यूपी में सरकारी भर्ती हुई स्मार्ट, योगी सरकार ने शुरू किया OTR सिस्टम, अब बार-बार फॉर्म भरने की जरूरत नहीं

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी सुविधा देते हुए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से 14 जुलाई 2026 से वन टाइम रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू कर दी है। यह सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क है और भविष्य में होने वाली पीईटी सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाएगी। सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को तकनीक आधारित, तेज और अभ्यर्थी हितैषी बनाना है।

 

एक बार दर्ज करना होगा विवरण

 

ओटीआर व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों को अपना व्यक्तिगत विवरण केवल एक बार दर्ज करना होगा। इसके बाद भविष्य की भर्तियों में वही जानकारी स्वतः उपलब्ध रहेगी और बार-बार फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अभ्यर्थियों को मोबाइल नंबर और ई-मेल के माध्यम से ओटीआर सत्यापन कराना होगा। साथ ही नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, जाति, पता और शैक्षणिक योग्यता जैसी जानकारी दर्ज करनी होगी। छह माह के भीतर की रंगीन फोटो और निर्धारित प्रारूप में हस्ताक्षर भी अपलोड करने होंगे।

 

पीईटी स्कोर का मिलेगा पूरा लाभ

 

योगी सरकार की इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पीईटी परीक्षा का स्कोर तीन वर्ष तक मान्य रहेगा। यदि किसी अभ्यर्थी के पास एक से अधिक वैध पीईटी स्कोर होंगे तो भविष्य की भर्ती में वह अपने सर्वाधिक अंक वाले स्कोर का उपयोग कर सकेगा। इससे योग्य अभ्यर्थियों को बेहतर अवसर मिलेंगे।

 

पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल और पारदर्शी

 

ओटीआर प्रणाली भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से अभ्यर्थियों का डेटा सुरक्षित रहेगा और आवेदन प्रक्रिया में त्रुटियों की संभावना कम होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ओटीआर नंबर जारी होने के बाद दर्ज विवरण में संशोधन नहीं किया जा सकेगा, इसलिए अभ्यर्थियों को सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरनी होंगी।

 

युवाओं के लिए पूरी तरह नि:शुल्क सुविधा

 

योगी सरकार ने इस सुविधा को सभी नए और पुराने अभ्यर्थियों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क रखा है। इससे आर्थिक बोझ कम होगा और अधिक से अधिक युवा आसानी से भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। तकनीक आधारित यह पहल सरकारी नौकरियों की आवेदन प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाते हुए लाखों युवाओं को सीधा लाभ पहुंचाएगी। ओटीआर व्यवस्था को उत्तर प्रदेश में डिजिटल सुशासन और युवा हितैषी प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी घोषणा 

 

वन टाइम रजिस्ट्रेशन की अवधारणा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2023 में बढ़ावा दिया था। उस समय मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के लिए ओटीआर पोर्टल और नई वेबसाइट का लोकार्पण करते हुए कहा था कि वन टाइम रजिस्ट्रेशन व्यवस्था अभ्यर्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल तथा सुगम बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।

यूपी की हर्बल टी की सुगंध पहुंची अमेरिका-यूरोप

Vidur Herbal Tea

Vidur Herbal Tea: ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब जड़ी-बूटियों से तैयार ऑर्गेनिक हर्बल टी के जरिए विदेशों में भी अपनी पहचान बना रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार से मिल रहे प्रोत्साहन और योजनाओं के सहयोग से शुरू हुआ यह प्रयास आज सफल महिला उद्यमिता का मॉडल बन चुका है। इस 'विदुर हर्बल टी' की फ्रेंचाइजी की मांग अब अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से हो रही है, जबकि दिल्ली, पंजाब, ओडिशा, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में यह बड़ी मात्रा में मंगाई जा रही है।

 

एक लाख के ऋण से शुरू हुआ सफल कारोबार

बिजनौर के ब्लॉक कोतवाली गांव टांडा मैदास लखी वाला की बबिता रानी बताती हैं कि योगी सरकार की योजना से समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत समूह ने एक लाख रुपये का ऋण लेकर 'विदुर हर्बल टी' की शुरुआत की थी। आज समूह की 10 महिलाएं मिलकर पूरी तरह ऑर्गेनिक हर्बल टी तैयार कर रही हैं। इस उद्यम ने महिलाओं को नियमित आय के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का नया माध्यम भी तैयार किया है। इसके जरिए समूह की महिलाएं लखपति बन रही हैं।

जड़ी-बूटियों से तैयार होती है खास हर्बल टी

विदुर हर्बल टी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक संरचना है। इसे ऑर्गेनिक लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, जामुन, कच्ची हल्दी, अमरूद की पत्ती, दालचीनी, तुलसी, हरी इलायची और सौंफ से तैयार किया जाता है। यह दो प्रकार से तैयार होती है। पहली पारंपरिक जड़ी-बूटियों से बनी ऑर्गेनिक हर्बल टी और दूसरी 'अर्जुना हृदय शक्ति', जिसे दूध और पानी दोनों के साथ तैयार किया जा सकता है।

 

प्रदेश से बाहर भी तेजी से बढ़ रहा कारोबार

तत्कालीन सीडीओ बिजनौर और वर्तमान में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने इन ग्रामीण महिलाओं को योगी सरकार की योजनाओं से जोड़ा। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह की ये महिलाएं आज आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम हुई हैं। 

 

विदुर हर्बल टी का कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है। बिजनौर में 35 आउटलेट और कैफे में इसका प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा मुरादाबाद में भी महिलाओं द्वारा दो विदुर हर्बल टी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। हाल ही में मुरादाबाद के सिविल लाइन स्थित कचहरी गेट के पास नया विदुर हर्बल टी सेंटर शुरू किया गया है। जल्द ही मुरादाबाद में 5 और कैफे की शुरुआत करने की तैयारी है।

Vidur Herbal Tea

महिलाएं ही तैयार करती हैं यहां का हर उत्पाद

इस पहल की एक और विशेषता यह है कि विदुर हर्बल टी से जुड़े सभी उत्पादों का निर्माण स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही करती हैं। उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथ में है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को भी नई पहचान मिली है।

ग्रामीण आजीविका मिशन बना महिला सशक्तीकरण का माध्यम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। विदुर हर्बल टी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं स्थानीय संसाधनों के आधार पर ऐसा उद्यम खड़ा कर सकती हैं, जो देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना सके।

 

PoK में विरोध प्रदर्शन पर MEA का बड़ा बयान, Hormuz और Pakistan को लेकर क्या है भारत का प्लान

भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि ये प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में दमनकारी प्रशासन का सीधा परिणाम हैं।

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि स्थानीय लोगों की जायज शिकायतों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।

 

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में चल रहे प्रदर्शन पाकिस्तान के दशकों पुराने शोषण, मौलिक अधिकारों के हनन और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में दमनकारी शासन का परिणाम हैं। स्थानीय लोगों की वास्तविक समस्याओं को दूर करने के बजाय पाकिस्तान ने पुलिस की बर्बरता का सहारा लिया है। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और कृत्यों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराएगा।”

ALSO READ: 7 Electric Scooters, कम हाइट वालों को ट्रैफिक में भी नहीं होगी परेशानी, देखें List

PoK भारत का अभिन्न हिस्सा

 

भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत लगातार पाकिस्तान पर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों के उल्लंघन और उनके अधिकारों के दमन का आरोप लगाता रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी जताई चिंता

विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। MEA ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

 

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाल ही में दो वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत पर भारत ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

ALSO READ: WhatsApp यूजरनेम फीचर पर भारत में लगी रोक, सुरक्षा चिंताओं पर Meta ने क्या कहा

खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीयों की मौत

सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि 28 फरवरी 2026 से अब तक खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन भारतीय अभी भी लापता हैं।

 

शेख हसीना की वापसी पर भारत का जवाब

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित वापसी के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। यदि प्रत्यर्पण (Extradition) से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो उसका निपटारा कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

 

नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर क्या बोला भारत?

भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने के सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्यर्पण की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

ALSO READ: सोनम वांगचुक को मिला विपक्ष का साथ, केजरीवाल-अखिलेश ने की यह अपील, क्‍या अब तोड़ेंगे अनशन?

निज्जर हत्याकांड पर भी भारत की प्रतिक्रिया

कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) द्वारा लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड से जोड़ने पर भारत ने कहा कि RCMP की टिप्पणियां हाल ही में सार्वजनिक हुए अमेरिकी अभियोग (US Indictment) के अनुरूप हैं। भारत आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

7 Electric Scooters, कम हाइट वालों को ट्रैफिक में भी नहीं होगी परेशानी, देखें List

electonic scooter

अगर आपकी हाइट कम है और इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो सीट हाइट (Seat Height) सबसे अहम चीजों में से एक होती है। कम सीट हाइट होने से स्कूटर रोकते समय दोनों पैर आसानी से जमीन पर टिक जाते हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और शहर के ट्रैफिक में बार-बार रुकने और चलने के दौरान संतुलन बनाए रखना आसान हो जाता है। जानिए 7 स्कूटर्स- 

ALSO READ: WhatsApp यूजरनेम फीचर पर भारत में लगी रोक, सुरक्षा चिंताओं पर Meta ने क्या कहा

1. Bajaj Chetak (30 और 35 Series) – सीट हाइट: 775mm

 

Bajaj Chetak भारत के सबसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटरों में से एक है। C3001, C3501, C3502 और C3503 जैसे सभी वेरिएंट्स में 775mm की सीट हाइट मिलती है। इन मॉडलों में बैटरी, रेंज और फीचर्स का अंतर है, लेकिन सीट की ऊंचाई समान रहती है।

ALSO READ: Electric Scooter : बरसात में अपने EV scooter का कैसे रखें ध्यान, जानिए 5 iMP टिप्स

2. TVS iQube – सीट हाइट: 770mm

 

TVS iQube फिलहाल भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है। इसके सभी वेरिएंट्स—iQube, iQube S और iQube ST—में 770mm सीट हाइट दी गई है, जिससे यह छोटे कद के राइडर्स के लिए अच्छा विकल्प बन जाता है।

 

3. Kinetic DX – सीट हाइट: 770mm

 

Kinetic DX का डिजाइन पुराने Kinetic Honda DX से प्रेरित है। इसमें रेट्रो स्टाइलिंग के साथ मेटल बॉडी दी गई है। इसकी 770mm सीट हाइट के अलावा इसमें 37 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है, जो इस सेगमेंट में काफी बड़ा माना जाता है।

ALSO READ: Electric scooter : मेटल बॉडी वाले सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर, दाम सुनेंगे तो चौंक जाएंगे

4. Yamaha EC-06 – सीट हाइट: 770mm

 

Yamaha EC-06 का प्लेटफॉर्म River Indie पर आधारित है, लेकिन इसका डिजाइन अलग है। इसमें 770mm सीट हाइट और 24.5 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है।

 

5. Suzuki e-Access – सीट हाइट: 765mm

 

Suzuki e-Access की 765mm सीट हाइट इसे और भी आरामदायक बनाती है। इसमें की-लेस एक्सेस, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 95 किमी की दावा की गई IDC रेंज मिलती है। हालांकि इसकी कीमत करीब 1.88 लाख रुपये है, जो कई प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा है।

 

6. Ampere Nexus – सीट हाइट: 765mm

 

Ampere Nexus EX और ST दोनों वेरिएंट्स में उपलब्ध है। दोनों में 765mm सीट हाइट दी गई है। अंतर केवल डिस्प्ले और कनेक्टिविटी फीचर्स का है।

ALSO READ: Electric scooter खरीदने से पहले जान लें कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? रेंज, चार्जिंग और लाइफ में कितना फर्क और कैसे करें चेक

7. TVS Orbiter – सीट हाइट: 763mm

 

TVS Orbiter के V1 और V2 वेरिएंट्स में 763mm सीट हाइट मिलती है। दोनों मॉडलों में बॉडी डिजाइन समान है, जबकि बैटरी और कनेक्टिविटी फीचर्स अलग-अलग हैं।

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर भारत में लगी रोक, सुरक्षा चिंताओं पर Meta ने क्या कहा

whatsapp

भारत सरकार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच Meta ने भारत में WhatsApp के बहुप्रतीक्षित 'Username' फीचर की लॉन्चिंग फिलहाल रोक दी है। कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को आश्वासन दिया है कि जब तक सरकार के साथ सभी आवश्यक चर्चाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह फीचर भारत में जारी नहीं किया जाएगा।

 

सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि WhatsApp पर यूजरनेम सिस्टम लागू होने से यूजर सुरक्षा, साइबर अपराधों की जांच और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल मंत्रालय कंपनी की ओर से भेजे गए विस्तृत जवाब की समीक्षा कर रहा है, जिसमें फीचर की आवश्यकता और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई है।

क्या है WhatsApp का Username फीचर?

WhatsApp एक ऐसा फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, जिससे यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह सुविधा Telegram और Signal की तरह होगी, जहां हर यूजर एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेगा और उसी के जरिए दूसरे लोग उससे संपर्क कर पाएंगे।

 

Meta का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक नहीं करना पड़ेगा। हालांकि भारत सरकार को आशंका है कि इससे साइबर अपराधियों की पहचान करना और धोखाधड़ी के मामलों की जांच करना मुश्किल हो सकता है।

 

सरकार को किस बात की चिंता?

सरकार का मानना है कि अगर मोबाइल नंबर की जगह केवल यूजरनेम का इस्तेमाल होने लगे, तो इसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी फिशिंग, फर्जी पहचान (Impersonation), डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराध को अंजाम दे सकते हैं। 1 जुलाई को सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक वह दुरुपयोग रोकने की स्पष्ट योजना नहीं बताती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।

Meta ने बताए सुरक्षा उपाय

 

Meta का कहना है कि WhatsApp पर यूजरनेम फीचर लागू होने के बावजूद सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। कंपनी के अनुसार—

 

किसी यूजर से चैट करने के लिए उसका सटीक यूजरनेम जानना जरूरी होगा।

यूजरनेम का अनुमान लगाकर मैसेज भेजने या स्पैम करने की अनुमति नहीं होगी।

संदिग्ध गतिविधियों और ब्रूट-फोर्स (Brute Force) हमलों की पहचान कर उन्हें रोकने के लिए विशेष सिस्टम लगाए जाएंगे।

सरकारी संस्थानों, सेलिब्रिटी और आधिकारिक संगठनों के लिए रिजर्व यूजरनेम उपलब्ध कराए जाएंगे।

किसी की पहचान की नकल करने वाले फर्जी या भ्रामक यूजरनेम को ब्लॉक किया जाएगा।

मोबाइल नंबर रहेगा अनिवार्य

 

Meta ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूजरनेम फीचर आने के बाद भी WhatsApp अकाउंट बनाने और चलाने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी रहेगा। यानी यूजरनेम केवल संपर्क का एक वैकल्पिक माध्यम होगा, मोबाइल नंबर का पूर्ण विकल्प नहीं।

अभी सरकार के फैसले का इंतजार

फिलहाल MeitY Meta के जवाबों की समीक्षा कर रहा है। यूजरनेम फीचर भारत में कब लॉन्च होगा, इसका फैसला सरकार और Meta के बीच चल रही बातचीत के बाद ही लिया जाएगा। गौरतलब है कि केवल WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram, Signal और Arattai जैसे प्लेटफॉर्म भी सरकार की निगरानी में हैं, क्योंकि इन सेवाओं में पहले से यूजरनेम आधारित पहचान की सुविधा उपलब्ध है।

नासिक में वॉटरफॉल घूमने गए परिवार का 15 KM पीछा किया, मारपीट की, कार भी फोड़ी

nashik car attack

महाराष्ट्र के नासिक में कुछ लोगों ने वॉटरफॉल पर घूमने गए एक परिवार का लगभग 15 किलोमीटर तक पीछा किया और उनके साथ मारपीट की। उनकी गाड़ी पर रॉड से हमले किए। परिवार की एक महिला ने छेड़छाड़ का विरोध किया था। मामले में 9 आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। ALSO READ: रूह कंपा देगा इंदौर का ये हत्‍याकांड, पत्नी को तड़पाकर मारा, नए कपड़े पहने, तिलक लगाया, ऑनलाइन मंगाया था 7 लेयर कट चाकू

 

इस दिल दहला देने वाली घटना से महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर कानून-व्यवस्था और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यटक परिवार द्वारा छेड़छाड़ का विरोध करने से नाराज बदमाशों ने न केवल उन पर बेरहमी से हमला किया, बल्कि कई किलोमीटर तक उनकी कार का पीछा करते हुए लोहे की सरियों और डंडों से हमला किया तथा कार के शीशे भी तोड़ दिए। घटना के बाद डरे-सहमे परिवार ने सीधे पुलिस थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

क्या है मामला? 

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, नासिक के भागवत परिवार के 8 सदस्य रविवार को इगतपुरी कस्बे में भवाली डैम गए थे। जब परिवार वापस लौटने की तैयारी कर रहा था, तभी दो स्थानीय युवकों ने परिवार की एक युवती के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और उस पर अश्लील टिप्पणियां करने लगे। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो आरोपी वहां से चला गया और कुछ समय के लिए स्थिति सामान्य हो गई।

 

पीड़ित महिला के अनुसार, विवाद शांत होने के कुछ ही देर बाद 8 से 10 स्थानीय युवकों का एक समूह वहां पहुंच गया। वे चिल्लाते हुए बोले, “तुमने हमारे लोगों से झगड़ा क्यों किया?” इसके बाद जब परिवार कार से वहां से निकला, तो बदमाशों ने बाइक पर फिल्मी अंदाज में उनका पीछा करना शुरू कर दिया। ALSO READ: राम मंदिर दान चोरी कांड पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बड़ा खुलासा

 

आरोपियों ने करीब 15 से 20 किलोमीटर तक परिवार की कार का पीछा किया। रास्ते में कई बार कार को ओवरटेक कर रोकने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने चलती कार पर लोहे की सरियों और भारी लकड़ी के डंडों से लगातार हमला किया, जिससे कार के पीछे और साइड के शीशे टूट गए। परिवार किसी तरह जान बचाने में सफल रहा।

 

पुलिस ने 9 आरोपियों को हिरासत में लिया

SP धोंडोपांत स्वामी ने कहा कि शुरुआती FIR दर्ज होने के बाद, हमने वीडियो रिव्यू और तकनीकी जांच समेत पूरी जांच-पड़ताल की और अब तक 9 आरोपियों की पहचान कर ली है। हालांकि शुरुआती FIR में 6 या 7 संदिग्धों के नाम थे, लेकिन हमने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन लोगों को भी इसमें शामिल किया है जिन्होंने उन्हें पनाह दी या जो उनके साथी थे। हमने अब 9 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। आगे की कानूनी कार्रवाई अभी चल रही है।
 

भाजपा विधायक ने क्या कहा?

भाजपा विधायक देवयानी फरांडे ने कहा कि स्थानीय गुंडों द्वारा पर्यटकों पर हमले के बाद, नासिक ग्रामीण एसपी ने मुख्यमंत्री के आदेश पर कार्रवाई करते हुए हमलावरों को 24 घंटे के भीतर जेल भेज दिया जाए। नासिक ग्रामीण पुलिस पर्यटकों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति से सख्ती से निपटेगी।

 

लखनऊ में शहीद पथ पर बनेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, नितिन गडकरी ने दिए डीपीआर बनाने के निर्देश

new elevated corridor will be built on Shaheed Path in Lucknow

– योगी सरकार की कानून व्यवस्था और विकास मॉडल की सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की सराहना

– रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले- योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों पर

– शहीद पथ पर एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक बनेगा 23 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

– केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गिनाईं यूपी में भावी योजनाएं

Uttar Pradesh News : लखनऊ में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए शहीद पथ पर बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साकार होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक लगभग 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं। नितिन गडकरी ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर तक भूमि पूजन कर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। दोनों वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने योगी सरकार की कार्यशैली की खुलकर सराहना की। 

 

सोमवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,850 करोड़ रुपए से अधिक की 3 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। 

 

शहीदपथ पर वाहन चालकों को जाम से मिलेगी राहत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र सरकार थी, तब उनके सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए शहीद पथ का शिलान्यास हुआ था। आज यही शहीद पथ लखनऊ की लाइफलाइन बन चुका है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए अब इसके ऊपर एलिवेटेड रोड बनाना समय की आवश्यकता है, जिससे वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में इसी कॉरिडोर पर मेट्रो भी संचालित की जाए, ताकि लोगों को तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सके।

ALSO READ: योगी के नेतृत्व में सबसे बड़ा जल संरक्षण अभियान, देश के 27% अमृत सरोवर यूपी में

तीन लेयर फ्लाईओवर बनेगा दुनिया के आकर्षण का केंद्र

नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ में प्रस्तावित तीन लेयर एलिवेटेड फ्लाईओवर विश्व स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस परियोजना में आधुनिक मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे सड़क और सार्वजनिक परिवहन दोनों को मजबूती मिलेगी। किसी भी राज्य के विकास की नींव मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होती है। पानी, बिजली, परिवहन और संचार व्यवस्था बेहतर होने से उद्योग, व्यापार और निवेश बढ़ता है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी व बेरोजगारी कम होती है।

 

लखनऊ-सीतापुर सिक्स लेन हाईवे सहित कई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि लखनऊ से सीतापुर तक प्रस्तावित छह लेन राजमार्ग को भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तत्काल स्वीकृति दे दी है और जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 से 60 हजार करोड़ रुपए की नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

अगले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग पांच लाख करोड़ रुपए के विकास कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ के किसान पथ पर सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा अयोध्या-गोंडा बाईपास, आनंदनगर-महराजगंज बाईपास, पडरौना-तमकुही बाईपास तथा दादरी-लालकुआं छह लेन एलिवेटेड रोड जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

ALSO READ: योगी सरकार का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर गिफ्ट, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू, 45 मिनट में होगा सफर

रक्षा मंत्री और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी की सराहना की

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास पूरे देश में चर्चा का विषय है। किसी भी प्रदेश के विकास की पहली शर्त मजबूत कानून व्यवस्था होती है और योगी सरकार ने यह स्थापित करके दिखाया है। लखनऊ के विकास से जुड़े हर प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया और आने वाले समय में लखनऊ के आसपास बड़े उद्योग स्थापित होंगे।

 

यूपी में सीएम योगी ने समाप्त किया गुंडाराजः नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत कर लोगों का विश्वास जीता और गुंडाराज को समाप्त किया। किसी भी देश और राज्य के विकास में चार बातें महत्वपूर्ण होती हैं।

सबसे पहली आवश्यकता मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की होती है। इंफ्रास्ट्रक्चर के चार प्रमुख आधार हैं वाटर, पावर, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन, जहां ये चारों व्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, वहां व्यापार, उद्योग और कारोबार तेजी से बढ़ते हैं।

ALSO READ: भदरसा अब 'भरत नगर', मुख्यमंत्री योगी के फैसले से भरत जी की तपोभूमि को मिला सम्मान

इसके साथ ही पूंजी निवेश आता है। जहां व्यापार, उद्योग और निवेश बढ़ता है, वहां रोजगार का सृजन होता है और जहां रोजगार का निर्माण होता है, वहां गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी स्वतः दूर हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है। 

PM मोदी से मिलना चाहते हैं अरविंद केजरीवाल, पत्र लिखकर आखिर क्‍यों मांगा समय?

Arvind Kejriwal wants to meet Prime Minister Narendra Modi

Arvind Kejriwal News : E-20 पेट्रोल को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्‍होंने अपने पत्र में मांग की है कि E-20 और सामान्य पेट्रोल, दोनों का विकल्प उपलब्ध कराया जाए और E-20 पेट्रोल सस्ता किया जाए। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय भी मांगा है, ताकि वे जनता के अनुभवों और तकनीकी समस्याओं को विस्तार से बता सकें। E20 पेट्रोल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज 'स्टॉप E20 पेट्रोल' अभियान भी शुरू किया।

 

PM मोदी से इसलिए मिलना चाहते हैं केजरीवाल

E-20 पेट्रोल को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्‍होंने अपने पत्र में मांग की है कि E-20 और सामान्य पेट्रोल, दोनों का विकल्प उपलब्ध कराया जाए और E-20 पेट्रोल सस्ता किया जाए। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय भी मांगा है, ताकि वे जनता के अनुभवों और तकनीकी समस्याओं को विस्तार से बता सकें।

ALSO READ: जस्टिस स्वर्णकांता ने किया बहिष्कार तो माने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया ने भी की हां

केजरीवाल ने लोगों से की यह अपील

उन्होंने कहा, मैं जनता के बीच गया हूं और उनकी समस्याएं सुनी हैं। साथ ही केजरीवाल ने लोगों से E-20 से जुड़ी समस्याओं के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील भी की है। केजरीवाल ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की और कहा कि वह जंतर-मंतर जाकर उनसे मुलाकात करेंगे।

ALSO READ: ED की रेड पर भड़के अरविंद केजरीवाल, बोले- BJP जॉइन करो या जेल जाओ, भाजपा ने किया पलटवार

वाहन के माइलेज को लेकर की यह मांग

केजरीवाल ने संसद के मानसून सत्र में INDIA गठबंधन के साथ E-20, NEET और अन्य मुद्दों पर संसद से सड़क तक लड़ाई लड़ने की बात भी कही। केजरीवाल ने कहा कि पूरे देश में लोग ई20 पेट्रोल से नाराज हैं। वाहन मालिकों का कहना है कि ई20 भरने के बाद माइलेज काफी कम हो गया है और इंजन के पार्ट्स खराब हो रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि माइलेज कम होने के कारण वाहन के दाम भी कम होने चाहिए।

ALSO READ: E20 पेट्रोल पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, बोले- इथेनॉल से मुझे कोई निजी फायदा नहीं, वाहन खराब होने के आरोप भी खारिज

केजरीवाल ने शुरू किया 'स्टॉप E20 पेट्रोल' अभियान

E20 पेट्रोल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज 'स्टॉप E20 पेट्रोल' अभियान भी शुरू किया। उन्होंने कहा कि लोग StopE20petrol.com पर जाकर हस्ताक्षर करके सरकार से अपील और शिकायत कर सकते हैं।

ALSO READ: E20 पेट्रोल से कितना घटेगा माइलेज, पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया यह जवाब

उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को विकल्प दे और उनकी चिंताओं का सम्मान करे। पिछले दिनों उन्होंने इसकी घोषणा की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की परेशानियों को नज़रअंदाज़ कर रही है और उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है।

भारत में इंजीनियर बनने का सपना फीका क्यों पड़ रहा है?

Engineering Colleges Closing in India

समीरात्मज मिश्र

एक समय इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना एक सुरक्षित कारोबार माना जाता था। आज उनमें से कई खाली हैं या बंद हो रहे हैं। आखिर ऐसा क्या बदला कि इंजीनियर बनने का सपना लाखों युवाओं के लिए पहले जैसा आकर्षक नहीं रहा? ALSO READ: पर्यावरण संरक्षण में क्यों पिछड़ रहा है भारत

 

करीब डेढ़ दशक पहले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता था। हर साल हजारों छात्र बीटेक में दाखिला लेते थे और निजी कॉलेजों का तेजी से विस्तार हो रहा था। लेकिन अब वही संस्थान छात्रों के इंतजार में खाली पड़े हैं। कई कॉलेज बंद हो चुके हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं। एक समय जिस तकनीकी शिक्षा को रोजगार की गारंटी माना जाता था, वही मॉडल आज सवालों के घेरे में है।

 

यही नहीं, इंजीनियरिंग की महंगी डिग्री लेने के बाद छात्रों को या तो बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है या फिर बहुत कम तनख्वाह वाली नौकरियां मिलती हैं। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियरिंग और एमबीए जैसे तमाम अन्य तकनीकी संस्थान धीरे-धीरे बंद होते जा रहे हैं।

 

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी एआईसीटीई की एक ताजा रिपोर्ट ने न सिर्फ इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक गंभीर चेतावनी दी है बल्कि देश के शैक्षिक परिवेश और बेरोजगारी की स्थिति पर भी सोचने को मजबूर किया है। एआईसीटीई के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देश भर में 58 से ज्यादा इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

 

जिन राज्यों में ये कॉलेज बंद हुए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष पर हैं। इन दोनों राज्यों में 12-12 संस्थान बंद हुए हैं जबकि मध्य प्रदेश में आठ और तेलंगाना और पंजाब में चार-चार संस्थान बंद हुए हैं। इन 58 संस्थानों में से तीन सरकारी मदद वाले थे, जबकि बाकी निजी तौर पर संचालित हो रहे थे। ALSO READ: अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

 

क्यों बंद हो रहे हैं कॉलेज?

दरअसल, एआईसीटीई उन स्थितियों में किसी संस्थान को बंद करने का आदेश देती है जब वहां छात्रों का दाखिला लगातार कम हो रहा हो, संस्थान में स्वीकृत संख्या में शिक्षकों की कमी हो और इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन के नियमों का सही तरीके से पालन न हो रहा हो।

 

एआईसीटीई भारत में तकनीकी शिक्षा के लिए कानूनी तौर पर बनी राष्ट्रीय संस्था और नियामक है। यह इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे कार्यक्रमों की देख-रेख करती है और गुणवत्ता और मानक बनाए रखने की निगरानी करती है।

 

नोएडा के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनेकिल इंजीनियरिंग पढ़ाने वाले एक शिक्षक नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि चार साल की पढ़ाई के दौरान एक छात्र औसतन आठ-दस लाख रुपये खर्च करता है लेकिन इस खर्च के अनुरूप उन्हें नौकरी नहीं मिलती।

 

उनके मुताबिक, “कई कॉलेजों की फीस तो और भी ज्यादा है। चार साल में इंजीनियर बनकर जब छात्र बाहर जाते हैं तो उन्हें 15-20 हजार महीने की नौकरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। यही नहीं, इसके बाद वो फिर उन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं जिसके लिए सिर्फ स्नातक की अर्हता होती है। तो धीरे-धीरे पेरेंट्स को भी लगता है कि बीटेक कराने से फायदा ही क्या?” ALSO READ: पश्चिम बंगाल: पुलिस मुठभेड़ में अभियुक्त की मौत से उठे सवाल

 

समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है

यानी समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है, बल्कि चार साल की पढ़ाई पर होने वाले निवेश और उससे होने वाले लाभ या रिटर्न के बिगड़ते समीकरण की भी है। दीपाली राज मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं। नोएडा के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। वो बताती हैं, “कैंपस प्लेसमेंट में जो ऑफर मिले, उनकी सैलरी चार साल की पढ़ाई पर हुए खर्च के मुकाबले बहुत कम थी। इसलिए मैंने बैंकिंग की तैयारी शुरू कर दी। कम से कम वहां नौकरी की स्थिरता तो है”

 

दीपाली पिछले तीन साल से तैयारी में हैं लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। दीपाली कहती हैं कि उनकी तरह हजारों की संख्या में इंजीनियरिंग करने वाले छात्र इन परीक्षाओं की तैयारी क रहे हैं। वजह यह कि कम से कम स्थाई नौकरी तो मिल जाएगी, बीटेक की डिग्री में इसकी गारंटी नहीं है।

 

प्राइवेट संस्थानों के बंद होने के पीछे और भी कई कारण हैं। जानकारों के मुताबिक, एक तो ये अभी भी पुराने पाठ्यक्रमों के हिसाब से चल रहे हैं जबकि आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के जमाने में चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं। इसके अलावा बीटेक के पाठ्यक्रमों का विकल्प अन्य पाठ्यक्रमों में भी है जिन्हें पूरा करने में समय भी कम लगता है और खर्च भी।

 

गाजियाबाद के एबीईएस कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर आदित्य टंडन बताते हैं, “बीटेक में भीड़ बढ़ गई है। डेटा साइंस में भरमार हो गई है और इसमें सिर्फ बीटेक ही नहीं चाहिए, दूसरे क्षेत्रों के लोग भी आते हैं। इसके अलावा, बीटेक के विकल्प के रूप में बीसीए, बीएससी कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्स तीन साल में ही हो जा रहे हैं। इनका पाठ्यक्रम बीटेक जैसा ही है। यही नहीं, कई प्रोग्राम ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग मोड में भी हैं। तो छात्रों को यह भी एक विकल्प मिल जाता है। छात्रों की संख्या में कमी की वजह ये भी है।”

 

तकनीक तेजी से बदल रही है

पिछले कुछ वर्षों में आईटी और तकनीकी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया भी बदली है। कई कंपनियां अब केवल डिग्री के आधार पर भर्ती करने के बजाय उम्मीदवार के कौशल, प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और समस्या सुलझाने की क्षमता पर ज्यादा जोर दे रही हैं। ऐसे में केवल बीटेक की डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं रह गई है।

 

यहीं एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा होता है कि यदि इंजीनियरिंग का आकर्षण कम हो रहा है, तो फिर हर साल लाखों छात्र जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी क्यों कर रहे हैं?

 

दिल्ली, कोटा, पुणे, कानपुर जैसी जगहों पर लाखों की संख्या में छात्र इन्हीं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। दिल्ली में एक इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले दुर्गेश कुमार खुद भी आईआईटी से इंजीनियर रहे हैं। नौकरी करने की बजाय उन्होंने छात्रों को पढ़ाने का फैसला किया।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में दुर्गेश कहते हैं, “यह कहना ठीक नहीं है कि इंजीनियरिंग में लोगों की दिलचस्पी कम हो गई है। लेकिन हां, उन संस्थानों से बीटेक का क्रेज जरूर खत्म हुआ है जहां पढ़ाई, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट का स्तर कमजोर है। जो संस्थान इसे सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाए हुए हैं। आज भी आईआईटी, एनआईटी और तमाम अन्य संस्थानों की मांग वैसी ही बनी हुई है जैसी बीस-तीस साल पहले थी। इसका कारण है कि इन संस्थानों ने अपनी गुणवत्ता बरकरार रखी है और आधुनिक तकनीक और समय के हिसाब से खुद को ढालते रहे हैं। ज्यादातर संस्थान सरकारी नियंत्रण में हैं जहां पैसा कमाना संस्थान का लक्ष्य नहीं बल्कि संस्थान से बेहतर प्रशिक्षित लोग तैयार करना है।”

 

सिर्फ यही संस्थान टिक पाएंगे

जानकारों का मानना है कि उद्योगों की मांग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी नई तकनीकों की ओर बढ़ रही है। जिन संस्थानों ने समय के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम, प्रयोगशालाओं और उद्योगों से जुड़ाव को मजबूत नहीं किया, वहां छात्रों का रुझान लगातार घटा है। आदित्य टंडन कहते हैं कि आने वाले समय में वही संस्थान टिक पाएंगे, जो आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ कौशल आधारित शिक्षा और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर देंगे।

 

उनके मुताबिक, “चूंकि निजी क्षेत्र के ज्यादातर संस्थान किसी तरह मान्यता लेने की कोशिश करते हैं, इसके लिए तमाम मानकों का उल्लंघन भी करते हैं लेकिन जब छात्र यहां आते हैं तो खुद को ठगा महसूस करते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे वहां छात्रों की संख्या में कमी आने ही लगती है। यही नहीं, संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की गुणवत्ता और उनका प्रोफाइल भी बहुत मायने रखता है। बहुत से निजी संस्थान इस तरफ भी ज्यादा ध्यान नहीं देते। नतीजा, छात्रों की कमी होना ही है।”

 

दरअसल, यह कहानी केवल 58 इंजीनियरिंग कॉलेजों के बंद होने की नहीं है बल्कि यह भारत की तकनीकी शिक्षा के उस दौर के खत्म होने की कहानी है, जिसमें सिर्फ डिग्री मिल जाना ही सफलता की गारंटी माना जाता था। अब छात्र डिग्री नहीं, रोजगार तलाश रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में वही इंजीनियरिंग संस्थान टिक पाएंगे जो बदलती तकनीक, उद्योगों की जरूरत और छात्रों की अपेक्षाओं के साथ खुद को बदल सकेंगे। बाकी संस्थानों के लिए चुनौती और कठिन होती जाएगी।

आंध्र प्रदेश में कोरोना से 2 मौतें, 8 नए मरीज मिले; किस वैरिएंट से फैला संक्रमण?

corona cases in Andhra Pradesh

Corona in Andhra Pradesh : आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडप्पा और अन्नमय्या जिलों में कोरोना संक्रमण से जुड़ी दो मौतों की पुष्टि से हड़कंप मच गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग तुरंत सक्रिय हो गया। दोनों जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अभियान चलाया गया, जिसमें 8 नए सक्रिय मरीज मिले। कोरोना के किस वैरिएंट से संक्रमण फैल रहा है, इसकी पहचान की जा रही है।

 

डॉक्टरों के अनुसार, इन सभी मरीजों की हालत स्थिर है। इनमें किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं हैं और सभी होम आइसोलेशन में रहकर स्वस्थ हो रहे हैं। ALSO READ: भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले: कुमार सानू के बेटे जान अस्पताल में भर्ती

 

गौरतलब है कि साल 2019 से 2022 के बीच कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इस महामारी में लाखों लोगों की जान गई और दुनिया भर के देशों ने इसे नियंत्रित करने के लिए व्यापक प्रयास किए। हालांकि, कोरोना वायरस के नए-नए वैरिएंट समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

 

वैरिएंट की पहचान के लिए पुणे भेजे गए सैंपल

वाईएसआर कडप्पा और अन्नमय्या जिलों में मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सैनिटाइजेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तेज कर दी है। एहतियात के तौर पर सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड भी तैयार किए गए हैं।

 

संक्रमित मरीजों के सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमण किस वैरिएंट के कारण हुआ है। शुरुआती संकेतों के अनुसार, यह वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) से मिलता-जुलता हो सकता है।

 

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट का समय-समय पर सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। इसलिए लोगों को घबराने की बजाय सावधानी बरतनी चाहिए।

 

 विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब तक स्वास्थ्य विभाग किसी नए वैरिएंट को लेकर आधिकारिक पुष्टि न करे, तब तक अफवाहों से बचें और सामान्य एहतियाती उपाय अपनाते रहें।

 

इन सावधानियों का पालन करें

  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय मास्क जरूर पहनें।
  • सार्वजनिक स्थानों पर नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
  • हाथों को नियमित रूप से साफ करें या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
  • तेज सर्दी, बुखार, खांसी या अन्य लक्षण दिखाई दें तो लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।