सोना तो सोना है! टैक्स बढ़ने के बाद भी नहीं कम हो रही गोल्ड की चमक! सर्राफा बाजारों में उमड़ रही भारी भीड़

Gold Price Alert: आदित्य बिड़ला ग्रुप के ज्वैलरी ब्रांड ‘इंद्रिया’ (Indriya) के सीईओ संदीप कोहली ने सोने को लेकर एक बड़ी बात कही है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद मई महीने में बाजार थोड़ा सुस्त जरूर हुआ था, लेकिन अब ग्राहकों की डिमांड बहुत मजबूती से वापस लौट आई है।

संदीप कोहली ने कहा, ‘कस्टम ड्यूटी में 9 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद लोग नए भाव को समझने के लिए थोड़ा रुक गए थे। पूरे ज्वैलरी उद्योग में ग्राहकों की चहल-पहल थोड़ी धीमी हो गई थी, लेकिन पिछले दो हफ्तों में मांग बहुत तेजी से बढ़ी है।’

क्यों आई थी सुस्ती और अब क्यों लौट रही है रौनक?

सरकार ने मई महीने में सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। सरकार का मकसद विदेशों से सोने की खरीद को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। इस 9% की सीधी बढ़ोतरी से अचानक सोना महंगा हो गया था।

वैसे कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद अब सोने की कीमतों में आ रही हालिया गिरावट भी ग्राहकों को दोबारा शोरूम तक खींच रही है। दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव ₹13244 प्रति ग्राम और मुंबई में ₹13229 प्रति ग्राम पर आ गया है, जिससे खरीदारों को राहत मिली है।

‘भारतीयों के लिए सोना सिर्फ निवेश नहीं, संस्कृति है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या कीमतें बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की साख कम हुई है? तो कोहली ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्वैलरी की मांग कभी खत्म नहीं हो सकती क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। कमोडिटी की कीमतें कैसी भी हों, ग्राहक दूसरे निवेशों के मुकाबले इसके रिटर्न का आकलन जरूर करते हैं, लेकिन मांग हमेशा बनी रहती है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब ग्राहक खास डिजाइन वाले गहने ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

तेजी से पैर पसार रहा है ‘इंद्रिया’ ब्रांड

साल 2024 में लॉन्च हुआ यह ब्रांड देश का सबसे तेजी से बढ़ता रिटेल ब्रांड बन गया है। फिलहाल 40 से ज्यादा शहरों में इसके 81 स्टोर्स हैं और फाइनेंशियल ईयर 2027 में कंपनी 40 नए स्टोर्स और खोलने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने स्टोर्स में ‘स्पार्कलस्कोप’ नाम की एक नई तकनीक लॉन्च की है। इसके जरिए ग्राहक खुद देख सकेंगे कि उनके हीरे में कितनी चमक है।

नेचुरल डायमंड पर है फोकस

भारत के ₹8,000 करोड़ के ज्वैलरी मार्केट में डायमंड-स्टडेड गहनों की हिस्सेदारी 11 फीसदी है, लेकिन ‘इंद्रिया’ के लिए यह हिस्सेदारी दोगुनी यानी 22 फीसदी है। आजकल बाजार में लैब में तैयार होने वाले हीरे का चलन बढ़ रहा है। जैसे कि टाटा ग्रुप के ‘टाइटैन’ ने पिछले साल दिसंबर में लैब-ग्रोन डायमंड कैटेगरी में कदम रखा है। लेकिन इसके उलट, ‘इंद्रिया’ पूरी तरह से नेचुरल हीरों पर ही फोकस कर रहा है।

संदीप कोहली का मानना है कि ग्राहकों के लिए हीरे की क्वालिटी (4Cs) के साथ-साथ उसकी चमक सबसे पहले मायने रखती है, और उनकी नई तकनीक इसी पर फोकस करती है।

Market Outlook : हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 25 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स ने दिन के दौरान हुई ज्यादातर बढ़त गंवा दी और मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,050 के आसपास रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 109.25 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर और निफ्टी 34.35 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056.00 पर सेयल हुआ। लगभग 1544 शेयरों में बढ़त हुई,2488 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन,M&M,मैक्स हेल्थकेयर,मारुति सुजुकी और टाटा कंज्यूमर शामिल रहे। जबकि ONGC,पावर ग्रिड कॉर्प,हिंडाल्को और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक महिंद्रा में गिरावट देखने को मिली।

सेक्टोरल इंडेक्स मिले-जुले रहे। FMCG में 0.7%,रियल्टी में 0.3% और ऑटो इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बढ़त हुई। जबकि IT,एनर्जी,मीडिया,मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 0.5-1% नीचे रहे। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि दिन के शुरुआती कारोबार में हुई बढ़त के बाद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से घरेलू बाजार बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से रुपये को सहारा मिला और कुछ राहत भी मिली,लेकिन यह बढ़त की रफ़्तार बनाए रखने के लिए काफी नहीं थी।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसकी वजह रही मेटल की कीमतों में नरमी,सप्लाई चेन की दिक्कतों में कमी और महीने के दौरान रिटेल डिमांड में सुधार।

कुल मिलाकर बाजार का मूड पॉजिटिव रहा। हालांकि,FII की लगातार बिकवाली से तेजी सीमित हो सकती है। आने वाले समय में,Q1 के नतीजों को लेकर कमजोर उम्मीदों और मॉनसून की असमान स्थिति का असर बाजार के मूड पर पड़ सकता है,इसलिए इन पर नजर रखनी होगी।

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, HNI ​एंड डेरिवेटिव्स,रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में आज का ट्रेडिंग सेशन थोड़ा पॉजिटिव रहा। दिन भर उतार-चढ़ाव सीमित दायरे में रहने के बावजूद बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बने रहना लगातार खरीदारी की रुचि को दिखाता है। मार्केट में नए ट्रिगर्स आने से पहले निवेशक सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।

निफ्टी 30 अंक यानी 0.12%) बढ़कर 24,050 पर बंद हुआ। यह इंडेक्स 24,000 के अहम लेवल के ऊपर बना हुआ है,जो बताता है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 24,000–23,950 के आसपास है और इसके बाद 23,850 के आसपास मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, रेजिस्टेंस 24,100–24,150 और उसके बाद 24,250 पर दिख रहा है। लगातार इन लेवल के ऊपर बने रहने से और बढ़त का रास्ता खुल सकता है।

BSE सेंसेक्स 105 अंक यानी 0.14% बढ़कर 77,100 पर बंद हुआ। इंडेक्स सीमित दायरे में ट्रेड करता रहा लेकिन पॉजिटिव जोनन में बंद होने में कामयाब रहा,जो निचले लेवल पर लगातार खरीदारी का सपोर्ट दिखाता है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,900–76,700 के आसपास है। जबकि रेजिस्टेंस 77,300–77,500 के पास दिख रहा है। इस जोन के ऊपर ब्रेकआउट से बुलिश मोमेंटम और मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर मार्केट पॉजिटिव रुख के साथ कंसोलिडेट होता रहा,जिससे पता चलता है कि सेशन के दौरान सीमित बढ़त के बावजूद खरीदारों का दबदबा बना हुआ है। जब तक अहम सपोर्ट लेवल बने हुए हैं,तब तक मार्केट का स्ट्रक्चर पॉजिटिव बना रहेगा। ट्रेडर्स अच्छे रिस्क मैनेजमेंट के साथ गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं, क्योंकि मुख्य ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आना ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की कहानी में एक बड़ा बदलाव है। यह बदलाव मांग में कमी के कारण नहीं,बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की वजह से आया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इससे सप्लाई में आई वह रुकावट दूर हो रही है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक देश भारत के लिए यह निश्चित रूप से अच्छी खबर है। तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की गिरावट से भारत का सालाना आयात बिल लगभग 12 से 15 अरब डॉलर कम हो जाता है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम होता है और भारतीय रिजर्व बैंक को विकास को बढ़ावा देने के लिए उधार की लागत (ब्याज दरों) को अनुकूल बनाए रखने की अधिक गुंजाइश मिलती है।

घरेलू बाजारों ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है। 25 जून को सेंसेक्स 77,000 के स्तर को पार कर गया और निफ्टी 24,100 के आसपास मज़बूत बना रहा। इसमें ऑटो,एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के शेयरों ने बढ़त में अहम भूमिका निभाई। भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए निकट भविष्य का आउटलुक अच्छा दिख रहा है,बशर्ते क्रूड की कीमतें 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में स्थिर रहें और मॉनसून उम्मीद के मुताबिक अच्छा रहे।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिज़नेस हेड,अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में लंबी छुट्टी से पहले,निवेशकों ने कारोबारी सत्र के अंतिम हिस्से में मुनाफावसूली की,जिससे बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। चूंकि मुहर्रम के कारण शुक्रवार को बाजार बंद रहेंगे,इसलिए निवेशकों ने अपनी इक्विटी होल्डिंग कम कर दी। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमी पर अभी भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं,ऐसे में निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज में VP टेक्निकल रिसर्च अमोल अठावले ने कहा कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। काफी उतार-चढ़ाव के बाद,निफ्टी 0.18 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स में 297 अंकों की बढ़त हुई। सेक्टरों की बात करें तो फार्मा इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई,जबकि मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट हुई और यह 4.40 प्रतिशत नीचे आया। हफ्ते के दौरान,तेज गिरावट के बाद मार्केट को 50 डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज)के पास सपोर्ट मिला और इसमें तेजी से सुधार हुआ। हालांकि,एक बार फिर इसे 24,200/77,800 के रेजिस्टेंस जोन के पास प्रॉफिट बुकिंग का सामना करना पड़ा।

टेक्निकल तौर पर मार्केट ने एक रेंज-बाउंड पैटर्न बनाया है। नीचे की तरफ,इसे 50 डे SMA या 23,800/76,200 के पास सपोर्ट मिला है,जबकि 24,200-24,250/77,800-78,000 के रेजिस्टेंस लेवल के पास लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। पोजीशनल ट्रेडर्स के लिए, 24,000/77,000 एक इमीडिएट सपोर्ट जोनन का काम करेगा। इस लेवल के ऊपर,मार्केट 24,200/77,800 को फिर से टेस्ट कर सकता है। 24,200/77,800 के लेवल को सफलतापूर्वक पार करने पर मार्केट 24,400-24,500/78,400-78,700 की ओर बढ़ सकता है।

दूसरी ओर 24,000/77,000 के नीचे जाने पर मार्केट 23,800/76,200 तक गिर सकता है। गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है और इंडेक्स 23,650/75,700 तक जा सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए,सपोर्ट जोन 57,800 और 57,500 पर हैं। इन लेवल के ऊपर,तेजी 58,700-59,000 की ओर जारी रह सकती है। इसके उलट, 57,500 के नीचे जाने पर अपट्रेंड कमजोर हो सकता है।

 

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Monsoon Watch: IMD ने बताया यूपी में एंट्री से अभी कितनी दूर है मानसून, अबतक 57% कम बारिश, क्या 28 जून से बदलेगी तस्वीर?

UP Monsoon Weather Forecast: उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में भीषण गर्मी और उमस के बीच लोग टकटकी लगाए मानसून की पहली फुहारों का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ आंचलिक केंद्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी प्रदेश की सीमा से कुछ दूरी पर है। मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जताते हुए कहा है कि अगले 3 से 4 दिनों में मानसून के यूपी में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। इस बीच प्रदेश में अब तक हुई बारिश के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। आइए जानते हैं कि यूपी में मानसून अपनी सामान्य रफ्तार से कितना पीछे है, 28 जून से मौसम में क्या बड़े बदलाव होने वाले हैं और देश के बाकी राज्यों को लेकर आईएमडी ने क्या पूर्वानुमान जारी किए हैं।

यूपी में अब तक 57% कम बारिश, सामान्य तारीखों से पिछड़ा मानसून

लखनऊ मौसम केंद्र के ताजातरीन आंकड़ों के मुताबिक बारिश का ग्राफ अभी नीचे ही नजर आ रहा है। प्रदेश में अबतक दीर्घकालीन औसत से करीब 57 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की किल्लत सबसे ज्यादा है, जहां सामान्य से लगभग 69 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह कमी करीब 33 फीसदी दर्ज की गई है।

यूपी में मानसून की एंट्री की सामान्य तारीखें क्या हैं?

सामान्य परिस्थितियों में मानसून 23 जून तक लखनऊ, प्रयागराज और कानपुर पहुंच जाता है। इसके बाद आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में इसके पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून होती है। लेकिन इस बार इन इलाकों को अभी और इंतजार करना होगा। मौसम विभाग और विशेषज्ञों का मानना है कि 28 जून के बाद मौसम के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उत्तर भारत में इस समय सक्रिय मौसम प्रणालियां मानसून को आगे धकेलने में मदद कर सकती हैं। यदि मौजूदा सिस्टम इसी तरह सक्रिय रहा तो जून के अंतिम दिनों में मानसून उत्तर प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ सकता है और जुलाई की शुरुआत झमाझम बारिश के साथ हो सकती है।

पूर्वी यूपी में लू की चेतावनी

बारिश के इंतजार के बीच फिलहाल प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में गर्मी और उमस का प्रकोप बरकरार है। आईएमडी के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले 3-4 दिनों (25 से 28 जून) तक हीट वेव चलने की संभावना है। इसमें भी 25 से 27 जून के दौरान कुछ पॉकेट्स में तीव्र लू की स्थिति बनी रहेगी। बिहार में 25 जून को और झारखंड में 25-26 जून को लू जैसी स्थितियां देखने को मिलेंगी। उत्तर-पश्चिम भारत में 28 जून तक अधिकतम तापमान 2-3°C बढ़ सकता है, लेकिन उसके बाद इसमें 3-5°C की बड़ी गिरावट आएगी।

आईएमडी का देशव्यापी वेदर अलर्ट: जानिए अन्य राज्यों का हाल

मौसम विभाग के मुताबिक अगले 3-4 दिनों में मानसून के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी बचे हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल है। इसके प्रभाव से देश के अलग-अलग क्षेत्रों में 1 जुलाई 2026 तक ऐसा रहेगा मौसम का पूर्वानुमान:

उत्तर-पश्चिम भारत

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 25-26 जून और 29 जून-1 जुलाई के बीच, जबकि पूर्वी यूपी में 25-29 जून के दौरान छिटपुट से लेकर हल्की बारिश होगी। हालांकि, 30 जून और 1 जुलाई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से भारी बारिश का अनुमान है। 29 जून से 1 जुलाई के बीच यूपी के दोनों हिस्सों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और आंधी चलने की संभावना है।

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान: इन राज्यों में 25 जून से 1 जुलाई के बीच छिटपुट बारिश का दौर जारी रहेगा। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 25-27 जून और 29 जून-1 जुलाई के दौरान आंधी-तूफान और 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। पूर्वी राजस्थान में 25-26 जून को और पश्चिमी राजस्थान में 25 जून को 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से तीव्र आंधी और धूल भरी आंधी चलने की चेतावनी है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: उत्तराखंड में 29 जून से 1 जुलाई और हिमाचल प्रदेश में 30 जून से 1 जुलाई के बीच व्यापक स्तर पर भारी बारिश होने की संभावना है।

मध्य और पूर्वी भारत

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों में 25 जून को भारी बारिश और 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्कॉल का अलर्ट है। छत्तीसगढ़ में 27 जून से 1 जुलाई के बीच मानसून रफ्तार पकड़ेगा और 27-28 जून को भारी बारिश हो सकती है।

बिहार, झारखंड और ओडिशा: इन राज्यों में 28 जून से 1 जुलाई के बीच व्यापक बारिश होगी। बिहार में 25-26 जून और 28 जून को तेज आंधी और 26 से 30 जून के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में इस हफ्ते भारी से बहुत भारी वर्षा होगी। विशेष रूप से 27 से 29 जून के बीच इसके उत्तरी हिस्सों में अत्यधिक भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत

असम, मेघालय और अरुणाचल: अरुणाचल प्रदेश में 27 से 29 जून के बीच बहुत भारी बारिश होगी। वहीं, 28 जून 2026 को असम और मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर बेहद भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र: कोंकण और गोवा में 25 जून को बहुत भारी बारिश और 26 जून से 1 जुलाई तक लगातार भारी बारिश जारी रहेगी। मध्य महाराष्ट्र में 25 जून को बहुत भारी और 26-29 जून तक भारी बारिश का अलर्ट है। मराठवाड़ा में 25 जून को तेज आंधी के साथ भारी बारिश हो सकती है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत

कर्नाटक और केरल: तटीय कर्नाटक में 25-28 जून को भारी बारिश और 29 जून से 1 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश होगी। केरल और माहे में 29 जून को बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में भी 25 जून से 30 जून के बीच अलग-अलग दिनों में भारी बारिश की संभावना है।

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Nandani Bosmiya: 23 साल की नंदनी बोसमिया की मौत कैसे हुई, इस केस में जिस असलम का जिक्र आ रहा वो कौन?

Nandani Bosmiya Death New: गुजरात के राजकोट में 23 वर्षीय पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) उम्मीदवार नंदनी बोसमिया की संदिग्ध मौत ने नया मोड़ ले लिया है। 22 जून को नंदिनी अपने अपार्टमेंट में फंदे से लटकी हुई मिली थीं। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लगा। लेकिन अब उनके परिवार ने इसे हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि नंदिनी की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है।

परिजनों का कहना है कि इसके पीछे उनके लिव-इन पार्टनर असलम सामा (Aslam Sama) का हाथ हो सकता है। पीड़ित परिवार का दावा है कि असलम पहले से शादीशुदा था। दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। राजकोट पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

लिव-इन रिश्ते को लेकर बढ़ रहा था तनाव

परिवार ने दावा किया है कि नंदिनी पिछले कुछ समय से असलम सामा के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थीं। आरोप है कि असलम पहले से शादीशुदा था। वह नंदिनी के अलावा जूनागढ़ में अपनी पत्नी से भी संबंध बनाए हुए था। रिश्तेदारों का कहना है कि इसी वजह से दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों में लगातार विवाद होने लगे थे। नंदिनी कथित तौर पर मानसिक तनाव, भावनात्मक प्रताड़ना और परेशानियों का सामना कर रही थीं।

धमकी और उत्पीड़न के आरोप

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नंदिनी के परिवार ने आरोप लगाया है कि असलम सामा उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा था। नंदिनी को वह धमकियां भी देता था। उनका कहना है कि नंदिनी ने कई बार अपने करीबियों को रिश्ते में चल रही समस्याओं और तनाव के बारे में बताया था। परिजनों का आरोप है कि इन परिस्थितियों ने उनकी मौत को संदिग्ध बना दिया है। इसलिए मामले की गहन जांच की जानी चाहिए।

नंदनी के पिता आनंद बोस्मिया ने आरोप लगाया है कि असलम कई बार उनकी बेटी के साथ मारपीट भी किया था। यही वजह है कि मौत के बाद परिवार सीधे तौर पर असलम की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

न्यूज 18 के मुताबिक, विवाद के बाद नंदनी कुछ समय के लिए एक ऐसे शख्स के पास चली गई थीं जिसे वह अपना भाई मानती थीं। हालांकि बाद में वह दोबारा उसी फ्लैट में लौट आई। परिवार का दावा है कि इसके बाद भी हालात सामान्य नहीं थे। दोनों के बीच तनाव बना हुआ था।

पुलिस ने शुरू की डिटेल्स जांच

पुलिस का कहना है कि शुरुआती सबूतों से मौत फांसी लगने की प्रतीत होती है। लेकिन अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं (जिनमें हत्या की आशंका भी शामिल है) की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।

घटना वाले दिन नंदनी का फोन लगातार बंद मिला। परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद परिवार को चिंता हुई। फिर एक परिचित को फ्लैट पर भेजा गया। उन्हें बताया गया कि फ्लैट के अंदर नंदनी फंदे से लटकी हुई मिलीं। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

फोरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मौत का वास्तविक कारण फोरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया गया है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह आत्महत्या थी या इसके पीछे किसी आपराधिक साजिश का हाथ था। वहीं, नंदिनी के परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एक अधिकारी ने कहा कि मौत की असली वजह फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी।

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SBI के शेयर में 22% उछाल का दम, बना सकता है नया रिकॉर्ड हाई; CLSA को उम्मीद

भारत के सबसे बड़े लेंडर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर में अभी अच्छी गुंजाइश बाकी है। शेयर के अपने पिछले रिकॉर्ड हाई लेवल को पार कर जाने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म CLSA ने यह अनुमान जताते हुए इस स्टॉक पर अपना पॉजिटिव नजरिया दोहराया है। ब्रोकरेज ने SBI के शेयरों पर “आउटपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,275 रुपये प्रति शेयर दिया है। यह टारगेट स्टॉक के क्लोजिंग प्राइस से 22% ज्यादा है।

साथ ही यह टारगेट शेयर के BSE पर 52 सप्ताह के एडजस्टेड हाई 1,234.8 रुपये से भी ज्यादा है। CLSA ने SBI के मैनेजमेंट से मुलाकात की। बातचीत में सामने आया कि SBI की लोन ग्रोथ सिस्टम के हिसाब से मजबूत रही है। इसमें रिटेल और कॉरपोरेट दोनों तरह की डिमांड का योगदान है।

SBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए क्रेडिट ग्रोथ 13% से 15% के बीच रहने का अनुमान जताया है और कहा है कि यह सभी सेगमेंट में व्यापक स्तर पर होगी। चेयरमैन CS सेट्टी ने कहा है कि वेस्ट एशिया में संघर्ष की वजह से कोई दबाव नहीं दिख रहा है। नए वित्त वर्ष के लिए मार्जिन को लेकर 3% का गाइडेंस बरकरार है। CLSA ने मैनेजमेंट के हवाले से कहा है कि ट्रेजरी बिल से जुड़े लोन की रीप्राइसिंग के जरिए मार्जिन गाइडेंस को हासिल किया जा सकता है।

कमजोर रहा मॉनसून तो ग्रामीण क्षेत्र से मांग पर पड़ेगा बुरा असर

बातचीत से यह भी सामने आया है कि SBI कॉर्पोरेट लेंडिंग के मामले में सोच-समझकर कदम उठा रहा है, क्योंकि उसका मकसद मुनाफे वाली ग्रोथ हासिल करना है। CLSA का कहना है कि भूराजनीतिक मोर्चे पर मैक्रो चुनौतियों के बावजूद बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है। SBI मैनेजमेंट को सिर्फ ‘अल नीनो’ की चिंता है। चेतावनी दी गई है कि अगर मॉनसून औसत से काफी कम रहा तो ग्रामीण क्षेत्र से मांग पर बुरा असर पड़ सकता है। SBI के शेयर पर 49 एनालिस्ट नजर रखते हैं। इनमें से 43 ने “बाय” रेटिंग दी है। 6 ने “होल्ड” की सलाह दी है।

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SBI के शेयर में तेजी

25 जून को SBI के शेयर में 1 प्रतिशत की तेजी रही। BSE पर यह 1045 रुपये पर बंद हुआ। बैंक का मार्केट कैप 9.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। शेयर एक महीने में 8 प्रतिशत और एक साल में 30 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल का रिटर्न 88 प्रतिशत है। बैंक में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 55.52 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ऋषिकेश से कम खर्चे में श्रीलंका का ट्रिप! इस शख्स ने होटल से लेकर फ्लाइट तक पूरा खर्चा कैलकुलेट किया

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट ने ट्रैवल खर्च और टूरिज्म की कीमतों को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत के लोकप्रिय पर्यटन स्थल ऋषिकेश की तुलना में श्रीलंका जैसी अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन कई मामलों में ज्यादा किफायती और बेहतर वैल्यू फॉर मनी साबित हो सकती हैं। इस बात ने इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा को और तेज कर दिया है। लोग अब घरेलू और विदेशी यात्रा के खर्चों की तुलना करने लगे हैं और अपने-अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

कुछ लोग मानते हैं कि भारत में कई टूरिस्ट स्पॉट्स पर कीमतें जरूरत से ज्यादा बढ़ गई हैं, जबकि कुछ का कहना है कि हर जगह का अनुभव अलग होता है और केवल खर्च के आधार पर तुलना करना सही नहीं है। यह पूरा मुद्दा अब एक बड़े ऑनलाइन डिबेट का रूप ले चुका है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? X पोस्ट ने खोला मुद्दा

यह बहस तब शुरू हुई जब कंटेंट क्रिएटर परित्श शर्मा ने X पर एक अनुभव साझा किया। उनके अनुसार, एक दोस्त पहले ऋषिकेश घूमने की योजना बना रहा था, लेकिन होटल और ट्रैवल खर्च देखकर उसने विदेश जाने का फैसला कर लिया।

होटल और फ्लाइट ने बढ़ाया बजट

पोस्ट में बताया गया कि ऋषिकेश में अच्छे होटल के कमरे लगभग ₹9,000 से ₹15,000 प्रति रात तक मिल रहे थे। वहीं मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट ही ₹7,000 से ₹8,000 प्रति साइड पड़ रही थी, और आगे का ट्रैवल अलग से जोड़ना पड़ता।

उसी बजट में श्रीलंका बना सस्ता और बेहतर विकल्प

कंटेंट क्रिएटर के मुताबिक, उसी बजट में श्रीलंका की ट्रिप ज्यादा बेहतर साबित हुई। वहां ₹3,000 से ₹5,000 में समुद्र किनारे 5-स्टार होटल मिलने का दावा किया गया, साथ ही शांत वातावरण और साफ-सुथरी जगह का भी जिक्र हुआ।

भारत में टूरिज्म महंगा हो रहा है

पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत में टूरिज्म धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है और अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो लोग विदेश की ओर ज्यादा रुख कर सकते हैं। इस बयान ने ऑनलाइन बहस को और तेज कर दिया।

सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा

इस मुद्दे पर यूजर्स की राय बंट गई। कुछ लोगों ने कहा कि कोविड के बाद डिमांड बढ़ने से कीमतें बढ़ी हैं, जबकि कुछ ने भारत के टूरिज्म को ओवरप्राइस बताया। वहीं कई लोगों ने यह भी कहा कि दोनों जगहों के अनुभव अलग हैं और सिर्फ कीमत के आधार पर तुलना सही नहीं है।

यात्रा खर्च का अनुभव

कुछ यात्रियों ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारत में कई जगहों पर लागत ज्यादा और सुविधाएं कम मिलती हैं, जबकि कुछ ने इसे गलत तुलना बताया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में ट्रैवल अब सच में ‘ओवरप्राइस’ हो रहा है?

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Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे ‘बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में है।

इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।

स्कूल के सिलेबस में बदलाव

स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, “भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।”

इसमें आगे कहा गया है, “जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।”

जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर

किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, “जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोक नायक’ के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।”

इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

‘लोकतंत्र और आप’

इस चैप्टर में “लोकतंत्र और आप” नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।

यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।

भारत की नदियों के नाम भी शामिल

ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। ‘कृष्णा’ नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम ‘गंगा’ रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।

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इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, ‘बैलेंस्ड डाइट’ के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।

Hindustan Copper Share: 45% चढ़ेगा इस सरकारी कंपनी का स्टॉक! आनंद राठी ने दी खरीदने की सलाह

Hindustan Copper Share: सरकारी मेटल कंपनी हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) के शेयर पर ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी का रुख काफी बुलिश है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए 12 महीने का टारगेट प्राइस 715 रुपये रखा है। मौजूदा बाजार भाव 490 रुपये के मुकाबले यह करीब 46% संभावित उछाल का संकेत देता है।

हिंदुस्तान कॉपर पर ब्रोकरेज क्यों बुलिश है?

आनंद राठी का मानना है कि हिंदुस्तान कॉप की मल्टी-प्रॉन्ग कैपेसिटी एक्सपेंशन रणनीति आने वाले वर्षों में ग्रोथ को नई रफ्तार दे सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, गुजरात कॉपर प्लांट (GCP) को दोबारा शुरू करने के लिए 20 साल का रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट किया गया है। इसके अलावा केन्दाडीह कॉपर माइन में प्रोडक्शन फिर शुरू हो गया है। साथ ही, क्षमता बढ़ाने की योजना पर भी काम चल रहा है।

इन प्रोजेक्ट से हिंदुस्तान कॉपर का उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ने की उम्मीद है। झारखंड और सिक्किम की कुछ बंद खदानों को दोबारा शुरू करने की संभावना है। ये भी लॉन्ग टर्म में कंपनी की ग्रोथ को मजबूती दे सकती हैं।

पहली तिमाही में मजबूत नतीजों की उम्मीद

ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही कंपनी के लिए रिकॉर्ड रहने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉपर की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये की कमजोरी और प्रोडक्शन बढ़ने से कंपनी का रेवेन्यू करीब 8.5 अरब रुपये तक पहुंच सकता है। EBITDA मार्जिन भी करीब 48% रहने का अनुमान है।

लंबी अवधि की ग्रोथ पर दांव

आनंद राठी का कहना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग से कॉपर की खपत लगातार बढ़ेगी। इसी को देखते हुए हिंदुस्तान कॉपर अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर बड़ा निवेश कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी FY30 तक बड़े कैपेक्स प्रोग्राम पर काम कर रही है। इससे आने वाले वर्षों में उत्पादन में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।

हिंदुस्तान कॉपर का टारगेट प्राइस क्या है?

आनंद राठी ने हिंदुस्तान कॉपर पर BUY रेटिंग बनाए रखते हुए 715 रुपये का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव 490 रुपये के मुकाबले यह लगभग 46% के संभावित उछाल का संकेत है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की विस्तार योजनाएं, बढ़ती उत्पादन क्षमता और मजबूत कॉपर डिमांड स्टॉक के लिए लंबे समय में पॉजिटिव साबित हो सकती हैं।

इन जोखिमों पर नजर रखना भी जरूरी

ब्रोकरेज का कहना है कि निवेशकों को कुछ जोखिमों का भी ध्यान रखना चाहिए। इनमें अंतरराष्ट्रीय कॉपर कीमतों में उतार-चढ़ाव, कैपेक्स प्रोजेक्ट्स में देरी, उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं के समय पर पूरा न होने और वैश्विक कमोडिटी बाजार में बदलाव शामिल हैं। ऐसे जोखिमों का असर शेयर के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

प्राइवेट सेक्टर के CSB Bank के शेयरों में 25 जून को दिन में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी। बीएसई पर भाव 322 रुपये के लो तक गया। शेयर में गिरावट की दो वजहें सामने आ रही हैं। पहली मुख्य वजह यह है कि ऐसी खबर है कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की अगुवाई वाली फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स, CSB बैंक में अपनी पूरी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चला है कि फेयरफैक्स ने IDBI बैंक में हिस्सेदारी की खरीद के लिए एक नई बोली लगाई है।

इस सौदे से सरकार और LIC, दोनों मुख्य शेयरधारकों को लगभग 50,000 करोड़ रुपये या 5 अरब डॉलर से कुछ अधिक मिलने की संभावना है। संशोधित प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और सौदा सही दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

इसलिए CSB Bank में बेच सकती है पूरा हिस्सा

संबंधित लोगों का यह भी कहना है कि फेयरफैक्स ने प्रतिबद्धता जताई है कि बैंकिंग क्षेत्र में IDBI बैंक ही उसका एकमात्र निवेश होगा। नतीजतन, IDBI Bank का अधिग्रहण करने पर वह CSB बैंक में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। ऐसा इसलिए क्योंकि RBI के नियमों के तहत कोई प्रमोटर दो बैंकिंग लाइसेंस नहीं रख सकता है।

फेयरफैक्स ने 2018 में CSB बैंक (जिसे तब कैथोलिक सीरियन बैंक के नाम से जाना जाता था) को बचाने के लिए एक बेलआउट डील के तहत 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। एक साल बाद बैंक को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया।

गोल्ड की कीमत में गिरावट भी एक वजह

सोने की कीमतों में दबाव के कारण गुरुवार को गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। साथ ही CSB बैंक लिमिटेड जैसे गोल्ड फाइनेंसिंग से जुड़े लेंडर्स के शेयरों में भी गिरावट है। गोल्ड के फिसलने की वजह है कि महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते US फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने और उसके बाद US डॉलर के मजबूत होने का डर बना हुआ है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है, जो पिछले 7 महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है। CSB Bank के कुल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा लगभग 42-45% है।

CSB Bank का मार्केट कैप घटकर 5600 करोड़ रुपये रह गया है। शेयर साल 2026 में अब तक 33 प्रतिशत गिरा है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FMCG Stock: कमजोर मॉनसून की चिंताओं के बीच नुवामा को FMCG में दिख रही डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद

FMCG Stock:  मॉनसून में देरी और एल नीनो की चिंताओं का असर फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) स्टॉक्स पर पड़ सकता है, लेकिन नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज को उम्मीद है कि कंज्यूमर कंपनियां एक और मजबूत तिमाही रिपोर्ट करेंगी, जिसमें पूरे सेक्टर में अच्छी सेल्स और वॉल्यूम ग्रोथ जारी रहेगी।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अबनीश रॉय ने कहा कि ज्यादातर FMCG कंपनियां 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही (Q4FY26) में देखी गई रिकवरी पर आगे बढ़ेंगी। उन्हें उम्मीद है कि नेस्ले इंडिया, मैरिको, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स इंडिया और इमामी जैसी कई कंपनियां 2026 की अप्रैल-जून तिमाही (Q1FY27) में मजबूत नंबर देगी, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी बड़ी कंपनियों की सेल्स ग्रोथ लगभग डबल-डिजिट और वॉल्यूम ग्रोथ लगभग 7% हो सकती है।

हालांकि निवेशक कमजोर बारिश और कम बुवाई एक्टिविटी को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि पुराना डेटा कंज्यूमर डिमांड में तेज गिरावट के डर को सपोर्ट नहीं करता है। “हमने देखा है कि कम से कम पिछले 10 सालों में बारिश में कमी और सेक्टर के वॉल्यूम में कमी के बीच कोई बड़ा संबंध नहीं है।”

उनके मुताबिक, बारिश की क्वालिटी और डिस्ट्रीब्यूशन, हेडलाइन मॉनसून नंबरों से ज्यादा मायने रखते हैं। उन्होंने कहा कि अभी के लिए रूरल डिमांड अच्छी बनी हुई है, जिसे कई राज्यों में सरकार के वेलफेयर उपायों से सपोर्ट मिला है। मॉनसून में किसी भी कमी का असली असर अगर सामने आता है, तो 2026-27 (FY27) के दूसरे हाफ में ही साफ हो पाएगा।

अबनीश रॉय ने कंज्यूमर सेक्टर में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स से बढ़ते कॉम्पिटिशन पर भी रोशनी डाली। उन्होंने रिलायंस को “बहुत, बहुत अहम कॉम्पिटिशन” बताया, और कैंपा कोला के तेजी से बढ़ने की ओर इशारा किया, जिसने एग्रेसिव प्राइसिंग और मजबूत डीलर इंसेंटिव के ज़रिए मार्केट शेयर हासिल किया है। हालांकि, उनका मानना ​​है कि ज़्यादातर FMCG कैटेगरी इतनी बड़ी हैं कि जाने-माने प्लेयर्स और रिलायंस एक साथ रह सकते हैं।

पेंट्स सेक्टर पर बात करते हुए अबनीश रॉय को उम्मीद है कि क्रूड ऑयल की कम कीमतों के बावजूद ग्रोथ मोमेंटम बना रहेगा। उन्होंने कहा कि पेंट कंपनियों ने मजबूत प्राइसिंग डिसिप्लिन दिखाया है और उन्हें डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ जारी रखनी चाहिए। भले ही क्रूड $60-$70 प्रति बैरल की रेंज में बना रहे और कंपनियां पहले की कीमतों में बढ़ोतरी को थोड़ा वापस ले लें, अच्छी वॉल्यूम ग्रोथ से सेल्स को सपोर्ट मिलना चाहिए।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।