ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

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Iran assassination plot: गत 7 और 8 जुलाई को तुर्किये की राजधानी अंकारा में जब अमेरिका और यूरोप के “उत्तर अटलांटिक संधि संगठन” नाटो (NATO) का शिखर सम्मेलन चल रहा था, तब एक ऐसी महा भयावह घटना होते बाल-बाल रह गई, जो अन्यथा तीसरे विश्वयुद्ध का बिगुल बजा देती।

 

ईरान उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की हत्या की ताक में था। भौगोलिक दूरी की दृष्टि से वे ईरान के जितने निकट उस समय थे, उतने शायद फिर कभी नहीं होते।

 

इसराइली टेलीविज़न चैनल 13 की एक रिपोर्ट में, सीनियर सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ट्रंप की हत्या की कोशिश के संकेत मिलने पर, इसराइल द्वारा इसकी गोपनीय जानकारी तुरंत अमेरिका को दे दी गई। जानकारी में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी का यह उद्धरण भी शामिल था: “यह हमारा मौका है, इससे बेहतर कोई मौका नहीं मिलेगा।” यह कथन साफ़ तौर पर ट्रंप के तुर्की में होने से संबंधित था।

मोसाद ने अमेरिका को सजग किया

चैनल 13 की बताई रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी में शामिल पश्चिमी गुप्तचर सेवाओं की पहचान इसराइल की गुप्तचर एजेंसी मोसाद के तौर पर हुई है। समझा जाता है कि ईरान के किसी संभावित षड़यंत्र का शिकार बनने से बचने के लिए ही ट्रंप ने अंकारा से अमेरिका वापस जाने के लिए अपना विमान अकस्मात बदल दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा— ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के समापन के बाद— क़तर से मिले अपने निजी नए विमान के बदले अपने पुराने सरकारी “एयर फ़ोर्स वन” से स्वदेश लौटे। ALSO READ: अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?

 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने जिन स्रोतों का उल्लेख किया है, उनसे पता चलता है कि यह आकस्मिक निर्णय अमेरिकी “सीक्रेट सर्विस” की तरफ़ से सावधानी के तौर पर मिले एक खास “सुरक्षा परामर्श” के बाद लिया गया था; शुरू में इसे किसी खास ख़तरे से नहीं जोड़ा गया था।

 

लेकिन, बाद की रिपोर्टों ने इस निर्णय को “ईरानी षड़यंत्र” के बारे में मिली गुप्तचर जानकारियों से जोड़ा। यह भी कहा गया कि क़तर से ट्रंप को जो विमान उपहार में मिला है, उसमें अभी उनके मूल आधिकारिक विमान “एयर फ़ोर्स वन” जैसी सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं और क्षमताएं नहीं हैं।

अंकारा से उड़ान को अजीब बताया गया

कहा जा रहा है कि ट्रंप अपने पुराने विमान में बहुत जल्दी से चढ़ गए, इससे पहले कि उनके साथ के पत्रकार उन्हें सीढ़ियां चढ़ते हुए देख पाते या उनके फ़ोटो ले पाते। उन्होंने जो उतावली दिखाई, वह स्थापित परिपाटी से अलग थी।

 

इसराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने अमेरिकी टेलीविज़न चैनल “फॉक्स न्यूज़” को दिए एक इंटरव्यू में इन रिपोर्टों की पुष्टि की और कहा, “इसराइली गुप्तचर सेवा ने ट्रंप और उनके प्रसाशन को एक बहुत ख़ास हत्या की कोशिश के बारे में जानकारी दी थी, जिसे ईरानियों ने राष्ट्रपति के खिलाफ रची थी।”  ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

ट्रंप ने कहा, “मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं”

ट्रंप ने नाटो के शिखर सम्मेलन में भी इस सारे प्रकरण का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए कहा था: “वे (ईरानी) US लीडर को, मुझे, ख़त्म करना चाहते हैं। मैं हर लिस्ट में हूं। मैं उनकी हर एक लिस्ट में हूं, और अब तक मुझे लगता है कि मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं, लेकिन शायद यह ज़्यादा दिन नहीं चलेगा, क्योंकि ऐसा ही होता है।”

 

इस बीच, ईरान के एक अख़बार “हमशहरी” ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिश मेर्त्स सहित पश्चिमी देशों के कई शीर्ष नेताओं से बदला लेने की धमकी दी है। कुछ जर्मन नेता इस धमकी पर चिंता जताते हुए ईरानी राजनयिक प्रतिनिधियों को देश से बाहर निकाल देने की मांग कर रहे हैं। इस मांग में सत्तरूढ़ गंठबंधन की तीनों पार्टियों सहित, सरकार की अन्यथा मुखर आलोचक, पर्यावरणवादी ग्रीन पार्टी भी शामिल है।

मुल्ला शासन की कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक

जर्मनी के सत्तरूढ़ गबंधन की मुख्य पार्टी “क्रिश्चन डेमोक्रैटिक यूनियन” के एक नेता रोडेरिश कीज़वेटर ने अख़बार “हांडेल्सब्लाट” से कहा, “मेरा मानना है कि यह आतंकी शासन काफी समय से पश्चिम में—और विशेषकर जर्मनी में—लक्ष्यबद्ध हत्याओं और आतंकी हमलों की योजना बना रहा है और उनकी तैयारी कर रहा है।…यह मुल्ला शासन देश और विदेश, दोनों जगहों पर कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक के ज़रिए खुद को मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।…यह और भी हैरानी की बात है कि हमने ईरानी “राजनयिकों” को बहुत पहले ही देश से बाहर नहीं निकाल दिया, बल्कि इसके बजाय तुष्टीकरण का रास्ता चुना।”

 

ईरान में काफ़ी अधिक बिक्री वाले “हमशहरी” नाम के इस दैनिक ने एक ग्राफ़िक छापा है, जिसमें जर्मनी के चांसलर मेर्त्स समेत कई पश्चिमी नेताओं से बदला लेने की बात कही गई है। अख़बार ने अपने लेख को शीर्षक दिया है: “उन लोगों की सूची, जिन्हें ईरानी लोगों के बदले का सामना करना होगा।”

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13 शीर्ष पश्चिमी नेता ईरान के निशाने पर

इस सूची में 13 शीर्ष पश्चिमी नेताओं के नाम हैं, जिन्हें अब ईरान के सर्वोच्च मज़हबी और राजनीतिक नेता रहे अली खामेनेई की मौत का “हर्जाना” भुगतना पड़ सकता है। जर्मन चांसलर के अलावा, इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों, इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और ब्रिटेन के निवर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नाम शामिल हैं।

 

“इस तरह की कोई सूची लगभग निश्चित रूप से मुल्ला शासन की मंज़ूरी— या सीधे निर्देश के बिना नहीं बन सकती”— कहना है जर्मनी की ग्रीन पार्टी के संसदीय दल के उपप्रमुख कोंस्तातिन फॉन नोज़ का। वे मानते हैं कि जान से मारने की ये धमकियाँ दूसरे देशों से जुड़े मामलों की तुलना में तनाव का एक नया स्तर दिखाती हैं।

प्रतिशोध की मांग मोजतबा खामेनेई कर रहे हैं

यह सारी बयानबाज़ी तब शुरू हुई, जब अयातोल्ला खामेनेई के घायल बेटे, मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने की कसम खाई। कहा जा रहा है कि यह बात उन्होंने अपने पिता के अंतिम संस्कार के दौरान जारी एक बयान में कही है। इसके अलावा, ईरानी गुप्तचर सूत्रों ने भी अमेरिकी नेतृत्व के विरुद्ध ठोस और नए ख़तरों की ओर ख़ास तौर पर इशारा किया है।

 

पर, प्रतिशोध की आग से धधक रहे ईरान के धर्मांध सत्ताधारी यह सोचने में असमर्थ हैं कि यदि इन सभी 13 देशों के सर्वोच्च नेता एकजुट हो गए, तो उनकी सम्मिलित सैन्य शक्ति ईरान का वही हाल कर सकती है, जो अमेरिका ने अकेल ही 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर दो परमाणु बम गिराकर जापान का कर दिया था।

Middle East War: बहरीन में US नेवी बेस पर ईरान का भीषण हमला! अमेरिका से दो-दो हाथ करने को तैयार, तेल सप्लाई रोकने का दिया अल्टीमेटम

Iran US Conflict Middle East Oil Gas Crisis: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर बड़े हमले का दावा किया है। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए भी नहीं।

दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी इस हमले का करारा जवाब देते हुए ईरान के तटीय इलाकों में भारी बमबारी की है। आइए इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की बड़ी वजहों को समझते हैं।

ईरान ने अमेरिकी नेवी बेस पर कैसे किया हमला?

ईरानी सेना IRGC के आधिकारिक बयान के मुताबिक, उन्होंने ‘ऑपरेशन नसर 2’ के तहत पांचवें चरण के हमलों को अंजाम दिया है। इस ऑपरेशन को ‘मुबारक या अली इब्न अबी तालिब (AS)’ कोडनेम दिया गया था।

ईरान का दावा है कि बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के बेस पर किए गए इस हमले में वहां के एनएसआई मैनेजमेंट सेंटर, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, सैन्य उपकरणों और पुर्जों से भरे बड़े गोदामों और ईंधन टैंकों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।

ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने हिंद महासागर में अपने नौसैनिक बल तैनात कर दिए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा करके दुनिया के लिए तेल-गैस का रास्ता बंद कर दिया है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका की इसी ‘गुंडागर्दी’ का जवाब है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई: 7 घंटे तक बरसे बम

बहरीन में अपने बेस पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के तटीय इलाकों के पास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगातार 7 घंटे तक हवाई हमले किए।

इस कार्रवाई में अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोनों और युद्धपोतों ने सटीक मार करने वाले हथियारों से ईरान की मिसाइल और ड्रोन साइटों, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। अमेरिका ने घोषणा की है कि उसने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ फिर से समुद्री नाकेबंदी शुरू कर दी है।

क्या रुक जाएगी मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई?

ईरान की इस नई धमकी ने दुनिया भर के बाजारों में खलबली मचा दी है। ईरान के सैन्य संगठन IRGC ने साफ तौर पर कहा है कि अगर अमेरिका हिंद महासागर के रास्ते तेल और गैस के निर्यात को बाधित कर उसके आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के तेल निर्यात वाले रास्तों को भी बंद कर दिया जाएगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच यह जंग और खिंचती है, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और एक नया ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।

Crude Oil News: फिर $100 के पार जाएगा कच्चा तेल? इन बातों से तय होगी चाल

Crude Oil News: कच्चे तेल में एक बार फिर उबाल आ रहा है। एमएसटी मार्की (MST Marquee) के एनर्जी रिसर्च हेड सॉल कावोनिक (Saul Kavonic) का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नई दिक्कतों ने वैश्विक ऑयल मार्केट की तस्वीर बदल दी और सप्लाई से जुड़ा रिस्क फिर से बढ़ने के चलते इसकी कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती है। सॉल का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है।

इन बातों से तय होगी कच्चे तेल की चाल

सॉल का कहना है कि नियर टर्म में तेल की कीमतें किस तरफ बढ़ेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई किस तरह आगे बढ़ती है। अगर तनाव हल्का होता है, तो हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 10% की बढ़ोतरी घट सकती है लेकिन अगर लड़ाई लंबी खिंचती है या एनर्जी इंफ्रा पर हमले होते हैं, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई एक बार शुरू होने पर ब्रेंट क्रूड उबल पड़ा और प्रति बैरल $85 के करीब पहुंच गया। इससे पहले सीजफायर की उम्मीदों और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावना के चलते तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर माना जा रहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई होगी तो सप्लाई सरप्लस हो जाएगी लेकिन पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा तो माहौल बदल गया। इस रास्ते से गुजरने वाला तेल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में सिर्फ 15% ही रह गया है। मार्केट में सप्लाई की कमी बनी हुई है और मांग पूरी करने के लिए इन्वेंट्री पर निर्भरता बनी हुई है। सॉल का कहना है कि तेल की कीमतों में तब तक कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 30-50% तक वापस नहीं आ जाता जिससे ज़्यादा कच्चा तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुँच सके।

Iran-US War से कितनी बदल पाएगी स्ट्रैटेजी?

सॉल का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खाड़ी देशों में एनर्जी सिक्योरिटीज से जुड़ी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि तेल निकालने वाले देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक्सपोर्ट के वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही ऐसी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना का ऐलान किया जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरती लेकिन सॉल के मुताबिक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कई साल लगेंगे। इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट रूट के मामले में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत होगी, यानी कि आने वाले समय में भी होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट बने रहने की उम्मीद है।

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सूरज के मरने पर पृथ्वी का क्या होगा?

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निखिल रंजन

जब हमारा सूरज अपने मरने की प्रक्रिया की शुरुआत में अपना आकार बढ़ाना शुरू करेगा और आसपास के ग्रहों को निगल जाएगा। तब पृथ्वी का क्या होगा? ALSO READ: ईरान और अमेरिका समझौते के रास्ते से क्यों भटक गए?

 

अब से लगभग पांच अरब साल के बाद सूरज के मरने की इस प्रक्रिया के बाद इसके बाहरी सिरे इससे अलग होना शुरू कर देंगे और फिर एक व्हाइट ड्वार्फ यानी सफेद बौना तारा बचा रह जाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया में हमारे सौरमंडल के बाहरी ग्रह शायद इस खगोलीय प्रक्रिया की आपदा से बच कर उसके बाद भी जिंदा रहेंगे, और पृथ्वी? इसका जवाब पाने से पहले आइए तारों की मौत और उसके बाद की प्रक्रिया को एक एक्सोप्लेनेट की मदद से समझते हैं।

 

तारे की मौत के बाद बचा एक्सोप्लेनेट

रिसर्चरों ने बृहस्पति जैसे एक एक्सोप्लेनेट का विस्तृत अवलोकन पूरा कर लिया है। हमारे सौरमंडल से बाहर के ग्रहों को एक्सोप्लेनेट (बाहरी ग्रह) कहा जाता है। यह एक्सोप्लेनेट सूरज जैसे अपने तारे की मौत के बाद भी अरबों साल तक जीवित रहा। यह पृथ्वी से करीब 81 प्रकाश वर्ष दूर ड्राको नक्षत्र में मौजूद है। एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश की किरणें एक साल में तय करती हैं यानी लगभग 9।5 खरब किलोमीटर। इसे डब्ल्यूडी 1856 बी नाम दिया गया है।

 

रिसर्चरों ने बताया है कि इस गैसीय ग्रह का भार बृहस्पति के भार से करीब आठ गुना ज्यादा है। इसके वातावरण का तापमान करीब 127 डिग्री सेल्सियस है और यह अप्रत्याशित रूप से काफी गर्म है।

 

इसकी कक्षा व्हाइ़ट ड्वार्फ से काफी करीब है और समय गुजरने के साथ यह और करीब जा रही है। सूर्य से पृथ्वी की करीबी की तुलना में यह अपने सफेद बौने तारे से 50 गुना ज्यादा करीब है। इसे अपनी परिक्रमा पूरी करने में महज 1.4 दिन का समय लगता है। 

 

डब्ल्यूडी 1856 यह दिखाता है कि तारे की मौत के बाद भी कुछ ग्रह कैसे बचे रह सकते हैं, यानी की हमारे सूरज की मौत के बाद भी कुछ ग्रह कैसे बचे रहेंगे। हालांकि यह ग्रह जिन परिस्थितियों का अनुभव कर रहा है, वे सूरज की मौत के बाद जो ग्रह बचेंगे उनकी परिस्थितियों से काफी अलग हो सकती हैं। ALSO READ: जर्मनी: 23 सालों में सबसे जानलेवा रहा जून का महीना

 

डब्ल्यूडी 1856 बी सफेद बौने तारे के करीब पहुंचा

यह ग्रह एक बेहद असाधारण गुरुत्वीय वातावरण का सामना कर रहा है क्योंकि यह सफेद बौना तारा एक तीन तारे वाले मंडल का हिस्सा है। इसमें एक सफेद बौना तारा के अलावा दो लाल बौने तारे भी हैं। इनमें से हरेक का भार हमारे सूरज की तुलना में करीब 30 फीसदी है। वास्तव में जब हमारे सूरज जैसे किसी मध्यम आकार के तारे का ईंधन (हाईड्रोजन) खत्म हो जाता है तो वह पहले लाल दानव तारा बनता है और उसके बाद उसकी बाहरी परतें अंतरिक्ष में फैल जाती हैं और फिर उनका अत्यंत संघनित गर्म केंद्र सफेद बौना तारा के रूप में बच जाता है। रिसर्चर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि डब्ल्यूडी 1856 आखिर सफेद बौने तारे के इतना करीब क्यों है?

 

एक तारे की मौत के बाद उसके चारों ओर पैदा हुआ विक्षोभ जिसकी तस्वीर चिली के अत्यंत शक्तिशाली दूरबीन से ली गई है 

 

इलिनॉय की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिस्ट क्रिस्टोफर ओ' कोनर का कहना है, “आज डब्ल्यूडी 1856 को हम जिस करीबी कक्षा में देख रहे हैं उसकी वजह को लेकर दो विचार हैं जो एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।” नेचर जर्नल में छपी रिपोर्ट के लेखकों में ओ' कोनर भी शामिल हैं।

 

एक विचार के मुताबिक यह ग्रह अपने तारे के मौत की प्रक्रिया के दौरान उसकी चपेट में आ गया हालांकि यह तारे के विस्तार के दौरान उसके बाहरी हिस्से में ही रहा और जब वह लाल दानव से सफेद बौना तारे में बदला तो वह उससे बचने में सफल रहा। दूसरा विचार कहता है कि यह ग्रह अपने तारा से पर्याप्त दूरी पर था और उसकी मौत के दौरान निगले जाने से बच गया। हालांकि बाद में आसपास की दूसरी चीजों मसलन दो लाल दानवों के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण खिंच कर मौजूदा कक्षा में पहुंच गया। ALSO READ: चीन के मिसाइल परीक्षण से किन देशों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ी

 

तारे की मौत के बाद भी ग्रह के बचने का सबूत

डब्ल्यूडी 1856बी की खोज के बारे में जानकारी 2020 में दी गई थी। यह पहला ऐसा ठोस सबूत है जो बताता है कि सूरज जैसे तारे की मौत के बाद भी ग्रह बचे रह सकते हैं। नई रिसर्च ने इस ग्रह के घटकों और उसकी जीवन यात्रा के बारे में अहम जानकारियां दी हैं।

 

रिसर्चरों ने जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप की मदद से इसका अध्ययन किया है। यह बृहस्पति की तरह ही मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम से बना है हालांकि इसमें मीथेन गैस की भारी मात्रा भी मौजूद है जो असामान्य है। रिसर्चरों ने इस ग्रह की गर्मी का कारण सफेद बौने तारे से इसके संपर्क को माना है जो मजबूत गुरुत्वीय बल के कारण इसे और पास ला रहा है।

 

आमतौर पर तारे अपने ग्रहों की तुलना में बहुत बड़ होते हैं। सूरज का आकार बृहस्पति की तुलना में करीब 1,000 गुना ज्यादा बड़ा है। यह ग्रह सफेद बौने तारे की तुलना में करीब 500 गुना ज्यादा बड़ा है। सफेद बौना तारा आकार में पृथ्वी से थोड़ा सा बड़ा है। हालांकि यह बहुत ज्यादा भारी है।  सफेद बौना तारा जिस तारे से बना होगा उसका आकार हमारे सूरज की तुलना में करीब दोगुना ज्यादा होगा। यह तारा करीब 5 अरब वर्ष पहले मरा था।

 

हमारे सौरमंडल का भविष्य

जब हमारा सूरज अपने लाल दानव वाले उम्र में पहुंचेगा तो यह वर्तमान आकार के करीब 200 गुना ज्यादा बड़ा हो जाएगा। निश्चित रूप से यह तब सबसे करीब के बुध और शुक्र ग्रहों को निगल जाएगा। ओ' कोनर का कहना है, “पृथ्वी से बाद के बाकी ग्रह सूरज के अधिकतम आकार की सीमा से बाहर रहेंगे तो इस बात के प्रबल आसार हैं कि वे सूरज के पीछे छूटे सफेद बौने तारे की परिक्रमा करते रहेंगे।”

 

ओ' कोनर के मुताबिक, “सूरज सफेद बौना तारा बनने पर अपना लगभग आधा भार खो देगा तो हम उम्मीद कर रहे हैं कि बचने वाले ग्रह धीरे धीरे उससे अलग होते रहेंगे, जब तक कि वे अपने मौजूदा कक्षा की दूरी से दुगुनी दूरी तक ना पहुंच जाएं।”

 

ऐसे में पृथ्वी का भविष्य अनिश्चित है। ओ' कोनर ने कहा, “हम पृथ्वी की भविष्य की कक्षा की अनुमान नहीं लगा सकते कि जब सूरज अपने उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचेगा तो यह डेंजर जोन के बाहर होगी या भीतर। सौभाग्य से इस समस्या के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हमारे पास अरबों साल हैं।”

GIFT Nifty Indictor: ग्लोबल बाजारों की तेजी क्या भारतीय बाजार पर दिखाएगी अपना असर या करेगी निराश, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे संकेत

GIFT Nifty Indictor: भारतीय स्टॉक मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50, बुधवार को मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के साथ धीमी शुरुआत कर सकते हैं। वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों से मिले पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों ने मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों को लेकर चिंताओं को कम कर दिया।

GIFT निफ्टी सुबह करीब 8:15 बजे 28.50 पॉइंट यानी 0.12 फीसदी की बढ़त के साथ 24,047 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे पता चलता है कि निफ्टी 50 मंगलवार के 24,052.05 के बंद स्तर के पास खुल सकता है।

यह सुस्त संकेत मंगलवार को भारतीय इक्विटी के तेजी से नीचे बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 561.46 पॉइंट या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर आ गया, जबकि निफ्टी 158.95 पॉइंट या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर ग्लोबल संकेतों से बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई, खासकर IT, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में।

कम महंगाई और बैंकों की अच्छी कमाई से वॉल स्ट्रीट में सुधार

महंगाई के अच्छे आंकड़ों और बड़े बैंकों की अच्छी कमाई की वजह से US स्टॉक्स में बढ़त के बाद रातों-रात ग्लोबल सेंटिमेंट में सुधार हुआ। नैस्डैक 0.90 परसेंट बढ़ा, S&P 500 0.38 परसेंट बढ़ा, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.02 परसेंट बढ़ा।

US में उम्मीद से कम महंगाई की रीडिंग से इन्वेस्टर्स सेंटिमेंट को सपोर्ट मिला, जिससे तेज़ मॉनेटरी सख्ती की चिंता कम हुई। CPI रिपोर्ट के बाद, मार्केट में उम्मीद बढ़ गई कि फेडरल रिजर्व जुलाई की मीटिंग में इंटरेस्ट रेट्स में कोई बदलाव नहीं करेगा, हालांकि ट्रेडर्स को अभी भी साल खत्म होने से पहले कम से कम एक बार रेट हाइक की उम्मीद है।

बैंक की कमाई से भी सपोर्ट मिला, जबकि सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में तेजी आई, जिससे टेक्नोलॉजी-हैवी नैस्डैक को ऊपर उठने में मदद मिली।

एशियाई मार्केट्स में तेजी

बुधवार को एशियाई इक्विटीज ने पॉजिटिव मोमेंटम को बढ़ाया, जिसकी वजह US में कम महंगाई से ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स पर दबाव कम होने के बाद साउथ कोरियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में मजबूत बढ़त रही। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 1.7 फीसदी बढ़ा, जबकि साउथ कोरिया का KOSPI 6 परसेंट और जापान का निक्केई 0.4 परसेंट बढ़ा। शुरुआती एशियाई ट्रेड में US इक्विटी फ्यूचर्स भी थोड़ी ज़्यादा तेज़ी से ट्रेड हुए।

हालांकि, मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन से एनर्जी की बढ़ती कीमतों को सपोर्ट मिलता रहा, इसलिए मार्केट सतर्क रहे।

मिडिल ईस्ट में टेंशन जारी रहने से तेल $86 से ऊपर चढ़ा

अमेरिका और ईरान के बीच नई मिलिट्री कार्रवाई से होर्मुज स्ट्रेट से एनर्जी सप्लाई में रुकावट को लेकर चिंता बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में हाल की तेज़ी और बढ़ गई।ब्रेंट क्रूड 1.7 परसेंट बढ़कर लगभग $86.20 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $80 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था। इस हफ़्ते तेल अब 12 परसेंट से ज़्यादा बढ़ गया है, और ब्रेंट जून के बीच के बाद अपने सबसे ऊंचे लेवल पर बंद हुआ।

यह बढ़त तब हुई जब प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी पोर्ट्स पर फिर से नेवल ब्लॉकेड लगा दिया और ईरान ने उस इलाके में US इंफ्रास्ट्रक्चर पर जवाबी हमले किए, जिससे ग्लोबल तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

जियोपॉलिटिक्स और क्रूड पर शिफ्ट हुआ बाजार का फोकस

मंगलवार को विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स नेट सेलर बने रहे, उन्होंने Rs 739 करोड़ के भारतीय इक्विटी बेचे। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने सपोर्ट देना जारी रखा, Rs 2,927 करोड़ के इक्विटी खरीदे, जिससे विदेशों में बिकवाली को एब्जॉर्ब करने में मदद मिली।

हालांकि US में महंगाई कम होने और उम्मीद से ज़्यादा बैंक अर्निंग्स के बाद ग्लोबल इक्विटी सेंटिमेंट में सुधार हुआ है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय मार्केट के लिए मुख्य शॉर्ट-टर्म रिस्क बनी हुई हैं। एनर्जी की ऊंची कीमतें महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं, भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ा सकती हैं और अगर जियोपॉलिटिकल हालात और बिगड़ते हैं तो कॉर्पोरेट प्रॉफिट पर असर डाल सकती हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market View : भारतीय बाजार के लिए आज मिले-जुले संकेत, इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

Market View : भारतीय बाजार के लिए आज मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त है। हालांकि FIIs की कैश और वायदा मिलाकर 7700 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली हुई है। उधर एशियाई बाजारों में रौनक है। निक्केई 1 फीसदी तो कॉस्पी 6% उछला है। वहीं, चिप शेयरों में खरीदारी लौटने से नैस्डैक करीब एक फीसदी चढ़ा और डाओ और S&P में भी बढ़त देखने को मिली है।

आज क्या हो रणनीति?

निफ्टी पर रणनीति

बाजार पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24173-24223 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24268-24309 पर है। इसके लिए पहला बेस 23928-23970 पर और बड़ा बेस 23809-23869 पर है। एक्सपायरी के दिन निफ्टी रेंज में रहा और कोई रिवर्सल नहीं मिला। FIIs की कैश मार्केट में बिकवाली रहा, इंडेक्स में शॉर्ट किया। खासकर क्रूड ($86) के चलते बैंक निफ्टी में शॉर्ट किया। अमेरिका के हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी है। जियोपोलिटिक तनाव अभी भी बरकरार है।

FIIs का नेट शॉर्ट बढ़कर 2.65 लाख पर रहा है। स्टॉक फ्यूचर्स में भी भारी बिकवाली रही। 24100-24200-24300 पर कॉल बिके,24000 पर पुट। इसमें कोई शंका नहीं है कि तेजी का मोमेंटम गायब है। लेकिन 24000-23950 का सपोर्ट अब भी कायम है। फिलहाल ट्रेडिंग रेंज 24173-24223 से 24000-23970 के बीच है। पहले इसी दायरे पर नजर रखें। फिलहाल नीचे की ओर बड़ी कमजोरी के संकेत नहीं है। लेकिन 23970 के नीचे धीरे-धीरे दबाव बढ़ सकता है। 57000 के नीचे बैंक निफ्टी गया तो बेस-2 का रास्ता खुलेगा। 24173-24223 के ऊपर ही निफ्टी में मजबूती लौटेगी। इसके ऊपर रजिस्टेंस-2 की ओर तेजी संभव है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 57690-57830 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 58078-58271 पर है। इसके लिए पहला बेस 56967-57031/57261 पर और बड़ा बेस 56512-56626 (100/50/200 DEMA) पर है। बैंक निफ्टी 10 DEMA के नीचे फिसला। लेकिन नीचे की ओर बड़ा दबाव नहीं दिखा। FIIs ने बैंक निफ्टी में बिकवाली की है। क्रूड के बढ़ने से अंडरपरफॉर्मेंस की आशंका है।

57261-57031 का जोन सबसे अहम सपोर्ट है। 20 DEMA के बाद यही मजबूत बेस है। बेस-1 बचा तो बैंक निफ्टी रेंज में रह सकता है। रजिस्टेंस-1 और बेस-1 के बीच कारोबार संभव है। बेस-1 टूटने पर बेस-2 की ओर फिसलने का खतरा है। तभी बड़ी कमजोरी के संकेत मिलेंगे। क्रूड में नरमी बैंक निफ्टी के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर होगा। इसके साथ 57830 के ऊपर टिकने पर तेजी लौट सकती है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Prakashgaba.com के प्रकाश गाबा। इनकी ABB में 7050 रुपए के टारगेट के लिए, 6825 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ खरीदारी की सलाह है। Polycab में भी इनकी 9800 रुपए के टारगेट के लिए, 9450 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ खरीदारी की सलाह है।

 

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 15 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के हल्की बढ़त के साथ सपाट खुलने की संभावना दिख है,क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 24,045.50 के आसपास हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

14 जुलाई को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में भारी गिरावट आई। इसकी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत रहे। कल बाजार की शुरुआत कमजोर रही और निफ्टी गिरकर 24,100 के नीचे आ गया। पूरे सेशन के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ता दिखा। खासकर IT,ऑटो और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी रही,जिससे इंडेक्स 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया। आखिर में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही दिन के अपने निचले स्तरों के आस-पास बंद हुए। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर और निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर बंद हुआ।

हॉर्मुज पर 20% टोल टैक्स से पलटे ट्रंप

हॉर्मुज पर 20 परसेंट टोल से ट्रंप पलट गए हैं। उन्होंने खाड़ी देशों के दबाव के बाद फैसला बदला है। उन्होंने कहा है कि इसके बदले में गल्फ के देश US में बड़ा निवेश करेंगे। इधर अमेरिका ने फिर ईरान की नाकेबंदी कर दी है। 20 से ज्यादा युद्धपोत तैनात करते हुए ईरानी ठिकानों पर भीषण हमले जारी हैं।

कच्चा तेल $86 के करीब कायम, सोने में करीब 1% की बढ़त

ट्रंप के टोल टैक्स से पीछे हटने के बावजूद कच्चे तेल में तेजी कायम है। इसका भाव 86 डॉलर के करीब दिख रहा है। उधर US में अनुमान से कम रिटेल महंगाई के आंकड़ों के बाद सोने में करीब एक फीसदी की बढ़त है।

एक दिन में 25% फिसला IBM, 3% से ज्यादा फिसले इंफोसिस और विप्रो के ADR

IT शेयरों पर आज बाजार की नजर रहेगी। Q2 के कमजोर कारोबारी अपडेट के बाद IBM एक दिन में ही 25% टूट गया। इस स्टॉक में 58 साल में पहली बार एक दिन में इतनी बड़ी गिरावट आई। इंफोसिस और विप्रो के ADR भी तीन फीसदी से ज्यादा फिसले हैं।

टाटा एलेक्सी का Q1 मुनाफा 22.6% घटा

पहली तिमाही में टाटा एलेक्सी के नतीजे कमजोर रहे हैं। तिमाही आधार पर इसके मुनाफे में 23 फीसदी की कमी आई है। मार्जिन पर भी करीब 3 फीसदी का दबाव दिखा है। हालांकि आय में 3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आज आएंगे HDFC LIFE के नतीजे, वायदा की 5 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार

नतीजों के लिहाज से आज का दिन अहम है। आज निफ्टी में शामिल HDFC LIFE के नतीजे आएंगे। Q1 में इसका Annual Premium Equivalent 7% बढ़ सकता है। हालांकि VNB MARGIN पर दबाव दिख सकता है। साथ ही ICICI PRU, HDFC AMC समेत वायदा की 5 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:25 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 20.50 अंक यानी 0.09 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 24,037 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए सुस्ती का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में बढ़त के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 0.59 फीसदी की बढ़त देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.38 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंग सेंग में 1.07 फीसदी की बढ़त दिख रही है। ताइवान के बाजार में भी 1.72 फीसदी की मजबूती नजर आ रही है। वहीं,कोस्पी 6.23 फीसदी भागा है। शांघाई कंपोजिट में 0.05 फीसदी की हल्की तेजी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

मंगलवार को S&P 500 और नैस्डैक में बढ़त देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद,बड़े बैंकों के अच्छे नतीजों और उम्मीद से कम महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों की जोखिम लेने की भूख बढ़ाई। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 10.02 अंक या 0.02% बढ़कर 52,508.66 पर पहुंच गया। S&P 500 में 28.55 अंक या 0.38% की बढ़त हुई और यह 7,543.89 पर बंद हुआ। जबकि नैस्डैक कम्पोजिट 233.83 अंक या 0.90% बढ़कर 26,107.01 पर पहुंच गया।

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डॉलर इंडेक्स

डॉलर अपने सभी ‘ग्रुप-ऑफ-10’साथियों के मुकाबले कमजोर हुआ है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.80 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में बुधवार को शुरुआती कारोबार में 10 ईयर और 2 ईयर के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड मामूली रूप से घटकर 4.58% और 4.18% हो गई है।

एशियन करेंसी

ज्यादातर एशियाई करेंसी में पिछली क्लोज़िंग के मुकाबले मामूली बढ़त दिख रही है। इसमें मलेशियाई रिंगित सबसे आगे है,जिसमें 0.34% की बढ़त हुई है। ताइवान डॉलर में 0.196% और जापानी येन में 0.154% की बढ़त हुई है। फिलीपीन पेसो में 0.123 प्रतिशत की बढ़त हुई है। इसके बाद सिंगापुर डॉलर (0.109 प्रतिशत),इंडोनेशियाई रुपया (0.099 प्रतिशत), चीनी रेनमिनबी (0.097 प्रतिशत) और दक्षिण कोरियाई वॉन (0.088 प्रतिशत) का नंबर है। थाई बहत में सबसे कम बढ़त देखी जा रही है। यह अपने पिछले क्लोजिंग भाव से 0.045 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 14 जुलाई को 739 करोड़ रुपये के शेयर बेचे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,927 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में रौनक, कोस्पी 7% चढ़ा, US में कमजोर CPI डेटा और AI ट्रेड में नई तेजी से मिल रहा सपोर्ट

Asian Market Today: आज ग्लोबल बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल रही है। निक्केई एक परसेंट तो कॉस्पी 7% से ज्यादा उछला है। उधर चिप शेयरों में खरीदारी लौटने से नैस्डैक करीब 1 फीसदी चढ़ा है। डाओ और S&P में भी बढ़त देखने को मिली। दरअसल, उम्मीद से कम US महंगाई के आंकड़ों से फेड इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद कम होने और AI ट्रेड में नई तेजी से इन्वेस्टर्स के सेटीमेंट को सपोर्ट मिला है। यहीं वजह है कि आज एशिया बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल रही है।

जापान का निक्केई 225 0.87% और टॉपिक्स 0.23% बढ़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6.95% उछला, जबकि कोसडैक 5.08% चढ़ा। हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स 1.10 फीसदी ऊपर ट्रेड करता नजर आ रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.57 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.43 फीसदी चढ़कर 45,379.03 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.08 फीसदी की बढ़त के साथ 3,974.02 के स्तर पर दिख रहा है।

कैसा रहा अमेरिकी बाजारों का हाल

अमेरिकी स्टॉक मार्केट मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुआ क्योंकि बैंकों की अच्छी कमाई और उम्मीद से कम महंगाई रिपोर्ट ने सेंटिमेंट को बढ़ावा दिया।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 10.02 पॉइंट्स या 0.02% बढ़कर 52,508.66 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 28.55 पॉइंट्स या 0.38% बढ़कर 7,543.89 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 233.83 पॉइंट्स या 0.90% बढ़कर 26,107.01 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के शेयर की कीमत 4.06% बढ़ी, AMD के शेयर 2.57% बढ़े, इंटेल के शेयर 4.50% बढ़े, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 4.92% उछले, SK हाइनिक्स ADR 27.29% उछला, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.55% गिरे, एप्पल के शेयर 0.77% गिरे, टेस्ला के शेयर 0.36% बढ़े, जबकि IBM के शेयर 25.21% गिरे।

US-ईरान युद्ध

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सभी पोर्ट्स पर फिर से नेवल ब्लॉकेड लगा दिया और धमकी दी कि अगर तेहरान ने बातचीत फिर से शुरू नहीं की तो अगले हफ़्ते पावर प्लांट्स और पुलों पर हमला किया जाएगा। US मिलिट्री ने भी लगातार चौथे दिन ईरान पर नए हमले किए। इस बीच, ईरान का कहना है कि पिछले हफ़्ते दुश्मनी फिर से शुरू होने के बाद उसने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है।

US इन्फ्लेशन

US कंज्यूमर इन्फ्लेशन जून में उम्मीद से ज़्यादा धीमी हुई। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स जून तक 12 महीनों में 3.5% बढ़ा, जो अब भी सबसे ज़्यादा है, मई में 4.2% बढ़ने के बाद। CPI मई में 0.5% बढ़ने के बाद महीने में 0.4% गिरा। रॉयटर्स के पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स ने अनुमान लगाया था कि CPI साल-दर-साल 3.8% बढ़ेगा और महीने के आधार पर 0.1% गिरेगा।

IBM शेयर्स

कंपनी के दूसरी तिमाही के निराशाजनक शुरुआती नतीजे जारी करने के बाद IBM के शेयर की कीमत 25% से ज़्यादा गिर गई। US की बड़ी टेक कंपनी ने कहा कि वह सॉफ्टवेयर से डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में कॉर्पोरेट खर्च में बदलाव के साथ तालमेल बिठाने में “लड़खड़ा” गई है और दूसरी तिमाही में उसकी कमाई में बड़ा नुकसान होगा।

LSEG के इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, IBM ने कहा कि उसे उम्मीद है कि Q2 रेवेन्यू सिर्फ़ 1% बढ़कर $17.2 बिलियन हो जाएगा, जबकि एनालिस्ट्स का अनुमान $17.86 बिलियन था।

आज सोने का रेट

US में महंगाई उम्मीद से कम होने के बाद सोने की कीमतें स्थिर हो गईं। स्पॉट गोल्ड की कीमत थोड़ी बदली और $4,054.36 प्रति औंस रही, जबकि चांदी की कीमतें 0.2% बढ़कर $58.80 प्रति औंस हो गईं।

कच्चे तेल की कीमतें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नेवल नाकाबंदी लगाने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। ब्रेंट तेल की कीमत 1.72% बढ़कर $86.19 प्रति बैरल हो गई, जबकि WTI क्रूड 1.4% बढ़कर $80.40 प्रति बैरल हो गया।

Stock Market Live: “बुल या बीयर” किस तरह होगी बाजार की चाल, जानें ग्लोबल मार्केट से क्या मिल रहे संकेत

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Gold Price Today: तीन दिनों से टूट रहा सोना, दिल्ली से पटना तक 24 से 18 कैरट बिक रहा इस भाव पर

Gold Rate Today in India: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य हमलों ने पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। जियो-पॉलिटकल टेंशन में उछाल पर कच्चा तेल उबला तो इसने गोल्ड पर दबाव डाला और आज लगातार तीसरे दिन इसकी चमक फीकी पड़ी। एक दिन की स्थिरता के बाद राजधानी दिल्ली में लगातार तीसरे दिन गोल्ड सस्ता हुआ है। इन तीन दिनों में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹1540 और 22 कैरट वाला ₹1410 सस्ता हुआ है। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में 10 ग्राम का 24 कैरट और 22 कैरट वाला गोल्ड फिलहाल ₹10 सस्ता हुआ है। चांदी की बात करें तो जियो-पॉलिटिकल टेंशन के साथ-साथ इंडस्ट्रीज की तरफ से डिमांड में सुस्ती ने इस पर भी दबाव डाला है और इसकी चमक फीकी की है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। आज एक किलो चांदी ₹100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 
दिल्ली₹1,42,940₹1,31,040₹1,07,240
मुंबई₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
कोलकाता₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
चेन्नई₹1,43,450₹1,31,490₹1,09,690
बेंगलुरू₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
हैदराबाद₹1,42,790₹1,30,890₹1,07,090
लखनऊ₹1,42,940₹1,31,040₹1,07,240
पटना₹1,42,840₹1,30,940₹1,07,140
जयपुर₹1,42,940₹1,31,040₹1,07,240
अहमदाबाद₹1,42,840₹1,30,940₹1,07,140

तीन दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। तीन दिनों की स्थिरता से पहले एक किलो चांदी 11 जुलाई को ₹5 हजार सस्ती हुई थी तो 10 जुलाई को ₹5 हजार महंगी और ₹9 जुलाई को ₹10 हजार सस्ती हुई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी यह इसी भाव पर बिक रही है यानी देश के चारों बड़े महानगरों में चांदी समान भाव पर बिक रही है।

इस कारण है दबाव

एलकेपी सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी & करेंसी रिसर्च एनालिस्ट) जतिन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में एक बार ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और सोने जैसे ऐसे एसेट्स की चमक कुछ कम हुई है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। फेड के सख्त रुख के बाद बुलियन बाजार में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।

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अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान पर एयरस्ट्राइक की:ट्रम्प बोले- अगले हफ्ते बिजलीघर और पुल उड़ाएंगे, समझौता नहीं किया तो कुछ नहीं बचेगा

अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए की जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हम मंगलवार रात भी हमला करेंगे, उसके अगले दिन भी करेंगे। अगले हफ्ते ईरान के बिजलीघर और पुल भी निशाने पर होंगे। अगर समझौता नहीं किया, तो वहां कुछ नहीं बचेगा।” ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर जमीनी सैन्य अभियान भी चलाया जा सकता है, हालांकि इसके लिए सहयोगी देशों की मदद ली जा सकती है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स IRGC का व्यापारिक जहाजों पर हमला: ईरानी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला किया। इसमें 1 भारतीय शख्स की मौत हो गई जबकि 10 लोग घायल हुए। जहाज पर कुल 20 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। भारत ने ईरानी राजदूत को तलब किया: भारत ने होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख (डिप्टी चीफ ऑफ मिशन) को तलब कर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। समंदर में भारत से जुड़े 11 जहाज फंसे: विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। ट्रम्प ने होर्मुज में 20% टैक्स का फैसला वापस लिया: ट्रम्प ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टैक्स लगाने का अपना फैसला वापस ले लिया। उन्होंने मिडिल ईस्ट के नेताओं के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सबसे कम: होर्मुज स्ट्रेट मंगलवार को सिर्फ 4 जहाज गुजरे। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद यह सबसे कम शिपिंग ट्रैफिक है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…