जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचीं डॉ. तजीन फातिमा, 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण आदेश के बीच तेज हुई हलचल

johar univercity

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। जिला प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को अवैध घोषित कर इन्हें ध्वस्त करने का प्रशासनिक आदेश दिया है। जिसके बाद से सत्ता के गलियारों में सियासत गरमाने लगी है।

ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद आज आजम खान की पत्नी डॉक्टर तंजीन फातिमा जौहर यूनिवर्सिटी पहुंची तो हड़कंप मच गया, उन्होंने मीडिया से कहा कि उनके पास 15 दिन का समय है।  इसी दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों को यूनिवर्सिटी से बाहर रास्ता दिखा दिया।

 

आजमखान की पत्नी डॉ. तजीन फातिमा ने विश्वविद्यालय में तैनात पुलिसकर्मियों से बातचीत की और कहा कि संस्थान को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिनों का समय मिला है। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय के आदेश के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस की स्थायी मौजूदगी उचित नहीं है। इसके बाद पुलिसकर्मी परिसर से बाहर चले गए।

 

इस बीच, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विश्वविद्यालय परिसर से होकर गुजरने वाली लगभग तीन किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित करते हुए मुख्य गेट पर सूचना बोर्ड भी लगा दिए हैं। इस कदम को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रबंधन और प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।

 

डॉ. तजीन फातिमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ध्वस्तीकरण आदेश के संबंध में कानूनी सलाह ले रहा है और निर्धारित समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखेगा। उन्होंने कहा कि संस्थान कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा।

 

गौरतलब है कि रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने हाल ही में जौहर यूनिवर्सिटी की 38 भवनों को निर्माण नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर ध्वस्त किए जाने का नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित निर्माण स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जबकि विश्वविद्यालय प्रबंधन इन आरोपों से असहमत है और कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत की तैयारी कर रहा है।

 

वहीं रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आसिम राजा ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि यह शिक्षा केन्द्र है, इसलिए जौहर यूनिवर्सिटी बचाने में सही तथ्य और उनका पक्ष रखकर मदद करें और साथ ही लोगों से मदद की अपील की है, कहा है कि बडी लड़ाई ओर हिफाज़त के लिए तैयार रहें ।

 

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कई वर्षों से विभिन्न कानूनी, प्रशासनिक और भूमि संबंधी विवादों के कारण चर्चा में रही है। विश्वविद्यालय के संस्थापक मोहम्मद आज़म खान और उनके परिवार से जुड़े कई मामलों की सुनवाई अलग-अलग अदालतों में चल रही है। ऐसे में 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश और परिसर में चल रही प्रशासनिक कार्रवाई ने इस मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन 15 दिनों के भीतर अपना जवाब किस प्रकार प्रस्तुत करता है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।

योगी सरकार की OBC छात्रावास योजना बनी वरदान, 102 हॉस्टल से हजारों पिछड़े वर्ग के छात्रों को मिल रहा शिक्षा का सहारा

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित छात्रावास निर्माण योजना प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 2013 छात्र-छात्राओं ने इन छात्रावासों में रहकर अपनी शिक्षा प्राप्त की। यह व्यवस्था उन हजारों परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनी है जिनके लिए बच्चों को बाहर रहकर पढ़ाना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।

 

कुल 102 में से छात्राओं के लिए 43 छात्रावास 

 

प्रदेश में वर्तमान समय में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए 102 छात्रावास संचालित हैं। इनमें 59 छात्रावास छात्रों तथा 43 छात्राओं के लिए हैं। इन छात्रावासों में लगभग 5400 छात्रों के रहने की क्षमता उपलब्ध है। छात्रावास निर्माण योजना का मुख्य उद्देश्य अन्य पिछड़ा वर्ग के निर्धन छात्र-छात्राओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक अभाव उनकी शिक्षा में बाधा न बने। इस योजना के तहत छात्रावासों का निर्माण राजकीय शिक्षण संस्थानों के परिसरों में कराया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासित एवं सुरक्षित वातावरण भी प्राप्त हो सके।

 

वर्षों पुराने छात्रावासों में कराया जा रहा मरम्मत का कार्य

 

योगी सरकार ने छात्रावासों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता और सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी है। छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-2024 से छात्रावास अनुरक्षण योजना प्रारंभ की। इस निर्णय से वर्षों पुराने छात्रावासों के रखरखाव और मरम्मत का कार्य व्यवस्थित रूप से शुरू हुआ। अनुरक्षण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। 

 

8 छात्रावासों में मरम्मत का कार्य पूरा

 

इस समिति में निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य हैं, जो प्रत्येक प्रस्ताव का तकनीकी और वित्तीय परीक्षण कर आवश्यक स्वीकृति प्रदान करते हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुरक्षण के लिए 10 छात्रावासों का चयन किया गया था। इनमें से 8 छात्रावासों का मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बाकी छात्रावासों में मरम्मत कार्य प्रगति पर है। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में संचालित छात्रावासों का सर्वेक्षण कर 8 छात्रवासों को प्राथमिकता के आधार पर अनुरक्षण एवं मरम्मत के लिए चिन्हित किया गया है। 

 

निर्धन छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत आधार बनी योजना

 

इस तरह आवासीय सुविधाओं के माध्यम से हजारों छात्र-छात्राएं अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बन रहे हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत आधार बन रही है। इसका उद्देश्य निर्धन छात्र-छात्राओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक अभाव उनकी शिक्षा में बाधा न बने। इसी सोच के अनुरूप छात्रावासों का निर्माण राजकीय शिक्षण संस्थानों के परिसरों में कराया जाता है, जिससे छात्र-छात्राओं को अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सके।

मिलिट्री इंटेलिजेंस और GRP की संयुक्त कार्रवाई में अयोध्या में सेना का फर्जी हवलदार गिरफ्तार

Fake Army Soldier Arrested from Ayodhya: अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन से सेना की वर्दी पहनकर घूम रहे एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया गया है। मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की इस संयुक्त कार्रवाई में आरोपी के पास से सेना की वर्दी, जाली आईडी और कई बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं।

खुफिया इनपुट पर हुई त्वरित कार्रवाई

मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ की अयोध्या इकाई को पिछले काफी दिनों से इनपुट मिल रहे थे कि अयोध्या और उसके आसपास के जिलों में सेना का एक संदिग्ध हवलदार सक्रिय है। यह शख्स खुद को आर्टिलरी (Artillery) का अधिकारी और डोगरा रेजिमेंट में कैंटीन इंचार्ज बताता था।

संदेह की वजह

वह सेना की अलग-अलग वर्दियां पहनकर अक्सर ट्रेनों में यात्रा करता था और रेलवे स्टेशन व कैंट एरिया के आसपास संदिग्ध रूप से घूमता पाया जाता था। संदेह गहराने पर मिलिट्री इंटेलिजेंस की अयोध्या टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। सूचना संकलन, साक्ष्यों और टेक्निकल डाटा (Technical Data) के विश्लेषण के बाद टीम ने पुष्टि की कि यह व्यक्ति सेना में नहीं है, बल्कि एक फर्जी सैनिक है, जो सेना की गरिमा और वर्दी का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

स्टेशन पर घेराबंदी कर रंगे हाथों दबोचा

जब आरोपी सेना की वर्दी में अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन पर मौजूद था, तभी मिलिट्री इंटेलिजेंस ने राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) अयोध्या को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही जीआरपी थाना प्रभारी (SHO) अनिल प्रकाश सिंह तत्काल अपनी टीम के साथ एक्शन में आए। पुलिस बल ने रेलवे स्टेशन पर चारों तरफ से घेराबंदी कर इस फर्जी अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

असली बनाम नकली पहचान

पूछताछ और तलाशी के दौरान इस जालसाज की दोहरी पहचान का खुलासा हुआ। आरोपी खुद को करण यादव पिता उदयभान सिंह यादव बताता था, जबकि उसका असली नाम सुरेन्द्र निषाद पिता शारदा निषाद है, जो कि ग्राम गहमर, जिला गाजीपुर का रहने वाला है। उसके पास से करन यादव के नाम का एक जाली आधार कार्ड भी बरामद हुआ है, जिसका इस्तेमाल वह अपनी नकली पहचान छिपाने के लिए कर रहा था।

 

पुलिस ने आरोपी के पास से देश की सुरक्षा और सेना से जुड़े कई संवेदनशील सामान बरामद किए हैं। इसके पास से सेना की वर्दी (यूनिफॉर्म), सेना के आधिकारिक सिंबल जैसे नेम प्लेट और रिबन, फर्जी सैन्य परिचय पत्र (ID Cards) और विभिन्न बैंकों के एटीएम (ATM) कार्ड जब्त किए हैं। जीआरपी ने आरोपी सुरेंद्र निषाद के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। इस मामले में आगे की कानूनी और खुफिया जांच जारी है।

MSP पर रिकॉर्ड खरीद से UP के किसानों को मिल रहा बड़ा लाभ, अनाज की खरीद में बना कीर्तिमान

Farmers in UP are reaping big benefits from record procurement at MSP

– 9 साल में योगी सरकार ने धान खरीद से 80.39 लाख किसानों को पहुंचाया लाभ, 1.03 लाख करोड़ रुपए से अधिक सीधे खातों में पहुंचे

– धान, बाजरा, ज्वार और मक्का की रिकॉर्ड खरीद, किसान हितैषी नीतियों से यूपी में खेती बनी अधिक लाभकारी

– योगी सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया

Chief Minister Yogi Adityanath : उत्तर प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में योगी सरकार की सरकारी खरीद नीति ने पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पारदर्शी खरीद व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और डिजिटल प्रक्रिया के कारण प्रदेश के किसानों का सरकारी खरीद प्रणाली पर भरोसा मजबूत हुआ है। धान खरीद के क्षेत्र में राज्य ने नया रिकॉर्ड स्थापित करते हुए वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 80,39,539 किसानों से धान की खरीद की और उनके बैंक खातों में 1.03 लाख करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया है।  

 

पारदर्शी व्यवस्था ने बढ़ाया किसानों का विश्वास

योगी सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया है। प्रदेशभर में खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई, किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई, डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई और भुगतान सीधे बैंक खातों में भेजने की प्रणाली को मजबूत किया गया। इससे किसानों को एमएसपी का पूरा लाभ समय पर मिल रहा है। 

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मोटे अनाजों के लिए किसानों को मिला सरकारी खरीद का मजबूत आधार

योगी सरकार ने धान और गेहूं तक ही खरीद व्यवस्था को सीमित नहीं रखा, बल्कि पोषक अनाजों को भी प्राथमिकता दी। वर्ष 2022-23 से पहली बार बाजरा की सरकारी खरीद शुरू की गई। वर्ष 2025-26 तक 1,48,718 किसानों से 7,13,759.88 मीट्रिक टन बाजरा खरीदकर 1,854 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

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इसी प्रकार वर्ष 2023-24 से पहली बार ज्वार की सरकारी खरीद प्रारंभ हुई, जिसके तहत पिछले तीन वर्षों में 26,972 किसानों को 363.35 करोड़ रुपए का भुगतान मिला। वहीं वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक मक्का खरीद के माध्यम से 34,578 किसानों को 582.04 रुपए करोड़ का भुगतान किया गया। इससे मोटे अनाजों की खेती करने वाले किसानों को भी एमएसपी का लाभ मिला और उनकी आय में वृद्धि हुई।

 

कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास

खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीद व्यवस्था केवल फसल खरीद का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुकी है। समय पर भुगतान, पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और खरीद केंद्रों की बेहतर उपलब्धता ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है।

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इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बना है। योगी सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण खेती को अधिक लाभकारी बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों को किया निवेश के लिए आमंत्रित, कहा- हमारे राज्य में आपके लिए सबकुछ उपलब्ध

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित “भारत टेक्स-2026” में सम्मिलित हुए। उन्होंने यहां देश-विदेश के प्रमुख टेक्सटाइल निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और वैश्विक ब्रांड्स के साथ राउंड टेबल बैठक की। बैठक में उन्होंने मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, टेक्सटाइल क्षेत्र की अपार संभावनाओं और उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं से निवेशकों को अवगत कराया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी क्षेत्रों में विकास की बयार बह रही है। मैं कुंभ की नगरी से आता हूं। 12 साल में एक बार कुंभ आता है। कुंभ के समय चारों तरफ एक ही वातावरण तैयार होता है। वो वातावरण तो धार्मिक होता है। उसी तरह यहां वस्त्र उद्योग का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी हमने इस आयोजन में भाग लिया था। इस वर्ष इसकी आभा और निखर गई है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से मध्यप्रदेश टैक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करते हुए इस क्षेत्र में कपड़ा उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ा रहा है। टैक्सटाइल इंडस्ट्री से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। 

 

उद्योगपतियों के पास अनुभव की पूंजी-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और मालवा-निमाड़ अंचल के 6 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। पीएम मित्र पार्क, खेत से लेकर कारखाने और यहां से गारमेंट इंडस्ट्री और वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान होगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केंद्र सरकार और वैश्विक ब्रांड्स के साथ चलने के लिए तैयार है। हमारे अधिकारियों निवेशकों को पॉलिसी जरूर बता दी, लेकिन यहां मौजूद उद्यमियों के पसीने में अनुभव की बहुत बड़ी पूंजी है। उद्योगपतियों के कथन राज्य सरकार को तेजी से और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

 

भारत में विविधता की खूबसूरती-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते समय बिजली की नीलामी हुई थी। उसके आधार पर यह सत्य है कि इस वक्त विश्व में सबसी सस्ती बिजली कहीं मिल रही है तो वो मध्यप्रदेश में मिल रही है। हमारे यहां पानी पर भी बिजली है और पानी से भी बिजली है। उन्होंने टेक्सटाइल का मामला राजा विक्रमादित्य के काल से जुड़ता है। महारानी अहिल्याबाई ने महेश्वरी साड़ी ब्रांड का निर्माण किया। उन्होंने इसके जरिये बुनकरों की आमदनी की चिंता की। महेश्वरी जैसे ही चंदेरी साड़ी भी एक ब्रांड है। हमारे देश में विविधता की खूबसूरती है। बनारसी साड़ी का आनंद उत्तर भारत वाले भी लेते हैं और दक्षिण भारत वाले भी लेते हैं। इसी तरह बिहार जाते हैं तो भागलपुरी वस्त्र की मांग होने लगती है। कांजीवरम साड़ी का जो महत्व दक्षिण भारत में है, वही महत्व पूरे भारत में है। हमने इकोनॉमी को जीवन के साथ जोड़ा है। 

 

निवेशकों का ख्याल रख रही सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगपति और निवेशकों से किए अपने सभी वायदे पूरे किए हैं। सभी सेक्टर्स में उद्योगपतियों और निवेशकों को सब्सिडी के रूप में उनके हक की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जा चुकी है। राज्य सरकार ने राशि देकर मई 2026 तक की सभी देनदारियां खत्म कर दी हैं। प्रदेश सरकार ने डेढ़ साल में लगभग 5500 करोड़ रुपए की राशि उद्योगपतियों को सब्सिडी के रूप में दी है। उन्होंने उद्योपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में अपना उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, वहीं का होकर रह जाता है। हृदय प्रदेश सभी उद्योगपतियों का स्वागत कर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की हैं। राज्य में सोलर और पंप स्टोरेज से निर्मित बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है। मध्यप्रदेश में सबसे सस्ती बिजली मिल रही है, जिससे उद्योग संचालन आसान हो गया है।

TTD : राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच तिरुपति में दान का नया रिकॉर्ड, 1 दिन में आए 96.98 करोड़ रुपए, आखिर क्यों उमड़े लाखों श्रद्धालु

अभी अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (चढ़ावे और चंदे) में हेराफेरी का मामले में गिरफ्तारी और जांच का मामला गर्माया हुआ है। इस बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को नई डोनर (दाता) नीति लागू होने से ठीक एक दिन पहले रिकॉर्ड 96.98 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ। मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नए नियम लागू होने से पहले विभिन्न ट्रस्टों में दान दिया, जिसके चलते एक ही दिन में दान का नया रिकॉर्ड बन गया।

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TTD के अनुसार, मंगलवार को कुल 2,460 श्रद्धालुओं ने दान किया। इनमें 2,354 लोगों ने ऑनलाइन और 106 लोगों ने ऑफलाइन योगदान दिया।

किसने कितना किया दान?

TTD के आंकड़ों के अनुसार-

 

  • 1,212 श्रद्धालुओं ने 1 लाख से 10 लाख रुपये के बीच दान दिया।
  • 1,246 श्रद्धालुओं ने 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का योगदान किया।
  • वहीं दो श्रद्धालुओं ने 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का दान दिया।
  • क्यों बढ़ा दान का आंकड़ा?

 

TTD बोर्ड ने हाल ही में नई डोनर पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसके तहत भविष्य में दान देने वाले श्रद्धालुओं को मिलने वाली कुछ विशेष सुविधाओं (Donor Privileges) में बदलाव किया गया है। यह नई नीति मंगलवार आधी रात से लागू हो गई। TTD का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की सुविधा बेहतर बनाना और दानदाताओं के प्रबंधन में पारदर्शिता एवं समानता सुनिश्चित करना है।

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पुराने दानदाताओं पर नहीं पड़ेगा असर

TTD के अध्यक्ष बी.आर. नायडू ने स्पष्ट किया कि नई नीति केवल भविष्य में किए जाने वाले दान पर लागू होगी। पहले से पंजीकृत दानदाताओं और संस्थानों को पहले की तरह सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी। उन्होंने बताया कि 26 जून तक TTD के विभिन्न ट्रस्टों और योजनाओं में 1,97,888 पंजीकृत दानदाता थे। लगभग 1.50 लाख दानदाताओं ने 1 लाख रुपए का योगदान दिया है।

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22,000 से अधिक दानदाताओं ने 10 लाख रुपए या उससे अधिक दान किया है। पिछले चार महीनों में 10 लाख रुपये दान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 3,000 की बढ़ोतरी हुई है। आम श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा TTD  के मुताबिक  संशोधित डोनर पॉलिसी के तहत कुछ विशेष सुविधाओं में कटौती की गई है, ताकि आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और मंदिर व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाया जा सके।

ISRO में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफों से हलचल, सरकार ने सख्त किए नियम, Gaganyaan Mission से जुड़े कर्मियों पर विशेष फोकस

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में हाल के महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफा देने की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष रूप से गगनयान (Gaganyaan) और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक इस्तीफे (Resignation) और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) पर अब कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

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100 से 120 वैज्ञानिकों के इस्तीफे की रिपोर्ट

हालांकि अंतरिक्ष विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देने वाले वैज्ञानिकों की संख्या जारी नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिकों ने ISRO छोड़ने का फैसला किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु स्थित यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) से करीब 80 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया। तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से लगभग 20 वैज्ञानिकों के जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि इस्तीफों की संख्या 100 से अधिक होकर 120 तक पहुंच सकती है।

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सरकार ने जारी किया नया निर्देश

14 जुलाई को जारी एक आंतरिक ज्ञापन (Internal Memorandum), जिसे India Today ने एक्सेस किया है, के अनुसार केंद्र सरकार ने ISRO के सभी केंद्रों को निर्देश दिया है कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े ग्रुप 'A' वैज्ञानिक एवं तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन सीधे स्वीकार न किए जाएं। अब ऐसे सभी मामलों को अंतिम निर्णय के लिए अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के पास भेजा जाएगा।

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क्यों अहम है यह फैसला?

भारत का गगनयान मिशन देश का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है और इसे ISRO की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों के बड़े पैमाने पर संगठन छोड़ने की खबरों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से अब महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर केंद्रीय स्तर पर फैसला लिया जाएगा।

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर चलेगा बुलडोजर, 40 में से 38 कमरे अवैध

johar university rampur

Johar University Demolition : रामपुर विकास प्राधिकरण ने वरिष्ठ सपा नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के बना हुआ अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को भी आम रास्ता घोषित कर दिया गया है। संस्थान को 15 दिन के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई करेगा। ALSO READ: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद कोएल मल्लिक ने दिया इस्तीफा

 

प्राधिकरण ने रामपुर सदर के ग्राम सिंगनखेड़ा में स्थित इस यूनिवर्सिटी की जांच में पाया गया कि वहां बने अधिकांश भवन बिना अनुमति और बिना स्वीकृत मानचित्र के बनाए गए हैं। इस संबंध में संस्था को नोटिस भी भेजा गया।

 

रामपुर विकास प्राधिकरण को भेजे गए जवाब में जौहर यूनिवर्सिटी की ओर से यह कहा गया कि जब भवनों का निर्माण हुआ था, तब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। इस पर रामपुर के डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने कहा, वर्ष 2024 से पहले यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में था। यूनिवर्सिटी ने दो भवनों के मानचित्र जिला पंचायत से स्वीकृत कराए थे।

 

उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार संस्थान को 15 दिन का समय का समय दिया गया है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगा। ALSO READ: केतन की मंगेतर सिया गोयल के परिवार की बढ़ी मुश्किल, FDA ने बंद कराया कामकाज
 

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि भाजपा को शिक्षा में भी साम्प्रदायिकता नजर आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलनेवाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं। भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय, संस्थान कैसे जायज होंगे? निंदनीय!

उल्लेखनीय है कि जेल में बंद सपा नेता आजम खान 2006 में बनी इस यूनिवर्सिटी के चांसलर है। रामपुर रेलवे स्टेशन से करीब 12 किलो मीटर की दूरी पर स्थित यूनिवर्सिटी का कैंपस 250 एकड़ से ज्यादा के क्षेत्र में फैला है।

रथयात्रा विशेष : जब नरेन्द्र मोदी ने बदल दिया था अहमदाबाद रथयात्रा का इतिहास, आज भी निभाते हैं यह नियम

Narendra Modi Ahmedabad Rathyatra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूं ही सबसे अलग नहीं हैं। 12 साल से अधिक समय तक वे गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पीएम मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद भी भगवान जगन्नाथ के लिए शुरू की गई परंपरा को निभा रहे हैं। उन्होंने 149वीं रथयात्रा से पहले ही भगवान जगन्नाथ को विशेष प्रसाद भिजवा दिया था।

 

मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने के बावजूद, नरेंद्र मोदी भगवान जगन्नाथ से अटूट रूप से जुड़े हुए हैं। अपने अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम के बीच भी पीएम मोदी हर साल की तरह इस साल भी भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा से पहले दिल्ली से विशेष प्रसाद भेजना नहीं भूले हैं। इस विशेष प्रसाद में मौसम के अनुसार मूंग, जामुन, आम और सूखे खजूर सहित अन्य फलों को शामिल किया गया है, जिसे एक आकर्षक बॉक्स में पैक करके जमालपुर जगन्नाथ मंदिर भेजा गया है।

मुख्यमंत्री के रूप में शुरू की गई परंपरा आज भी बरकरार

पीएम मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने रथयात्रा के एक दिन पहले मंदिर में विशेष नैवेद्य भेजने की यह सुंदर परंपरा शुरू की थी। देश के प्रधानमंत्री बनने और दिल्ली शिफ्ट होने के बाद भी इस नियम में कभी कोई बाधा नहीं आई है। 12 साल और 7 महीने तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अहमदाबाद की इस रथयात्रा को एक नई भव्यता प्रदान की थी।

सबसे अधिक बार 'पहिंद विधि' करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

गुजरात की परंपरा के अनुसार, रथयात्रा में सोने की झाड़ू से रथ का मार्ग साफ करने की 'पहिंद विधि' राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा की जाती है। नरेंद्र मोदी के नाम गुजरात में सबसे अधिक 13 बार यह पवित्र पहिंद विधि करने का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वे न केवल यह विधि करते थे, बल्कि जमालपुर के 400 वर्ष पुराने मंदिर के प्रांगण से खुद रथ खींचकर यात्रा का प्रस्थान भी करवाते थे।

हिंसा के साये से मुक्ति और हाई-टेक सुरक्षा

वर्ष 2001 से पहले अहमदाबाद की रथयात्रा पर अक्सर सांप्रदायिक तनाव या हिंसा का ग्रहण लग जाता था। लेकिन नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने कड़े प्रशासनिक नियंत्रण में इस यात्रा को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सुरक्षित बना दिया। यात्रा के मार्ग पर जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी कैमरे और हाई-टेक कंट्रोल रूम जैसी आधुनिक तकनीक पेश करने वाले वे पहले नेता थे, जिसके कारण लाखों श्रद्धालु बिना किसी डर के इस उत्सव में शामिल हो सके।

अहमदाबाद की रथयात्रा को दिलाई वैश्विक पहचान

पीएम मोदी ने ओडिशा की जगन्नाथ पुरी रथयात्रा की तरह ही अहमदाबाद की रथयात्रा को भी देश की दूसरी सबसे बड़ी और भव्य रथयात्रा के रूप में वैश्विक पटल पर पहचान दिलाई है। उनके ही शासनकाल के दौरान देश भर से आने वाले हजारों साधु-संतों और अखाड़ों के लिए विशेष सरकारी समन्वय और बेहतर नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था शुरू की गई थी। इस वर्ष भी सुरक्षा के लिए 30,000 से अधिक पुलिस जवान तैनात हैं और मुख्यमंत्री व डीजीपी खुद इसका निरीक्षण कर रहे हैं।

रथयात्रा के पावन पर्व पर पीएम मोदी का विशेष संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इस यात्रा को भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक गौरवशाली प्रतीक बताया है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को प्रेरित करती है और यह विनम्रता, सामूहिक भागीदारी व सेवा भाव का प्रतीक है। इसके साथ ही उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ से सभी के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना की है।

ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद कोएल मल्लिक ने दिया इस्तीफा

TMC MP koel mallick resigns from rajyasabha

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुवार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। TMC की राज्यसभा सांसद कोएल मल्लिक ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

 

ममता ने 3 माह पहले ही अभिनेत्री कोएल को राज्यसभा सांसद बनाया था। कोयल मल्लिक पहली बार अप्रैल महीने में राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं। उनके इस्तीफे के बाद संसद में ममता गुट के अब केवल 17 सांसद बचे हैं।

 

कोएल मल्लिक का इस्तीफा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के करीबी मदन मित्रा के पार्टी छोड़ने के एक दिन बाद आया है। मदन मित्रा बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के ऋतब्रत बनर्जी वाले गुट में शामिल हो गए थे।

 

उनसे पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक ने भी टीएमसी के साथ राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। ये तीनों नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन भी किया है।

 

कौन हैं कोयल मल्लिक?

बांग्ला फिल्मों के चर्चित अभिनेता रंजीत मल्लिक की बेटी कोएल बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। 2003 में उन्होंने टॉलीवुड में एंट्री ली थी। अभिषेक बनर्जी की करीबी माने जाने वाली कोएल 2026 में ही तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थी।