Kailash Mansarovar Yatra Advisory: कैलाश मानसरोवर यात्रा की बना रहे हैं योजना? पहले पढ़ लें ये जरूरी एडवाइजरी, नेपाल में फंसे कई भारतीय यात्री

Kailash Mansarovar Yatra Advisory: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अहम एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि हाल के दिनों में नेपाल में कई भारतीय श्रद्धालु आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में फंस गए हैं। ऐसे मामलों में मंत्रालय को लगातार सहायता के अनुरोध मिल रहे हैं। जांच में सामने आया है कि ये यात्री निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा पर निकले थे। लेकिन उनके पास चीन में एंट्री के लिए जरूरी परमिट और वीजा उपलब्ध नहीं थे। इसके कारण वे नेपाल से आगे की यात्रा नहीं कर सके।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालु भारत से यात्रा तभी शुरू करें, जब उनके पास चीन में एंट्री के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज जैसे एंट्री परमिट और वीजा इत्यादि पूरी तरह स्वीकृत और उपलब्ध हों। केवल इस उम्मीद में यात्रा शुरू करना कि आगे चलकर परमिट या वीजा मिल जाएगा, यात्रियों के फंसने का कारण बन सकता है। मंत्रालय ने कहा कि केवल इस उम्मीद में यात्रा शुरू करना कि आगे चलकर परमिट या वीजा मिल जाएगा, यात्रियों के नेपाल या अन्य स्थानों पर फंसने की आशंका बढ़ा देता है।

अधिकृत टूर ऑपरेटर से ही करें यात्रा

विदेश मंत्रालय (MEA) ने यात्रियों को यह भी सलाह दी है कि वे कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए किसी भी निजी एजेंसी का चयन करने से पहले उसकी वैधता और सरकारी मान्यता की जांच अवश्य करें। केवल रजिस्टर्ड और अधिकृत टूर ऑपरेटर के माध्यम से ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

काठमांडू में फंसे 52 भारतीय श्रद्धालु

यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है, जब कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 52 भारतीय श्रद्धालु नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंस गए हैं। जानकारी के अनुसार, उनके पास चीन में एंट्री के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण उनकी यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से MEA ने यात्रियों से अपील की है कि वे सभी आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्राप्त किए बिना भारत से यात्रा शुरू न करें। अधूरे दस्तावेजों या बाद में अनुमति मिलने की उम्मीद में यात्रा शुरू करने से नेपाल में फंसने की आशंका बढ़ जाती है।

इस मामले को सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उठाया। उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश मंत्रालय, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और चीन स्थित भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप कर श्रद्धालुओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और उनकी यात्रा सुचारु रूप से आगे बढ़ाने की अपील की है।

विदेश मंत्रालय ने तीर्थयात्रियों को यह भी जर देकर सलाह दी है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने से पहले वे यह पक्का कर लें कि उनका टूर ऑपरेटर ठीक से रजिस्टर्ड और अधिकृत है या नहीं…। MEA ने बताया कि बिना चीन के आवश्यक वीज़ा और एंट्री परमिट के यात्रा शुरू करने वाले कई भारतीय नागरिक नेपाल में फंस गए हैं और सहायता मांग रहे हैं।

20 जून से फिर शुरू हुई है यात्रा

भारत और चीन के बीच लंबे अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू हुई है। 20 जून 2026 को पहला भारतीय जत्था नाथू ला दर्रे के रास्ते चीन में प्रवेश कर चुका है। इसके बाद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में विदेश मंत्रालय की यह एडवाइजरी यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

श्रद्धालुओं के लिए MEA की सलाह

भारत से रवाना होने से पहले चीन का वैध वीजा और एंट्री परमिट प्राप्त कर लें।

सभी आवश्यक ट्रैवल डॉक्यूमेंट मिलने के बाद ही यात्रा शुरू करें।

केवल अधिकृत और रजिसटर्ड टूर ऑपरेटर के माध्यम से ही बुकिंग कराएं।

अधूरे दस्तावेजों के साथ यात्रा शुरू करने से नेपाल या अन्य स्थानों पर फंसने की स्थिति बन सकती है।

20 किलोग्राम सामान ले जाने की अनुमति

उत्तराखंड के पिथौरगढ़ जिला प्रशासन ने मंगलवार को बताया कि इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों को चीन के क्षेत्र में प्रति व्यक्ति 20 किलोग्राम तक आवश्यक सामान ले जाने की अनुमति होगी। भारतीय क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के महाप्रबंधक मनीष कुमार सिंह ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने प्रत्येक जत्थे के लिए पांच किलोग्राम अतिरिक्त सामूहिक भार ले जाने की भी अनुमति प्रदान की है।

निगम के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक जत्थे के साथ पांच सदस्यीय सहयोगी दल रहेगा, जिसमें एक चिकित्सक और चार रसोइए शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि अगर यात्रा के दौरान साथ चल रहे चिकित्सक किसी तीर्थयात्री को स्वास्थ्य या अन्य कारणों से आगे यात्रा न करने की सलाह देते हैं, तो संबंधित तीर्थयात्री को उसी पड़ाव से वापस लौटना होगा।

उत्तराखड रूट से 30 जून को रवाना होगा पहला जत्था

अधिकारियों के अनुसार, तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 30 जून को नई दिल्ली से रवाना होगा और पांच जुलाई को धारचूला स्थित आधार शिविर पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि तिब्बत में प्रवास के दौरान तीर्थयात्रियों को 20 विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं साथ ले जाने की भी अनुमति होगी। निगम ने बताया कि विदेश मंत्रालय की चार सदस्यीय टीम के जल्द ही पिथौरागढ़ पहुंचकर भारतीय क्षेत्र में स्थापित ट्रांजिट शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण करने की संभावना है।

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धारचूला स्थित निगम के आधार शिविर के प्रभारी धन सिंह ने बताया कि तीर्थयात्रियों के निजी सामान में आमतौर पर चावल, दाल, मसाले और अन्य सूखा राशन शामिल होता है। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद की ‘कैलाश मानसरोवर विकास समिति’ तीर्थयात्रियों को यह सामग्री उपलब्ध कराती है क्योंकि चीन के क्षेत्र में प्रवेश के बाद उन्हें भारतीय भोजन आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता।

Sawan 2026: अभी से कर लें नोट भगवान शिव का प्रिय माह सावन इस दिन से होगा शुरू, इस माह में आएंगे सावन के 4 सोमवार

Sawan 2026: हिंदी कैलेंडर का पांचवा महीना सावन का होता है। मानसून जब पीक पर पहुंचता है, तब इस मौसम की शुरुआत होती है। चारों तरफ हरियाली और बोल बम के नारों की गूंज होती है। हिंदू धर्म में सावन का महीना आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से बहुत अहम माना जाता है। माना जाता है कि यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में माता पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

सावन महीने के सोमवार विशेष महत्व रखते हैं। यूं तो पूरा सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन सोमवार के दिन शिवालयों में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। भोलेनाथ की भक्ति में लीन श्रद्धालु पूरे माह व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा जैसी धार्मिक गतिविधियां आयोजित करते हैं। ऐसे में सावन 2026 का इंतजार कर रहे शिव भक्तों के लिए अच्छी खबर है कि अब ये पवित्र महीना बहुत दूर नहीं है। आइए जानें ये कब से शुरू होगा और इसमें कितने सोमवार आएंगे।

कब से शुरू होगा सावन 2026

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को होगा। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव की सच्चे मन से की गई भक्ति भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

4 सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत

सावन 2026 में चार सोमवार और चार मंगला गौरी व्रत पड़ रहे हैं, जिससे भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के कई विशेष अवसर मिलेंगे। यदि आप भी सावन में व्रत, पूजा या जलाभिषेक करने की योजना बना रहे हैं, तो अभी से इसकी तैयारी शुरू कर सकते हैं।

सावन 2026 के 4 सोमवार

सावन के दौरान सोमवार का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र तथा धतूरा अर्पित करने से विशेष फल प्राप्त होता है। साल 2026 में सावन के कुल चार सोमवार पड़ेंगे।

पहला सावन सोमवार : 3 अगस्त

दूसरा सावन सोमवार : 10 अगस्त

तीसरा सावन सोमवार : 17 अगस्त

चौथा सावन सोमवार : 24 अगस्त

4 मंगला गौरी व्रत

महिलाओं के लिए सावन में मंगला गौरी व्रत का भी विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है और विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए इसे रखती हैं। अविवाहित कन्याएं यह व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से करती हैं। सावन 2026 में मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त और 25 अगस्त को रखा जाएगा। इन दिनों माता गौरी की पूजा का विशेष विधान रहेगा।

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राम मंदिर चंदा केस: FIR के बाद सभी 8 आरोपी गिरफ्तार, रामशंकर यादव से अनुकल्प मिश्रा तक ये पूरी लिस्ट देखिए

Ram Temple Donation Case: उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चंदे की कथित हेराफेरी के मामले में सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी अयोध्या मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए चंदे के कथित दुरुपयोग के संबंध में पहली FIR दर्ज करने के कुछ ही घंटों बाद हुई। सूत्रों के अनुसार, सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज और अन्य कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी की जा रही हैं।

न्यूज 18 के मुताबिक,  यह मामला स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में की गई सिफारिश और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज किया गया था।

FIR में इन लोगों के नाम आरोपी के रूप में दर्ज

FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा, एफआईआर में कुछ अज्ञात लोगों का भी जिक्र किया गया है।

बता दें कि इन सभी पर लगे आरोपों में चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी का सामान लेना या छिपाना, आपराधिक साजिश और किसी साझा इरादे को पूरा करने के लिए किए गए काम से जुड़े अपराध शामिल हैं।

इस मामले में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(1)(a) के तहत भी केस दर्ज किया गया है।

यह FIR SIT की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई थी। गौतलब है कि SIT का गठन उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए किया था।

ट्रस्टी कृष्ण मोहन कौन हैं?

कृष्ण मोहन को 16 सितंबर 2025 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया गया था। उन्हें यह जिम्मेदारी फरवरी 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद दी गई थी।

उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी (MSc) की पढ़ाई की है। उन्होंने करीब छह साल तक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम किया। इसके बाद वह भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) में शामिल हुए, जहां उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला।

साल 2012 में इंडियन फॉरेस्ट सर्विस से रिटायर होने के बाद, वे समाज सेवा के कामों में सक्रिय हो गए। ट्रस्ट के सदस्यों के बीच कई महीनों तक चर्चा के बाद, कामेश्वर चौपाल के निधन से खाली हुई जगह को भरने के लिए उन्हें सर्वसम्मति से चुना गया।

विवाद कैसे बढ़ा

राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया।

यह विवाद तब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का जिक्र किया जिनमें आरोप लगाया गया था कि मंदिर में दिए गए दान के करोड़ों रुपये गायब हैं, और उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया।

उस समय लगे इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रमुख आलोक कुमार ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस विवाद का इस्तेमाल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कर रहे हैं।

छोटी मछलियों को सजा मिलेगी: अखिलेश यादव

गुरुवार को FIR दर्ज होने के बाद, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर एक पोस्ट में जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार के तहत, “छोटी मछलियों को सजा मिलेगी जबकि बड़ी मछलियां बच जाएंगी।”

अखिलेश यादव ने आगे दावा किया कि लोग कह रहे हैं कि SIT प्रक्रिया का इस्तेमाल FIR दर्ज होने से पहले सबूत मिटाने और यह तय करने के लिए किया गया हो सकता है कि “किस बड़ी मछली को बचाना है और किसे फंसाना है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि SIT रिपोर्ट पहले ही तैयार कर ली गई थी और जांच पहले से तय नतीजों के हिसाब से की गई थी।

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खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए PM मोदी को न्योता:4 जुलाई से शुरू होंगे समारोह; 2 करोड़ लोग जनाजे में शामिल हो सकते हैं

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता भेजा है। अयातुल्ला खामेनेई की 28 फरवरी को इजराइल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद 4 मार्च को उनका अंतिम संस्कार होना था लेकिन जंग की वजह से इसे टाल दिया गया था। अब इसकी शुरुआत 4 जुलाई से होगी। उनके शव को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफन किया जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि तेहरान, कुम और मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। मोदी का ईरान जाने पर सस्पेंस ईरान ने अंतिम संस्कार समारोह के लिए दुनिया के कई देशों को निमंत्रण भेजा है। खास तौर पर पड़ोसी और मित्र देशों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं। भारत सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में भारत की ओर से कौन इस समारोह में शामिल होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की मई 2024 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद भी भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था। उस समय भारत सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए तेहरान पहुंचे थे और अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुए थे। खामेनेई मशहद में क्यों दफनाए जाएंगे खामेनेई का मुख्य अंतिम संस्कार समारोह तेहरान में होगा, जो कम से कम 24 घंटे तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां इमाम रजा के दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा। मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है और शिया मुसलमानों का सबसे प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। शहर की सबसे बड़ी पहचान इमाम रजा की दरगाह है। इमाम रजा शिया मुस्लिम परंपरा के आठवें इमाम थे। उनका दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खामेनेई को मशहद में दफनाने से उनका नाम शिया इस्लाम के सबसे सम्मानित धार्मिक नेताओं की श्रेणी में और मजबूती से जुड़ जाएगा। IRGC के पास खामेनेई के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम संस्कार में हुई देरी इस्लामी परंपरा के लिहाज से असामान्य मानी जा रही है। आमतौर पर इस्लाम में किसी व्यक्ति को मौत के एक-दो दिन के भीतर दफना दिया जाता है। हालांकि ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, भारी भीड़ की उम्मीद और युद्ध के हालात के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई। तेहरान नगर निगम में सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों के उपप्रमुख मोहम्मद अली तवक्कोलीजादेह ने अंतिम संस्कार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने सरकारी टेलीविजन से कहा कि खामेनेई के लिए तीन दिन का सार्वजनिक जनाजा आयोजित किया जाएगा। अधिकारी ने यह नहीं बताया कि जनाजा कब होगा, लेकिन कहा कि यह इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत में हो सकता है, जो 21 जून के आसपास में पड़ता है। पूरे कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी IRGC के पास है। खोमैनी के जनाजे में 1 करोड़ लोग जुटे थे ईरान में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के 1989 के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। यह उस समय ईरान की कुल आबादी का लगभग छठा हिस्सा था। इस कार्यक्रम को आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है। इतनी भारी भीड़ उमड़ी थी कि भगदड़ मच गई थी। इसमें कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। इस बार अधिकारी इससे भी बड़ी भीड़ को संभालने और किसी हादसे से बचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन युद्ध के प्रभाव से उबर रहे देश में इतना बड़ा आयोजन कराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अमेरिका-इजराइल हमलों में खामेनेई की मौत हुई थी अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया था। इस दौरान तेहरान समेत कई रणनीतिक ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गईं। हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर और उनके कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था। खामेनेई बंकर में मौजूद थे, लेकिन लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में ईरानी सुरक्षा सूत्रों ने उनकी मौत की पुष्टि की। हमलों में खामेनेई के साथ ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी भी मारे गए थे। ———————–

Eetha Teaser: ‘ईथा’ फिल्म में श्रद्धा कपूर का अवतार देख फैंस हुए दीवाने! बॉक्स ऑफिस पर यश की ‘टॉक्सिक’से होगी टक्कर

Eetha Teaser: बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी नई बायोपिक फिल्म ‘ईथा’ को लेकर चर्चा में है। ‘ईथा’ में एक्ट्रेस एक अलग और दमदार किरदार में नजर आने वाली हैं। फिल्म का पहला टीजर जारी कर दिया गया है, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। श्रद्धा इस फिल्म में मशहूर लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की भूमिका निभाती हुए नजर आ रही हैं। टीजर में उनका नया अंदाज और फिल्म की भव्य झलक दर्शकों को काफी पसंद आ रही है। फैंस बेसब्री से इसके ट्रेलर और फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। शानदार दृश्यों और बड़े स्तर पर बनी इस फिल्म ने रिलीज से पहले ही लोगों के बीच एक्साईटमेंट बढ़ा दी है।

सोशल मीडिया पर छाई श्रद्धा

फिल्म ईथा के टीजर में मशहूर लोक कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की मेहनत, संघर्ष और अपने काम के प्रति उनके जुनून को दिखाया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि वह कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहती हैं। बच्चे को जन्म देने की पीड़ा सहने के बाद भी उनका मंच पर लौटकर प्रस्तुति देना लोगों को इमोशनल कर रहा है। वहीं, श्रद्धा कपूर का पारंपरिक मराठी लुक भी दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है और सोशल मीडिया पर उनके इस नए अंदाज की खूब चर्चा हो रही है।

कब रिलीज होगी फिल्म

फिल्म ‘ईथा’ 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इसकी रिलीज के साथ ही अभिनेता यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोनअप्स’ भी बड़े पर्दे पर आने वाली है। ऐसे में दोनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस पर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। ईथा का टीजर सामने आने के बाद दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्साह बढ़ गया है। फिल्म ईथा में श्रद्धा कपूर के साथ रणदीप हुड्डा, अनंत जोशी और कई अन्य कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्माण दिनेश विजान की प्रोडक्शन कंपनी मैडॉक फिल्म्स के सहयोग से किया जा रहा है।

फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल ने तैयार किया है। श्रद्धा कपूर की पिछली फिल्म साल 2024 में रिलीज हुई स्त्री 2 थी। अब दर्शकों को उनकी नई फिल्म ईथा का बेसब्री से इंतजार है।

फैंस ने किया कमेंट

एक फैन ने कमेंट किया, “श्रद्धा कपूर दो साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं और टीजर देखकर लग रहा है कि इंतजार पूरी तरह सफल रहा। विठाबाई नारायणगांवकर के किरदार में उनका पहला लुक बेहद शानदार है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “2026 में अब तक देखा गया यह सबसे बेहतरीन टीजर है।” वहीं एक और यूजर ने कहा, “टीजर काफी भव्य और प्रभावशाली नजर आ रहा है। श्रद्धा कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस कमाल की है और उनके डांस सीक्वेंस देखने लायक हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “अब तक सामने आई झलकियों में ईथा में श्रद्धा कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस बेहद दमदार नजर आ रही है। मुझे लगता है कि टॉक्सिक की रिलीज फिर आगे बढ़ सकती है।” एक और यूजर ने लिखा, “श्रद्धा कपूर ईथा के साथ शानदार वापसी करती दिख रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या टॉक्सिक को उसी समय रिलीज करना सही फैसला होगा?”

Rani Durgavati: रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस: इतिहास की वीर नायिका को नमन

An image featuring Rani Durgavati, the brave ruler of Gondwana and a symbol of self-respect and patriotism

Gondwana Queen Rani Durgavati: भारतीय इतिहास में अनेक वीर योद्धाओं और वीरांगनाओं ने अपने साहस, त्याग और देशभक्ति से अमिट छाप छोड़ी है। ऐसी ही महान वीरांगनाओं में रानी दुर्गावती का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने न केवल अपने राज्य की रक्षा के लिए शत्रुओं का डटकर सामना किया, बल्कि मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का भी बलिदान दे दिया।ALSO READ: Sanjay Gandhi: पुण्यतिथि विशेष: संजय गांधी कौन थे, जानें राजनीति में उनका योगदान

रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस हमें उनके अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रप्रेम की याद दिलाता है। आज भी उनका जीवन देश की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

 

आइए, उनके इस शौर्य दिवस पर जानते हैं मध्य प्रदेश के गोंडवाना साम्राज्य की इस महान रानी की वीरता और बलिदान की अमर गाथा…

 

चंदेल राजवंश की बेटी, गोंडवाना की रानी

रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल के यहां हुआ था। उनका विवाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ था। विवाह के कुछ वर्षों बाद ही राजा दलपत शाह का असमय निधन हो गया। उस समय उनका बेटा नारायण केवल 5 वर्ष का था। ऐसे कठिन समय में रानी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने छोटे बेटे को सिंहासन पर बैठाकर खुद गोंडवाना की कमान संभाली और जबलपुर को अपना केंद्र बनाकर शासन किया।

 

एक कुशल और न्यायप्रिय शासिका

रानी दुर्गावती केवल युद्ध कौशल में ही माहिर नहीं थीं, बल्कि एक बेहद दूरदर्शी शासिका भी थीं। उनके शासनकाल में गोंडवाना बेहद समृद्धशाली बना:

 

* धार्मिक सहिष्णुता: वे हिंदू धर्म की अनुयायी थीं, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में जैन और अन्य संप्रदायों के विकास के लिए भी खुलकर दान दिया।

 

* जल संरक्षण: उन्होंने अपने राज्य में पानी की कमी को दूर करने के लिए कई तालाबों का निर्माण कराया, जिनमें जबलपुर का प्रसिद्ध 'चेरीताल' और 'आधारताल' आज भी उनके नाम की गवाही देते हैं।

 

* मजबूत सेना: उन्होंने एक विशाल और अनुशासित सेना तैयार की, जिसमें 20,000 से अधिक घुड़सवार, हजारों हाथी और बड़ी संख्या में पैदल सैनिक शामिल थे।ALSO READ: रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

 

अकबर की सेना से ऐतिहासिक टकराव

गोंडवाना की समृद्धि और एक महिला के बढ़ते प्रभाव को देखकर मुगल सम्राट अकबर विचलित हो उठा। उसने अपने सिपहसालार आसफ खान को एक विशाल सेना के साथ गोंडवाना पर आक्रमण करने के लिए भेजा। मुगल सेना आधुनिक हथियारों और तोपों से लैस थी, जबकि रानी की सेना संख्या में कम थी। इसके बावजूद रानी दुर्गावती ने खुद युद्ध का नेतृत्व किया।
 

 

1. नरई नाला का मोर्चा

रानी ने जबलपुर के पास 'नरई नाला' नामक स्थान पर मोर्चा संभाला, जो एक तरफ पहाड़ों और दूसरी तरफ उफनती नदी से घिरा था। इस रणनीतिक बढ़त के कारण मुगलों को भारी नुकसान हुआ और वे पीछे हटने पर मजबूर हो गए।

 

2. रात के हमले का प्रस्ताव

रानी मुगलों को संभलने का मौका नहीं देना चाहती थीं। उन्होंने रात में ही मुगल कैंप पर हमला करने की योजना बनाई, लेकिन उनके सेनापतियों ने रात में युद्ध करने से मना कर दिया। यह देरी भारी पड़ी और अगली सुबह आसफ खान ने बड़ी तोपें मंगवा लीं।

 

3 अंतिम सांस तक संघर्ष (24 जून 1564)

अगले दिन भयंकर युद्ध हुआ। रानी का बेटा वीर नारायण घायल हो गया, लेकिन रानी लड़ती रहीं। तभी एक तीर रानी की आंख में और दूसरा उनकी गर्दन में आकर लगा। रानी ने होश खोने से पहले स्थिति को भांप लिया।

 

4 बलिदान (अमर शहादत)

जब रानी को लगा कि वे चारों तरफ से घिर चुकी हैं और बंदी बना ली जाएंगी, तो उन्होंने अपने वफादार सैनिक से खुद पर तलवार चलाने को कहा। सैनिक के मना करने पर रानी ने अपनी ही कटार अपनी छाती में घोंपकर मातृभूमि के लिए प्राण त्याग दिए।

 

मुगल सेना से घिर जाने पर अपनी अंतिम सांसों के दौरान रानी दुर्गावती के शब्द थे- 'जब तक जीवित हूं, कलंक का टीका नहीं लगाऊंगी। अपमानजनक जीवन जीने से अच्छा है गरिमा के साथ मर जाना।'

 

5. विरासत और सम्मान

रानी दुर्गावती का यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय महिलाओं के आत्मसम्मान और वीरता का प्रतीक बन गया। जबलपुर के पास स्थित 'बरेला' में आज भी उनकी समाधि बनी हुई है, जहां लोग श्रद्धासुमन अर्पित करने जाते हैं।

 

उनके सम्मान में मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय' किया। देश उनके बलिदान दिवस पर इस महान वीरांगना के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को शत-शत नमन करता है।

 

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Ram Mandir Daan Chori Case: एसआईटी ने सरकार को सौंपी राम मंदिर में कथित चंदा चोरी की रिपोर्ट, जानें- बड़ी बातें

Ayodhya Ram temple donation case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंगलवार (23 जून) को यूपी सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी। लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को यह शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच अभी भी चल रही है। मामले में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

अयोध्या राम मंदिर में मिले चंदे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। SIT द्वारा शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद, पंत ने PTI वीडियो को बताया कि SIT अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की कोशिश कर रही है। पंत ने कहा, “अब तक सामने आई जानकारी और हमारे पास मौजूद तथ्यों के आधार पर हमने आज पहली रिपोर्ट सौंपी है। यह केवल शुरुआती रिपोर्ट है और अंतिम रिपोर्ट कुछ समय बाद सौंपी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट गोपनीय है। उन्हें इस चरण में मीडिया के साथ जांच के नतीजों का विवरण साझा करने की अनुमति नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या टीम आगे की जांच के लिए अयोध्या लौटेगी क्योंकि सौंपी गई रिपोर्ट केवल शुरुआती थी? इस पर पंत ने PTI से कहा, “बिल्कुल, हम जरूरत के हिसाब से ऐसा करेंगे।”

अखिलेश यादव ने उठाया था मामला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें दावा किया गया था कि राम मंदिर में दिए गए चंदे में से करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। यादव ने SIT जांच पर रोज़ाना जानकारी देने की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि एजेंसी पर जनता का भरोसा कम हो गया है, जिसे उन्होंने BJP सरकार के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का नतीजा बताया था।

मंदिर से जुड़े लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का निर्देश

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है।

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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर एक साथ बनेंगे 3 शुभ योग, जानें सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और विधि

Nirjala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे अगर इस एक एकादशी का व्रत कर लें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था।

निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले भक्त अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करते हैं। जैसा कि इस एकादशी का नाम है, यह व्रत निर्जला किया जाता है और इसकी शुरुआत एकादशी तिथि पर सुबह व्रत का संकल्प के साथ होती है। इसके बाद पूरे दिन व्रत करते हैं, रात्रि जागरण करने के बाद अगले दिन हरि वासर के बाद व्रत का पारण करते हैं और उसके बाद अन्न-जल ग्रहण करते हैं। जून के महीने में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब यह व्रत किया जाता है। इसलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस साल यह व्रत 25 जून को किया जाएगा। इस दिन गुरुवार है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, साथ ही 3 अन्य शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है।

निर्जला एकादशी व्रत की तारीख

एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर 25 जून की रात 8:10 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 25 जून को की जाएगी। संयोग से यह व्रत बृहस्पतिवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

एकादशी व्रत पारण

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 26 जून 2026 को अपने व्रत का पारण करेंगे। पारण करने के लिए शुभ समय 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, निर्धारित पारणा अवधि के अंदर ही उपवास तोड़ना शुभ मान जाता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे ये तीन शुभ योग

रवि योग : 25 जून सुबह 5:25 से शाम 4:29 बजे तक।

शिव योग : 24 जून सुबह 10:24 से 25 जून सुबह 10:54 बजे तक।

सिद्ध योग : 25 जून सुबह 10:55 से 26 जून सुबह 11:39 बजे तक।

निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें।
  • इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन भक्ति भाव से कथा सुनना और भगवान का कीर्तन करना चाहिए।
  • इस दिन व्रती को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
  • इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है।

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT का सख्त आदेश…जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ें ट्रस्ट के लोग

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे विवाद की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े अधिकारियों को फिलहाल अयोध्या छोड़कर कहीं न जाने के निर्देश दिए हैं। मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांचकर्ताओं को इन चीजों के डॉक्यूमेंटेशन में कई गड़बड़ियां मिली हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है।

सोना-चांदी और हीरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी

तीन सदस्यीय एसआईटी ने रविवार को लखनऊ लौटने से पहले यह निर्देश जारी किया। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान सबसे अहम मुद्दों में से एक भगवान राम को भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरों और अन्य कीमती रत्नों के रिकॉर्ड से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन चढ़ावों का सही तरीके से हिसाब-किताब रखा गया था या नहीं।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे के रूप में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड और हिसाब-किताब में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी इन कीमती वस्तुओं की सूची, उनके रखरखाव और लेखा-जोखा से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। सूत्रों का यह भी दावा है कि जनवरी और फरवरी 2025 में आयोजित महाकुंभ के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हो सकती हैं। उस समय मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी और रोजाना लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे थे।

 CMO को रोज भेजी जा रही रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक, दो महीने से अधिक समय तक प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर आए। इस दौरान दान-पात्र कुछ ही घंटों में नोटों से भर जाते थे। इसी वजह से दान में मिली राशि और अन्य चढ़ावों की निगरानी तथा उनके हिसाब-किताब की प्रक्रिया एसआईटी जांच का प्रमुख विषय बन गई है।

मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ के आधार पर तैयार की गई दैनिक जांच रिपोर्ट को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया है। इन रिपोर्टों को अंतिम रूप देने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को भेज रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच केवल कथित फंड गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मंदिर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट ने जिन जमीनों की खरीद की, उनकी कीमत बाजार दरों की तुलना में कहीं अधिक तो नहीं थी। इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

बढ़ा विवाद

समाजवादी पार्टी  सहित कई राजनीतिक दलों ने इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया था। अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। सरकार ने इस टीम को आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

Rudraprayag: 24 घंटे बाद भी नहीं निकला समाधान, नगरासू गुरुद्वारा पर निहंग सिखों का कब्जा…कर्णप्रयाग में इंटरनेट बंद

बीते मंगलवार को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय युवकों के बीच हुए विवाद के बाद तनाव लगातार बना हुआ है। जानकारी के अनुसार शनिवार देर शाम पंजाब से आये कुछ निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग से आगे, रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारा पर कब्जा कर लिया है और वहां एक सेवादार को बंधक बना लिया है। वहीं नगरासू स्थित गुरुद्वारे में चल रहे निहंग सिख विवाद का 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया है। गुरुद्वारे की छत पर चढ़े निहंग सिख अब भी अपने रुख पर कायम हैं, जिससे प्रशासन, गुरुद्वारा प्रबंधन और स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

अलर्ट मोड में प्रशासन 

जानकारी के अनुसार, छत पर डटे निहंग सिख 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई घटना के बाद जेल भेजे गए तीन निहंग सिखों की रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं। इस बीच क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को रोक दिया गया है और ITBP के साथ ही PAC की टुकड़ी तैनात की गई है। वहीं कर्णप्रयाग, जहां झगड़े की शुरुआत हुई थी। वहां प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है, जो एक जगह पर लोगों के इक्कठा होने को प्रतिबंधित करती है।

लग रहे हैं कई आरोप

वहीं मामले को लेकर गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि छत पर चढ़े लोग वास्तविक और मान्यता प्राप्त निहंग सिख नहीं हैं। उनका कहना है क‍ि असली निहंग सिख किसी पंजीकृत संगठन अथवा समिति से जुड़े होते हैं, जबकि यहां मौजूद लोगों का किसी अधिकृत संस्था से संबंध नहीं है।

बढा था विवाद

उत्तराखंड में हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर एक मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। पार्किंग को लेकर शुरू हुई कहासुनी निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच तलवारबाजी तक पहुंच गई, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। इस घटना में एक तीर्थयात्री समेत कुल पांच लोग घायल हो गए। घायलों में से एक की हालत गंभीर होने पर उसे एयरलिफ्ट कर देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों की पहचान कर्णप्रयाग निवासी प्रकाश रावत (26), सुदर्शन कंडारी (55), गजपाल सिंह (50) और हरेंद्र सिंह (42) के रूप में हुई है। वहीं पांचवां घायल मनप्रीत सिंह (21) है, जो पंजाब के मोहाली का रहने वाला है। सभी घायलों का इलाज चल रहा है। हेमकुंड साहिब यात्रा इस वर्ष 23 मई से शुरू हुई थी।

इस घटना के बाद स्थानीय जिलाधिकारी (डीएम) विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक (एसपी) हालात को सामान्य करने और तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संवेदनशील है, क्योंकि इसका असर पंजाब और उत्तराखंड के बीच संबंधों पर भी पड़ सकता है। वहीं, हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन एन.एस. बिंद्रा ने बुधवार को कहा कि कृपाण सिख धर्म में एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह कमजोर लोगों की रक्षा करने, अन्याय और उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों की मदद करने तथा धर्म के मार्ग पर चलने के सिख कर्तव्य का प्रतीक माना जाता है। एन.एस. बिंद्रा ने कहा कि मंगलवार को हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान सिखों को उनके धर्म के पालन और अभ्यास के हिस्से के रूप में कृपाण रखने का अधिकार देता है। हालांकि, हेमकुंड साहिब यात्रा पर आने वाले युवा श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे बिना किसी जरूरी कारण के तलवारें साथ न रखें।