कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का निधन, भारत ने रखा 1 दिन का राष्‍ट्रीय शोक, PM मोदी ने जताया दुख

Former Emir of Qatar Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani passes away

Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani : कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को यानी आज 74 साल की उम्र में निधन हो गया। इसकी घोषणा कतर की सर्वोच्च सरकारी संस्था 'अमीरी दीवान' ने की है। 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत सरकार ने 13 जुलाई को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने इसे अत्यंत पीड़ादायक बताया है।

 

कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को यानी आज 74 साल की उम्र में निधन हो गया। इसकी घोषणा कतर की सर्वोच्च सरकारी संस्था 'अमीरी दीवान' ने की है। 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत सरकार ने 13 जुलाई को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने इसे अत्यंत पीड़ादायक बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हम (भारत) कतर के फादर अमीर, शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं। वह एक दूरदर्शी नेता थे, जिनके नेतृत्व में कतर ने विकास और समृद्धि के नए आयाम हासिल किए।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम उन्हें एक सच्चे मित्र के रूप में भी याद करते हैं, जिनसे मुझे फरवरी 2024 में अपनी कतर यात्रा के दौरान मिलने का सम्मान प्राप्त हुआ था। शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे लिखा, मैं कतर के अमीर महामहिम शेख तमीम बिन हमद अल थानी, पूरे शाही परिवार और कतर की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।

 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि शेख हमद, कतर के मौजूदा अमीर के पिता थे। संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू के कतर जाने की संभावना है। वे भारत सरकार की ओर से कतर सरकार को शोक संवेदना प्रकट करेंगे। शेख हमद ने 1995 से 2013 तक कतर पर शासन किया। उन्हें देश के आधुनिक विकास का प्रमुख शिल्पकार माना जाता है।

 

उनके शासनकाल में कतर ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पहचान और प्रभाव काफी बढ़ा। उन्होंने 2013 में सत्ता छोड़ दी और अपने बेटे शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सत्ता सौंप दी जो उस समय 33 साल के थे।

मुख्यमंत्री योगी बोले- वनों से ही नदियां रहेंगी सदानीरा, एक वृक्ष करता है हजारों लीटर जल का अवशोषण

Chief Minister Yogi Adityanath explained importance of tree plantation

– ताल रिंग रोड के किनारे सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया पौधारोपण

– वृक्षों के अंधाधुंध कटान से हो सकता है जल और खाद्यान्न संकट

– पर्यावरण असंतुलन से वर्षा चक्र का अंतर बढ़ता है

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों को पौधारोपण की महत्ता समझाते हुए कहा कि एक वृक्ष अपने भीतर हजारों लीटर जल का अवशोषण करके रखता है। नदियां वहीं सदानीरा होती हैं, जहां वन या अधिक संख्या में वृक्ष होते हैं। यदि वृक्षों की अंधाधुंध कटान होगी तो जल की कमी से खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। 

 

मुख्यमंत्री रविवार को पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अंतर्गत आरकेबीके के समीप ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का पौधा लगाने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण असंतुलन से वर्षा चक्र का अंतर बढ़ता है और इसका प्रतिकूल असर अन्नदाता किसान के लिए संकट पैदा करता है। बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान से पेयजल का संकट और सूखे की स्थिति बनती है।

पर्यावरण संतुलन रखने के लिए अपने दायित्व का निवर्हन करने को हर नागरिक को ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम को समर्पित पौधारोपण महाभियान से जुड़ना होगा। हर व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ ही उसकी सुरक्षा का संकल्प भी लेना होगा। 

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सीएम योगी ने कहा कि इस वर्ष एक ही दिन में सरकार ने 35 करोड़ पौधारोपण करने का लक्ष्य तय किया है। लक्ष्य बड़ा भले हो, लेकिन यूपी जैसे राज्य जहां 57 लाख से अधिक नर्सरियां हैं, के लिए यह मुश्किल नहीं है। पौधारोपण महाभियान में औषधीय, फलदार, छायादार, इमारती हर तरह के पौधे लगाए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने हर वर्ष पौधारोपण के बड़े अभियान को आगे बढ़ाया है और पौधों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की है।

इसी का परिणाम है कि सर्वे में वनाच्छादन का विस्तार स्पष्ट दिखाई देता है। कृतज्ञता ज्ञापन भारतीय संस्कृति की पहचान है। व्यापक पौधारोपण के जरिये हम प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर वर्तमान और भावी पीढ़ी के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं।

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ताल रिंग रोड के किनारे पौधारोपण करने के बाद मुख्यमंत्री ने रामगढ़ताल की खूबसूरती को निहारा और सेल्फी भी ली। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता सहित कई पार्षद भी उपस्थित रहे।

पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

– मुख्यमंत्री ने गोरखपुर से किया 1 दिन में 35 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य वाले पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ

– 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत सीएम ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर रोपे पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे

– मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की रफ्तार के साथ वनाच्छादन का विस्तार, सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है एक पेड़

– आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण, लगाया मौलश्री का पौधा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखपुर से एक दिन में 35 करोड़ रिकॉर्ड पौधारोपण के लक्ष्य वाले प्रदेशव्यापी पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भगवानपुर टोल प्लाजा के समीप पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे लगाए और सेल्फी भी ली। इसके बाद गीडा सेक्टर-28 में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ है। विगत नौ वर्षों में प्रदेश में भौतिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ ही वनाच्छादन का भी विस्तार हुआ है। गोरखनाथ मंदिर लौटते समय सीएम ने आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मौलश्री का पौधा रोपित किया।

 

जनसभा में सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का वृहद विस्तार हुआ है। एक्सप्रेसवे, हाईवे के साथ बड़े पैमाने पर सड़कों का जाल बिछा है। नए-नए उद्योग लगे हैं। शहरीकरण का दायरा बढ़ा है और नई-नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। भौतिक विकास में तेज योगदान देने वाले इस राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्पित प्रयासों से वनाच्छादन के विस्तार में भी सफलता प्राप्त की है।

एक पेड़ सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है। 9 वर्षों में यूपी का वनाच्छादन बढ़ने से 6 करोड़ 37 लाख 74 हजार 130 टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण तथा 4 करोड़ 63 लाख 90 हजार 130 टन ऑक्सीजन का उत्सर्जन हुआ।

 

'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:'

मुख्यमंत्री ने पौधारोपण महाभियान को धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ बताया और इसमें हर व्यक्ति की तरफ से योगदान दिए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि धरती माता हम सबको अच्छा वातावरण देती हैं। आगे बढ़ने का अवसर, पेट भरने को अन्न, अच्छे-अच्छे फल, पीने के लिए जल देने के साथ घर की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।

धरती माता के बारे में हमारे ऋषियों ने संकल्प भाव से कहा है- 'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:', अर्थात यह धरती हमारी माता हैं और हम सब इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के रूप में धरती माता के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ का आह्वान किया है।  यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुंदर बनाने का राष्ट्रीय कर्तव्य है। 

 

धरती माता की आरोग्यता का भी रखें ध्यान

सीएम योगी ने पौधारोपण की थीम ‘एक पेड़ मां के नाम’ को बहुत सुंदर बताते हुए कहा कि मां हर व्यक्ति, हर जीव के लिए दुनिया का सबसे सुंदर उपहार है। हम खुद के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, लेकिन सबकुछ देने वाली धरती माता के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। खुद की आरोग्यता के लिए हम सभी को धरती माता की आरोग्यता का भी ध्यान रखना होगा।

अनंतकाल तक जीवसृष्टि बनी रहे, इसके लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष 5 करोड़ पौधे लगाए गए। गत वर्ष 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। 9 वर्ष में अब तक प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

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मौसम चक्र में परिवर्तन से कृषि उत्पादन पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर मंडरा रहे संकट का प्रभाव मौसम चक्र पर भी पड़ा है। बारिश करीब एक महीना विलंब से शुरू हुई है। जो बीज 15 जून तक लग जाना चाहिए था, उसे 15 जुलाई को लगाएंगे तो उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक अंतर पड़ेगा।

पर्यावरण असंतुलन से कभी प्रचंड गर्मी पड़ रही है तो कभी सर्दी। लगातार ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी दी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में समुद्र के किनारे बहुत सारे शहर डूबने की स्थिति में होंगे तो कहीं भीषण जल संकट होगा।

 

मानवता को चुकानी पड़ रही प्रकृति से खिलवाड़ की कीमत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम में बहुत सारे शहर ऐसे हैं, जहां गैस चैंबर जैसी स्थिति बन जाती है। वहां अलर्ट जारी करना पड़ता है कि बुजुर्ग, बीमार और बच्चे घर से बाहर न निकलें, जरूरी हो तो मास्क लगाकर निकलें। आखिर यह स्थिति पैदा ही क्यों हुई? क्योंकि प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया। अंधाधुंध पेड़ काटे गए, जल दोहन किया गया लेकिन जल संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। तालाबों पर अवैध कब्जे हो गए। अपने स्वार्थ के लिए लोगों ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, आज उसकी कीमत विश्व मानवता को चुकानी पड़ रही है। 

 

पर्यावरण अनुकूल एलईडी लाइट से बचे 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब डबल इंजन की भाजपा सरकार बनी तब हैलोजन लाइटों को हटाकर उसकी जगह पर्यावरण अनुकूल एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में 16 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गईं, इससे प्रदेश सरकार को 100 करोड रुपए की बचत हुई।

साथ ही हैलोजन में जलकर मरने वाले कीड़े-मकोड़ों की भयंकर बदबू से भी मुक्ति मिली। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। पीएम सूर्य घर बिजली योजना से लोगों के बिजली बिल आधे हो रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का नया स्रोत लोगों को उपलब्ध कराया गया है।

 

उज्जवला योजना ने दी धुएं से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के विजन से उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन बांटे गए, जो कांग्रेस सरकार में ब्लैक में मिलते थे। 10 करोड़ परिवारों में माताओं-बहनों को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली। अकेले उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ परिवारों को यह लाभ मिला है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया से इसके बारे में आह्वान किया है। अयोध्या प्रदेश की पहली सोलर सिटी बनी है। वहां समस्त स्ट्रीट लाइट में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

पौधा लगाकर देखभाल भी करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें न सिर्फ पौधे लगाने हैं, बल्कि उनकी उचित देखभाल भी करनी है। जिन किसानों ने अपने खेत में पेड़ लगाए हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट फाइनेंस स्कीम के अंतर्गत पैसा भी प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा कि अपने पूर्वजों व परिजनों की स्मृति में और परिवार के सदस्यों के नाम से एक पौधा अवश्य लगाएं।

 

’हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन

पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अवसर पर आयोजित जनसभा के मंच से मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश के नौ वर्ष की हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन किया। लघु फिल्म में यूपी में पिछले नौ सालों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों और हासिल उपलब्धियों को दर्शाया गया है, जबकि वानिकी कैलेंडर में वर्ष 2026-27 के लिए वन विभाग की कार्ययोजना का उल्लेख है। 

 

सीएम ने किया पौध वितरण, किसानों को सौंपे प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की लाभार्थी गीता देवी, मधुरा, इशरावती, शीला, कालिंदी को घर के सामने रोपने के लिए सहजन के पौधे भेंट किए। उन्होंने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना के अंतर्गत 700 से अधिक पौधारोपण करने वाले नरपति (कैम्पियरगंज गोरखपुर), 650 से अधिक पौधारोपण करने वाले अशफाक खान (देसही देवरिया),  800 पौधारोपण करने वाली रंजना देवी (हाटा कुशीनगर) और 850 पौधे लगाने के लिए अरविंद कुमार (पडरौना कुशीनगर) को कार्बन क्रेडिट के लिए मिलने वाली राशि का प्रमाण-पत्र सौंपा। 

 

सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बढ़ी हरियाली : वनमंत्री

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हरियाली बढ़ी है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रीनरी वृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश प्रगति करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

आज का पौधारोपण पूर्ण होते ही यूपी में पिछले 10 सालों में पौधारोपण की कुल संख्या 275 करोड़ हो जाएगी। इस बार के पौधारोपण महाभियान में 30 प्रतिशत फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वानिकी विश्वविद्यालय के निर्माण की शुरुआत जल्द ही की जाएगी।

 

पीएम मोदी-सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील : रविकिशन

इस मौके पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे सदैव लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इसी विजन के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री ने एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी का इतना विराट विकास हुआ है, जितना कोई सोच भी नहीं सकता।

 

नौ वर्ष में हुआ सौ वर्ष से अधिक का विकास : प्रदीप शुक्ल

सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सहजनवा विधानसभा का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने नौ वर्षों में जितना विकास किया, वह सौ वर्षों में भी नहीं हो पाता। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार चौधरी ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, राज्यसभा सदस्य संगीता यादव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, महेंद्रपाल सिंह, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पौधारोपण महायज्ञ के लिए गोरखपुर के नोडल अधिकारी सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, ब्लॉक प्रमुख दिलीप यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

Kashmir Cloudburst : अनंतनाग में बादल फटने से मची तबाही, घरों में घुसा पानी; फसलें और सेब के बाग बर्बाद

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के चिटरगुल स्थित नाला चोटीहाल (Nala Chotihall) क्षेत्र में रविवार को बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) के बाद अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में कृषि भूमि, सेब के बाग, धान की फसलें और कई रिहायशी इलाकों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा। टीमें नुकसान का आकलन करने के साथ राहत कार्य और आवश्यक एहतियाती कदम उठा रही हैं। प्रशासन ने बताया कि प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को रातों-रात अपने घर छोड़ने पड़े। धान के खेत जलमग्न हो गए और सेब के बागों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

 

भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने किसानों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। उन्होंने कहा कि सेब के बाग और धान की फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गई है। उन्होंने सरकार से फसलों और पेड़ों के नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की अपील की।

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पहाड़ों से तेज बहाव के साथ पानी नीचे आया और चिटरगुल अपर में बहने वाले नाले का रास्ता बदल गया। इससे आसपास के खेतों, बागों और मकानों को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि कई परिवारों को तत्काल घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से निष्पक्ष सर्वे कर जल्द मुआवजा देने की मांग की है।

 

इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। आधी रात तक लोग अपने घर छोड़कर सड़कों और मस्जिदों में शरण लेने को मजबूर हो गए क्योंकि बाढ़ का पानी लगातार घरों में घुस रहा था। उन्होंने संबंधित विभागों से बागवानी, कृषि भूमि, पशुधन और सड़क को हुए नुकसान का तत्काल निरीक्षण कर राहत पैकेज जारी करने की मांग की।

योगी सरकार का नकली दवा माफिया पर सबसे बड़ा प्रहार, आगरा में जालसाज सिंडिकेट की कमर टूटी

Yogi government's biggest crackdown on spurious drug mafia

– एफएसडीए आयुक्त के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 13 फर्मों पर मारे एक साथ छापे, अंतरराज्यीय नेटवर्क का हुआ खुलासा

– सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, नकली दवाएं, फर्जी बिलिंग और री-लेबलिंग का संगठित नेटवर्क बेनकाब

– बड़ी कार्रवाई के दौरान 14 संचालकों पर 3 नई एफआईआर, अब तक 58 थोक लाइसेंस निरस्त/निलंबित

– अब तक हुई कार्रवाई में कुल 9 मुकदमे दर्ज और 3.63 करोड़ रुपए की दवाएं जब्त

– एफएसडीए अब अवैध वसूली करने वालों पर भी कस रहा शिकंजा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ चल रहे प्रदेशव्यापी अभियान में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी और सबसे निर्णायक कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए के संगठित दवा सिंडिकेट की परतें खोल दी हैं। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, अवैध री-लेबलिंग, फिजीशियन सैंपलों की बिक्री और अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया।

कार्रवाई के बाद 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या 9 और निरस्त अथवा निलंबित थोक लाइसेंसों की संख्या 58 पहुंच गई है।

 

15 ड्रग इंस्पेक्टरों ने एक साथ मारे छापे

आयुक्त डॉ रोशन जैकब के नेतृत्व में गठित 15 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार (शू मार्केट), कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई की। जिन 13 फर्मों पर छापेमारी हुई उनमें मोहन ट्रेडर्स (कम्बूटोला), मनी मेडिकल (मुबारक महल), नीलकंठ (कृष्णा कॉम्प्लेक्स), वंश फार्मा (कम्बूटोला), प्रशांत मेडिकल (कम्बूटोला), पोरवाल मेडकेयर (शू मार्केट), एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस (मुबारक महल), डॉली ड्रग हाउस (कम्बूटोला), मनु फार्मा (कोतवाली के सामने), आरडीएम फार्मास्युटिकल्स (नवबिया मार्केट), इनाया फार्मा (कम्बूटोला) और नूर फार्मा (कम्बूटोला) शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल के परिसरों को पूरी तरह सील कर दिया गया, जबकि नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्स स्थित प्रतिष्ठान और मनु फार्मा पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 22(1)(d) के तहत रोक लगा दी गई। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए।

 

विभोर मेडिकल एजेंसी से खुला नकली दवाओं का अंतरराज्यीय नेटवर्क

एफएसडीए की ताजा जांच टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की Chymoral Forte और Shelcal के नकली होने संबंधी शिकायत से शुरू हुई। 7 नवंबर 2025 को अंशिका फार्मा के मालिक मनोज गुप्ता की जांच में पता चला कि उन्होंने Chymoral Forte की खेप विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदकर पाल ब्रदर्स (कोलकाता) को बेची थी। विभोर मेडिकल एजेंसी के प्रो. संजीव कुमार गुप्ता के यहां जांच में खरीद के बिल फर्जी मिले।

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उन्होंने दवाएं गुप्ता मेडिकल एजेंसी (गोरखपुर) और हर्षित ट्रेडर्स (आगरा) से खरीदने का दावा किया, लेकिन दोनों फर्मों ने इससे इनकार कर दिया। वहीं वरदान मेडिकल एजेंसी में “ESI SUPPLY NOT FOR SALE” अंकित दवाएं मिलीं और लैब जांच में Chymoral Forte अधोमानक तथा ACILOC नकली पाई गई, जिसकी टोरेंट फार्मा ने भी पुष्टि की। पूछताछ में अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने नकली दवाएं संजीव कुमार गुप्ता से बिना वैध बिल के खरीदी थीं।

जांच में विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और पाल ब्रदर्स का अंतरराज्यीय सिंडिकेट सामने आने पर संजीव कुमार गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, प्रियंका बंसल, अरुण कुमार गुप्ता और पाल ब्रदर्स के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 276, 277, 278, 316 और 318 में एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

 

अस्पताल की दवाओं की री-लेबलिंग से लेकर फर्जी बिलिंग तक, कई परतों में खुला सिंडिकेट

एफएसडीए की जांच में अस्पताल और सरकारी आपूर्ति की जीवनरक्षक दवाओं की री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ। 21 मई को युग फार्मा के प्रो. सचिन गुप्ता के यहां बिना कोल्ड-चेन रखे इंसुलिन इंजेक्शन और री-लेबलिंग मिली। पूछताछ में दवाओं की सप्लाई शारदा फार्मा के शिवम गुप्ता और आरएमडी फार्मा के राजेश गुप्ता तक पहुंची, जिसके बाद तीनों फर्में सील कर दी गईं। बाद में शारदा फार्मा के सीसीटीवी में नबील खान और सोनू बघेल संदिग्ध दवाएं हटाते दिखे।

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एसटीएफ गाजियाबाद की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे मोहित गुप्ता (महादेव फार्मा) से अस्पताल व सरकारी आपूर्ति की दवाएं बिना बिल खरीदकर उन पर लगी 'Not for Sale' पहचान हटाकर फर्जी लेबल और नई एमआरपी के साथ बाजार में बेचते थे। इस मामले में सचिन गुप्ता, शिवम गुप्ता, नितिन गुप्ता, राजेश गुप्ता, मोहित गुप्ता और हितेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं 1 से 3 जुलाई की जांच में वी.ए. मेडिकोज में Jardiance, Telma-H, Thyrox और Gluconorm PG-2 जैसी दवाओं की री-लेबलिंग, नकली Telma-H और फर्जी खरीद बिल मिले।

शोभित अग्रवाल ने दवाएं लाइसेंस निरस्त हो चुके हर्षित ट्रेडर्स से लेने की बात स्वीकार की, जबकि जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी के पुराने बिलों से करीब 1.88 करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग, अंकुर अग्रवाल द्वारा संजीव गुप्ता (विभोर मेडिकल एजेंसी) से बिना बिल नकली दवाएं खरीदने और सबूत मिटाने के प्रयास का खुलासा हुआ। साथ ही मोहित बंसल (रुद्रा एंटरप्राइजेज) और प्रवीण अग्रवाल (श्री भगवती मेडिकल एजेंसी, मथुरा) द्वारा फर्जी बिल, UP-80 EL-0069 वाहन व ऑटो-रिक्शा के जरिए नकली दवाओं को वैध दिखाने का खेल सामने आया।

इसके आधार पर वी.ए. मेडिकोज, शोभित अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, संजीव गुप्ता, मोहित बंसल और प्रवीण अग्रवाल समेत संबंधित आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

 

 3.63 करोड़ रुपए की अवैध दवाएं जब्त, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की परतें खुलीं

एफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आगरा में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ मई 2026 से लगातार चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक 3.63 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की नकली, अवैध तथा सरकारी और डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। यह अभियान केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिंडिकेट की आर्थिक और आपराधिक श्रृंखला को तोड़ने पर केंद्रित है।

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उन्होंने बताया कि पूरे अभियान के दौरान अनियमितताओं और अवैध कारोबार में संलिप्तता पाए जाने पर अब तक 58 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए जा चुके हैं। इस सिंडिकेट के खिलाफ पहले ही 6 नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं। अब 10 जुलाई की कार्रवाई के आधार पर तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए आगरा के कोतवाली फव्वारा थाने में तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर 9 हो जाएगी।

आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नकली दवाओं, अवैध री-लेबलिंग, फिजिशियन सैंपलों की कालाबाजारी और अंतरजनपदीय मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाए। इसके अलावा विभाग को ड्रग एसोसिएशनों द्वारा कुछ दवा व्यापारियों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें भी मिली हैं। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में किसी व्यापारी के आर्थिक शोषण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एक्सटॉर्शन का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

योगी सरकार में पर्यावरणीय बदलाव की नई इबारत, जल से जंगल तक विकास की नई पहचान

new chapter of environmental change in Yogi government

– जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता संरक्षण में उत्तर प्रदेश बना मिसाल

– सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ नदियों से बदली पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर

– वृक्षारोपण, वेटलैंड संरक्षण और अमृत सरोवर से मजबूत हुआ हरित उत्तर प्रदेश

– बुंदेलखंड जल क्रांति, स्वच्छ हवा और नगर वनों ने बढ़ाई पर्यावरणीय मजबूती

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन का नया अध्याय लिखा है। पिछले नौ वर्षों में योगी सरकार ने सुरक्षित पेयजल, नदियों के पुनर्जीवन, वनीकरण, आर्द्रभूमि संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छ वायु, वन्यजीव सुरक्षा और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं लागू कर प्रदेश की पर्यावरणीय तस्वीर बदलने का प्रयास किया है। इसका उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर, स्वास्थ्य और आजीविका को भी बेहतर बनाना रहा है।
 

आर्सेनिक-फ्लोराइड मुक्त पेयजल से लाखों लोगों को मिला सुरक्षित जीवन

बलिया, गाजीपुर, मऊ, वाराणसी, चंदौली, सोनभद्र सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहले भूजल प्राकृतिक रूप से आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रदूषित था। लाखों लोग असुरक्षित हैंडपंपों का पानी पीने को मजबूर थे, जिससे आर्सेनिकोसिस, कंकाल फ्लोरोसिस, श्वसन संबंधी बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया था।

योगी सरकार ने जल जीवन मिशन और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के माध्यम से सतही जल आधारित पाइप पेयजल योजनाओं का व्यापक विस्तार किया। गहरे जलस्रोतो के उपयोग तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से हजारों गांवों को सुरक्षित नल जल उपलब्ध कराया गया, जिससे आर्सेनिक और फ्लोराइड जनित बीमारियों के खतरे में उल्लेखनीय कमी आई है। 
 

नमामि गंगे और 'एक जिला-एक नदी' अभियान से नदियों में लौटी स्वच्छता

नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य हुए हैं। कानपुर के सीसामऊ नाले से प्रतिदिन गंगा में गिरने वाले लगभग 140 एमएलडी गंदे पानी को रोककर आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों तक पहुंचाया गया।

वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर सहित अनेक शहरों में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाई गई तथा औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत किया गया, जिससे गंगा जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। सरकार के एक जिला एक नदी अभियान ने गोमती, हिंडन, तमसा, सोत और अन्य छोटी नदियों के पुनर्जीवन को नई गति दी।  

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240 करोड़ से अधिक पौधरोपण से बढ़ा हरित आवरण

अतिक्रमण हटाने, गाद निकालने, सीवरेज नेटवर्क विकसित करने और एसटीपी स्थापित करने से अनेक नदियों का प्राकृतिक प्रवाह फिर से बहाल हुआ। इससे भूजल पुनर्भरण और सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिली। वहीं हरित उत्तर प्रदेश के संकल्प के तहत वर्ष 2017 से 2026 के बीच 240 करोड़ से अधिक पौधरोपण कर प्रदेश ने देश में नई पहचान बनाई।

स्थानीय प्रजातियों के पौधों को बढ़ावा देने, नदी किनारे वृक्षारोपण, नगर वन, मियावाकी वन और सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसी व्यवस्थाओं ने हरित आवरण बढ़ाने के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी मजबूत की।

 

रामसर वेटलैंड और अमृत सरोवर अभियान से जल संरक्षण को मिली नई ताकत

आर्द्रभूमियों के संरक्षण में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। नवाबगंज, सांडी, समसपुर, सुर सरोवर और सुरहा ताल जैसी प्रमुख वेटलैंड्स का पुनरुद्धार किया गया। सुरहा ताल को भारत के 100वें रामसर स्थल का दर्जा मिलना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि रही।

इन प्रयासों से प्रवासी पक्षियों के आवास सुरक्षित हुए और जैव विविधता को नई मजबूती मिली। मिशन अमृत सरोवर के तहत लगभग 69 हजार तालाबों और पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया। तालाबों की खुदाई, गाद निकालने, जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और रिचार्ज संरचनाओं के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल संरक्षण और सिंचाई की व्यवस्था को नया आधार मिला।

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बुंदेलखंड में जल क्रांति और ऊसर भूमि सुधार से किसानों को मिला नया संबल

बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाया गया। चेक डैम, तालाबों के पुनरुद्धार, वाटरशेड विकास, सिंचाई परियोजनाओं और केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास हुए।

इससे खेती को नई मजबूती मिली और पलायन की समस्या में कमी आने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए। प्रदेश में ऊसर और क्षारीय भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक भूमि सुधार कार्यक्रम संचालित किए गए। जिप्सम, जल निकासी और आधुनिक मृदा सुधार तकनीकों के माध्यम से लाखों हेक्टेयर अनुपजाऊ भूमि को खेती योग्य बनाया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिली।

 

एयरशेड मॉडल, नगर वन और ग्रीन बेल्ट से स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ी पहल

स्वच्छ हवा के लिए सरकार ने एयरशेड आधारित रणनीति अपनाई। जिग-जैग तकनीक वाले ईंट भट्ठों को बढ़ावा दिया गया, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत किया गया तथा उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपी कैम्प) लागू की गई।

इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन और रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग जैसे कदमों से वायु प्रदूषण नियंत्रण को नई दिशा मिली। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर जैसे शहरों में नगर वन, जैव विविधता पार्क और ग्रीन बेल्ट विकसित किए गए। इन पहलों से शहरी हरित क्षेत्र बढ़ा, हीट आइलैंड प्रभाव कम करने में मदद मिली और नागरिकों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध हुआ।

 

दुधवा, रानीपुर और चंद्रप्रभा में वन्यजीव संरक्षण को मिली नई गति

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में दुधवा लैंडस्केप और तराई क्षेत्र में आवास संरक्षण, हाथी रिजर्व, वन्यजीव गलियारों की बहाली, सोलर फेंसिंग और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की स्थापना जैसे कदम उठाए गए। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद मिली।

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बुंदेलखंड में रानीपुर टाइगर रिजर्व की स्थापना ने जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती दी। वहीं चंद्रप्रभा सहित अन्य वन क्षेत्रों में प्राकृतिक पुनर्जनन, मिट्टी एवं नमी संरक्षण तथा वन बहाली कार्यक्रमों के माध्यम से खराब हो चुके वन क्षेत्रों को पुनर्जीवित किया गया।

 

प्लास्टिक मुक्त तीर्थस्थलों और जैव विविधता संरक्षण से पर्यावरण को मजबूती

अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक नगरों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक लगाने, कचरा प्रबंधन को मजबूत करने और स्वच्छता ढांचे का विस्तार करने से धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर संतुलन स्थापित हुआ।
 

सारस, गंगा डॉल्फिन, मीठे पानी के कछुओं और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए गए। स्वच्छ नदियों, बेहतर आर्द्रभूमि प्रबंधन और आवास संरक्षण के माध्यम से प्रदेश की जैव विविधता को नई ऊर्जा मिली। गोरखपुर में स्थापित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्जीवित करने की दिशा में देश की महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।

 

सौर ऊर्जा, जैविक खेती और स्वच्छ ऊर्जा से सतत विकास को बढ़ावा

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित पेयजल और सिंचाई योजनाओं का विस्तार कर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दिया गया। इससे डीजल पर निर्भरता कम हुई और दूरदराज गांवों में जलापूर्ति अधिक विश्वसनीय बनी। गंगा कॉरिडोर के किनारे जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी लाने तथा नदी प्रदूषण को रोकने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए गए।

इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन और शहरी विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के पृथक्करण, आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट और पुराने लैंडफिल के उपचार जैसे कार्यों को गति दी गई। इससे शहरों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई और पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में सफलता मिली।

ममता बनर्जी को महाझटका! TMC के 12 और बैंक खाते सील, अब तक 1000 करोड़ रुपए लॉक

TMC bank accounts sealed: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा भूचाल आ चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) का शिकंजा ऐसा कसा है कि पार्टी पूरी तरह लाचार नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने टीएमसी के 12 और बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया। कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली मामूली राहत के अगले ही दिन हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब तक टीएमसी के कुल 15 बैंक खाते सील हो चुके हैं, जिनमें करीब 1,000 करोड़ रुपये फंसे होने का अनुमान है।

सरकारी और प्राइवेट बैंकों पर एक्शन

पुलिस के आला अफसरों के मुताबिक, जिन 12 नए खातों पर रोक लगाई गई है, वे अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट बैंकों में फैले हुए हैं। पुलिस ने इन खातों को खोलने वालों की पूरी कुंडली और पिछले सभी लेन-देन (ट्रांजैक्शन हिस्ट्री) का ब्योरा बैंकों से तलब किया है। ALSO READ: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, ED ने फ्रीज किए 440 करोड़, क्या होगा TMC पर इसका असर

इससे पहले गुरुवार को ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी को HDFC बैंक के तीन खातों से रोजमर्रा के दफ्तर के खर्चे, स्टाफ की सैलरी और कानूनी लड़ाई के लिए सीमित लेन-देन की इजाजत दी थी। इसके लिए रिटायर्ड जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी भी नियुक्त किया गया था। लेकिन पुलिस की इस नई कार्रवाई ने हाई कोर्ट से मिली राहत को पूरी तरह बेअसर कर दिया है।  ALSO READ: ममता बनर्जी ने संभाली TMC की कमान, बागी नेताओं को दी चुनौती, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा…

 

इस पूरे विवाद की जड़ें हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों और पार्टी के भीतर मचे घमासान से जुड़ी हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद टीएमसी के भीतर अंतर्कलह चरम पर पहुंच गई। ममता बनर्जी के ही बागी विधायकों और सीनियर नेताओं ने बैंक प्रशासन से लिखित शिकायत कर दी कि संगठन में भारी विवाद है, इसलिए खातों से लेन-देन रोका जाए।

 

साइबर क्राइम सेल में FIR : बागी नेताओं ने बिधाननगर पुलिस के साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि इन खातों में जमा भारी-भरकम रकम के सोर्स (पूंजी का जरिया) संदिग्ध हैं। इस शिकायत के अगले ही दिन पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

क्या है पूरा मामला?

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत इन खातों को अटैच किया है। यह पूरी कार्रवाई एक प्राइवेट एविएशन कंपनी से जुड़े 160 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। यह पूरा स्कैम एक 'एम्ब्रेयर बिजनेस जेट' और एक 'अगस्ता हेलीकॉप्टर' की रहस्यमयी खरीद-फरोख्त से जुड़ा हुआ है। टीएमसी ने शुक्रवार को दोबारा कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया और ईडी के इस फ्रीजिंग ऑर्डर को चुनौती दी है। पार्टी के सीनियर वकील किशोर दत्ता ने जस्टिस कृष्णा राव की अदालत से तुरंत सुनवाई की गुहार लगाई, जिस पर अब अदालत सोमवार को फैसला करेगी।

 

अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

justice

मुरली कृष्णन

जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों की चिंताएं घटाई हैं। आखिर इस फैसले से प्रवासी भारतीयों को क्या फायदा होगा? ALSO READ: खमेनेई के बाद ईरान: कितनी बदल जाएगी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था

 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा है। इस फैसले से हजारों भारतीय परिवारों को राहत मिली है। हालांकि, इस बात पर राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है कि कौन व्यक्ति अमेरिकी कहलाने का हकदार है। जब 30 जून को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया, तब सिएटल में रहने वाले एक भारतीय जोड़े, राजेश और नेहा ने काम पर निकलने से पहले नाश्ते की मेज पर इस खबर को पढ़ा।

 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश 2016 में एच-1बी वीजा पर दक्षिण भारतीय शहर बेंगलुरु से अमेरिका आए थे। एक साल बाद नेहा भी उनके साथ आ गईं। उनकी छह साल की बेटी आन्या का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। नेहा ने डीडब्ल्यू को बताया, “यह राहत की बात थी। महीनों तक हम सोचते रहे कि क्या इतनी बुनियादी चीज सच में बदल सकती है।”

 

इस फैसले के बाद उनकी बेटी तो अमेरिकी नागरिक बनी रहेगी, लेकिन उनके लिए कुछ खास नहीं बदला है। अमेरिका में रह रहे हजारों अन्य भारतीय पेशेवरों की तरह, वे भी सालों से लाइन में लगे हुए हैं और नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। राजेश ने कहा, “हम खुश हैं कि हमारी बेटी का भविष्य सुरक्षित हो गया है, लेकिन हमारी अपनी जिंदगी अब भी हर बार वीजा रिन्यू होने की चिंता के साथ गुजर रही है।” ALSO READ: जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत

 

राहत की सांस

जून के आखिर में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चे अमेरिकी नागरिक बने रहेंगे, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

 

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले साल एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से या अस्थायी वीजा पर रह रहे माता-पिता के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिक नहीं बनेंगे। उस आदेश पर फिलहाल रोक लगी हुई है और उस पर अदालत में कानूनी सुनवाई चल रही है।

 

सामाजिक और राजनीतिक संस्था ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, “यह फैसला इस बात की बेहतर तरीके से पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसे रहने और नागरिक कहलाने का अधिकार है।” पटेल ने एक बयान में कहा, “ट्रंप के कार्यकारी आदेश से जिन लोगों को सबसे सीधा खतरा था, उनमें भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के प्रवासी परिवार शामिल हैं। ये समुदाय वर्षों से वीजा बैकलॉग और अनिश्चित आव्रजन प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अक्सर उनके बच्चों का जन्म अमेरिका में हो जाता है, जबकि माता-पिता के पास स्थायी रूप से वहां रहने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं होता।”

 

‘प्यू रिसर्च सेंटर' की मई 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चीनी-अमेरिकियों के बाद भारतीय मूल के लोग एशिया के दूसरे सबसे बड़े प्रवासी समूह हैं। 2023 में अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 लाख लोग रहते थे, जो देश की एशियाई मूल की आबादी का लगभग 21 फीसदी है। अमेरिकी कंपनियों को कुशल विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने की सुविधा देने वाले ‘एच-1बी वीजा' को पाने में भारतीय सबसे आगे हैं। लेकिन, हर देश के लिए तय सीमा होने की वजह से, नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए सबसे लंबा इंतजार भी इन्हीं भारतीयों को करना पड़ता है।

 

सामुदायिक संगठनों का अनुमान है कि अमेरिका में अस्थायी वर्क वीजा पर रह रहे भारतीय माता-पिता के यहां लाखों बच्चे पैदा हुए हैं। कोर्ट के इस फैसले से अब उनकी नागरिकता और उससे जुड़े अधिकार सुरक्षित रहेंगे, जिनमें अमेरिकी पासपोर्ट और सोशल सिक्योरिटी नंबर भी शामिल हैं।

 

कर्मचारी अपना स्टेटस (कानूनी दर्जा) खराब होने के डर से नौकरी बदलने में हिचकिचाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, उनके जीवनसाथी (पति या पत्नी) को भी काम करने को लेकर कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

जो बच्चे अपने माता-पिता के सहारे यानी डिपेंडेंट के तौर पर अमेरिका आए थे, वे 21 साल के होते ही अपना कानूनी दर्जा खो सकते हैं, बशर्ते उनके माता-पिता को तब तक पक्का ग्रीन कार्ड न मिला हो। इस गंभीर समस्या को ‘एजिंग आउट' कहा जाता है। इस तरह के कठिन हालात के बीच, जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता ही उन कुछ चुनिंदा भरोसेमंद चीजों में से एक रही है, जिस पर ये परिवार पक्के तौर पर यकीन कर सकते हैं।

 

रोजगार और परिवार-आधारित इमिग्रेशन के विशेषज्ञ और अमेरिकी इमिग्रेशन अटॉर्नी राजकृष्ण एस। अय्यर ने डीडब्ल्यू से कहा, “यह अदालती फैसला इस पुराने संवैधानिक नियम को और मजबूत करता है कि जो कोई भी अमेरिका में पैदा हुआ है, वह वहां का नागरिक है। भले ही, उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए इसका मतलब है कि उनके बच्चों को जन्म के समय ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाएगी।” ALSO READ: फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता की सजा घटी लेकिन चुनौतियां नहीं

 

समाज को बांटने वाले मुद्दा

यह अदालती फैसला अमेरिकी राजनीति के सबसे ज्यादा विवादित और समाज को बांटने वाले सवालों में से एक को दोबारा चर्चा के केंद्र में ले आया है। दरअसल, सालों से ट्रंप और कई रूढ़िवादी नेता यह तर्क देते आ रहे हैं कि बिना किसी शर्त के मिलने वाली जन्म आधारित नागरिकता इमिग्रेशन सिस्टम के गलत इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए मौजूदा इमिग्रेशन सिस्टम का इस तरह जानबूझकर इस्तेमाल करना ही रूढ़िवादी नेताओं और इमिग्रेशन का विरोध करने वालों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।

 

ट्रंप के रूख का समर्थन करने वालों का कहना है कि जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने से ‘बर्थ टूरिज्म' को बढ़ावा मिलता है। इसमें विदेशी नागरिक खास तौर पर बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता मिल सके।

 

अय्यर ने कहा कि यह आपत्ति आम तौर पर एच-1बी वीजा रखने वाले लोगों के लिए नहीं जताई जाती है। उन्होंने बताया, “खास बात यह है कि रूढ़िवादी लोगों ने अमेरिका में कानूनी तौर पर आए प्रवासी कामगारों के बच्चों के जन्म पर बहुत कम आपत्ति जताई है।”

 

अय्यर के मुताबिक, एच-1बी वीजा रखने वाले लोग कानूनी तौर पर आए कामगार होते हैं। ये लोग टैक्स देते हैं और आम तौर पर इन्हें सरकारी संसाधनों पर बोझ नहीं माना जाता। उन्होंने कहा, “इसलिए, ऐसा लगता है कि उनका असली विरोध सिर्फ प्रवासियों के कानूनी दर्जे (इमिग्रेशन स्टेटस) को लेकर नहीं है। उनका गुस्सा इस बात पर ज्यादा है कि लोग कानूनी व्यवस्था को दरकिनार कर रहे हैं, देश में अवैध रूप से दाखिल हो रहे हैं या फिर ‘बर्थ टूरिज्म' (सिर्फ बच्चे को नागरिकता दिलाने के लिए यात्रा करना) के लिए वैध वीजा का इस तरह फायदा उठा रहे हैं जिसके लिए वह वीजा बनाया ही नहीं गया था।”

 

अय्यर कहते हैं कि जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम को लेकर अक्सर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां होती हैं। अमेरिका में पैदा हुए बच्चे 21 साल की उम्र से पहले अपने माता-पिता के परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते। इसका मतलब यह है कि बच्चे को जन्म से मिलने वाली नागरिकता, पूरे परिवार को तुरंत कानूनी दर्जा दिलाने का कोई सीधा रास्ता नहीं खोलती। वे संगठित रूप से होने वाले ‘ऑर्गनाइज्ड बर्थ टूरिज्म' के इक्का-दुक्का मामलों और उन परिवारों के बीच एक साफ अंतर देखते हैं, जो कंपनी के वीजा पर सालों से कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।

 

यह फर्क खासकर भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए अहम है। बिना दस्तावेजों वाले (अवैध) प्रवासियों के उलट, ज्यादातर भारतीय पेशेवर कानूनी तौर पर अमेरिका में दाखिल होते हैं, वहां ईमानदारी से टैक्स भरते हैं और नौकरी-आधारित दुनिया की सबसे लंबी इमिग्रेशन लिस्ट (बैकलॉग) का सामना करते हुए भी हमेशा अपना कानूनी दर्जा बनाए रखते हैं।

 

नई दिल्ली के एक वकील करन ठुकराल ने कहा कि भारतीय पेशेवरों को जबरदस्ती एक ऐसी बहस में घसीटा जा रहा है, जो असल में अवैध प्रवासियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी। उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, “इस फैसले से भारतीय एच-1बी वीजा वाले परिवारों के सामने बनी एक बड़ी अनिश्चितता दूर हो गई है। यह फैसला ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार या अस्थाई वीजा पर जीने की कड़वी हकीकत को नहीं बदलता। वे कानूनी तौर पर आए हुए पेशेवर हैं। सिस्टम के गलत इस्तेमाल की चिंताओं की कीमत अमेरिका में पैदा हुए बच्चों के संवैधानिक अधिकारों को छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।” ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर खत्म नहीं हुई है लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। इसके बजाय, इस फैसले ने उन परिस्थितियों को सीमित कर दिया है, जिनमें निचली अदालतें राष्ट्रपति की नीतियों को पूरे देश में लागू होने से रोक सकती हैं। जब तक इस संवैधानिक सवाल का कोई पक्का समाधान नहीं निकल जाता, तब तक ट्रंप के कार्यकारी आदेश को देश भर की अदालतों में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

 

अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर इस फैसले को किसी पक्के समाधान के बजाय एक तरह का भरोसा दिलाना मानती हैं। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “यह फैसला कई भारतीय परिवारों के लिए राहत की बात है, क्योंकि इससे अमेरिका में पैदा हुए बच्चों को अमेरिकी नागरिक के रूप में एक मजबूत कानूनी आधार (सुरक्षा) मिलता है।”

 

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन ट्रंप प्रशासन के आने के बाद से, अमेरिका अब प्रवासियों का पहले की तरह स्वागत नहीं कर रहा है। इसलिए कई प्रतिभाशाली भारतीय, जो पहले अमेरिका जाना अपना सबसे अच्छा विकल्प मानते थे, अब शायद अपना फैसला बदलने पर विचार कर सकते हैं।”

 

अनिश्चितता के बीच कैसी होती है जिंदगी

कई भारतीय पेशेवरों के लिए, अदालत का यह फैसला एक बहुत बड़ी समस्या के सिर्फ एक हिस्से को ही हल करता है।

 

नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए हर साल अलग-अलग देशों का एक तय कोटा होता है। इसकी वजह से भारतीय आवेदकों के लिए बहुत बड़ा बैकलॉग बन गया है, यानी उनके लिए इंतजार की अवधि काफी बढ़ गई है। अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक, 10 लाख से भी ज्यादा भारतीय यहां स्थायी तौर पर बसने के लिए लाइन में लगे हैं और इनमें से कुछ तो दशकों से इंतजार कर रहे हैं।

Top News 11 July: ट्रंप बोले- मेरी हत्या हुई तो ईरान पर बम गिरा देना, पीएम मोदी ने FTA को बताया मील का पत्थर

top news 11 july

Top News 11 July : अमेरिका राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश, अगर मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना। पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड से एफटीए को मील का पत्थर बताया। आज नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि। दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट कटने पर नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने किया हंगामा। स्पेन फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में पहुंचा। 11 जुलाई की बड़ी खबरें… 

 

मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना : ट्रंप

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि मैं काफी समय से उनके निशाने पर हूं। अगर मेरे साथ कुछ होता है तो मैंने ऐसे हमले के निर्देश दिए हैं जैसा ईरान ने पहले कभी देखा नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि अगर मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना।

 

न्यूजीलैंड से FTA मील का पत्थर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को दोनों देशों के संबंधों में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कम समय में समझौते को अंतिम रूप देने के लिए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा लेकर आई है।

 

नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि को शामिल करेंगे। महेंद्रगिरि में उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, रडार से बचने की क्षमता और उच्च स्तर का ऑटोमेशन शामिल है। यह युद्धपोत आधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस है। 

 

दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने किया हंगामा

दतिया में राज्य के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया। वे इस बात का विरोध कर रहे थे कि BJP ने उन्हें आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट नहीं दिया। इस घटना में लोगों के घायल होने की खबर है। कल रात उनके हज़ारों समर्थकों ने NH-44 को जाम कर दिया, जिससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफ़िक पूरी तरह ठप हो गया। ALSO READ: दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से समर्थक नाराज, NH-44 पर जाम लगाया, कई पार्षदों ने दिया इस्तीफा

 

स्पेन फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में

फाबियन रूइज और मिकेल मेरिनो के गोलों की मदद से स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। बेल्जियम की ओर से चार्ल्स डी केटेलारे ने एकमात्र गोल दागा। सेमीफाइनल में स्पेन का मुकाबला फ्रांस से होगा।

CM योगी का तंज, सपा अध्यक्ष भी भगवा पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं

Chief Minister Yogi Adityanath News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब धार्मिक आस्था का सम्मान किया जा रहा है। अयोध्या से सरयू का जल लेकर भदेश्वरनाथ धाम जाने वाले कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाती है, जबकि पहले कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी। आज श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखकर लगता है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी भगवा वस्त्र पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विपक्ष को हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने, जय श्रीराम बोलने वालों पर कार्रवाई कराने, परशुरामपुर दंगे और धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को बस्ती के हर्रैया व कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में 504 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 77 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र/ स्वीकृतिपत्र और सहायता सामग्री का वितरित किया।

सपा के जिला अध्यक्ष का सीएम योगी ने सुनाया किस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनाने और अवैध कब्जों पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और विकास में लगाया जा रहा है। उस समय वक्फ बोर्ड के नाम पर गरीबों, दलितों और वंचितों की जमीनों पर कब्जे किए जाते थे और समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस के शासन में यह आम बात थी। एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब समाजवादी पार्टी के एक जिला अध्यक्ष स्वयं उनके पास शिकायत लेकर आए थे कि उनके घर के पास कब्रिस्तान के नाम पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भेजकर कब्जा हटवाया और उनकी जमीन बचाई। उस समय सपा सरकार को केवल कब्रिस्तान दिखाई देता था, आम जनता नहीं।

सपा के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रहती थीं, जबकि आज शिलान्यास और लोकार्पण की परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देती हैं। उन्होंने हर्रैया में बन रहे मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्री-प्राइमरी से 12वीं तक आधुनिक शिक्षा एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। प्रत्येक विद्यालय पर 27 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जहां स्मार्ट क्लास, आधुनिक भवन, फर्नीचर और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

 

समाजवादी पार्टी के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया था। किसानों को सुविधाएं नहीं मिलती थीं, गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था और बिजली व्यवस्था इतनी खराब थी कि बस्ती में लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता बिजली संकट से जूझ रही थी जबकि सैफई में फिल्मी कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।

राम मंदिर को लेकर विपक्ष कहता था कि खून की नदियां बहेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हनुमानगढ़ी की पवित्र सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम इन्हीं लोगों ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने हर प्रमुख धर्मस्थल को विवादित बनाने का प्रयास किया और अयोध्या में भी लगातार विवाद खड़ा करने की राजनीति की। एक समय ऐसा था जब अयोध्या में कोई जय श्रीराम का उद्घोष कर देता था तो उसके खिलाफ लाठी और गोली चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले कहते थे कि यदि मंदिर बना तो खून की नदियां बहेंगी। लेकिन हमने कहा था कि एक मच्छर भी नहीं मरेगा और आज पूरा देश देख रहा है कि राम मंदिर का भव्य निर्माण हुआ, प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई और कहीं कोई अशांति नहीं हुई। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को कोई नहीं रोक पाया और यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था, विश्वास और संकल्प की जीत है।

सीएम ने दुर्योधन के शासन से की सपा सरकार की तुलना  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश में यह कहावत प्रचलित हो गई थी, देख सपाई, बिटिया घबराई। उस समय महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी और कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। जब सरकार ही बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो उसकी तुलना दुर्योधन के शासन से ही की जा सकती है। पहले बस्ती सहित प्रदेश में दुर्गा पूजा, होली, रामनवमी जैसे पर्वों पर दंगे होते थे। परशुरामपुर दंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और गरीबों की बस्तियां जला दी गईं, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस समय वे गोरखपुर से आकर पीड़ितों के बीच उनका दर्द बांटने आए थे। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ और सभी त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए हैं। अब अपराधी कानून से डरते हैं।

करीब 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया

सीएम योगी ने कहा कि मखौड़ा धाम वही पावन भूमि है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था और उसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया। मखौड़ा धाम, बाबा भदेश्वरनाथ धाम, तपसी धाम तथा महान साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्मस्थली इस क्षेत्र की गौरवशाली पहचान हैं। जनता जब अच्छे जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, तभी विकास धरातल पर दिखाई देता है। मखौड़ा धाम, भदेश्वरनाथ धाम और तपसी धाम का तेजी से विकास कराया जा रहा है। कर्ण मंदिर विवाद का समाधान होने के बाद वहां भी सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि 84 कोसी परिक्रमा का मार्ग मखौड़ा धाम से शुरू होता है और इसे श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ अयोध्या रिंग रोड के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकारें 84 कोसी, 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा तक रोकती थीं, जबकि भाजपा सरकार धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए तीर्थ स्थलों का विकास कर रही है। प्रदेश में लगभग 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया जा चुका है और सरकार बदलने के साथ परिणाम भी बदल गए हैं। भाजपा सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर चल रही है।

 

विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित बस्ती का निर्माण किया जा रहा है। बस्ती में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मखौड़ा धाम और भदेश्वरनाथ धाम सहित अनेक विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर्रैया और बस्ती में पिछले नौ वर्षों में जितना विकास हुआ, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक अजय सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र, विधायक दूध राम, विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला, दयाराम चौधरी, रवि सोनकर आदि मौजूद रहे।