LIVE: सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती, जंतर मंतर से प्रदर्शनकारियों को हटाया, क्या बोली दिल्ली पुलिस?

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Latest News Today Live Updates in Hindi : जंतर मंतर पर 20 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस अपने साथ ले गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर से हटाया गया। पल पल की जानकारी…

 

तबीयत बिगड़ने के बाद जंतर मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस अपने साथ ले गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

-दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से जंतर मंतर को खाली कराने की अपील की।

-जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद, वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को हटाया गया।

-कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके का दावा, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

-जंतर मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम। भारी पुलिस बल तैनात।

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार और सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह पर, उन्हें आवश्यक चिकित्सा उपचार के लिए अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है।
 

पोस्ट में कहा गया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया, जिससे थोड़ा हंगामा हुआ, हालांकि पुलिस ने अत्यधिक संयम बरता और इस प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया। हम जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से अनुरोध करते हैं कि वे जल्द से जल्द शांतिपूर्वक इस स्थान को खाली कर दें।

बम बनवाने वालों को होती थी शिवभक्तों की ‘बम-बम’ से तकलीफ : योगी

Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गाजियाबाद में कहा कि कांग्रेस व सपा के मुंह से आस्था की बात हास्यास्पद लगती है। इन लोगों ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई थी। इन्हें व्यापारी पर बम फेंकने और कट्टा/बम बनाने पर आपत्ति नहीं होती थी, लेकिन हर-हर, बम-बम बोलकर चलने वाले शिवभक्तों पर आपत्ति होती थी। सीएम ने अपना कुर्ता दिखाया और कहा कि इन्हें इस केसरिया रंग से चिढ़ होती थी। यह वही लोग हैं, जिन्होंने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, रामनवमी की शोभायात्रा और दुर्गा पूजा के पंडालों पर रोक लगाई थी। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में मुरादनगर व मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र के लिए 868 करोड़ की 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने पूर्व कैबिनेट मंत्री राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल के बारे में जानकारी ली। सीएम ने कई बच्चों का अन्नप्राशन कराया। 

2017 के पहले शासनादेश में था कि कांवड़ यात्रा से हो सकते हैं दंगे, इसे रोका जाए

सीएम ने 2017 में कांवड़ यात्रा की बैठक का जिक्र किया, कहा कि पुराने शासनादेश में था कि कांवड़ यात्रा से दंगे हो सकते हैं, इसलिए इसे रोका जाना चाहिए। यदि कुछ लोग यह यात्रा निकालते हैं तो उन्हें घंट-घड़ियाल, शंख आदि बजाने से रोका जाना चाहिए। मैंने अधिकारियों से इसकी तैयारी के बारे में पूछा तो पता चला कि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से निकल जाएगी। मैंने कहा कि यह देवाधिदेव महादेव के प्रति समर्पण रखने वाले शिवभक्तों की यात्रा है। दलित, वंचित, पिछड़ी जाति समेत हर तबके का व्यक्ति भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर इस यात्रा में जाता है। हम उन्हें सुरक्षा व सुविधा देंगे, कोई प्रतिबंध नहीं होगा। दंगा न होने की गारंटी मैंने ली, क्योंकि सच्चा भक्त कभी अनुशासनहीनता नहीं करता। वह मर्यादा में चलता है क्योंकि समरसता उसके जीवन का हिस्सा है। 

कांवड़ यात्रा की मर्यादा व अनुशासन को बनाए रखना है

सीएम ने कहा कि अब देश के अंदर सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा हरिद्वार से गाजियाबाद तक की निकलती है। देश और विदेश से लोग इसे देखने आते हैं, क्योंकि यह भारत में ही संभव है। आस्था को न समझने वाले राम मंदिर, कांवड़ यात्रा व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोक लगाते थे। अब कांवड़ यात्रा को कोई रोक नहीं सकता है। बहुत शीघ्र फिर से कांवड़ यात्रा आने वाली है। सभी कांवड़ संघों व शिवभक्तों से अपील की कि इस आयोजन की मर्यादा, अनुशासन को बनाए रखना है। किसी विरोधी को अवसर नहीं देना है। प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय बनाएं, सरकार भव्य कांवड़ यात्रा निकालने का प्रबंध कराएगी। अब तो गाजियाबाद से हरिद्वार तक कांवड़ मार्ग भी बन गया है। 

आस्था को वोटबैंक के लिए भुनाना चाहते हैं सपाई व कांग्रेसी 

सीएम ने आस्था के सम्मान का जिक्र कर कहा कि दुग्धेश्वर नाथ मंदिर कॉरिडोर, पुरा महादेव में आदियोगी की भव्य प्रतिमा-कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ ही नई अयोध्या, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मां विंध्यवासिनी धाम आदि पवित्र तीर्थ स्थल फिर से जगमगा रहे हैं। सपा व कांग्रेस वाले आस्था को वोटबैंक के लिए भुनाना चाहते हैं। 

10 साल पहले गाजियाबाद में होता था गैंगवार, अब सुशासन यहां की पहचान 

सीएम ने कहा कि गाजियाबाद अपनी खुद की पहचान रखने वाला, भगवान दुग्धेश्वर नाथ का पावन जनपद है। हस्तशिल्प के लिए जगविख्यात गाजियाबाद की स्थिति एक दशक पहले क्या थी। यह दिल्ली का प्रवेश द्वार था, लेकिन इसका नाम लेने से लोग भयभीत होते थे। यहां आने का साहस नहीं करते थे। गंदगी पहचान थी और यहां की गुंडागर्दी पर फिल्में बनती थीं। 10 वर्ष पहले यहां की अराजकता, गुंडागर्दी और गैंगवार को आपने देखा है परंतु अब गाजियाबाद सुशासन के मॉडल के तहत पहचान बना रहा है। अब गाजियाबाद पर फिल्में नहीं बनतीं, बल्कि यहां हरिनंदीपुरम कॉलोनी आती है। अब स्वच्छता रैंकिंग में भी गाजियाबाद का स्थान होता है। 

सीएम ने गाजियाबाद में किए विकास कार्यों को गिनाया

सीएम ने कहा कि जिस दूरी को तय करने में घंटों लगते थे, आज मात्र कुछ मिनट में वह दूरी तय होती है। गाजियाबाद में बेहतरीन सड़कें हैं। नगर निगम ने साफ-सफाई की शानदार व्यवस्था की है। दिल्ली-मेरठ के बीच पहली रैपिड रेल चल रही है। यह प्रस्ताव मेरे मुख्यमंत्री बनने से पहले से चल रहा था, लेकिन सपा सरकार ने नकार दिया था कि हमें रैपिड रेल नहीं चाहिए। बतौर मुख्यमंत्री मैंने पूछा कि पिछली सरकारों ने क्या निर्णय किया है तो पता चला कि उन्होंने इस पर नकारात्मक रूप से लिखा है। मैंने इसकी आवश्यकता पर जोर दिया तो अधिकारियों ने बताया कि इसमें 32 हजार करोड़ रुपये लगेगा और इसमें राज्य व केंद्र सरकार बराबर पैसा देगी। सब सशंकित थे, लेकिन मैंने कहा कि राज्य सरकार पैसा देगी। आज लगता है कि 2017 में निर्णय लेकर हमने अच्छा किया। मेरठ से दिल्ली की तीन घंटे की दूरी अब 40 मिनट में तय हो रही है। मोदीनगर व मुरादनगर की दूरी और भी कम हुई है। 

एनसीआर व दिल्ली के ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा गाजियाबाद

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 12 वर्ष में देश को सुशासन का मॉडल दिया है। जब कानून का राज होता है, तब सुशासन आता है। कानून के राज के लिए अपराध व अपराधियों के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति कारगर होती है। जहां सुरक्षा होगी, वहां सुशासन आएगा, जहां सुशासन होगा, वहां समृद्धि आएगी, जहां समृद्धि आएगी, वहां विकास, निवेश, रोजगार का सृजन होगा, जिससे नौजवानों के हाथों को काम मिलेगा। गाजियाबाद एनसीआर व दिल्ली के ग्रोथ इंजन के रूप में भूमिका का निर्वाह कर रहा है। 

2017 के पहले शासन करने वालों के यहां देर रात तक सजती थी मंडली

सीएम ने कहा कि जब आपने अच्छे जनप्रतिनिधियों को चुना तो परिणाम सामने है। आज की नई योजनाएं यहां की गति को और बढ़ाएगी। सीएम ने कहा कि 2017 के पहले शासन करने वाले लोग 12 बजे सोकर उठते थे। 2 बजे तैयार होते थे, खाने-पीने के बाद उनके जिम जाने का समय हो जाता था। वहां से आते ही उनकी मंडली देर रात तक सजी रहती थी। तब प्रदेश में दंगा, कर्फ्यू लगता था। सरकार की नीति-नीयत न होने से निवेश और रोजगार नहीं आ पाता था। 

कांग्रेस सरकार में 85 पैसे पर पड़ती थी डकैती, हम उस पैसे को विकास में लगाते हैं 

सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री राजीव गांधी कहते थे कि 100 में से 15 पैसा ही नीचे पहुंचता था। सीएम ने कहा कि शेष 85 पैसा वही था, जिसे जनता ने टैक्स के रूप में दिया था। इससे छात्रवृत्ति, पेंशन, गरीबों का मकान, स्वास्थ्य बीमा कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाई जा सकती थी। यह लोग यदि उस पैसे को जमीन पर उतारते तो हाईवे, मेट्रो, एयरपोर्ट बन सकता था, लेकिन धऱातल पर उतरने से पहले ही कांग्रेस व सपा के लोग इस 85 पैसे पर डकैती डालते थे, जिससे गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था। 

एनसीआर बता रहा है कि कैसे होता है विकास

सीएम ने कहा कि एनसीआर बता रहा है कि विकास कैसे होता है। पहली रैपिड रेल, 12 लेन का एक्सप्रेसवे चल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे को जल्द ही मेरठ से हरिद्वार के बीच जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद वालों को अब हिंडन में ही वायुसेवा प्राप्त है। ईस्टर्न-वेस्टर्न पेरिफेरलवे का निर्माण हो चुका है। पीएम मोदी ने यूपी के पांचवें (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर) का लोकार्पण किया है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भी पहचान दिला रहा है। विकास की यह कड़ी भावी पीढ़ी के लिए ग्रोथ इंजन के रूप में नई पहचान बनने जा रही है। यहां से कुछ दूरी पर यमुना अथॉरिटी में फिल्म सिटी, अपरैल पार्क, ट्वाय पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक सिटी के निर्माण कर युवाओं के लिए रोजगार लेकर आ रहे हैं। 

 

इस दौरान कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कुमार कश्यप, सांसद अतुल गर्ग, बागपत के सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, महापौर सुनीता दयाल, विधायक नंदकिशोर गुर्जर, संजीव शर्मा, डॉ. मंजू शिवाच, धर्मेश सिंह तोमर, जिला पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी, पूर्व सांसद अनिल अग्रवाल, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, जिलाध्यक्ष चैनपाल सिंह, महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल आदि मौजूद रहे। 

आदर्श राजनेता थे स्व. राजपाल त्यागी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति जब जनता की सेवा का माध्यम बनती है तो राजनेता को लोकप्रियता के चरम पर पहुंचाती है। राजपाल त्यागी जनता के दिल में स्थान बनाने वाले राजनेता थे। आदर्श राजनेता स्व. राजपाल त्यागी छह बार (दो बार निर्दल) विधायक रहे। वे दो बार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व दो बार कैबिनेट मंत्री रहे। यह उनकी लोकप्रियता व जनता के मन में उनके प्रति अगाध प्रेम को दर्शाता है। सीएम ने कहा कि माता-पिता की साधना और त्याग पुत्रों के कार्यों में झलकती है। तपस्या, साधना, लोककल्याण के प्रति समर्पण के भाव का परिणाम है कि अजीत पाल लगातार विधायक बनकर पिता के कार्यों को निरंतरता प्रदान कर रहे हैं। जनता का उत्साह उनके प्रेम और सेवा को प्रस्तुत कर रहा है। विधायक अजीत पाल त्यागी ने अतिथियों का स्वागत किया।

400 साल पुरानी, 3000 किलो वजनी ऐतिहासिक तोप नरवर किले से चोरी, अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह पर शक

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मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे नरवर किले से करीब 400 साल पुरानी एक ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई है। पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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रात के अंधेरे में बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम

जानकारी के मुताबिक, चोरी की घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात हुई। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अज्ञात बदमाश किसी बड़े वाहन से किले के पिछले हिस्से के रास्ते अंदर पहुंचे और वहां रखी भारी-भरकम तोप को वाहन में लादकर फरार हो गए। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस अब चोरी के सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

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प्राचीन वस्तु तस्करों पर पुलिस की नजर

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तोप के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इस मामले में प्राचीन वस्तुओं की तस्करी करने वाले गिरोह की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।  पुलिस के मुताबिक पुलिस किले और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा वाहन की आवाजाही, संभावित रास्तों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

 

प्रशासन की लापरवाही उजागर

इस चोरी के बाद प्रशासनिक लापरवाही का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले यह तोप अपने स्थान से गिर गई थी, लेकिन उसे दोबारा सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर चोरों ने इसे आसानी से चोरी कर लिया।

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नरवर किले में अब बचीं सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें

राज्य पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक ने कहा कि वह जल्द ही नरवर किले का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और पुलिस के साथ मिलकर चोरी हुई धरोहर को बरामद करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, नरवर किले में पहले कुल 14 ऐतिहासिक तोपें मौजूद थीं, लेकिन एक तोप चोरी होने के बाद अब यहां केवल 13 तोपें बची हैं।

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400 साल पुरानी विरासत पर बड़ा खतरा

नरवर किला मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां मौजूद प्राचीन हथियार और स्थापत्य कला इतिहास के गौरव को दर्शाते हैं। ऐसे में ऐतिहासिक तोप की चोरी ने प्रदेश में धरोहरों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

अयोध्या में कार से 3.5 क्विंटल चांदी और भारी मात्रा में सोना जब्त!

Ayodhya GST raid: ​उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जीएसटी (GST) विभाग को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर चेकिंग के दौरान एक कार से भारी मात्रा में सोना और चांदी बरामद किया गया है। कार में सवार लोग इस करोड़ों के माल से जुड़ा कोई भी वैध दस्तावेज़ (कागजात) पेश नहीं कर पाए, जिसके बाद विभाग ने पूरे माल को जब्त कर लिया है।

​रौनाही टोल प्लाजा पर बिछाया जाल

​मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई गुरुवार दोपहर को अंजाम दी गई। दरअसल, जीएसटी विभाग को मुखबिर से खबर मिली थी कि अयोध्या-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते कार से भारी मात्रा में चांदी ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही जीएसटी की टीम एक्टिव हुई और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर रौनाही टोल प्लाजा पर नाकाबंदी कर दी।

 

संदिग्ध कार को रोककर जब उसकी तलाशी ली गई, तो अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। कार के अंदर करीब साढ़े तीन क्विंटल (350 किलो) चांदी, चांदी के आभूषण और सोने के जेवर भरे हुए थे। ​जीएसटी विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक, कार में मौजूद लोगों से जब इस सोने-चांदी के बिल या वैध कागजात मांगे गए, तो वे कुछ भी दिखाने में नाकाम रहे।

​जीएसटी अधिकारी के मुताबिक फिलहाल पूरे माल को सीज कर दिया गया है। संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर तय समय में वैध दस्तावेज पेश करने को कहा गया है। अगर वे समय पर सही कागज नहीं दिखा पाते हैं, तो नियमानुसार भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ​इस भारी खजाने को सुरक्षित रूप से सरकारी कोषागार (Treasury) में रखने की तैयारी की जा रही है।

​अयोध्या में गरमाया माहौल

​भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद से ही अयोध्या लगातार पूरे देश में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। हाल ही में हुए कुछ विवादों के बीच, इतनी बड़ी मात्रा में बिना इनवॉइस (बिल) के सोना-चांदी पकड़े जाने से इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जीएसटी विभाग इस बात की गहनता से जांच कर रहा है कि यह माल कहां से लाया जा रहा था और इसे कहां खपाने की तैयारी थी।

पीएम सूर्य घर योजना : CM योगी के नेतृत्व में देश में दूसरे स्थान पर पहुंचा UPPM

UPPM ranks second in country under leadership of Chief Minister Yogi

– सूर्य घर योजना में 6.74 लाख से अधिक घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापित, गुजरात के बाद देश में दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश

– योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में 2,283.8 मेगावाट घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित

– प्रदेश में तेजी से विकसित हुई सोलर इकोनॉमी, 85 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापना में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए देश में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। प्रदेश में अब तक 6,74,393 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना हो चुकी है। पीएम सूर्य घर योजना की राष्ट्रीय रैंकिंग में गुजरात 7,49,839 स्थापनाओं के साथ पहले स्थान पर, जबकि उत्तर प्रदेश 6,74,393 स्थापनाओं के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। महाराष्ट्र 6,73,717 स्थापनाओं के साथ तीसरे स्थान पर है।

   
उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग, विभागीय समन्वय और मिशन मोड में किए गए प्रयासों का परिणाम है। प्रदेश सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ने से लेकर सोलर संयंत्रों की स्थापना, बैंक ऋण, डिस्कॉम निरीक्षण और सब्सिडी प्रक्रिया को गति देने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास किए गए हैं।

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2,283.8 मेगावाट घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता हुई विकसित

इस दौरान यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में घरेलू रूफटॉप सोलर के तेजी से विस्तार के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 2,283.8 मेगावाट यानी 2.28 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इससे प्रदेश के लाखों घर अपनी छतों पर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि रूफटॉप सोलर से उपभोक्ताओं की पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ उनके मासिक बिजली बिल में भी उल्लेखनीय कमी आई है। प्रदेश के लाखों परिवारों को प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रुपए मूल्य की निःशुल्क सौर बिजली का लाभ प्राप्त हो रहा है।

यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश को केवल बिजली उपभोग करने वाली व्यवस्था से आगे बढ़ाकर विशेष आर्थिक दिशा में ले जा रहा है, जहां उपभोक्ता स्वयं अपने घर की छत पर बिजली का उत्पादन कर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने में भी सक्षम हो रहे हैं।

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7,000 से अधिक कंपनियां, 85 हजार से अधिक रोजगार

पीएम सूर्य घर योजना के व्यापक विस्तार ने उत्तर प्रदेश में एक मजबूत सोलर इकोनॉमी इकोसिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदेश में सोलर सेक्टर से जुड़ी 7,000 से अधिक कंपनियां एवं व्यावसायिक इकाइयां सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से 85,000 से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

   
सोलर पैनल इंस्टॉलेशन से लेकर सर्वे, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, नेट मीटरिंग, लॉजिस्टिक्स, सेल्स, मार्केटिंग तथा ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस तक एक व्यापक रोजगार श्रृंखला विकसित हुई है। इससे विशेष रूप से युवाओं, तकनीकी पेशेवरों, इलेक्ट्रिशियन, इंजीनियरों, स्थानीय उद्यमियों और छोटे व्यवसायों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

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मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली इकोसिस्टम को भी मिली नई गति

उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर की तेजी से बढ़ती मांग ने प्रदेश के सोलर मैन्युफैक्चरिंग एवं सप्लाई चेन इकोसिस्टम को भी नई गति प्रदान की है। सोलर मॉड्यूल एवं संबंधित उपकरणों के क्षेत्र में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और असेंबली लाइंस विकसित हुई हैं। इसके साथ ही इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, केबल, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, मीटरिंग उपकरण, वेयरहाउसिंग, परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े व्यवसायों को भी नई मांग मिली है। इससे प्रदेश में सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह निवेश, औद्योगिक विकास, एमएसएमई विस्तार, स्थानीय उद्यमिता और ग्रीन जॉब्स को गति देने वाली एक नई आर्थिक शक्ति के रूप में उभरी है।

 

9,000 एकड़ से अधिक भूमि की आवश्यकता में बचत

घरेलू रूफटॉप सोलर मॉडल की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बिजली उत्पादन के लिए अलग से बड़े भू भाग की आवश्यकता नहीं होती। घरों और भवनों की उपलब्ध छतों का उपयोग स्वच्छ बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। प्रदेश में विकसित रूफटॉप सोलर क्षमता को यदि समान क्षमता वाले बड़े ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से स्थापित किया जाता, तो इसके लिए बड़े भू-भाग की आवश्यकता होती।

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रूफटॉप सोलर के विस्तार से अनुमानतः 9,000 एकड़ से अधिक अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता में बचत हुई है। इससे प्रदेश की बहुमूल्य भूमि को कृषि, आवास, औद्योगिक एवं अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए संरक्षित रखने में मदद मिल रही है। 

 

हर साल लगभग 27 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

प्रदेश में स्थापित लगभग 2,283.8 मेगावाट (2.28 गीगावाट) घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। अनुमानित सौर ऊर्जा उत्पादन और भारतीय विद्युत ग्रिड के उत्सर्जन कारकों के आधार पर, इस स्थापित क्षमता से सालाना लगभग 3.8 अरब यूनिट (3.8 बिलियन kWh) स्वच्छ बिजली का उत्पादन संभव है।

इससे जीवाश्म ईंधन आधारित पारंपरिक बिजली उत्पादन को प्रतिस्थापित कर प्रतिवर्ष अनुमानतः 27 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड  उत्सर्जन से बचाव हो सकता है। पर्यावरणीय प्रभाव को सरल रूप में समझें तो, यदि एक परिपक्व पेड़ द्वारा औसतन लगभग 22 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति वर्ष अवशोषित करने का मानक लिया जाए, तो यह वार्षिक कार्बन बचत लगभग 12 करोड़ से अधिक परिपक्व पेड़ों द्वारा एक वर्ष में किए जाने वाले कार्बन अवशोषण के तुलनीय है।

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इस प्रकार पीएम सूर्य घर योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल लाखों परिवारों को स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा उपलब्ध करा रहा है, बल्कि बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबले और भारत के दीर्घकालिक नेट-जीरो लक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

भूजल सप्ताह 2026 : सहजन के बीज और ज्वालामुखीय पत्थर से होगी पानी की बचत, यूपी में नई पहल

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को जनभागीदारी से जोड़ते हुए प्रदेश में 'भूजल सप्ताह-2026' के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को भूगर्भ जल विभाग द्वारा 'जल-संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जल संरक्षण के लिए घरेलू आरओ से फिल्टर के बाद खराब होने वाले पानी को बचाने पर जोर दिया गया।

इसमें सामने आया कि मोरिंगा सीड्स (सहजन के बीज) और स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक (छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर) मददगार साबित हो सकता है। जल्द ही इस पर और शोध कर प्रोटोटाइप तैयार करने व उसकी टेस्टिंग, प्रक्रिया के तहत करने की सहमति भी बनी।

 

'भूजल सप्ताह-2026' के तहत 'जल-संवाद' कार्यक्रम की अध्यक्षता भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने की। इस दौरान प्राकृतिक और कम लागत वाली जल शोधन तकनीकों पर भी चर्चा हुई। जहां सहजन के बीज और छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर के उपयोग से पानी शुद्ध करने की तकनीक प्रस्तुत की गई। इसके जरिए आरओ सिस्टम से खराब होने वाला लाखों लीटर पानी बचाया जा सकेगा। भूगर्भ जल विभाग ने इस विजन का स्वागत करते हुए आगे शोध व आगामी संभावनाओं में दिलचस्पी व्यक्त की। 

 

इस तरह उपयोगी हो सकता है मोरिंगा सीड्स, स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक

स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक (छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर) और मोरिंगा (सहजन के बीज) प्राकृतिक जल शोधन में उपयोगी माने जाते हैं। मोरिंगा के बीजों का पाउडर पानी में मौजूद गंदगी और सूक्ष्म कणों को एकत्र कर नीचे बैठने में मदद करता है, जबकि स्कोरिया रॉक अपनी छिद्रयुक्त संरचना के कारण फिल्टर की तरह अशुद्धियों को कम करने में सहायक हो सकती है। हालांकि इसे पूर्ण रूप से लागू करने के लिए अन्य शोध की आवश्यकता है।

 

विशेष प्रोत्साहन व पुरस्कार की जरूरत

'जल-संवाद' में विशेषज्ञों ने भूजल संकट की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। सामाजिक संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन गांवों, शहरों और आवासीय सोसाइटियों में वर्षा जल संचयन, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग व अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण जैसे कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं, उन्हें विशेष प्रोत्साहन और पुरस्कार दिए जाए। इससे जल संरक्षण के प्रति सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और समाज में प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित होंगे। साथ ही रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के माध्यम से जल संरक्षण एवं भूजल भंडारण की मैपिंग पर शोध तथ्यों को मुहिम से जोड़ने की बात कही गई।

 

भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। प्रत्येक नागरिक को जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।

MG ने पेश किया भारत का पहला Multi-Powertrain ADAPT प्लेटफॉर्म, आएंगी नई Electric और Plug-in Hybrid SUV

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जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया (JSW MG Motor India) ने गुरुवार, 17 जुलाई को भारत का पहला मल्टी-पावरट्रेन न्यू एनर्जी व्हीकल (NEV) प्लेटफॉर्म 'ADAPT' पेश किया। कंपनी ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के दौरान इस प्लेटफॉर्म पर आधारित एक नई इलेक्ट्रिक SUV (EV) और एक प्लग-इन हाइब्रिड SUV (PHEV) भारतीय बाजार में लॉन्च की जाएगी। कंपनी का कहना है कि ADAPT प्लेटफॉर्म के जरिए वह अपने न्यू एनर्जी व्हीकल पोर्टफोलियो का विस्तार करेगी और ग्राहकों को अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प उपलब्ध कराएगी।

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EV के साथ Hybrid पर भी रहेगा फोकस

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कंपनी ने कहा कि भारत में वर्ष 2030 तक न्यू एनर्जी व्हीकल्स की हिस्सेदारी 30% तक पहुंचाने का लक्ष्य केवल बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) से पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग तरह के ग्राहक हैं। कुछ लोग सीधे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएंगे, जबकि कई ग्राहक हाइब्रिड तकनीक के जरिए धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना पसंद करेंगे।

ऐसे में EV के साथ HEV, PHEV और REEV जैसी तकनीकों की भी जरूरत होगी। उपलब्ध कराने से लागत कम होगी और नए मॉडल तेजी से लॉन्च किए जा सकेंगे। जहां किसी नई कार के लिए नया प्लेटफॉर्म विकसित करने में आमतौर पर 4 से 5 साल लगते हैं, वहीं ADAPT प्लेटफॉर्म तैयार होने की वजह से MG अब 12 से 24 महीने के भीतर नए मॉडल बाजार में उतार सकेगी।

 

ADAPT प्लेटफॉर्म में क्या है खास?

ADAPT एक मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म है, जो चार तरह की तकनीकों को सपोर्ट करता है—

 

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
  • हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (HEV)
  • प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV)
  • रेंज-एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल (REEV)

 

कंपनी का कहना है कि इसी प्लेटफॉर्म पर भविष्य की कई नई MG गाड़ियां विकसित की जाएंगी। हालांकि सभी आगामी मॉडल इसी प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे, ऐसा जरूरी नहीं है।

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भारतीय ग्राहकों के लिए होगा खास ट्यूनिंग

एमजी ने बताया कि नए मॉडल ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे, लेकिन उन्हें भारतीय सड़कों, मौसम और ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुसार विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।

70% लोकलाइजेशन का लक्ष्य

 

एमजी मोटर का लक्ष्य ADAPT प्लेटफॉर्म पर बनने वाले वाहनों में 70 प्रतिशत स्थानीयकरण हासिल करना है। कंपनी के मुताबिक शेष 30% हिस्से में मुख्य रूप से बैटरी सेल और कुछ विशेष तकनीकी सिस्टम शामिल होंगे, जिन्हें फिलहाल अधिकांश वाहन निर्माता भी स्थानीय स्तर पर नहीं बनाते।

रामलला के दरबार में महाप्रायश्चित, चढ़ावा चोरी के पाप से मुक्ति के लिए 10 दिवसीय क्षमा-याचना अनुष्ठान

ayodhya ram mandir trust meeting

Ram Mandir Ayodhya Atonement Ritual: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामधन (दान और चढ़ावा) गबन का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस महापाप का पूर्ण रूप से खुलासा होना अभी बाकी है। चोरी कितनी बड़ी है, क्या-क्या गायब हुआ है और इस घिनौने कृत्य में कौन-कौन से सफेदपोश शामिल हैं इन तमाम कड़ियों को जोड़ने में जांच एजेंसियां जुटी हुई हैं। इसी बीच, इस कृत्य से आहत राममंदिर ट्रस्ट ने प्रभु श्रीराम से क्षमा मांगने और मंदिर परिसर की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक 10 दिवसीय महाअनुष्ठान की शुरुआत की है।

​70 वैदिक आचार्यों ने संभाला जिम्मा

​रामलला के दरबार में शुरू हुए इस 10 दिवसीय अनुष्ठान को अत्यंत गुप्त और पवित्र तरीके से संपन्न कराया जा रहा है। इसके लिए देश के 70 शीर्ष वैदिक आचार्यों को आमंत्रित किया गया है। ये आचार्य राम मंदिर के मुख्य गर्भगृह से लेकर परकोटे (परिसर की बाहरी सीमा) तक विभिन्न स्थानों पर बैठकर विशेष मंत्रोच्चार, जप और आहुतियां दे रहे हैं। एक वैदिक आचार्य के मुताबिक प्रभु के धन पर डाका डालने वालों को कानून सजा देगा, लेकिन मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यह प्रायश्चित पूजन अनिवार्य था।

​बड़े खुलासे की उम्मीद

​एक तरफ जहां मंदिर परिसर में मंत्रों के उच्चारण से माहौल को शुद्ध किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और जांच स्तर पर भी कार्रवाई तेज है। सूत्रों के मुताबिक, यह गबन एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, राम भक्तों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर रामलला के खजाने पर नजर डालने वाले वो 'अपराधी' कौन हैं।

बार-बार KYC कराने से मिलेगा छुटकारा, ऐसे जानें अपनी 14 अंकों की CKYC संख्या, बैंक का काम होगा आसान

bank kyc

अगर आप हर बार नया बैंक खाता खोलने या किसी वित्तीय संस्था में निवेश करते समय बार-बार KYC दस्तावेज़ जमा करने से परेशान हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। सेंट्रल KYC (CKYC) की मदद से यह प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोगों से अपनी 14 अंकों की CKYC संख्या जानने और उसका उपयोग करने की अपील की है।

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क्या है CKYC नंबर?

CKYC (Central Know Your Customer) नंबर 14 अंकों की एक यूनिक पहचान संख्या होती है। यह आपकी KYC जानकारी से जुड़ी होती है, जो Central KYC Records Registry (CKYCR) में सुरक्षित रहती है। जब आपका CKYC नंबर उपलब्ध होता है, तो बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान आपकी पहले से दर्ज KYC जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे हर बार आधार, पैन या अन्य दस्तावेज़ दोबारा जमा करने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है।

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कैसे पता करें अपना CKYC नंबर?

 

आप अपनी CKYC संख्या इन आसान तरीकों से प्राप्त कर सकते हैं—

 

  • अपने बैंक या वित्तीय संस्थान से संपर्क करें।
  • 7799022129 पर मिस्ड कॉल दें।
  • CKYC पोर्टल पर जाकर जानकारी प्राप्त करें।
  • CKYC के क्या हैं फायदे?
  • बार-बार KYC दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत कम होती है।
  • बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया आसान और तेज़ होती है।
  • विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थानों में KYC प्रक्रिया सरल बनती है।
  • समय और दस्तावेज़ों की दोबारा जांच की परेशानी कम होती है।

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RBI ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी CKYC संख्या की जानकारी रखें और डिजिटल बैंकिंग से जुड़े कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाएं। साथ ही, वित्तीय लेनदेन के दौरान हमेशा सतर्क रहने और जागरूक रहने की सलाह भी दी है।

UP Bahraich Crocodile Attack : बहराइच में दर्दनाक हादसा, घाघरा नदी किनारे गए 12 साल के बच्चे को मगरमच्छ खींच ले गया, घंटों बाद मिला शव

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उत्तरप्रदेश के बहराइच जिले में एक दर्दनाक हादसे में 12 वर्षीय बच्चे की मगरमच्छ के हमले में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, बच्चा अपने चाचा के साथ खेत पर गया था, तभी घाघरा नदी के किनारे घात लगाए बैठे मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया और उसे नदी में खींच ले गया। कई घंटे की तलाश के बाद शाम को उसका शव बरामद किया गया।

 

यह घटना मंगलवार की है। मृतक अपने चाचा उदयराज सिंह के साथ घाघरा नदी के किनारे स्थित कृषि भूमि पर काम करने गया था। इसी दौरान बच्चा शौच के लिए नदी किनारे गया, तभी पानी के पास छिपे मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर दिया।

 

बच्चे की चीख सुनकर चाचा उसे बचाने के लिए दौड़े और मगरमच्छ से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन मगरमच्छ अधिक ताकतवर साबित हुआ। वह बच्चे को नदी में घसीटकर ले गया और पानी में गायब हो गया।  घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। पुलिस और बहराइच वन प्रभाग की टीम ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान शुरू किया।

बच्चे की तलाश के लिए नदी में जाल भी डाले गए, लेकिन शुरुआती प्रयास सफल नहीं हो सके। कई घंटे बाद शाम को बच्चे का शव नदी से बरामद कर लिया गया। घटना के बाद घाघरा नदी के किनारे रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी मगरमच्छों के दिखाई देने और हमले की घटनाएं सामने आती रही हैं।