1 जुलाई से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम; सैलरी, टैक्स, PF और क्रेडिट कार्ड यूजर्स पर पड़ेगा असर

जुलाई 2026 से कई बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं। इनका असर नौकरीपेशा लोगों, टैक्सपेयर्स, पेंशनर्स और क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों पर पड़ेगा।

इनमें EPFO की UPI से PF निकासी, ITR फाइलिंग की डेडलाइन, महंगाई भत्ता (DA) और क्रेडिट कार्ड के नए नियम शामिल हैं। अगर समय रहते इन बदलावों की जानकारी नहीं होगी, तो टैक्स फाइलिंग, बैंकिंग और दूसरे वित्तीय कामों में परेशानी हो सकती है।

ITR फाइल करने की डेडलाइन का रखें ध्यान

जुलाई में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए सबसे जरूरी काम रिटर्न दाखिल करना है। ITR-1 और ITR-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) का रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है।

वहीं, ITR-3 और ITR-4 भरने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनका टैक्स ऑडिट नहीं होता, वे 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। अगर तय समय तक ITR नहीं भरा गया, तो जुर्माना लग सकता है। कुछ टैक्स बेनिफिट्स भी नहीं मिलेंगे। साथ ही कुछ तरह के नुकसान (Loss) को अगले साल कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी नहीं मिलेगा।

UPI से PF निकालना हो सकता है आसान

जुलाई में EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। इसका मकसद EPFO की डिजिटल सेवाओं को पहले से ज्यादा आसान बनाना है।

नए सिस्टम के तहत EPF खाताधारकों को UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सुविधा मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो PF निकालने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज और आसान हो जाएगी।

DA बढ़ने का इंतजार

जुलाई में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर महंगाई भत्ते (DA) पर भी रहेगी। सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में DA की समीक्षा करती है।

इसलिए इस बार भी जुलाई में DA में बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार रहेगा। इसका फायदा केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मिल सकता है।

HDFC Bank क्रेडिट कार्ड के नियम

HDFC Bank ने अपने Regalia Gold और Diners Club Privilege क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। रिवॉर्ड पॉइंट्स से जुड़े कुछ बदलाव पहले ही लागू हो चुके हैं। अब 1 जुलाई 2026 से एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नए नियम लागू होंगे।

नए नियम के मुताबिक, Regalia Gold कार्डधारकों को मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा पाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम ₹60,000 खर्च करना होगा।

SBI Card में भी बदलेंगे नियम

SBI Card ने भी PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। इसके बाद हर महीने मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स की अधिकतम सीमा तय कर दी जाएगी।

बीमा प्रीमियम पर होने वाले खर्च और दूसरी कैटेगरी के खर्च के लिए अलग-अलग लिमिट होगी। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स भी पहले के मुकाबले कम कर दिए गए हैं।

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Farmer Pension Scheme: सिर्फ 55 रुपये महीने जमा करें और 60 साल के बाद पाएं ₹3,000 मासिक पेंशन, ये किसान और मजदूर तुरंत करें अप्लाई

Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

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पीएफ का पैसा अटक गया या क्लेम हुआ रिजेक्ट? जानें EPFO में कंप्लेन फाइल करने से लेकर समाधान पाने का पूरा प्रोसेस

EPFO Grievance Management System: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) रिटायरमेंट फंड जमा करने का एक बेहद जरूरी जरिया है। अक्सर वर्किंग प्रोफेशनल्स को पीएफ का पैसा निकालने में देरी, ट्रांसफर रिक्वेस्ट अटकने, कंपनी द्वारा पीएफ का योगदान जमा न करने या केवाईसी (KYC) डिटेल्स अपडेट न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पीएफ खाताधारकों को ईपीएफओ के दफ्तर के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। EPFO एक ऑनलाइन शिकायत निवारण की सुविधा देता है। इसे EPF i-Grievance Management System (EPFiGMS) कहा जाता है। इसके जरिए पीएफ मेंबर्स, पेंशनभोगी और एम्प्लॉयर्स अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं और उनके स्टेटस को ट्रैक भी कर सकते हैं।

क्यों जरूरी है ईपीएफओ शिकायत पोर्टल (EPFiGMS)?

अगर पीएफ से जुड़ी समस्याओं को संबंधित ईपीएफओ कार्यालय के संज्ञान में न लाया जाए तो उन्हें सुलझने में लंबा समय लग सकता है। इस ग्रीवांस पोर्टल के जरिए आपकी शिकायतें सीधे आपके UAN, पीएफ अकाउंट या पेंशन रिकॉर्ड से जुड़े सही ईपीएफओ ऑफिस तक ऑटोमैटिकली पहुंच जाती हैं। एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद EPFO एक रजिस्ट्रेशन नंबर जेनरेट करता है। इसका इस्तेमाल कर आप अपनी शिकायत का स्टेट्स ट्रैक भी कर सकते हैं।

इस पोर्टल पर उठाई जाने वाली मुख्य समस्याएं:

  • पीएफ निकासी में देरी।
  • पीएफ फंड ट्रांसफर से जुड़ी दिक्कतें।
  • पेंशन से जुड़े मामले।
  • गलत व्यक्तिगत जानकारियां।
  • केवाईसी से जुड़ी गड़बड़ियां।
  • कंपनी के योगदान से जुड़े विवाद और पासबुक से जुड़ी समस्याएं।

EPFO पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का पूरा प्रोसेस जानिए

इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया काफी आसान और साफ-सुथरी है। यहां नीचे इसे स्टेप बाई स्टेप समझाया गया है-

  • पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर विजिट करें।
  • कैटेगरी चुनें: होमपेज पर दिए गए Register Grievance विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद आपको खुद को पीएफ मेंबर, पेंशनर, एम्प्लॉयर या ‘अन्य’ कैटेगरी के रूप में चुनना होगा।
  • UAN और वेरिफिकेशन: अगर आप एक पीएफ मेंबर (कर्मचारी) हैं तो अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दर्ज करें और आवश्यक वेरिफिकेशन स्टेप्स को पूरा करें। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।
  • अकाउंट का चयन: ओटीपी वेरिफिकेशन पूरा होते ही पोर्टल आपके यूएएन से जुड़े सभी पीएफ खातों की लिस्ट दिखाएगा।
  • शिकायत का ब्योरा दें: अब उस पीएफ खाते को सिलेक्ट करें जिससे जुड़ी समस्या है और सही ग्रीवांस टाइप चुनें। समस्या के बारे में पूरी और सही जानकारी विस्तार से लिखें ताकि ईपीएफओ अधिकारी आपके मामले को ठीक से समझ सकें।
  • दस्तावेज अटैच करें: आप अपनी शिकायत के समर्थन में कोई भी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट या ईमेल की इमेज भी अटैच कर सकते हैं।
  • रजिस्ट्रेशन नंबर संभालें: एप्लिकेशन सबमिट करने के बाद आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा। इस नंबर को संभाल कर रखें क्योंकि भविष्य में शिकायत को ट्रैक करने के लिए इसकी जरूरत पड़ेगी।

अपनी शिकायत का स्टेटस कैसे ट्रैक करें?

शिकायत दर्ज करने के बाद मेंबर्स जब चाहें इसका स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसके लिए दोबारा EPFiGMS पोर्टल पर जाएं और View Status पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य आवश्यक जानकारियां दर्ज करें। इसके बाद स्क्रीन पर दिख जाएगा कि आपकी शिकायत केवल दर्ज हुई है, उसकी जांच चल रही है या फिर उस पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। पोर्टल पर संबंधित ईपीएफओ विभाग की टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं भी देखी जा सकती हैं। अगर ईपीएफओ को आगे की जांच के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होती है तो यह पोर्टल यूजर्स को और दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा भी देता है।

अगर शिकायत के बाद भी समाधान न मिले तो क्या करें?

ज्यादातर मामलों में समस्याओं का समाधान EPFiGMS पोर्टल के माध्यम से ही हो जाता है। इसके बावजूद जो सदस्य अपने मामले के निपटारे के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं वे इसी पोर्टल के जरिए रिमाइंडर भेज सकते हैं। इसके अलावा वे सरकार के पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस सिस्टम के तहत उपलब्ध अन्य तरीकों से शिकायत को आगे बढ़ा सकते हैं। इंटरनेट पर शेयर किए गए कुछ हालिया अनुभवों से पता चलता है कि कुछ मामलों को EPFiGMS से आगे उच्च अधिकारियों तक भी ले जाया गया है।

ये काम की बातें भी जान लें

शिकायत दर्ज करने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि आपका UAN, आधार, पैन, बैंक डिटेल्स और केवाईसी जानकारी पूरी तरह सही और अपडेटेड है या नहीं। कई बार पीएफ क्लेम में देरी प्रोसेसिंग की गलती से नहीं बल्कि इन रिकॉर्ड्स में मिसमैच (डिटेल्स का आपस में मेल न खाना) होने के कारण होती है।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1- क्या बिना UAN के भी EPFO में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है?

उत्तर: हां। जिन व्यक्तियों के पास UAN, एस्टेब्लिशमेंट नंबर या पीपीओ PPO नंबर नहीं है वे भी Others कैटेगरी को चुनकर संबंधित ईपीएफओ कार्यालय का जरूरी विवरण देकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Q2- शिकायत दर्ज करते समय कौन से दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं?

उत्तर: मेंबर्स अपनी समस्या को बेहतर ढंग से समझाने के लिए क्लेम डिटेल्स, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट, कंपनी के साथ हुए संवाद (ईमेल आदि) और अन्य संबंधित प्रमाणों जैसे सहायक दस्तावेजों को अपलोड कर सकते हैं।

Q3- क्या शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है?

उत्तर: हां। EPFiGMS पोर्टल पर View Status की सुविधा उपलब्ध है, जहां मेंबर्स शिकायत दर्ज करते समय मिले रजिस्ट्रेशन नंबर का उपयोग करके अपनी शिकायत की प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।

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EPFO: लगातार 10 साल तक सर्विस की है तो आपको मिलेंगी पेंशन, ऐसे कर सकते हैं मंथली पेंशन का कैलकुलेशन

ईपीएफओ अपने सब्सक्राइबर्स के लिए ईपीएफ के साथ ही एक रेगुलर पेंशन स्कीम भी चलाता है। इसका नाम एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। इस स्कीम के तहत सब्सक्राइबर्स को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलती है। इसकी शुरुआत 16 नवंबर, 1995 को हुई थी। इस स्कीम ने फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 की जगह ली थी। इसका मकसद सब्सक्राइबर्स को सोशल सिक्योरिटी देना है।

हर महीने ईपीएस में भी होता है कंट्रिब्यूशन

ईपीएफ के सब्सक्राइबर्स अपनी बेसिक मंथली सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ में कंट्रिब्यूट करते हैं। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में कंट्रिब्यूट करता है। लेकिन उसका कंट्रिब्यूशन दो हिस्सों में बंटा होता है। 8.33 फीसदी कंट्रिब्यूशन ईपीएफ में जाता है और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएस अकाउंट में जाता है।

ईपीएस में हर महीने पेशन का प्रावधान

फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 के तहत सब्सक्राइबर की मौत के बाद परिवार को बेनेफिट्स मिलते थे। लेकिन, ईपीएस में सब्सक्राइबर्स को पेंशन की सुविधा भी देने की शुरुआत हुई। इतना ही नहीं, सब्सक्राइबर के परिवार को भी पेंशन का प्रावधान इस स्कीम में है। इससे रिटायरमेंट के बाद सब्सक्राइबर और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा हासिल होती है।

ईपीएस के बेनेफिट्स के लिए ये हैं शर्तें

ईपीएस का हिस्सा बनने के लिए सब्सक्राइबर्स के लिए कुछ शर्तें तय हैं। पहला, सब्सक्राइबर की नौकरी कम से कम 10 साल पूरी होनी चाहिए। इस दौरान पेंशन स्कीम में उसकी तरफ से रेगुलर कंट्रिब्यूशन किया गया होना चाहिए। सब्सक्राइबर 58 साल की उम्र में रिटायर करने के बाद ईपीएफए की तरफ से मंथली पेंशन का हकदार होगा।

न्यूनतम पेंशन हर महीने 1000 रुपये

केंद्र सरकार के 2014 के नियम के मुताबिक, ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये है। हालांकि, इसे बढ़ाकर हर महीने 7,500 रुपये करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। किसी सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट पर हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी, इसका कैलकुलेशन उसकी पेंशनएबल सर्विस और रिटायरमेंट से पहले के 60 महीनों की एवरेज सैलरी के आधार पर होता है।

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ऐसे कर सकते हैं पेंशन का कैलकुलेशन 

इसके लिए पहले से एक फॉर्मूला है। इसमें पेंशनएबल सैलरी को पेंशनएबल सर्विस से गुणा किया जाता है। फिर जो संख्या आती है, उसमें 70 से भाग दिया जाता है। पेंशनएबल सैलरी का मतलब अंतिम 60 महीनों की एवरेज सैलरी से है। अगर किसी एंप्लॉयी की पेंशनएबल सैलरी 15,000 रुपये है और उसने 10 साल की सर्विस पूरी की है तो उसकी हर महीने की पेंशन करीब 2,143 रुपये बनेगी।

EPFO Pension Rules: मृत्यु, दिव्यांगता या अर्ली रिटायरमेंट पर EPS पेंशन का क्या होता है? समझिए सभी नियम

EPFO Pension Rules: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 1995 को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन योजना समझना बड़ी भूल हो सकती है। यह सोशल सिक्योरिटी स्कीम भी है, जो कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार को भी सुरक्षा देने का काम करती है। कर्मचारी की रिटायरमेंट, दिव्यांगता या मृत्यु जैसे हालात में EPS के नियम भी अलग-अलग लागू होते हैं।

रिटायरमेंट पर कब मिलती है पेंशन?

अगर कोई कर्मचारी कम से कम 10 साल तक EPS में योगदान करता है, तो वह 58 साल की उम्र के बाद मंथली पेंशन पाने का हकदार बन जाता है। हालांकि कर्मचारी चाहे तो 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन भी ले सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में पेंशन की रकम कम हो जाती है, क्योंकि उसे तय उम्र से पहले निकाला जा रहा होता है।

दिव्यांगता की स्थिति में क्या होता है?

अगर कर्मचारी नौकरी के दौरान स्थायी और पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिल सकती है। इस मामले में सामान्य रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 साल की सेवा शर्त उसी तरह लागू नहीं होती। इसका मकसद ऐसे कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनकी कमाने की क्षमता खत्म हो गई हो।

कर्मचारी की मौत होने पर किसे मिलते हैं पैसे?

EPS की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी परिवार को सुरक्षा देता है। कर्मचारी की मौत होने पर पात्र परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन मिल सकती है। इसमें विधवा या विधुर पेंशन, बच्चों की पेंशन और कुछ मामलों में अनाथ पेंशन भी शामिल है।

यही वजह है कि EPS को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजना माना जाता है।

क्या नॉमिनी को हमेशा पेंशन मिलती है?

कई लोग मानते हैं कि EPF की तरह EPS में भी नॉमिनी को सीधे फायदा मिल जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। EPS में पेंशन का अधिकार मुख्य रूप से योजना में तय पात्र परिवार के सदस्यों को मिलता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई अविवाहित कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बना देता है, तो सिर्फ नॉमिनी होने से उस व्यक्ति को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। पेंशन का फैसला EPS के नियमों के मुताबिक होता है।

किन गलतियों से हो सकती है परेशानी?

कई परिवारों को कर्मचारी की मौत के बाद पता चलता है कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। नाम, जन्मतिथि, आधार, बैंक खाते या सर्विस रिकॉर्ड में अंतर होने से पेंशन क्लेम अटक सकता है। कई बार नौकरी बदलने के दौरान पुराने रिकॉर्ड सही तरीके से ट्रांसफर नहीं होते, जिससे सेवा अवधि का पूरा रिकॉर्ड नहीं दिखता।

इसी तरह Form 11 में गलतियां भी बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए कर्मचारियों को अपने EPF पासबुक, ट्रांसफर रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और KYC जानकारी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए।

EPS को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां

कई कर्मचारी मानते हैं कि हर EPF सदस्य अपने आप EPS सदस्य भी बन जाता है। वहीं, 1 सितंबर 2014 के बाद नियम बदल चुके हैं और सभी कर्मचारी EPS के लिए पात्र नहीं होते।

दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि EPS को लोग बचत खाते की तरह समझते हैं। जबकि यह पेंशन योजना है। इसमें मिलने वाला फायदा सेवा अवधि और पात्रता पर निर्भर करता है, न कि खाते में दिख रही रकम पर।

रिटायरमेंट प्लानिंग में EPS की क्या भूमिका है?

EPS को रिटायरमेंट की पूरी व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा देता है। कर्मचारियों को EPF, NPS, निजी निवेश और पर्याप्त जीवन बीमा के साथ अपनी रिटायरमेंट योजना बनानी चाहिए।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नौकरी के दौरान उनके सभी पेंशन रिकॉर्ड सही और अपडेट रहें। इससे भविष्य में परिवार को पेंशन पाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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Gold Price Today: सोना हुआ और सस्ता, मुंबई में ₹145850 पर आया 24 कैरेट; दिल्ली समेत दूसरे बड़े शहरों में ये है भाव

देश में सोने की कीमत और नीचे आई है। 20 जून की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत घटकर 146000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 2,840 रुपये टूटकर 1,50,600 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। मुख्य रूप से डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा। डॉलर सूचकांक एक साल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,148.45 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 146000 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 133840 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 133690 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 145850 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 148030 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135690 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 145850 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 133690 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली133840146000
मुंबई133690145850
अहमदाबाद133740145900
चेन्नई135690148030
कोलकाता133690145850
हैदराबाद133690145850
जयपुर133840146000
भोपाल133740145900
लखनऊ133840146000
चंडीगढ़133840146000

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों से संकेत मिला है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है, तो वर्ष 2026 में ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी हो सकती है। यह सोने जैसी कीमती धातुओं के लिए एक निगेटिव फैक्टर है। जून की मीटिंग में फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखा।

EPFO से यूपीआई-एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा इस महीने हो जाएगी शुरू, लेकिन टैक्स के नियम क्या होंगे?

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट है। 20 जून को कीमत घटकर 249900 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 64.73 डॉलर प्रति औंस पर है।

EPFO से यूपीआई-एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा इस महीने हो जाएगी शुरू, लेकिन टैक्स के नियम क्या होंगे?

ईपीएफओ के करीब 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स इस महीने के आखिर तक यूपीआई और एटीएम से पैसे निकाल सकेंगे। इससे पैसे निकालने के लिए मुश्किल प्रक्रिया से सब्सक्राइबर्स को छुटकारा मिल जाएगा। ईपीएफओ एक डेडिकेटेड ऐप लॉन्च करने जा रहा है। यह बैंक सब्सक्राइबर्स के बैंक अकाउंट से लिंक्ड होगा। यह भीम और दूसरे यूपीआई प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर काम करेगा।

सब्सक्राइबर्स 75 फीसदी तक पैसे निकाल सकेंगे

ईपीएफओ की यह नई सुविधा शुरू हो जाने के बाद सब्सक्राइबर्स अपने पीएफ में जमा 75 फीसदी तक पैसे निकाल सेकेंगे। अभी ईपीएफओ बुक्स में करीब 30 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। लेकिन, एक्टिव कंट्रिब्यूशन वाले मेंबर्स की संख्या करीब 7.5 करोड़ है। ईपीएफओ करीब 26 लाख करोड़ रुपये के फंड का प्रबंधन करता है।

पैसे निकालने से पहले टैक्स के नियमों की समझ जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि एटीएम और यूपीआई से पैसे निकालने की सुविधा से सब्सक्राइबर्स को काफी आसानी हो जाएगी। लेकिन, उन्हें टैक्स के नियमों का भी ध्यान रखना होगा। टैक्स के नियमों को समझे बगैर एटीएम या यूपीआई से ईपीएफ का पैसा निकालने पर सब्सक्राइबर को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।

नौकरी 5 साल से कम तो विड्रॉल पर चुकाना होगा टैक्स 

टैक्स के नियम के मुताबिक, अगर किसी सब्सक्राइबर की नौकरी के लगातार 5 साल पूरे हो गए हैं तो पीएफ के पैसे निकालने पर उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। दिक्कत उन लोगों को होती है, जो नौकरी के 5 साल पूरे होने के पहले पीएफ से पैसे निकालते हैं।

एंप्लॉयी के टैक्स-स्लैब के हिसाब से चुकाना होगा टैक्स

अगर कोई सब्सक्राइबर नौकरी 5 साल पूरे होने से पहले पैसे निकालता है तो पूरा अमाउंट इनकम माना जाता है। फिर इस पर एंप्लॉयी के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसमें एंप्लॉयर का कंट्रिब्यूशन, एक्युमलेटेड इंटरेस्ट और एंप्लॉयी के हिस्से का कंट्रिब्यूशन होता है, जिस पर उसने सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन क्लेम किया होता है। इसका मतलब है कि पहले मिला टैक्स बेनेफिट रिवर्स हो जाता है।

ज्यादा इनकम तो चुकाना होगा विड्रॉल पर ज्यादा टैक्स

इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए कोई व्यक्ति 4 साल की नौकरी के बाद पीएफ से पैसे निकालता है। विड्रॉल के समय ईपीएफओ 10 फीसदी टीडीएस डिडक्ट करेगा। इसका मतलब है कि 50,000 रुपये डिडक्ट हो जाएंगे। यह तब होगा जब ईपीएफओ के पास एंप्लॉयी के पैन की डिटेल होगी। यह डिडक्शन फाइनल टैक्स नहीं है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि पैन की डिटेल ईपीएफओ के पास नहीं होने पर टीडीएस का रेट 34.60 फीसदी लागू होता है।

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टीडीएस का पैसा कुल टैक्स लायबिलिटी में एडजस्ट होगा

जब एंप्लॉयी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करता है तो 5 लाख रुपये का पूरा अमाउंट उसकी सालाना इनकम में जुड़ जाती है। अगर एंप्लॉयी 20 फीसदी टैक्स ब्रैकेच में आता है तो पीएफ से निकाले गए पैसे पर 1 लाख रुपये का टैक्स बनता है। चूंकि, 50,000 टीडीएस पहले काटा जा चुका है, जिससे आपको सिर्फ बाकी 50,000 रुपये टैक्स का पेमेंट करना होगा। अगर एंप्लॉयी 30 फीसदी टैक्स स्लैब में है तो कुल टैक्स 1.5 रुपये बनेगा। इसका मतलब है कि एंप्लॉयी को बाकी 1 लाख रुपये का टैक्स चुकाना होगा।

EPFO Interest Rate: पीएफ धारकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने 8.25% ब्याज दर को दी मंजूरी, इसी महीने खाते में आएगा पैसा

EPFO Interest Rate: देश के 7 करोड़ से ज्यादा नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25 फीसदी की ब्याज दर को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह ब्याज इसी महीने यानी जून 2026 के अंत तक अंशधारकों के खातों में क्रेडिट किया जा सकता है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा तय की गई ब्याज दर को वित्त मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद ही खातों में डालता है, जो कि अब मिल चुकी है।

वित्त मंत्रालय से मिली फाइनल हरी झंडी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ (EPFO) के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज’ द्वारा तय की गई 8.25% ब्याज दर पर अपनी सहमति दे दी है।

इससे पहले, 2 मार्च 2026 को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई CBT की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर को 8.25% पर रखने का फैसला लिया गया था। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया था, क्योंकि भारत सरकार ही ईपीएफ की गारंटर होती है।

नए इकोसिस्टम से तुरंत क्रेडिट होगा ब्याज

श्रम मंत्रालय के निर्देश पर ईपीएफओ इसी महीने 2025-26 के लिए तय ब्याज राशि अंशधारकों के खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी में है। राहत की बात यह है कि EPFO द्वारा विकसित किए गए नए इकोसिस्टम के तहत, जैसे ही ब्याज ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होगी, पैसा तुरंत सब्सक्राइबर्स के खातों में दिखने लगेगा।

EPFO Interest Rate: पीएफ धारकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने 8.25% ब्याज दर को दी मंजूरी, इसी महीने खाते में आएगा पैसा

लगातार तीसरे साल 8.25% ब्याज बरकरार

यह लगातार तीसरा साल है जब ईपीएफओ ने अपनी ब्याज दर को 8.25% पर बरकरार रखा है:

पिछले साल फरवरी, 2025 में भी EPFO ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8.25% ब्याज दर को बनाए रखा था।

साल 2024 में ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए इसे 8.15% से मामूली बढ़ाकर 8.25% किया था।

मार्च 2022 में, EPFO ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर को घटाकर 8.10% कर दिया था, जो 1977-78 (जब दर 8% थी) के बाद से सबसे कम थी। इसके बाद से दरों में सुधार हुआ और अब यह लगातार तीसरे साल 8.25% पर बनी हुई है।

EPFO 3.0: अब UPI और ATM से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा! जानें नया नियम, विड्रॉल लिमिट और पूरी डिटेल

EPFO 3.0 UPI and ATM Based PF Withdrawal: नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तरफ से एक बहुत बड़ा अपडेट आ रहा है। सरकार जल्द ही EPFO 3.0 लॉन्च करने जा रही है, जो पीएफ सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस और पारदर्शी बना देगा।

इस नए अपग्रेड के बाद ईपीएफओ मेंबर्स जरूरत पड़ने पर सीधे UPI और ATM के जरिए भी अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पुष्टि की है कि इस नए सिस्टम की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसके रोलआउट की घोषणा की जाएगी।

अगर आप भी पीएफ खाताधारक हैं, तो आइए जानते हैं कि इस नए सिस्टम में क्या-क्या बदलने वाला है और आप कितना पैसा निकाल पाएंगे।

UPI और ATM से कब शुरू होगी पैसे निकालने की सुविधा?

EPFO ने इस नए आधुनिक सिस्टम की टेस्टिंग का काम पूरी तरह खत्म कर लिया है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इसकी लॉन्चिंग की किसी सटीक तारीख या महीने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि इसे जल्द ही लाइव कर दिया जाएगा।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

EPFO 3.0 लागू होने के बाद सब्सक्राइबर्स सीधे अपने आधार-लिंक्ड और सीडेड बैंक खातों के माध्यम से एटीएम या यूपीआई का उपयोग करके पीएफ राशि को तुरंत ट्रांसफर या विड्रॉ कर सकेंगे। इससे कागजी कार्रवाई और क्लेम सेटलमेंट में होने वाली देरी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।

कितना पैसा निकाल सकेंगे मेंबर्स? जानें लिमिट

नए नियमों के तहत, जब यह सुविधा लाइव हो जाएगी, तब योग्य मेंबर्स अपने कुल ईपीएफ (EPF) बैलेंस का 50% से 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे। लंबी अवधि की बचत और रिटायरमेंट सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुल कॉर्पस का कम से कम 25 फीसदी हिस्सा हमेशा खाते में लॉक रहेगा। इसे मेंबर्स नहीं निकाल पाएंगे, क्योंकि ईपीएफओ का मुख्य उद्देश्य भविष्य की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

ऑटो-सेटलमेंट की लिमिट बढ़कर हुई ₹5 लाख

EPFO 3.0 के तहत सरकार ने एक और बड़ा तोहफा दिया है। ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹5 लाख कर दिया गया है। इस बदलाव की वजह से जैसे ही नया सिस्टम पूरी तरह काम करना शुरू करेगा, पात्र क्लेम का सेटलमेंट महज कुछ ही दिनों के भीतर ऑटोमैटिक हो जाएगा।

EPFO 3.0 के तहत सरकार ने एक और बड़ा तोहफा दिया है। ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹5 लाख कर दिया गया है

क्या-क्या अन्य बदलाव होंगे?

EPFO 3.0 का उद्देश्य केवल पैसे निकालने की सुविधा देना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को आसान बनाना है। इसके तहत ये प्रमुख डिजिटल बदलाव भी देखने को मिलेंगे:

  • उमंग ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा मिलेगी।
  • इंस्टेंट UAN एक्टिवेशन और पीएफ पासबुक तक तुरंत पहुंच आसान होगी।
  • आधार-लिंक्ड डिवाइसेज के माध्यम से प्रोफाइल में नाम, जन्मतिथि जैसी गलतियों को सुधारना बेहद सरल हो जाएगा।

कुल मिलाकर, EPFO 3.0 के आने से पीएफ खाताधारकों को रियल-टाइम डिजिटल एक्सेस मिलेगा, जिससे क्लेम में होने वाली गलतियां, धोखाधड़ी और देरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। हालांकि, एटीएम और यूपीआई सुविधा का लाभ उठाने के लिए मेंबर्स को सरकार की आधिकारिक लॉन्चिंग का थोड़ा इंतजार करना होगा।