RBI Plastic Notes: कैसा होगा RBI का नया प्लास्टिक नोट? टेंडर रेस में उतरीं दुनिया की दिग्गज कंपनियां

RBI Polymer Banknotes Plan: भारत में कागजी नोटों की जगह जल्द ही टिकाऊ और मजबूत प्लास्टिक के नोट ले सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) द्वारा जारी किए गए टेंडर के लिए दो विदेशी कंपनियों और एक भारतीय कंपनी ने अपनी बोलियां जमा कर दी हैं।

शुरुआती चरण में रिजर्व बैंक ₹10 और ₹20 के नोटों को पॉलीमर में छापने की योजना पर विचार कर रहा है। आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट की मुख्य शर्तें क्या हैं और कौन सी कंपनियां इसकी रेस में आगे चल रही हैं।

RBI की 2 सबसे सख्त शर्तें: चीन-पाकिस्तान से दूरी और नो-एनिमल फैट

BRBNMPL ने टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों के सामने दो बेहद अहम और सख्त शर्तें रखी हैं:

चीन और पाकिस्तान से पूर्ण फायरवॉल: भारतीय मुद्रा की सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए सभी बोलीदाताओं को हलफनामा देना होगा कि वे भारत में अपने ऑपरेशन्स को चीन और पाकिस्तान में मौजूद अपनी किसी भी गतिविधि से पूरी तरह अलग रखेंगे।

जानवरों की चर्बी पर बैन: कंपनियों को प्रमाणित करना होगा कि सप्लाई की जाने वाली पॉलीमर शीट में जानवरों की चर्बी या उसका DNA शामिल नहीं होगा। ब्रिटेन जैसे देशों में पॉलीमर नोटों में एनिमल फैट का इस्तेमाल विवाद का कारण बना था, जिसके चलते RBI अब भारत के लिए इसे लेकर बेहद सतर्क है।

तुरंत चाहिए 68,000 रीम पॉलीमर शीट

रिपोर्ट के अनुसार, BRBNMPL को भारतीय बैंक नोटों की छपाई के लिए ‘तत्काल’ 68,000 रीम पॉलीमर सबस्ट्रेट की आवश्यकता है। एक रीम में पॉलीमर फिल्म की 500 शीट्स होंगी। सभी कंपनियों को सैंपल्स जमा करने होंगे। इन सैंपल्स को भारत के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद सफल कंपनियों को ही अंतिम टेंडर में हिस्सा लेने दिया जाएगा।

रेस में कौन-कौन सी दिग्गज कंपनियां शामिल?

पॉलीमर नोटों के सबस्ट्रेट सप्लाई के लिए दुनिया की जानी-मानी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है:

कॉस्मो फर्स्ट और डी ला रू: भारत की सबसे बड़ी BOPP एक्सपोर्टर कॉस्मो फर्स्ट ने यूके (UK) स्थित दुनिया की सबसे बड़ी बैंक नोट सप्लायर कंपनी De La Rue को अपना तकनीकी पार्टनर बनाया है। डी ला रू सुरक्षा फीचर्स और पॉलीमर सबस्ट्रेट तकनीक मुहैया कराएगी।

CCL सिक्योर: ऑस्ट्रेलिया स्थित यह कंपनी दुनिया के 40 से अधिक केंद्रीय बैंकों को पॉलीमर नोट सोल्यूशन्स दे रही है। कंपनी का दावा है कि उसके पॉलीमर नोट पारंपरिक कॉटन (सूती) के नोटों की तुलना में 6 गुना ज्यादा टिकाऊ होते हैं।

Q&T हाई-टेक पॉलीमर: वियतनाम की इस कंपनी ने अपने देश में कॉटन करेंसी के मुकाबले 78% लागत की बचत का दावा किया है और अब इसने भी भारतीय टेंडर के लिए बोली लगाई है।

कागजी नोटों से कितने अलग होंगे प्लास्टिक के नोट?

लंबी उम्र और मजबूती: पॉलीमर नोट पानी, नमी और धूल-मिट्टी से खराब नहीं होते। इनकी लाइफ सामान्य कागजी नोटों के मुकाबले 6 गुना तक ज्यादा होती है।

नकली नोटों पर लगाम: इन नोटों में आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स और विंडो ट्रांसपेरेंसी जोड़ी जाती है, जिससे इनकी नकल बनाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

हाइजीनिक और साफ-सुथरे: कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट साफ रहते हैं और इनसे कीटाणु फैलने का खतरा कम रहता है।

उज्बेकिस्तान में मोदी ने छात्रों से बात की:स्टूडेंट्स ने पीएम की कविताओं को हिंदी में सुनाया; मोदी बोले- भावनाएं बिल्कुल मेरे दिल जैसी थीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे में ताशकंद के महात्मा गांधी सेंटर का दौरा किया। यहां उज्बेक छात्रों ने हिंदी में मोदी की लिखी कविताएं सुनाईं। अपनी कविताएं छात्रों से सुनकर मोदी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि हिंदी छात्रों की मातृभाषा नहीं है, फिर भी उन्होंने कविताओं की भावनाओं को बिल्कुल वैसे ही समझकर पेश किया, जैसी भावनाएं उनके दिल में थीं। मोदी ने उज्बेकिस्तान में भारत, महात्मा गांधी और तमिल संस्कृति में बढ़ती रुचि का भी जिक्र किया। उन्होंने तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने का सुझाव दिया। मोदी की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचे। दोनों देशों के बीच 11 समझौतों, एमओयू और सहमतियों का आदान-प्रदान भी हुआ। उज्बेकिस्तान में भारतीय संस्कृति का प्रभाव कार्यक्रम में भारत और भारतीय संस्कृति का अध्ययन करने वाले एक उज्बेक इंडोलॉजिस्ट ने कहा कि शायद दुनिया में बहुत कम ऐसे देश होंगे, जहां लोगों में भारत को लेकर इतना प्यार है। उन्होंने बताया कि यहां लगभग हर नागरिक ‘नमस्ते’ शब्द से परिचित है। भारतीय कला, नृत्य, संगीत, दर्शन और योग में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में हो अनुवाद PM मोदी ने तमिल साहित्य और ‘तिरुक्कुरल’ का भी जिक्र किया। उन्होंने संस्थान की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने की दिशा में काम किया जा सकता है। मोदी ने कहा भारतीय दर्शन और विचारों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की प्राचीन भाषाओं में मौजूद दार्शनिक विचार यह बताते हैं कि सभ्यता की शुरुआत से ही मानव सोच कितनी गहरी रही है। क्या है तिरुक्कुरल? तिरुक्कुरल, जिसे ‘कुरल’ भी कहा जाता है, तमिल साहित्य की एक प्रसिद्ध रचना है। इसमें नैतिकता, अच्छे आचरण और जीवन से जुड़ी व्यावहारिक सीख दी गई है। इसे कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर ने लिखा था। माना जाता है कि इसकी रचना दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के बीच हुई। यह रचना धर्म या किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है और इसे पूरी मानवता के लिए उपयोगी विचारों के लिए जाना जाता है। भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों को मिली नई मजबूती PM मोदी की 29 से 30 अगस्त तक की दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिली है। भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ से बढ़ाकर ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ कर दिया है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 11 समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत और व्यापक बनाना है। PM मोदी की यह यात्रा उज्बेक राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हुई। ————– यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की पहली रक्षा बैठक आज:इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिलेंगे; सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे
पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की पहली रक्षा बैठक आज:इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिलेंगे; सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे। पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और सेना प्रमुख एवं चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस समझौते को तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बैठक का एजेंडा फिलहाल साफ नहीं मक्का रक्षा समझौते के तहत बनी रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की पहली बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान से जुड़े हालात, रक्षा सहयोग और आपसी सुरक्षा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए आपसी तालमेल मजबूत करने पर भी विचार किया जा सकता है। बांग्लादेश ने भी दिखाई रुचि मक्का समझौते के तहत भविष्य में अन्य देशों के जुड़ने की संभावना है। बांग्लादेश पहले ही इस समझौते में रुचि दिखा चुका है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, इस्तांबुल बैठक में उसकी भागीदारी तुर्किये और सऊदी अरब के साथ मजबूत संबंधों के साथ क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चार देशों की अलग बैठक भी होगी मक्का रक्षा समझौते की बैठक के अलावा तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक अलग बैठक भी प्रस्तावित है। यह चार देशों का समूह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से मार्च में बनाया गया था। इस समूह की पिछली बैठक 5 अगस्त को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में हुई थी। उस दौरान नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया था। चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तीनों देश मक्का रक्षा समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तीनों देश अपनी-अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद चल रहा है, जबकि सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों का खतरा बना रहता है। वहीं, तुर्किये लंबे समय से कुर्द उग्रवादी समूहों के खिलाफ अभियान चला रहा है और इजराइल के साथ उसके संबंध भी तनावपूर्ण हैं। ऐसे हालात में तीनों देशों ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए यह समझौता किया है। खबर अपडेट हो रही है…

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की पहली रक्षा बैठक आज:इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिलेंगे; सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे। पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और सेना प्रमुख एवं चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस समझौते को तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बैठक का एजेंडा फिलहाल साफ नहीं मक्का रक्षा समझौते के तहत बनी रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की पहली बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान से जुड़े हालात, रक्षा सहयोग और आपसी सुरक्षा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए आपसी तालमेल मजबूत करने पर भी विचार किया जा सकता है। बांग्लादेश ने भी दिखाई रुचि मक्का समझौते के तहत भविष्य में अन्य देशों के जुड़ने की संभावना है। बांग्लादेश पहले ही इस समझौते में रुचि दिखा चुका है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, इस्तांबुल बैठक में उसकी भागीदारी तुर्किये और सऊदी अरब के साथ मजबूत संबंधों के साथ क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये की सैन्य ताकत एक साथ इस समझौते के तहत तीनों देशों की अलग-अलग ताकत एक साथ आएगी। चार देशों की अलग बैठक भी होगी मक्का रक्षा समझौते की बैठक के अलावा तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक अलग बैठक भी प्रस्तावित है। यह चार देशों का समूह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से मार्च में बनाया गया था। इस समूह की पिछली बैठक 5 अगस्त को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में हुई थी। उस दौरान नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया था। चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तीनों देश मक्का रक्षा समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तीनों देश अपनी-अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद चल रहा है, जबकि सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों का खतरा बना रहता है। वहीं, तुर्किये लंबे समय से कुर्द उग्रवादी समूहों के खिलाफ अभियान चला रहा है और इजराइल के साथ उसके संबंध भी तनावपूर्ण हैं। ऐसे हालात में तीनों देशों ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए यह समझौता किया है। ये खबर भी पढ़ें… तुर्किये जा रही फेरी बोट समुद्र में पलटी:7 की मौत, 24 लापता; 270 यात्री सवार थे, बोट के ऊपर चढ़कर जान बचाई मेडिटेरियन सी में तुर्किये जा रही फेरी बोट रविवार को समुद्र में पलट गई। यह फेरी यूरोपीय देश साइप्रस के उत्तरी तट से 270 से ज्यादा यात्रियों के साथ रवाना हुई थी। पूरी खबर पढ़ें

26वां SCO समिट आज से, PM मोदी किर्गिस्तान पहुंचे:पुतिन और जिनपिंग से एक साल में दूसरी बार मुलाकात करेंगे

26वां SCO समिट 31 अगस्त से 1 सितंबर को बिशकेक में होगा। इस समिट की मेजबानी किर्गिस्तान करेगा और अध्यक्षता सादिर जापारोव करेंगे। यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित सम्मेलन है। इस बार की थीम है- सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना। इस समिट में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। PM मोदी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। मोदी रविवार शाम को ही उज्बेकिस्तान की 2 दिन की यात्रा पूरी करने के बाद शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान रवाना हो गए थे। 2017 में भारत और पाकिस्तान पूर्ण सदस्य बने। फिर 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। 4 पॉइंट में जानें भारत के लिए SCO समिट अहम क्यों… शंघाई को-ऑपरेशन समिट (SCO) क्या है… शंघाई को-ऑपरेशन समिट की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में हुई थी।शुरुआत में इसके 6 सदस्य देश थे- चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान। आज SCO दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठनों में शामिल है, जिसमें 10 पूर्ण सदस्य देश हैं।इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा, आतंकवाद का विरोध, आर्थिक सहयोग, संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना है। अगले साल पाकिस्तान को मिल सकती है मेजबानी यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक सम्मेलन है। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह साल का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन माना जा रहा है। समिट के बाद किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होगी और 2026–27 की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है। 2025 तियानजिन डिक्लरेशन में पहलगाम हमले की निंदा हुई थी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद का तियानजिन घोषणा-पत्र में कहा गया था- “सदस्य देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमलों के दोषियों, आयोजकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।” ——————————— पीएम मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान: यह उन्हें मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान उज्बेकिस्तान के दौरे पर गए पीएम मोदी को रविवार को राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने अपने देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्लिक’ से सम्मानित किया। उज्बेक भाषा के इस शब्द का मतलब है- उच्च स्तरीय मित्रता। यह पीएम मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। रविवार रात पीएम उज्बेकिस्तान से रवाना हो किर्गिस्तान पहुंच चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर…

इंग्लैंड ने पाकिस्तान को लॉर्ड्स टेस्ट में 194 रनों से हराकर जीती टेस्ट सीरीज

ENGvsPAK

ENGvsPAK ऑली रॉबिंसन (चार विकेट), जोश टंग (तीन विकेट) और जोफ्रा आर्चर (दो विकेट) की घातक गेंदबाजी से इंग्लैंड ने पाकिस्तान को दूसरे टेस्ट के चौथे दिन रविवार को दूसरी पारी में 194 रन पर ढेरकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अपराजेय बढ़त बना ली।

आज खेल शुरू होते ही नतीजा तय था, लेकिन पाकिस्तान को अपनी भलाई के लिए कुछ दिखाना था। बैटिंग पूरे टूर में खराब रही है और बदकिस्मती से आज भी कुछ बेहतर नहीं हुआ। सीरीज़ बराबर करने के लिए 389 रन का टारगेट मिलने पर, वे कुछ ही देर में 14/3 पर सिमट गए। सऊद शकील का समय खराब रहा है और इस सीरीज़ में उनकी कुछ टेक्निकल कमज़ोरियाँ सामने आई थीं, लेकिन वह अपनी छाप छोड़ने के लिए पक्के इरादे से उतरे। उन्होंने शान मसूद के साथ चौथे विकेट के लिए 97 रन की पार्टनरशिप में दबदबा बनाया और फिर टेल के साथ अपना बल्ला चलाना शुरू कर दिया।

बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने आज़ादी से खेला और ऐसा लगा कि उन्हें शॉर्ट बॉल खेलने में मज़ा आ रहा है, जब तक कि वह 97 रन पर शॉर्ट बॉल पर आउट नहीं हो गए। बदकिस्मती से पाकिस्तान के लिए, उनका स्कोर टीम के टोटल का 50 प्रतिशत था क्योंकि बाकी रन इधर-उधर हो गए। इमाम-उल-हक ने एक बार फिर बैटिंग नहीं की और सब कुछ साफ हो गया था। ओली रॉबिन्सन ने 4 विकेट लेकर कमाल कर दिया, टंग ने आखिरी ओवरों में तीन विकेट लिए, जबकि आर्चर ने 2 विकेट लिए।

इससे पहले इंग्लैंड ने कल के सात विकेट पर 177 रन से आगे खेलना शुरू किया और उसकी दूसरी पारी 208 रन पर समाप्त हुई। इंग्लैंड ने पाकिस्तान के सामने 389 रन का लक्ष्य रखा।

संक्षिप्त स्कोरबोर्ड :इंग्लैंड 290 और 208, पाकिस्तान 110 और 194

Women’s Asia Cup 2026: एशिया कप में कैसा है भारत का शेड्यूल, इस दिन पाकिस्तान से भिड़ेगी टीम इंडिया

IND vs PAK: विमेंस एशिया कप 2026 का 10वां सीजन दुबई में खेला जा रहा है। विमेंस एशिया कप 2026 के ग्रुप स्टेज में भारतीय टीम अपने पहले मैच के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत का सामना आज थाईलैंड से दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होगा। वहीं दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला रात 8 बजे शुरू होगा। हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम जीत के इरादे से मैदान पर उतरेगी। वहीं फैंस को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले का इंतजार है। भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में डाला गया है। आइए जानते हैं किस दिन होगा भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला

कब होगा भारत का मुकाबला

विमेंस एशिया कप टूर्नामेंट के सभी मुकाबले दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाएंगे। इस बार कुल आठ टीमें खिताब के लिए मैदान में हैं, जिन्हें दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप स्टेज के बाद दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। इस बार भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है, ऐसे में 5 सितंबर को होने वाला दोनों टीमों का मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मैचों में शामिल रहेगा। वहीं मेजबान यूएई की कोशिश अपने घरेलू मैदान और परिस्थितियों का फायदा उठाकर बेहतर प्रदर्शन करने की होगी। टीम श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करना चाहेगी।

भारत के मुकाबले

  • भारत बनाम थाईलैंड- 30 अगस्त, दुबई
  • हांगकांग, चीन बनाम भारत- सितंबर 3, दुबई
  • भारत बनाम पाकिस्तान- 5 सितंबर, दुबई
  • पहला सेमी-फाइनल- 10 सितंबर, दुबई
  • दूसरा सेमी-फाइनल- 11 सितंबर, दुबई
  • फाइनल- 13 सितंबर, दुबई

एशिया कप में रहा है भारत का दबदबा

श्रीलंका इस बार विमेंस एशिया कप में अपने खिताब का बचाव करने उतरी है। टीम ने 2024 में पहली बार यह ट्रॉफी अपने नाम की थी। हालांकि, टूर्नामेंट के रिकॉर्ड को देखें तो भारत का दबदबा सबसे ज्यादा रहा है। भारतीय टीम ने अब तक खेले गए नौ एशिया कप में से सात बार खिताब जीता है, जबकि बाकी दो मौकों पर उसे उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। बांग्लादेश भी विमेंस एशिया कप का खिताब जीत चुकी है और उसने 2018 में ट्रॉफी अपने नाम की थी। थाईलैंड, इंडोनेशिया और हांगकांग, चीन ने ACC विमेंस प्रीमियर कप 2026 में शानदार खेल दिखाकर विमेंस एशिया कप में जगह बनाई है।

पीएम मोदी आज ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाएंगे:राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय बैठक, व्यापार और निवेश पर होगी बात

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

पीएम मोदी आज ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाएंगे:राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय बैठक, व्यापार और निवेश पर होगी बात

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

दिल्ली मेट्रो में खड़े दिखे पूर्व तेज गेंदबाज मैसूर एक्सप्रेस जवागल श्रीनाथ ने दिया सादगी का संदेश

दिल्ली मेट्रो में जब भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ  खड़े दिखे तो उन्हें मैट्रो में सफर करते देश कई लोग आशचर्यचकित हो गए। 90 के दशक में भारत के प्रमुख गेंदबाज एक सूटकेस लेकर कहीं जा रहे थे। उनका यह फोटो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हुआ।

जवागल श्रीनाथ जब 90 के दशक में टीम इंडिया से जुड़े तो भारतीय टीम में तेज तर्रार गेंदबाज की कमी थी।उनकी तेज गेंदो के कारण उनको मैसूर एक्सप्रेस कहा जाने लगा। उनका गेंदबाजी एक्शन एक दम किताबी था। कर्नाटक के गेंदबाज श्रीनाथ ने 4 विश्वकप खेले।

नहीं मिला वह सम्मान जिसके वह हकदार थे

पोलॉक ने वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग और इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड के साथ एक कार्यक्रम पर कहा था, ‘मुझे लगता है कि भारत के जवागल श्रीनाथ को वह श्रेय नहीं मिला जिसके वह हकदार थे।’

पोलॉक की बात से कई लोग इत्तेफाक रखते हैं। हालांकि इसका एक कारण प्रतियोगिता भी हो सकता है। श्रीनाथ के दौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की शानदार जोड़िया थी। पाकिस्तान के वसीम अकरम और वकार यूनुस, वेस्टइंडीज के लिए कर्टली एम्ब्रोस और कर्टनी वाल्श, ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्ग्रा और ब्रेट ली शामिल थे। न्यूजीलैंड की ओर से डियोन नैश और क्रिस क्रेन्स की जोड़ी थी। दक्षिण अफ्रीका टीम में खुद शॉन पॉलोक और एलेन डॉनाल्ड बहुत घातक थे।

इस कारण जवगल श्रीनाथ भारतीय फैंस के बीच तुलना के शिकार हो गए। उनकी वेंकटेश प्रसाद के साथ जोड़ी थी, इस जोड़ी ने भारत को बीच बीच में सफलता तो दिलाई लेकिन विदेशी गेंदबाजों जितनी प्रभावी यह जोड़ी नहीं थी।

ऐसा रहा करियर

जवागल श्रीनाथ 90 के दशक में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के अगुवा रहे। श्रीनाथ ने 1991 से 2003 के बीच 67 टेस्ट और 229 एकदिवसीय खेले है, जिसमें उन्होंने क्रमशः 236 और 315 विकेट लिए हैं।