F&O ट्रेडिंग में जल्द बड़ा बदलाव! लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर SEBI का ये है नया प्लान

SEBI Long Term Derivatives Market: जल्द ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के उस प्रस्ताव को मार्केट एक्सपर्ट्स और पार्टिसिपेंट्स का बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिसमें उन्होंने बाजार में लंबी अवधि के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देने की बात कही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से भारतीय कैपिटल मार्केट मजबूत होगा।

हालांकि, बाजार के दिग्गजों का यह भी कहना है कि ये लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स तभी कामयाब हो सकते हैं, जब लिक्विडिटी, मार्केट मेकिंग, मार्जिन नियमों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी जैसी ढांचागत कमियों को दूर किया जाए। आइए समझते हैं कि लॉन्ग-टर्म F&O को लेकर SEBI का क्या है पूरा प्लान और इसके सामने क्या चुनौतियां हैं।

क्यों है लॉन्ग-टर्म F&O पर सेबी का फोकस?

19 जून 2026 को हुई सेबी की बोर्ड बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि शॉर्ट-टर्म के अलावा लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स भी मार्केट में मिलने चाहिए। सेबी इस समय रिटेल निवेशकों के नुकसान को लेकर एक बड़ा स्टडी डेटा जुलाई 2026 में जारी करने वाला है, जिसके बाद डेरिवेटिव मार्केट की समीक्षा की जा रही है। सेबी का मानना है कि लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स आने से बाजार में केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म हेजिंग यानी जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन कम करना क्यों जरूरी?

हेज फंड मैनेजर मयंक बंसल के मुताबिक, भारत का मौजूदा मार्जिन फ्रेमवर्क लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स को आकर्षक नहीं बनाता। इस समय लंबी अवधि के इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर मार्जिन काफी ज्यादा है:

रेगुलर इंडेक्स डेरिवेटिव्स मार्जिन: 9.3%

लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस के लिए स्पैन फ्लोर: 17.7% (जो कि काफी ज्यादा है)

एक्सपोजर मार्जिन (ELM): 5%

सेबी के पूर्व होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण जी ने भी कहा कि लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन नियमों को तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है, लेकिन इसके लिए एक विस्तृत स्टडी और रिव्यू की जरूरत है।

मार्केट मेकर्स और STT पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

क्रॉस सीज कैपिटल के एमडी राजेश बहेती ने कहा कि इन प्रोडक्ट्स की सफलता के लिए ‘डेजिग्नेटेड मार्केट मेकर्स’ की जरूरत होगी, जो दोनों तरफ यानी बाय और सेल के कोट्स उपलब्ध करा सकें। इसके लिए उन्हें मिलने वाला इंसेंटिव ट्रांजैक्शन कॉस्ट और STT से ज्यादा होना चाहिए।

एनएमआई के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का मानना है कि शुरुआत में इन्हें इंडेक्स डेरिवेटिव्स जैसे- निफ्टी, सेंसेक्स में लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव कम होता है और मैनिपुलेशन का रिस्क नहीं रहता। बाद में इसे चुनिंदा लिक्विड स्टॉक्स में बढ़ाया जा सकता है।

क्या वीकली एक्सपायरी जैसे वॉल्यूम की बराबरी कर पाएगा लॉन्ग-टर्म?

एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि मार्जिन कम होने के बाद भी लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स कभी भी वीकली या मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स के वॉल्यूम की बराबरी नहीं कर पाएंगे। ऑप्शंस ग्रीक्स के काम करने के तरीके के कारण लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस में कम अवधि के मुकाबले प्रति यूनिट कैपिटल पर रिटर्न काफी कम मिलता है। अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे वैश्विक बाजारों में भी वीकली और शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स का वॉल्यूम ही सबसे ज्यादा रहता है, जबकि लॉन्ग-टर्म का इस्तेमाल पेंशन फंड्स और एसेट मैनेजर्स अपनी होल्डिंग को हेज करने के लिए करते हैं।

BSE के एमडी और सीईओ सुंदररमन आर ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बीएसई पहले से ही ‘BSE Focused IT Index’ और ‘Bankex’ जैसे लॉन्ग-टर्म सुइट्स पर काम कर रहा है। उन्होंने भी माना कि एसटीटी और मार्जिन फ्रेमवर्क की समीक्षा से इसे तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।

Market Outlook : बाजार में बढ़त का सिलसिला थमा, जानिए 30 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स का दो दिन से जारी बढ़त का सिलसिला 29 जून को टूट गया और बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,000 के नीचे रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 372.10 अंक या 0.48 प्रतिशत गिरकर 76,728.37 पर और निफ्टी 109.75 अंक या 0.46 प्रतिशत गिरकर 23,946.25 पर बंद हुआ। लगभग 1681 शेयरों में बढ़त हुई,2471 शेयरों में गिरावट आई और 202 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक,M&M,मारुति सुजुकी,अदाणी एंटरप्राइजेज और इंटरग्लोब एविएशन शामिल रहे। जबकि बढ़त वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर,कोल इंडिया,डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज,एटरनल और ट्रेंट शामिल रहे।

सेक्टरों की बात करें तो ऑटो इंडेक्स में 2% की गिरावट आई। जबकि PSU बैंक,मीडिया,IT और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर,मेटल,फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में 1-1% की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे आया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि US-ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के टिके रहने को लेकर निवेशकों के सतर्क नजरिए के कारण अहम साइकोलॉजिकल लेवल के पास प्रॉफिट बुकिंग जारी रही। फिलहाल बाजार में निकट भविष्य के लिए कोई साफ दिशा नहीं दिख रही है। सप्लाई की कमी,लगातार बने महंगाई क दबाव और कमजोर मॉनसून की संभावनाओं के बीच Q1FY27 अर्निंग्स सीजन को लेकर उम्मीदें कमजोर बनी हुई हैं। इन सभी का असर मार्जिन पर पड़ने की आशंका है। बाजार में हर तरफ बिकवाली रही। हालांकि,फ़ार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि इनकी मांग में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता और इनकी अर्निंग का अनुमान लगाना आसान होता है।

निवेशक US के आने वाले’नॉन-फ़ार्म पेरोल’डेटा को लेकर भी सतर्क हैं। यह डेटा फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी की दिशा पर असर डाल सकता है और ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की मौजूदा उम्मीदों को या तो मज़बूत कर सकता है या उनमें कमी ला सकता है। घरेलू बाजार से FII की निकासी में कमी और AI-आधारित ग्लोबल मार्केट के जोश का ठंडा होना,आगे चलकर बाजार के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की और पूरे समय दबाव में रहा,क्योंकि इंडेक्स ऑवर्ली चार्ट पर 50EMA के नीचे आ गया। मोमेंटम इंडिकेटर भी कमजोर रहा और RSI में’बेयरिश क्रॉसओवर’दिखा,जो बताता है कि निकट भविष्य में सेंटीमेंट कमजोर रह सकता है।

मंगलवार को NSE की मंथली एक्सपायरी के कारण एकआध दिन उतार-चढ़ाव ज्यादा रह सकता है। हालांकि,जब तक इंडेक्स 23,800 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है,तब तक शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा। जब तक निफ्टी 23,800 के नीचे नहीं जाता,तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। ऊपरी स्तर पर 24,200 के तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर काम करते रहने की संभावना है।

कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान का कहना है कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में ऊंचे लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। निफ्टी 110 अंक गिरकर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स में 372 अंकों की गिरावट आई। सेक्टर की बात करें तो फार्मा,हेल्थकेयर और मेटल इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की तेजी आई,जबकि ऑटो इंडेक्स में 1.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

टेक्निकल तौर पर सुस्त शुरुआत के बाद बाजार में पूरे दिन ऊंचे लेवल पर बिकवाली का दबाव देखा गया। डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडल’भी बनी,जो मौजूदा लेवल से और कमजोरी आने का संकेत देती है।

अब निफ्टी में 24,000 का लेवल डे ट्रेडर्स के लिए एक अहम रेफरेंस प्वाइंट होगा। इस लेवल के नीचे,निफ्टी 50-दिन के SMA(सिंपल मूविंग एवरेज)या 23,800–23,750 के लेवल को फिर से टेस्ट कर सकता है। दूसरी ओर,24,000 के ऊपर जाने पर तेजी 24,150–24,200 तक जारी रह सकती है। इंट्राडे मार्केट का ट्रेंड किसी खास दिशा में नहीं है। इसलिए,डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

 

Trading Strategy: बाजार में रीबैलेंसिंग की बिकवाली की वजह से भी बना थोड़ा दबाव,आज और कल की चाल को ना समझें बड़ा ट्रेंड

 

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New VinFast electric scooter patented in India

V

We had earlier reported that VinFast is looking to enter the electric two-wheeler market in India with some e-scooters it sells in its home market of Vietnam. The company has now filed a design patent for a sporty-looking electric scooter in our market, which resembles the Viper it sells overseas, although there are some nuanced differences between the two.

  1. Design resembles that of the Viper, sold overseas
  2. This could also be an updated version of the Viper

Like the Viper, this new VinFast scooter shown in the patent image has angular styling and runs on chunky tyres shod on large rims, presumably 14-inchers. In fact, there are some elements on this scooter that are either remarkably close or in some cases even identical to the Viper such as the tapered handlebar, mirrors, flush mount pillion footpegs, the angular tail section, five-spoke alloy wheel design and some mechanical elements like the hub-mounted motor and front disc brake.

VinFast Viper front right side static in studio
VinFast Viper image used for representative purposes only.

However, there are some visual differences, notably to the front of the scooter. Where the Viper uses a single-piece angular headlight, this new scooter has a twin-pod headlight setup. While its overall silhouette is similar to the Viper, most body panels are now more rounded than the Viper’s rather angular ones. This overarching similarity between both scooters also presents the possibility that the one featured in the design patent could be a facelifted or updated version of the Viper, although that remains to be confirmed.

While specifications for this new model are under wraps, the current-gen Viper listed on VinFast’s Vietnamese website has a 4.8kWh battery capacity, which sends power to a 3kW motor.

The company has previously stated that it is working on new India-specific electric scooters and this could be one of them. However, when VinFast will make its first electric scooter launch in India India is still unknown.

 

Bajaj Pulsar N125 discontinued in India

Bajaj Pulsar N125 headlight

Bajaj Auto has a history of discontinuing bikes that aren’t selling in good enough numbers and the Pulsar N125 is the latest example. Less than two years after it was launched in India, the bike has now been discontinued in India.

  1. First launched in October 2024
  2. Was based on an all-new platform, not shared with other Pulsars
  3. Slow sales in India have resulted in the bike being discontinued

The Pulsar N125 wasn’t just another Pulsar variant but it debuted an all new platform. This included a new engine and a brand new chassis that helped keep kerb weight down to just 125kg. The bike also debuted brand new styling which was unlike anything in the market.

Bajaj Pulsar N125 front right side static in field

While we appreciated the unusual styling direction, it appears that customers in India did not take too well to the Pulsar N125’s thin and stretched out look. This seems to have held especially true when you consider that rivals like the Hero Xtreme 125R and Honda CB125 Hornet are very popular because they look bigger and more sporty than they actually are.

The Pulsar N125’s relatively limited feature set probably didn’t do it any favours either and the bikes lacked things that you would find in some rivals, including a TFT display and ABS. While the bike continues to be displayed on Bajaj’s India website, we have learned that dispatches to dealers have ceased.

Bajaj Pulsar N125 display

However, this does not mark the complete end of the Pulsar N125 as the bike continues to be sold in multiple overseas markets. These include countries like Nepal, Peru, Colombia, Morocco and more. Whether the Pulsar N125 (or at least the platform underpinning) will make a return to India in the future with revised styling and more features remains unclear. 

Bajaj Auto outlines FY27 roadmap

Bajaj factory entrance

Bajaj Auto Chairman Niraj Bajaj has outlined the company’s key priorities for FY27 in its annual report, identifying the domestic 125cc-plus motorcycle segment, the Chetak electric scooter business and exports as its primary growth drivers. The announcement comes on the back of a record FY26, during which Bajaj Auto crossed five million annual unit sales for the first time.

  1. Bajaj Auto to strengthen 125cc-plus motorcycle business 
  2. Plans to expand Chetak brand while improving product proposition and profitability
  3. Exports to remain a major focus

Bajaj Auto FY27 priorities

KTM turnaround described as a “work in progress, well underway”

On the domestic motorcycle front, Bajaj Auto’s priority for FY27 is to strengthen its competitiveness in the 125cc-plus segment through a combination of new products, brand interventions and improved market execution. One of those products is likely to be the next-generation Pulsar, which was recently spotted testing on an all-new platform with updated styling. It is expected to be launched ahead of the festive season.

Chetak volumes reached a new high in FY26, recovering strongly in the second half of the year after supply disruptions caused by restrictions on rare-earth material exports. Looking ahead to FY27, Bajaj Auto aims to significantly accelerate the electric scooter’s growth while further strengthening its product proposition and profitability. Meanwhile, KTM and Triumph, both of which posted their best-ever performance in FY26, are also expected to maintain their momentum. 

On the export front, Bajaj Auto – which manufactures in India for over 100 countries – saw monthly volumes cross two lakh units after a prolonged gap in FY26. Latin America recorded another record year, while Sri Lanka, Nepal and the Philippines posted strong growth. In FY27, the company plans to build on that recovery while managing continued disruptions in global logistics.

Regarding KTM, Niraj Bajaj said the company had worked with the Austrian management following Bajaj’s acquisition of control in November 2025 to strengthen governance, reconstitute the board and put a new leadership team in place. “While the turnaround remains a work in progress, it is well underway,” he said, adding that Bajaj remained confident in the strength of the KTM brand and its ability to return to its earlier performance levels over time.

Darshan Nakhwa & Ketan Thakkar

Bajaj Chetak electric scooter sales cross 8 lakh milestone

Bajaj Chetak rear right side static in field

Bajaj Auto’s Chetak – India’s second bestselling electric two-wheeler – has surpassed the cumulative 8 lakh unit sales mark, six and a half years after it first went on sale. As per the latest data on the government’s Vahan portal, Bajaj has delivered a total of 8,00,085 e-scooters since January 2020 till June 27, 2026. This makes it only the third electric two wheeler manufacturer to surpass the 8 lakh unit retail sales mark after Ola Electric and TVS Motor Co, both of which have sold over 10 lakh electric two-wheelers.

Year

Retail sales

YoY % change

Total e-2W sales

Chetak % share

2020

1,243

30,144

4.12%

2021

4,765

283%

1,64,195

2.90%

2022

26,758

461%

6,61,636

4.04%

2023

75,112

181%

9,01,799

8.32%

2024

2,01,166

168%

12,14,757

16.56%

2025

2,79.685

39%

13,42,239

20.83%

2026 (Till June 27)

2,11,356

51%

9,39,659

22.49%

Total

8,00,085

 

52,54,429

15.22%

Bajaj Auto, which also manufactures EVs for Yulu, India’s largest last mile electric mobility player, and is estimated to have supplied around 30,000 low-speed electric two-wheelers to Yulu. All Chetak and Yulu models roll out of Bajaj Auto’s Chakan and Akurdi plants which have a manufacturing capacity of 4.80 lakh units per annum.

While the Chetak’s sales in the initial years were tepid mainly as a result of a nascent market and the company’s small EV-specific sales network, demand for the Chetak rose strongly in 2024 when over 2 lakh units were delivered to customers, up 168 percent YoY (CY2023: 75,112 units). This gave Bajaj Auto the No. 3 rank after Ola Electric (2,77,610 units) and TVS Motor Co (1,77,024 units). CY2025 saw the Bajaj numbers rise 39 percent YoY to 279,685 units, which made it the No. 2 e-2W OEM for the first time, behind market leader TVS (315,087 units) and ahead of Ather Energy (214,985 units).

The rapid rise in the Bajaj Chetak’s sales is reflected in its increasing market share. In 2022, the Chetak (26,758 units) had a 4 percent share of total EV sales of 6,61,636 units. Today, in the first six months of 2026, with 2,11,356 units (January 1-June 27), it has a 22 percent market share and has already achieved 76 percent of its record 2025 sales.

Halfway into CY2026, Bajaj Auto is 32,877 units behind TVS Motor Co (2,44,233 units) but ahead of Ather Energy (1,64,629 units), Hero’s Vida (1,01,996 units), Ola Electric (63,247 units) and Greaves Electric Mobility (41,803 units). Combined sales of these top six OEMs account for 8,27,264 units or 88 percent of the total 9,34,141 e-2Ws sold in CY2026 to date.

Having averaged monthly sales of over 35,000 units in the first six months of this year with robust 51 percent YoY growth, Bajaj Auto should cross the 3 lakh units sales mark by mid-August and then go on to surpass 4 lakh unit sales by the end of 2026. It will be achieving both these milestones for the first time in a calendar year.

In fact, June 2026 has turned out to be a red-letter month when it comes to electric two-wheeler manufacturers in India hitting new milestones. TVS Motor Co became the second e-2W OEM to achieve 1 million sales, Ather Energy surpassed 7 lakh unit retail sales and Greaves Electric Mobility went past 3 lakh unit retail sales

Market cues : निफ्टी के 24200 के नीचे बने रहने तक कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद, 23800–23750 पर अहम सपोर्ट

Trade setup for today : 25 जून को,तेल की कम कीमतों और VIX के निचले स्तरों के बावजूद,दूसरे हाफ में प्रॉफिट बुकिंग के कारण निफ्टी 50 दिन के हाई से थोड़ा नीचे बंद हुआ। ऊपर की तरफ 24,100–24,200 का जोन निफ्टी के लिए एक अहम रेजिस्टेंस लग रहा है,क्योंकि पिछले हफ्ते यह क्लोजिंग के आधार पर इस लेवल से ऊपर टिक नहीं पाया था। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक निफ्टी 24,200 के नीचे ट्रेड करता रहेगा,तब तक कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। इसके लिए 23,800–23,750 पर अहम सपोर्ट है। हालांकि,जानकारों का यह भी मानना ​​है कि अगर इंडेक्स मजबूती से 24,200 के जोन के ऊपर बंद होता है तो यह 24,500–24,600 के अगले अहम रेजिस्टेंस जोन तक पहुंच सकता है। इससे निफ्टी के 24,800 के स्तर की ओर बढ़ने का रास्ता साफ हो रहा है। एक्सपर्ट्स की होर्मुज जलडमरूमध्य में नए तनाव के बाद सावधानी बरतने की भी सलाह है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,034, 23,981 और 23,896

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,204, 24,256 और 24,341

डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक छोटी बेयरिश कैंडल बनाई,जिसकी ऊपरी शैडो लंबी थी। इससे पता चलता है कि अहम रेजिस्टेंस लेवल पर बुल्स को रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इंडेक्स क्लोजिंग के आधार पर गिरती हुई रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन (जो 21 अप्रैल और 18 जून के हाई को जोड़ती है) के ऊपर टिक नहीं पाया। यह क्लोजिंग के आधार पर 100-दिन के EMA के ऊपर भी नहीं टिक सका,लेकिन शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। मोमेंटम इंडिकेटर्स ने कंसोलिडेशन का संकेत दिया,क्योंकि पॉजिटिव क्रॉसओवर के बावजूद RSI 56.97 पर स्थिर रहा। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। यह सब पॉजिटिव रुझान के साथ लगातार कंसोलिडेशन का संकेत देता है,हालांकि रैली के अगले चरण को शुरू करने के लिए रेजिस्टेंस जोन के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,559, 58,699 और 58,927

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 58,103, 57,963 और 57,735

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,332, 56,465

बैंक निफ्टी 27 पॉइंट्स की बढ़त के साथ दिन के हाई के पास बंद हुआ और डेली टाइमफ्रेम पर एक रेड कैंडल बनाई,जिसके ऊपरी हिस्से में एक बड़ी शैडो (upper shadow) थी। यह ऊंचे लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग का संकेत है। इस प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना रहा,क्योंकि बैंकिंग इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था और शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज,मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बने हुए थे। RSI बढ़कर 66.60 हो गया और इसमें बुलिश क्रॉसओवर देखा गया। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। इन सबसे पता चलता है कि ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है,हालांकि मोमेंटम थोड़ा धीमा हुआ है और निकट भविष्य में कुछ कंसोलिडेशन या रेंज-बाउंड मूवमेंट जारी रह सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

25 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 383 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,747 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX निचले स्तरों और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा। इसमें 2.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 13.05 पर आ गया,जिससे बुल्स को राहत मिली। अगर यह 12 के स्तर से नीचे आता है तो बुल्स का भरोसा और बढ़ सकता है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 25 जून को पिछले सेशन के 1.21 से गिरकर 1.06 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

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Asian Market Today: एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार, कोस्पी 1% से ज्यादा गिरा, निक्केई में भी दबाव

Asian Market Today: मिडिल ईस्ट में हुए नए डेवलपमेंट के बाद सोमवार सुबह एशिया-पैसिफिक मार्केट में मिला-जुला कारोबार हुआ। जापान का निक्केई 225 0.98% गिरा, जबकि टॉपिक्स 0.21% गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.23% फिसला, जबकि कोसडैक 0.97% चढ़ा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने बढ़त के संकेत दिए। होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग जहाजों पर ईरान के हमलों के बदले में US के ईरानी मिलिट्री ठिकानों पर हमला करने के बाद वीकेंड में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया।

गिफ्ट निफ्टी 24,087 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 15 पॉइंट्स का डिस्काउंट था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए धीमी शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट शुक्रवार को AI से जुड़े चिप स्टॉक्स में भारी गिरावट के कारण नीचे बंद हुआ।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.09% गिरकर 51,876.11 पर आ गया, जबकि S&P 500 0.05% गिरकर 7,353.95 पर बंद हुआ। नैस्डैक 0.24% गिरकर 25,297.62 पॉइंट्स पर बंद हुआ। इस हफ़्ते, S&P 500 2.05% और नैस्डैक 4.7% गिरा।

एनवीडिया के स्टॉक की कीमत 1.64% गिरी, AMD के शेयर 2.06% गिरे, ब्रॉडकॉम 3.67% गिरा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 5.71% उछले, एप्पल के स्टॉक की कीमत 3.14% बढ़ी, अमेज़न के शेयर 2.50% बढ़े, मेटा 1.36% बढ़ा, जबकि अल्फाबेट के शेयर 2.19% फिसले।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 6.69% गिरे, टेस्ला के शेयर की कीमत 1.22% बढ़ी, जबकि स्पेसएक्स के शेयर 0.15% और मॉडर्ना के शेयर की कीमत 12.59% बढ़ी।

US-ईरान युद्ध

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, US और ईरान इस हफ़्ते होर्मुज स्ट्रेट और युद्ध खत्म करने के लिए दूसरे मुद्दों पर शांति वार्ता खत्म होने से पहले एक-दूसरे पर हमला करना बंद करने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने वीकेंड में एक-दूसरे पर नए हमले किए और एक-दूसरे पर सीज़फ़ायर तोड़ने का आरोप लगाया।

हालांकि खबर आई है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए ‘एक्सियोस’ (Axios) ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार 30 जून को कतर में बैठक करेंगे।

यह घटनाक्रम कई दिनों से चल रहे सैन्य टकराव के बढ़ने के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक सफलता हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष दोहा में बातचीत आगे बढ़ने के दौरान सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है।”

US कंज्यूमर सेंटिमेंट

US कंज्यूमर सेंटिमेंट जून में रिकॉर्ड निचले स्तर से वापस उछला। यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन के कंज्यूमर सर्वे ने कहा कि उसका कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स मई में 44.8 से बढ़कर इस महीने 49.5 की फ़ाइनल रीडिंग पर पहुंच गया। यह इस महीने की शुरुआत में 48.9 से थोड़ा बेहतर था। रॉयटर्स के पोल में शामिल अर्थशास्त्रियों ने इंडेक्स के 50.0 की फ़ाइनल रीडिंग तक बढ़ने का अनुमान लगाया था।

 

आज का गोल्ड रेट

US-ईरान के नए हमलों और US फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण गोल्ड की कीमतों में गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.5% गिरकर $4,067.99 प्रति औंस हो गई, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,081.20 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर 1.1% गिरकर $58.49 प्रति औंस पर आ गया।

क्रूड ऑयल की कीमतें

मिडिल ईस्ट में यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के कई दिनों तक एक-दूसरे पर हमला करने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.67% बढ़कर $72.51 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.03% बढ़कर $69.94 प्रति बैरल पर था।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।

निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।

बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।

डेट पोर्टफोलियो की रणनीति

प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।

रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी

रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।

बाजार की गिरावट में डेट का रोल?

डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।

Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।