOO Z10 Lite 5G

₹14,999 की कीमत में यह फोन 6000mAh बैटरी, 5G सपोर्ट और 50MP Sony AI कैमरा के साथ आता है। यह खासकर स्टूडेंट्स और बजट यूज़र्स के लिए एक मजबूत विकल्प है।

OnePlus 13

OnePlus 13 इस लिस्ट का सबसे पावरफुल फोन है। Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर और Hasselblad कैमरा सिस्टम इसे गेमिंग और हाई-परफॉर्मेंस यूज़ के लिए परफेक्ट बनाते हैं। यह ₹57,998 में उपलब्ध है।

Amazon Echo Dot (5th Gen)

₹3,999 में मिलने वाला यह स्मार्ट स्पीकर Alexa सपोर्ट, बेहतर साउंड और मोशन सेंसर के साथ आता है। यह घर को स्मार्ट बनाने का सबसे आसान तरीका है।

Bosch GSB 600 Drill Kit

यह 600W मोटर और 100 एक्सेसरीज के साथ आता है। घर की रिपेयर और DIY प्रोजेक्ट्स के लिए यह एक भरोसेमंद टूल है, जिसकी कीमत ₹5,099 है।

Samsung Galaxy Tab S10 Lite

10.9 इंच डिस्प्ले, S Pen सपोर्ट और 90Hz रिफ्रेश रेट के साथ यह टैबलेट पढ़ाई और प्रोफेशनल काम के लिए बेहतरीन विकल्प है। इसकी कीमत ₹39,499 है।

खरीदारी से पहले क्या ध्यान रखें?

किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी परफॉर्मेंस, बैटरी, कैमरा, सॉफ्टवेयर अपडेट और वारंटी जरूर देखें। सही चुनाव आपको लंबे समय तक बेहतर अनुभव देता है।

FAQs

Q1: सबसे बेस्ट फोन कौन सा है?

OnePlus 13 इस लिस्ट का सबसे ऑलराउंड विकल्प है।

Q2: सबसे सस्ता और वैल्यू फॉर मनी क्या है?

iQOO Z10 Lite 5G।

Q3: क्या Prime Day सही समय है खरीदारी के लिए?

हां, इस दौरान सबसे ज्यादा डिस्काउंट और ऑफर्स मिलते हैं।

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665KM रेंज, 5.8 सेकंड में 100kmph की रफ्तार! Tata Sierra EV हुई लॉन्च, जानें कीमत, फीचर्स और बैटरी की पूरी डिटेल

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने भारत में अपनी नई Tata Sierra EV लॉन्च कर दी है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये रखी गई है। इसके साथ ही टाटा की सबसे लोकप्रिय एसयूवी में से एक सिएरा अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक रूप में भारतीय बाजार में लौट आई है। नई Tata Sierra EV कुल पांच वेरिएंट में उपलब्ध है। इसमें दो बैटरी पैक का विकल्प मिलता है। कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) की ड्राइविंग रेंज देती है। इसके अलावा इसमें ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) का विकल्प और बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी भी दी गई है।

यह टाटा मोटर्स की सातवीं इलेक्ट्रिक कार है। इससे पहले कंपनी टियागो ईवी, टिगोर ईवी, पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी, कर्व ईवी और हैरियर ईवी को बाजार में उतार चुकी है। Tata Sierra EV की बुकिंग आज से शुरू हो गई है, जबकि इसकी डिलीवरी 15 जुलाई से शुरू होगी। ग्राहक चाहें तो 49,000 रुपये अतिरिक्त देकर 7.2 किलोवॉट एसी फास्ट चार्जर का विकल्प भी ले सकते हैं।

Tata Sierra EV: कीमत और वेरिएंट

Tata Sierra EV को कंपनी ने पांच वेरिएंट में लॉन्च किया है। इनमें प्योर, प्योर एस, एडवेंचर, एम्पावर्ड और एम्पावर्ड ए शामिल हैं। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये है। वहीं, इसका सबसे टॉप मॉडल एम्पावर्ड ए (QWD) 25.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में उपलब्ध है। यह वेरिएंट सबसे ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ आता है।

Tata Sierra EV: बैटरी, रेंज और चार्जिंग

Tata Sierra EV में दो बैटरी विकल्प दिए गए हैं। पहला 63 kWh और दूसरा 75 kWh बैटरी पैक है। कंपनी के मुताबिक, 75 kWh बैटरी एक बार फुल चार्ज होने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी की रेंज 565 किलोमीटर बताई गई है।

टाटा मोटर्स का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में 75 kWh बैटरी वाली सिएरा ईवी करीब 510 से 530 किलोमीटर तक चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी वाला मॉडल 440 से 460 किलोमीटर तक की वास्तविक ड्राइविंग रेंज देगा। इसके अलावा 75 kWh बैटरी के साथ आने वाला क्वाड-व्हील ड्राइव (QWD) मॉडल एक बार चार्ज करने पर 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने का दावा करता है।

चार्जिंग की बात करें तो इसमें 120 kW डीसी फास्ट चार्जिंग, 7.2 kW एसी चार्जिंग और 3.3 kW एसी चार्जिंग का विकल्प मिलता है। 120 kW डीसी फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी को सिर्फ 26 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज किया जा सकता है। वहीं, कंपनी का दावा है कि 15 मिनट की फास्ट चार्जिंग में यह इलेक्ट्रिक एसयूवी 250 किलोमीटर से ज्यादा की ड्राइविंग रेंज दे सकती है।

इसके अलावा Tata Sierra EV में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) और व्हीकल-टू-लोड (V2L) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं। इनकी मदद से जरूरत पड़ने पर कार से दूसरे इलेक्ट्रिक वाहन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी बिजली दी जा सकती है।

Tata Sierra EV: पावर और परफॉर्मेंस

Tata Sierra EV को कंपनी ने दो इलेक्ट्रिक मोटर विकल्पों के साथ पेश किया है। इसके रियर-व्हील ड्राइव (RWD) मॉडल में 175 kW की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 340 Nm का टॉर्क पैदा करती है। वहीं, इसके टॉप वेरिएंट में 103 kW की फ्रंट मोटर भी मिलती है। दोनों मोटरों के साथ यह एसयूवी ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) सिस्टम से लैस हो जाती है, जिससे इसकी पकड़ और प्रदर्शन बेहतर हो जाता है। टाटा मोटर्स का दावा है कि सिएरा ईवी महज 5.8 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी के अनुसार, यह अब तक भारत में लॉन्च हुई सबसे तेज इलेक्ट्रिक एसयूवी है।

Tata Sierra EV: डिजाइन और फीचर्स

Tata Sierra EV का डिजाइन काफी हद तक सिएरा के पेट्रोल-डीजल (आईसीई) मॉडल जैसा है, लेकिन इसे इलेक्ट्रिक एसयूवी का आधुनिक लुक देने के लिए कई खास बदलाव किए गए हैं। इसमें आगे की तरफ पारंपरिक ग्रिल की जगह बंद फ्रंट पैनल दिया गया है, जो आज की ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों की पहचान बन चुका है। इसके अलावा कार के फ्रंट बंपर को भी नया डिजाइन दिया गया है, जिससे इसका लुक और ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है। वहीं, पीछे की तरफ कार के डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं। इसका रियर लुक पेट्रोल-डीजल मॉडल जैसा ही रखा गया है, जिससे सिएरा की पहचान बरकरार रहती है।

Netweb Share Price: डेटा सेंटर कंपनी का स्टॉक 10% टूटा, जानिए किस वजह से आई इतनी बड़ी गिरावट

Netweb Share Price: डेटा सेंटर कंपनी Netweb Technologies India के शेयर सोमवार को कारोबार के दौरान 10% तक टूट गए। इसकी वजह कंपनी का फंड जुटाने की योजना रही।

शेयर कारोबार के दौरान 4,450 रुपये तक गिर गया। आखिर में यह 9.34% की गिरावट के साथ 4,482 रुपये पर बंद हुआ।

1 जुलाई को होगी बोर्ड बैठक

Netweb Technologies ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 1 जुलाई को बोर्ड की बैठक होगी। इस बैठक में एक या एक से ज्यादा फंड जुटाने के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। मंजूरी मिलने पर बोर्ड इन्हें आगे बढ़ा सकता है।

कैसे जुटाया जा सकता है फंड?

Netweb Technologies इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, कन्वर्टिबल या नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर, वारंट या दूसरे इक्विटी लिंक्ड सिक्योरिटीज जारी कर फंड जुटा सकती है। जरूरत के हिसाब से इनमें से एक या एक से ज्यादा विकल्प अपनाए जा सकते हैं।

कई रास्तों पर विचार

Netweb Technologies ने कहा कि फंड जुटाने के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), प्राइवेट प्लेसमेंट, फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO), राइट्स इश्यू या कानून के तहत उपलब्ध किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर जरूरत पड़ी, तो इस प्रस्ताव में ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल किया जा सकता है।

Netweb के शेयरों का हाल

Netweb का शेयर सोमवार 9.34% की गिरकर 4,482 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 6 महीने के दौरान इसमें 45.58% की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसने 142% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 25.52 हजार करोड़ रुपये है।

Netweb का बिजनेस

Netweb Technologies हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) और AI सर्वर बनाने वाली कंपनी है। यह डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस भी देती है। कंपनी सरकारी संस्थानों, रिसर्च संगठनों और बड़े एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए सुपरकंप्यूटर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार करती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इस शख्स ने अपार्टमेंट में पाल रखे थे 309 पाइथन सांप! वहीं बना रखा था ब्रिडिंग रूम और जमकर बच्चे पैदा कर रहे थे अजगर

जरा सोचिए जिस अपार्टमेंट में आम लोग अपने परिवार के साथ रहते हैं वहां कोई शख्स एक-दो नहीं बल्कि पूरे 309 पाइथन (अजगर) सांपों को पालकर रख ले! चीन के झेजियांग प्रांत में पुलिस ने एक ऐसे ही रोंगटे खड़े कर देने वाले अवैध रूप से चल रहे स्नेक-ब्रीडिंग सेंटर का भंडाफोड़ किया है। एक रिहायशी अपार्टमेंट के भीतर चल रहे इस अवैध कारोबार में अजगरों के रहने के लिए बकायदा ब्रीडिंग रूम बनाया गया था, जहां जमकर उनके बच्चे पैदा किए जा रहे थे। आइए जानते हैं कि इस पूरे सनसनीखेज मामले का खुलासा कैसे हुआ और पुलिस इस शातिर ब्रीडिंग सिंडिकेट तक कैसे पहुंची।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट और CCTV के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत मार्च 2024 में हुई थी। झेजियांग प्रांत में एक बुजुर्ग नागरिक ने पहाड़ की तलहटी के पास एक बहुत बड़ा अजगर देखा। यह सांप इस इलाके के लिए काफी असामान्य था और सबसे अजीब बात यह थी कि वह उस मौसम में सक्रिय था जब सांप आमतौर पर सुप्त अवस्था में रहते हैं। इसे देखकर स्थानीय लोगों और प्रशासन को तुरंत शक हो गया।

बिजली के बिल और सफेद चूहों ने पहुंचाया जेल

शुरुआती जांच में अधिकारियों को अंदेशा हुआ कि यह सांप किसी की कैद से भाग निकला है। इसके बाद उसके मालिक की तलाश शुरू हुई। हालांकि ब्रीडर को ट्रैक करना काफी मुश्किल था लेकिन तभी एक रेप्टाइल एक्सपर्ट ने पुलिस को एक अनोखा सुराग दिया। एक्सपर्ट ने बताया कि अजगरों को जीवित रहने और बच्चे पैदा करने के लिए सालभर गर्म और अत्यधिक नमी वाले माहौल की जरूरत होती है। फ्लैट में ऐसा वातावरण बनाए रखने के लिए भारी मात्रा में बिजली की खपत होगी। पुलिस ने तुरंत आसपास के इलाकों के बिजली बिलों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए। इससे गुओ नाम का एक संदिग्ध शख्स उनकी रडार पर आ गया।

सफेद चूहों के पार्सल ने जांच आगे बढ़ाई

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने देखा कि दी (Di) नाम का एक अन्य व्यक्ति लगातार गुओ के घर आ-जा रहा था। दी नियमित रूप से ऐसे पार्सल कलेक्ट कर रहा था जिनमें सफेद चूहे थे। ये पालतू सांपों का मुख्य भोजन होते हैं। संदिग्ध गुओ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सांपों को दिखाते हुए और उनकी प्राइवेट सेल का इशारा करते हुए कुछ पोस्ट भी शेयर की थीं। इन सब चीजों ने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया।

अपार्टमेंट में रेड पड़ी तो उड़ गए पुलिस के होश

जब पुलिस को दोनों संदिग्धों द्वारा दो पाइथन सांप बेचने के पुख्ता सबूत मिल गए तो उन्होंने कोर्ट से वारंट लेकर गुओ के अपार्टमेंट पर छापेमारी कर दी। फ्लैट के भीतर का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। अपार्टमेंट का लगभग हर कोना एक रेप्टाइल ब्रीडिंग फैसिलिटी में बदल चुका था। घर के कई कमरों में प्लास्टिक के कंटेनर्स एक के ऊपर एक करके ऊंचे स्टैक बनाकर रखे हुए थे और हर कंटेनर के अंदर एक-एक अजगर बंद था। आरोपी गुओ ने अपना सारा निजी सामान समेटकर खुद को सिर्फ एक बेडरूम तक सीमित कर लिया था जबकि बाकी के सारे बेडरूम और लिविंग रूम (हॉल) पूरी तरह से सांपों को पालने और उनके बच्चे पैदा करने के लिए समर्पित कर दिए थे। इस पूरी कार्रवाई के अंत तक पुलिस ने अपार्टमेंट से कुल 309 पाइथन सांपों को जब्त किया। बाद में इन सभी सांपों को स्थानीय चिड़ियाघर में शिफ्ट कर दिया गया।

खुद को अलग-अलग रंगों के सांप बनाने वाला क्रिएटर समझता था आरोपी

पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी गुओ ने कुबूल किया कि उसे सालों से सांपों का बेहद शौक और आकर्षण था। उसकी यह अजीबोगरीब आदत 2014 में शुरू हुई थी जब उसने शुरुआती तौर पर 4 अजगर खरीदे थे। इसके बाद उसने खुद ही धीरे-धीरे इंटरनेट या अन्य माध्यमों से सांपों की ब्रीडिंग (प्रजनन) कराने की तकनीक सीखी। वक्त के साथ वह अलग-अलग रंगों और पैटर्न वाले सांप पैदा करने में इतना माहिर हो गया कि वह खुद को एक क्रिएटर समझने लगा था। ऐसा क्रिएटर जो सांपों की विभिन्न नई वैरायटी विकसित कर सकता था।

80 सांप बेचे, तीसरा आरोपी भी गिरफ्तार

जांच में सामने आया है कि गुओ और दी ने मिलकर इस अवैध कारोबार के जरिए अब तक करीब 80 पाइथन सांप बाजार में बेचे थे। इस मामले की कड़ियां जब आगे जुड़ीं तो पुलिस इस सिंडिकेट के तीसरे आरोपी तक पहुंच गई। इसका नाम जो डेंग निकला जो एक दुकान मालिक है। डेंग ने ही लगभग एक दशक पहले गुओ को उसके शुरुआती सांप सप्लाई किए थे। पुलिस ने जब डेंग के घर पर भी तलाशी ली तो वहां से भी 47 पाइथन सांप बरामद हुए। चीनी अथॉरिटीज अब इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही हैं।