अयोध्या में चंपत राय के विरोध में संतों की बैठक पर पुलिस की रोक, संतों ने लगाया गंभीर आरोप

अयोध्या में चंपत राय के विरोध में संतों की बैठक पर पुलिस की रोक, संतों ने लगाया गंभीर आरोप

अयोध्या से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के विरोधी गुट के संतों की प्रस्तावित बैठक को पुलिस द्वारा रोक दिए जाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह बैठक रामायणम आश्रम में आयोजित होनी थी। संतों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने रामायणम आश्रम में ताला लगवा दिया और कुछ समय के लिए वहां मौजूद संतों को नजरबंद रखा। इसके बाद संतों ने जिला प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।

 

प्रदर्शन के दौरान संतों ने 'चंदा चोरों अयोध्या छोड़ो' के नारे लगाए। संतों ने आरोप लगाया कि चढ़ावा प्रकरण में जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोधी गुट के संतों ने चेतावनी दी कि जल्द ही एक लाख संतों को लेकर अयोध्या में बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। संतों ने वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर संतों का नया ट्रस्ट बनाए जाने की मांग भी उठाई। 

 

महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि राम मंदिर में चंदा व चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिसे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीजी ने अयोध्या मे कई बार कही है कि दूध का दूध व पानी का पानी हो तो वहीं होना चाहिए, महंत दिलीप त्यागी ने कहा की राम मंदिर मे चढ़ावा चोरी से अयोध्या की गरिमा – महिमा की वैश्विक स्तर पऱ बदनामी हुई है जिसका कोई निराकरण नहीं हुआ।

उन्होंने  कहा कि हमारा केंद्र व प्रदेश की सरकार से मांग है कि SIT की जांच व उससे इनको क्लीन चिट मिलने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट बनाने का आदेश सर्वोच्च न्यायलय ने दिया था और भारत सरकार के निर्देश पऱ ट्रस्ट बना है इसलिए SIT कुछ नहीं कर सकती है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रिटायर्ड जजों की एक कमेटी बनाई जाए और उनके द्वारा जांच कराई जाए।

साथ ही इस ट्रस्ट को भंग किया जाए। संत प्रकाशनन्द उर्फ कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि आज हमारे संत समाज की शांतिपूर्वक चलने वाली संगोष्ठी थी। इसके माध्यम से हम ज्ञापन प्रशासन को सौपते परन्तु जिस प्रकार से यह कार्य हुआ है। चंदा चोरों को बचाया जा रहा है। इसमें जिला प्रशासन भी शामिल है। इसीलिए हम लोगों को रोका जा रहा है। ताला लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि हम चुप नहीं बैठेंगे।

इसकी आवाज पूरे देश के संतों के साथ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर मे हुई चोरी के अभी तक केवल छोटी मछलियां ही पकड़ी गई हैं। बड़ी मछली बाहर जिनका नाम दुनिया जानती है, संतों की बैठक मे शामिल होने आए संत प्रकाशनन्द ने कहा की हम लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपने कार्यक्रम को आयोजित किया था। इसके पूर्व भी हम लोगों ने कई जगह व दिल्ली में शांतिपूर्वक बैठक की थी।

कोई दिक्कत किसी को नहीं हुई किन्तु श्रीराम की नगरी अयोध्या मे उनके मंदिर के चढ़ावे की चोरी को लेकर होने वाली साधु-संतों की बैठक को रोका जा रहा है, हमें धमकियां दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब हमें लगता है कि चढ़ावा चोरी का लाभ स्थानीय प्रशासन को भी मिला है इसीलिए हम लोगो को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे संतों को बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हम लोग अयोध्या एक लाख संतो के साथ आएंगे और जन-जन आंदोलन होगा। देखते हैं कि कितने लोगों  को जेल भेजा जाता है। हम लोग मरेंगे तो राम के लिए जिएंगे तो राम के लिए।

राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO कौन? एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडे और पूर्व DM योगेश्वर मिश्रा का नाम रेस में शामिल, जानें कौन हैं ये

Ram Mandir Trust CEO: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। ट्रस्ट की चयन समिति ने शॉर्टलिस्ट किए गए सभी 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू ले लिए हैं। आपको बता दें कि ट्रस्ट के CEO पद के लिए 5200 एप्लिकेशन मिले थे। इनमें से छंटनी के बाद सिर्फ 16 कैंडिडेट्स को इंटरव्यू कॉल गई थी। इन कैंडिडेट्स की सूची में पूर्व IAS और IPS अधिकारी, सेना के रिटायर अधिकारी, सिक्योरिटी और ऑर्गेनाइजेशनल मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स और दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों के प्रशासनिक अनुभव वाले कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पूर्व IPS राजेश पांडे का भी नाम

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद की दौड़ में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे का भी नाम है। उन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वह मंगलवार को चयन समिति के सामने इंटरव्यू के लिए पेश हुए थे। आपको बता दें कि प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले राजेश पांडे 2003 बैच के IPS अधिकारी हैं। राजेश पांडे पीपीसी से प्रमोट होकर IPS बने थे। राजेश पांडे ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) जैसी महत्वपूर्ण यूनिट्स में सर्विस दी है। वह लखनऊ, अलीगढ़, मेरठ और सहारनपुर के SSP रह चुके हैं और हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर्स के लिए जाने जाते हैं।

राजेश पांडे उत्तर प्रदेश में दो बड़े आतंकी मामलों की जांच से जुड़े रहे हैं। पहला 2005 में अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर पर हुआ आतंकी हमला और दूसरा 2006 में वाराणसी में हुए सिलसिलेवार बम धमाके।

काशी कॉरिडोर का काम देख चुके पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्रा भी लिस्ट में शामिल

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व नौकरशाह योगेश्वर राम मिश्रा को भी राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में से एक माना जा रहा है। योगेश्वर राम मिश्रा का व्यापक प्रशासनिक अनुभव उनकी दावेदारी को मजबूत बनाता है। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम (काशी कॉरिडोर) के के डेवलपमेंट के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसे उनके मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक क्षमता से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

इंटरव्यू में उम्मीदवारों से क्या पूछा गया?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू के दौरान चयन समिति ने उम्मीदवारों के प्रशासनिक और सामाजिक-धार्मिक बैकग्राउंड को गहराई से परखा। कैंडिडेट्स से उनके पेशेवर करियर और प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ राम मंदिर परिसर की सुरक्षा प्रबंधन को लेकर उनकी समझ पर सवाल किए गए। उम्मीदवारों के मंदिरों में काम करने के पूर्व अनुभव और मंदिर प्रशासन से जुड़ी जटिलताओं की उनकी समझ को जांचा गया। कैंडिडेट्स से सामाजिक और धार्मिक संगठनों से उनकी संबद्धता और हिंदू धार्मिक संस्थाओं के साथ उनके संपर्कों/संबंधों के बारे में भी पूछा गया।

क्यों पड़ी पूर्णकालिक CEO की जरूरत?

ट्रस्ट में पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति का फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब राम मंदिर के नाम पर मिलने वाले दान में वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोपों के कारण ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बाद ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय समेत तीन अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी के बाद ट्रस्ट के प्रबंधन को पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

Ram Mandir Chadhawa Chori: यूनिफॉर्म में जेब ही नहीं होगी तो कैसे करेंगे चोरी! राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के नए नियम सामने आए

Ram Mandir Chadhawa Chori: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था को और ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई बड़े बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था में दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की यूनिफॉर्म से लेकर CCTV निगरानी, सुरक्षा जांच और मंदिर परिसर से बैंक तक कैश पहुंचाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इन बदलावों का मकसद गिनती के दौरान सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को मज़बूत करना है। राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा चोरी के बाद यह एक्शन लिया गया है।

अब कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में नहीं होंगी जेबें

राम मंदिर में दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए नई यूनिफॉर्म पहले ही लागू की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन वर्दियों में जेब नहीं होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गिनती के दौरान कर्मचारी नकदी या कोई अन्य सामग्री अपने साथ बाहर न ले जा सकें। इसके अलावा गिनती केंद्र में कर्मचारियों की एंट्री और एग्जिट दोनों जगह सख्त तलाशी शुरू कर दी गई है। इससे दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की आवाजाही पर निगरानी और मजबूत होगी।

45 दिन नहीं, अब 180 दिन तक सुरक्षित रहेगा CCTV फुटेज

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CCTV रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की अवधि भी काफी बढ़ा दी है। पहले गिनती वाले कमरे की CCTV फुटेज 45 दिनों तक रखी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया है। यानी किसी भी घटना या गड़बड़ी की स्थिति में करीब छह महीने तक संबंधित CCTV रिकॉर्डिंग को जांच के लिए देखा जा सकेगा।

साधारण कैमरों की जगह लगेंगे PTZ कैमरे

चढ़ावे की गिनती केंद्र की निगरानी व्यवस्था को भी अपग्रेड किया जा रहा है। वहां लगे फिक्स्ड CCTV कैमरों को PTZ (Pan-Tilt-Zoom) कैमरों से बदला जाएगा। इन कैमरों की मदद से किसी खास जगह या गतिविधि पर कैमरे को घुमाकर नजर रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर किसी व्यक्ति या गतिविधि को जूम करके देखा जा सकेगा।

दान की गिनती के लिए SBI के कर्मचारियों पर जोर

ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से यह भी विचार करने को कहा है कि दान की गिनती जैसे संवेदनशील काम के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के बजाय बैंक के अपने कर्मचारियों को लगाया जाए। ट्रस्ट ने यह सुझाव भी दिया है कि इस काम में लगाए जाने वाले कर्मचारियों को बेहतर पारिश्रमिक दिया जाए। इसके साथ ही गिनती की पूरी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में ट्रस्ट की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।

मंदिर से बैंक तक नकदी ले जाने का तरीका भी बदलेगा

दान की रकम को मंदिर परिसर से SBI की ब्रांच तक ले जाने की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत नोटों के बंडलों को एक साथ पैक और सुरक्षित किया जाएगा। सके बाद उन्हें मंदिर परिसर के अंदर ही SBI के वाहन में लोड किया जाएगा। इसका उद्देश्य नकदी को मंदिर से बैंक तक ले जाने के दौरान किसी भी तरह की पिलफरेज यानी रकम में सेंधमारी की संभावना को कम करना है।

राम मंदिर ट्रस्ट को जल्द मिलेगा नया CEO

दान की गिनती की व्यवस्था में बदलाव के साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट नए और पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के चयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। CEO के चयन के लिए बनाई गई सर्च कमेटी ने इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी कर ली है। 11 और 12 अगस्त को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में अंतिम दौर के इंटरव्यू हुए। सर्च कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल हैं।

5,585 आवेदन से 16 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट

CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 3,877 आवेदनों में विस्तृत CV शामिल थे। जांच के बाद 1,580 उम्मीदवारों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इनमें से करीब 111 उम्मीदवारों को ऑनलाइन बातचीत के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। आगे की प्रक्रिया के बाद 16 उम्मीदवारों को अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इनमें रक्षा, प्रशासन, कॉरपोरेट, उद्योग, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवर शामिल हैं। अब सर्च कमेटी अंतिम उम्मीदवारों का मूल्यांकन करके ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपेगी। इसके बाद नए CEO की अंतिम नियुक्ति ट्रस्ट द्वारा की जाएगी।

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क्यों जरूरी किए गए ये बदलाव?

राम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है। ऐसे में दान की गिनती से लेकर उसकी पैकिंग, निगरानी और बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है। ट्रस्ट के नए कदमों का उद्देश्य दान की गिनती से लेकर बैंक तक पहुंचने तक पूरी प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। यानी अब राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में जेब नहीं होगा। एंट्री गेट पर तलाशी ली जाएगी। साथ ही 180 दिन की CCTV रिकॉर्डिंग और PTZ कैमरों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

चढ़ावा चोरी के बाद बदली राम मंदिर की पूरी व्यवस्था, कैश गिनती, सुरक्षा व पास के लिए सख्त दिशानिर्देश

ayodhya ram mandir trust meeting

Ayodhya Ram Mandir security: ​अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर हमेशा ही विश्व में सुर्खियों में रहा है—चाहे वह राम मंदिर आंदोलन हो, भव्य मंदिर का निर्माण हो, या फिर सम्पूर्ण विश्व को साक्षी बनाने वाला राम लला का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव। ​हाल ही में राम लला के चरणों में अर्पित चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, चढ़ावा व गिनती की निगरानी, संपूर्ण सुरक्षा और VIP/VVIP दर्शन पास से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल दिया है और बेहद सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं।

​चढ़ावा और गिनती की 360-डिग्री निगरानी

​पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अब हाई-टेक निगरानी के दायरे में लाया गया है। दानपात्र खोलने से लेकर चढ़ावा गिनने तक की हर पल की रिकॉर्डिंग 360-डिग्री कैमरों और पेशेवर वीडियोग्राफरों (SLR और 360 डिग्री कैमरों से लैस) द्वारा की जाएगी। दानपात्र से जुड़ी पुरानी टीम को बदल दिया गया है। निगरानी के लिए 8 सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें ​2 बैंक कर्मी (भारतीय स्टेट बैंक), ​2 ट्रस्ट प्रतिनिधि, ​2 SIS सुरक्षा कर्मी, ​2 पेशेवर वीडियोग्राफर शामिल हैं। 

​चरणबद्ध तरीके से खाली होंगे दानपात्र

परिसर में स्थित लगभग 40 दानपात्रों को अब एक साथ खाली करने के बजाय अलग-अलग दिनों में खाली किया जाएगा। सीलबंद बक्सों को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों द्वारा विधिवत सील व हैंडल किया जाएगा। कोष प्रबंधन समिति के सदस्य जगदीश आफले ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच किसी भी प्रकार का कोई गतिरोध नहीं है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

​दर्शन पास के लिए नई व्यवस्था

​पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र एवं गोपाल राव की ID बंद होने के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रस्ट ने अपने तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की ID को दर्शन पास जारी करने के लिए अधिकृत किया है। ​वर्तमान में अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की देखरेख में श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के प्रबंध किए जा रहे हैं।

​प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव

मंदिर के इतिहास में पहली बार सचिव पद पर जगदीश आफले को नियुक्त किया गया है (जिसकी आधिकारिक घोषणा 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में होगी)। आफले को SBI में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Signatory) भी बनाया गया है। दूसरी ओर, ​मंदिर के आधिकारिक प्रवक्ता के लिए चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ​CEO पद के लिए 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग और लिस्टिंग सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली कमेटी कर रही है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

​त्रि-स्तरीय (Three-Layer) अत्याधुनिक सुरक्षा चक्र

​श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। CRPF (केंद्रीय सुरक्षा बल), PAC (प्रांतीय सशस्त्र बल) और SSF (विशेष सुरक्षा बल) के सैकड़ों जवानों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही AI-आधारित अत्याधुनिक CCTV कैमरे और स्मार्ट निगरानी प्रणाली लागू की गई है। परिसर की सुरक्षा के लिए 4 किलोमीटर लंबी परिधि दीवार (Boundary Wall) और उच्च क्षमता वाले वॉच टावर स्थापित किए गए हैं।

‘प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद’, जयराम रमेश का मोदी पर हमला, बोले- देश से माफी मांगें

jairam ramesh attacks pm modi over students forgiveness statement

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छात्रों को माफ करने वाले बयान पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को युवाओं, पेपर लीक, नोटबंदी और अन्य मुद्दों पर देश से माफी मांगनी चाहिए। ALSO READ: PM मोदी ने गाली देने वाले छात्रों को किया माफ, बोले- ये भटके हुए बच्चे हैं, सजा नहीं सही राह दिखाने की जरूरत

 

वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, कांग्रेस खुद को नॉन-बायोलॉजिकल बताने वाले प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद है। वह अपने पूर्ववर्तियों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और कटु भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें बदनाम करने के लिए वे न केवल अपनी सार्वजनिक सभाओं में, बल्कि संसद के भीतर भी बार-बार झूठ फैलाते हैं। संसद के भीतर और बाहर गाली-गलौज करने वालों की पूरी फौज को खुली छूट देते हैं और उन्हें पूरा संरक्षण भी प्रदान करते हैं।

 

कब माफी मांगेंगे पीएम मोदी?

उन्होंने कहा कि आज पूरा देश इस बात का इंतजार कर रहा है कि प्रधानमंत्री NTA की पेपर लीक से ग्रस्त व्यवस्था के कारण लाखों युवाओं को हुई पीड़ा और छात्र आंदोलनों पर गृह मंत्रालय के संरक्षण में हुई बर्बर कार्रवाई के लिए माफी मांगें। पूरा देश राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए चंदा चोरी, आस्था धोखा प्रकरण पर भी प्रधानमंत्री से माफी की अपेक्षा कर रहा है, जिसकी स्थापना की घोषणा उन्होंने स्वयं 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में बड़े जोर-शोर से की थी।

जयराम रमेश ने कहा कि पूरा देश आज भी 8 नवंबर 2016 को लिए गए उनके तुगलकी फैसले के लिए उनकी माफी का इंतजार कर रहा है, जिसने करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छीन ली और लाखों MSME बंद होने की कगार पर पहुंच गए। ऐसे मामलों की सूची बहुत लंबी है। ALSO READ: PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा

जयराम रमेश ने कहा कि लेकिन बीती रात प्रधानमंत्री ने आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा दिखाते हुए कहा कि उन्होंने हमारे युवाओं को माफ कर दिया है। यह देश और उन युवाओं का अपमान है, जिन्होंने उनकी सरकार के दौरान पीड़ा झेली है और जो पूरी तरह न्यायोचित रूप से उनसे माफी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इंस्टाग्राम सभाएं अब किसी को बेवकूफ नहीं बना सकतीं।

 

क्या है मामला?

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें और उनकी दिवंगत मां को कथित तौर पर गाली देने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ शरारती बच्चों ने बहुत गंदी गालियां दीं… गालियां मुझे दी गईं और मेरी दिवंगत मां को भी दी गईं। इस तरह की भाषा को लेकर समाज का गुस्सा स्वाभाविक है, खासकर जब कथित तौर पर कुछ युवा महिलाओं द्वारा भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया हो। लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि इन युवाओं को सही दिशा दिखाई जाए, न कि उन्हें कानूनी लड़ाई में उलझाया जाए।

 

उन्होंने कहा कि ये भटके हुए बच्चे हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाना समाज का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सजा देकर, अदालतों के चक्कर लगवाकर या समाज में परेशान करके परिस्थितियों को नहीं बदला जा सकता।

कौन हैं जगदीश अफले? IIT बॉम्बे से पढ़े इंजीनियर को राम मंदिर ट्रस्ट का सचिव नियुक्त किया गया

Jagdish Aphale: राम मंदिर में दान में मिले सामान की कथित चोरी के विवाद के बीच, बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जगदीश अफले को अपना पहला सेक्रेटरी नियुक्त किया है। News 18 के अनुसार, अफले रोजाना के कामकाज की देखरेख करेंगे। हालांकि, अफले की नियुक्ति पर 2 सितंबर को ट्रस्ट की एग्जीक्यूटिव मीटिंग में औपचारिक रूप से मुहर लगाई जाएगी।

राम मंदिर ट्रस्ट ने बनाया पहला सेक्रेटरी पद

राम मंदिर में कथित चांदी चोरी मामले को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच ट्रस्ट ने सचिव का नया पद बनाया है। यह पद सीईओ (CEO) के पद से अलग होगा। सीईओ पद के लिए जहां ट्रस्ट ने पहले सार्वजनिक रूप से आवेदन मांगे थे और इसके लिए एक तय जॉब डिस्क्रिप्शन जारी किया गया था, वहीं सचिव की नियुक्ति ट्रस्ट की कार्यकारिणी समिति के फैसले के आधार पर की गई है।

जगदीश अफले कौन हैं?

पुणे के रहने वाले जगदीश अफले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (IIT) के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने सिविल इंजीनियर के तौर पर ट्रेनिंग ली है। उनके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech और MTech की डिग्री है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर अफले ने अयोध्या राम मंदिर के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह उस मुख्य इंजीनियरिंग टीम का हिस्सा थे, जिसने नींव के काम से लेकर सुपरस्ट्रक्चर तक के प्रोजेक्ट को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बताया जाता है कि अफले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और कई सालों से संगठन से जुड़े हुए हैं।

रिटायरमेंट के बाद भारत लौटने से पहले, अफले ने कई मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ काम किया है। अपने करियर के दौरान उन्होंने यूरोप और अमेरिका में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं हैं।

अब जगदीश अफले अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को रिपोर्ट करेंगे और ट्रस्ट में एक पदाधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

राम मंदिर दान चोरी मामले में ताजा अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए IGP किरण एस. की अगुवाई में चार सदस्यों वाली SIT के गठन का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि “सुधारात्मक कदम उठाने होंगे” और “पारदर्शिता सुनिश्चित करने” के लिए कदम उठाए जाएंगे। बेंच ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि SIT में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाएगा।

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अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

ayodhya ram mandir trust meeting

Ram Mandir online donation: ​अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हालिया मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राम भक्तों के लिए ऑनलाइन दान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और हाई-टेक बना दिया गया है।

 

​ऑनलाइन दान करने वाले श्रद्धालुओं को अब दान की पुष्टि के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के 'डोनेशन सेक्शन' को अपडेट कर यह नई सुविधा शुरू की है। ​दान प्रक्रिया पूरी होते ही रसीद तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगी, जिसे डाउनलोड करके सुरक्षित रखा जा सकता है। रसीद पाने के लिए श्रद्धालु को नाम, दान का उद्देश्य, पैन (PAN) नंबर, तिथि, दान राशि, पूरा पता, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। किसी भी सहायता या पूछताछ के लिए ट्रस्ट ने अपनी वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी भी जारी कर दिए हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

ऑफलाइन दान के लिए भी सख्त नियम लागू

​चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद कई श्रद्धालुओं ने रसीद में देरी की शिकायत की थी। इसी को देखते हुए अब मंदिर परिसर में ऑफलाइन (नकद) दान करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को भी मौके पर ही अनिवार्य रूप से रसीद देने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई डिजिटल व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा और भविष्य में दान के रिकॉर्ड का सत्यापन बेहद आसान रहेगा। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'

रोज आ रहा है 8 से 10 लाख रुपये का चढ़ावा

​चढ़ावा चोरी की घटना के बाद शुरुआत में दान की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई थी, लेकिन राम भक्तों की अटूट आस्था को कोई रोक नहीं सका। श्रद्धालुओं का भरोसा एक बार फिर पूरी तरह लौट आया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों को मिलाकर राम लला के चरणों में प्रतिदिन 8 से 10 लाख रुपए का चढ़ावा आ रहा है। मंदिर परिसर में रखे दान पात्रों में भक्त दिल खोलकर चढ़ावा अर्पित कर रहे हैं, वहीं ऑनलाइन दान में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

Ayodhya Ram Temple: धार्मिक मामलों की देखरेख के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित, प्रवक्ता की भी होगी नियुक्ति

Ayodhya Ram Temple: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के धार्मिक कामकाज की देखरेख के लिए संतों और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों वाली नौ सदस्यों सदस्यीय समिति का गठन किया है। News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला बुधवार को ट्रस्ट की दो घंटे चली बैठक में लिया गया, जो मंदिर के धार्मिक और प्रशासनिक ढांचे को बड़े पैमाने पर फिर से व्यवस्थित करेंगे।

नई बनी कमेटी के प्रमुख ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि होंगे। इसके अलावा, इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत शामिल हैं: मणिराम दास छावनी के महंत कमल नयन दास, राम कथा कुंज के स्वामी रामानंद दास, रामवल्लभ कुंज के स्वामी राजकुमार दास, हनुमत निवास मंदिर के स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास। बाकी चार सदस्य ट्रस्ट से जुड़े प्रतिनिधि होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह 9 सदस्यीय समिति मंदिर में धार्मिक मामलों की देखरेख करेगी, जिसमें अनुष्ठान, त्योहार, पूजा व्यवस्था और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय शामिल है।

बैठक में एक और अहम फैसला लेते हुए ट्रस्ट ने मीडिया और जनता के साथ औपचारिक संचार चैनल स्थापित करने के लिए एक आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति को मंजूरी दी है। बता दें कि यह कदम राम मंदिर प्रबंधन पर बढ़ते सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बीच उठाया गया है।

हालांकि, ट्रस्ट ने कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों को स्थगित कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन रिक्त न्यासी पदों को भरने पर सहमति नहीं बन पाई, जबकि स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति एक महीने के लिए टाल दी गई।

CEO पद के लिए मिले हजारों आवेदन

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट को CEO के पद के लिए हजारों आवेदन मिले हैं, जिनमें रिटायर्ड सरकारी अधिकारी और सीनियर प्रोफेशनल भी शामिल हैं। ऐसे में ट्रस्ट अंतिम फैसला लेने से पहले सिलेक्शन प्रोसेस जारी रहेगा।

फिलहाल, अंतरिम महासचिव (Interim General Secretary) के तौर पर काम कर रहे कृष्ण मोहन अपने पद पर बने रहेंगे।

यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है, जब राम मंदिर निर्माण के चरण से निकलकर पूरी तरह से संचालन (ऑपरेशन) के दौर में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट मंदिर में आने वाले बढ़ते श्रद्धालुओं और तेजी से बढ़ते मंदिर परिसर को बेहतर तरीके से संभालने के लिए अपनी धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

नई कमिटी से धार्मिक नेताओं की भूमिका होगी तय

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संतों की नई बनी कमिटी से मंदिर के कामकाज में अयोध्या के धार्मिक नेताओं की भूमिका तय होने की उम्मीद है, जबकि प्रस्तावित CEO से संस्थान के मैनेजमेंट में ज्यादा प्रोफेशनल देखरेख आने की उम्मीद है।

ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और फंड व रिकॉर्ड के प्रबंधन में ज्यादा पारदर्शिता की मांग उठ रही है।

बता दें कि ट्रस्ट की अगली बैठक 2 सितंबर को होनी है, जिसमें CEO और ट्रस्टी के तीन खाली पदों समेत रुकी हुई नियुक्तियों पर समीक्षा होने की उम्मीद है।

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