7 महीने में 3 गुना बढ़ा कंपनियों का AI खर्च:रैम्प के एआई इंडेक्स के मुताबिक टॉप फर्म्स प्रति कर्मचारी खर्च कर रहीं 7 लाख

अमेरिका की टॉप 1% कंपनियां अब एआई टूल्स पर हर कर्मचारी के लिए औसतन करीब 7 लाख रुपए खर्च कर रही हैं। रैम्प के एआई इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में यही कंपनियां प्रति कर्मचारी करीब 2.47 लाख रुपए खर्च कर रही थीं। यानी 7 महीनों में खर्च लगभग 3 गुना हो गया। टॉप 10% कंपनियां एआई पर करीब 62 हजार रुपए प्रति कर्मचारी खर्च कर रही हैं। औसत खर्च करीब 1140 रुपए प्रति कर्मचारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियां अब प्रति-टोकन मॉडल पर आ गई हैं। इसमें इस्तेमाल किए गए टोकन के हिसाब से पैसा लिया जाता है। यानी एआई से जितना ज्यादा काम, उतने ज्यादा टोकन और उतना ज्यादा बिल। हाल के महीनों में उबर, अमेजन और वॉलमार्ट ने जरूरत से ज्यादा एआई इस्तेमाल रोकने के लिए लिमिट लगाई है। एआई बॉस ने इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाला दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर प्रयोग चल रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को में एंडोन लैब नाम की फर्म ने लूना नामक एआई को एक रिटेल स्टोर चलाने की जिम्मेदारी सौंपी। हाल ही में लूना ने अपने एक इंसानी कर्मचारी को बर्खास्त करने की सिफारिश की। वह कर्मचारी 23 में से 17 शिफ्टों में देर से आया था। बाद में इंसानी कर्मचारियों ने इस सिफारिश को रिव्यू किया और उस कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया। एंडोन मार्केट ने अपने सोशल मीडिया पेज पर लिखा ‘पहली बार (हमारी जानकारी के अनुसार) किसी एआई बॉस ने किसी इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया है। सैन फ्रांसिस्को में हमारे स्टोर को चलाने वाली एआई लूना ने बार-बार देर से आने के कारण एक कर्मचारी को बर्खास्त करने का फैसला किया। उस समय लूना क्लाउड ओपस 4.8 पर चल रही थी, लेकिन अधिकांश मॉडल ऐसा ही करते।’ अपनी अटेंडेंस नीति को भूल गया था एआई एंडोन लैब्स के मुताबिक लूना ने महीनों पहले अटेंडेंस संबंधी नीति बनाई थी, लेकिन बाद में वह उसे भूल गई। इसका नतीजा ये हुआ कि देर से आने वाला कर्मचारी कई महीनों तक वही गलती दोहराता रहा। आखिरकार एंडोन लैब्स ने लूना को अपनी मेमोरी में बनाई गई नीतियों को खोजने के लिए कहा और फिर उससे यह आकलन करने को कहा कि क्या कर्मचारी अभी भी कंपनी के लिए उपयुक्त है। इसके बाद लूना ने कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करने की सिफारिश की।

रिपोर्ट- यूक्रेन ने ब्रिटिश ड्रोन से रूस पर हमला किया:नाराज मॉस्को बोला- ब्रिटेन जंग को और बढ़ा रहा, बड़ी कीमत चुकानी होगी

रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन जंग में दखल देने का आरोप लगाया है। रूसी सरकार का दावा है कि यूक्रेन ने रूस पर हमले में जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया था वह ब्रिटिश कंपनियों ने बनाया। रूस ने कहा कि इसके लिए ब्रिटेन को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। यह मामला ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सामने आया। दरअसल, इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि यूक्रेन ने रूस में हमला करने के लिए 2 ब्रिटिश कंपनियों के बनाए ड्रोन का इस्तेमाल किया। संडे टाइम्स की यह रिपोर्ट अगर सही है, तो यह पहली बार होगा जब ब्रिटिश तकनीक से बने ड्रोन रूस पर हुए हमलों में इस्तेमाल हुए हैं। ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने कहा कि लंदन जानबूझकर यूक्रेन संकट को और भड़का रहा है। वह यूक्रेन के जरिए रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। रूसी दूतावास ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ब्रिटेन बोला- यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं वहीं, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को जिन हथियारों की जरूरत होगी, ब्रिटेन उन्हें देता रहेगा। प्रवक्ता ने कहा कि रूस को ब्रिटेन की नीति को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। ब्रिटेन यूक्रेन और अपने सहयोगी देशों के खिलाफ रूस की आक्रामकता का विरोध करता रहेगा। यूक्रेन ने रूस के अंदर हमले 3 गुना बढ़ाए यूक्रेन ने इस साल रूस के अंदर ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले काफी बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने जुलाई में जनवरी के मुकाबले 3 गुना ज्यादा हमले किए। अब यूक्रेन के हमले सिर्फ रूस की सीमा के पास के इलाकों तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन रूस के अंदर काफी दूर तक ड्रोन और मिसाइल भेजकर हमले कर रहा है। इन हमलों में रूस के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा हथियार और ईंधन के भंडार भी निशाने पर हैं। यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और औद्योगिक ठिकानों पर भी हमला कर रहा है।

रिपोर्ट- यूक्रेन ने ब्रिटिश ड्रोन से रूस पर हमला किया:नाराज मॉस्को बोला- ब्रिटेन जंग को और बढ़ा रहा, बड़ी कीमत चुकानी होगी

रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन जंग में दखल देने का आरोप लगाया है। रूसी सरकार का दावा है कि यूक्रेन ने रूस पर हमले में जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया था वह ब्रिटिश कंपनियों ने बनाया। रूस ने कहा कि इसके लिए ब्रिटेन को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। यह मामला ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सामने आया। दरअसल, इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि यूक्रेन ने रूस में हमला करने के लिए 2 ब्रिटिश कंपनियों के बनाए ड्रोन का इस्तेमाल किया। संडे टाइम्स की यह रिपोर्ट अगर सही है, तो यह पहली बार होगा जब ब्रिटिश तकनीक से बने ड्रोन रूस पर हुए हमलों में इस्तेमाल हुए हैं। ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने कहा कि लंदन जानबूझकर यूक्रेन संकट को और भड़का रहा है। वह यूक्रेन के जरिए रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। रूसी दूतावास ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ब्रिटेन बोला- यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं वहीं, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को जिन हथियारों की जरूरत होगी, ब्रिटेन उन्हें देता रहेगा। प्रवक्ता ने कहा कि रूस को ब्रिटेन की नीति को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। ब्रिटेन यूक्रेन और अपने सहयोगी देशों के खिलाफ रूस की आक्रामकता का विरोध करता रहेगा। यूक्रेन ने रूस के अंदर हमले 3 गुना बढ़ाए यूक्रेन ने इस साल रूस के अंदर ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले काफी बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने जुलाई में जनवरी के मुकाबले 3 गुना ज्यादा हमले किए। अब यूक्रेन के हमले सिर्फ रूस की सीमा के पास के इलाकों तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन रूस के अंदर काफी दूर तक ड्रोन और मिसाइल भेजकर हमले कर रहा है। इन हमलों में रूस के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा हथियार और ईंधन के भंडार भी निशाने पर हैं। यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और औद्योगिक ठिकानों पर भी हमला कर रहा है।

PAK सुप्रीम कोर्ट का आदेश- इमरान खान को अस्पताल भेजें:इलाज के लिए आज ही ट्रांसफर करें; पूरी मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को आज ही अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। उनकी सेहत की जांच और इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड भी बनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन से इमरान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट मांगी। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि कोर्ट के सामने पूरी रिपोर्ट के बजाय सिर्फ उसकी समरी पेश की गई है। तीन जजों की बेंच इमरान के इलाज और परिवार से मुलाकात से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की। इसमें जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल थे। रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत पर चिंता जताई जेल प्रशासन की रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में एंजियोग्राफी कराने की सलाह का जिक्र था। इस पर इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल ने बताया कि यह जांच जेल के बाहर अस्पताल में कराई जा सकती है। PTI के वकील ने इमरान के शरीर में ब्लड क्लॉट बनने की वजह पता लगाने और उनके निजी डॉक्टरों से जांच कराने की मांग भी की। कोर्ट बोला- इमरान की सेहत पर राजनीति न करें सुप्रीम कोर्ट ने PTI से इमरान की मेडिकल स्थिति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने को कहा। कोर्ट ने मुलाकात के बाद PTI नेताओं और परिवार की ओर से मीडिया में दिए जाने वाले बयानों पर भी सवाल उठाए। जस्टिस अफगान ने कहा कि पार्टी को यह तय करना चाहिए कि इमरान की सेहत को लेकर राजनीति न हो। कोर्ट ने इमरान की बहनों से मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाया। जस्टिस वहीद ने कहा कि बहनों से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले तीन साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों की जानकारी मांगी। इमरान के बेटों से उनकी बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जानकारी भी देने को कहा गया है। जेल रिपोर्ट में आंखों की बीमारी का जिक्र अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इमरान की दो पेज की मेडिकल रिपोर्ट जमा की थी। इसमें उनकी आंख की बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (CRVO) का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान का इस बीमारी का इलाज चल रहा है और उनकी प्रभावित आंख की नजर लगभग सामान्य हो गई है। रिपोर्ट में 4 नवंबर 2023 से 10 अगस्त 2026 के बीच 39 मेडिकल जांचों का भी जिक्र किया गया है। 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उन पर कई मामले दर्ज हुए। इनमें सरकारी तोहफों और गैरकानूनी शादी से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इमरान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं।

30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा
ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म
दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई
करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की
रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया
पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है। ग्रूमिंग गैंग क्या है जिससे जुड़ा है शबीर अहमद ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। इनमें से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हुईं और उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ा। कई लड़कियों ने अपने बच्चों को जन्म दिया, लेकिन वो इनके पिता का नाम तक नहीं जानती थीं। ये ग्रूमिंग गैंग्स पूरे ब्रिटेन में काम करते थे, लेकिन रोशडेल, रॉदरहैम और टेलफॉर्ड राज्यों में इन्होंने सबसे ज्यादा लड़कियों को फंसाया।

फिलीपींस के स्कूल में छात्र ने क्लासमेट को गोली मारी:फिर खुदकुशी की; फायरिंग का वीडियो फेसबुक पर लाइव किया, 2 गार्ड की भी मौत

फिलीपींस के जाम्बोआंगा शहर में मंगलवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई है। एक छात्र ने अपने ही स्कूल के एक दूसरे छात्र को गोली मार दी। इसके बाद उसने खुद भी जान दे दी। फायरिंग में दो सुरक्षा गार्डों की भी मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल हुए हैं। घटना एटेनियो डी जाम्बोआंगा यूनिवर्सिटी के स्कूल कैंपस में हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपी छात्र ने हमले का कुछ हिस्सा फेसबुक पर लाइव भी दिखाया था। घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया और छात्रों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया। पहले शिक्षक पर गोली चलाई, फिर छात्र को निशाना बनाया पुलिस के मुताबिक, आरोपी कक्षा 9 का छात्र मोहम्मद मैल जलानी था। वह दो पिस्तौल लेकर स्कूल आया था। पहले उसने एक टीचर पर गोली चलाई, लेकिन वह बच गए। इसके बाद उसने कक्षा 10 के एक छात्र को गोली मार दी। फिर ऊपर की मंजिल पर गया और वहां से कूदकर जान दे दी।

फिलीपींस के गृह मामलों के मंत्री जॉनविक रेमुल्ला ने बताया कि आरोपी सीढ़ियां चढ़ते समय फेसबुक पर लाइव वीडियो बना रहा था।

घटना के बाद स्कूल ने सीनियर हाईस्कूल की क्लास बंद कर दीं। छोटे बच्चों को सुरक्षित रखा गया है और सभी बच्चों की गिनती कर ली गई है। वे अपने टीचर्स के साथ हैं। पुलिस ने बच्चों के माता-पिता से घबराने के बजाय स्कूल की तरफ से दी जा रही जानकारी और निर्देशों का पालन करने को कहा है। प्रभावित लोगों को मिलेगी मानसिक मदद फिलीपींस के शिक्षा विभाग ने कहा है कि घटना से प्रभावित छात्रों, परिवारों और स्कूल कर्मचारियों को जरूरी मदद दी जाएगी। इसके लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि लोग इस सदमे से बाहर निकल सकें। विभाग ने लोगों से यह भी कहा है कि बिना पुष्टि वाली खबरें, फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर न करें। दो महीने में फायरिंग की दूसरी बड़ी घटना फिलीपींस में करीब दो महीने के भीतर स्कूल में गोलीबारी की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले जून में ताकलोबान शहर के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में 3 छात्रों की मौत हो गई थी और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ताजा घटना के बाद स्कूलों की सुरक्षा और छात्रों तक हथियार पहुंचने को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। —————– ये खबर पढ़ें..… कनाडा के वैंकूवर में ट्रेन ट्रैक पर चढ़ा सिख शख्स:पटरियों पर बैठकर गाना गाया, बोला- मुझे अंग्रेजी नहीं आती; ट्रेन सर्विस रोकनी पड़ी कनाडा के वैंकूवर में एक सिख शख्स के स्काई ट्रेन के ट्रैक पर चले जाने से ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी। शख्स काफी देर तक पटरियों पर बैठा रहा और वहां गाना गाता नजर आया। पूरी खबर यहाँ पढ़ें…

कनाडा के वैंकूवर में ट्रेन ट्रैक पर चढ़ा सिख शख्स:पटरियों पर बैठकर गाना गाया, बोला- मुझे अंग्रेजी नहीं आती; ट्रेन सर्विस रोकनी पड़ी

कनाडा के वैंकूवर में एक सिख शख्स के स्काई ट्रेन के ट्रैक पर चले जाने से ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी। शख्स काफी देर तक पटरियों पर बैठा रहा और वहां गाना गाता नजर आया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में शख्स बार-बार “आई डॉन्ट नो इंग्लिश” यानी मुझे अंग्रेजी नहीं आती है, कहते सुनाई दे रहा है। वीडियो में वह पटरियों पर उछल-कूद करता और गाना गाता भी नजर आ रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने शख्स को ट्रैक से बाहर निकाल लिया। उसे हटाए जाने के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं। ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी शख्स के ट्रैक पर मौजूद होने के कारण स्काई ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। किस वजह से शख्स ट्रैक पर गया था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उसके खिलाफ पुलिस ने क्या कानूनी कार्रवाई की, इसकी भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। घटना का पूरा वीडियो… स्काई ट्रेन क्या है और यह कैसे चलती है? वैंकूवर की स्काई ट्रेन एक तरह की मेट्रो ट्रेन है। इसकी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए ट्रेन के अंदर ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। इसका संचालन कंप्यूटर आधारित सिस्टम से होता है। स्काई ट्रेन का बड़ा हिस्सा सड़क के ऊपर बने ट्रैक पर चलता है। कुछ हिस्सों में यह जमीन के नीचे भी जाती है। स्काई ट्रेन के ट्रैक पर आम लोगों का जाना बेहद खतरनाक होता है। ट्रेन के ट्रैक पर किसी व्यक्ति के पहुंचने की जानकारी मिलते ही सुरक्षा के लिए संबंधित हिस्से में ट्रेन की आवाजाही रोक दी जाती है। इसके बाद पुलिस और ट्रेन कर्मचारी पहले व्यक्ति को ट्रैक से बाहर निकालते हैं। फिर यह जांच की जाती है कि ट्रैक पूरी तरह खाली और सुरक्षित है या नहीं। सुरक्षा की पुष्टि होने के बाद ही ट्रेन सेवा दोबारा शुरू की जाती है। एक व्यक्ति के ट्रैक पर आने से कई ट्रेनें क्यों रुकती हैं? स्काई ट्रेन की कई ट्रेनें एक ही नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। इसलिए ट्रैक के किसी एक हिस्से में सुरक्षा से जुड़ी समस्या होने पर उसका असर आसपास चल रही दूसरी ट्रेनों पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में यात्रियों को ट्रेन के अंदर इंतजार करना पड़ सकता है। कई बार उन्हें दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन बदलना पड़ता है या अपनी यात्रा में देरी का सामना करना पड़ता है। यानी इस घटना में शख्स का ट्रैक पर बैठना सिर्फ पुलिस के लिए परेशानी नहीं बना। उसकी मौजूदगी के कारण यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन सेवा भी रोकनी पड़ी और पूरे नेटवर्क की आवाजाही प्रभावित हुई।

कनाडा में पंजाबी लड़की को गोली लगी, मौत:दोस्त से मिलने गई थी; पड़ोसी बोले- 2 तेज आवाजों के बाद सुनाई दीं चीखें

कनाडा के एडमोंटन में पंजाबी लड़की की गोली लगने से मौत हो गई। वह अपनी दोस्त से मिलने एक टाउनहाउस कॉम्प्लेक्स गई थी। अगले दिन सुबह उसी जगह गोलीबारी की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुंची तो लड़की गंभीर हालत में मिली, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पड़ोसियों के मुताबिक लड़की की मौत से पहले घर से उसके चिल्लाने और रोने की आवाज सुनाई दी गई थी। एडमोंटन पुलिस सर्विस के होमिसाइड विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अभी तक किसी संदिग्ध की पहचान या गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामला 139 एवेन्यू और 32 स्ट्रीट के पास का है। 16 अगस्त की सुबह करीब 6:50 बजे पुलिस को गोलीबारी की सूचना मिली थी। परिवार ने मृतका की पहचान जैजमिन ढेसी के रूप में की है। वह अपनी मां और दो छोटे भाई-बहनों के साथ रहती थी। दोस्त से मिलने गई थी, उसी घर में नहीं रहती थी
जांच में सामने आया कि जैजमिन उस घर में नहीं रहती थी जहां घटना हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पड़ोसियों ने बताया कि वह वहां अपनी एक दोस्त से मिलने आई थी। उसकी दोस्त का परिवार करीब दो महीने पहले ही उस जगह रहने आया था। पड़ोसी बोले- 2 तेज आवाजें सुनाई दीं, फिर चीखें आईं
घटना के वक्त आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। एक पड़ोसी ने 2 तेज आवाजें सुनने की बात कही। इसके बाद एक लड़की के चीखने और रोने की आवाज सुनाई देने का भी दावा किया गया। मीडिया से बातचीत में एक पड़ोसी ने बताया कि उसकी नींद सुबह चीखों की आवाज से खुली। घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस पहुंची और आसपास के लोगों में डर फैल गया। एक अन्य पड़ोसी ने बताया कि उसकी छोटी बहन घटना के बाद इतनी डर गई कि वह सो नहीं पा रही थी। कुछ लोगों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और घरों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की बात कही। जिस घर में घटना हुई, वहां पहले भी पुलिस आने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ पड़ोसियों ने उस घर को लेकर भी चिंता जताई है। उनका दावा है कि वहां लोगों की लगातार आवाजाही रहती थी और पुलिस पहले भी उस घर पर आ चुकी थी। कुछ स्थानीय लोगों ने देर रात होने वाली पार्टियों और कॉम्प्लेक्स में बाहरी लोगों के लगातार आने-जाने की शिकायत भी की है। हालांकि, ये पड़ोसियों के दावे हैं। पुलिस ने इन बातों को जैजमिन की मौत से जोड़कर कोई पुष्टि नहीं की है। घटना से पहले विवाद और डोरबेल कैमरे में धमकी से जुड़े दावे भी सामने आए हैं। पुलिस ने अभी तक यह नहीं कहा कि किसी विवाद या धमकी का गोलीबारी से कोई संबंध था। इसी कॉम्प्लेक्स में 20 साल पहले भी हुई थी हत्या
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इस टाउनहाउस कॉम्प्लेक्स के पुराने इतिहास का भी जिक्र किया। पड़ोसी तान्या डालुग के मुताबिक, करीब 20 साल पहले इसी कॉम्प्लेक्स में नादिन रॉबिन्सन नाम की महिला की हत्या हुई थी। हालांकि, इस मामले में किसी व्यक्ति पर आरोप तय नहीं हुआ था। ऑटोप्सी के बाद साफ होगी मौत की परिस्थितियां
पुलिस के मुताबिक मृतका की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बुधवार को आएगी। मेडिकल एग्जामिनर की जांच से मौत के सटीक कारण और परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। फिलहाल पुलिस इसे संदिग्ध मौत के तौर पर देख रही है। पुलिस ने लोगों से मांगी जानकारी
एडमिंटन पुलिस सर्विस ने घटना से जुड़ी कोई भी जानकारी रखने वाले लोगों से जांचकर्ताओं से संपर्क करने की अपील की है। जानकारी 780-423-4567 पर दी जा सकती है। गुमनाम सूचना 1-800-222-8477 नंबर पर दी जा सकती है।

ट्रम्प का ईरान से बातचीत की डेडलाइन बढ़ाने से इनकार:बोले- तेहरान जरूरी शर्तों वाला समझौता नहीं करना चाहता; 60 दिन की मोहलत खत्म

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए तय 60 दिन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सोमवार को यह डेडलाइन खत्म हो गई। ट्रम्प ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वह उस तरह की डील के लिए तैयार नहीं है, जिसे अमेरिका जरूरी मानता है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन वे उस तरह का समझौता नहीं करने जा रहे, जिसे मैं जरूरी मानता हूं।” अमेरिका की प्रमुख मांग ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। वहीं, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ऊर्जा के लिए जारी रखने की बात कहता रहा है। यही दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। 60 दिन पहले क्या हुआ था? अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को एक समझौता ज्ञापन (MOU) हुआ था। इसके तहत दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था। इस अवधि में कई अहम मुद्दों पर समाधान निकालने की कोशिश की जानी थी। लेकिन 60 दिन पूरे होने के बाद भी प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। होर्मुज स्ट्रेट खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और स्थायी शांति समझौते को लेकर दोनों देशों की स्थिति अलग बनी हुई है। MOU में बातचीत की अवधि बढ़ाने का विकल्प था, लेकिन कई हफ्तों से वार्ता आगे नहीं बढ़ी थी। ईरान ने कहा- 60 दिन की डेडलाइन का कोई मतलब नहीं ईरान ने भी बातचीत की समयसीमा बढ़ाने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच वास्तव में कोई बातचीत शुरू ही नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, “हमने कोई बातचीत शुरू ही नहीं की थी और अमेरिका ने शुरुआत से ही समझ को तोड़ दिया। इसलिए 60 दिन का मुद्दा प्रासंगिक नहीं है।” ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समझ के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं। इसी वजह से तेहरान 60 दिन की अवधि को बातचीत की वास्तविक समयसीमा नहीं मानता। अमेरिका का सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव बढ़ाने पर फोकस जुलाई के अंत के बाद से अमेरिका ने ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है। अब ट्रम्प प्रशासन ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगले हफ्ते ईरान के खिलाफ नए आर्थिक कदमों का ऐलान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कि ये कदम अब तक किसी देश पर लगाए गए सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में शामिल हो सकते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो अमेरिका फिलहाल ईरान पर बम गिराने के बजाय उसकी कमाई और कारोबार पर चोट करके अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट भी बना बड़ा मुद्दा अमेरिका-ईरान विवाद में होर्मुज स्ट्रेट भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ट्रम्प ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका स्ट्रेट पर नाकाबंदी के जरिए नियंत्रण बनाए हुए है। उन्होंने इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने के विचार का भी समर्थन किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, जुलाई के मध्य से अमेरिकी नाकाबंदी के दौरान 64 कॉमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया है। समुद्री निगरानी एजेंसियों के मुताबिक, स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हुई है। ट्रम्प ने होर्मुज को लेकर ओमान को भी चेतावनी दी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप ने अमेरिका के सहयोगी ओमान को भी कड़ी चेतावनी दी है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर ओमान इस मामले में अमेरिका के रास्ते में आया तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। ओमान ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और इसके नियंत्रण को दोनों देशों के पास रखने की योजना पर काम कर रहा है। वह पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। आगे क्या होगा? 60 दिन की समयसीमा खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता और मुश्किल होता दिख रहा है। ट्रम्प प्रशासन जहां आर्थिक दबाव बढ़ाने के संकेत दे रहा है, वहीं ईरान परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आर्थिक और सैन्य दबाव ईरान को नई बातचीत के लिए तैयार करेगा या दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा। होर्मुज स्ट्रेट पर जारी गतिरोध इस स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़े…. ईरान-अमेरिका के बीच 60 दिन की डेडलाइन खत्म:फिर ट्रम्प ने हमले का आदेश क्यों नहीं दिया; दुश्मन को 3 तरफ से घेरने की स्ट्रैटजी अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। पूरी खबर यहां पढ़े…

भारत के इलेक्शन सिस्‍टम के मुरीद हुए डोनाल्ड ट्रंप, CEC ज्ञानेश कुमार का जिक्र कर अमेरिका में वोटर आईडी कार्ड अनिवार्य करने की उठाई मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली और वोटर आईडी सिस्टम का हवाला देते हुए ‘सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी (SAVE) अमेरिका एक्ट’ को पास करने की मांग दोहराई है। ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में अमेरिका में वोटर पहचान की जरूरतों के बारे में भारत के मुख्य चुनाव

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