BLA : बलूचिस्‍तान बना पाकिस्‍तानी सेना का कब्रिस्‍तान, बीएलए ने मचाई तबाही, मुनीर के 25 सैनिकों को किया ढेर

BLA : बलूचिस्‍तान बना पाकिस्‍तानी सेना का कब्रिस्‍तान, बीएलए ने मचाई तबाही, मुनीर के 25 सैनिकों को किया ढेर

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ दो हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, इन हमलों में कुल 25 सैन्यकर्मी मारे गए और तीन सैन्य वाहन नष्ट किए गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

जियारत क्रॉस पर सैन्य काफिले को बनाया निशाना

 

BLA के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया है कि उसके लड़ाकों ने जियारत क्रॉस के पास पाकिस्तानी सैन्य काफिले पर हमला किया। संगठन का दावा है कि इस हमले में दो सैन्य वाहन नष्ट कर दिए गए, जिनमें एक सैन्य ट्रक भी शामिल था। BLA के अनुसार, शुरुआती तौर पर हमले में 18 सैन्यकर्मियों के मारे जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 25 हो गई।

 

संगठन ने दावा किया कि हमले के दौरान सैन्य वाहनों में आग लगा दी गई और मारे गए जवानों के हथियार भी कब्जे में लिए गए।

हमले का वीडियो ट्रेलर जारी

 

BLA ने अपने आधिकारिक मीडिया चैनल Hakkal के जरिए जियारत क्रॉस हमले का करीब 1 मिनट 11 सेकंड का वीडियो ट्रेलर भी जारी किया है। संगठन का कहना है कि इसमें हमले से जुड़े दृश्य दिखाए गए हैं।

 

वीडियो में कथित तौर पर हथियारबंद लड़ाके जलते हुए पाकिस्तानी सैन्य वाहनों के पास दिखाई दे रहे हैं। घटनास्थल पर शव और हथियार भी नजर आने का दावा किया गया है। BLA ने कहा है कि हमले का पूरा वीडियो बाद में जारी किया जाएगा।

 

सुराब के हजीका इलाके में दूसरा हमला

BLA ने बलूचिस्तान के सुराब जिले के हजीका इलाके में एक अलग हमले का भी दावा किया है। संगठन के मुताबिक, उसके Special Tactical Operations Squad (STOS) ने विस्फोटकों से लदे वाहन को रिमोट के जरिए विस्फोट कर पाकिस्तानी सेना के एक वाहन को निशाना बनाया। BLA का दावा है कि इस हमले में 7 सैन्यकर्मी मारे गए और सैन्य वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया।

 

बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रहा संघर्ष

 

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बलोच अलगाववादी संगठनों के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। BLA समेत कई बलोच समूह पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग करते रहे हैं। हाल के वर्षों में इन संगठनों ने पाकिस्तानी सेना, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और अन्य सरकारी ठिकानों को निशाना बनाकर हमले तेज किए हैं। जियारत क्रॉस और सुराब में हुए ताजा हमले भी इसी जारी विद्रोह की कड़ी माने जा रहे हैं।

 

हालांकि, 25 सैन्यकर्मियों की मौत समेत BLA के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने जियारत क्रॉस और सुराब हमलों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

लंदन में सीक्रेट मीटिंग, मुनीर का मैसेज और पाकिस्तान का नक्शा बदलने का प्लान! इस नए दांव से उड़े जरदारी-शहबाज के होश

Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बीच लंदन में हुई 90 मिनट की एक सीक्रेट बैठक ने इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

CNN-News18 के सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, गृह मंत्री मोहसिन नकवी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बेहद ‘सीक्रेट मैसेज’ लेकर लंदन में जरदारी के पास पहुंचे थे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पाकिस्तान के प्रशासनिक नक्शे को बदलना यानी नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयां बनाना था।

आइए आपको बताते हैं कि लंदन की इस बैठक का क्या मतलब है, पाक सेना नया नक्शा क्यों बनाना चाहती है और इसमें नवाज शरीफ की एंट्री कैसे हुई है।

असीम मुनीर का मैसेज और जरदारी की चाल

जानकारी के मुताबिक, पाक आर्मी देश में नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर तेजी से काम आगे बढ़ाना चाहती है और इसके लिए राष्ट्रपति जरदारी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति जरदारी नए प्रांत बनाने के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे इसे बेहद धीमी और चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत लागू करना चाहते हैं।

जरदारी का सुझाव है कि नए प्रांतों के गठन की शुरुआत पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) से की जानी चाहिए, क्योंकि इन दोनों राज्यों की प्रांतीय असेंबलियों में नए प्रांत बनाने को लेकर पहले ही प्रस्ताव पारित हो चुके हैं।

PPP के लिए सिंध क्यों बना है सबसे बड़ा रोड़ा?

आसिफ अली जरदारी अपने राजनीतिक गढ़ सिंध के किसी भी तरह के बंटवारे के सख्त खिलाफ हैं। सिंध प्रांत पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सत्ता का मुख्य आधार है। जरदारी को डर है कि सिंध को बांटने का कोई भी कदम उठाने पर वहां के राष्ट्रवादी गुट उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं, जिससे पीपीपी का सियासी वर्चस्व खत्म हो जाएगा।

वहीं बलूचिस्तान में पहले से जारी उग्रवाद और नाजुक सुरक्षा स्थितियों के कारण भी जरदारी वहां फिलहाल कोई नया प्रशासनिक प्रयोग करने से बच रहे हैं।

सीधा बंटवारा नहीं, तो क्या है अल्टरनेटिव प्लान?

संविधान में तुरंत संशोधन करके नक्शा बदलने के बजाय एक बीच का रास्ता भी तलाशा जा रहा है:

नई प्रशासनिक इकाइयां बनाना: पहले चरण में प्रांतों को विभाजित करने के बजाय नई प्रशासनिक इकाइयां बनाई जाएं और स्थानीय निकायों को मजबूत किया जाए।

संवैधानिक संशोधन: इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 140 और अनुच्छेद 160 में संशोधन पर विचार किया जा सकता है।

अनुच्छेद 140: स्थानीय सरकारों के ढांचे से संबंधित है।

अनुच्छेद 160: राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) और केंद्र-राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे का फैसला करता है।

नवाज शरीफ की एंट्री और रायविंड में बड़ी बैठक

सैन्य प्रतिष्ठान के बढ़ते दबाव के बीच राष्ट्रपति जरदारी ने पीएमएल-एन (PML-N) के सुप्रीम नेता नवाज शरीफ से संपर्क साधा है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लाहौर के रायविंड में नवाज शरीफ की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज मौजूद थीं। बैठक में तय हुआ कि नए प्रांतों के इस संवेदनशील मुद्दे पर पहला स्टैंड पीपीपी लेगी, जिसके बाद ही PML-N अपना अगला कदम तय करेगी।

पाक सेना क्यों बदलना चाहती है देश का नक्शा?

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना/सैन्य प्रतिष्ठान छोटे प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाकर PML-N (पंजाब में मजबूत) और PPP (सिंध में मजबूत) के पारंपरिक राजनीतिक वर्चस्व को कमजोर करना चाहती है।

अगर पंजाब और सिंध जैसे बड़े सूबों को बांटा जाता है, तो सत्ता के नए केंद्र बनेंगे और पुरानी स्थापित राजनीतिक पार्टियों की पकड़ ढीली पड़ जाएगी। यही वजह है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पाकिस्तान का राजनीतिक समीकरण बदलने वाला खेल है।

पाकिस्तान में 200 साल पुराना गुरुद्वारा गिराया:शॉपिंग मॉल बनाया जा रहा; BJP बोली- सिखों की विरासत खत्म की जा रही

पाकिस्तान के बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में करीब 200 साल पुराने ऐतिहासिक ‘श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा’ को गिरा दिया गया। अब इस जगह पर एक मॉल का निर्माण किया जा रहा है। बलूचिस्तान गुरुद्वारा सिंह सभा के सदस्य सरदार जसबीर सिंह के अनुसार, पूरा सिख समाज इसका विरोध कर रहा है, लेकिन अभी तक सरकार कोई एक्शन नहीं ले रही। उन्होंने बताया कि बलूचिस्तान में कभी 12 गुरुद्वारे थे, जिनमें से अब सिर्फ 2 बचे हैं। गुरुद्वारे को गिराए जाने पर भारत में भी कड़ा विरोध हो रहा है। भाजपा के नेशनल स्पोक्सपर्सन आरपी सिंह ने कहा कि ये पाकिस्तान में सिखों की विरासत खत्म करने की कोशिश है। अकाल तख्त साहिब को पाकिस्तान सरकार के सामने मामला उठाना चाहिए और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। 200 साल पुराने गुरुद्वारे में खुला था स्कूल क्वेटा के आर्चर रोड स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा परिसर में बाद में सेंट गैब्रिएल स्कूल संचालित हो रहा था। सिख समुदाय के नेता सरदार जसबीर सिंह के मुताबिक, अब उसी गुरुद्वारे को ढहाकर यहां शॉपिंग प्लाजा का निर्माण कराया जा रहा है। मामला बलूचिस्तान हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल निर्माण रोकने से इनकार कर दिया है। निजी बिल्डर को जमीन बेची गई सिख समुदाय के मुताबिक, यह जमीन श्री गुरु सिंह सभा से जुड़ी संपत्ति थी। आरोप है कि इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने इसे एक निजी बिल्डर को बेच दिया। अब सवाल उठ रहा है कि ETPB को इस धार्मिक संपत्ति को बेचने का अधिकार किस आधार पर मिला और जमीन की बिक्री की प्रक्रिया क्या थी? इस पर पाकिस्तान सरकार या ETPB की ओर से आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है। 4 पॉइंट्स में पढ़ें क्या बोले आरपी सिंह… फारूकाबाद में भी 125 साल पुराना गुरुद्वारा तोड़ा गया था पाकिस्तान के फारूकाबाद में भी 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को तोड़ा गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि ये खबर बेहद दुखद है। उन्होंने कहा था कि भारत इस घटना की कड़ी निंदा करता है। यह सिखों के एक पवित्र धार्मिक स्थल को जानबूझकर निशाना बनाकर की गई तोड़फोड़ है। सबसे चिंता की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की ओर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाने की ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे साफ है कि वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले अब भी जारी हैं। —————— पाकिस्तान में 125 साल पुराना गुरुद्वारा तोड़ा:गुबंद गिराने पर सिखों में गुस्सा, तोड़फोड़ रुकवाई; ताला लगाकर जगह सील की
पाकिस्तान के पंजाब में गुरुद्वारों को गिराने का सिलसिला थम नहीं रहा। बीते शुक्रवार (26 जून) को फारूखाबाद (मंडी चूरकाना) में भूमाफिया ने प्रशासन के साथ मिलकर 125 साल पुराने ऐतिहासिक सिंह सभा गुरुद्वारे का एक हिस्सा गिरा दिया। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी ‘सैन्य एयरलिफ्ट’ से मची हलचल

पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी 'सैन्य एयरलिफ्ट' से मची हलचल

South Asia strategic defense

South Asia strategic defense: 18 से 20 अगस्त के बीच पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में देखी गई अभूतपूर्व सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशियाई सामरिक संतुलन पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले स्रोतों (OSINT) और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के अनुसार, चीन (Xi'an Y-20) और तुर्की (Airbus A400M) के भारी सैन्य परिवहन विमानों ने करीब 60 घंटे तक पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेसों पर दर्जनों उड़ानें भरीं और उतरते देखे गए।

 

यह कोई साधारण उड़ानों का अभ्यास नहीं था। रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (GHQ के पास) और कराची के मस्रूर एयरबेस पर इन विमानों की आपात लैंडिंग ने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों का ध्यान खींचा है। ALSO READ: क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

पाकिस्तान की ज़मीन पर क्या उतार रहे हैं चीन और तुर्की?

सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह भारी एयरलिफ्ट सिर्फ नियमित लॉजिस्टिक्स (Routine Logistics) का हिस्सा नहीं हो सकती। इस असामान्य हलचल के पीछे निम्नलिखित सैन्य आपूर्ति की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्च-स्तरीय लॉजिस्टिक ऑपरेशन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सैन्य सामग्रियों की डिलीवरी शामिल हो सकती है: 

  • सटीक मारक हथियार और उन्नत ड्रोन (UCAVs) : तुर्की के Bayraktar Akinci/TB2 और चीन के Wing Loong III ड्रोनों की नई खेप या उनके महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स। 
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) व राडार सिस्टम : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के लड़ाकू विमानों और ग्राउंड-बेस्ड राडार के लिए एडवांस्ड स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) व सिग्नल्स इंटेलिजेंस उपकरण।
  • एयर-डिफेंस और मिसाइल स्पेयर-पार्ट्स : चीन से प्राप्त HQ-16 और HQ-9P मिसाइल रक्षा प्रणालियों के कलपुर्जे या त्वरित रिप्लेसमेंट हार्डवेयर। 
  • 'KAAN' 5th Gen फाइटर जेट कंपोनेंट्स : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट 'KAAN' में पाकिस्तान की साझेदारी के तहत तकनीकी हस्तांतरण।
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) और राडार उपकरण : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) और अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट (AEW&C) के लिए आधुनिक जैमिंग उपकरण। 
  • सटीक मारक हथियार और स्पेयर पार्ट्स : जेएफ-17 ब्लॉक 3 (JF-17 Block 3) और जे-10सीई (J-10CE) फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स व गाइडेड म्यूनिशन्स। ALSO READ: पाकिस्तान ने धोखे से हड़पा था बलूचिस्तान, क्यों कभी पाक सेना के आगे नहीं झुके धुरंधर बलोच? जानिए बलोच संघर्ष की पूरी कहानी

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारतीय रक्षा एजेंसियों के लिए यह त्रिगुट (China-Pakistan-Türkiye Axis) कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसका समय और तीव्रता चिंता का विषय है:

  • त्वरित क्षमता निर्माण (Rapid Capability Replenishment) : किसी संभावित आपात स्थिति के लिए पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को तेजी से मजबूत करना।
  • त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन : हाल ही में सामने आए तुर्की, पाकिस्तान और रणनीतिक सहयोगियों के बीच बढ़ते सैन्य समन्वय का यह एक व्यावहारिक प्रदर्शन हो सकता है। 
  • 'KAAN' फाइटर जेट प्रोजेक्ट : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में पाकिस्तान की भागीदारी के बाद तकनीकी ट्रांसफर और उपकरणों की आवाजाही। 

South Asia strategic defense

हाल ही में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब द्वारा हस्ताक्षरित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तुरंत बाद इस तरह की भारी सैन्य एयरलिफ्ट का होना संकेत देता है कि क्षेत्र में एक नया सैन्य ब्लॉक आकार ले रहा है। 

 

चीन की तकनीकी व वित्तीय ताकत, तुर्की की आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी और पाकिस्तान का भारत विरोधी एजेंडा—यह त्रिकोण दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। भारत की खुफिया एजेंसियां इस 60 घंटे के रहस्यमयी एयरलिफ्ट ऑपरेशन्स के हर विवरण पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है।

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक अकाउंट सीज-यात्रा पर रोक पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Tukaram Munde: 24 घंटे के भीतर IAS तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA ने मारे ताबड़तोड़ छापे, होटल के किचन में खुले नाले से घुसते चूहे देखते ही ऐक्शन!

Tukaram Munde: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने राज्य भर में मिलावटी खाने की सामग्रियों, अनसेफ फूड और बैन गुटखा व पान मसाले के खिलाफ एक बड़ा और आक्रामक अभियान चला रखा है। एफडीए आयुक्त और कड़क मिजाज के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में सेफ फूड सेफ महाराष्ट्र अभियान के तहत पिछले 24 घंटे के दौरान हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे राज्य के होटल संचालकों, डेयरी कारोबारियों और मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।

इस राज्यव्यापी छापेमारी के दौरान एफडीए की टीमों ने कुल 25.30 लाख रुपये मूल्य के फूड प्रोडक्ट जब्त किए हैं। इसमें 11.40 लाख रुपये के बैन प्रोडक्ट हैं और करीब 14,552 किलोग्राम दूसरी खाद्य सामग्रियां शामिल हैं।

मालाड के होटल राधा का लाइसेंस निलंबित, किचन में दिखे चूहे और कॉकरोच

जांच टीम जब मुंबई के मालाड स्थित होटल राधा के किचन में पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। किचन में खुले नाले से चूहे सीधे अंदर घुस रहे थे। इतना ही नहीं आटा गूंदने की मशीन पर कॉकरोच रेंगते हुए पाए गए। रसोई में चारों तरफ गंदा और ठहरा हुआ पानी, ग्रीस जमा हुआ था और बेहद अनहेल्दी स्थितियां मौजूद थीं। इन गंभीर कमियों को देख एफडीए अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए होटल राधा का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

कुर्ला के ‘जनता तवा एंड ग्रिल’ और इंजीनियरिंग कॉलेज के मेस पर गाज

एफडीए की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। कुर्ला स्थित प्रसिद्ध ‘जनता तवा एंड ग्रिल’ में खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर उल्लंघन पाए गए। यहां कच्चे मांस का स्टोरेज ठीक नहीं था। टेंप्रेचर रिकॉर्ड नहीं मिला और पके और कच्चे भोजन को ठीक तरीके से रखा नहीं गया था। बतर्न और मशीनें बेहद गंदी मिलीं तो एफडीए ने इसका FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

इसके अलावा नवी मुंबई के खारघर स्थित सरस्वती कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के फूड बिजनेस पर भी गाज गिरी है। जांच में कॉलेज के फूड वेंचर में पेस्ट-कंट्रोल के अपर्याप्त इंतजाम, वेंटिलेशन की कमी, जरूरी प्रयोगशाला जांच का न होना और स्वच्छता संबंधी गंभीर कमियां पाई गईं। इसके बाद इसके संचालन को सस्पेंड कर दिया गया।

कुल 31 होटलों की जांच, वैजापुर से उदगीर तक बैकफुट पर कारोबारी

इस विशेष अभियान के दौरान एफडीए ने कुल 31 होटलों, रेस्तरां और ढाबों का निरीक्षण किया। इनमें से 22 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए जबकि 5 खाद्य व्यवसाय लाइसेंसों को सीधे निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा राज्य के कई इलाकों में ऐक्शन हुआ। वैजापुर के परमेष्ठी सुपर शॉपी के खिलाफ बिक्री के लिए एक्सपायरी डेट के खाद्य उत्पाद रखने और दुकान में गंदगी पाए जाने पर कार्रवाई की गई।

उदगीर में FDA की टीम ने लैब में जांच के लिए देसी घी के 6 सैंपल लिए, जिनकी कुल मात्रा प्रेस नोट के अनुसार 2,400 यूनिट दर्ज की गई। पुणे और सांगली की कंपनियों से संदिग्ध गुणवत्ता वाले और मिसब्रांडेड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें खिचड़ी मसाला, डिफैटेड टोस्टेड सोया ग्रिट्स और गुड़ पाउडर शामिल हैं। इन सभी के सैंपल लेकर लैब टेस्ट के लिए भेज दिए गए हैं।

प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाले पर क्रैकडाउन: 8 एफआईआर और 10 गिरफ्तारियां

सुरक्षित खाद्य, सुरक्षित महाराष्ट्र अभियान के तहत गुटखा और पान मसाला जैसे प्रतिबंधित पदार्थों की अवैध बिक्री पर भी भारी शिकंजा कसा गया है। एफडीए ने इस क्रैकडाउन में 11.40 लाख रुपये के प्रतिबंधित उत्पाद जब्त किए हैं। इस दौरान पुलिस और एफडीए की संयुक्त कार्रवाई के तहत कुल 8 एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं। इसमें 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 6 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया गया और माल ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले 2 वाहनों को जब्त कर लिया गया।

ये भी पढे़ं- Pakistan-Balochistan Conflict: ‘सेना हटाओ, हथियार यहीं छोड़कर जाओ..’; बलूचिस्तान का पाकिस्तान को फिर अल्टीमेटम

Pakistan-Balochistan Conflict: ‘सेना हटाओ, हथियार यहीं छोड़कर जाओ..’; बलूचिस्तान का पाकिस्तान को फिर अल्टीमेटम

Pakistan-Balochistan Conflict: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर बड़े स्तर पर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान को नया अल्टीमेटम जारी करते हुए क्षेत्र से सभी पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की भी अपील की है।

मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में पाकिस्तान की सेना पर बलूचिस्तान में अवैध रूप से तैनात होने और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों तथा खनिजों के दोहन का आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी से बलूचिस्तान के लोगों की जान, संपत्ति और कारोबार को खतरा है।

पाकिस्तानी सेना को बताया ‘कब्जा करने वाली ताकत’

बयान में बलूचिस्तान की ओर से पाकिस्तानी सेना को एक आक्रमणकारी और कब्जा करने वाली ताकत करार दिया है। मीर यार बलूच ने दावा किया कि क्षेत्र में पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी स्थानीय लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने पाकिस्तान से केवल सैनिकों को वापस बुलाने की मांग नहीं की, बल्कि सैन्य उपकरण भी बलूचिस्तान में छोड़ने को कहा है।

‘हथियार और उपकरण यहीं छोड़कर जाएं’

मीर यार बलूच ने मांग की है कि पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान से वापस जाते समय अपने युद्धक विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, भारी तोपखाने, नौसैनिक पोत और अन्य सैन्य उपकरण बलूच बलों को सौंपे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास मौजूद ये सैन्य संसाधन कथित तौर पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से हासिल धन से खरीदे गए हैं। इसलिए पाकिस्तान को इन्हें अपने साथ ले जाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

1947 और 1971 का किया जिक्र

अपने बयान में मीर यार बलूच ने साल 1947 में ब्रिटिश शासन के भारत छोड़ने और 1971 में बांग्लादेश के युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह ब्रिटेन भारत छोड़ते समय सैन्य हथियार और उपकरण भारत को सौंपकर गया था, उसी तरह 1971 में युद्ध के बाद पाकिस्तान ने भी बांग्लादेश में अपनी सैन्य संपत्ति वहां की सेनाओं के हवाले की थी।

उन्होंने इसी तर्ज पर पाकिस्तान से बलूचिस्तान से सेना हटाने की तारीख और डेडलाइन घोषित करने की मांग की। बयान में यह भी कहा गया कि पाकिस्तानी सेना को वापस जाते समय कथित तौर पर एक भी गोली साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, बलूच नेता का यह दावा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में जमीनी युद्ध हार चुका है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया गया है।

1971 के बांग्लादेश युद्ध से की तुलना

मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति की तुलना 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से की है। उन्होंने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बलूचिस्तान के लोग कथित अत्याचारों को नहीं भूलेंगे और पाकिस्तान को उनके मुताबिक निरर्थक युद्ध जारी रखने के बजाय अपनी सेनाएं वापस बुला लेनी चाहिए।

इंटरनेशनल समुदाय से ‘स्वतंत्र देश’ की मांग

बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की गई। साथ ही पाकिस्तान की सैन्य वापसी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया गया। मीर यार बलूच ने पाकिस्तान की रक्षा, सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और खनिज संसाधनों की निगरानी से जुड़े बलों के अलावा पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना की मौजूदगी खत्म करने की भी मांग की। उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात गैर-बलूच पाकिस्तानी नागरिकों से भी सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थानों से क्षेत्र छोड़ने की अल्टीमेटम दिया।

‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ का ऐलान

यह बयान ऐसे समय आया है जब 11 अगस्त को बलूच अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के गठन की घोषणा करने का दावा किया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की पाकिस्तान से स्वतंत्रता को मान्यता देने की अपील की थी। बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है।

ये भी पढ़ें- Dog Mask Video: कुत्ते का मास्क पहनकर खंडवा कलेक्ट्रेट पहुंचा फरियादी! कुत्तों की नसबंदी में भ्रष्टाचार का संगीन आरोप, अनोखे प्रोटेस्ट का वीडियो वायरल

अलगाववादी संगठन पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग करते हैं और इस्लामाबाद पर राजनीतिक उपेक्षा तथा क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के कथित शोषण का आरोप लगाते हैं। वहीं, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) समेत अलगाववादी समूह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी दफ्तरों पर हमलों की जिम्मेदारी लेते रहे हैं। इसके जवाब में पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा अभियान तेज किए हैं।

पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कितनी? आसिफ अली जरदारी के दावे और जनगणना के आंकड़ों में कितना फर्क, जानें कहां रहते हैं

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हाल ही में देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों और हिंदू समुदाय की स्थिति पर बात की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी बताई। हालांकि, पाकिस्तान की हालिया जनगणना के आंकड़े इस दावे से अलग तस्वीर दिखाते हैं। इससे हिंदू आबादी को लेकर दिए गए आंकड़े पर सवाल उठने लगे हैं।

पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कितनी?

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार, देश में 38,67,729 लोगों ने खुद को हिंदू बताया, जो कुल आबादी का करीब 1.61 फीसदी है। वहीं, 13,49,487 लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट की श्रेणी में दर्ज किया गया, जो 0.56 फीसदी है। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर यह संख्या 52,17,216 यानी कुल आबादी का करीब 2.17 फीसदी बैठती है। यानी पाकिस्तान के आधिकारिक जनगणना आंकड़ों में हिंदू आबादी 4 फीसदी नहीं, बल्कि अलग-अलग श्रेणियों को मिलाने पर भी करीब 2.17 फीसदी है।

आसिफ अली जरदारी के दावे और जनगणनी के आंकड़ों में कितना फर्क

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में धर्म के आधार पर आबादी के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। इसमें कुल 24.04 करोड़ से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें करीब 23.16 करोड़ मुस्लिम, 33 लाख ईसाई और 38.67 लाख हिंदू जाति के लोग दर्ज हैं। इसके अलावा करीब 13.49 लाख लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट की श्रेणी में रखा गया है। जनगणना के हिसाब से केवल हिंदू जाति की आबादी 1.61 फीसदी है, जबकि हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर यह आंकड़ा 2.17 फीसदी हो जाता है।

पाकिस्तान की जनगणना में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की आबादी को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया गया है। ऐसे में केवल हिंदू आबादी के 1.61 फीसदी आंकड़े को देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता, क्योंकि शेड्यूल्ड कास्ट में 13 लाख से ज्यादा लोग शामिल हैं। हालांकि, दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर भी कुल संख्या करीब 52.2 लाख होती है, जो पाकिस्तान की कुल आबादी का 2.17 फीसदी है, 4 फीसदी नहीं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 2023 की जनगणना के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, जिनमें देश, प्रांत और ग्रामीण-शहरी स्तर पर धर्म से जुड़े आंकड़े शामिल हैं।

1951 में हुई थी पहली जनगणना 

पाकिस्तान में पहली जनगणना 1951 में, देश के बंटवारे के करीब चार साल बाद हुई थी। उस समय पाकिस्तान दो हिस्सों में बंटा हुआ था, जिन्हें वेस्ट पाकिस्तान और ईस्ट पाकिस्तान कहा जाता था। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 1951 की जनगणना में दोनों हिस्सों की आबादी को दर्ज किया गया था और अकेले वेस्ट पाकिस्तान की आबादी करीब 3.37 करोड़ थी।

पाकिस्तान की पुरानी जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हिंदू आबादी की संख्या समय के साथ बढ़ी है। 1998 की जनगणना में पाकिस्तान में करीब 24.4 लाख हिंदू दर्ज किए गए थे। यह उस समय देश की कुल आबादी का लगभग 2.02 फीसदी था। यानी संख्या के लिहाज से हिंदू आबादी में बढ़ोतरी देखने को मिली है, हालांकि कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी अलग-अलग जनगणना में बदलती रही है।

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की कुल संख्या बढ़कर 52 लाख से ज्यादा हो गई। हालांकि, आबादी में इनकी हिस्सेदारी अब भी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बताए 4 फीसदी से काफी कम है। 1998 की जनगणना में हिंदू आबादी 2.02 फीसदी थी, जबकि 2023 में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर भी यह आंकड़ा सिर्फ 2.17 फीसदी रहा।

पाकिस्तान की पुरानी जनगणना के आंकड़ों की आज के आंकड़ों से सीधी तुलना करना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि 1951 की जनगणना में पूर्वी पाकिस्तान भी शामिल था, जो बाद में अलग होकर बांग्लादेश बन गया। इसलिए उस समय के आंकड़ों को आज के पाकिस्तान से मिलाते समय एक जैसे क्षेत्रों को आधार बनाना जरूरी है, ताकि तुलना सही तरीके से की जा सके।

सिंध में रहते हैं सबसे ज्यादा हिन्दू 

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के मुताबिक, देश की हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा सिंध प्रांत में रहता है। यहां 35,75,848 लोग हिंदू जाति और 13,25,559 लोग शेड्यूल्ड कास्ट के तौर पर दर्ज किए गए हैं। दोनों को मिलाकर यह संख्या करीब 49 लाख है, जो सिंध की कुल आबादी का 8.81 फीसदी है। देशभर में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट के रूप में दर्ज कुल आबादी में सिंध की हिस्सेदारी करीब 94 फीसदी है।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत की तुलना में दूसरे हिस्सों में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की आबादी काफी कम दर्ज की गई है। 2023 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में करीब 2.49 लाख लोग इन दोनों श्रेणियों में शामिल हैं, जो राज्य की आबादी का लगभग 0.20 फीसदी है। बलूचिस्तान में यह संख्या करीब 59 हजार, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में लगभग 6,100 रही। वहीं, इस्लामाबाद में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर 900 से भी कम लोग दर्ज किए गए।

सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय की आबादी खासतौर पर दक्षिण-पूर्वी इलाकों में अधिक है। 2023 की जनगणना के मुताबिक, उमरकोट पाकिस्तान का एकमात्र जिला है, जहां हिंदू आबादी बहुमत में है। सिंध में हिंदू समुदाय से जुड़े सुरक्षा, जबरन धर्म परिवर्तन और पलायन जैसे मुद्दे भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। जनगणना के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान की हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के मुताबिक, हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट समुदाय की आबादी शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा है। आंकड़ों के अनुसार, गांवों में करीब 27 लाख हिंदू जाति और 11.69 लाख शेड्यूल्ड कास्ट के लोग रहते हैं, जबकि शहरों में इनकी संख्या क्रमशः करीब 11.64 लाख और 1.80 लाख है। दोनों श्रेणियों को मिलाकर करीब 52.2 लाख लोगों में से लगभग 38.7 लाख ग्रामीण इलाकों में और करीब 13.5 लाख शहरी क्षेत्रों में रहते हैं।

सिंध में हिंदू समुदाय का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने आर्थिक परेशानियों के साथ-साथ सरकारी सुविधाओं और संस्थानों तक पहुंच की कमी जैसी चुनौतियां भी बताई गई हैं। अधिकार समूहों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हिंदू समुदाय की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

पाकिस्तानी PM बोले- भारत पानी रोकेगा तो मुंहतोड़ जवाब देंगे:कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक बार फिर से भारत को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज ने गुरुवार को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख कभी नहीं बदलेगा। अपने भाषण में शहबाज ने एक बार फिर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया। चीन की दोस्ती को हिमालय से भी मजबूत बताया शहबाज ने अपने भाषण में चीन-पाकिस्तान की दोस्ती को हिमालय से भी बुलंद बताया। उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान का अजीम दोस्त है। हर मुश्किल घड़ी में वह चट्टान की तरह देश के साथ रहा है। फिर दोहराया- ट्रम्प ने कराया था युद्धविराम शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में एक बार फिर दावा किया कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अहम भूमिका रही थी। उन्होंने ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पहल से समय रहते युद्धविराम संभव हो सका। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे बातचीत से हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई मध्यस्थता नहीं थी। कश्मीर, फिलिस्तीन और अफगानिस्तान पर भी बोले अपने भाषण में शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदलेगा और कश्मीरियों की कुर्बानी बेकार नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन करता रहेगा। अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से उन्होंने अपील की कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दे। साथ ही दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई है। भारत ने पहलगाम हमले के बाद संधि पर लगाई थी रोक अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। तभी से यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी। वहीं, पाकिस्तान का दावा है कि यह संधि अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है और इसे एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों का बंटवारा किया गया था। इसी संधि को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं और हाल के महीनों में यह विवाद फिर से गहरा गया है। गंभीर जल संकट का सामना कर रहा पाकिस्तान रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक- पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था के अहम हिस्से सुक्कुर बैराज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पानी का स्तर लगातार घटने से कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।