Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

Trip To London

Trip To London: जब भी पर्यटन के लिए विदेश जाएं तो भारतीय रुपए में मूल्य आंकना मुसीबत खड़ी करेगा। वजह साफ है कि विश्व की अधिकांश लेन-देन की मुद्रा का मूल्य रुपए से कई गुना ज्यादा है। प्रमुख तौर पर डॉलर 95 रुपए का, पाउंड 130 रुपए का, यूरो 111 का, कुवैती दीनार सबसे महंगा 310 का और दुबई का दिरहम 26 रुपए का। इसलिए ब्रिटेन में चाय जब 450 रुपए की आती है तो हम लोग एक खाली गिलास मांगकर कट मार लेते हैं।

 

लंदन चूंकि विश्व के पहले पांच महंगे शहर में है तो आपका बजट तो गड़बड़ाएगा ही। सर्वाधिक महंगा सिंगापुर है। इसलिए पहले से मानसिक और आर्थिक तैयारी जरूरी है। वहां यदि आपका कोई परिजन है तो पहले चर्चा कर तय कर लें कि कौन-सी खाद्य सामग्री ले जाना है और कौन-सी वहां से खरीदना है। विशेष तौर पर दाल, सब्जी, राजमा, पोहे, उपमा, चाय का रेडी टू इट वाला सामान साथ लिया जा सकता है। यदि एकाध हफ्ता रुकना है तो 15 किलो की एक अटैची में खाने का सामान रखना समझदारी होगी। यदि बजट की चिंता नहीं है तो कोई बात नहीं। मैं आपको मोटे पर लगने वाली सामग्री की लंदन की दरें बता देता हूं, जो मई 2026 में वहां थीं।

ये मध्यम बजट की दरें हैं

रेस्टारेंट में एक व्यक्ति का खाना 2,500 का, दो का करीब 10 हजार का। याने 20 से 80 पाउंड तक। कैपेचिनो कॉफी 530 रुपए की, मसाला डोसा 1300 रुपए का, छोले-भटूरे 1500 रुपए के, पानी की बोतल 80 से 200 तक की, दूध 182 रुपए लीटर, ब्रेड 212 की, जो हमें 40 में मिल जाती है। चावल एक किलो 235 का, 12 अंडे 500 के। इसी तरह से मोबाइल का 10 जीबी डाटा 1755 रुपए का, जो यहां 400 में मिलता है। ब्रॉडबैंड 4,000 का जो यहां 775 में मिलता है। पेट्रोल-डीजल 150-170 रुपए लीटर है।

 

सब्जियों के भाव सुनकर दहशत में आ सकते हैं। खीरा 3 नग 130 रुपए के, गाजर करीब 600 रुपए किलो, पत्ता गोभी एक नग 90 रुपए की, नींबू 120 रुपए का। केले 155 के एक किलो (जिसमें 6-7 आएंगे), आलू 165 रुपए किलो, प्याज 150 रुपए किलो। भाव का यह अंतर रुपए और पाउंड के मूल्य में फर्क का नतीजा तो है ही, वहां महंगाई का स्तर भी ऊंचा है।

एक विश्लेषण के अनुसार यदि इंदौर व लंदन का तुलनात्मक अध्ययन करें तो लंदन की बजाय इंदौर में जीवन स्तर 79.6 प्रतिशत सस्ता है। मकान, दुकान, ऑफिस का किराया 94.3 प्रतिशत सस्ता है। इंदौर में रेस्टारेंट 84.4 प्रतिशत, किराना 71.3 प्रतिशत सस्ता है। हमारी क्रय शक्ति लंदन वालों की बजाय 50.6 प्रतिशत अधिक है। यदि इंदौर में रहने के लिए 1011 पाउंड (एक लाख 30 हजार 460 रुपए) चाहिए तो लंदन वाले को 6900 पाउंड (8 लाख 90 हजार 100 रुपए) चाहिए। स्वाभाविक रूप से प्रॉपर्टी भी मंहगी है। मध्यमवर्गीय इलाके में 2 बेडरूम का फ्लैट औसत सवा चार करोड़ रुपए से पौने सात करोड़ रुपए का आएगा। याने 4 लाख से साढ़े 6 लाख पाउंड में। इतनी रकम में इंदौर में शानदार 3-4 हजार वर्गफीट का बंगला मिल जाएगा। 

 

इसे एक दूसरे तरीके से भी समझ सकते हैं। लंदन में औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 1500 पाउंड याने 18 हजार पाउंड वार्षिक (23 लाख 32 हजार रुपए है) होता है। इंदौर में औसत खर्च 15 हजार से 25 हजार रुपए याने अधिकतम 3 लाख रुपए वार्षिक होता है। इस तरह लंदन हमसे करीब 8 गुना अधिक महंगा है। यह विश्लेषण ग्लोबल वेल्थ एंड लाइफस्टाइल का है, जो बताता है कि सिंगापुर व लंदन काफी महंगे शहर हैं। लंदन में जहां 4 व्यक्तियों के रुकने लायक जो अपार्टमेंट औसत 20-25 हजार रुपए रोज वाले मिलेंगे, वे एडिनबरा (स्कॉटलैंड) में 35 हजार रुपए रोज के रहेंगे। यहां अपेक्षाकृत सीमित सुविधा व अत्यधिक पर्यटकों की वजह से मंहगाई अधिक है, क्योंकि यह लंदन से प्राकृतिक रूप से अधिक खूबसूरत है।

अपार्टमेंट में रूम सर्विस या रोजाना सफाई जैसी कोई सुविधा नहीं होती। वहां हफ्ते में तय दिन सफाई के लिये कोई आएगा। अपार्टमेंट व कमरे के लॉक डिजिटल होते हैं, जो आपको बुकिंग होने पर बता दिए जाएंगे। एडिनबरा में तो मेन गेट के बाहर एक बॉक्स होता है, जिसका नंबर आपको दे देंगे। वह सही हुआ तो बॉक्स खोलकर कमरे की चाबी मिल जाएगी। यदि कुछ गड़बड़ हो तो पचते रहो, कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि कोई सुरक्षा गार्ड नहीं होता।

 

ब्रिटेन व यूरोप में भी ज्यादातर मकानों के दरवाजे-खिड़कियां कांच के होते हैं, जिनमें सरियों की ग्रिल नहीं होती। इसका आशय यही है कि वहां ग्रिल उखाड़कर या दरवाजे तोड़कर चोरियां नहीं होतीं। ऐसा भी नहीं है कि चोरियां नहीं होतीं। लंदन के व्यस्त इलाकों में विशेष तौर पर आई फोन की लूट काफी होती हैं। ये काम ई-बाइक गिरोह व नकाबपोश करते हैं, जो राह चलते उन लोगों के फोन उड़ा लेते हैं, जो बात करते हुए चलते हैं।

 

2024-25 में एक लाख 6 हजार आई फोन चोरी हुए थे। ये फोन चीन में बेच दिए जाते हैं। वहां इन्हें नए सिरे से असेंबल कर विश्व बाजार में फिर बेच देते हैं। यह करीब एक हजार करोड़ रुपए का चोरी के आई फोन का कारोबार है। अधिकांश फोन हांगकांग व चीन भेज दिए जाते हैं, जहां रि-सेट, रि-प्रोग्रामिंग कर फिर से बेच दिए हैं। (क्रमश:) -लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 

Guru Purnima 2026: इस साल गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को राशि अनुसार दें उपहार, जानें आपकी राशि के अनुसार क्या दे सकते हैं भेंट

Guru Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में “गुरु” का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इस दिन लोग अपने गुरुओं के पास जाते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। जिनके गुरु इस संसार में नहीं हैं, वे उनके चित्र की पूजा करते हैं या गुरु स्वरूप मानकर माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करते हैं। गुरु पूर्णिमा हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुओं को भेंट या दान करना बेहद फलदायी माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। चूंकि यह दिन महान ऋषि वेदव्यास जी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। नीचे सभी 12 राशियों के अनुसार गुरु को भेंट करने या दान देने योग्य वस्तुओं की सूची दी गई है :

आपकी राशि अनुसार गुरु के लिए भेंट

मेष राशि : मेष राशि के जातकों को गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को लाल रंग के वस्त्र, मूंगा, या लाल चंदन भेंट करना चाहिए। इसके साथ ही गेहूं और गुड़ का दान करना भी शुभ रहेगा।

वृषभ राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को सफेद या रेशमी वस्त्र भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा मिश्री, चांदी या चावल का दान करने से गुरु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि वालों को अपने गुरु को हरे रंग के वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें, या मूंग की दाल भेंट करनी चाहिए। गुरु के सानिध्य में गायत्री मंत्र का जाप करना भी आपके लिए लाभकारी रहेगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों को गुरु को सफेद चंदन, चावल, या चांदी का कोई पात्र भेंट करना चाहिए। जरूरतमंदों को दूध या मिठाई का दान देना भी उत्तम माना जाता है।

सिंह राशि : सिंह राशि के लोग अपने गुरु को पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र, केसर, या तांबे का पात्र भेंट करें। इसके अलावा गेहूं और धार्मिक ग्रंथों का दान भी बहुत फलदायी होता है।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों को गुरु को किताबें, पेन, या शिक्षण सामग्री भेंट करनी चाहिए। इसके साथ ही हरे फल या मूंग की दाल का दान करना आपके बौद्धिक विकास के लिए शुभ है।

तुला राशि : तुला राशि के जातकों को अपने गुरु को सफेद रेशमी वस्त्र या मिश्री भेंट करनी चाहिए। आप आश्रम या मंदिर में चावल और घी का दान भी कर सकते हैं।

वृश्चिक राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को लाल या महरून रंग के वस्त्र, तांबे के बर्तन, या कलावा भेंट करें। जरूरतमंदों को भोजन कराना भी आपके लिए शुभ रहेगा।

धनु राशि : धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति (गुरु) हैं। आपको अपने गुरु को पीले वस्त्र, चना दाल, केसर, या हल्दी भेंट करनी चाहिए। गुरु से गुरु मंत्र दीक्षा लेना आपके लिए सबसे सर्वोत्तम रहेगा।

मकर राशि : मकर राशि वालों को गुरु को नीले या भूरे रंग के वस्त्र या कोई उपयोगी कंबल भेंट करना चाहिए। साथ ही, गुरु के चरणों में तिल या उड़द की दाल का दान समर्पित करें।

कुंभ राशि : इस राशि के जातक अपने गुरु को सफेद या नीले रंग के वस्त्र, सूखे मेवे (जैसे काजू, बादाम) या औषधि भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा अनाथालय या वृद्धाश्रम में अन्न दान करना विशेष फल देता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों को गुरु को पीले वस्त्र, सोने की कोई छोटी वस्तु, पुखराज (यदि सामर्थ्य हो) या धार्मिक पुस्तकें (जैसे भगवद गीता या रामायण) भेंट करनी चाहिए। हल्दी और चने की दाल का दान करना भी बहुत शुभ है।

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Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

Trip To London

Trip To London: जानकर अजीब-सा लगता है ना? लेकिन यह हकीकत है। ऐसा नहीं है कि ऐसा मैंने नहीं देखा, बल्कि वास्तविकता में भी है। होते हैं, लेकिन पूर्व सूचना के आधार पर, निर्धारित जगह पर, निश्चित समय पर। चारों तरफ पुलिस घेरे रहेगी, हेलिकॉप्टर से निगरानी होगी, लेकिन हुड़दंगलीला न प्रदर्शनकारियों की चलेगी, न पुलिस की। यह और बात है कि फ्रांस में फुटबाल के दीवानों ने जो किया, उसने तो सारी हदें पार कर दी। लेकिन, ये अपवाद हैं। हां, कोई अकेला व्यक्ति भी सड़क के बीच के फुटपाथ जितने ऊंचे डिवाइडर पर तख्ती लेकर चुपचाप या कुछ बोलते हुए भी प्रदर्शन कर सकता है, जिसे पुलिस जवान अपने घेरे में रखेंगे, लेकिन करेंगे कुछ नहीं, जब तक कि वह कुछ गैर कानूनी हरकत न करे। कितना अटपटा लगता है ना?

 

लंदन की छोटी-छोटी लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करते हैं। हमारे इंदौर की तरह एक दिन छोड़कर पानी नहीं आता,न पानी के लिये टैंकर या बोरिंग के भरोसे हैं। वहां पानी 24 घंटे आता है और दो-तीन मंजिल तक आसानी से पहुंच जाए, इतना प्रेशर रहता है। सिंक के या बाथरूम के नल से लेकर पानी पी सकते हैं। आप यदि आशंकित हो तो आरओ या वाटर फिल्टर लगा सकते हो। फूड या किसी भी सामान की डिलेवरी के लिए ज्यादातर साइकिल, बैटरी साइकिल या कोई बाइक का उपयोग करता है। ये चौराहों पर सिग्नल जंप करते, लेफ्ट टर्न से राइट जाते हुए कभी नहीं दिखेंगे। वहां एटीएम के काउंटर के अलग कैबिन नहीं, बल्कि किसी भी भवन की दीवार में फिट रहते हैं, जिन्हें तोड़कर कैश लूटने की संभावना न्यूनतम होती है।

 

सड़क, मोहल्ले, मेट्रो, सिटी बस, मॉल, रेस्टारेंट या बगीचे में कुत्ते नजर आएंगे, लेकिन वे स्ट्रीट डॉग नहीं होते, बल्कि पालतू होते हैं। मालिक हाथ या बैग में पोट्‌टी पॉलिथिन लेकर चलता है। चूंकि सभी फुटपाथ पर चलते हैं तो कहीं-कहीं टकराने जैसी नौबत आए तो तत्काल वे रुककर सामने वाले को संकेत दे देते हैं। किसी को जल्दी हो तो एक्सक्यूज मी कहकर रास्ता मांगेंगे। अरे भिया, जरा छेटी होना-ऐसा नहीं बोलते। यह शिष्टाचार जबरदस्त है। एक दिन में बीसियों बार ऐसा मौका आता है। इंदौर में तो हम फुटपाथ पर चलते नहीं और चलें तो टक्कर देकर निकल जाएं।

 

हर छोटी-बड़ी दुकान, मॉल, शॉपिंग सेंटर, रेस्टारेंट हो, ज्यादातर जगह नो कैश के बोर्ड टंगे होते हैं। हम भारतीयों की मुश्किल हो जाती है, जो रुपए के बदले पाउंड ले जाने की याद तो रखते हैं, लेकिन क्रेडिट, डेबिट कार्ड नहीं रखते। वे 90 प्रतिशत तक कैशलेस इकॉनॉमी को अपना चुके हैं। मेट्रो, सिटी बस, कार टैक्सी, शॉपिंग सभी कुछ कार्ड से। इसलिए भारत से कोई जा रहा हो तो ट्रेवल एजेंट आपको यहां पर एक कार्ड दे देगा, जो विदेश में कहीं भी भुगतान के काम आएगा। इसमें फायदा यह भी है कि वहां बैलेंस खत्म होने पर एजेंट को फोन करने पर वह यहां से रकम उसमें डिपॉजिट कर सकता है या आपका कोई रिश्तेदार भी जमा कर सकता है।

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भारतीय वैसे तो कोशिश करते हैं कि खाने का कुछ सामान यहां से ले जाएं। जैसे थेपले, खाखरे, दूध के पराठे, नमकीन, अचार, जीरावन, रेडी टू इट वाले सब्जियों के पैकेट, रेडिमेड चाय-कॉफी के पाउच आदि। वहां कोई भी सामग्री इसलिए बजट के बाहर हो जाती है कि एक पाउंड 125 से 130 रुपए का होता है। तब आप दिमाग लगाते हैं कि पौने दो पाउंड की चाय 450 में और मसाला डोसा 1300 रुपए का आता है। तब आप अनावश्यक रूप से खाने-पीने से बचते हैं, जो कि गलत होता है। पानी की बोतल ही 80 रुपए की आती है। इस गणित से आप विदेश में कहीं घूम नहीं सकते। खासकर, यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, रूस या किसी भी विकसित पश्चिमी देश में।

 

अब एक चलन और बढ रहा है कि यदि 4-6 लोग या परिवार जा रहा है तो वे होटल की बजाय अपार्टमेंट में रुकना पसंद करते हैं। वह एक, दो, तीन बेडरूम का मिल जाता है, जिसमें 6-7 व्यक्ति रुक सकते हैं। वहां खाना बनाने की सामग्री के अलावा सब मिलेगा। जैसे, गैस, इलेक्ट्रिक चूल्हा, इंडक्शन, हॉट वाटर पॉट, क्रॉकरी, रसोई बनाने के नॉन स्टीक कूकवेयर, फ्रीज, माइक्रोवेव ओवन, कॉफी मशीन, वॉशिंग मशीन वगैरह सब कुछ। बाथरूम के लिए पर्याप्त टॉवेल, नेपकीन, टॉयलेट पेपर, सोप भी। बस कहीं-कहीं एक बड़ी गड़बड़ होती है- न तो बेडरूम में अंदर से चिटकनी या लॉक होता है, न बाथरूम में कपड़े टांगने की खूंटी। और तो और टॉयलेट के साथ हैंड शॉवर भी नहीं होता, न ही मग होता है। टॉयलेट पेपर से ही सफाई करना होता है। ये अपार्टमेंट होटल से सस्ते पड़ते हैं और पसंद का खाना मिल जाता है। दाल, चावल, आटा, मसाले, सब्जियां वगैरह वहां आसानी से मिलता है।

 

आज जब भारत में पोस्टल सर्विस काफी कमजोर हो चुकी है, ब्रिटेन में रॉयल पोस्ट काफी लोकप्रिय और प्रामाणिक है। वहां बहुतायत से लाल रंग के लैटर बॉक्स भी मिलेंगे और रॉयल पोस्ट की वैन कूरियर सेवा के तहत घर पहुंच सेवा भी देती है। जिसके तहत आप भारत के निजी कूरियर वाले की तरह कोई भी छोटा-बड़ा सामान कहीं भी भेज सकते हैं। (क्रमश:) 
-लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 

 

बचा हुआ खाना भी रहेगा फ्रेश बस इन 5 बातों के रखें ध्यान, नहीं तो फ्रिज में रखा हुआ खाना भी कर सकता है बीमार!

घर में खाना बच जाना बहुत आम बात है। कई लोग इसे दोबारा गर्म करके खा लेते हैं या कई दिनों तक फ्रिज में रख देते हैं। इससे खाना बर्बाद तो नहीं होता, लेकिन अगर इसे सही तरीके से स्टोर और इस्तेमाल न किया जाए तो यही बचा हुआ खाना फूड पॉइजनिंग, पेट की समस्या और बैक्टीरिया बढ़ने का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं बचा हुआ खाना इस्तेमाल करते समय होने वाली 5 बड़ी गलतियों के बारे में:

1. खाने को लंबे समय तक बाहर रखना

K Bhagat Tarachand, Borivali West, Mumbai | zomato

सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग बचे हुए खाने को घंटों तक कमरे के तापमान पर ही छोड़ देते हैं। गर्म मौसम में बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे खाना खराब हो सकता है। कई बार खाना देखने और सूंघने में ठीक लगता है, लेकिन उसमें हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। खाने को पकने के बाद ज्यादा देर तक बाहर रखने से बचना चाहिए। अगर खाना बच गया है तो उसे जल्दी ठंडा करके साफ डिब्बे में रखकर फ्रिज में रखना बेहतर होता है।

2. फ्रिज में रखे खाने को कई दिनों तक इस्तेमाल करना

क्या आप भी फ्रिज में रखते हैं कटे फल? ये गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने बताया कब बन जाते हैं जहरीले - News18 हिंदी

कई लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखा खाना लंबे समय तक सेफ रहेगा, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। फ्रिज केवल बैक्टीरिया की बढ़ने की गति को धीमा करता है, उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता। बचा हुआ खाना कितने समय तक सेफ रहेगा, यह खाने के प्रकार और स्टोरेज पर निर्भर करता है। चावल, दाल, सब्जी, मांस या डेयरी से बनी चीजों को ज्यादा दिनों तक रखने से उनमें खराबी आने का खतरा बढ़ सकता है।

3. खाने को बार-बार गर्म करना

क्या फ्रिज में रखा हुआ खाना बार-बार गर्म करना सही है? जानिए सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है और स्टोरेज का सही तरीका - News18 हिंदी

कई घरों में बचा हुआ खाना बार-बार गर्म करके खाया जाता है। यह आदत सही नहीं मानी जाती क्योंकि बार-बार गर्म करने से खाने का स्वाद और पोषण कम हो सकता है। साथ ही अगर खाना लंबे समय तक बाहर रहा हो, तो गर्म करने के बाद भी कुछ हार्मफुल एलिमेंट रह सकते हैं। बेहतर है कि जितना खाना खाना हो, उतनी ही मात्रा गर्म करें और पूरे बचे हुए खाने को बार-बार गर्म करने से बचें।

4. खाने को गलत तरीके से स्टोर करना

Kitchen Tips: फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करके खाते हैं? पहले जान लें इससे होने वाले नुकसान| Kitchen Tips

बचे हुए खाने को खुले बर्तन में रखना या बिना ढके फ्रिज में रख देना भी एक बड़ी गलती है। इससे खाने में दूसरी चीजों की गंध आ सकती है और बैक्टीरिया पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। खाने को हमेशा साफ और एयरटाइट डिब्बे में रखना चाहिए। फ्रिज में रखने से पहले खाने को नॉर्मल टेम्परेचर तक आने देना और सही तरीके से ढकना जरूरी है।

5. खराब होने के संकेतों को नजरअंदाज करना

क्या फ्रिज में रखा हुआ खाना बार-बार गर्म करना सही है? जानिए सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है और स्टोरेज का सही तरीका - News18 हिंदी

कई बार लोग सिर्फ इसलिए खाना खा लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इसे फेंकना नहीं चाहिए। लेकिन अगर खाने से अजीब गंध आ रही हो, रंग बदल गया हो, स्वाद खराब लग रहा हो या उसमें फफूंद दिखाई दे रही हो तो उसे खाना हार्मफुल हो सकता है। खाने की खराबी के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि छोटी सी लापरवाही हेल्थ पर बड़ा असर डाल सकती है।

बचा हुआ खाना सुरक्षित रखने के आसान तरीके:

फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करना पड़ सकता है भारी! जानिए कौन-सी गलती बढ़ा सकती है फूड पॉइजनिंग का खतरा - News18 हिंदी

खाना बचने के बाद उसे जल्दी से फ्रिज में रखें।

हमेशा साफ और ढक्कन वाले कंटेनर का इस्तेमाल करें।

फ्रिज का टेम्परेचर सही बनाए रखें।

खाने को खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करें।

बहुत पुराना या हाइजीन खाना खाने से बचें।

एक बार निकाले गए खाने को बार-बार फ्रिज में रखने से बचें।

 

बचा हुआ खाना सही तरीके से रखा जाए तो उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही से यही खाना बीमारी का कारण बन सकता है। खाने की सही स्टोरेज, समय पर इस्तेमाल और साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप स्वाद के साथ अपनी हेल्थ का भी ख्याल रख सकते हैं।

Yogini Ekadashi 2026 Date: योगिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग के साथ रहेगा भरिणी नक्षत्र, जानें कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत

Yogini Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशी का व्रत करने वाले भक्तों के भगवान विष्णु के आशीर्वाद से सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। योगिनी एकादशी का व्रत भी इनमें से एक है। यह व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

यह व्रत बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत भक्तों को रोग, दरिद्रता, दुख व कलंक से दूर करता है। इस अवसर पर ठाकुरजी का आकर्षक शृंगार, विशेष पूजन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा।

कब है योगिनी एकादशी?

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8.16 बजे से एकादशी तिथि शुरू होगी। एकादशी तिथि 11 जुलाई को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर गृहस्थजन 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। व्रती अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के बाद पारण करेंगे।

त्रिपुष्कर योग और भरिणी नक्षत्र का शुभ संयोग

इस बार योगिनी एकादशी के दिन भरणी नक्षत्र और त्रिपुष्कर योग का संयोग बन रहा है। यह संयोग भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। इसमें भगवान विष्णु की पूजा करने से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

योगिनी एकादशी पूजा विधि

योगिनी एकादशी व्रत के दिन प्रात:काल गंगा स्नान करें या घर में नहाने के पाने में गंगा जल मिला कर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। भगवान सूर्य को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद एक चौकी पर मां लक्ष्मी और विष्णु जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। प्रतिमाओं को शंख से स्नान करवाकर उन्हें मंजरी युक्त तुलसी अर्पित करें। ध्यान रहे तुलसी एकादशी के दिन न तोड़ें, इससे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। एकादशी व्रत के दिन पीपल के पेड़ पर दीपक जलाना चाहिए और इस दिन तुलसी की पूजा भी की जाती है। इस व्रत में चावल नहीं खाया जाता है। चावल से श्रीहरि की पूजा भी नहीं की जाती है।

Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ शुक्ल एकादशी को होगा देवशयनी एकादशी व्रत और शुरू होंगे चतुर्मास, जानें क्या है और क्यों लगता है चतुर्मास

El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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Yogini Ekadashi 2026 Vrat Niyam: योगिनी एकादशी व्रत में इन 4 में से एक भी काम किया, तो टूट जाएगा आपका व्रत, जानें योगिनी एकादशी व्रत के नियम और तारीख

Yogini Ekadashi 2026 Vrat Niyam: योगिनी एकादशी का व्रत आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में बहुत से भक्त उपवास करते हैं और कुछ लोग तो सभी 24 एकादशी तिथियों पर निर्जला उपवास भी करते हैं। इस व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से श्री हरि और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी तकलीफें दूर करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे साल साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। एकादशी व्रत भले भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग है, लेकिन इसे करने के नियम बहुत सख्त हैं। इस व्रत की शुरुआत एकादशी तिथि से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से होती है, जबकि इसका समापन द्वादशी तिथि को व्रत पारण के बाद होता है। इस व्रत के कुछ ऐसे नियम भी हैं, जिनका पालन न करने से आपका उपवास खंडित हो सकता है। आइए जानें इनके बारे में

कब है योगिनी एकादशी 2026

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 11 जुलाई को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में योगिनी एकादशी व्रत 10 जुलाई को किया जाएगा।

भूलकर भी न करें ये काम

  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से तुलसी माता का व्रत खंडित हो सकता है। इसलिए एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी माता एकादशी का व्रत करती हैं।
  • एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का सेवन करने से व्रत टूट सकता है। साथ ही चावल खाने से बचना चाहिए।
  • एकादशी व्रत में नमक का पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए। व्रत के समय सेंधा नमक का ही सेवन करना चाहिए। सामान्य नमक खाने से व्रत टूट सकता है।
  • एकादशी के दिन किसी से लड़ाई-झगड़ा करना या फिर बातचीत के दौरान किसी को अपशब्द नहीं बोलना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह की गलती को करने से व्रत का फल क्षीण हो जाता है।

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बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

An image featuring delicious dishes to prepare during the rainy season, accompanied by a caption about monsoon-special snack recipes

Easy Snack Recipes: बारिश की बूंदें गिर रही हों और किचन से अदरक वाली चाय की खुशबू आ रही हो, तो पैर अपने आप स्नैक्स की तलाश में बढ़ जाते हैं। चाय का असली मजा तभी आता है जब साथ में कुछ बेहद कुरकुरा और चटपटा हो।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

 

इस मानसून अपनी शाम की चाय का स्वाद दोगुना करने के लिए बनाएं ये 5 सुपर क्रिस्पी स्नैक्स, जिन्हें खाकर हर कोई आपकी कुकिंग की तारीफ करेगा:

 

1. कुरकुरे 'चावल के आटे के रिंग्स'

यह एक ऐसा स्नैक है जो चाय के साथ सबसे ज्यादा क्रिस्पी लगता है और इसे आप बनाकर कुछ दिनों के लिए स्टोर भी कर सकते हैं।

 

कैसे बनाएं: एक कप पानी में थोड़ा सा घी, नमक, अजवाइन, जीरा और तिल डालकर उबालें। पानी उबलने पर इसमें एक कप चावल का आटा मिलाकर गैस बंद कर दें और ढक दें। हल्का ठंडा होने पर इसे आटे की तरह गूंथ लें। अब छोटी-छोटी लोइयां लेकर पतली रस्सी जैसी बेलें और दोनों छोर जोड़कर रिंग्स यानी छल्ले बना लें। इन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें।

 

2. कैफ़े स्टाइल 'क्रिस्पी कॉर्न फ्रिटर्स' 

बारिश के मौसम में ताजे भुट्टे के दानों से बना यह स्नैक चाय के साथ एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए स्वीट कॉर्न के दानों में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, थोड़ा सा बेसन और कुरकुरेपन के लिए बराबर मात्रा में चावल का आटा मिलाएं। इसमें चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर और हल्का सा पानी छिड़क कर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें। चम्मच की मदद से इन्हें गरम तेल में डालें और एकदम क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें।

 

3. लच्छा आलू पकौड़ा

अगर घर में कोई खास सब्जी नहीं है, तो सिर्फ आलू और प्याज से यह बेहद क्रिस्पी स्नैक मिनटों में बन जाता है।

 

कैसे बनाएं: कच्चे आलुओं को कद्दूकस कर लें और पानी से अच्छी तरह धोकर पूरा पानी निचोड़ लें। अब इन आलू के लच्छों में लंबा कटा प्याज, बारीक कटी हरी मिर्च, थोड़ा सा कॉर्नफ्लोर या अरारोट, मैदा, नमक और काली मिर्च मिलाएं। इसमें पानी बिल्कुल नहीं डालना है। इसके छोटे-छोटे लच्छेदार पकौड़े बनाकर तेज आंच पर तलें। यह बाजार के चिप्स से भी ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं।

 

4. गार्लिक ब्रेड स्टिक्स

अगर आप चाय के साथ कुछ वेस्टर्न और क्रिस्पी ट्राई करना चाहते हैं, तो यह झटपट बनने वाली रेसिपी आपके लिए ही है।

 

कैसे बनाएं: कमरे के तापमान पर रखे मक्खन में बारीक कद्दूकस किया हुआ लहसुन, ऑरेगैनो, चिली फ्लेक्स और हरा धनिया मिलाकर एक गार्लिक बटर तैयार करें। अब रेगुलर ब्रेड स्लाइस को लंबे स्टिक्स के आकार में काट लें। इन स्टिक्स पर दोनों तरफ यह बटर लगाएं और तवे पर धीमी आंच पर दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी टोस्ट होने तक सेकें।

 

5. क्रिस्पी मूंग दाल भजिया 

रिमझिम बारिश में मूंग की दाल के मंगौड़े या भजिए मिल जाएं, तो शाम बन जाती है। यह ऊपर से बहुत कुरकुरे और अंदर से जालीदार होते हैं।

 

कैसे बनाएं: धुली मूंग की दाल को 2-3 घंटे के लिए भिगो दें। फिर इसे बिना पानी डाले या सिर्फ 1 चम्मच पानी के साथ दरदरा पीस लें। इस बैटर को 5 मिनट तक हाथ से अच्छे से फेंटें ताकि यह हल्का हो जाए। अब इसमें कुटा हुआ खड़ा धनिया, सौंफ, हींग, हरी मिर्च, अदरक का पेस्ट और ढेर सारा बारीक कटा प्याज और कढ़ी पत्ता मिलाएं। छोटे-छोटे भजिए गरम तेल में डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक तलें।

 

चाय-स्नैक स्पेशल टिप: इन सभी क्रिस्पी स्नैक्स के साथ पुदीने-धनिया की तीखी हरी चटनी और लहसुन-टमाटर की चटपटी चटनी परोसें। और हां, चाय में अदरक के साथ थोड़ा सा दालचीनी का टुकड़ा या लौंग जरूर डालें, यह मानसून में गले को भी राहत देगा और स्वाद भी बढ़ाएगा।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

A photo providing information on a diet plan for staying healthy during the rainy season

Monsoon and Health: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित व्यायाम, व्यक्तिगत स्वच्छता और मच्छरों से बचाव जैसी आदतें अपनाकर कई मौसमी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही यदि तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, लगातार कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।ALSO READ: Monsoon health tips: सावधान! बारिश में बीमारियों के खतरे से कैसे बचाएं खुद को, ये लक्षण दिखें तो ना करें नजरअंदाज

 

अगर आप जानना चाहते हैं कि मानसून में क्या खाएं, किन बातों का ध्यान रखें, इम्यूनिटी कैसे मजबूत करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के आसान उपाय क्या हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा। यहां आपको मानसून में स्वस्थ और सक्रिय रहने के लिए जरूरी स्वास्थ्य टिप्स, सावधानियां और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण उपाय विस्तार से बताए गए हैं।

 

यहां जानें मानसून डाइट प्लान

 

* सुबह की शुरुआत

गुनगुना पानी पिएं।

नाश्ते में पोहा, दलिया, ओट्स, मूंग दाल चीला या इडली जैसी हल्की और पौष्टिक चीजें लें।

मौसमी फलों का सेवन करें, लेकिन उन्हें अच्छी तरह धोकर खाएं।

 

* दोपहर का भोजन

दाल, रोटी, चावल और मौसमी सब्जियों का संतुलित भोजन करें।

दही की जगह यदि मौसम या स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त लगे तो छाछ या अन्य हल्के विकल्प लें।

अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन सीमित रखें।

 

* शाम का नाश्ता

भुना चना, मखाना, स्प्राउट्स या सूप जैसे हल्के विकल्प चुनें।

चाय के साथ तले हुए स्नैक्स की बजाय पौष्टिक नाश्ता लें।

 

* रात का खाना

हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें।

रात में बहुत देर से भोजन करने से बचें।

 

* इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

1. हल्दी वाला दूध

हल्दी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा का समर्थन करने में सहायक माने जाते हैं।

 

2. अदरक और तुलसी की चाय

अदरक और तुलसी से बनी गर्म चाय गले को आराम पहुंचा सकती है और मौसम बदलने के दौरान आरामदायक महसूस कराने में मदद कर सकती है।

 

3. विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ

आंवला, अमरूद, संतरा और नींबू जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कार्य में भूमिका निभाते हैं।

 

4. पर्याप्त पानी पिएं

प्यास कम लगने पर भी दिनभर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीते रहें।

 

5. पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम

रोज 7–8 घंटे की नींद लें और कम से कम 30 मिनट योग, वॉक या हल्की एक्सरसाइज करें।

 

6. प्रोटीन युक्त आहार लें

दालें, पनीर, अंडे (यदि आप खाते हों), सोया और अन्य प्रोटीन स्रोत शरीर के संतुलित पोषण में मदद करते हैं।ALSO READ: Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

 

स्वच्छता का रखें ध्यान

बाहर से आने के बाद हाथ धोएं।

गीले कपड़े तुरंत बदलें।

घर के आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों का प्रजनन कम हो।

 

* किन चीजों से बचें?

 

* बासी या खुले में रखा भोजन।

* अस्वच्छ स्थानों का स्ट्रीट फूड।

*  बहुत अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन।

* बिना आवश्यकता के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन।

 

संक्षेप में कहा जाए तो मानसून में फिट रहने के लिए कोई एक 'जादुई' खाद्य पदार्थ या घरेलू नुस्खा पर्याप्त नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, अच्छी स्वच्छता और मच्छरों से बचाव-इन सभी का संयोजन बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि तेज बुखार, लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, गंभीर कमजोरी या डेंगू, मलेरिया अथवा चिकनगुनिया जैसे संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

 

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छत्तीसगढ़ की लोककला को दुनिया तक पहुंचाने वाली आवाज़ | Padma Vibhushan Teejan Bai | RIP Teejan Bai |

उनकी पहली कमाई सिर्फ़ एक बोरी चावल थी, लेकिन कला ऐसी कि आगे चलकर पूरी दुनिया को पंडवानी का दीवाना बना दिया!

पद्म विभूषण तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। लंबे समय से बीमारी से जूझने के बाद उन्होंने AIIMS, रायपुर में 70 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में जन्मी तीजन बाई ने महाभारत की कहानियां अपने नाना से सुनीं और वहीं से पंडवानी के प्रति उनका प्रेम शुरू हुआ।

महज़ 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। लोगों के दवाब को नज़रअंदाज़ कर उन्होंने पंडवानी गाना नहीं छोड़ा, इसलिए उन्हें समाज से बाहर कर दिया गया। फिर भी, कला उनके लिए सबसे ऊपर रही।

उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की, मॉरीशस समेत कई देशों में भारतीय लोककला का परचम लहराया। आज उनकी आवाज़ भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन जब-जब पंडवानी की बात होगी, तीजन बाई का नाम सबसे पहले लिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ की लोककला को दुनिया तक पहुंचाने वाली आवाज़ | Padma Vibhushan Teejan Bai | RIP Teejan Bai | Chhattisgarh

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