केन-बेतवा परियोजना: ‘विकास’ की राह में क्यों खड़े ग्रामीण

समीरात्मज मिश्र

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को सरकार बुंदेलखंड की जल समस्या का समाधान बताती है, लेकिन जिन गांवों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है वहां इसका विरोध काफी तेज हो गया है। ALSO READ: दिल्ली में छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज, पीएम मोदी चुप

 

बुंदेलखंड को पानी चाहिए, इस पर शायद ही किसी को आपत्ति हो या किसी तरह का विवाद हो। लेकिन सवाल यह है कि उस पानी की कीमत कौन चुकाएगा? यही सवाल इन दिनों मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में हो रहे आंदोलन के केंद्र में है। सरकार इसे बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने वाली परियोजना बताती है, जबकि प्रभावित गांवों के लोग कहते हैं कि विकास के नाम पर उनका घर, खेत और आजीविका दांव पर लगा दी गई है।

 

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में पिछले दो हफ्ते से केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में ग्रामीण कई तरह से आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों के मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही बांध का निर्माण शुरू कर दिया गया है।

 

ग्रामीणों ने दो महीने पहले भी आंदोलन किया था लेकिन तब अधिकारियों ने उन्हें सब ठीक कर लेने का आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित करा दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन पूरा किए बिना ही काम फिर से शुरू कर दिया गया है।

 

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना है और इसे राष्ट्रीय नदी जोड़ो कार्यक्रम की पहली बड़ी परियोजना माना जाता है।

 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से 11 लाख हेक्टेयर सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 130 मेगावॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। इसके लिए छतरपुर और पन्ना के 21 गांव प्रभावित होंगे।

 

प्रभावित गांवों में ज्यादातर आदिवासी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी लड़ाई परियोजना रोकने की नहीं, बल्कि सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करने की है। अपनी मांगों को लेकर वे छतरपुर जिले में केन की सहायक बराना नदी के किनारे पिछले 15 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। ALSO READ: कमजोर हो सकती है दुनिया की सबसे असरदार पर्यावरण नीति 'ईटीएस'

 

‘फांसी सत्याग्रह' और ‘चिता आंदोलन'

प्रदर्शनकारी सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए विरोध के नए तरीके अपना रहे हैं। पिछले दिनों प्रभावित आदिवासी महिलाओं ने आंदोलन को नया रूप देते हुए प्रतीकात्मक 'फांसी सत्याग्रह' और ‘चिता आंदोलन' शुरू कर दिया है। महिलाओं ने गले में फांसी का फंदा डालकर सरकार से मांग की कि यदि उन्हें उचित पुनर्वास और न्याय नहीं मिल सकता, तो कम से कम इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।

 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना के कारण हजारों परिवारों की जमीन, जंगल, जल स्रोत, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान छिन गई है। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अवैध रूप से बेदखल किया गया, झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और बिजली कनेक्शन तक काट दिए गए। साथ ही परियोजना प्रभावितों की सूची तैयार करने में भी अनियमितताएं बरती गईं।

 

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले 13 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल महीने में किए गए आश्वासन अब तक पूरे नहीं किए हैं।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में अमित भटनागर कहते हैं, “प्रशासन के रवैये की वजह से पचास हजार लोग बेघर हो गए हैं। दरअसल, सरकार यह नहीं समझना चाहती है कि विस्थापन का मतलब सिर्फ घर बदलना नहीं होता है बल्कि विस्थापन में एक पूरा समुदाय, समाज और इकोसिस्टम खत्म होता है। ऐसे में प्रभावितों के लिए सरकार को थोड़ा संवेदनशील होना चाहिए। लेकिन सरकार यह सब काम डरा-धमकाकर कराना चाहती है।”

 

आंदोलन में ज्यादातर आदिवासी महिलाएं हैं। उन्हीं में से एक लक्ष्मी डीडब्ल्यू से बातचीत में कहती हैं, “अप्रैल में जब हमने चिता आंदोलन किया था, उसके बाद प्रशासन ने हमारी मांगें पूरी करने के वादे किए थे लेकिन उस वक्त जितने वादे किए गए थे, उनमें से एक का भी पालन नहीं किया गया। बल्कि हम लोगों को ही डराने-धमकाने का का काम किया गया। फर्जी केस, गैरकानूनी बेदखली, बिजली काट देना, स्कूल तोड़ना जैसे गैरकानूनी और अमानवीय कृत्य किए जा रहे हैं और लोग खौफ में हैं।” ALSO READ: चैट जीपीटी के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होने का डर

 

प्रशासन का पक्ष

लेकिन प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास पैकेज पहले ही बढ़ाया जा चुका है। छतरपुर के जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल के मुताबिक, अप्रैल में जो वादे किए गए थे, उन्हें पूरा कर दिया गया है और अब जो मांगें हैं वो केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से संबंधित नहीं हैं।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल कहते हैं, “प्रदर्शनकारियों से लगातार बातचीत चल रही है। अप्रैल में उठाई गई ज्यादातर मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में राहत एवं पुनर्वास पैकेज बढ़ाने को मंजूरी दी है, लेकिन अब प्रदर्शनकारी और ज्यादा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।”

 

दरअसल, इस आंदोलन में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के अलावा मझगांव और रुंझ सिंचाई परियोजना से विस्थापित हुए लोग भी शामिल हैं। आंदोलन इन परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार और विस्थापितों के सही पुनर्वास की मांग को लेकर तो है ही, साथ ही पन्ना टाइगर रिजर्व के 43 लाख पेड़ों को बचाने के लिए भी है।

 

आंदोलनकारियों की मांग है कि गांव के विस्थापन की स्थिति में नया गांव बसाकर दिया जाए, परिवार में सबको मसलन पति और पत्नी को अलग-अलग आर्थिक राहत दी जाए, फर्जी ग्राम सभा की बैठकों पर रोक लगे और तीनों परियोजना के लिए हुई जनसुनवाई और सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।

 

केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2021 में मंजूरी दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2024 में इसे शुरू किया था। इसका मकसद यमुना की सहायक नदियों केन और बेतवा नदियों को जोड़कर सूखा प्रभावित बुंदेलखंड इलाके में पानी पहुंचाना है।

 

सरकारी अनुमानों के मुताबिक केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना में मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले के 21 गांव डूब जाएंगे और करीब सात हजार परिवार विस्थापित होंगे। यही नहीं, इस प्रोजेक्ट के तहत, पन्ना नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के अंदर केन नदी पर एक बांध बनाया जाएगा।

 

न सिर्फ विस्थापन और मुआवजा बल्कि पर्यावरण और वन्य जीव को लेकर भी इस परियोजना पर कई सवाल उठ रहे हैं। बुंदेलखंड के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता आशीष सागर कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि केन नदी में 'अतिरिक्त' पानी है और चेतावनी दी है कि यह परियोजना पर्यावरण और आर्थिक रूप से विनाशकारी होगा।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में आशीष सागर कहते हैं, “केन छोटी नदी है इसका पानी बड़ी नदी बेतवा में डालना है। सरकार मानती है कि केन में बाढ़ से सरप्लस पानी बचता है जिसको बेतवा में डालकर सिंचाई का साधन मुहैया कराया जा सकता है जबकि केन नदी का हाल यह है कि साल के आठ महीने इसमें घुटनों के नीचे पानी रहता है। दूसरे, मौरम खनन के जरिए इसे मृतप्राय बना दिया गया है।”

 

आशीष सागर आगे कहते हैं, “यहां बन रहे दौधन बांध से नौ हजार हेक्टेयर से ज्यादा घना जंगल डूब जाएगा जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन का करीब छह हजार हेक्टेयर इलाका भी शामिल है। यह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि यह एक जीवित इकोसिस्टम है जो बाघ, घड़ियाल, डॉल्फिन, गिद्ध, चिंकारा, भेड़ियों और दुर्लभ महाशीर मछलियों का घर है। प्रोजेक्ट में वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी के वन्यजीव और गिद्धों का प्रजनन केंद्र भी खत्म हो जाएगा। यानी इस परियोजना से यह पूरा इकोसिस्टम नष्ट हो जाएगा। इसे आप कहां विस्थापित करेंगे?”

 

केन-बेतवा परियोजना पूरी होने पर बुंदेलखंड के बड़े हिस्से को पानी मिलने की उम्मीद है लेकिन छतरपुर के आंदोलनकारी गांवों में फिलहाल चर्चा सिंचाई की नहीं, विस्थापन की है। यही वजह है कि यह विवाद अब सिर्फ एक बांध या नदी जोड़ो परियोजना का नहीं, बल्कि उस सवाल का बन गया है जो भारत की लगभग हर बड़ी विकास परियोजना के साथ उठता है- क्या विकास की कीमत सबसे ज्यादा वही लोग चुकाते हैं, जिन्हें विकास का लाभ सबसे बाद में मिलता है?

CJP protest Photos : CJP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 10 तस्वीरें, देखें पूरे दिन क्या हुआ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को CJP के प्रदर्शन के दौरान दिनभर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। सुबह शुरू हुआ आंदोलन दोपहर तक टकराव में बदल गया, जब कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद झड़प, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की स्थिति बनी। CJP की ओर से अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया था, जिसे बाद में पुलिस और संगठन दोनों ने खारिज कर दिया। सुबह से देर शाम तक चले घटनाक्रम की पूरी झलक इन 10 तस्वीरों में देखें।

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प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया गया, मंच खाली कराया गया और टेंट भी हटाए गए। इसके बाद कनॉट प्लेस इलाके से भी प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प, सुरक्षा इंतजाम और हंगामे की तस्वीरें सामने आईं।

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जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में जुटे आंदोलनकारी, सुबह से जारी रहा विरोध प्रदर्शन।

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प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई, सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी रहा आंदोलन।

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बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी, पुलिस ने रोका रास्ता।

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प,  कई प्रदर्शनकारी बैरिकैट्‍स पर भी गिर पड़े।

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CJP प्रदर्शन  से दिनभर तनाव का माहौल रहा।

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संसद की सुरक्षा बढ़ाई गई, प्रदर्शन के बाद इलाके में तैनात किए गए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी

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बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी

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सुबह से संसद की अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ाई गई थी 

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प्रदर्शनकारियों ने नारे भी लगाए

सपा-कांग्रेस से सावधान और सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे, इनसे सटेंगे तो खतरा बढ़ेगा : योगी

CM Yogi Barabanki Speech

CM Yogi Barabanki Speech: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बाराबंकी की धरा से प्रदेशवासियों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी विरासत, विकास, गांव-गरीब, किसानों, नौजवानों और महिलाओं की जन्मजात विरोधी हैं। इनसे सावधान और सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे अन्यथा जैसे ही इनसे सटेंगे तो खतरा बढ़ेगा। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव, सरकारी धन की डकैती व लूट के बारे में बताइए। मुख्यमंत्री ने लोधेश्वर महादेव के सामने से जाने वाली सड़क को टूलेन से फोरलेन बनाने और गेट को भव्य बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बाराबंकी में रामनगर व दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 542 करोड़ से अधिक की 82 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। सीएम ने साहित्यिक विभूतियों, खिलाड़ियों, किसानों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, सीमा की सुरक्षा करने वाले युवाओं आदि का नाम लेकर बाराबंकी को विरासत, आध्यात्मिकता, साहित्य, समर्पण, युवा शक्ति से ओतप्रोत, स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान वाली प्रतिभाशाली व समृद्ध धरा बताया। 

 

कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो विकास की लौ पहुंची लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर पर ध्यान नहीं दिया गया

सीएम ने कहा कि बाराबंकी को लोधेश्वर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है। सोमवार को बाबा का दर्शन कर अंतःकरण से आनंद की अनुभूति हुई। यहां अगल-बगल के कई जनपदों से श्रद्धालु आते हैं, फिर भी मंदिर जीर्ण-शीर्ण ही रहा। आजादी के बाद भी आपके पैसे से विकास की लौ कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो पहुंची, लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर, केडी सिंह बाबू की हवेली, पारिजात के महाभारत कालीन वृक्ष के संरक्षण, महादेवा, अयोध्या, काशी विश्वनाथ, गोला गोकर्णनाथ, महापुरुषों, वीरांगनाओं आदि के नाम पर योजनाओं के लिए पैसा नहीं मिला।

 

हमारी सरकार भगवान लोधेश्वर महादेव का कॉरिडोर बना रही है, जिससे देश-प्रदेश के हर कोने से यहां आने वाला श्रद्धालु अभिभूत होगा और बाराबंकीवालों को आशीर्वाद व धन्यवाद देकर जाएगा। सरकार गोला गोकर्णनाथ में भी भव्य कॉरिडोर बना रही है। विंध्यवासिनी मंदिर का कॉरिडोर बन गया। पहले काशी में गंदगी थी और गलियां संकरी थीं लेकिन अब वह भी दिव्य-भव्य बन गई है। देश से जो भी काशी व अयोध्या आता है, हमें भी धन्यवाद देकर जाता है। 

केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी में 36 वर्ष बाद भारतीय टीम ने ओलंपिक में पदक जीता लेकिन उससे पहले मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू के समय भारत ने लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीता था। जिस खिलाड़ी ने हॉकी को पूरा जीवन दिया, उन केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी। हमने तय किया कि वहां संग्रहालय का निर्माण होगा। सीएम ने अमेरिका के न्यू जर्सी में हुए फीफा विश्वकप का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्पेन व अर्जेंटीना के मैच को देखकर लोगों में गजब का उत्साह था। ऐसे ही जब हॉकी चलती है तो भारत की निगाहें उस पर रहती हैं। मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू ने इसे नई ऊंचाई दी थी। 

सनातन सुरक्षित तो सब सुरक्षित

सीएम ने कहा कि विरासत के संरक्षण व सनातन मूल्यों के रक्षा के लिए महापुरुषों ने योगदान दिया। राजा बलभद्र सिंह, लाखन पासी, बिजली पासी, महाराज सुहेलदेव, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह ने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए योगदान दिया। सुहेलदेव ने जहां सालार मसूद को मारा था, हमारी सरकार ने बहराइच में वहीं उनका भव्य स्मारक बनाया है। लखनऊ में वीरांगना उदा देवी, गोरखपुर में झलकारी बाई, बदायूं में अवंती बाई के नाम पर पीएसी बटालियन, बांदा में महारानी दुर्गावती, औरैया में लोकमाता अहिल्याबाई मेडिकल कॉलेज, अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट, निषादराज नाम पर रैनबसेरा का निर्माण किया है। देश के लिए योगदान व सनातन के लिए समर्पण देने वाले महापुरुषों को सरकार ने सम्मान दिया है। सनातन की सुदृढ़ नींव पर ही हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। सनातन सुरक्षित है तो हम सभी सुरक्षित हैं। सनातन पर खतरा आया तो कोई बच नहीं पाएगा। लोगों को बांटने वाले इन सपाइयों व कांग्रेसियों के नमूनों के मुंह संकट के समय बंद हो जाते हैं। 

कट्टा- बम बनवाने वाले कराते थे गुर्गों से वसूली

सीएम ने कहा कि कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बनाने और कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी, रामनवमी की शोभायात्रा, दुर्गापूजा के पंडाल पर प्रतिबंध लगाना सपा के लिए निरपेक्षता का मानक था। हमें ऐसे धर्मनिरपेक्षता को उखाड़ फेंककर सनातन की सुदृढ़ भूमि पर सुरक्षित भारत का निर्माण करना होगा। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सनातन को अपमानित करने वाले लोग त्योहारों के पहले उपद्रव और गुर्गों से वसूली कराते थे। इन लोगों ने गांवों- शहरों में कट्टा-बम बनवाना शुरू कर दिया, जिससे व्यापारी व बेटी की इज्जत से खिलवाड़ होता था। अब लखनऊ में बने ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान व उसके आका बाप-बाप कहकर चिल्लाते हैं। निवेश आने से अब यूपी में ही युवाओं को नौकरी मिल रही है। 

बुजुर्गों से बोले- युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव व लूट के बारे में बताइए

सीएम ने कहा कि समाजवादी जाति से जाति को लड़ा रही है। एक समय कहावत थी कि देख सपाई, बिटिया घबराई। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को इनकी गुंडागर्दी, उपद्रव, डकैती, अराजकता, लूट के बारे में बताइए। उन्होंने कहा कि सैफई घराना ने आमजन के पैसे पर लूट मचाई थी। सपा जिस जेपीएनआईसी को बना रही थी, उसकी कीमत 200 करोड़ थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च होने के बावजूद भी बिल्डिंग अधूरी थी। हमारी सरकार से पहले सपा ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया। सीएम ने यहां भी उनके घोटाले को उजागर किया। कहाकि जिसके लिए वे 15,200 करोड़ का एस्टिमेट बनाए थे। दो वर्ष बाद जमीन आने पर हमने प्रधानमंत्री जी से इसका शिलान्यास कराया और 11,800 करोड़ रुपये में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बनाया। गोमती रिवर फ्रंट का कुल एस्टिमेट 167 करोड़ रुपये था, लेकिन 1700 करोड़ खर्च होने के बावजूद वह अधूरा ही रहा।

CM Yogi Barabanki Speech

डबल इंजन सरकार ने रोकी सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट 

सीएम ने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने तो कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर यहां तक कह दिया कि 100 में से 15 पैसे ही नीचे आम जनता तक जाता है। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट को रोका। इस पैसे से अब नौजवान को छात्रवृत्ति, बेटी की शादी, कन्या सुमंगला योजना का लाभ, टैबलेट, किसानों को सम्मान निधि, गरीबों को प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना, स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। जिस पैसे से यह कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बना रहे थे, उस पैसे का हमने मुंह घुमा दिया और अब इससे कॉरिडोर बन रहा है। सैफई सिडिंकेट का युवाओं की नौकरी पर कब्जा था। नौकरियों की नीलामी होती थी, लेकिन अब बाराबंकी के युवाओं को भी निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरी मिल रही है। 

सनातन विरोधी है सपा-कांग्रेस का चरित्र

मुख्यमंत्री ने विपक्षियों (सपा-कांग्रेस) के वास्तविक चरित्र को सनातन विरोधी बताया, कहा कि य़ह जनता के हक, विकास की परियोजनाओं पर डकैती डालते थे। इनके कारनामों से यूपी के सामने पहचान का संकट था। देश में यूपी टॉप-3 इकॉनमी बन गया है। अब बाढ़ बचाव का स्थायी समाधान और गोमती नदी का सुंदरीकरण-पुनरुद्धार हो रहा है। लखनऊ व अयोध्या के बीच स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) में शामिल बाराबंकी का विकास कोई रोक नहीं सकता।  

सपा चट कर जाती थी राशन

सीएम ने कहा कि हमने दरियाबाद के विधायक सतीश चंद्र शर्मा को खाद्य व रसद राज्यमंत्री बनाया तो वे यहां के साथ ही अन्य जनपदों का भी विकास कर रहे हैं। सपा गरीब का राशन चट कर जाती थी, लेकिन अब हर गरीब का राशन उसे ही मिलता है। धांधली करने वालों पर कार्रवाई होती है। सपा व कांग्रेस के समय गरीब को पेंशन, छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने से पहले घूस लिया जाता है। आज सीधे अकाउंट में पैसा जाता है, बीच में घूसखोरी नहीं चल सकती। रामनगर ने जिन्हें 2022 और बाराबंकी ने जिन्हें 2024 में चुना, उन्हें विकास की चर्चा करने की फुर्सत नहीं है। इन लोगों ने एक बार भी विकास के प्रस्ताव नहीं दिए। यदि रामनगर विधानसभा और बाराबंकी लोकसभा में कमल खिला होता तो यह क्षेत्र भी विकास की बुलंदियों को छू रहा होता। 

 

इस अवसर पर कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही, खाद्य व रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा, दिनेश रावत, विधान परिषद सदस्य अंगद कुमार सिंह, इंजी. अवनीश कुमार सिंह, जिला पंचायत प्रशासक राजरानी रावत, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद प्रियंका रावत, क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष राम सिंह वर्मा आदि मौजूद रहे।

यूपी में जीरो पॉवर्टी अभियान के पात्र परिवारों का बने अंत्योदय कार्ड : CM योगी

Yogi Government Zero Poverty Campaign: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की छठी बैठक में प्रदेश में संचालित प्रमुख आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास, निवेश, जनकल्याण और सेवा वितरण से जुड़ी परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने जीरो पॉवर्टी अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की विशेष टीम गठित कर पात्र परिवारों का अंत्योदय कार्ड बनवाया जाए और उन्हें आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास सहित सभी पात्र योजनाओं से चरणबद्ध रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का समग्र लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचना चाहिए।

 

बैठक में बताया गया कि जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत 12.50 लाख परिवारों का सर्वेक्षण किया गया है। इनमें लगभग 9 लाख परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र पाए गए हैं, जबकि लगभग 5 लाख परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाभान्वित किया जाना है। इसके अतिरिक्त 6.67 लाख परिवारों के पास अभी आयुष्मान कार्ड उपलब्ध नहीं हैं। इनमें से लगभग 5 लाख लोगों का भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण हो चुका है, जबकि शेष पात्र परिवारों का पंजीकरण कराया जा रहा है। साथ ही 10.60 लाख परिवारों के एक सदस्य को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

बैठक में बताया गया कि प्रदेश की प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 88.45 प्रतिशत, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 72.71 प्रतिशत, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 63 प्रतिशत तथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 59.35 प्रतिशत भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने मेरठ-हरिद्वार, विंध्य, विंध्य-पूर्वांचल तथा नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे सहित सभी प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित जिलाधिकारियों को 31 जुलाई तक भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी विषयों में संवाद सीधे भूमिस्वामियों से स्थापित किया जाए। बैठक में लखनऊ नाइट सफारी परियोजना की समीक्षा करते हुए बताया गया कि 15 जुलाई को उच्चतम न्यायालय से इसके क्रियान्वयन की अनुमति मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर परियोजना को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

 

ग्रेटर नोएडा में विकसित हो रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब एवं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की समीक्षा के दौरान बैठक में बताया गया कि 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि प्राप्त हो चुकी है। लॉजिस्टिक पार्क के लिए पांच कंपनियों ने पंजीकरण कराया है और आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने परियोजना की सभी औपचारिकताएं समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधनों को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए।

 

लखनऊ में विकसित किए जा रहे टेक्सटाइल पार्क की प्रगति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि परियोजना की आधारभूत संरचना तेजी से विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में तेजी बनाए रखते हुए इसे प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्नाव की एक्वा ब्रिज परियोजना तथा कानपुर के बिनगवां स्थित 40 एमएलडी तृतीयक उपचार संयंत्र से पनकी ताप विद्युत संयंत्र को जलापूर्ति उपलब्ध कराने वाली परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने लंबित तकनीकी एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर दोनों परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधारभूत संरचना के विकास के साथ जनसुरक्षा से जुड़े मानकों का कठोर अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी शासकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों, जिला चिकित्सालयों तथा होटलों में वैध फायर एनओसी की समीक्षा करते हुए जहां आवश्यकता हो वहां तत्काल कार्रवाई कर अग्नि सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

बैठक में लखनऊ नगर निगम क्षेत्र में सीवर लाइन एवं मैनहोल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइनों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से ऐसे सभी स्थलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

प्रदेश की विद्युत वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी विद्युत फीडरों का विस्तृत विश्लेषण कर बिजली आपूर्ति, राजस्व वसूली, हानि-लाभ तथा ओवरलोड की स्थिति के आधार पर सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने तकनीकी दक्षता, वित्तीय अनुशासन और उपभोक्ता सुविधा को समान प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) में भूमि अधिग्रहण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास की गति बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रशासनिक निर्णयों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

 

डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड के उपयोग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस निधि का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं और जनहित के कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ किया जाए। सांसद निधि एवं विधायक निधि से स्वीकृत विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित कार्य स्थानीय आवश्यकताओं से सीधे जुड़े होते हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

 

'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई को कृषि विकास की रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल दिया तथा किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और डिजिटल संसाधनों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने इस कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में दर्दनाक हादसा: रग्गी नाला में भूस्खलन, कई वाहनों पर गिरे पत्थर

doda landslide

जम्मू कश्मीर के डोडा जिले के रग्गी नाला में सोमवार को एक यात्री बस और कई अन्य गाड़ियों पर तेजी से गिरते पत्थरों की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। ALSO READ: कश्‍मीर में कई जगह फटे बादल, पुंछ और राजौरी में बारिश का कहर, 16 लोगों की मौत, दर्जनभर लापता

 

अधिकारियों ने बताया कि अचानक पत्थरों और मलबे के खिसकने से हाईवे पर मौजूद गाड़ियां इसकी चपेट में आ गईं, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ। बचाव दल तुरंत मौके पर पहुँचे और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया।

 

इस घटना के बाद, इलाके में मडस्लाइड (कीचड़ खिसकने) और लगातार गिरते पत्थरों के कारण हाईवे पर ट्रैफिक रोक दिया गया है।
 

अधिकारियों ने बताया कि अभी बहाली और सफाई का काम चल रहा है, लेकिन मौजूदा मौसम के हालात को देखते हुए इसमें काफी समय लगने की संभावना है।

 

यात्रियों को सलाह दी गई है कि जब तक मौसम ठीक नहीं हो जाता और सड़क को ट्रैफिक के लिए सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक इस रास्ते पर अनावश्यक यात्रा करने से बचें।

आज से मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र, UCC बिल पेश करेगी सरकार, जानें बिल का खास बातें?

Uniform civil code

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के आज से शुरु हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार में समान नागरिक संहिता से जुड़ा अहम विधेयक लाने जा रही है। विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही आज सरकार UCC से जुड़ा अहम बिल सदन में पेश कर सकती है। जिस पर मंगलवार को सदन में चर्चा हो सकती है। 

समान नागरिक संहिता को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि भारत के संविधान में बताए गए एक समानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक खास कदम है। इसे मध्य प्रदेश के निवासियों के लिएचाहे उनका धर्म कोई भी हो, शादी, तलाक, वैवाहिक झगड़ों से जुड़े भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के मकसद से बनाया गया है। 

 

मध्यप्रदेश UCC विधेयक की विशेषताएं- 


1-अनुसूचित जनजातियों को संरक्षण-संवैधानिक सुरक्षा-कवच का सम्मान करते हुए यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा, जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के भाग XXI के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है। कोड का परिभाषा वाला हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र को तय करता है। उत्तराधिकार से जुड़े जिन शब्दों की परिभाषा इसमें नहीं है, उनके लिए 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925' के अर्थ मान्य होंगे।

 

2-विवाह और तलाक से जुड़े बड़े सुधार-बहुविवाह-तीन तलाक पर पूर्ण रोक: यह कोड सभी समुदायों में केवल एक ही शादी (मोनोगैमी) को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। अमान्य सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों (जब तक परंपरा की अनुमति न हो) के बीच विवाह पर रोक लगाई गई है। मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है।

अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकता है। मौजूदा व्यवस्था के विपरीत, अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है। 

 

लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में 'MP ई-नगर पालिका पोर्टल' और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के ज़रिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए 'निकाह हलाला' जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।

 

3- बच्चों के अधिकार और कस्टडी-'अवैध' शब्द की समाप्ति: संहिता ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए कानूनी ढांचे से 'अवैध' (illegitimate) शब्द को पूरी तरह हटा दिया है। विवाहित या अविवाहित माता-पिता के बच्चों, जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से पैदा हुए सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा। कस्टडी से जुड़े किसी भी विवाद में माता-पिता के अधिकारों के मुकाबले “बच्चे का हित और सर्वांगीण भलाई” ही अदालत के फैसले का मुख्य और अनिवार्य आधार होगी।

 

4-उत्तराधिकार का एकसमान और जेंडर-न्यूट्रल ढांचा-लिंग-तटस्थ अधिकार: बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है, और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे। बिना वसीयत मरे व्यक्ति की संपत्ति को तीन वर्गों (क्लास-1, क्लास-2 और अन्य रिश्तेदार) में क्रमिक तरीके से बांटा जाएगा। पिछली पीढ़ियों के लिए एक 'यूनिट सिस्टम' और 'सर्वाइवरशिप का अधिकार' लागू किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या या उसमें मदद का दोषी है, तो वह विरासत से हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा। यदि किसी का कोई कानूनी वारिस नहीं है, तो 'एस्चीट' सिद्धांत के तहत संपत्ति राज्य को हस्तांतरित हो जाएगी।

 

5- वसीयत (Will) की पूर्ण स्वतंत्रता– एक नई धर्मनिरपेक्ष प्रणाली के तहत अब कोई भी स्वस्थ दिमाग का वयस्क अपनी 100% संपत्ति (स्वयं-अर्जित और पैतृक दोनों) वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है। इससे पुरानी 'अनिवार्य उत्तराधिकार' की सीमाएं (जैसे इस्लामी कानून में एक-तिहाई की सीमा) समाप्त हो गई हैं। यह प्रक्रिया 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' के तहत संचालित होगी।

 

6-लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य विनियमन (Live-in Relationship)-अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।

 

7-महिला पार्टनर और बच्चों को सुरक्षा- लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है। बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

sonam wangchuk hunger strike

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने के लिए राजी है लेकिन उन्होंने इसके लिए 3 शर्ते रखी है। ALSO READ: क्‍या अनशन खत्‍म करेंगे सोनम वांगचुक, अस्पताल में ही चलेगा इलाज, अनशन को लेकर क्‍या बोली पत्‍नी?

 

क्या है सोनम वांगचुक की 3 शर्ते?

समर्थकों को लिखे पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा कि आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, यदि—

 

(क) सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं (जैसे पेपर लीक आदि) की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

 

(ख) यदि मैं और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का नेतृत्व संसद पहुंच जाएं, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता हमें यह आश्वासन दें कि वे इस मुद्दे को संसद में अवश्य उठाएंगे।

 

(ग) यदि मेरी स्वास्थ्य स्थिति या अन्य कारणों से यह संभव न हो, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे ऊपर दिया गया आश्वासन दें। ALSO READ: Sonam Wangchuk News : 20 जुलाई को आजादी का दूसरा आंदोलन, सोनम का X पर पोस्ट, पत्नी की हाईकोर्ट में याचिका

 

पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा, सफदरजंग अस्पताल में कथित अवैध हिरासत से, जहां मेरी आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभी प्रकार के संचार के अधिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को वांगचुक को निजी अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और उपचार उनकी सहमति से किया जा रहा है।

संसद मार्च पर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से जिंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।

LIVE: CJP संसद मार्च पर अड़ी, दिल्ली में धारा 163 लागू

cjp protest delhi

Latest News Today Live Updates in Hindi : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी संसद मार्च पर अड़ी। दिल्ली में धारा 163 लागू। पल पल की जानकारी…

जम्मू-कश्मीर: कल रात से हो रही लगातार बारिश की वजह से रियासी ज़िले में चिनाब नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है और नदी का पानी कई निचले इलाकों में बहने लगा है।कांग्रेस के लोकसभा सांसद विपक्ष के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी लेने के लिए संसद में कांग्रेस संसदीय दल (CPP) के दफ्तर में सुबह 10.30 बजे मिलेंगे।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा, 'भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से ज़िंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।'

-संसद के मानसून सत्र और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

-पुलिस हाई अलर्ट पर है। 5000 से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया है।

-संसद, इंडिया गेट और VVIP इलाकों के आस-पास के संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

-दिल्ली पुलिस ने इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्टा होने पर रोक।

Top News 20 July: संसद का मानसून सत्र, CJP का संसद मार्च, स्पेन बना फीफा वर्ल्ड चैंपियन

top news 20 july

Top News 20 July : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च आज, दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति। ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। स्पेन ने 16 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता। इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत और 27 रनों से हराया। 20 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

आज से संसद का मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। चढ़ावा चोरी, नीट परीक्षा आदि मामलों पर संसद में हंगामा हो सकता है। राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधान वाला 'वंदे मातरम बिल' समेत पांच नए विधेयक भी इस सत्र में पेश होने जा रहे हैं। DMK ने परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए।

 

CJP का संसद मार्च

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े प्रदर्शनकारी आज संसद मार्च करेंगे। दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी है। राष्‍ट्रीय राजधानी में धारा 163 लागू। लिहाजा, जंतर-मंतर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है।  

 

रूस पर शिकंजे वाले बिल में ईरान भी!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। यह विधेयक रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने का प्रावधान करता है। इनमें भारत भी शामिल है।

 

स्पेन ने 16 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता

स्पेन ने अर्जेंटीना के 1-0  से हराकर दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। स्पेन ने इससे पहले 2010 में फीफा विश्‍व कप जीता था। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज्यादा गोल फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने किए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 10 गोल और 4 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट अपने नाम किया। ALSO READ: स्पेन ने अर्जेंटीना का सपना तोड़ा, 1-0 से जीतकर दूसरी बार बना FIFA वर्ल्ड कप चैंपियन; फेरन टोरेस ने किया विजयी गोल

 

27 रनों से जीता इंग्लैंड

इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर भारत के खिलाफ 27 रनों से जीत पाकर 3 मैचों की सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 3 विकेट खोकर 387 रन बनाए। इसके जवाब में भारत की टीम रोहित शर्मा के शतक के बावजूद 360 रन ही बना सकी। ALSO READ: स्पेन ने अर्जेंटीना का सपना तोड़ा, 1-0 से जीतकर दूसरी बार बना FIFA वर्ल्ड कप चैंपियन; फेरन टोरेस ने किया विजयी गोल

उत्तर प्रदेश में चंद महीनों में रिकॉर्ड आवेदन, 14 हजार से ज्यादा ओबीसी बेटियों को मिला शादी अनुदान का लाभ

Uttar Pradesh government's public welfare schemes are bringing about positive changes in people's lives

– योगी सरकार की पहल बनी आर्थिक कमजोर परिवारों का सहारा, 1.05 लाख आवेदकों को लाभ देने का लक्ष्य

– प्रति बेटी 20 हजार रुपए की मिलती है सहायता, दिव्यांग, विधवा और भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता

– इस वित्तीय वर्ष में 14,717 पात्र लाभार्थियों के खातों में पहुंचे 29.43 करोड़ रुपए

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना बेटियों के विवाह में बड़ी आर्थिक राहत बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के महज कुछ महीनों में ही इस योजना को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।

रिकॉर्ड संख्या में आवेदन प्राप्त होने के साथ ही अब तक 14 हजार से अधिक पात्र बेटियों को योजना का लाभ भी मिल चुका है। इससे स्पष्ट है कि सरकार की योजनाएं तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं और जरूरतमंद परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

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वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 82 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से पात्र पाए गए 14,717 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा चुका है। इसके लिए 29.43 करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा गया है। पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के कारण लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिए के समय पर सहायता मिल रही है।

 

1.05 लाख आवेदकों को लाभ देने का लक्ष्य 

योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 लाख 5 हजार पात्र आवेदकों को शादी अनुदान योजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। शुरुआती महीनों में ही बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होना इस बात का संकेत है कि योजना के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है।

सरकार का प्रयास है कि पात्र परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराकर बेटियों के विवाह से जुड़ी आर्थिक परेशानियों को कम किया जाए। बेटी की शादी अक्सर सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है। ऐसे में योगी सरकार की शादी अनुदान योजना इन परिवारों के लिए संबल बनकर सामने आई है। 

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प्रति बेटी 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता

योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। पूरी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपए तक है।

इसके अलावा विवाह के समय लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। आवेदन प्रक्रिया में दिव्यांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित तथा भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।

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सभी पात्र लाभार्थियों को दिया जा रहा लाभ

पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि शादी अनुदान योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। मात्र कुछ महीनों में ही 82 हजार से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। जिसमें पात्र आवेदकों को लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है तथा योगी सरकार पिछड़े वर्ग के उत्थान और विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।