पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट घटाना चाहते हैं? जानें स्मार्ट तरीके

पर्सनल लोन अपने तेज अप्रूवल प्रोसेस और बिना कोलेटरल (कोई एसेट गिरवी रखने की शर्त) की जरूरत के कारण भारत में एक लोकप्रिय फाइनेंसिंग विकल्प है. भारत में पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट आमतौर पर 10.5% से 24% सालाना तक होता है, जो अलग-अलग लेंडर पर निर्भर करता है. आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, जॉब स्टेबिलिटी और उम्र जैसे फैक्टर यह तय करते हैं कि आपको कितने इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलेगा.

अच्छा क्रेडिट स्कोर और स्टेबल इनकम होने पर सस्ते इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल सकता है, वहीं जॉब स्टेबिलिटी जैसे अन्य फैक्टर भी अहम भूमिका निभाते हैं. पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट नेगोशिएबल भी होता है, यानी आप अपनी फाइनेंशियल प्रोफाइल के आधार पर बेहतर शर्तों पर लोन ले सकते हैं.

आप मनीकंट्रोल (Moneycontrol) के डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर अपना क्रेडिट स्कोर फ्री में चेक कर सकते हैं. मनीकंट्रोल पर आप 10+ लेंडर के 50 लाख रुपए तक के पर्सनल लोन ऑफर भी एक्स्प्लोर कर सकते हैं. ये लोन ऑफर 9.99% सालाना के किफायती इंटरेस्ट रेट से शुरू होते हैं. इसका प्रोसेस 100% डिजिटल है, जिससे कुछ ही मिनटों या घंटों में पैसा आपके अकाउंट में आ सकता है.

पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट कम कैसे करें?

लेंडर किसी ग्राहक को कम इंटरेस्ट रेट ऑफर करने से पहले कई क्राइटेरिया देखते हैं. हालांकि, सभी लेंडर इंटरेस्ट रेट नेगोशिएशन के लिए तैयार नहीं होते.

  1. अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखें

हाई क्रेडिट स्कोर का मतलब है बेहतर क्रेडिटवर्थिनेस. जिन ग्राहकों का स्कोर अच्छा होता है, उन्हें बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन सबसे सस्ते इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन ऑफर करते हैं.

अगर आपका स्कोर 750 से कम है तो उसे सुधारने के तरीकों पर काम करें. 750 से ऊपर स्कोर होने पर आपको कम इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन मिलने की संभावना ज्यादा होती है.

  1. एक्सक्लूसिव ऑफर देखें

बैंक अक्सर त्योहारों या सालगिरह जैसे खास मौकों पर पर्सनल लोन पर कम इंटरेस्ट रेट का ऑफर देते हैं. इन ऑफर की जानकारी पाने के लिए बैंक की वेबसाइट चेक करें या कस्टमर केयर से संपर्क करें.

ऐसे प्रमोशनल पीरियड में लोन अप्लाई करने से कम इंटरेस्ट रेट मिल सकता है और रीपेमेंट आसान हो जाता है. हालांकि, हिडन चार्ज से बचने के लिए ऑफर की टर्म्स एंड कंडीशंस ध्यान से जरूर पढ़ लें.

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  1. समय पर रीपेमेंट करना न भूलें

अगर आप समय पर EMI या क्रेडिट कार्ड बिल नहीं चुकाते, तो आपका क्रेडिट स्कोर गिरता है. बैंक इंटरेस्ट रेट तय करते समय आपकी पेमेंट हिस्ट्री पर खास ध्यान देते हैं. इसलिए EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं, बार-बार लोन के लिए अप्लाई करने से बचें और क्रेडिट कार्ड यूज लिमिट कम रखें.

  1. इंटरेस्ट रेट की तुलना करें

किसी एक बैंक से पर्सनल लोन लेने से पहले NBFCs और अन्य बैंकों के इंटरेस्ट रेट ऑफर की तुलना जरूर करें. इससे आप सबसे सस्ते रेट पर लोन पा सकते हैं.

  1. फाइनेंशियल स्टेबिलिटी दिखाएं

जिन ग्राहकों की इनकम रेगुलर और स्टेबल होती है, उन्हें बैंक प्राथमिकता देते हैं. सैलरी स्लिप, ITR, जॉब लेटर और बैंक स्टेटमेंट जैसे डॉक्युमेंट देकर आप अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी साबित कर सकते हैं और कम इंटरेस्ट रेट पर लोन पा सकते हैं.

  1. सही लेंडर से नेगोशिएशन करें

लोन अप्लाई करने से पहले अलग-अलग लेंडर के इंटरेस्ट रेट, टेन्योर, अमाउंट, रीपेमेंट शर्तों और फीस की तुलना करें. अगर आप पहले से किसी बैंक के ग्राहक हैं या आपकी उस लेंडर के साथ अच्छी रिलेशनशिप है, तो आपके पास इंटरेस्ट रेट नेगोशिएट करने का मौका होता है. सस्ता इंटरेस्ट रेट लेने के लिए लोन एप्लिकेशन के साथ लिखित में रिक्वेस्ट भेजना सबसे अच्छा तरीका है. 

कुल मिलाकर, पर्सनल लोन पर कम इंटरेस्ट रेट पाने के लिए आपको अच्छे क्रेडिट स्कोर, स्टेबल इनकम और स्पेशल ऑफर पर ध्यान देना चाहिए. अलग-अलग विकल्पों की तुलना करके और शर्तों को समझकर आप बेहतर डील पा सकते हैं.

मनीकंट्रोल के ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर आप 10+ लेंडर से 50 लाख रुपए तक के पर्सनल लोन ले सकते हैं. इन पर सिर्फ 9.99% सालाना से इंटरेस्ट रेट शुरू होता है. साथ ही, इसका प्रोसेस 100% डिजिटल है और अप्रूवल भी जल्दी मिलता है.

खेत बेचने पर कितना लगता है टैक्स? ITR में कहां और कैसे दिखाएं यह कमाई, जानिए टैक्स विभाग के जरूरी नियम

Tax on Agricultural Land Sale: भारत में कृषि भूमि यानी खेत बेचने को लेकर आम तौर पर यही माना जाता है कि इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन टैक्स नियमों के मुताबिक यह पूरी तरह सच नहीं है। कृषि भूमि बेचने पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह जमीन ‘ग्रामीण’ इलाके में आती है या ‘शहरी’ इलाके में।

कई बार टैक्स न लगने के बावजूद, ITR में इस कमाई की जानकारी न देना या गलत जगह दिखाना आपको मुश्किल में डाल सकता है और इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है। आइए आपको बताते हैं कि कृषि भूमि की बिक्री पर टैक्स का क्या नियम है और इसे रिटर्न में कैसे दर्ज करें।

ग्रामीण कृषि भूमि: यहां नहीं लगता कोई कैपिटल गेन्स टैक्स

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 2(14) के तहत, ‘ग्रामीण कृषि भूमि’ को कैपिटल एसेट यानी पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है।

टैक्स छूट: चूंकि यह कैपिटल एसेट नहीं है, इसलिए इसे बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कोई ‘कैपिटल गेन्स टैक्स’ नहीं लगता है।

ITR में कहां दिखाएं: चूंकि यह कमाई पूरी तरह टैक्स-फ्री है, इसलिए इसे आईटीआर के Schedule EI यानी टैक्स-फ्री आमदनी वाले कॉलम में दिखाना चाहिए। कई लोग इसे गलती से Schedule CG में दिखा देते हैं, जिससे सिस्टम ऑटोमैटिक टैक्स कैलकुलेट कर लेता है और बेवजह परेशानी खड़ी होती है।

शहरी कृषि भूमि: देना होगा टैक्स, लेकिन यहां मिलेगी राहत

अगर आपकी कृषि भूमि ‘शहरी’ दायरे में आती है, तो इसकी बिक्री से होने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स के दायरे में आएगा। हालांकि, टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54B बनाई गई है। इसके तहत अगर आप जमीन बेचने से मिले पैसों से कोई दूसरी कृषि भूमि खरीद लेते हैं, तो आप टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

कैसे तय होता है कि जमीन ‘ग्रामीण’ है या ‘शहरी’?

कोई भी खेती की जमीन सिर्फ इसलिए ग्रामीण नहीं हो जाती क्योंकि वहां खेती हो रही है। टैक्स नियमों के अनुसार, नजदीकी नगर पालिका की आबादी और वहां से हवाई दूरी के आधार पर इसका फैसला होता है:

स्थानीय निकाय की आबादीनगर पालिका सीमा से जरूरी  न्यूनतम दूरी जमीन का वर्गीकरण
10,000 से 1 लाख के बीच2 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
1 लाख से 10 लाख के बीच6 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)
10 लाख से अधिक 8 किलोमीटर से ज्यादा दूर होना जरूरीग्रामीण (Tax-Free)

अगर जमीन इन तय सीमाओं के भीतर आती है, तो उसे ‘शहरी कृषि भूमि’ माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा।

इनकम टैक्स नोटिस से बचना है, तो पास रखें ये 4 दस्तावेज

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में इनकम टैक्स विभाग आपसे इस टैक्स छूट को लेकर स्पष्टीकरण मांगता है, तो आपके पास ये दस्तावेज होने चाहिए:

तहसीलदार का सर्टिफिकेट: स्थानीय राजस्व प्राधिकारी से मिला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र, जो नजदीकी नगर पालिका से जमीन की सटीक हवाई दूरी और वहां की आबादी की पुष्टि करता हो।

राज्य के राजस्व रिकॉर्ड: जमीन के आधिकारिक दस्तावेज जैसे 7/12 एक्सट्रैक्ट, RTC, या जमाबंदी, जो यह साबित करें कि जमीन आधिकारिक तौर पर कृषि भूमि ही है।

खेती करने का सबूत: बीज, खाद के बिल, सिंचाई के रिकॉर्ड या मंडी की रसीदें, जिससे यह साबित हो सके कि जमीन पर वास्तव में खेती की जा रही थी।

बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड: रजिस्टर्ड सेल डीड और बैंक स्टेटमेंट, जो यह साबित करें कि पूरा लेनदेन वैध तरीके से हुआ है और कोई अवैध नकद लेनदेन नहीं हुआ है।

अक्सर होने वाली गलतियां जो लाती हैं टैक्स नोटिस

पूरी तरह छिपा लेना: कई लोग सोचते हैं कि टैक्स नहीं लगना है तो आईटीआर में क्यों बताएं? यह सबसे बड़ी गलती है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जमीन की रजिस्ट्री की जानकारी टैक्स विभाग को देता है, जो आपके एआईएस (AIS) में दिखती है। अगर आप इसे ITR में नहीं दिखाएंगे, तो डेटा मिसमैच का नोटिस आ सकता है।

खेती न होने पर भी छूट का दावा: अगर कोई जमीन कृषि भूमि के रूप में दर्ज है लेकिन सालों से वहां कोई खेती नहीं हुई है, तो विभाग आपकी छूट को खारिज कर सकता है। इसलिए कृषि आय या ऑपरेशन्स का सबूत रखना बेहद जरूरी है।

1 जुलाई 2026 से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर! फटाफट चेक करें पूरी लिस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

1 जुलाई 2026 से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर! फटाफट चेक करें पूरी लिस्ट

New Financial Rules From 1 July: हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आती है। ठीक इसी तरह 1 जुलाई 2026 से भी देश में पैसों से जुड़े कई बड़े नियम बदलने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम टैक्सपेयर्स, बैंक ग्राहकों, क्रेडिट कार्ड यूजर्स और पासपोर्ट के लिए अप्लाई करने वाले लोगों की जेब पर पड़ेगा।

एक तरफ जहां पासपोर्ट बनवाना अब काफी महंगा होने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों की मनमानी और गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने पर सख्त एक्शन की तैयारी में है। आइए समझते हैं कि 1 जुलाई से कौन से 6 बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं।

1. ITR Filing: आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन नजदीक

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। अगर आप इस डेडलाइन को मिस करते हैं, तो आपको न सिर्फ लेट फीस और पेनाल्टी भरनी होगी, बल्कि आप अपनी पसंद का टैक्स रिजीम चुनने और पुराने नुकसान को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का मौका भी गंवा बैठेंगे।

2. Aadhaar Update: आधार में ईमेल अपडेट कराना हुआ बिल्कुल फ्री

आधार कार्ड धारकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। 1 जुलाई से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए रजिस्टर्ड ईमेल आईडी अपडेट करने की ₹75 की फीस को पूरी तरह माफ कर दिया है। यह विशेष सुविधा अगले 6 महीनों के लिए यानी 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह मुफ्त रहेगी। आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, डिजिटल अपडेट को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

3. Credit Card Rules: एसबीआई और एचडीएफसी कार्ड यूजर्स को झटका

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए 1 जुलाई से दो बड़े बदलाव हो रहे हैं:

SBI Card: एसबीआई कार्ड अपने कुछ चुनिंदा ‘PhonePe SBI Credit Cards’ जैसे- PURPLE और SELECT BLACK के लिए रिवॉर्ड पॉइंट्स प्रोग्राम में संशोधन कर रहा है। नए नियमों के तहत रिवॉर्ड पॉइंट अर्निंग की सीमा तय की जा रही है और कुछ ट्रांजैक्शंस को इस लिस्ट से बाहर किया जा रहा है।

HDFC Bank: एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों को अब हर तिमाही में 3 मुफ्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस तभी मिलेंगे, जब उन्होंने पिछली तिमाही में कम से कम ₹60000 खर्च किए हों। उदाहरण के लिए, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में लाउंज का फायदा लेने के लिए आपको अप्रैल-जून 2026 के बीच ₹60000 खर्च करना जरूरी था।

4. Passport Fees: अब जेब करनी होगी ज्यादा ढीली, बढ़ गए दाम

अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो 1 जुलाई से आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 के तहत फीस में बढ़ोतरी कर दी है:

सामान्य पासपोर्ट (36 पेज): इसकी फीस ₹1500 से बढ़कर अब ₹2500 हो गई है।

तत्काल पासपोर्ट (36 पेज): तत्काल पॉलिसी के तहत अब आपको ₹3500 की जगह ₹5000 देने होंगे।

60 पेज का पासपोर्ट: साधारण के लिए फीस ₹3500 और तत्काल के लिए ₹6000 तय की गई है।

5. RBI New Rules: बैंकों की मनमानी खत्म, ‘मिस-सेलिंग’ पर मिलेगा पूरा रिफंड

बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 1 जुलाई 2026 से ‘रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट’ के तहत नया सख्त ढांचा लागू कर रहा है। अक्सर बैंक कर्मचारी या एजेंट ग्राहकों को बिना बताए या गुमराह करके इंश्योरेंस पॉलिसी या अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बेच देते थे।

नए नियम के मुताबिक, अगर मिस-सेलिंग साबित होती है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा और साथ ही नुकसान के लिए मुआवजा भी देना होगा। इस नियम के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों को झांसा देने वाले ‘डार्क पैटर्न्स’ पर भी रोक लगेगी।

मिस हो गई ITR की डेडलाइन? मत होइए परेशान, इस एक तरकीब से अब भी वापस मिल जाएगा आपका टीडीएस रिफंड!

ITR Deadline Missed: क्या आपने किसी वित्तीय वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन मिस कर दी है? अगर हां, तो सबसे पहला डर यही सताता है कि जो टैक्स एडवांस में कट चुका है (TDS), क्या वह पैसा अब हमेशा के लिए डूब गया? टैक्सपेयर्स के बीच अक्सर यह उलझन रहती है कि क्या आईटीआर विंडो बंद होने के बाद भी टीडीएस रिफंड क्लेम किया जा सकता है।

जवाब है- हां, आप अभी भी अपना रिफंड पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको सही कानूनी रास्ता चुनना होगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि अपडेटेड आईटीआर भरकर रिफंड ले लेंगे, लेकिन टैक्स नियम इसके बिल्कुल उलट हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि डेडलाइन चूकने के बाद टीडीएस रिफंड वापस पाने का असली और कानूनी तरीका क्या है।

सवाल: क्या अपडेटेड आईटीआर (U-ITR) भरकर टीडीएस रिफंड मिल सकता है?

जवाब: बिल्कुल नहीं।

अक्सर टैक्सपेयर्स को सलाह मिलती है कि वे इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(8A) के तहत ‘अपडेटेड आईटीआर’ फाइल कर दें। नियम के मुताबिक, आप पिछले चार असेसमेंट ईयर के लिए यू-आईटीआर भर सकते हैं। लेकिन, इसमें एक बहुत बड़ी शर्त जुड़ी हुई है- आप अपडेटेड आईटीआर तब दाखिल नहीं कर सकते जब आपको कोई टैक्स रिफंड क्लेम करना हो या आपके ऊपर टैक्स की देनदारी शून्य से कम हो रही हो। चूंकि आप अपना टीडीएस रिफंड वापस मांग रहे हैं, इसलिए आप कानूनी रूप से अपडेटेड आईटीआर भरने के हकदार नहीं हैं।

इसके अलावा, आप किसी बीते हुए साल का टीडीएस रिफंड अगले नए फाइनेंशियल ईयर के आईटीआर में भी क्लेम नहीं कर सकते हैं। हर साल के टीडीएस का हिसाब उसी साल के रिटर्न में देना जरूरी होता है।

ये है डूबा हुआ टीडीएस वापस पाने का कानूनी तरीका

अगर रेगुलर आईटीआर की तारीख निकल चुकी है और अपडेटेड आईटीआर से रिफंड मिल नहीं सकता, तो फिर रास्ता क्या है? यहीं पर काम आती है इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119(2)(b)।

यह धारा सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस को यह विशेष पॉवर देती है कि वह उन करदाताओं को राहत दे सके जो किसी वाजिब वजह से समय पर अपना रिटर्न नहीं भर पाए थे। इसके तहत, सीबीडीटी ने 1 अक्टूबर 2024 को एक नया सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के मुताबिक, अगर कोई जेनयून मामला है, तो टैक्सपेयर ‘कॉन्डोनशेन ऑफ डिले’ यानी देरी के लिए माफी की अर्जी लगा सकता है।

माफी की अर्जी मंजूर होने की शर्तें:

अगर आप इस विशेष प्रावधान के तहत अपना छूटा हुआ टीडीएस रिफंड पाना चाहते हैं, तो आपकी अर्जी में इन बातों का होना जरूरी है:

ठोस और वाजिब कारण: आपको इनकम टैक्स विभाग को यह साबित करना होगा कि आप किसी अपरिहार्य परिस्थितियों या गंभीर कारण जैसे- बीमारी या कोई अन्य बड़ा संकट की वजह से समय पर आईटीआर नहीं भर सके।

वास्तविक कठिनाई: आपको यह दिखाना होगा कि अगर विभाग आपको रिफंड क्लेम करने की इजाजत नहीं देता है, तो आपको बड़ा वित्तीय नुकसान या वास्तविक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: कैसे मिलेगा पैसा वापस?

अर्जी दाखिल करें: सबसे पहले आपको धारा 119(2)(b) के तहत संबंधित टैक्स अथॉरिटी या सीबीडीटी के पास देरी के लिए माफी की ऑनलाइन या ऑफलाइन एप्लीकेशन देनी होगी।

आदेश का इंतजार करें: टैक्स अधिकारी आपके कारणों की समीक्षा करेंगे। अगर वे संतुष्ट होते हैं, तो देरी को माफ करने का एक आधिकारिक आदेश जारी करेंगे।

आईटीआर फाइल करें: एक बार जब आपको माफी का आदेश मिल जाता है, तो आप इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर उस आदेश का रेफरेंस नंबर दर्ज करके अपना पेंडिंग आईटीआर ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद आपका टीडीएस रिफंड प्रोसेस कर दिया जाएगा।

इसलिए, अगर आपका भी टीडीएस कटा हुआ है और आईटीआर की तारीख निकल चुकी है, तो घबराएं नहीं। अपडेटेड आईटीआर के चक्कर में पड़ने के बजाय किसी एक्सपर्ट की मदद से धारा 119(2)(b) के तहत माफी की अर्जी दाखिल करें और अपना पैसा वापस पाएं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

ITR Filing 2026: सेक्शन 87A में ₹60000 तक की टैक्स रिबेट, जानिए कौन कर सकता है क्लेम

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (FY 2025-26) के लिए ITR-1 से ITR-5 तक के फॉर्म जारी कर दिए हैं। साथ ही ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की एक्सेल यूटिलिटी भी शुरू कर दी है। इसकी मदद से टैक्सपेयर्स पहले ऑफलाइन रिटर्न भर सकते हैं। इसके बाद उसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।

अगर आप ITR भर रहे हैं, तो सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रिबेट के नियम जानना जरूरी है।

क्या है सेक्शन 87A का रिबेट?

सेक्शन 87A के तहत मिलने वाला रिबेट सीधे आपके कुल टैक्स से घट जाता है। यह टैक्स छूट (Exemption) या टैक्स डिडक्शन (Deduction) से अलग होता है। इसका मकसद कम और मध्यम आय वाले लोगों को टैक्स में राहत देना है।

कितना मिलेगा रिबेट?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है और आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये तक है, तो आपको अधिकतम 12,500 रुपये का रिबेट मिल सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं और आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये तक है, तो आपको 60,000 रुपये तक का रिबेट मिल सकता है।

इसमें ध्यान रखने वाली बात है कि यह रिबेट 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने से पहले टैक्स की रकम पर मिलता है।

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

सेक्शन 87A का फायदा सिर्फ इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को मिलता है। इसका मतलब है कि कंपनियां, HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) और NRI इसका फायदा नहीं ले सकते।

अगर आपको शेयर बेचने से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) हुआ है, तो उस टैक्स पर भी यह रिबेट नहीं मिलेगा। लॉटरी, गेम शो या दूसरी ऐसी कमाई, जिस पर विशेष टैक्स दर लागू होती है, उस पर भी यह सुविधा नहीं मिलती।

ITR में रिबेट कैसे क्लेम करें?

सबसे पहले पूरे साल की ग्रॉस टोटल इनकम निकालें। इसके बाद मिलने वाली छूट और डिडक्शन घटाकर टैक्सेबल इनकम निकालें। ITR में अपनी टैक्सेबल इनकम भरें। अगर आपकी आय तय सीमा के भीतर है, तो सेक्शन 87A के तहत रिबेट क्लेम कर दें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-2 और ITR-3 में भी यह सुविधा दी है।

क्या है मार्जिनल रिलीफ?

नए टैक्स रिजीम में अगर आपकी कमाई 12 लाख रुपये से थोड़ी ज्यादा है और बनने वाला टैक्स, 12 लाख से ऊपर की अतिरिक्त इनकम से ज्यादा है, तो आपको मार्जिनल रिलीफ मिलता है।

अब मान लीजिए आपकी टैक्सेबल इनकम 12.15 लाख रुपये है। यानी 12 लाख की सीमा से 15,000 रुपये ज्यादा। इस पर सामान्य नियम से 62,250 रुपये टैक्स बनता है।

लेकिन मार्जिनल रिलीफ मिलने के बाद आपका टैक्स घटकर सिर्फ 15,000 रुपये रह जाएगा। इस पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने के बाद आपकी टैक्स देनदारी 62,250 रुपये से घटकर 15,600 रुपये रह जाएगी।

अगर आप निकालना चाहते हैं अपना पूरा PF बैलेंस, तो जानिए इस बारे में क्या कहते हैं EPFO ​​के नियम

शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में हुआ है भारी नुकसान? तब भी क्यों जरूरी है ITR फाइल करना, जानें टैक्स छूट का यह सीक्रेट फॉर्मूला

ITR Filing Rules: क्या शेयर बाजार में मुनाफे की बजाय नुकसान होने पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए? अक्सर देखा जाता है कि जिन निवेशकों को किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इक्विटी या म्यूचुअल फंड में घाटा होता है, वे मान लेते हैं कि उन्हें ITR फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। खासकर तब, जब उनकी कोई अन्य टैक्स योग्य आय न हो।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो घाटे वाले साल में आईटीआर फाइल न करना लंबे समय में आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप अपने इस कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड का अधिकार खो देते हैं।

इसका सीधा असर यह होगा कि भविष्य में जब आपको प्रॉफिट होगा, तब आप इस घाटे को उस मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नुकसान के बावजूद आईटीआर भरना क्यों फायदेमंद है।

लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का क्या है नियम?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नुकसान के बावजूद समय पर आईटीआर भरने से आपको अपने नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने की कानूनी अनुमति मिलती है। एनए शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं कि भले ही किसी टैक्सपेयर की कोई टैक्स देनदारी न बन रही हो और सिर्फ इक्विटी या म्यूचुअल फंड से कैपिटल लॉस हुआ हो, तब भी ड्यू डेट पर या उससे पहले आईटीआर फाइल करना बेहद फायदेमंद है।

Vijay Kedia का मार्केट में कमाई का मंत्र: दिग्गज इन्वेस्टर ने समझाया मोटा पैसा बनाने का ‘एक लाइन’ का ये फॉर्मूला

समय पर आईटीआर दाखिल करने से आप इस नुकसान को अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। भविष्य के सालों में जब भी आपको शेयरों या म्यूचुअल फंड से कमाई होगी, तो आप इस पुराने घाटे को उस मुनाफे से घटाकर अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम या शून्य कर सकते हैं।

क्या इक्विटी, डेट म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF के नियम अलग हैं?

कई निवेशकों को लगता है कि यह नियम सिर्फ शेयरों के लिए है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि निवेश का माध्यम कोई भी हो, नियम सभी के लिए बिल्कुल एक समान हैं। चाहे आपका नुकसान इक्विटी शेयर्स से हुआ हो, इक्विटी म्यूचुअल फंड से हो, डेट म्यूचुअल फंड से हो या फिर गोल्ड ईटीएफ से, अगर आप इस अन-एडजस्टेड लॉस को आगे ले जाना चाहते हैं, तो आपको तय तारीख के भीतर ही आईटीआर भरना होगा। नियत तारीख चूकने पर घाटे को आगे ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इक्विटी के घाटे को क्या दूसरे एसेट्स के मुनाफे से एडजस्ट कर सकते हैं?

हां, नियमों के दायरे में रहकर आप इक्विटी के घाटे को दूसरे कैपिटल एसेट्स से हुए मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट कर सकते हैं और अपना टैक्स बचा सकते हैं:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस(STCL): अगर आपको शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुनाफा शेयरों से हो, प्रॉपर्टी बेचने से हो, गोल्ड से हो या डेट म्यूचुअल फंड से।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस(LTCL): अगर आपको शेयरों में लंबी अवधि में घाटा हुआ है, तो नियम कड़े हैं। इसे केवल और केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को कौन सा ITR फॉर्म चुनना चाहिए?

सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई या नुकसान के स्रोत क्या हैं:

ITR-2: जो निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य कैपिटल एसेट्स से होने वाले केवल कैपिटल गेन्स या कैपिटल लॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना होता है।

ITR-3: लेकिन, अगर आप शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करते हैं, जिसे टैक्स की भाषा में बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आपको ITR-3 फॉर्म चुनना चाहिए।

कैपिटल लॉस रिपोर्ट करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्सपेयर्स को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि केवल वही नुकसान आगे ले जाए जा सकते हैं जो समय सीमा के भीतर फाइल किए गए रिटर्न में दिखाए गए हों। इसके अलावा, अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, ब्रोकर स्टेटमेंट्स और कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखें, क्योंकि टैक्स अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर ये सबूत के तौर पर काम आते हैं।

गोपाल बोहरा सलाह देते हैं कि आईटीआर दाखिल करने से पहले निवेशकों को अपने AIS और TIS में दर्ज ट्रांजैक्शन का मिलान अपने ब्रोकर की रिपोर्ट से जरूर कर लेना चाहिए। आईटीआर में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म नुकसान का सही खुलासा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में टैक्स छूट का लाभ लेने में कोई रुकावट न आए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

1 जुलाई से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम; सैलरी, टैक्स, PF और क्रेडिट कार्ड यूजर्स पर पड़ेगा असर

जुलाई 2026 से कई बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं। इनका असर नौकरीपेशा लोगों, टैक्सपेयर्स, पेंशनर्स और क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों पर पड़ेगा।

इनमें EPFO की UPI से PF निकासी, ITR फाइलिंग की डेडलाइन, महंगाई भत्ता (DA) और क्रेडिट कार्ड के नए नियम शामिल हैं। अगर समय रहते इन बदलावों की जानकारी नहीं होगी, तो टैक्स फाइलिंग, बैंकिंग और दूसरे वित्तीय कामों में परेशानी हो सकती है।

ITR फाइल करने की डेडलाइन का रखें ध्यान

जुलाई में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए सबसे जरूरी काम रिटर्न दाखिल करना है। ITR-1 और ITR-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) का रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है।

वहीं, ITR-3 और ITR-4 भरने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनका टैक्स ऑडिट नहीं होता, वे 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। अगर तय समय तक ITR नहीं भरा गया, तो जुर्माना लग सकता है। कुछ टैक्स बेनिफिट्स भी नहीं मिलेंगे। साथ ही कुछ तरह के नुकसान (Loss) को अगले साल कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी नहीं मिलेगा।

UPI से PF निकालना हो सकता है आसान

जुलाई में EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। इसका मकसद EPFO की डिजिटल सेवाओं को पहले से ज्यादा आसान बनाना है।

नए सिस्टम के तहत EPF खाताधारकों को UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सुविधा मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो PF निकालने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज और आसान हो जाएगी।

DA बढ़ने का इंतजार

जुलाई में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर महंगाई भत्ते (DA) पर भी रहेगी। सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में DA की समीक्षा करती है।

इसलिए इस बार भी जुलाई में DA में बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार रहेगा। इसका फायदा केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मिल सकता है।

HDFC Bank क्रेडिट कार्ड के नियम

HDFC Bank ने अपने Regalia Gold और Diners Club Privilege क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। रिवॉर्ड पॉइंट्स से जुड़े कुछ बदलाव पहले ही लागू हो चुके हैं। अब 1 जुलाई 2026 से एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नए नियम लागू होंगे।

नए नियम के मुताबिक, Regalia Gold कार्डधारकों को मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा पाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम ₹60,000 खर्च करना होगा।

SBI Card में भी बदलेंगे नियम

SBI Card ने भी PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। इसके बाद हर महीने मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स की अधिकतम सीमा तय कर दी जाएगी।

बीमा प्रीमियम पर होने वाले खर्च और दूसरी कैटेगरी के खर्च के लिए अलग-अलग लिमिट होगी। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स भी पहले के मुकाबले कम कर दिए गए हैं।

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Passport Fee Hike: 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा, सरकार ने बढ़ाई फीस; जानिए नए रेट

Passport Fee Hike: अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या पुराना रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो आपको जेब ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने के लिए पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट नियम, 1980 में बदलाव करते हुए नई फीस तय की है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी।

सरकार ने 20 जून को जारी अधिसूचना में बताया कि पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की Schedule-IV को भी नए शुल्क के साथ बदल दिया गया है।

नए पासपोर्ट के लिए कितनी फीस देनी होगी?

अगर आप 36 पेज वाला नया पासपोर्ट बनवाते हैं या उसे दोबारा जारी (Reissue) कराते हैं, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹2,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹1,500 लगते थे। अगर आप तत्काल (Tatkaal) सेवा चुनते हैं, तो अब ₹5,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹3,500 थी।

अगर आपको 60 पेज वाला पासपोर्ट चाहिए, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹3,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹2,000 लगते थे। वहीं, तत्काल सेवा के लिए अब ₹6,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹4,000 थी।

ये नई फीस बालिगों पर लागू होगी। इसके अलावा 15 से 18 साल के वे नाबालिग भी इसी श्रेणी में आएंगे, जो बालिग कैटेगरी में पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं।

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खोया या खराब पासपोर्ट बनवाना पड़ेगा महंगा

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट के रीप्लेसमेंट की फीस में की गई है।

अगर 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो नया पासपोर्ट बनवाने के लिए सामान्य प्रक्रिया में ₹5,000 और तत्काल सेवा में ₹7,500 देने होंगे।

अगर 60 पेज वाला पासपोर्ट रीप्लेस कराना है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹6,000 और तत्काल सेवा में ₹8,500 खर्च होंगे। अगर किसी नाबालिग का 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹4,250 और तत्काल सेवा में ₹6,750 फीस देनी होगी।

PCC और दूसरी सेवाओं की फीस भी बदली

पासपोर्ट से जुड़ी दूसरी सेवाएं भी महंगी हो गई हैं। पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए अब ₹750 फीस देनी होगी। वहीं, सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी बनवाने के लिए ₹1,000 देने होंगे।

अगर ये सेवाएं विदेश में ली जाती हैं, तो इमरजेंसी सर्टिफिकेट के लिए 15 अमेरिकी डॉलर और सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी के लिए 50 अमेरिकी डॉलर फीस देनी होगी। इन सेवाओं के लिए तत्काल (Tatkaal) सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

इन्हें मिलेगी 10% तक की छूट

सरकार ने एक और राहत भी दी है। 8 साल तक के बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को नया पासपोर्ट बनवाने (फ्रेश आवेदन) पर फीस में 10% की छूट मिलेगी। हालांकि, यह छूट पासपोर्ट दोबारा जारी (री-इश्यू) कराने पर नहीं मिलेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है। यह एक यात्रा दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल विदेश यात्रा करने और विदेश में धारक की पहचान साबित करने के लिए किया जाता है।

पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ फीस बदली है। पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बालिगों को जारी होने वाला पासपोर्ट पहले की तरह 10 साल तक वैध रहेगा। वहीं, नाबालिगों का पासपोर्ट 5 साल या 18 साल की उम्र पूरी होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्या आपने निपटा लिए टैक्स से जुड़े ये 5 जरूरी काम? जेब पर भारी पड़ सकती है जरा सी भी देरी, ये है डेडलाइंस

ITR Filing 2026: नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और कंपनियों के लिए जुलाई 2026 का महीना टैक्स और कंप्लायंस के लिहाज से बेहद व्यस्त रहने वाला है। इस महीने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने से लेकर TDS जमा करने जैसी कई महत्वपूर्ण तारीखें आ रही हैं। अगर आप इनमें से किसी भी डेडलाइन को चूक जाते हैं, तो आपको भारी पेनाल्टी, लेट फीस और ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है।

अपनी जेब को नुकसान से बचाने के लिए टैक्स से जुड़ी इन 5 बड़ी डेडलाइंस को पहले ही नोट कर लें और समय रहते अपना काम पूरा करें।

1. 31 जुलाई: ITR फाइल करने की आखिरी तारीख

जुलाई महीने की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण डेडलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं को 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न हर हाल में दाखिल करना होगा। इस तारीख के बाद रिटर्न भरने पर भारी लेट फीस देनी होगी और आप अपने नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड भी नहीं कर पाएंगे।

2. 7 जुलाई: टीडीएस जमा करने की डेडलाइन

महीने की शुरुआत में ही 7 जुलाई को एक बड़ा कंप्लायंस आ रहा है। जिन करदाताओं या संस्थाओं को असेसिंग ऑफिसर से तिमाही टीडीएस जमा करने की मंजूरी मिली हुई है, उन्हें अप्रैल-जून तिमाही का टीडीएस 7 जुलाई तक जमा करना होगा। इसके अलावा, जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के दौरान मिले विशेष डिक्लेरेशन और फॉर्म्स को अपलोड करने की आखिरी तारीख भी यही है।

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3. 15 जुलाई: इन संस्थाओं के लिए बड़ी रिपोर्टिंग

15 जुलाई की तारीख सरकारी दफ्तरों, स्टॉक एक्सचेंजों, ऑथराइज्ड डीलर्स, आईएफएससी यूनिट्स और गैर-निवासी भारतीय (NRI) निवेशकों के साथ काम करने वाले बिचौलियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इन्हें इस तारीख तक अपनी जरूरी रिपोर्टिंग और टैक्स से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे।

4. 30 जुलाई: चालान-कम-स्टेटमेंट भरने की अंतिम तिथि

टैक्स कटौती करने वाले लोगों या संस्थाओं के लिए 30 जुलाई की तारीख अहम है। जून के महीने में की गई कुछ खास कैटेगरी की टैक्स कटौतियों से संबंधित चालान-कम-स्टेटमेंट को इस तारीख तक सबमिट करना अनिवार्य है।

5. 31 जुलाई: टीडीएस/टीसीएस रिटर्न और जरूरी फॉर्म्स की बाढ़

31 जुलाई सिर्फ आईटीआर के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े टैक्स कंप्लायंस के लिए भी साल का सबसे व्यस्त दिन है:

TDS/TCS तिमाही स्टेटमेंट: सैलरी से टैक्स काटने वाले एम्प्लॉयर्स और टीसीएस कलेक्ट करने वाली संस्थाओं को 30 जून को खत्म हुई तिमाही का रिटर्न 31 जुलाई तक फाइल करना होगा। इसके अलावा, अनिवासियों को किए गए गैर-सैलरी भुगतानों का तिमाही टीडीएस स्टेटमेंट भी इसी दिन तक देना है।

ये खास फॉर्म भरने की भी आखिरी तारीख: अगर आप टैक्स छूट या राहत का दावा करना चाहते हैं, तो 31 जुलाई तक ये फॉर्म जरूर भरें:

  • Form 10E: एरियर या एडवांस सैलरी पर टैक्स रिलीफ पाने के लिए।
  • Form 10BA: धारा 80GG के तहत किराए के मकान पर डिडक्शन का दावा करने के लिए।
  • Form 10H: विदेशी आय पर डिडक्शन का दावा करने वाले लेखकों और पेटेंट धारकों के लिए।
  • Form 10CCE और Form 10CCD: रॉयल्टी से जुड़ी टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए।

एक सबसे जरूरी सलाह ये है कि आखिरी दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल पर हैवी ट्रैफिक के कारण आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए आज ही अपने पेंडिंग टैक्स कंप्लायंस निपटा लें।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

ITR Filing 2026: अब तकरीबन सभी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ईमेल लिखने से लेकर निवेश और टैक्स प्लानिंग तक में लोग AI टूल्स की मदद ले रहे हैं।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए केवल सामान्य AI चैटबॉट्स पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। खासकर जब मामला कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति, क्रिप्टोकरेंसी या बिजनेस इनकम से जुड़ा हो।

AI पर पूरी तरह भरोसा करना क्यों गलत?

ClearTax के फाउंजर और CEO अर्चित गुप्ता का कहना है कि कई लोग अपना Form 16, सैलरी स्लिप और निवेश से जुड़ी जानकारी सीधे सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर रहे हैं। इससे टैक्स कैलकुलेशन में गलती होने का खतरा रहता है।

उनके मुताबिक, सामान्य AI टूल्स के पास टैक्स नियमों का तय ढांचा नहीं होता। यही वजह है कि एक ही Form 16 अपलोड करने पर अलग-अलग बार अलग टैक्स देनदारी दिख सकती है। अगर रिटर्न में कोई गलती होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होगी, AI टूल की नहीं।

डेटा लीक का भी खतरा

रिटर्न फाइल करने में AI के इस्तेमाल से डेटा लीक होने का खतरा भी रहता है। अर्चित गुप्ता के मुताबिक, सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर सैलरी स्लिप, PAN, बैंक डिटेल या दूसरे वित्तीय दस्तावेज अपलोड करना सुरक्षित नहीं है। इससे आपकी निजी जानकारी लीक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यह कई कंपनियों की डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी का उल्लंघन भी माना जा सकता है। कुछ मामलों में कर्मचारियों पर कार्रवाई तक की नौबत आ चुकी है।

AI कहां तक मददगार है?

Deloitte India के पार्टनर तरुण गर्ग का कहना है कि AI को टैक्स फाइलिंग का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह टैक्स नियम समझाने, जरूरी दस्तावेजों की सूची तैयार करने और पुराने-नए टैक्स रिजीम की तुलना करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, AI से तैयार रिटर्न को अंतिम मानने के बजाय ड्राफ्ट की तरह देखें। रिटर्न फाइल करने से पहले सभी जानकारियों का मिलान आधिकारिक दस्तावेजों से जरूर करें।

रिटर्न भरने से पहले ये जांच जरूर करें

  • AIS, TIS और Form 26AS से सभी आय का मिलान करें।
  • सही ITR फॉर्म का चयन हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
  • पुराना या नया टैक्स रिजीम सही तरीके से चुना गया है या नहीं, यह जांचें।
  • TDS और TCS क्रेडिट का मिलान करें।
  • कैपिटल गेन, क्रिप्टो, विदेशी संपत्ति और अन्य जरूरी खुलासों की दोबारा जांच करें।
  • बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI टैक्स फाइलिंग को आसान जरूर बना सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा टैक्सपेयर की ही रहती है। इसलिए ITR फाइल करते समय AI की सलाह पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल या टैक्स प्रोफेशनल की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

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