Viral Video: कौन हैं बीजेपी पार्षद किशन नायक, जिन्होंने अपने जन्मदिन पर नाले में उतरकर काटा केक

Who is Kishan Nayak: देश में आए दिन नेताओं के ऐसे कोई न कोई वीडियो वायरल होते रहते हैं, जो यह दिखाते हैं कि वे जनता की समस्याओं को लेकर कितने गंभीर हैं। दरअसल, हम बात कर रहे हैं आगरा के वार्ड 12 से बीजेपी पार्षद किशन नायक की, जिन्होंने गुरुवार को एक अनोखा कदम उठाते हुए अपने जन्मदिन का केक नाले में काटा। जिसके बाद उनका वीडियो इंटरनेट पर खुब चर्चा बटोर रहा है।

दरअसल, यह पूरा मामला न्यू विजय नगर कॉलोनी के नागला धानी इलाके की है, जहां गंदे और ओवरफ्लो हो रहे नाले से जन जीवन बेहाल है। लोगों के कई बार शिकायत करने पर भी प्रशासन द्वारा यहां की समस्या पर गौर नहीं किया गया।

इसी समस्या को देखते हुए पार्षद किशन नायक ने अपने जन्मदिन पर कहीं और केक काटने की बजाय घुटनों तक भरे नाले के पानी में उतर गए और वहीं केक काटा। उस समय हल्की बारिश भी हो रही थी और स्थानीय लोग नारे भी लगा रहे थे। इस घटना के बाद वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और और इंटरनेट पर इसकी खूब चर्चा हो रही है।

बता दें कि नायक नगला हरमुख वार्ड का प्रतिनिधित्वा करते हैं। उन्होंने पिछले तीन सालों में मेयर और नगर आयुक्त को 30 से ज़्यादा पत्र लिखकर सुल्तानगंज पुलिया से लंगड़े की चौकी होते हुए यमुना नदी तक जाने वाले नाले की सफाई और मरम्मत की मांग की है।

उनका कहना है कि यह नाला कभी एक ऐतिहासिक शाही नहर हुआ करता था, लेकिन 2011 से इसकी ठीक से सफ़ाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि कागजों पर तो बार-बार सफाई का काम पूरा दिखाया गया है, लेकिन असल में यहां के लोग बरसों से जल-जमाव, गंदगी और बदबू के बीच रह रहे हैं। इस नाले में गिरकर तीन लोगों — दो बच्चों और एक किसान — की मौत हो चुकी है और एक बच्चा अभी भी लापता है।

उन्होंने अपने जन्मदिन पर विरोध क्यों किया?

नायक का कहना है कि यह समय जान-बूझकर और एक खास मकसद से चुना गया था। उन्होंने बताया कि उनके वार्ड के लोगों को शादी-ब्याह, त्योहार और पारिवारिक कार्यक्रम कूड़े और बाढ़ के पानी के बीच करने पड़ते हैं — इसलिए उन्होंने भी अपना जन्मदिन उसी तरह मनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “हमने प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचने के लिए नाले में जन्मदिन मनाया।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मॉनसून आने वाला है और पानी जमा रहने की समस्या हल न होने से सेहत और बाढ़ का गंभीर खतरा बना हुआ है।

इंटरनेट पर क्या कहा जा रहा है?

इस वीडियो पर ऑनलाइन कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं-कहीं लोग सच में तारीफ कर रहे हैं, तो कहीं तीखे राजनीतिक मजाक भी हो रहे हैं।

यूजर @mr_mayank ने एक पोस्ट में लिखा,  “भाई को इस बात की परवाह नहीं थी कि BJP क्या एक्शन लेगी, न ही उन्हें ED की चिंता थी। भाई अपने लोगों के साथ खड़े रहे। भाई गलत पार्टी में एक अच्छे इंसान हैं। भाई जैसे बनो।” पोस्ट में यह भी बताया गया कि नायक ने उच्च अधिकारियों (जो सभी BJP-शासित राज्यों में थे) से कम से कम 12 बार शिकायत की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला; न तो स्थानीय MLA ने और न ही MP ने इसमें कोई दखल दिया।

वहीं, कुछ यूजर्स ने सिस्टम की खामियों पर तीखी टिप्पणी की। @YTKDIndia ने लिखा कि जब एक विभाग फाइल आगे बढ़ाता है, तो दूसरा विभाग जिम्मेदारी टाल देता है—और नाली वहीं की वहीं रह जाती है।

यूजर @DikshaKandpal8 ने बताया कि खुद नायक ने प्रधानमंत्री की मुख्य योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी का ‘स्वच्छ भारत मिशन’ जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो रहा है — यह बीजेपी के ही अंदर से की गई तीखी आलोचना थी।

वहीं, मीम बनाने वालों को सत्ताधारी पार्टी के एक पार्षद की तस्वीर पर मजाक करने का मौका मिल गया, जिसमें वह अपनी ही पार्टी के सिविक एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ विरोध कर रहे थे — कई यूजर्स ने मजाक में कहा कि बीजेपी को अपना ही विरोध करने का एक नया तरीका मिल गया है। आगरा को ‘स्मार्ट सिटी’ का दर्जा मिलने की वजह से यह नजारा और भी ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।

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Delhi Weather Today: दिल्ली में मानसून की एंट्री में देरी, लेकिन IMD का बड़ा अपडेट- अगले 5 दिनों में बारिश और आंधी का दौर तेज

Delhi Weather Today: दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन इसके इस तारीख तक न पहुंचने की संभावना है क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अभी तक यह घोषणा नहीं की है कि बारिश आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी में कब दस्तक देगी। हालांकि, आने वाले दिनों में बारिश के लिए मौसम की स्थिति अनुकूल बनी हुई है, जिससे भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद, शुक्रवार को दिल्ली में गर्मी और उमस भरा मौसम बना रहा। दोपहर 2:30 बजे शहर का हीट इंडेक्स, या “महसूस होने वाला” तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे बाहर निकलना काफी मुश्किल हो गया। वहीं, अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग चार डिग्री अधिक था, जबकि न्यूनतम तापमान 28.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बता दें कि पिछले साल दिल्ली में मानसून ने 29 जून को दस्तक दी थी, जबकि साल 2024 में यह 28 जून को पहुंचा था।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। यह मानसून उत्तरी अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ेगा। इस दौरान दिल्ली में भी बारिश होने की उम्मीद है।

अगले पांच दिनों के लिए दिल्ली का मौसम का पूर्वानुमान

IMD ने अगले कुछ दिनों में दिल्ली में रुक-रुक कर आंधी-तूफान और बारिश का अनुमान लगाया है, साथ ही तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना जताई है:

27 जून को शहर में अधिकतम तापमान लगभग 40°C और न्यूनतम तापमान 27°C रहने की उम्मीद है। वहीं, बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना है, लेकिन मौसम को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

28 जून को अधिकतम तापमान लगभग 40°C और न्यूनतम तापमान लगभग 27°C रहने की उम्मीद है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और आंधी-तूफान व बिजली कड़कने की संभावना है।

29 जून को तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है; दिन का तापमान 38°C और रात का तापमान 26°C रहने की संभावना है। बारिश के साथ आंधी-तूफान का दौर जारी रहने की उम्मीद है।

30 जून को भी मौसम ऐसा ही रहने का अनुमान है, जिसमें अधिकतम तापमान 38°C, न्यूनतम तापमान 26°C और बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बनी रहेगी।

1 जुलाई तक अधिकतम तापमान और गिरकर 36°C तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 24°C के आसपास रह सकता है। इसके साथ ही आंधी-तूफान और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे शहर में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहेगा।

इस बीच, दिल्ली के मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग में इस जून में अब तक 41.8mm बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस महीने में सामान्य बारिश 74.1mm होती है।

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देशभर में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा दक्षिण-पश्चिम मानसून अब दिल्ली में भी तय समय पर नहीं पहुंच पाएगा। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में मानसून की एंट्री अगले हफ्ते होने की संभावना है। आमतौर पर दिल्ली में मानसून 27 जून के आसपास पहुंच जाता है। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने हाल ही में 1961 से 2019 के औसत आंकड़ों के आधार पर मानसून के पहुंचने की तारीखों में बदलाव किया है।

मौसम विभाग का कहना है कि भले ही मानसून केरल में समय पर पहुंच जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों तक पहुंचने में पहले की तुलना में ज्यादा समय लग रहा है। इसी वजह से दिल्ली समेत कई इलाकों में मानसून की दस्तक देर से होने की संभावना जताई गई है।

अभी कई राज्यों को करना होगा इंतजार

मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून 26 जून तक चंडीगढ़, 27 जून तक दिल्ली, 28 जून तक जम्मू, 1 जुलाई तक जयपुर और 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन इस साल मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है। प्रायद्वीपीय और मध्य भारत के कई हिस्सों में यह अभी भी सामान्य समय से पीछे चल रहा है। शुक्रवार तक मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक पहुंची थी। अभी यह उत्तर प्रदेश में नहीं पहुंचा है, जहां किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कमजोर मानसून के कारण जून महीने में देशभर में सामान्य से करीब 41 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 2 जुलाई तक भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग ने दिया नया अपडेट

आईएमडी के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों में मानसून उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। वहीं 2 जुलाई के बाद इसके धीरे-धीरे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। मानसून में देरी के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी और बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में लू चल रही है। प्रयागराज में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि कई जगहों पर तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।

दिल्ली में भी दिन और रात दोनों समय गर्मी बनी हुई है। दिन का तापमान 37 से 40 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हालांकि, बीच-बीच में चलने वाली तेज हवाओं और हल्की आंधी से लोगों को थोड़ी राहत मिल रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली में आसमान में बादल छाए रहेंगे और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

अल नीनो का असर बढ़ा

मौसम वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति बन चुकी है। इसका असर इस साल के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ सकता है। आईएमडी के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से मौसम में बदलाव हो रहा है। अनुमान है कि जून से सितंबर तक चलने वाले मानसून के दौरान अल नीनो का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। आईएमडी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस साल देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। ऐसे में कई राज्यों में मानसून कमजोर रहने की आशंका बनी हुई है।

कल का मौसम 27 जून: IMD ने बिहार समेत इन 20+ राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान का अलर्ट दिया, दिल्ली से यूपी तक ऐसा रहेगा वेदर

India Weather Update: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 जून के लिए देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मांडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के बचे हुए हिस्सों और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट: बंगाल और सिक्किम में आफत की आशंका

मौसम विभाग ने 27 जून को कुछ राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 27 जून को अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ बेहद भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है। यहां 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलेंगी। असम और मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।

बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

  • आईएमडी के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 27 जून को देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है।
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: बिहार और ओड़िशा में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है।
  • मध्य और पश्चिमी भारत: छत्तीसगढ़, कोंकण और गोवा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मध्य महाराष्ट्र में भी व्यापक रूप से वर्षा होने की संभावना है।
  • दक्षिण भारत: तटीय कर्नाटक, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और तेलंगाना के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है।

आंधी-तूफान, बिजली और थंडरस्कॉल का अलर्ट: दिल्ली-NCR से राजस्थान तक

मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में तेज रफ्तार हवाओं और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया है। झारखंड में 27 जून को 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ थंडरस्कॉल और बिजली गिरने की आशंका है। हरियाणा, चंडीगढ़ व दिल्ली, पंजाब, पश्चिम राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गांगेय पश्चिम बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल, केरल, माहे और लक्षद्वीप में अलग-अलग स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और बिजली चमकने का अलर्ट है।

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इसी तरह पूर्वी राजस्थान, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक की संभावना है। इसके अलावा आंतरिक कर्नाटक में तेज सतही हवाएं चलने का भी अनुमान है।

यूपी में लू का प्रकोप

एक तरफ जहां देश के बड़े हिस्से में मानसूनी बादल बरस रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के लोगों को अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। पूर्वी यूपी के अलग-अलग इलाकों में 27 जून को लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की आशंका है। पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में भी लू का प्रकोप देखा जा सकता है। ओडिशा के अलग-अलग हिस्सों में 27 जून को मौसम बेहद गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया, कहा-क्रूड में नरमी से इकोनॉमी पर घटा है दबाव

अमेरिका-ईरान में डील का पॉजिटिव असर इंडियन इकोनॉमी पर पड़ेगा। गोल्डमैन सैक्स ने भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। इनफ्लेशन को लेकर भी उसकी राय बदली है, क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है। साथ ही सरकार के इंपोर्ट बिल में कमी आई है।

क्रूड में नरमी से भारत के लिए अच्छी संभावनाएं

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मध्यपूर्व में तनाव घटने और क्रूड ऑयल में नरमी से भारतीय इकोनॉमी के लिए संभावनाएं बेहतर हुई हैं। उसने कहा है, “इस साल की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ हमारे पहले के अनुमान से ज्यादा रह सकता है। इससे हमें ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ाना पड़ा है।” अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंक ने इस साल यानी 2026 में भारत के ग्रोथ के अनुमान को 0.3 फीसदी बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है।

सप्लाई बढ़ने से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट 

अमेरिका-ईरान में डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स और दूसरे जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ी है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारत आने वाला काफी क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। हालांकि, इस साल की दूसरी छमाही में गोल्डमैन सैक्स क्रूड की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है, जो इसकी मौजूदा कीमत से ज्यादा है।

गोल्डमैन सैक्स ने इनफ्लेशन के अनुमान को घटाया

गोल्डमैन सैक्स ने भारत में इनफ्लेशन के अपने अनुमान को भी घटाया है। उसने इसे 5.1 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया गया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल यूरिया प्राइस में बड़ा करेक्शन आया है। इससे फर्टिलाइजर सब्सिडी में कमी आएगी। साथ ही क्रूड सस्ता होने से भी सरकार पर वित्तीय दबाव घटेगा।

मानसून में कम बारिश का अनुमान एक बड़ी चुनौती

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, पहले के मुकाबले स्थितियां पॉजिटिव होने के बावजूद भारत के लिए कुछ चुनौतियां नजर आ रही हैं। मौसम विभाग ने इस साल मानसून की बारिश कम होने का अनुमान जताया है। इस साल अल नीनो के असर का भी अनुमान जताया गया है। ऐसा होने पर ग्रामीण इलाकों में डिमांड पर असर पड़ सकता है।

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आरबीआई रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़ा सकता है

उसने कहा है कि आरबीआईआ इस साल रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर सकता है। हालांकि, पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में लगातार गिरावट से इनफ्लेशन पर दबाव घटेगा, जिससे आरबीआई अपनी पॉलिसी सख्त करने में देर कर सकता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया।

Tumbbad 2: सोहम शाह स्टारर ‘तुम्बाड 2’ का महाराष्ट्र के मानसून से है तगड़ा कनेक्शन, जानें फुल अपडेट

Tumbbad 2: सोहम शाह स्टारर ‘तुंबाड’ भारत की सबसे यादगार हॉरर फ़िल्मों में से एक है। 2018 में राही अनिल बर्वे के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म की कई खासियतों में से एक है इसका डरावना माहौल, जिसमें लगातार होती बारिश कहानी का एक अहम हिस्सा बन गई थी।

लगातार होती बारिश ने इस भारतीय पौराणिक हॉरर फ़िल्म की दुनिया को और भी डरावना और असरदार बना दिया था। यह कहना गलत नहीं होगा कि बारिश खुद एक किरदार की तरह थी। खबरों के मुताबिक, मेकर्स इसके सीक्वल में भी वही जादू फिर से पैदा करने की योजना बना रहे हैं। कहा जा रहा है कि वे शूटिंग शेड्यूल में बदलाव कर रहे हैं और दूर-दराज की जगहों की तलाश कर रहे हैं ताकि फ़िल्म की शूटिंग असली बारिश में हो सके।

जहां ‘तुंबाड’ की शूटिंग चार मॉनसून सीज़न के दौरान हुई थी, वहीं खबर है कि इसके सीक्वल के शेड्यूल में कई बार बदलाव किए जा रहे हैं ताकि एक बार फिर असली बारिश को कैमरे में कैद किया जा सके। फिल्म के मेकर्स उस यादगार माहौल को फिर से बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिसने पहली फिल्म को इतना खास बनाया था।

सूत्रों के मुताबिक, मॉनसून के असामान्य और अनिश्चित व्यवहार के कारण प्रोडक्शन टीम ने अपनी शूटिंग की योजनाओं में पूरी तरह से बदलाव किया है। महाराष्ट्र में बारिश का पैटर्न लगातार अनिश्चित होता जा रहा है, इसलिए मेकर्स मौसम की स्थिति पर रियल-टाइम नज़र रख रहे हैं और जिन इलाकों में सबसे ज़्यादा बारिश हो रही है, वहाँ के हिसाब से अपने शेड्यूल में बदलाव कर रहे हैं।

अंदरूनी सूत्रों का यह भी कहना है कि टीम ने बड़े पैमाने पर कृत्रिम वर्षा व्यवस्था पर निर्भर न रहने का विकल्प चुना है, बल्कि तुम्बाड से जुड़ी प्रामाणिकता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक वर्षा को इकट्ठा करना पसंद किया है, साथ ही कई क्षेत्रों में चल रही पानी की कमी के बीच पानी के उपयोग से संबंधित व्यापक चिंताओं का भी ध्यान रखा है।

खबर है कि टीम महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाकों में दूर-दराज और बारिश वाली जगहों की तलाश कर रही है, ताकि ‘तुंबाड’ वाली वैसी ही शानदार दुनिया बनाई जा सके जिससे दर्शक जुड़े हुए हैं। कहा जाता है कि इन जगहों तक पहुंचना ही अपने आप में एक चुनौती है। सेट पर पहुंचने के लिए कास्ट और क्रू को घने और मुश्किल रास्तों से होकर लगभग दो से तीन घंटे की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।

फिल्म से जुड़े एक सूत्र ने कहा, “मज़ेदार बात यह है कि जहां ‘तुंबाड’ चार मॉनसून सीज़न में शूट होने की वजह से मशहूर हुई थी, वहीं ‘तुंबाड 2’ के लिए टीम असल में मॉनसून का पीछा कर रही है।” उन्होंने आगे कहा, “‘तुंबाड’ की दुनिया में बारिश हमेशा से एक अहम किरदार रही है और मेकर्स इसे असलियत के साथ दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

सूत्र ने यह भी बताया कि कुछ जगहों को खास तौर पर इसलिए चुना गया क्योंकि वहां बाकी जगहों के मुकाबले ज़्यादा बारिश हो रही थी। सोहम शाह इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और इसे उनके ही बैनर तले बनाया जा रहा है। नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी भी फ़िल्म में एक अहम भूमिका में नज़र आएंगे। फ़िल्ममेकर आदेश प्रसाद इस सीक्वल को डायरेक्ट कर रहे हैं। ‘तुम्बाड 2’ 3 दिसंबर, 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

UP Weather Alert: प्रयागराज-कानपुर समेत कई जिलों में 70kmph स्पीड तक आंधी की चेतावनी, कुछ घंटों में इन 41 जिलों में बिगड़ेगा मौसम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ आंचलिक केंद्र ने उत्तर प्रदेश के लिए ताजा जिला स्तरीय नाउकास्ट अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के कुल 41 जिलों में अगले कुछ घंटों के दौरान आंधी, बिजली और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। कुछ जिलों में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है।

मौसम विभाग ने दो श्रेणियों में चेतावनी जारी की है। सबसे गंभीर स्थिति प्रयागराज, हमीरपुर, जालौन, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव और औरैया में रहने वाली है। इन जिलों में मध्यम तीव्रता के गरज-चमक वाले तूफान, बिजली गिरने और 40-60 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। यहां हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है।

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वहीं दूसरी श्रेणी में 34 जिलों को येलो अलर्ट पर रखा गया है। इनमें सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, प्रतापगढ़, चित्रकूट, महोबा, बांदा, कौशांबी, रायबरेली, कानपुर नगर, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बरेली, अलीगढ़, बुलंदशहर, संभल समेत कई जिले शामिल हैं। इन इलाकों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं, बिजली चमकने और हल्की बारिश की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और निचले स्तर पर सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश में मौसम तेजी से बदल रहा है। पूर्वी और मध्य यूपी में नमी बढ़ने लगी है, जिससे गरज-चमक वाली गतिविधियां तेज हुई हैं।

लोगों के लिए सलाह

  • खराब मौसम के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें
  • बिजली चमकने के समय सुरक्षित भवनों के भीतर रहें
  • वाहन चलाते समय तेज हवा और कम विजिबिलिटी से सावधानी बरतें
  • किसानों को फसल कटाई और खुले में रखी उपज को सुरक्षित करने की सलाह दी गई है।

यहां सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा किसानों को आम का दाम, तोतापरी की हजारों एकड़ की खेती पेड़ पर ही सड़ने को छोड़ी!

देश में इस समय भले ही लोग मानसून का इंतजार कर रहे हो पर झमाझम बारिश के पहले आम का सीजन अपने चरम पर पहुंच गया है। मार्केट में अलग-अलग वैरायटी और अलग-अलग नाम के आम देखने को मिल रहे हैं। वहीं बाजर में मिल रहे इन आमों में तोतापरी आम अपनी अलग ही जगह बना कर रखी हुई है। आम के सीजन में इस आम की भी अच्छी खासी डिमांड देखने को मिलती है।

इस आम की मिठास हर किसी को पसंद आती है, लेकिन इन्हीं आमों को उगाने वाले किसान आज भारी संकट से जूझ रहे हैं। तमिलनाडु के मदुरै जिले में तोतापरी आम की फसल का ऐसा हाल है कि किसानों को सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा है।

सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा आम

तमिलनाडु के मदुरै जिले के मेलूर तालुक में एक हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में आम की खेती होती है। यहां उगने वाले ‘किली मूकु’ (तोतापरी) आम की सप्लाई देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी की जाती है। लेकिन इस साल किसानों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि उन्हें आम के सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं, जबकि यही आम खुदरा बाजार में 40 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक कीमत पर बिक रहा है।

कीमत में भारी अंतर से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि उन्हें फल तोड़ने और मजदूरों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा है। इसी वजह से कई किसानों ने आम की तुड़ाई नहीं कराने का फैसला किया है और फल पेड़ों पर ही छोड़ दिए हैं, जहां वे धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं।

क्यों खास हैं तोतापरी आम

तोतापरी आम का जो आकार होता है, वह तोते की चोंच की तरह होता है। इसके साथ ही इस आम का लाल कलर होता है। इसलिए इस आम का नाम तोता परी आम रखा गया है। इसका स्वाद थोड़ा खट्टा मीठा होता है। इसके साथ ही यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश इन क्षेत्रों में ज्यादा पाया जाता है। इस आम का साइज बहुत बड़ा होता है।

Monsoon & El Nino Impact: El Nino पर IMD ने जारी किया बिग अपडेट, क्या कमजोर पड़ेगा मानसून या जुलाई में तेज होगी बारिश?

El Nino Impact on Southwest Monsoon 2026: देश में अब आगे बढ़ रहे दक्षिण-पश्चिम मानसून के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अल नीनो (El Niño) और आने वाले दो हफ्तों की बारिश को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अपडेट जारी किया है। जून के महीने में अब तक देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इसके बाद हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या जुलाई में मानसून रफ्तार पकड़ेगा या अल नीनो का साया इसे कमजोर कर देगा?

आईएमडी की 25 जून को जारी लेटेस्ट प्रेस रिलीज के मुताबिक देश में मौसम का मिजाज अगले दो हफ्तों में पूरी तरह बदलने वाला है। आइए जानते हैं अल नीनो पर मौसम विभाग का क्या कहना है और जुलाई के पहले हफ्ते में आपके इलाके में कैसी बारिश होगी।

El Nino पर IMD का बड़ा अलर्ट: क्या बढ़ेगा खतरा?

मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां बनी हुई हैं और इसके दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान और अधिक मजबूत होने की आशंका है। मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम के मॉडल भी संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में अल नीनो की स्थिति और गहरा सकती है।

राहत की बात: हालांकि अल नीनो मजबूत हो रहा है लेकिन हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल इंडियन ओशन डिपोल की स्थिति बनी हुई है, जो पूरे मानसून सीजन में ऐसे ही रहने की उम्मीद है। इसके अलावा मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) फेज-5 में है, जो जुलाई के शुरुआती दिनों में बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्सों में मानसूनी गतिविधियों को बढ़ाने में मदद करेगा।

जून में बारिश का क्या रहा हाल?

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून के महीने में मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है। 1 जून से 24 जून 2026 तक पूरे भारत में कुल संचयी बारिश सामान्य से 42% कम दर्ज की गई है। बीते सप्ताह (18-24 जून) के दौरान भी देश भर में सामान्य से 47% कम बारिश हुई।

अगले दो हफ्तों का फोरकास्ट: क्या जुलाई में तेज होगी बारिश?

मौसम विभाग ने 25 जून से 8 जुलाई 2026 तक के लिए दो चरणों में अपना विस्तृत अनुमान जारी किया है।

पहला हफ्ता (25 जून से 01 जुलाई 2026): धीमी शुरुआत, गर्मी से थोड़ी राहत

मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल सूरत, इंदौर, मांडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही हैं। अगले कुछ दिनों में इसके गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के बचे हुए हिस्सों और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इस हफ्ते में मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश होगी। बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25-28 जून के बीच लू से गंभीर लू की स्थिति रह सकती है। बिहार और झारखंड में भी 25-26 जून को हीटवेव का असर दिखेगा, जिसके बाद तापमान में गिरावट आएगी। ओवरऑल बात करें तो पहले हफ्ते में पूर्वोत्तर भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।

दूसरा हफ्ता (02 जुलाई से 08 जुलाई 2026): मानसून पकड़ेगा तूफानी रफ्तार!

जुलाई का पहला हफ्ता बीतते-बीतते देश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा और अल नीनो के प्रभाव को पछाड़ते हुए भारी बारिश लेकर आएगा। इस हफ्ते में मानसून मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के शेष हिस्सों सहित दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के बचे हुए भागों में दस्तक दे देगा। कम ऊंचाई वाली सोमाली जेट हवाएं और मजबूत होंगी। इससे अरब सागर से भारी नमी आएगी। इसके प्रभाव से गुजरात के तटीय इलाकों, कोंकण व गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल में भी भीषण बारिश जारी रहेगी। आईएमडी के मुताबिक दूसरे हफ्ते (2-8 जुलाई) के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। इस दौरान देश के किसी भी हिस्से में हीटवेव की कोई संभावना नहीं है।

IMD की जरूरी सलाह: किसान और आम जनता रखें ध्यान

शहरी इलाकों के लिए चेतावनी: भारी बारिश के कारण मुंबई, कोंकण और तटीय शहरों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।

किसानों के लिए एग्रो-एडवाइजरी: पूर्वोत्तर राज्यों, असम, केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों के किसानों को सलाह दी गई है कि वे धान की नर्सरी, मक्का और सब्जियों के खेतों में जलभराव रोकने के लिए जल निकासी का पुख्ता इंतजाम करें। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के किसान गर्मी को देखते हुए फसलों में हल्की सिंचाई करें और नमी बचाने के लिए मल्चिंग का उपयोग करें।

आंधी-तूफान से बचाव: वज्रपात और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के दौरान कंक्रीट की दीवारों का सहारा न लें, पेड़ों के नीचे न छिपें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें।

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Delhi NCR Monsoon Watch: दिल्ली में मानसून एंट्री की नई डेट IMD ने बताई, 30 जून के भी पार जाएगा! जाने कब होगी मानसूनी बारिश की शुरुआत

Delhi-NCR Monsoon Watch: दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के लोगों को मानसून की फुहारों के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक दिल्ली में मानसून की एंट्री अपनी सामान्य तारीख से आगे बढ़ गई है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि दिल्ली में मानसूनी बारिश की शुरुआत अब 30 जून के भी पार यानी अगले हफ्ते जुलाई के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। आईएमडी के मुताबिक एक्सटेंडेड फोरकास्ट पीरियड के दूसरे सप्ताह यानी 2 जुलाई से 8 जुलाई के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो रही हैं। आइए जानते हैं कि मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR सहित देश के अन्य हिस्सों में मानसून की दस्तक और बारिश की शुरुआत को लेकर क्या नया अनुमान जारी किया है।

दिल्ली में क्यों हो रही है मानसून की एंट्री में देरी?

आमतौर पर दिल्ली में मानसून के दस्तक देने की सामान्य तारीख 30 जून के आसपास होती है। इस बार मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। इस बार मानसून एंट्री की यह तारीख अब आगे खिसक कर जुलाई के पहले सप्ताह (2 से 8 जुलाई) में पहुंच गई है। मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मौसमी परिस्थितियां उत्तर और मध्य भारत में लगातार नमी के प्रवाह और मानसूनी गतिविधियों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह मददगार साबित हो रही हैं।

अगले हफ्ते (2 से 8 जुलाई) के बीच क्यों मजबूत होगा मानसून?

IMD ने अपने बुलेटिन में उन प्रमुख भौगोलिक और वायुमंडलीय बदलावों का जिक्र किया है, जो अगले हफ्ते मानसून को तेजी से आगे बढ़ाएंगे।

सोमाली जेट: निचले क्षोभमंडल स्तर पर सोमाली जेट के और मजबूत होने की संभावना है। इससे दक्षिणी अरब सागर में क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो को बढ़ावा मिलेगा।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती परिसंचरण: जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर बंगाल की खाड़ी के निचले से मध्य क्षोभमंडल स्तरों पर एक असामान्य चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने की संभावना है।

पछुआ हवाओं का असर: देश के उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय हिस्सों में निचले क्षोभमंडल स्तरों पर पछुआ हवाएं हावी रहेंगी।

दूसरी मौसमी प्रणालियां: सक्रिय बंगाल की खाड़ी का परिसंचरण, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का सहायक चरण, तिब्बती एंटीसाइक्लोन का अपनी सामान्य स्थिति में अधिक स्पष्ट होना और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत पर ईस्ट-वेस्ट शियर जोन का विकसित होना मानसून को आगे ले जाने में मदद करेगा।

दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में कब से शुरू होगी बारिश?

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक 2 जुलाई से 8 जुलाई के बीच देश के इस बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज ऐसा रहेगा।

दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली सहित उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में इस अवधि के दौरान छिटपुट से लेकर काफी व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और निचले क्षोभमंडल स्तर की पछुआ हवाओं के असर की वजह से जुलाई के पहले सप्ताह में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में कुछ दिनों के लिए अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।

देश के अन्य राज्यों में मानसून की क्या है स्थिति?

फिलहाल दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मंडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है।

पहले सप्ताह का अनुमान: मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान सप्ताह में मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बचे हुए हिस्सों, झारखंड और बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।

दूसरे सप्ताह (2 से 8 जुलाई) का अनुमान: अगले हफ्ते परिस्थितियां और बेहतर होंगी। इससे मानसून मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के शेष बचे हुए हिस्सों में पूरी तरह प्रवेश कर जाएगा। इसके साथ ही जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान के कुछ और हिस्सों में भी मानसून अपनी दस्तक दे देगा।

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