पाकिस्तान के सांसद और नेशनल असेंबली के पूर्व स्पीकर असद कैसर UAE में पाकिस्तानी यात्रियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने मंगलवार को संसद में कहा कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद होटल में भारतीय और अमेरिकी नागरिकों को कमरा दिया गया, जबकि पाकिस्तानी यात्रियों को ठहरने की सुविधा नहीं मिली। कैसर ने दावा किया कि मैं खुद इस घटना के दौरान वहां मौजूद था। उनके मुताबिक फ्लाइट कैंसिल होने के बाद यात्रियों को होटल में ठहराने की व्यवस्था की जा रही थी। सांसद बोले- UAE सरकार के सामने मामला उठाए पाकिस्तान कैसर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सांसद हैं। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से मामले को UAE अधिकारियों के सामने उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और UAE के बीच करीबी रिश्ते हैं और ऐसी घटनाओं को दोनों देशों के संबंधों पर असर नहीं डालना चाहिए। उन्होंने UAE को पाकिस्तान का ‘इस्लामिक भाई देश’ बताते हुए कहा कि UAE के विकास में पाकिस्तानियों का भी योगदान रहा है। कैसर ने यह भी दावा किया कि एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मिलकर UAE में इस तरह के व्यवहार की शिकायत की थी। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में होटल का नाम, यात्रियों की संख्या या कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया। PAK संसद में कैसर का पूरा बयान… UAE में फ्लाइट कैंसिल होने पर क्या हैं नियम UAE के जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी (GCAA) के पैसेंजर वेलफेयर प्रोग्राम के तहत फ्लाइट कैंसिल होने या लंबे समय तक देरी होने पर एयरलाइन को यात्रियों की जरूरत के मुताबिक सहायता देनी होती है। अगर यात्रियों को 8 घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़े तो नियमों के तहत होटल, खाना-पीना, कम्युनिकेशन और एयरपोर्ट से होटल तक आने-जाने की फैसिलिटी देने का प्रावधान है। कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने और अगली संभावित फ्लाइट 8 घंटे से ज्यादा होने पर भी होटल की व्यवस्था की जा सकती है। पासपोर्ट के आधार पर अलग सुविधा का नियम नहीं GCAA के नियमों में होटल और दूसरी यात्री सुविधाओं को फ्लाइट की देरी, कैंसिलेशन और कनेक्शन की स्थिति से जोड़ा गया है। भारतीय, अमेरिकी या पाकिस्तानी पासपोर्ट के आधार पर अलग-अलग होटल सुविधा देने का कोई सामान्य नियम नहीं है। इसलिए अगर मौजूदा मामले में पासपोर्ट के आधार पर यात्रियों को अलग सुविधा दी गई तो यह सामान्य यात्री-सहायता नियमों से अलग मामला होगा। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती कि होटल ने वास्तव में पासपोर्ट के आधार पर ही यात्रियों को कमरे दिए थे। खबर अपडेट हो रही है…
भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं। अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा। भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है। पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है। सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। —————————– खबर अपडेट हो रही है…. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे साल मिशन डिपोर्टेशन तेज कर दिया है। इस अगस्त के पहले 15 दिन में ही 5200 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है। इस बार की डिपोर्टेशन लिस्ट में एच-1 बी, ओ-1 और स्टूडेंट वीसा पर अमेरिका गए भारतीय भी शामिल हैं। इन प्रोफेशनल्स की भी अच्छी खासी संख्या है। इस साल हर तीसरे हफ्ते में एक डिपोर्टेशन फ्लाइट रवाना की गई। वहीं, कनाडा के अल्बर्टा प्रांतीय सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) रद्द कर दिया। अब वहां पर पढ़ाई कर रहे लगभग 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ गया है। 2025 में अमेरिका से डिपोर्ट भारतीयों की संख्या 16 साल में सबसे ज्यादा इमिग्रेशन एजेंसी (आईस) के एक अधिकारी के अनुसार अवैध प्रवासियों के खिलाफ इनकी धरपकड़ और डिपोर्टेशन दोनों की संख्या बढ़ी है। इस साल के अंत तक डिपोर्ट किए जाने वाले अवैध प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या होने वाली है। पिछले साल यानी 2025 में डिपोर्ट किए गए तीन हजार से ज्यादा भारतीयों में सभी ऐसे थे, जो अवैध रूप से अमेरिका में आए थे। आईस ने जून में ही 801 भारतीयों को रिमूवल ऑर्डर (वापसी आदेश) जारी किया। हालांकि, इस रिमूवल ऑर्डर से तुरंत डिपोर्टेशन नहीं होता है। इसके खिलाफ कोर्ट में अपील की जा सकती है या फिर संबंधित व्यक्ति अपनी इच्छा से अमेरिका को छोड़ सकता है। 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 16 साल में सबसे ज्यादा थी। ह्यूमन राइट्स फर्स्ट संगठन के अनुसार भारतीयों को ओमानी एयरवेज से डिपोर्ट कर रहे हैं। टेक्सास के हार्लिंग से 20 घंटे की फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा है। इस साल डिपोर्टेशन उड़ानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले साल अमेरिका ने सैन्य विमान हरक्यूलिस से डिपोर्ट किया था। ट्रैफिक लाइट पार करने या सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कार्रवाई वैध वीसा पर आए प्रोफेशनल्स को किसी भी उल्लंघन का आरोप लगा डिपोर्ट किया जा रहा है। अमेरिका के किसी शहर में ट्रैफिक लाइट पार करने पर भी छात्रों को डिपोर्ट करने के मामले सामने आए हैं। कुछ छात्रों द्वारा सोशल मीडिया जैसे एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रम्प सरकार की आलोचना का दोषी मानकर डिपोर्ट कर दिया गया। टेक्सास में एच-1बी वीसा होल्डर की जॉब चली गई, जबकि उसके पास 60 दिन तक अमेरिका में रहकर नई जॉब सर्च करने का अधिकार था। इस बीच, एक रेस्तरां में पार्ट टाइम जॉब करते समय आईस ने रेड डाली। वीसा होल्डर को पकड़ लिया गया। उसे आईस ने वीसा उल्लंघन का दोषी माना और भारत डिपोर्ट कर दिया। 2025 में 3,567 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट हुए थे 2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया था। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने जून 2026 में दी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2026 में जून तक 1076 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। इस दौरान कई लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगी थीं। इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद देशभर में विवाद हुआ। संसद में भी हंगामा हुआ था। कनाडा में 1500 भारतीय छात्रों का वर्क परमिट रद्द, निकाले जा सकते हैं कनाडा की अल्बर्टा राज्य सरकार की ओर से पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) रद्द किए जाने से वहां पढ़ाई कर रहे करीब 1,500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ गया है। कनाडा में वर्क परमिट होने से ये सभी छात्र स्टडी-जॉब प्रोग्राम में शामिल थे। यानी ये सभी स्टडी के बाद जॉब भी कर रहे थे। अल्बर्टा के इन छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। फिलहाल कनाडा इमिग्रेशन का कहना है कि कुछ समय तक ये छात्र जॉब कर सकते हैं। इन छात्रों का कहना है कि कनाडा सरकार की ओर से जॉब गारंटी को बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए नए कानून बनाए जाएं। पीएम बोले- बिना वैध वीजा-वर्क परमिट वाले छात्रों को जाना होगा उधर, कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का कहना है कि जिन छात्रों के पास यहां रहने का वैध वीसा या फिर वर्क परमिट नहीं है, उन्हें जाना ही पड़ेगा। अल्बर्टा के प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने और भी सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि स्टडी वीसा अस्थायी दस्तावेज है। विदेशी छात्र इस आधार पर कनाडा में हमेशा के लिए नहीं रह सकते हैं। हमारे कॉलेज पहले अल्बर्टा के टैक्सपेयर्स के लिए हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों को स्टडी पूरी करने के बाद अपने देश लौटना ही पड़ेगा। जहां तक नियमों की बात है, कनाडा आने वाले हरेक विदेशी छात्र को इन्हें मानना ही होगा। ———— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 15 हजार भारतीयों की छंटनी, नई जॉब नहीं:H-1B पर गए थे, ट्रम्प के सख्त नियम से अब डिपोर्ट का खतरा अमेरिका में 15 हजार भारतीय टेक कर्मियों की नौकरी जाने के बाद उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई होगी। इसमें बैंक, कंपनियां, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करने और कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को रोकने की बात कही। ट्रम्प का दावा- ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान
ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को बड़ा नुकसान हुआ है और उसके कई सैन्य कारखाने तबाह हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मुद्रा की हालत बहुत खराब है और देश आर्थिक संकट में है। ट्रम्प ने अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अमेरिका ईरान पर बहुत बड़ा आर्थिक दबाव बनाने जा रहा है। उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान की मदद बंद करने और अमेरिका के साथ इस अभियान में शामिल होने की अपील की। अमेरिकी प्रतिबंधों का ईरान पर क्या असर पड़ेगा? अमेरिका की नई कार्रवाई का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल कारोबार और पैसे के लेनदेन पर पड़ सकता है। ईरान की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल बेचने से आता है। अगर दूसरे देश, बैंक और कंपनियां अमेरिकी कार्रवाई के डर से ईरान के साथ कारोबार कम करते हैं, तो ईरान के लिए तेल बेचना और विदेशों से पैसा लेना मुश्किल हो सकता है। तेल की तस्करी और फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई होने से ईरान के लिए छिपकर कारोबार करना और अमेरिकी कार्रवाई से बचना भी मुश्किल होगा। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान को दुनिया से आर्थिक तौर पर अलग करने की कोशिश करेगा। ईरान का तेल तस्करी नेटवर्क कैसे काम करता है तेल बेचकर कमाई, पहचान छिपाकर सप्लाई तेल के बाद पैसे की बारी अमेरिका पूरी चेन तोड़ना चाहता है —————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- 2020 चुनाव में 24,000 गैर-नागरिकों ने वोट डाले:चुनाव में मेरी जीत हुई थी, धांधली रोकने के लिए कानून बनाऊंगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मतदाता और नागरिकता रिकॉर्ड की जांच में 24 हजार से ज्यादा गैर-अमेरिकी नागरिकों के वोट डालने का पता चला है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बांग्लादेश में 35 साल बाद आज राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं। बांग्लादेश में राष्ट्रपति को जनता सीधे नहीं चुनती। संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। इसमें संसद के कुल 349 सांसद वोट डाल सकेंगे। बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने बताया कि चुनाव में पारदर्शिता के लिए वोटों की गिनती लाइव प्रसारित की जाएगी। राष्ट्रपति पद के लिए रूलिंग पार्टी BNP के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद आमने सामने होंगे। फरवरी में हुए आम चुनाव में BNP को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिली थी। इसलिए फखरुल की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक मतदान होगा राष्ट्रपति चुनाव के लिए गुरुवार को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। वोट राष्ट्रीय संसद के सत्र कक्ष में डाले जाएंगे। मतदान शुरू होने से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन सांसदों को वोट डालने का तरीका समझाएंगे। आखिरी बार 1991 में चुनाव में मुकाबला हुआ था बांग्लादेश में अब तक 12 राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। इनमें 8 बार राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए। संविधान लागू होने के बाद पहला राष्ट्रपति चुनाव 1974 में हुआ, जिसमें सांसदों ने वोट देकर मोहम्मद मोहम्मदुल्लाह को चुना। 1975 में संविधान संशोधन के बाद राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता से कराने की व्यवस्था हुई। इसके तहत 1978, 1981 और 1986 में लगातार तीन बार जनता ने राष्ट्रपति चुना। 1991 में फिर संसदीय व्यवस्था लागू हुई और राष्ट्रपति का चुनाव दोबारा सांसदों के जरिए होने लगा। 1991 में दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ। इसके बाद 2023 तक सभी चुनाव निर्विरोध रहे, क्योंकि हार के डर से विपक्ष ने उम्मीदवार नहीं उतारा। 1991 के बाद 35 साल में पहली बार बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला हो रहा है। यानी सांसदों को मतदान करना होगा। BNP ने चुनाव से पहले बैठक बुलाई राष्ट्रपति चुनाव से पहले बुधवार को राष्ट्रीय संसद में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सांसदों की बैठक हुई। प्रधानमंत्री के डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी जाहिदुल इस्लाम रोनी ने बताया कि बैठक दोपहर 4 बजे संसद में हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने की। BNP के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फखरुल इस्लाम आलमगीर भी बैठक में शामिल हुए। पूर्व राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद हो रहे चुनाव बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया था। हालांकि, कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। पूरी खबर पढ़ें… ——————– बांग्लादेश से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश गंगा जल संधि में भारत से ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में आरएसएस पर बैन लगाने की मांग की जा रही है। यह मांग बुधवार को अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता पर सलाह देने वाले आयोग यानी USCIRF की तरफ से की गई है। USCIRF के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है। आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि पीएम मोदी आरएसएस के सदस्य हैं और आरएसएस के सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। महमूद का यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ हफ्ते पहले आया है। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) की ओर से आयोजित ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ में शामिल होने वाले हैं। आयोग के कमिश्नर बोले- भारत सरकार से जुड़े RSS नेताओं को सम्मान न मिले USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि RSS नेता अगर भारतीय सरकार से जुड़े भी हों, तब भी उन्हें उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक सम्मान का हकदार नहीं माना जाना चाहिए। मिल्स ने कहा कि इसके बजाय अमेरिकी सरकार को धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए। USCIRF ने महमूद और मिल्स के बयान अपने X अकाउंट पर पोस्ट किए। महमूद ने पोस्ट में कहा, भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं। RSS एक भारतीय संगठन है, जिसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों, जिनमें ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं उन पर हमले किए हैं। अब RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका आने की योजना बना रहे हैं।” RSS पर बैन लगाने की मांग करने वाली USCIRF क्या है, कितनी है ताकत यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम यानी USCIRF अमेरिका की स्वतंत्र सरकारी संस्था है। इसे अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 के इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक्ट के तहत बनाया था। USCIRF का काम क्या है… USCIRF की कितनी ताकत है? इसे ऐसे समझिए: USCIRF- सिर्फ सलाह और निगरानी करने वाली संस्था।
US सरकार- अंतिम नीति और एक्शन लेने में सक्षम। यानी अगर USCIRF किसी देश या संगठन पर प्रतिबंध की सिफारिश करती है, तो प्रतिबंध अपने-आप लागू नहीं हो जाता। अमेरिकी सरकार को उस सिफारिश पर अलग से फैसला करना होता है। USCIRF खुद प्रतिबंध लगाने वाली एजेंसी नहीं है। फिर इसकी बात को गंभीरता से क्यों लिया जाता है? क्योंकि यह कोई निजी NGO नहीं है। यह अमेरिकी सरकार की आधिकारिक, कांग्रेस की बनाई गई संस्था है और इसके सदस्य राष्ट्रपति तथा अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से नियुक्त किए जाते हैं। इसकी रिपोर्ट्स अमेरिकी विदेश नीति में इनपुट और राजनीतिक दबाव का काम कर सकती हैं। हालांकि, इसकी सिफारिश और अमेरिकी सरकार का अंतिम फैसला अलग-अलग चीजें हैं। मार्च में USCIRF रिपोर्ट पर भारत ने आपत्ति जताई थी मार्च में USCIRF की सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों की आलोचना की गई थी। रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) जैसी संस्थाओं और कुछ लोगों पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया गया था। रिपोर्ट में इन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार बताया गया था। भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। भारत ने कहा था कि यह संगठन लगातार देश की खराब छवि पेश करता है जो संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक कथाओं पर आधारित होती है। भारत बोला था- USCIRF अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले पर ध्यान दे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि भारत की चुनिंदा आलोचना जारी रखने के बजाय USCIRF को अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- आज के युवा 30 साल बाद बुजुर्ग होंगे: वे केवल अपने बारे में न सोचें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को नागपुर में एक कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा 30 साल बाद बुजुर्ग हो जाएंगे, इसलिए उन्हें केवल अपने बारे में नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों का भी ध्यान रखना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली में भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स और ट्रैफिक बोलार्ड्स हटा दिए हैं। इन बैरिकेड्स से पहले हाई कमीशन के आसपास बाहरी सुरक्षा घेरा बना हुआ था। आज की अन्य बड़ी खबरें… केन्या में हेलिकॉप्टर क्रैश, 7 की मौत; 5 अमेरिकी नागरिक और इक्वाडोर के खुफिया प्रमुख भी मारे गए केन्या के सांबुरु काउंटी में बुधवार सुबह हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई। इनमें 5 अमेरिकी नागरिक और इक्वाडोर की खुफिया एजेंसी के प्रमुख मिशेल सेंसी-कॉन्टुगी शामिल हैं। हेलिकॉप्टर माउंट ओलोलोक्वे के पास क्रैश हुआ था। यह लोइसाबा वाइल्डलाइफ कंजर्वेंसी से एवासो न्गिरो नदी की ओर जा रहा था। इक्वाडोर के खुफिया प्रमुख मिशेल सेंसी-कॉन्टुगी के साथ उनकी पत्नी स्टेफनी सेंसी भी हादसे में मारी गईं। स्टेफनी फैशन डिजाइनर थीं। स्पेनिश टीवी नेटवर्क टेलीमुंडो के एग्जीक्यूटिव जोसे सुआरेज के भी मारे जाने की खबर है। हेलिकॉप्टर ऑपरेटर के मुताबिक, हादसे की वजह अभी पता नहीं चली है। केन्या रेड क्रॉस ने बताया कि हादसे वाली जगह पर आग और मुश्किल रास्ते के कारण राहत और शव निकालने के काम में परेशानी हुई। केन्या के परिवहन मंत्रालय ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। राहुल गांधी ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी को दी श्रद्धांजलि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री और अपने पिता राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित किए। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- मंदिरों में भेदभाव की कोई जगह नहीं, कांचीपुरम के मंदिर का मामला मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि भगवान की नजर में सभी जीव समान हैं और भगवान किसी के साथ भेदभाव नहीं करते। कोर्ट ने साफ किया कि मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों में भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं है। कोर्ट ने भगवद् गीता के अध्याय 9 के श्लोक 29 का हवाला देते हुए कहा कि मैं सभी जीवों के प्रति समान भाव रखता हूं। न मैं किसी का पक्ष लेता हूं, न किसी से द्वेष करता हूं। जो भक्तिभाव से मेरी पूजा करते हैं, वे मुझमें हैं और मैं उनमें हूं। मामला कांचीपुरम के अरुलमिगु देवराज स्वामीगल मंदिर, खासकर श्री मनवाला मामुनिगल श्राइन से जुड़ा था। यहां के एक निवासी ने याचिका में आरोप लगाया था कि गैर-ब्राह्मण भक्तों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि मनवाला मामुनिगल श्राइन में दो प्रवेश द्वार हैं- एक मुख्य और दूसरा साइड एंट्री। आरोप था कि गैर-ब्राह्मण भक्तों को मुख्य प्रवेश से जाने नहीं दिया जाता, जो साफ भेदभाव है। पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पुलिस की मंजूरी, 30 शर्तें पुणे पुलिस ने राहुल गांधी के 22 अगस्त को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। हालांकि, पुलिस ने इसके लिए 30 शर्तें तय की हैं। आयोजकों को आपत्तिजनक तस्वीरें या बैनर लगाने से रोकने के साथ यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। कार्यक्रम शहर के RTO चौक के पास SSPMS कॉलेज ग्राउंड में शाम 4:30 से रात 9:30 बजे तक होगा। पुलिस के मुताबिक, इसमें 8,000 से 10,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। मणिपुर में 3 दिन स्कूल-कॉलेज बंद, कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार का फैसला मणिपुर सरकार ने राज्य में 20 से 22 अगस्त तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का आदेश दिया है। सरकार ने यह फैसला मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लिया है। इस दौरान बोर्ड से जुड़े सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। यह आदेश सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी सभी संस्थानों पर लागू होगा। दरअसल, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर JFD ग्रुप ने 48 घंटे की हड़ताल बुलाई है। बुधवार को हड़ताल के दूसरे दिन घाटी के कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने नेताओं के पुतले जलाए और रैलियां निकालीं।
पाकिस्तान जाने वाले सिख तीर्थयात्रियों के लिए वीजा कोटा बढ़ाने और करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग के बीच विदेश मंत्रालय ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सुरक्षा स्थिति को देखते हुए करतारपुर कॉरिडोर की सेवाएं फिलहाल निलंबित हैं। जायसवाल से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रतिनिधिमंडल की नई दिल्ली में पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स से मुलाकात और सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा कोटा बढ़ाने की मांग को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हर साल एक द्विपक्षीय समझौते के तहत सिख जत्थे पाकिस्तान स्थित तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बोले- सेवाएं 7 मई 2025 से निलंबित हैं करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने की मांग पर जायसवाल ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा स्थिति के कारण इसकी सेवाएं 7 मई 2025 से निलंबित हैं और अभी स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर हाल ही में संसद में भी सवाल उठाया गया था। विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स साद अहमद वारैच से मुलाकात के बाद आई है। प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर 2026 में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश गुरुपर्व से पहले अधिक संख्या में वीजा जारी करने की मांग की है। SGPC के अनुसार, प्रकाश गुरुपर्व के लिए 7,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान यात्रा हेतु पासपोर्ट जमा किए हैं। वहीं, पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से करीब 1,800 श्रद्धालुओं को ही वीजा जारी किए जाते हैं।
बांग्लादेश में अल-कायदा से जुड़े नेता हारुन इजहार का हिंदुओं को लेकर धमकी वाला वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रहा है कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है। चटगांव में एक कार्यक्रम के दौरान इजहार हिंदुओं को आसानी से मारे जाने की बात कहता सुनाई दे रहा है। वह यह भी कहता है कि उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं होगी, उसके समर्थक ही ऐसा करने के लिए काफी हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों और भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में यह बयान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है। हारुन इजहार कौन है? हारुन इजहार बांग्लादेश के चटगांव का कट्टरपंथी इस्लामी नेता है और हेफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा रहा है। वह संगठन की केंद्रीय समिति में शिक्षा और सांस्कृतिक मामलों का सचिव भी रह चुका है। उसके पिता मुफ्ती इजहारुल इस्लाम भी चटगांव के एक प्रभावशाली इस्लामी नेता और मदरसा संचालक रहे हैं। हारुन का नाम पहली बार नहीं बल्कि लंबे समय से कट्टरपंथ और हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है। 2013 में चटगांव के लालखान बाजार स्थित मदरसे में विस्फोट हुआ था। इस घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने विस्फोटक बनाने की सामग्री, तेजाब और बिना फटे ग्रेनेड बरामद किए थे। इस मामले में हारुन और उसके पिता समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ था। अल-कायदा से कनेक्शन का क्या मामला है? हारुन इजहार को लेकर अल-कायदा और दूसरे जिहादी नेटवर्क से संबंधों के आरोप पुराने हैं। बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्टों में उसके पिता के मदरसे को प्रतिबंधित संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश के नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है। एक रिपोर्ट में उसके पिता के ओसामा बिन लादेन और तालिबान नेता मुल्ला उमर से संपर्क होने के दावे भी किए गए थे। हालांकि इन दावों को खबर में आरोप या सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के तौर पर ही लिखना बेहतर होगा। 2025 की एक रिपोर्ट में इंडिया टुडे ने भी हारुन इजहार को कट्टरपंथी संगठन हेफाजत-ए-इस्लाम का वरिष्ठ नेता बताते हुए उसके अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क से कथित संबंधों का जिक्र किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां उसे प्रभावशाली कट्टरपंथी व्यक्ति मानती हैं। 2021 में भी हिंसा के मामले में नाम आया मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान चटगांव और दूसरे इलाकों में हिंसा हुई थी। हारुन इजहार को इन हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। 2021 में उसने अदालत के सामने हिंसा के मामले में अपना बयान भी दिया था। पुलिस के मुताबिक, उसने पूछताछ के दौरान हिंसा में अपनी भूमिका स्वीकार की और उन लोगों के नाम भी बताए, जिन्होंने हिंसा भड़काने में कथित तौर पर भूमिका निभाई थी। उसके खिलाफ ढाका, चटगांव और राजशाही में कई मामले दर्ज थे। 2023 में वह चटगांव सेंट्रल जेल से जमानत पर बाहर आया। पुलिस के मुताबिक, उस समय उसके खिलाफ दर्ज 11 मामलों में उसे जमानत मिल गई थी और पुलिस ने कहा था कि वह निगरानी में रहेगा। 2025 में फिर चर्चा में आया दिसंबर 2025 में भारत विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी हारुन इजहार का नाम सामने आया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में भारतीय हितों को निशाना बनाकर हुए प्रदर्शनों के बाद वह एक पुलिस स्टेशन पहुंचा था और वहां भारतीय राजनयिक मिशन पर हमले के आरोपियों के मामले में हस्तक्षेप करता नजर आया। —————- यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे:जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…
बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए बांग्लादेश को गारंटी क्यों चाहिए बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। फरक्का बैराज बनने के बाद शुरू हुआ था विवाद भारत ने सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मकसद गंगा के पानी के एक हिस्से को हुगली नदी की तरफ भेजना था, ताकि हुगली में पानी का बहाव बढ़े और कोलकाता बंदरगाह में जमा होने वाली गाद को कम करने में मदद मिले। गाद कम करना इसलिए जरूरी था क्योंकि मिट्टी और कीचड़ जमा होने के कारण बंदरगाह और हुगली नदी की गहराई लगातार घट रही थी। इससे कोलकाता बंदरगाह के ठप होने का खतरा था।
समस्या यह थी कि गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में भी जाती है। इसलिए भारत ने जब पानी का कुछ हिस्सा अपनी तरफ मोड़ दिया तो इससे वहां जाने वाले पानी की मात्रा कम होने लगी। इससे बांग्लादेश में कई तरह की समस्याएं बताई गईं – 1977 में पहली बार दोनों देशों में समझौता फरक्का को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा। भारत का कहना था कि फरक्का से पानी मोड़ना उसके लिए जरूरी है, जबकि बांग्लादेश लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा। आखिरकार दोनों देशों ने पानी को लेकर अलग-अलग समझौते किए। 1977 में एक समझौता हुआ, जिसमें पानी के बंटवारे के साथ एक गारंटी क्लॉज भी था। यानी कुछ परिस्थितियों में बांग्लादेश को न्यूनतम मात्रा में पानी मिलने की गारंटी दी गई थी। बाद में 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल समझौता हुआ। इसमें सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। इसमें पानी देने की न्यूनतम मात्रा की गारंटी नहीं दी गई। इसके बजाय कहा गया कि दोनों देश तुरंत बातचीत करके आपात स्थिति में पानी के बंटवारे में बदलाव करेंगे। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें…

