IPO News: पैसों का कर लें इंतजाम! 14 जुलाई को खुलेंगे ₹10100 करोड़ के तीन आईपीओ

IPO News: 13 जुलाई से शुरू हो रहे अगले कारोबारी हफ्ते आईपीओ मार्केट में काफी रौनक रहने वाली है। तीन कंपनियों के ₹10,100 करोड़ के आईपाीओ पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाले हैं जिसमें से एक तो एसबीआई फंड मैनेजमेंट (SBI Funds Management) मेगा आईपीओ है। इनमें से एक एसएमआई आईपीओ है जो मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज (Millworks Technologies) का है। ये तीनों इश्यू 14 जुलाई को पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 16 जुलाई को बंद होगा। वैसे इनके अलावा कुछ और इश्यू में भी पैसे लगाने का मौका मिलेगा जोकि अभी खुले हैं और अभी कल यानी सोमवार 13 जुलाई को बंद होंगे। जैसे कि पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरर लेजर पावर एंड इंफ्रा का ₹742 करोड़ का मेनबोर्ड आईपीओ कल बंद होगा तो एसएमई सेगमेंट में भी देवसन केटेलिस्ट और हैप्पी स्टील्स का भी आईपीओ कल बंद होगा। इनकी मार्केट में 16 जुलाई को एंट्री होगी।

तीनों आईपीओ की डिटेल्स

देश के सबसे बड़े लेंडर एसबीआई (SBI) और फ्रेंच एसेट मैनेजर एमुंडी (Amundi) की प्रमोटेड कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ₹9,812.91 करोड़ का आईपीओ ला रही है। इसका प्राइस बैंड ₹545-₹574 फिक्स किया गया है। इसका ऑफर साइज पहले ₹11,692.9 करोड़ का था लेकिन प्री-आईपीओ राउंड में 30 निवेशकों से फंड जुटाने के बाद एसबीआई फंड मैनेजमेंट ने आईपीओ साइज कम कर दिया है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है और इसके तहत एसबीआई 9.95 करोड़ शेयर (4.89% होल्डिंग) और एमुंडी इंडिया होल्डिंग 7.14 करोड़ शेयर (3.51% होल्डिंग) बेच रहे हैं।

मेनबोर्ड सेगमेंट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के साथ-साथ गुजरात की टेक्सटाइल कंपनी एल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का भी आईपीओ आ रहा है। इसके ₹126.25 करोड़ के आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी होंगे। इसमें निवेशक ₹100-₹105 के प्राइस बैंड में बोली लगा सकेंगे। इस आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल ग्रे फैब्रिक प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने को लेकर एक नई वीविंग यूनिट लगाने, लोन हल्का करने और आम कॉर्पोरेट उद्देश्यों में किया जाएगा।

14 जुलाई को एक एसएमई मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का भी ₹160.3 करोड़ का आईपीओ खुलेगा। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹315-₹331 फिक्स किया गया है। बेंगलुरु की प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल प्लांट और मशीनरी खरीदने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में भी करेगी।

इस साल कैसा है आईपीओ मार्केट में हाल

इस कैलेंडर ईयर में अब तक 30 मेनबोर्ड आईपीओ लॉन्च हुए हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹24,404 करोड़ है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के जुड़ने से इस साल अब तक मेनबोर्ड में 32 आईपीओ के जरिए कुल फंड-रेजिंग ₹34,343 करोड़ तक पहुंच जाएगी। एसएमई सेगमेंट में इस साल अब तक 90 कंपनियों के ₹3,861 करोड़ के आईपीओ सफल हुए हैं और मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज़ को मिलाकर कुल फंड-रेजिंग बढ़कर ₹4,022 करोड़ हो जाएगी।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jasmine Sandlas: जैस्मिन ने स्टेज पर खोला सीक्रेट प्यार का राज, मंगेतर को बुलाकर बोलीं- ‘ये हैं मेरे चौधरी साहब’

सिंगर जैस्मिन ने अपनी परफॉर्मेंस के दौरान फैंस को ऐसा सरप्राइज दिया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। स्टेज पर गाने के बीच उन्होंने पहली बार अपने मंगेतर को सबके सामने बुलाया और प्यार भरे अंदाज में उनका परिचय कराया। जैस्मिन के इस खास पल का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  मुस्कुराते हुए जब उन्होंने अपने होने वाले जीवनसाथी को ‘चौधरी साहब’ कहकर पुकारा, तो वहां मौजूद लोग भी इस खूबसूरत पल के गवाह बन गए।

इसके बाद जैस्मिन अपनी खुशी नहीं छिपा पाईं और भावुक होकर मंगेतर को गले लगा लिया। इस अचानक हुए प्यार भरे खुलासे ने उनके फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। अब हर कोई जानना चाहता है कि आखिर जैस्मिन के दिल के करीब यह खास शख्स कौन है।

 ‘लावां’ पर दिखी कपल की खूबसूरत केमिस्ट्री

इसके बाद दोनों ने स्टेज पर रोमांटिक अंदाज में डांस किया। जैसे ही जैस्मिन का सुपरहिट गाना ‘लावां’ बजा, वहां मौजूद लोगों के लिए यह पल और भी खास बन गया। दोनों की बॉन्डिंग और प्यार भरा अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर जैस्मिन का दिल जीतने वाला यह शख्स कौन है। हालांकि, अभी तक उनके मंगेतर के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

पहले भी प्यार में मिला था दर्द

जैस्मिन की लव लाइफ इससे पहले भी सुर्खियों में रही है। वह पंजाबी सिंगर गैरी संधू को डेट कर चुकी हैं, लेकिन दोनों का रिश्ता दर्दनाक ब्रेकअप के साथ खत्म हुआ था। जैस्मिन कई इंटरव्यू में इस दौर का जिक्र कर चुकी हैं और बता चुकी हैं कि उस समय उन्हें जिंदगी में आगे बढ़ने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

सगाई के साथ गानों से भी जीता दिल

इस खास मौके पर जैस्मिन ने अपनी आवाज का जादू भी बिखेरा। उन्होंने ‘पंजेबा’, ‘सिप सिप’, ‘लावां’, ‘शरारत’, ‘जाइए सजना’, ‘धुरंधर’, ‘तरस’, ‘इल्लीगल वेपन’ और ‘यार ना मिले’ जैसे हिट गानों से फैंस को खूब झुमाया।

गोल्डन लुक में छाईं जैस्मिन

सगाई के इस खास पल में जैस्मिन का अंदाज भी चर्चा में रहा। गोल्डन रंग के भारी एम्बेलिश्ड लहंगे और खूबसूरत जूलरी में वह किसी दुल्हन से कम नहीं लग रही थीं। उनके चेहरे की खुशी और ग्लैमरस अंदाज ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

ड्रीम गर्ल टूर से ज्यादा चर्चा लव स्टोरी की

दिल्ली से शुरू हुआ ‘द ड्रीम गर्ल इंडिया टूर’ अब मुंबई, बेंगलुरु और चंडीगढ़ तक पहुंचने वाला है। लेकिन इस वक्त फैंस के बीच जैस्मिन के गानों से ज्यादा उनकी नई प्रेम कहानी के नए अध्याय की चर्चा हो रही है।

Gold Rate Today: सोना एक हफ्ते में ₹4370 तक हुआ सस्ता, चांदी ₹15000 लुढ़की

देश में सोने की कीमत में वीकली बेसिस पर गिरावट देखी गई है। एक सप्ताह में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 4370 रुपये तक ​टूटी है। वहीं 22 कैरेट गोल्ड का भाव 4000 रुपये तक फिसला है। आज 12 जुलाई को राजधानी दिल्ली में सुबह के वक्त 24 कैरेट गोल्ड 144480 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई में कीमत 144330 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,106.25 डॉलर प्रति औंस पर है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद बहुत कम है। सोना मौजूदा स्तरों पर अपना एक मजबूत आधार बना चुका है। अगर यहां से कीमतों में कोई गिरावट आती भी है, तो उसके महज 5% तक ही सीमित रहने की संभावना है। घरेलू बाजार में सोने को ₹1.35 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बेहद मजबूत सपोर्ट पर है। इसलिए ग्राहकों को बहुत ज्यादा दाम गिरने की उम्मीद में अपनी खरीदारी को टालना नहीं चाहिए।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 144480 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132450 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 132300 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 144330 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 145090 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 133000 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 144330 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 132300 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली132450144480
मुंबई132300144330
अहमदाबाद132350144380
चेन्नई133000145090
कोलकाता132300144330
हैदराबाद132300144330
जयपुर132450144480
भोपाल132350144380
लखनऊ132450144480
चंडीगढ़132450144480

चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमत में भी वीकली बेसिस पर गिरावट है। एक सप्ताह में भाव 15000 रुपये नीचे आया है। 12 जुलाई की सुबह चांदी की कीमत 235000 रुपये प्रति किलोग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 59.54 डॉलर प्रति औंस पर है।

Ayurveda’s Garbhadana Samskara: क्या है आयुर्वेद का गर्भाधान संस्कार जो दे रहा इनफर्टिलिटी को मात?

आज के दौर में इनफर्टिलिटी, हार्मोनल असंतुलन और प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां तेजी से सामने आ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता बनने की तैयारी सिर्फ गर्भधारण के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले भी शुरू होनी चाहिए। इसी सोच को प्री-कन्सेप्शन केयर कहा जाता है, जिसमें गर्भधारण से पहले महिला और पुरुष दोनों के स्वास्थ्य, खानपान और मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा में जिस सोच पर अब जोर दिया जा रहा है, आयुर्वेद में इसकी चर्चा सदियों पहले ‘गर्भाधान संस्कार’ के रूप में की गई थी। इसमें स्वस्थ संतान के लिए माता-पिता को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करने की बात कही गई है।

सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं, स्वस्थ शुरुआत पर जोर

कर्नाटक के उडुपी स्थित SDM College of Ayurveda and Hospital में कई वर्षों से गर्भाधान संस्कार को आयुर्वेदिक प्री-कन्सेप्शन केयर के तौर पर अपनाया जा रहा है। यहां कई दंपती गर्भधारण से पहले सलाह लेने पहुंचते हैं। संस्थान की प्रिंसिपल और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता केवी के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल गर्भधारण में मदद करना नहीं, बल्कि भावी माता-पिता के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसमें खानपान में सुधार, जीवनशैली में बदलाव, व्यक्तिगत आयुर्वेदिक उपचार और मानसिक परामर्श जैसी चीजों पर ध्यान दिया जाता है।

आयुर्वेद में गर्भधारण को माना गया एक जिम्मेदार फैसला

डॉ. ममता के अनुसार, ‘गर्भ’ का मतलब भ्रूण और ‘आदान’ का अर्थ स्थापना होता है। गर्भाधान संस्कार का उद्देश्य है कि संतान के आने से पहले माता-पिता अपने शरीर और मन को बेहतर तरीके से तैयार करें। आयुर्वेद के अनुसार, गर्भधारण केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

स्वस्थ संतान के लिए चार चीजों को माना गया अहम

आयुर्वेद में स्वस्थ गर्भधारण के लिए चार प्रमुख आधार बताए गए हैं

  • ऋतु – गर्भधारण का सही समय
  • क्षेत्र – महिला का स्वस्थ प्रजनन तंत्र
  • अंबु – पर्याप्त पोषण
  • बीज – स्वस्थ अंडाणु और शुक्राणु

आयुर्वेद इसे खेती से जोड़कर समझाता है। जैसे अच्छी फसल के लिए सही मौसम, उपजाऊ जमीन, पर्याप्त पानी और अच्छे बीज जरूरी होते हैं, वैसे ही स्वस्थ संतान के लिए भी सही तैयारी जरूरी मानी जाती है।

बदलती जीवनशैली से बढ़ रही प्री-कन्सेप्शन केयर की जरूरत

आज की जीवनशैली में तनाव, खराब खानपान और कई स्वास्थ्य समस्याएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में बड़ी संख्या में लोग अपने जीवनकाल में कभी न कभी इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि PCOD, मोटापा, डायबिटीज और थायरॉइड जैसी समस्याएं गर्भावस्था के दौरान कई जोखिम बढ़ा सकती हैं, जिनमें मिसकैरेज, प्रेग्नेंसी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और समय से पहले डिलीवरी शामिल हैं।

PCOD और थायरॉइड के बाद भी स्वस्थ मां बनीं अनन्या

डॉक्टरों ने बेंगलुरु की 33 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल अनन्या (बदला हुआ नाम) का उदाहरण साझा किया। अनन्या PCOD, हाइपोथायरॉइडिज्म, गर्भाशय में फाइब्रॉइड और पहले हुए मिसकैरेज जैसी समस्याओं से जूझ चुकी थीं। उन्होंने तुरंत गर्भधारण की कोशिश करने के बजाय पहले अपनी सेहत सुधारने का फैसला किया। आयुर्वेदिक मार्गदर्शन में उन्होंने गर्भाधान संस्कार के तीन उपचार चक्र पूरे किए। कुछ समय बाद उन्होंने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण किया। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी पूरी प्रेग्नेंसी सामान्य रही और अगस्त 2025 में उन्होंने 3.2 किलोग्राम वजन वाले स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि हर महिला की गर्भावस्था अलग होती है और कोई भी चिकित्सा पद्धति निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं दे सकती। हालांकि, गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य पर ध्यान देना मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

 

अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

justice

मुरली कृष्णन

जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों की चिंताएं घटाई हैं। आखिर इस फैसले से प्रवासी भारतीयों को क्या फायदा होगा? ALSO READ: खमेनेई के बाद ईरान: कितनी बदल जाएगी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था

 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा है। इस फैसले से हजारों भारतीय परिवारों को राहत मिली है। हालांकि, इस बात पर राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है कि कौन व्यक्ति अमेरिकी कहलाने का हकदार है। जब 30 जून को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया, तब सिएटल में रहने वाले एक भारतीय जोड़े, राजेश और नेहा ने काम पर निकलने से पहले नाश्ते की मेज पर इस खबर को पढ़ा।

 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश 2016 में एच-1बी वीजा पर दक्षिण भारतीय शहर बेंगलुरु से अमेरिका आए थे। एक साल बाद नेहा भी उनके साथ आ गईं। उनकी छह साल की बेटी आन्या का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। नेहा ने डीडब्ल्यू को बताया, “यह राहत की बात थी। महीनों तक हम सोचते रहे कि क्या इतनी बुनियादी चीज सच में बदल सकती है।”

 

इस फैसले के बाद उनकी बेटी तो अमेरिकी नागरिक बनी रहेगी, लेकिन उनके लिए कुछ खास नहीं बदला है। अमेरिका में रह रहे हजारों अन्य भारतीय पेशेवरों की तरह, वे भी सालों से लाइन में लगे हुए हैं और नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। राजेश ने कहा, “हम खुश हैं कि हमारी बेटी का भविष्य सुरक्षित हो गया है, लेकिन हमारी अपनी जिंदगी अब भी हर बार वीजा रिन्यू होने की चिंता के साथ गुजर रही है।” ALSO READ: जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत

 

राहत की सांस

जून के आखिर में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चे अमेरिकी नागरिक बने रहेंगे, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

 

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले साल एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से या अस्थायी वीजा पर रह रहे माता-पिता के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिक नहीं बनेंगे। उस आदेश पर फिलहाल रोक लगी हुई है और उस पर अदालत में कानूनी सुनवाई चल रही है।

 

सामाजिक और राजनीतिक संस्था ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, “यह फैसला इस बात की बेहतर तरीके से पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसे रहने और नागरिक कहलाने का अधिकार है।” पटेल ने एक बयान में कहा, “ट्रंप के कार्यकारी आदेश से जिन लोगों को सबसे सीधा खतरा था, उनमें भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के प्रवासी परिवार शामिल हैं। ये समुदाय वर्षों से वीजा बैकलॉग और अनिश्चित आव्रजन प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अक्सर उनके बच्चों का जन्म अमेरिका में हो जाता है, जबकि माता-पिता के पास स्थायी रूप से वहां रहने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं होता।”

 

‘प्यू रिसर्च सेंटर' की मई 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चीनी-अमेरिकियों के बाद भारतीय मूल के लोग एशिया के दूसरे सबसे बड़े प्रवासी समूह हैं। 2023 में अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 लाख लोग रहते थे, जो देश की एशियाई मूल की आबादी का लगभग 21 फीसदी है। अमेरिकी कंपनियों को कुशल विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने की सुविधा देने वाले ‘एच-1बी वीजा' को पाने में भारतीय सबसे आगे हैं। लेकिन, हर देश के लिए तय सीमा होने की वजह से, नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए सबसे लंबा इंतजार भी इन्हीं भारतीयों को करना पड़ता है।

 

सामुदायिक संगठनों का अनुमान है कि अमेरिका में अस्थायी वर्क वीजा पर रह रहे भारतीय माता-पिता के यहां लाखों बच्चे पैदा हुए हैं। कोर्ट के इस फैसले से अब उनकी नागरिकता और उससे जुड़े अधिकार सुरक्षित रहेंगे, जिनमें अमेरिकी पासपोर्ट और सोशल सिक्योरिटी नंबर भी शामिल हैं।

 

कर्मचारी अपना स्टेटस (कानूनी दर्जा) खराब होने के डर से नौकरी बदलने में हिचकिचाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, उनके जीवनसाथी (पति या पत्नी) को भी काम करने को लेकर कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

जो बच्चे अपने माता-पिता के सहारे यानी डिपेंडेंट के तौर पर अमेरिका आए थे, वे 21 साल के होते ही अपना कानूनी दर्जा खो सकते हैं, बशर्ते उनके माता-पिता को तब तक पक्का ग्रीन कार्ड न मिला हो। इस गंभीर समस्या को ‘एजिंग आउट' कहा जाता है। इस तरह के कठिन हालात के बीच, जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता ही उन कुछ चुनिंदा भरोसेमंद चीजों में से एक रही है, जिस पर ये परिवार पक्के तौर पर यकीन कर सकते हैं।

 

रोजगार और परिवार-आधारित इमिग्रेशन के विशेषज्ञ और अमेरिकी इमिग्रेशन अटॉर्नी राजकृष्ण एस। अय्यर ने डीडब्ल्यू से कहा, “यह अदालती फैसला इस पुराने संवैधानिक नियम को और मजबूत करता है कि जो कोई भी अमेरिका में पैदा हुआ है, वह वहां का नागरिक है। भले ही, उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए इसका मतलब है कि उनके बच्चों को जन्म के समय ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाएगी।” ALSO READ: फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता की सजा घटी लेकिन चुनौतियां नहीं

 

समाज को बांटने वाले मुद्दा

यह अदालती फैसला अमेरिकी राजनीति के सबसे ज्यादा विवादित और समाज को बांटने वाले सवालों में से एक को दोबारा चर्चा के केंद्र में ले आया है। दरअसल, सालों से ट्रंप और कई रूढ़िवादी नेता यह तर्क देते आ रहे हैं कि बिना किसी शर्त के मिलने वाली जन्म आधारित नागरिकता इमिग्रेशन सिस्टम के गलत इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए मौजूदा इमिग्रेशन सिस्टम का इस तरह जानबूझकर इस्तेमाल करना ही रूढ़िवादी नेताओं और इमिग्रेशन का विरोध करने वालों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।

 

ट्रंप के रूख का समर्थन करने वालों का कहना है कि जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने से ‘बर्थ टूरिज्म' को बढ़ावा मिलता है। इसमें विदेशी नागरिक खास तौर पर बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता मिल सके।

 

अय्यर ने कहा कि यह आपत्ति आम तौर पर एच-1बी वीजा रखने वाले लोगों के लिए नहीं जताई जाती है। उन्होंने बताया, “खास बात यह है कि रूढ़िवादी लोगों ने अमेरिका में कानूनी तौर पर आए प्रवासी कामगारों के बच्चों के जन्म पर बहुत कम आपत्ति जताई है।”

 

अय्यर के मुताबिक, एच-1बी वीजा रखने वाले लोग कानूनी तौर पर आए कामगार होते हैं। ये लोग टैक्स देते हैं और आम तौर पर इन्हें सरकारी संसाधनों पर बोझ नहीं माना जाता। उन्होंने कहा, “इसलिए, ऐसा लगता है कि उनका असली विरोध सिर्फ प्रवासियों के कानूनी दर्जे (इमिग्रेशन स्टेटस) को लेकर नहीं है। उनका गुस्सा इस बात पर ज्यादा है कि लोग कानूनी व्यवस्था को दरकिनार कर रहे हैं, देश में अवैध रूप से दाखिल हो रहे हैं या फिर ‘बर्थ टूरिज्म' (सिर्फ बच्चे को नागरिकता दिलाने के लिए यात्रा करना) के लिए वैध वीजा का इस तरह फायदा उठा रहे हैं जिसके लिए वह वीजा बनाया ही नहीं गया था।”

 

अय्यर कहते हैं कि जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम को लेकर अक्सर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां होती हैं। अमेरिका में पैदा हुए बच्चे 21 साल की उम्र से पहले अपने माता-पिता के परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते। इसका मतलब यह है कि बच्चे को जन्म से मिलने वाली नागरिकता, पूरे परिवार को तुरंत कानूनी दर्जा दिलाने का कोई सीधा रास्ता नहीं खोलती। वे संगठित रूप से होने वाले ‘ऑर्गनाइज्ड बर्थ टूरिज्म' के इक्का-दुक्का मामलों और उन परिवारों के बीच एक साफ अंतर देखते हैं, जो कंपनी के वीजा पर सालों से कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।

 

यह फर्क खासकर भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए अहम है। बिना दस्तावेजों वाले (अवैध) प्रवासियों के उलट, ज्यादातर भारतीय पेशेवर कानूनी तौर पर अमेरिका में दाखिल होते हैं, वहां ईमानदारी से टैक्स भरते हैं और नौकरी-आधारित दुनिया की सबसे लंबी इमिग्रेशन लिस्ट (बैकलॉग) का सामना करते हुए भी हमेशा अपना कानूनी दर्जा बनाए रखते हैं।

 

नई दिल्ली के एक वकील करन ठुकराल ने कहा कि भारतीय पेशेवरों को जबरदस्ती एक ऐसी बहस में घसीटा जा रहा है, जो असल में अवैध प्रवासियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी। उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, “इस फैसले से भारतीय एच-1बी वीजा वाले परिवारों के सामने बनी एक बड़ी अनिश्चितता दूर हो गई है। यह फैसला ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार या अस्थाई वीजा पर जीने की कड़वी हकीकत को नहीं बदलता। वे कानूनी तौर पर आए हुए पेशेवर हैं। सिस्टम के गलत इस्तेमाल की चिंताओं की कीमत अमेरिका में पैदा हुए बच्चों के संवैधानिक अधिकारों को छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।” ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर खत्म नहीं हुई है लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। इसके बजाय, इस फैसले ने उन परिस्थितियों को सीमित कर दिया है, जिनमें निचली अदालतें राष्ट्रपति की नीतियों को पूरे देश में लागू होने से रोक सकती हैं। जब तक इस संवैधानिक सवाल का कोई पक्का समाधान नहीं निकल जाता, तब तक ट्रंप के कार्यकारी आदेश को देश भर की अदालतों में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

 

अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर इस फैसले को किसी पक्के समाधान के बजाय एक तरह का भरोसा दिलाना मानती हैं। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “यह फैसला कई भारतीय परिवारों के लिए राहत की बात है, क्योंकि इससे अमेरिका में पैदा हुए बच्चों को अमेरिकी नागरिक के रूप में एक मजबूत कानूनी आधार (सुरक्षा) मिलता है।”

 

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन ट्रंप प्रशासन के आने के बाद से, अमेरिका अब प्रवासियों का पहले की तरह स्वागत नहीं कर रहा है। इसलिए कई प्रतिभाशाली भारतीय, जो पहले अमेरिका जाना अपना सबसे अच्छा विकल्प मानते थे, अब शायद अपना फैसला बदलने पर विचार कर सकते हैं।”

 

अनिश्चितता के बीच कैसी होती है जिंदगी

कई भारतीय पेशेवरों के लिए, अदालत का यह फैसला एक बहुत बड़ी समस्या के सिर्फ एक हिस्से को ही हल करता है।

 

नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए हर साल अलग-अलग देशों का एक तय कोटा होता है। इसकी वजह से भारतीय आवेदकों के लिए बहुत बड़ा बैकलॉग बन गया है, यानी उनके लिए इंतजार की अवधि काफी बढ़ गई है। अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक, 10 लाख से भी ज्यादा भारतीय यहां स्थायी तौर पर बसने के लिए लाइन में लगे हैं और इनमें से कुछ तो दशकों से इंतजार कर रहे हैं।

एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी नौकरी पाना आज कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी परेशानी को दिखाती है बेंगलुरु के एक बीटेक ग्रेजुएट की कहानी, जिसने नौकरी की तलाश में एक महीने के भीतर 500 से ज्यादा आवेदन भेजे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। इस युवा इंजीनियर ने लिंक्डइन, अलग-अलग जॉब पोर्टल और कंपनियों की करियर वेबसाइटों पर लगातार प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी।

उसका कहना है कि वो किसी बड़ी सैलरी या नामी कंपनी की तलाश में नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ऐसा मौका चाहता है जहां वह काम सीख सके और अपने करियर की शुरुआत कर सके। उसकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हजारों फ्रेशर्स की परेशानियों को उजागर कर दिया है।

बड़ी सैलरी नहीं, बस शुरुआत का एक मौका चाहिए

युवा इंजीनियर ने कहा कि उसका लक्ष्य किसी बड़ी कंपनी में भारी पैकेज हासिल करना नहीं है। वह सिर्फ ऐसा अवसर चाहता है जहां वह काम सीख सके, इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर सके और अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर सके।

उसने लिखा कि वह किसी भी अच्छे टेक रोल, यहां तक कि शुरुआती दौर के स्टार्टअप में भी काम करने के लिए तैयार है, जहां उसे सीखने और योगदान देने का मौका मिले।

जब ऑनलाइन आवेदन भी बेअसर हुए तो रेडिट से मांगी मदद

लगातार कोशिशों के बाद जब कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो इंजीनियर ने रेडिट पर अपनी परेशानी साझा की। उसने नौकरी देने वालों, स्टार्टअप फाउंडर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मदद की अपील की।

उसकी पोस्ट का शीर्षक था  “एक महीने में 500+ नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन एक भी इंटरव्यू नहीं मिला।”

पोस्ट वायरल होते ही कई फ्रेशर्स ने अपनी-अपनी परेशानियां साझा करनी शुरू कर दीं।

फ्रेशर्स की सबसे बड़ी चुनौती

कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं रह गया है। एक यूजर ने सलाह दी कि उम्मीदवारों को सीधे कंपनी के फाउंडर्स, एचआर या कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए।

हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने भी ऐसा करके देखा, लेकिन 100 से ज्यादा एचआर को मैसेज करने के बाद भी उन्हें इंटरव्यू का मौका नहीं मिला।

स्किल्स हैं, फिर भी दरवाजे बंद हैं

एक कमेंट में एक टेक उम्मीदवार ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पास इंटर्नशिप अनुभव और कई आधुनिक टेक्नोलॉजी की जानकारी होने के बावजूद नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। उसने बताया कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन, ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, लैंगचेन और लैंगग्राफ जैसी तकनीकों पर काम कर चुका है, फिर भी कंपनियों तक पहुंच बनाना चुनौती बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा जॉब मार्केट में फ्रेशर्स के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ गई है, जबकि कुछ ने उम्मीदवारों को नेटवर्किंग और सीधे संपर्क जैसे तरीकों पर ध्यान देने की सलाह दी।

वहीं कुछ लोगों ने उम्मीद भी दिखाई। एक यूजर ने बताया कि उसे एक जॉब प्लेटफॉर्म के जरिए इंटरव्यू मिला और पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीना लगा।

नौकरी बाजार की नई हकीकत

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ डिग्री और तकनीकी ज्ञान आज के जॉब मार्केट में पर्याप्त हैं? बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन कंपनियां अनुभव, प्रोजेक्ट्स और नेटवर्किंग को भी तेजी से महत्व दे रही हैं।

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Gold Rate Today: सोना लगातार दूसरे दिन महंगा, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक चढ़ा; चेक करें नया भाव

देश में सोने की कीमत में लगातार दूसरे दिन तेजी है। 11 जुलाई की सुबह ज्यादातर शहरों में कीमत और चढ़ गई है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 144960 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। मुंबई में भाव 144830 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। डॉलर में आई कमजोरी की वजह से कीमती धातुओं की डिमांड बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,106.25 डॉलर प्रति औंस हो गया है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में सोने की कीमत में 400 रुपये की तेजी दर्ज की गई।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 144960 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132910 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 132760 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 144830 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 145650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 133510 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 144830 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 132760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली132910144960
मुंबई132760144830
अहमदाबाद132810144880
चेन्नई133510145650
कोलकाता132760144830
हैदराबाद132760144830
जयपुर132910144960
भोपाल132810144880
लखनऊ132910144960
चंडीगढ़132910144960

 

Ferrari 849 Testarossa Review: 1,050 PS पावर वाली इस सुपरकार में क्या है खास? जानें कीमत से परफॉर्मेंस तक सब कुछ

Ferrari ने 15 मार्च, 2026 को भारत में अपनी नई कार Ferrari 849 Testarossa लॉन्च की थी। जिसकी शुरुआती कीमत 10.37 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) है। यह एक प्लग-इन हाइब्रिड सुपरकार है, जो Ferrari SF90 Stradale की जगह लेगी और Lamborghini Revuelto को टक्कर देगी। अब चलिए इस कार के बारे में डिटेल में जानते हैं।

Testarossa नाम की कहानी करीब 70 साल पुरानी है। साल 1956 में Ferrari ने इस नाम का इस्तेमाल अपनी रेसिंग कारों के लिए किया था। उन कारों में लाल रंग के कैम कवर होते थे। बता दें कि इटैलियन भाषा में “Testarossa” का मतलब “रेड हेड” (लाल सिर) होता है। वहीं, Ferrari ने अब इतने लंबे समय बाद इस नाम को फिर से इस्तेमाल किया है।

Ferrari 849 Testarossa के नाम में “849” का मतलब इसके इंजन से जुड़ा है। इसमें 8 सिलेंडर वाला इंजन दिया गया है और हर सिलेंडर की क्षमता करीब 490cc है। Ferrari का कहना है कि यह अब तक की उनकी सबसे पावरफुल प्रोडक्शन कार है।

SF90 के डिजाइन से अलग एक नया लुक

डिजाइन की बात करें तो, इसका फ्रंट SF90 की स्टाइलिंग से अलग है। Ferrari ने इसके लिए 1970 के दशक की एंड्योरेंस रेसिंग प्रोटोटाइप और 1980 के दशक की टेस्टारोसा (Testarossa) से प्रेरणा ली है। कार में पतली LED हेडलाइट्स दी गई हैं, जो एक काले रंग की पट्टी के अंदर लगी हैं। और इसके नीचे दिया गया एक ब्रिज जैसा डिजाइन एरोडायनामिक स्पॉइलर का काम करता है।

इसके अलवा, कार के बड़े निचले एयर वेंट्स कूलिंग में मदद करते हैं, और इसके फ्रंट डिफ्यूजर में कार्बन-फाइबर इंसर्ट्स लगे हैं। नए डिजाइन किए गए फ्रंट अंडरफ्लोर से कार का कुल 35% डाउनफोर्स मिलता है।

कार के साइड में, 20-इंच के पहियों के साथ सिरेमिक ब्रेक कैलिपर्स और अलग-अलग साइज के टायर (staggered tyres) दिए गए हैं। पिछले पहिये के आर्च के आगे स्कुडेरिया फेरारी (Scuderia Ferrari) का बैज लगा है। इसके दरवाजे एयर इनटेक का भी काम करते हैं, जो इंटरकूलर और पिछले ब्रेक तक हवा पहुंचाते हैं। इसमें कार्बन फाइबर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है, जिसमें साइड स्कर्ट, व्हील आर्च और एरोडायनामिक डक्ट्स शामिल हैं।

1970 के दशक की रेसिंग ट्रिक

इसके पिछले हिस्से में ट्विन-टेल डिजाइन दिया गया है, जिसे कंपनी ने 1970 के दशक की 512S रेसिंग कार से लिया है। इसमें एक एक्टिव स्पॉइलर मिलता है, जो एक सेकंड से भी कम समय में अपनी स्थिति बदल सकता है। यह जरूरत के हिसाब से कार को कम हवा का दबाव (लो-ड्रैग) या ज्यादा पकड़ (हाई-डाउनफोर्स) देने में मदद करता है। यह स्पॉइलर कार में 100 किलोग्राम तक अतिरिक्त डाउनफोर्स पैदा कर सकता है।

250 km/h की रफ्तार पर, कुल डाउनफोर्स 415 kg तक पहुंच जाता है, जो SF90 Stradale के डाउनफोर्स से ज्यादा है। पिछले हिस्से में कार्बन-फाइबर डिफ्यूजर और बीच में लगे ट्विन एग्जॉस्ट हैं, जो इसके अंदर लगे V8 इंजन की ओर इशारा करते हैं।

1,050 PS:  Ferrari की अब तक की सबसे दमदार रोड कार

इंजन देखें तो, 849 Testarossa में 3.9-लीटर ट्विन-टर्बोचार्ज्ड V8 इंजन दिया गया है, जो अकेले 830 PS की पावर देता है। इसमें तीन इलेक्ट्रिक मोटर भी जुड़ी हैं: इनमें से दो मोटर आगे के पहियों पर लगी हैं, जो ऑल-व्हील ड्राइव और टॉर्क वेक्टरिंग में मदद करती हैं, जबकि तीसरी मोटर पीछे की तरफ दी गई है, जिसमें Ferrari की फॉर्मूला-1 तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कुल मिलाकर यह 1,050 PS की पावर देती है। इसमें 7.45 kWh की बैटरी दी गई है, जिसेसे सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड में 25 km तक चलाया जा सकता है।

इसके अलावा, इस कार में आठ-स्पीड डुअल-क्लच गियरबॉक्स है, जिसे साइड स्लिप कंट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक डिफरेंशियल, ABS Evo और Ferrari के 5 व्हीकल डायनामिक्स एस्टिमेटर जैसे सिस्टम का सपोर्ट मिलता है।

Ferrari के अनुसार, यह कार 0-100 km/h की रफ्तार 2.3 सेकंड से भी कम समय में और 0-200 km/h की रफ्तार लगभग 6.3 सेकंड में पकड़ लेती है। इसकी टॉप स्पीड 330 km/h से ज्यादा है।

रेस कार जैसा कॉकपिट

इंटीरियर की बात करें तो, केबिन में लेदर, कार्बन फाइबर और अल्कांतारा का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, इसमें एक फ्लोटिंग डैशबोर्ड और पैसेंजर के लिए परफॉर्मेंस डेटा दिखाने वाला डिस्प्ले भी है। ड्राइवर को वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto के साथ 16-इंच का डिजिटल डिस्प्ले भी मिलता है। इसके अलावा, इसके अंदर ऊंचे सेंटर कंसोल पर गियर सेलेक्टर लगा है, जिस पर ब्रश किए हुए एल्युमीनियम की फिनिशिंग है।

स्टेयरिंग व्हील में फेरारी के पुराने हैप्टिक कंट्रोल्स के बजाय फिजिकल स्विच और कार्बन-फाइबर पैडल शिफ्टर्स दिए गए हैं। सीटें कार्बन-फाइबर रेसिंग बकेट स्टाइल की हैं और उन पर अल्कांतारा की ट्रिमिंग है। साथ ही, इन्हें अपनी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज करने का ऑप्शन भी मिलता है।

बता दें कि Ferrari भारत में मुंबई और नई दिल्ली की डीलरशिप के जरिए यह कार बेचती है और बेंगलुरु से सर्विस सपोर्ट देती है।

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30 हजार फीट पर प्लेन की खिड़की टूटी:पैसेंजर का सिर-कंधे बाहर निकले, पत्नी ने बचाया, दोनों पैर पकड़े रही; ग्रीस के एयरस्पेस की घटना

ग्रीस के आकाश में एक फ्लाइट की खिड़की टूट जाने से बड़ा हादसा टल गया। प्लेन 30 हजार फीट पर था, तब केबिन में अचानक दबाव कम हो गया और विंडो शीट निकल गई। विंडो शीट पर बैठ 61 साल के पैसेंजर का सिर और कंधे खिड़की से बाहर निकल गए जैसे ही पास बैठे पैसेंजर ने यह देखा तो तुरंत उसे पकड़कर वापस प्लेन के अंदर खींच लिया। एक पैसेंजर ने बताया कि उस बुजुर्ग की जान उसकी पास बैठी पत्नी ने बचाई। जैसे ही वह विंडों से बाहर निकलने लगे, उनकी पत्नी ने जोर से पैर पकड़ लिए।अच्छी बात यह रही कि पीड़ित शख्स बेल्ट बांधे था, इससे वह बाहर नहीं सका। पहले विंडो के निकलने की फोटो देखिए पैसेंजर को जलने जैसी चोटें आईं फ्लाइट ग्रीस के थेसालोनिकी से जर्मनी के मेमिंगेन हा रही थी। विमान कंपनी रायनएयर ने बताया कि पैसेंजर को कुछ चोटें आई है। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसकी हालत ठीक है। यह घटना मैसिडोनिया के ऊपर हुई। घायल यात्री सर्बिया का टूरिस्ट है। उसे जलने जैसी चोटें आई हैं। प्लेन ने सुबह 5.55 मिनट पर (ग्रीस के समय के अनुसार) थेसालोनिकी से उड़ान भरी थी। यात्रियों ने बताया- टायर फटने जैसी आवाज आई इंजन के टुकड़े से खिड़की टूटने का अंदेशा ग्रीक मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विमान के इंजन से अलग हुए किसी मलबे के टुकड़े की वजह से खिड़की टूट गई। हालांकि, इस कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रायनएयर ने बयान जारी कर कहा कि उड़ान भरने के कुछ देर बाद यात्री वाली खिड़की अलग होने के कारण विमान को वापस थेसालोनिकी लौटना पड़ा। विमान ने सामान्य तरीके से लैंडिंग की और सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल पहुंचाया गया। एयरलाइन ने बताया कि बाकी यात्रियों को मेमिंगेन पहुंचाने के लिए एक दूसरा विमान भेजा गया। घटना की जांच जारी है। ————————————— ये खबर भी पढ़ें: एअर इंडिया फ्लाइट का इंजन बंद, पायलट का इमरजेंसी कॉल:मुंबई से बेंगलुरु जा रही थी, 20 मिनट में लौटी; टेकऑफ के दौरान चिंगारी भी दिखी मुंबई
मुंबई से बेंगलुरु जा रही एअर इंडिया की एअरबस A320 Neo फ्लाइट AI2812 बुधवार-गुरुवार की देर रात उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद मुंबई एयरपोर्ट लौट आई। अधिकारियों ने बताया कि हवा में एक इंजन बंद होने पर पायलट ने रेडियो पर ‘PAN PAN’ कॉल दी, जिसके बाद फ्लाइट को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित लैंड कराया गया। पढ़ें पूरी खबर…

Lt Kashish Methwani: मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़ कशिश मेथवानी ने चुना देश सेवा का रास्ता, सीडीएस में हासिल की थी एआईआर 2

Lt Kashish Methwani: कुछ लोग इतने प्रतिभावान होते हैं, वो जहां कदम रखते हैं सफलता उनके कदम चूमती है। ऐसा ही एक नाम है लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी का है। मुंबई में जन्मीं और पुणे में पली बढ़ीं कशिश के लिए मॉडलिंग की चकाचौंध भरी दुनिया शिखर पर बैठाने के लिए तैयार थी। लेकिन उनके मन में देश सेवा के सपने ने जन्म ले लिया था। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पेजेंट्री हमेशा से उनका पैशन रहा, लेकिन यह उनका लॉन्ग-टर्म करियर कभी नहीं था। उन्होंने बताया कि नेशनल कैडेट कोर में शामिल होना वह टर्निंग पॉइंट था जिसने उनके सपनों को पूरी तरह से बदल दिया।

साल था 2023 का, और मंच मिस इंटरनेशनल इंडिया था। उस पैजेंट में उन्होंने विजेता का ताज अपने सिर पर सजाया। लेकिन कशिश के लिए, मॉडलिंग वो सफर नहीं था, जिस पर चलने के लिए उनके मन में बरसों पहले आस जगी थी। ये बस एक शौक था, जो अब पूरा हो चुका था। अब अगले सफर पर निकलने का समय था। उन्होंने 2024 में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास करने पर ध्यान देने का फैसला किया, और वहां भी वह विजेता बनीं। उन्हें ऑल इंडिया रैंक 2 मिली।

उन्होंने मॉडलिंग छोड़ने का फैसला किया और यूनिफॉर्म में सेना जॉइन कर ली। चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में ग्यारह महीने की मुश्किल मिलिट्री ट्रेनिंग लेने के बाद, उन्हें 6 सितंबर को हुई पासिंग आउट परेड में इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन मिला। मेथवानी का यह कदम कई लोगों के लिए एक शॉक जैसा था ।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के हवाले से उन्होंने कहा, “रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेस्ट कैडेट की ट्रॉफी लेना, इससे मुझे एक मकसद मिला। यह तय था कि आर्मी ही वह जगह है जहां मैं सच में होना चाहती हूं।” आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट में उनकी पोस्टिंग बहुत अहम है क्योंकि यह रेजिमेंट भारत के ऑपरेशन सिंदूर में अहम काम कर रही थी।

लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी कौन हैं?

9 जनवरी 2001 को मुंबई के पास उल्हासनगर में जन्मी मेथवानी एक सिंधी परिवार से हैं। बाद में वह पुणे के वाकड में बस गईं, जहा उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साथ ही कई एक्स्ट्रा करिकुलर इंटरेस्ट भी किए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री पूरी की और फिर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से न्यूरोसाइंस थीसिस की। उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का भी ऑफर मिला, जो उनके शानदार एकेडमिक रिकॉर्ड को और दिखाता है।

परिवार का रोल काफी अहम रहा

लेफ्टिनेंट कशिश के पिता, डॉ. गुरमुख दास, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस में सीनियर पोस्ट संभालने से पहले एक साइंटिस्ट के तौर पर काम करते थे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल, घोरपडी में टीचर थीं। मेथवानी की भरतनाट्यम, डिबेट, एकेडमिक्स, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग जैसी अलग-अलग चीजों में दिलचस्पी रही है। सेना में शामिल होने से पहले, मेथवानी ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए डेडिकेशन क्रिटिकल कॉज नाम का एक एनजीओ भी शुरू किया था। इसका मकसद लोगों को अपना खून, प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

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