Ram Mandir: राम मंदिर दान विवाद के बीच ट्रस्ट के इस बैठक पर टिकी सबकी नजर, जानें पूरा समीकरण

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र अयोध्या का राम मंदिर चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने देश की राजनीति और धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। आरोप हैं कि राम मंदिर के दानपात्र में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चंदे में गड़बड़ी हुई। अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों के बीच 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने जा रही है। इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के आगे के कामकाज और भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। क्योंकि ट्रस्ट की व्यवस्था ऐसी है कि कुछ स्थायी ट्रस्टियों के पास ही फैसले लेने का सबसे ज्यादा अधिकार होता है।

ट्रस्ट की शुरुआत कैसे हुई?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन फरवरी 2020 में किया गया था। यह ट्रस्ट अयोध्या जमीन विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाया गया। अदालत ने केंद्र सरकार को राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था। नई दिल्ली में हुई पहली बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव और गोविंद गिरि महाराज को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

ट्रस्ट में कौन-कौन सदस्य हैं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 10 स्थायी ट्रस्टी हैं। हालांकि, ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद अभी खाली है।

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  • महंत नृत्य गोपाल दास: वे ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन के सबसे वरिष्ठ संतों में गिने जाते हैं। उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में संभावना है कि 6 जुलाई की बैठक में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।
  • चंपत राय: वे विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव हैं। अगस्त 2020 में मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से ट्रस्ट के रोज़मर्रा के कामकाज और कई अहम फैसलों में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।
  • डॉ. अनिल मिश्र: अयोध्या के होम्योपैथी डॉक्टर और ट्रस्ट के शुरुआती सदस्यों में से एक हैं। वे मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं।
  • गोविंद गिरि महाराज: पुणे के प्रसिद्ध संत हैं। वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं और ट्रस्ट के आर्थिक व वित्तीय मामलों की देखरेख करते हैं।
  • स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती: प्रयागराज स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। वे ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में शामिल हैं।
  • स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज: कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के प्रमुख हैं और मध्व परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं।
  • युगपुरुष परमानंद गिरि महाराज: हरिद्वार के संत और आध्यात्मिक गुरु हैं। वे भी ट्रस्ट के महत्वपूर्ण सदस्यों में शामिल हैं।
  • महंत दिनेंद्र दास: वे अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत हैं। राम जन्मभूमि विवाद के दौरान वे इस मामले के प्रमुख पक्षकारों में शामिल रहे थे।
  • कृष्ण मोहन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कार्यकर्ता हैं। उन्हें ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सदस्य बनाया गया। कामेश्वर चौपाल उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने 1989 में प्रस्तावित राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी।
  • खाली पद: अयोध्या के पूर्व शाही परिवार से जुड़े ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ट्रस्ट में उनका पद अभी तक खाली है।

किसे वोट देने का अधिकार है और किसे नहीं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सिर्फ स्थायी ट्रस्टियों को ही वोट देने का अधिकार है। सरकारी प्रतिनिधियों सहित पांच पदेन सदस्य बैठकों में शामिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है। इसलिए वे मतदान के जरिए किसी फैसले को बदल या प्रभावित नहीं कर सकते। यही वजह है कि ट्रस्ट के बड़े फैसलों का अधिकार स्थायी ट्रस्टियों के पास ही होता है। नए ट्रस्टी को शामिल करना हो या ट्रस्ट के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव करना हो, इसके लिए स्थायी ट्रस्टियों के बहुमत की मंजूरी जरूरी होती है।

क्या चंपत राय और अनिल मिश्र पद छोड़ने के बाद भी ट्रस्ट में रह सकते हैं?

हां, ऐसा हो सकता है। ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार, स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई नियम नहीं है। अगर चंपत राय महासचिव का पद छोड़ देते हैं और अनिल मिश्र अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां छोड़ देते हैं, तब भी वे ट्रस्ट के स्थायी सदस्य बने रहेंगे। वे तभी ट्रस्ट से बाहर होंगे, जब खुद अपना इस्तीफा देंगे। इसी वजह से 6 जुलाई की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट में एक स्थायी पद पहले से खाली है और अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत खराब होने के कारण उनके बैठक में शामिल होने की संभावना भी कम है। ऐसे में बैठक में वोट देने वाले सक्रिय सदस्यों की संख्या सीमित रह सकती है।

आमंत्रित सदस्य कौन हैं और उनकी क्या भूमिका होती है?

ट्रस्ट में कुछ आमंत्रित सदस्य भी हैं। ये लोग बैठकों में शामिल होते हैं और अपनी राय रखते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी दिनेश चंद्र शामिल हैं। इसके अलावा कर्नाटक से विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल नागरकट्टे भी आमंत्रित सदस्य हैं। वे जनवरी 2021 से राम मंदिर के निर्माण और दूसरे सिविल कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, आमंत्रित सदस्य चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं, लेकिन ट्रस्ट के किसी भी फैसले पर वोट नहीं दे सकते।

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहला जत्था रवाना, PM मोदी ने श्रद्धालुओं को दिए 5 संकल्प

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Amarnath Yatra 2026 : पहलगाम और बालटाल के लिए अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए निकला। हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु। यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमरनाथ यात्रियों को पत्र लिखकर कहा कि शिवभक्तों की यह यात्रा हर तरह से सुरक्षित और मंगलमय हो। उन्होंने यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को 5 संकल्प लेने को कहा। ALSO READ: Top News 3 July: अमरनाथ यात्रा के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, उत्तर भारत को गर्मी से राहत

 

पीएम मोदी ने पत्र में कहा कि जम्मू-कश्मीर में पवित्र अमरनाथ यात्रा में सम्मिलित होना, अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य होता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुई प्रथम पूजा के साथ ही भक्तों के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन का क्रम शुरू हो जाता है। देश के कोने-कोने में श्रद्धालु इस पावन यात्रा में सम्मिलित होने के लिए तत्पर रहते हैं। हर वर्ष बाबा बर्फानी के प्रत्यक्ष दर्शन का यह अवसर, लाखों शिवभक्तों के लिए जीवन का एक अत्यंत शुभ और अविस्मरणीय अनुभव होता है। मैं इस वर्ष, यात्रा के इस अवसर पर आप सभी शिवभक्तों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

 

बाबा अमरनाथ के दर्शन की यह यात्रा, भारत की आध्यात्मिक यात्रा परंपरा का एक शाश्वत अध्याय है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष पूरे विश्व से सनातन संस्कृति को मानने वाले लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में सम्मिलित होने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। अलग-अलग प्रांतों से, अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले और विविध परंपराओं को मानने वाले लोग, महादेव के दर्शन का संकल्प लेकर इस यात्रा को पूरा करते हैं।

पीएम मोदी ने इन लोगों का अभिनंदन किया

प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि बीते कई दशकों से, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर सरकार बहुत कुशलता और सेवा भाव से यात्रा का प्रबंधन करते आ रहे हैं। इसके साथ ही, यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने में हमारे प्रशासन और सुरक्षाबलों की भी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। इस वर्ष भी हजारों साथी इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। मैं इस अवसर पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों और कर्मियों, प्रशासन के अधिकारियों, सफाई मित्रों तथा मठों की सेवा में जुड़े हर साथी का हृदय से अभिनंदन करता हूं। इन दो महीनों के दौरान, बाबा बर्फानी के पवित्र धाम में भारत की विविधता में एकता का अद्भुत स्वरूप भी देखने को मिलता है।

बाबा बर्फानी के धाम की यह यात्रा, हमें जम्मू-कश्मीर के आतिथ्य भाव और देशभर से आए भक्तों के समर्पण का भी दर्शन कराती है। यात्रा के हर आयोजन में, जम्मू-कश्मीर के हजारों स्थानीय नागरिक श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले असंख्य भक्त भी, पवित्र गुफा यात्रा मार्गों पर भंडारों और लंगरों का संचालन करते हैं। निःस्वार्थ सेवा की यह भावना, हमारी सनातन संस्कृति और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के आदर्श की सजीव अभिव्यक्ति है।

 

अमरनाथ यात्रियों के लिए 5 संकल्प 

पहला संकल्प – हम अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन करें और पूरे यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दें।

 

दूसरा संकल्प – हम प्रशासन के सभी आदेशों, यातायात के नियमों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। यात्रा के दौरान बारिश की वजह से फिसलन और ठंड का विशेष ध्यान रखें।

 

तीसरा संकल्प – हम 'वोकल फॉर लोकल' की भावना से यात्रा के खर्चों का कम से कम 10 प्रतिशत उपयोग स्थानीय उत्पादों को खरीदने में करें। इससे जम्मू-कश्मीर के परिवारों और युवाओं की आजीविका को भी बल मिलेगा।

 

चौथा संकल्प – हम बाबा अमरनाथ यात्रा के समापन दिवस, अर्थात रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई या बहन को एक पौधा भेंट करें और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को आगे बढ़ाएं।

 

पांचवां संकल्प – हम राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ पूरे वर्ष अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और विकसित भारत के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। मुझे विश्वास है कि बाबा अमरनाथ की दर्शन यात्रा, सनातन धर्म की आस्था, भारत की सांस्कृतिक एकता और सेवा की परंपरा का एक भव्य महोत्सव बनकर पूर्ण होगी।

 

उन्होंने कहा कि मेरी कामना है, बाबा अमरनाथ की असीम कृपा हम सभी पर बनी रहे। आपकी यात्रा सुरक्षित हो, मंगलमय हो और आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना तथा नई आध्यात्मिक शक्ति का संचार हो।

 

बाबा बर्फानी हम सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक समर्पित बनाएं, ताकि हम मिलकर विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध कर सकें।

Top News 3 July: अमरनाथ यात्रा के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, उत्तर भारत को गर्मी से राहत

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Top News 3 July : कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा शुरू। उत्तर भारत को गर्मी से राहत। हार्मुज पर ईरान की सख्त चेतावनी। वेनेजुएला में भूंकप के 8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला गार्ड। पुर्तगाल और स्पेन फीफा विश्व कप के अगले दौर में। 3 जुलाई की बड़ी खबरें :

 

अमरनाथ यात्रा शुरू

पहलगाम और बालटाल के लिए अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए निकला। हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु। यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 

 

उत्तर भारत को गर्मी से राहत

जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन बादल फटने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति। उत्तराखंड में खराब मौसम के कारण बदरीनाथ हाईवे साढ़े 11 घंटे बंद रहा। बारिश से पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

 

हार्मुज पर ईरान की सख्त चेतावनी

ईरान के सैन्य कमान ने तेल टैंकरों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि हार्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों को उसके बताए रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। अगर कोई जहाज इन नियमों को नहीं मानता है, तो उसे कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

 

8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला सुरक्षा गार्ड

नेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के 8 दिन बाद 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को मलबे से जिंदा निकाला गया। भूकंप में अब तक 2,295 लोगों की मौत, 11 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है। 

 

पुर्तगाल और स्पेन अगले दौर में

पुर्तगाल ने क्रोएशिया को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में प्रवेश किया। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और गोंजालो रामोस ने पुर्तगाल के लिए दागे गोल। ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराकर स्पेन भी अगले दौर में पहुंचा। आज स्विट्‍जरलैंड का मुकाबला अल्जिरिया से होगा वहीं अंतिम 16 में पहुंचने के लिए ऑस्ट्रेलिया की भिडंत इजिप्ट होगी।

अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

Ayodhya Ram Mandir donation theft

Ayodhya Ram Mandir donation theft: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने आस्था के केंद्र पर लगे इस दाग को और गहरा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में सबसे बड़ी चोरी साल 2025 की शुरुआत में आयोजित हुए कुंभ मेले के दौरान हुई, जब देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे से रामजी का खजाना लबालब था। इस महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स (IT) विभाग की एंट्री होने जा रही है, क्योंकि चोरी के पैसों से आधे दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदने और कंबलों में नोटों की गड्डियां छिपाने की बात सामने आई है।

 

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले से ही छोटी-मोटी चोरियां कर रहे थे। लेकिन साल 2025 की शुरुआत में जब कुंभ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और दान में भारी उछाल आया, तो आरोपियों की नीयत पूरी तरह डोल गई। उन्होंने इस सुनहरे मौके का फायदा उठाकर आपस में साठगांठ की और करोड़ों रुपए के चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

जीजा-साले ने खरीदीं आधा दर्जन संपत्तियां

इस खेल के सबसे बड़े आरोपी रिश्ते में जीजा-साले हैं। गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा और उसके जीजा अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा कैश उड़ाया। पाप की इस कमाई से उन्होंने देखते ही देखते आधे दर्जन से अधिक अवैध संपत्तियां खरीद लीं, जिसे पुलिस ने ट्रैक कर लिया है।

 

मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के एक योग केंद्र पर जब पुलिस ने रेड मारी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। वहां रखे चार बड़े बक्सों में नोटों की गड्डियों को बड़ी चालाकी से कंबलों के अंदर छिपाकर रखा गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनमें से एक बक्से पर बाकायदा 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

चंपत राय के ड्राइवर के घर भी मिला कैश

इस पूरे स्कैम का सबसे सनसनीखेज पहलू है आरोपी टिन्नू यादव की गिरफ्तारी। टिन्नू यादव कोई और नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर था। ड्राइवर होने के नाते उसकी पहुंच बहुत अंदर तक थी और उसी के पास नोटों की गिनती वाले अति-सुरक्षित कमरे की एक चाबी रहती थी। टिन्नू के घर से भी पुलिस को भारी मात्रा में कैश मिला है।

अब ED और IT कसेंगे शिकंजा

यह मामला अब सिर्फ स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रहा। पुलिस अब इस पूरे मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन के रास्ते) की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिख रही है, जबकि अवैध संपत्तियों की जांच के लिए इनकम टैक्स विभाग की मदद ली जा रही है। यही नहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं, क्योंकि तिजोरी की चाबी रखने वाले बैंक स्टाफ की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी मुमकिन ही नहीं थी। आरोपियों के खातों में उनकी वैध कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन मिला है। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी 89 लाख रुपए की हुई है। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला? 

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उद्घाटन के बाद से ही देश-विदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। इस वजह से मंदिर के दानपात्रों और काउंटरों पर हर महीने करोड़ों रुपए का नकद और चेक के माध्यम से दान आता है। इन पैसों को गिनने के लिए मंदिर परिसर में एक स्पेशल काउंटिंग रूम बनाया गया है, जहां बैंक के अधिकारी और ट्रस्ट के भरोसेमंद लोग मौजूद रहते हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट को ऑडिट और रूटीन चेकिंग के दौरान दान में आई रकम और बैंक में जमा हुई राशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर (मिसमैच) नजर आया।

 

इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही ट्रस्ट ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर 89 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि बरामद कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव (ड्राइवर), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी हो चुका है।

 

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह में शिव भक्त अपने आराध्य की पूजा, उपवास और जलाभिषे या रुद्राभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस माह में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। इस माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ा लाते हैं अपने भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस साल सावन का महीना गुरुवार, 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। वहीं, इस पावन माह का समापन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा।

आमतौर से जलाभिषेक सावन की शिवरात्रि को किया जाता है। लेकिन इसके अलावा इस माह में पड़ने वाली विशेष तिथियों पर जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इनमें सावन की शिवरात्रि के अलावा सावन के सभी सोमवार, दोनों प्रदोष व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज और श्रावणी पूर्णिमा भी जलाभिषेक शुभ माना जाता है। आइए जानें साल 2026 में सावन (श्रावण) महीने में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

सावन शिवरात्रि : कावड़ यात्रा और सामान्य भक्तों के लिए सावन महीने में जलाभिषेक का सबसे मुख्य दिन सावन शिवरात्रि माना जाता है। इस साल यह 11 अगस्त 2026 को होगी। इस दिन कावड़िए और भक्त भगवान शिव को जलाभिषेक करते हैं।

हरियाली तीज : सावन में शिव जी की पूजा के लिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को रहेगी। इस दिन महादेव पर जल चढ़ाने वालों को सुयोग्य जीवनसाथी पाने में मदद मिलती है।

सावन पूर्णिमा : सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को है। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर जलाभिषेक कर शिव जी की साधना करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है।

सावन सोमवार की तिथियां : सावन के सभी सोमवार जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि) के पंचांग के अनुसार तिथियां निम्न हैं:

पहला सोमवार: 03 अगस्त 2026

दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026

तीसरा सोमवार : तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को होगा। इस दिन नाग पंचमी भी है, जिससे इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है।

चौथा सोमवार : 24 अगस्त 2026

Ashadha Gupt Navratri 2026: कब से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? आइए जानें सही तारीख, घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु लौटे:गुरुद्वारों के दर्शन कर जताई खुशी; सरकारों से मांगी वीजा में ढील

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान गया सिख श्रद्धालुओं का जत्था मंगलवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आया। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने ननकाना साहिब, पंजा साहिब, करतारपुर साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन किए। भारत लौटने पर श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा उनके लिए काफी इमोशनल रही। इसे वह भुला नहीं सकते। अमृतसर के श्रद्धालु बलवीर सिंह ने कहा कि सबसे पहले उन्होंने ननकाना साहिब में गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान के दर्शन किए। इसके बाद पंजा साहिब, लाहौर स्थित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारे और करतारपुर साहिब के दर्शन का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर मन को गहरी शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ। पाकिस्तान में व्यवस्थाओं और सुरक्षा की सराहना श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान में की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और हर समय सुरक्षा कर्मी उनके साथ मौजूद रहे। किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वहां लोगों से बहुत प्रेम, सम्मान और सहयोग मिला, जिससे उनका अनुभव और भी बेहतर हो गया। एक अन्य श्रद्धालु हरजीत कौर ने बताया कि यह जत्था 21 जून को पाकिस्तान गया था और आज 30 जून को वापस लौटा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उनकी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी हुई। पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन कर उन्होंने अत्यंत आनंद और संतोष महसूस किया। वीजा प्रक्रिया आसान करने की श्रद्धालुओं की अपील श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की कि धार्मिक यात्राओं को और सरल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वीजा प्रक्रिया को आसान किया जाना चाहिए और श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए ताकि वे अपने पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकें। इससे दोनों देशों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। साझा विरासत को संरक्षित करने बेहतर प्रयास उन्होंने यह भी कहा कि साझा विरासत को संरक्षित करने और लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए सीमा पार धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि दोनों देशों के बीच शांति और सद्भाव का संदेश भी जाता है।

वर्ल्ड अपडेट्स:एपस्टीन कनेक्शन की समीक्षा पूरी होने तक वॉरेन बफे ने गेट्स फाउंडेशन को दान रोका: रिपोर्ट

बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन वॉरेन बफे ने इस साल गेट्स फाउंडेशन को होने वाला अपना नियमित मध्य-वर्षीय अरबों डॉलर का दान फिलहाल रोक दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वे फाउंडेशन और दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के संबंधों की बाहरी समीक्षा पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गेट्स फाउंडेशन के CEO मार्क सुजमैन ने एपस्टीन से जुड़े फाउंडेशन के पुराने संपर्कों की स्वतंत्र जांच कराई है। इसकी रिपोर्ट गर्मियों में आने की उम्मीद है। बताया गया है कि बफेट दान पर अंतिम फैसला साल के आखिर में, संभवतः अपनी थैंक्सगिविंग चिट्ठी जारी करने के समय ले सकते हैं। 95 वर्षीय बफे पिछले दो दशकों में बर्कशायर हैथवे के 47 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के शेयर गेट्स फाउंडेशन को दान कर चुके हैं। गेट्स फाउंडेशन उस समय विवादों में आया था जब अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी कुछ ईमेल में एपस्टीन और फाउंडेशन के कर्मचारियों के बीच संवाद का जिक्र सामने आया। इसी के बाद फाउंडेशन ने पुराने संबंधों की स्वतंत्र समीक्षा शुरू कराई। रॉयटर्स के अनुसार, इस मामले पर बर्कशायर हैथवे और गेट्स फाउंडेशन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। एजेंसी स्वतंत्र रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की पुष्टि भी नहीं कर सकी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबर… किंग चार्ल्स के आधिकारिक विवरण से 500 साल पुरानी ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ उपाधि हटी
ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय के आधिकारिक कार्य विवरण से 500 साल पुरानी ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ की उपाधि हटा दी गई है। 2025-26 की सॉवरेन ग्रांट रिपोर्ट में अब उन्हें इंग्लैंड चर्च का सुप्रीम गवर्नर और ब्रिटेन के बहुधार्मिक समाज में आस्था के लिए स्थान की रक्षा करने वाला बताया गया है। नई रिपोर्ट की भाषा पिछले साल की रिपोर्ट से अलग है। पहले चार्ल्स को ‘हेड ऑफ द चर्च ऑफ इंग्लैंड एंड डिफेंडर ऑफ द फेथ” कहा जाता था। हालांकि, शाही परिवार की आधिकारिक वेबसाइट पर यह उपाधि अभी भी दर्ज है। ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ की उपाधि 1521 में पोप लियो दशम ने इंग्लैंड के राजा हेनरी अष्टम को दी थी। यह सम्मान उन्हें मार्टिन लूथर के धार्मिक सुधार आंदोलन का विरोध करने के बाद मिला था। यह बदलाव तीन दशक पुरानी बहस को फिर चर्चा में ले आया है। 1994 में प्रिंस ऑफ वेल्स रहते हुए चार्ल्स ने कहा था कि वे ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ कहलाना पसंद करेंगे, ताकि वे केवल ईसाई धर्म ही नहीं बल्कि सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व कर सकें। 2023 में राज्याभिषेक के दौरान उन्होंने पारंपरिक शपथ नहीं बदली थी, लेकिन प्रस्तावना में यह जोड़ा गया था कि इंग्लैंड चर्च ऐसा वातावरण बनाएगा, जहां सभी धर्मों और मान्यताओं के लोग स्वतंत्र रूप से रह सकें। अमेरिकी कैथोलिक आर्चडायसीज 500 से अधिक बाल यौन शोषण पीड़ितों को 39.5 करोड़ डॉलर देगा
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को कैथोलिक आर्चडायसीज ने 500 से अधिक बाल यौन शोषण मुकदमों के निपटारे के लिए 39.5 करोड़ डॉलर (395 मिलियन डॉलर) देने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। समझौते के तहत आर्चबिशप साल्वातोरे जे. कॉर्डिलियोने प्रत्येक पीड़ित को व्यक्तिगत माफी पत्र लिखेंगे। साथ ही चर्च को बाल सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े कई सुधार भी लागू करने होंगे। आर्चबिशप कॉर्डिलियोने ने श्रद्धालुओं को लिखे पत्र में कहा कि कोई भी आर्थिक समझौता अतीत के दर्द को मिटा नहीं सकता, लेकिन इससे पीड़ितों को उचित मुआवजा देने का रास्ता खुलेगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संस्थागत विफलताओं के कारण यह नुकसान हुआ और सभी पीड़ितों से ईमानदारी से माफी मांगी। समझौते के तहत चर्च को बाल यौन शोषण के आरोप झेल चुके पादरियों की सूची सार्वजनिक रखनी होगी, उसे नियमित रूप से प्रकाशित करना होगा और पीड़ितों को चुप कराने वाले गोपनीयता समझौतों पर रोक लगानी होगी। यह मामला अमेरिका में कैथोलिक चर्च से जुड़े बाल यौन शोषण मामलों में हुए बड़े मुआवजा समझौतों की श्रृंखला का नया उदाहरण है। अक्टूबर 2024 में लॉस एंजिलिस आर्चडायसीज ने 1,353 मामलों के निपटारे के लिए 88 करोड़ डॉलर (880 मिलियन डॉलर) के समझौते पर सहमति जताई थी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प की मेल-इन बैलेट चुनौती खारिज की
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रम्प समर्थित उस याचिका को 5-4 के बहुमत से खारिज कर दिया, जिसमें मेल-इन बैलेट की गिनती के नियम सख्त करने की मांग की गई थी। अदालत ने मिसिसिपी के उस कानून को बरकरार रखा, जिसके तहत चुनाव दिवस तक पोस्टमार्क किए गए मतपत्र पांच दिन के भीतर पहुंचने पर भी गिने जाएंगे। बहुमत की ओर से फैसला लिखते हुए जस्टिस एमी कोनी बैरेट ने कहा कि चुनाव संबंधी कानूनों के अनुसार मतदाता की पसंद चुनाव दिवस तक दर्ज हो जानी चाहिए। यदि मतदान की अंतिम समय-सीमा चुनाव दिवस है और मतपत्र उसी दिन तक पोस्टमार्क हो जाता है, तो बाद में उसके पहुंचने से कानून का उल्लंघन नहीं होता। फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर इसे मतदाताओं के अधिकारों के लिए “बड़ा नुकसान” बताया। उन्होंने कांग्रेस से सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की अपील दोहराई। इस प्रस्तावित कानून में मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र और अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करने के साथ मेल-इन वोटिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।

राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

Ram Temple Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में वकीलों ने सोमवार (29 जून) को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह ऐलान बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक के बाद किया गया। सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर मैनेजमेंट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी को भी अयोध्या के अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा, “कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा। अगर कोई वकील उनका पक्ष रखता है, तो उसे एसोसिएशन के कंट्रीब्यूशन फंड में प्रति नाम 5 लाख रुपये जमा करने होंगे।”

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से आगे कहा, “चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए CrPC की धारा 173 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। CBI जांच की मांग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।”

अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में गिरफ़्तार आरोपियों का मुकदमा न लड़ने के अपने एक ऐतिहासिक फैसले को दोहराया। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 2005 में भी ऐसा ही फैसला लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर पर आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैज़ाबाद कोर्ट में पेश किया गया था।

‘सभी की भावनाएं आहत हुई हैं’

बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हम सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजाबाद के वकील गिरफ्तार आरोपियों की ओर से मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमत हो गए हैं। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बार की आम सभा ने फैसला लिया है। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।”

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वहीं, कालिका मिश्रा ने रविवार को कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय सोमवार को प्रस्तावित संगठन की आम बैठक में लिया जाएगा। उन्होंने बताया था कि साल 2005 में भी अयोध्या के वकीलों ने ऐसा ही निर्णय लिया था जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया गया था।

8 आरोपी गिरफ्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रविवार को पुलिस टीमों ने सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी भी ली।

आरोपियों ने मीडिया से बनाई दूरी

पीटीआई ने बार-बार चंपत राय और अनिल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि, अनिल मिश्रा के बेटे रवि मिश्रा ने पीटीआई से कहा कि उनके पिता दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच चल रही है और इससे सच सामने आएगा।

रवि ने कहा, “मेरे पिता को मंदिर की जिम्मेदारी दी गई है और वह वहां दिन-रात काम कर रहे हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार में राम मंदिर में फंड के गबन के बारे में कोई चर्चा हुई, तो रवि ने कहा, “हम घर पर मंदिर के मामलों पर चर्चा नहीं करते, हम सिर्फ़ परिवार के मामलों पर बात करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने पिता को अच्छी तरह जानता हूं, वह कभी ऐसी चीजों में शामिल नहीं होंगे। अगर कोई उन पर आरोप लगा रहा है, तो लगाने दें, हम क्या कर सकते हैं, हम हर किसी के मुंह पर ताला तो नहीं लगा सकते।”

मीडिया कवरेज पर रोक

इस बीच, सोमवार सुबह राम मंदिर के मुख्य एंट्री गेट के बाहर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई। मंदिर परिसर के बाहर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राम मंदिर के एंट्री गेट पर तैनात पुलिस बल को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेश दिया गया था कि किसी भी मीडियाकर्मी को राम मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं फिल्मिंग करने या उनसे बातचीत करने की अनुमति नहीं है।

राम मंदिर: सात्विकता, सुशासन और सनातन की अग्निपरीक्षा

The image shows a view of the grand temple of Lord Shri Ram in Ayodhya Dham

अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण केवल शिल्पकला का दर्शन नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की सदियों पुरानी अगाध आस्था, तप और संकल्प की पूर्णाहुति है। इस पावन काज में देश-विदेश के रामभक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंश समर्पित किया है।ALSO READ: अयोध्या के श्री रामलला मंदिर पर लोभ का साया

ऐसे में, यदि मंदिर परिसर या दान राशि के प्रबंधन में किसी भी स्तर पर कोई विसंगति या मानवीय भूल सामने आती है, तो सनातनी समाज का उद्वेलित होना स्वाभाविक है। किंतु, इस संवेदनशील घटनाक्रम पर जिस प्रकार की विपक्ष की राजनीति शुरू हुई है, उसने एक बार फिर साबित किया है कि देश के विरोधी दलों के लिए जन-आस्था केवल चुनावी लाभ-हानि का जरिया मात्र है।

 

देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार का तरीका अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय रहा है। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।

सरकार ने केवल बातें नहीं की, बल्कि त्वरित कार्रवाई से जीरो टॉलरेंस की नीति को धरातल पर उतार कर दिखाया। जैसे ही 5 जून को मामला सामने आया, सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। इस जांच दल ने बिना किसी दबाव के, पूरी निष्पक्षता से मात्र 10 दिनों में ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। 

 

इसका ही परिणाम है कि 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज कर, आठ मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है और बाकी संदिग्धों से भी कड़ी पूछताछ जारी है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि वर्तमान योगी शासन तंत्र में चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, प्रभु राम के काज में और सनातन की सात्विकता के साथ खिलवाड़ करने वाले को छोड़ा नहीं जाएगा।

 

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गरिमामय पक्ष श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, चंपत राय जी और अनिल मिश्रा जी का निर्णय रहा। इन दोनों विभूतियों ने अपना संपूर्ण जीवन राम काज और सनातन धर्म की सेवा में समर्पित कर दिया है। विशेषकर चंपत राय जी के उस संघर्ष को देश कभी नहीं भूल सकता, जिन्होंने बिना रुके, बिना थके पत्थरों की नक्काशी से लेकर अदालती दस्तावेजों को सहेजने तक, मंदिर निर्माण के हर मोर्चे पर एक सच्चे सेनापति की तरह काम किया। जन-जन उन्हें आदर से राम जी का पटवारी कहता है। 

 

जब जांच की बात आई, तो उन्होंने भारतीय लोक-मर्यादा की श्रेष्ठ परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया। उनका यह इस्तीफा किसी दोष की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का वह उत्कृष्ट उदाहरण है जो त्रेतायुग की न्यायप्रियता की झलक है। उन्होंने पद इसलिए छोड़ा ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी प्रभाव के पूरी हो सके। ऐसे तपस्वी व्यक्तित्वों पर राजनीतिक लाभ के लिए कीचड़ उछालना, उनकी जीवनभर की तपस्या का अपमान करना है।

 

दूसरी ओर, विरोधी दलों का रवैया हमेशा की तरह निराशाजनक और सनातन विरोधी ही है। इतिहास गवाह है कि यह वही विपक्ष है जिसने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के अस्तित्व को नकारने के लिए वकीलों की भारी-भरकम फौज खड़ी कर दी थी, रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, कदम-कदम पर रोड़े अटकाए और राम जी का निमंत्रण सिरे से खारिज किया था। आज वही लोग अचानक दान की पारदर्शिता के सबसे बड़े पैरोकार बनने का ढोंग कर रहे हैं। 

 

वास्तव में, विपक्ष को इस संवेदनशील मामले में कोई जनहित या आस्था की चिंता नहीं है; उन्हें तो बस आगामी चुनावों में भुनाने के लिए एक राजनीतिक मुद्दा मिल गया है। इनका असली एजेंडा सनातनी समाज की उस अटूट एकता को भंग करना है, जो मंदिर निर्माण के बाद अभूर्व रूप से सुदृढ़ हुई है। वे भ्रामक आंकड़े फैलाकर और श्रद्धालुओं के मन में संशय के बीज बोकर इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण को कमजोर करना चाहते हैं। देश की जनता को यह समझना होगा कि जो दल कभी सनातन को मिटाने की बात करने वालों के साथ खड़े होते हैं, उनकी सहानुभूति केवल एक छलावा और नया चुनावी पैंतरा मात्र है।

 

स्मरण रखना होगा कि आज का दौर केवल जमीनी राजनीति का नहीं, बल्कि सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉर) का भी है। ऐसे समय में प्रत्येक सनातनी का यह परम कर्तव्य है कि वह सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से पहले विवेक का उपयोग करे। किसी भी अपुष्ट या सनसनीखेज खबर को बिना जांचे आगे फॉरवर्ड न करें, क्योंकि यह श्री राम मंदिर की वैश्विक छवि को धूमिल करने का एक सोचा-समझा प्रयास भी हो सकता है। हमें केवल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और सरकारी जांच एजेंसियों के आधिकारिक बयानों व तथ्यों पर ही विश्वास करना चाहिए। यहां कहने का अर्थ यह नहीं कि चढ़ावे में हुई किसी गड़बड़ी पर हम आंखें मूंद लें, बल्कि हमारी डिजिटल सतर्कता ही विरोधियों के दुष्प्रचार को ध्वस्त करेगी।

 

उत्तर प्रदेश सरकार ने दोषियों को पकड़कर अपना काम पूरी निष्पक्षता से किया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कुछ कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। मंदिर को मिलने वाले हर छोटे-बड़े दान का ब्लॉकचेन या अत्याधुनिक रीयल-टाइम डिजिटल ऑडिट होना चाहिए, ताकि संपूर्ण वित्तीय लेखा-जोखा एक पारदर्शी और सुरक्षित प्रणाली के तहत रहे।

इसके साथ ही, मंदिर परिसर और सुरक्षा घेरे में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस और एआई-संचालित सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग अनिवार्य किया जाए, जिससे किसी भी मानवीय चूक की गुंजाइश शेष न बचे। ट्रस्ट के दैनिक कार्यों और वित्तीय लेन-देन की समय-समय पर समीक्षा के लिए तिरुपति, सांवरिया सेठ या वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर देश के शीर्ष व ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति भी बनाई जा सकती है, जो इस व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ करे।

 

प्रभु श्री राम का मंदिर भारत की आत्मा और हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। इसकी नींव हमारे पुरखों के सदियों के संघर्ष और करोड़ों भक्तों के अटूट विश्वास पर टिकी है। योगी सरकार की कड़ी और पारदर्शी कार्रवाई ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि न्याय होकर रहेगा। अब यह प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है कि वह राजनीतिक गिद्धों की अफवाहों पर ध्यान न देकर व्यवस्था पर भरोसा रखे। हमारी एकजुटता ही उन ताकतों को सबसे करारा जवाब होगी जो आस्था के बहाने सनातनियों को बांटना चाहती हैं; क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है, पर पराजित नहीं।


(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)ALSO READ: त्रेता से लेकर कलयुग तक कहानी चरण पादुका की

Anant Ambani visits Tirupati: अनंत अंबानी ने तिरुपति बालाजी मंदिर में कराया मुंडन, TTD को 25 इलेक्ट्रिक बसें देने की घोषणा

Anant Ambani visits Tirupati: रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने रविवार (28 जून) को तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार केश दान (मुंडन) भी कराया। तिरुपति यात्रा के दौरान अनंत अंबानी ने पारंपरिक केश दान कर अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त की। साथ ही, टीटीडी को 25 इलेक्ट्रिक बसें, ड्राइवरों की सैलरी और EV चार्जिंग सुविधाओं के लिए सहयोग की घोषणा कर उन्होंने मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान का भी ऐलान किया।

सुबह की विशेष पूजा में हुए शामिल

अनंत अंबानी ने रविवार तड़के होने वाली सुप्रभात सेवा में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन किए और मंदिर परिसर में पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए।

केश दान की सदियों पुरानी परंपरा निभाई

दर्शन के बाद अनंत अंबानी ने अपने बाल भगवान को अर्पित किए। तिरुमला में केश दान की परंपरा कई सौ वर्षों से चली आ रही है। श्रद्धालु इसे अहंकार का त्याग, विनम्रता और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक मानते हैं। तिरुमला में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने या श्रद्धा व्यक्त करने के लिए मुंडन कराकर अपने बाल दान करते हैं। अनंत अंबानी के लंबे बाल पिछले कुछ वर्षों से उनकी पहचान बन चुके थे। ऐसे में उनके केश दान ने भी लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

मंदिर प्रशासन ने किया सम्मान

दर्शन और केश दान के बाद मंदिर के वैदिक विद्वानों ने उन्हें वेद आशीर्वचनम् प्रदान किया। इसके बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अधिकारियों ने उन्हें श्रीवारी तीर्थ प्रसाद भेंट किया और पारंपरिक रेशमी शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

रिलायंस की ओर से बड़ा दान

मंदिर यात्रा के दौरान अनंत अंबानी ने घोषणा की कि Reliance Industries टीटीडी को लगभग 27.5 करोड़ रुपये की लागत से 25 इलेक्ट्रिक बसें दान करेगी। इसके अलावा कंपनी इन बसों को चलाने के लिए 50 ड्राइवरों के वेतन और अन्य लाभों का खर्च भी उठाएगी। तिरुमला में EV (इलेक्ट्रिक वाहन) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में भी सहयोग देने के लिए तैयार है। इस पहल का उद्देश्य तिरुमला में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

पहले भी कई धार्मिक यात्राएं कर चुके हैं अनंत अंबानी

अनंत अंबानी पहले भी कई प्रमुख हिंदू मंदिरों में दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण और श्रीनाथजी के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की है। वर्ष 2024 में अपनी शादी से पहले उन्होंने द्वारकाधीश मंदिर तक पदयात्रा भी की थी। यह यात्रा उन्होंने अपनी धार्मिक श्रद्धा और संकल्प के रूप में की थी।

पशु संरक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय

धार्मिक गतिविधियों के अलावा अनंत अंबानी वंतारा परियोजना के माध्यम से पशु संरक्षण और वन्यजीवों के बचाव एवं पुनर्वास के कार्यों से भी जुड़े हुए हैं। वे कई अवसरों पर सभी जीवों के प्रति करुणा और संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।  जानवरों के कल्याण के लिए किए गए अपने कामों के जरिए उन्होंने बार-बार सभी जीवों के प्रति दया भाव रखने की बात कही है।

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