US-Iran Peace Deal: होर्मुज और 300 अरब डॉलर की फंडिंग से लेकर और परमाणु हथियार तक…अमेरिका-ईरान MoU के 14 पॉइंट्स में क्या-क्या है?

US-Iran Peace Deal: कई हफ्तों की अटकलों के बाद अमेरिका और ईरान ने आखिरकार बहुप्रतीक्षित शांति समझौता ज्ञापन (MoU) पर आखिरकार साइन कर दिए हैं। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में हुए इस समझौते का 14 सूत्रीय मसौदा सार्वजनिक किया गया है। हालांकि यह अंतिम शांति संधि नहीं है। लेकिन यह दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण रोडमैप माना जा रहा है। समझौते की पहली शर्त के तहत अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू हो गया है।

यह युद्धविराम लेबनान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों पर लागू होगा। दोनों देशों ने भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या बल प्रयोग की धमकी नहीं देने का भी वादा किया है। इसके साथ ही अमेरिका ने संघर्ष के दौरान लगाए गए नौसैनिक को हटाने और युद्ध से संबंधित सैन्य तैनाती को वापस लेने पर सहमति जताई है।

समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलना है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक इस समुद्री रास्ते पर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का वादा किया है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है और तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

300 अरब डॉलर का फंड

आर्थिक मोर्चे पर अमेरिका ने ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के फंड का समर्थन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह राशि सीधे नहीं दी जाएगी। बल्कि ईरान द्वारा समझौते की शर्तों का पालन करने पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए कई प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने, तेल निर्यात की अनुमति देने और विदेशों में जमे ईरानी धन को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर भी सहमति व्यक्त की है।

परमाणु कार्यक्रम

परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी समझौते में महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। ईरान ने दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। साथ ही उसने अपने समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में डाउन-ब्लेंड करने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम को ऐसे स्तर तक कम किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में नहीं किया जा सकेगा, लेकिन वह शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए उपयोगी रहेगा।

जानें- डील की 14 मुख्य बातें

तत्काल सीजफायर

अमेरिका और ईरान के बीच सभी सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद होगी। यह सीजफायर लेबनान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों पर लागू होगा।

संप्रभुता का सम्मान

दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।

अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त

अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और संघर्ष के लिए तैनात सैन्य संसाधनों को वापस बुलाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलेगा

ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध आवाजाही बहाल करेगा।

300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड

अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के फंड का समर्थन करेगा।

प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत

अमेरिका ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान

डील में ईरान ने दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।

एनरिच्ड यूरेनियम का डाउन-ब्लेंडिंग

ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को IAEA की निगरानी में डाउन-ब्लेंड करेगा। यानी उसे हथियार-ग्रेड स्तर से नीचे लाया जाएगा।

60 दिनों तक कोई तनाव नहीं बढ़ेगा

वार्ता पूरी होने तक ईरान परमाणु गतिविधियां नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

तेल निर्यात फिर शुरू होगा

अमेरिका प्रतिबंधों में छूट देकर ईरान को तेल निर्यात और उससे जुड़े बैंकिंग लेनदेन की अनुमति देगा।

जमी हुई ईरानी संपत्तियों की रिहाई

विदेशों में फंसी ईरान की संपत्तियों तक उसकी पहुंच बहाल की जाएगी।

संयुक्त निगरानी तंत्र बनेगा

समझौते के पालन की निगरानी और विवादों के समाधान के लिए एक संयुक्त तंत्र स्थापित किया जाएगा।

कुछ मुद्दे अभी लंबित रहेंगे

सभी विवादित विषयों का समाधान इस MoU में नहीं किया गया है। बाकी मुद्दों पर आगे बातचीत होगी।

फाइनल डील को UN की मंजूरी

स्थायी शांति समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाएगी।

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Trading Plan: क्या यूएस फेड के फैसले के बाद बुल्स अपनी बढ़त रखेंगे जारी और बैंक निफ्टी को ले जाएंगे 58000 के पार?

Trading Plan : मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही निकट भविष्य में बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव या देखने को मिल सकता है,लेकिन बाजार का बड़ा रुझान पॉजिटिव ही रहने की उम्मीद है। इसके पीछे मजबूत टेक्निकल इंडिकेटर्स,US-Iran डील को लेकर बनी उम्मीद,तेल की कीमतों में नरमी और फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों में कोई बदलाव न करना जैसे कई कराण है। ऐसे में अगर निफ्टी अपने 24,000 के सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहता है तो आगे चलकर इसके 24,300–24,500 के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है।

अगर यह सपोर्ट लेवल टूटता है तो इंडेक्स 23,900–23,800 के जोनन तक गिर सकता है,जो एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है। वहीं,बैंक निफ्टी को 58,500–59,000 के लेवल तक पहुंचने के लिए 57,800–58,000 के रेजिस्टेंस जोन को मजबूती के साथ पार करना होगा। तब तक बाजार में रेंज-बाउंड ट्रेडिंग जारी रह सकती है,जिसमें बैंक निफ्टी के लिए 56,800 पर तत्काल सपोर्ट होगा।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह का कहना है कि हाल ही में बेंचमार्क इंडेक्स’निफ्टी’ने अपनी पिछली तेजी (अपवर्ड रैली) के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल के आसपास मज़बूत सपोर्ट लेकर तेज रिकवरी दिखाई। खास बात यह है कि पिछले गुरुवार के निचले स्तर से, इंडेक्स ने सिर्फ 5 ट्रेडिंग सेशन में 1,000 से ज्यादा अंकों की रिकवरी की है जो निचले स्तरों से मज़बूत खरीदारी आने का संकेत है। पॉजिटिव आउटलुक को और मजबूत करते हुए,इंडेक्स ने डेली चार्ट पर’फॉलिंग वेज पैटर्न’से ब्रेकआउट की पुष्टि की है,जिसे आमतौर पर’बुलिश रिवर्सल फॉर्मेशन’माना जाता है।

इस ब्रेकआउट के बाद,इंडेक्स ने अपने 20-डे और 50-डे EMA को फिर से हासिल कर लिया है और अब यह अपने 100-डे EMA के ऊपर जाने की कगार पर है, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेंड और मज़बूत हो रहा है। डेली RSI ने भी’फॉलिंग चैनल ब्रेकआउट’दिखाया है और 2 जनवरी, 2026 के बाद पहली बार 60 के स्तर से ऊपर पहुंचा गया है,जो बेहतर मोमेंटम का संकेत है।

हालांकि ट्रेंड की मजबूती बताने वाला इंडिकेटर 20 के लेवल से नीचे है और लगातार नीचे की ओर झुक रहा है,फिर भी +DI का -DI के ऊपर होना पॉजिटिव क्रॉसओवर दिखाता है,जो अंदरूनी मजबूती का संकेत है। इसके अलावा,MACD हिस्टोग्राम ऊपर की ओर मोमेंटम में लगातार तेजी का संकेत दे रहा है।

आगे इंडेक्स में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। निफ्टी धीरे-धीरे 24,300 की ओर जाता दिख सकता है। उसके बाद शॉर्ट टर्म में इसके 24,500 के स्तर तक बढ़ने की उम्मीद है। नीचे की तरफ,23,850–23,800 का जोन एक मज़बूत और तत्काल सपोर्ट का काम करेगा,जो किसी भी शॉर्ट-टर्म गिरावट के खिलाफ सेफ्टी देगा।

अहम रेजिस्टेंस: 24,300, 24,500

अहम सपोर्ट: 23,850, 23,800

स्ट्रैटेजी: 24,050 और 24,100 के बीच गिरावट आने पर निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें। स्टॉप-लॉस 23,900 और टारगेट 24,350 रखें।

Market cues : बाजार में तेजी जारी रहने के संकेत, 24100 के ऊपर टिकने पर निफ्टी में जल्द ही 24500 का लेवल मुमकिन

बैंक निफ्टी – आउटलुक और रणनीति

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी पिछले कुछ हफ्तों से लगातार निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इस मजबूती की पुष्टि बैंक निफ्टी-टू-निफ्टी रेश्यो चार्ट से भी होती है,जो तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। यह साफ तौर पर बैंकिंग सेक्टर के लगातार बेहतर प्रदर्शन और लीडरशिप को दिखाता है।

तकनीकी तौर पर,इंडेक्स अच्छी स्थिति में है और अपने अहम शॉर्ट और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है,और ये सभी ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं। यह एक अच्छा संकेत है जो मज़बूत अपट्रेंड को दिखाता है। मोमेंटम इंडिकेटर तेजी के रुख को सपोर्ट कर रहे हैं। डेली RSI पिछले चार सेशन से 60 के लेवल से ऊपर बना हुआ है और ऊपर की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा,MACD हिस्टोग्राम बुलिश मोमेंटम के मजबूत होने का संकेत दे रहा है,जिससे पॉज़िटिव सेंटीमेंट और मज़बूत हो रहा है।

इस मजबूत टेक्निकल सेटअप को देखते हुए,उम्मीद है कि बैंक निफ्टी अपनी तेजी जारी रखेगा और पहले 58,300 के लेवल को छुएगा और उसके बाद जल्द ही 59,000 के लेवल तक पहुंच सकता है। वहीं दूसरी ओर 56,800–56,700 का जोन तत्काल और मज़बूत सपोर्ट का काम कर सकता है।

अहम रेजिस्टेंस: 58,300, 59,000

अहम सपोर्ट: 56,800, 56,700

स्ट्रैटेजी: 57,500 और 57,600 के बीच बैंक निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें,जिसमें स्टॉप-लॉस 57,000 और टारगेट 58,700 रखें।

 

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दुनिया देखती रह गई और पाकिस्तान बन गया ‘किंगमेकर’! शहबाज शरीफ ने किया अमेरिका और ईरान ‘मेगा डील’ का ऐलान

US Iran Sign Islamabad MoU: खाड़ी में सीजफायर के बीच दुनिया के लिए एक और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को खत्म करने के लिए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अब यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है।

इस ऐतिहासिक शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि, ‘इस समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा, वहीं अमेरिका भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘तुरंत’ हटा लेगा’।

शहबाज शरीफ और कतर की मध्यस्थता से हुई डील

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने X पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर आज इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इस पर दस्तखत किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं’।

शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान, सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह की मेजबानी करेगा, जहां तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में शांति, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि की एक मजबूत नींव बताया।

ट्रंप ने वर्साय के महल में किए दस्तखत

व्हाइट हाउस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने वाले इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ वर्साय के महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वर्साय से रवाना होते समय ट्रंप ने खुद पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘यह साइन हो चुका है… मैंने वर्साय में इस पर दस्तखत किए हैं।’ हालांकि, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने इसका उल्लंघन किया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी के लिए अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी में मौजूद रहेगी।

ईरान ने भी की पुष्टि, लेबनान को लेकर हुआ बड़ा फैसला

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इर्ना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी समझौते के फाइनल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारियों के दस्तखत के बाद अब इस समझौते को लागू करने की परीक्षा है।

समझौते की ये है मुख्य बातें:

  1. ईरान ने साफ किया कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना और सीजफायर उनकी प्राथमिकता है। इस समझौते के शुरुआती क्लॉज में लेबनान का तीन बार जिक्र है और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है।
  2. समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत का दौर चलेगा।
  3. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।

ईरानी संसद के स्पीकर बोले- ‘हमारा हाथ ट्रिगर पर है’

भले ही समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हों, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका को लेकर अभी भी भारी अविश्वास है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने वाशिंगटन के प्रति गहरा संदेह जताते हुए कहा, ‘अमेरिका पर मेरा अविश्वास सबसे ज्यादा है। भले ही यह समझौता फाइनल हो जाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इसे मंजूरी दे दे, फिर भी अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है’।

होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, ‘ईरान के वहां संप्रभु अधिकार हैं और स्वाभाविक रूप से हम सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे। हमारा हाथ अभी भी ट्रिगर पर है।’

पीएम शरीफ ने इन नेताओं का जताया आभार

शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील तक पहुंचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शुक्रिया अदा किया। इसके अलावा उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र के नेतृत्व और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अथक प्रयासों की सराहना की।

‘भारतीय नाविकों की सुरक्षा जरूरी’… पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया 3 नाविकों की मौत का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को G7 समिट के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताई। इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा: “ईरान के साथ किसी भी समझौते में समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और हिफाजत पक्की की जानी चाहिए।” बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।

वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह पीड़ितों के परिवारों के लिए कोई संदेश या शोक संवेदना देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” उन्होंने समुद्री व्यापार में काम करने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वह “उन सभी लोगों से प्यार करते हैं।”

बुधवार को CNN-News18 के एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा: “मैंने भारतीय नाविकों के बारे में सुना। यह एक मुश्किल पेशा है। हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं।”

बता दें कि हमले के समय पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर सेट्टेबेलो (Settebello) पर कुल 28 लोग सवार थे। इनमें 24 भारतीय नागरिक और 4 विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी थे।

इस घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। वहीं, लापता नाविकों की तलाश तब तक जारी रहीं जब तक कि उनकी मौत की पुष्टि नहीं हो गई।

वहीं, अमेरिकी सेना ने जहाज पर हमला करने की बात मानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने टैंकर को तब निशाना बनाया जब उसने अमेरिकी नौसेना के कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की, जो अमेरिकी नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का उल्लंघन था।

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी रुकावटें आ रही हैं।

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होर्मुज खुला, लेकिन सिर्फ 60 दिन फ्री रहेगा:अमेरिका ₹28 लाख करोड़ देगा, बदले में ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा; समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल

अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। समझौते के मसौदे में शामिल 14 पॉइंट्स की पूरी डिटेल (क्रम बदल सकते हैं) पॉइंट-1: होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-2: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी। फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है। हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान ने 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा किया था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके। इन 11 टन सामग्री में करीब 440 किलो ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है। लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है। हालांकि, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। जैसे… पॉइंट-3: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है। हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। पॉइंट-4: ईरानी तेल के निर्यात पर छूट समझौते के बाद अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा। इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था। पॉइंट-5: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें मानने के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों में छूट ही वह सबसे बड़ा फायदा है, जो अमेरिका ईरान को समझौते के बदले दे सकता है। यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी। हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं। पॉइंट-6: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां रिलीज होंगी समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को छोड़ देगा। हालांकि, यह पैसा कब और कैसे जारी होगा, यह दोनों देश बातचीत से तय करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। पॉइंट-7: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी। पॉइंट-8: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-9: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है। पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-10: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष कोई नया दबाव न बनाएं। ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा। पॉइंट-11: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। पॉइंट-12: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आगे सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, मॉनीटरिंग कैसे होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं। पॉइंट-13: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं। हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है। पॉइंट-14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं। —————————————- अमेरिका- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें

Peace Deal: जंग खत्म, होर्मुज खुला…, US-ईरान ने ऐतिहासिक डील पर किया साइन, जानें 14 पॉइंटस में दोनों देशों के बीच किन-किन बातों पर बनी सहमति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वर्चुअली एक 14-पॉइंट वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किए हैं। इसका मकसद दोनों देशों के बीच जारी जंग को खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम

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Stock Market Today Prediction: गिफ्ट निफ्टी ने दिए पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, US-ईरान डील, फेड पॉलिसी से लेकर क्रूड ऑयल तक जानें बाजार को किन से मिलेगा सपोर्ट

Stock Market Today Prediction: गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के पॉजिटिव खुलने के संकेत मिल रहे है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स नए साइन किए गए अंतरिम US-ईरान एग्रीमेंट और घरेलू इक्विटीज़ के लगातार चौथे सेशन में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखने के बाद जारी विदेशी फंड फ्लो के असर का भी आकलन करेंगे।

GIFT निफ्टी सुबह करीब 8:31 बजे 24,100 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले निफ्टी फ्यूचर्स क्लोज से 147.50 पॉइंट्स या 0.61 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहा था, जो घरेलू इक्विटीज़ के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

यह सिग्नल बुधवार को सेंसेक्स के 347.14 पॉइंट्स और निफ्टी के 96.55 पॉइंट्स बढ़ने के बाद आया है, बेंचमार्क इंडेक्स ने अपनी हालिया रैली को जारी रखा क्योंकि जियोपॉलिटिकल चिंताएं कम होने और कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने सेंटिमेंट को सपोर्ट करना जारी रखा। निफ्टी कई महीनों में पहली बार 24,050 के निशान से ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 77,150 के ऊपर सेटल हुआ।

गुरुवार सुबह ग्लोबल संकेत मिले-जुले थे, लेकिन ज्यादा एशियाई मार्केट में तेजी के साथ कारोबार होता दिखाई दिया। इन्वेस्टर्स US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों के बीच साइन किए गए अंतरिम शांति समझौते के असर का अंदाजा लगा रहे थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच सीजफायर को बढ़ाता है और उम्मीद है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद मिलेगी, जबकि परमानेंट सेटलमेंट पर बातचीत जारी रहेगी।

जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स थोड़ा बदला। जापान का निक्केई एक नए रिकॉर्ड हाई पर चढ़ गया और पहली बार 71,000 का आंकड़ा पार कर गया, जिसे सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े स्टॉक्स में बढ़त का सपोर्ट मिला, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी लगभग 1 फीसदी बढ़ा।

US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव

हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा इंटरेस्ट रेट्स में कोई बदलाव नहीं करने के बाद वॉल स्ट्रीट रात भर नीचे बंद हुआ, लेकिन यह संकेत दिया कि पॉलिसीमेकर्स को इस साल के आखिर में रेट्स बढ़ने की संभावना अभी भी दिख रही है। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.98 परसेंट गिरा, S&P 500 1.21 परसेंट गिरा और नैस्डैक कंपोजिट 1.34 परसेंट गिरा।

फेड ने उम्मीद के मुताबिक रेट्स को 3.50-3.75 फीसदी की रेंज में बिना किसी बदलाव के रखा। हालांकि, अपडेटेड अनुमानों से पता चला है कि कई पॉलिसीमेकर्स 2026 के आखिर तक कम से कम एक बार रेट बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। नए फेड चेयर केविन वार्श ने महंगाई पर फोकस बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

US इक्विटीज़ में सतर्क रिएक्शन के बावजूद, तेल की कीमतों में तेज गिरावट से उभरते बाजारों में सेंटिमेंट को सपोर्ट मिला है। US और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते पर साइन करने के बाद ब्रेंट क्रूड 1.4 फीसदी और गिरकर लगभग $78.4 प्रति बैरल पर आ गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और ईरानी तेल एक्सपोर्ट पर US बैन हटाना शामिल है। US क्रूड $76 प्रति बैरल से नीचे ट्रेड कर रहा था।

पिछले हफ़्ते क्रूड की कीमतों में गिरावट भारतीय बाजारों के लिए एक बड़ी राहत रही है, जिससे महंगाई, करंट अकाउंट डेफिसिट और कॉर्पोरेट इनपुट कॉस्ट को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में निफ्टी और सेंसेक्स में क्रमशः लगभग 4 परसेंट और 4.5 परसेंट की बढ़त हुई है।

24,100-24,200 ज़ोन में दिख सकता है निफ्टी

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, फेड के कड़े रुख के बावजूद भारतीय बाजारों में सावधानी से पॉजिटिव रुझान बने रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “व्हाइट हाउस के यह कन्फर्म करने के बाद कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने पीस डील मेमोरेंडम पर फॉर्मल साइन कर दिए हैं, इन्वेस्टर का सेंटिमेंट मजबूत हुआ है, जो अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया में एक बड़ा कदम है।”

पोनमुडी ने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड का $74-76 प्रति बैरल रेंज में बने रहना भारत के महंगाई के आउटलुक, इंपोर्ट बिल और बड़े मैक्रोइकोनॉमिक माहौल को अच्छी राहत दे रहा है।

टेक्निकल फ्रंट पर, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी 24,000 के अहम निशान से ऊपर बने रहने के बाद पॉजिटिव स्ट्रक्चर बनाए हुए है। तुरंत रेजिस्टेंस 24,100-24,200 ज़ोन में दिख रहा है, जबकि सपोर्ट 24,000 और 23,900 के आसपास है। 24,200 से ऊपर लगातार बने रहने से 24,400 की ओर रैली का रास्ता खुल सकता है।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; RVNL, Lemon Tree और Lupin समेत इन स्टॉक्स पर खास वजहों से रहेगी नजर

Stocks to Watch: अमेरिकी फेड के ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले और अमेरिका-ईरान के शांति समझौते पर दुनिया के अधिकतर बाजारों से मजबूत रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 121.00 प्वाइंट्स यानी 0.51% की बढ़त के साथ 24,076.50 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 17 जून को सेंसेक्स (Sensex) 347.14 प्वाइंट्स यानी 0.45% के उछाल के साथ 77,155.62 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 96.55 प्वाइंट्स यानी 0.40% की बढ़त के साथ 24,085.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL)

रेल विकास निगम को ईस्ट कोस्ट रेलवे से भद्रक-विजयनगरम सेक्शन पर नेरगुंडी-बारंग और खुर्दा रोड-विजयनगरम के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए EPC मोड पर पुल बनाने के लिए ₹967.92 करोड़ का काम मिला है।

HFCL

एचएफसीएल को उत्तर प्रदेश में भारतनेट फेज-III प्रोजेक्ट के लिए रेल विकास निगम से ₹2,666.09 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में टेलीकॉम इक्विपमेंट और उससे जुड़े सामानों की सप्लाई, ऑप्टिकल फाइबर केबल टेलीकॉम नेटवर्क बनाना और 10 साल तक प्रोजेक्ट का रखरखाव करना शामिल है।

Bosch Home Comfort

प्रमोटर बॉश ग्लोबल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज 18-19 जून को ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के जरिए बॉश होम कम्फर्ट में 7.97% तक हिस्सेदारी (21.7 लाख शेयर) बेचेगी। कुल ऑफर साइज में 0.75% का ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल है। फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹1,150 तय किया गया है।

Lemon Tree Hotels

लेमन ट्री होटल्स ने राजस्थान के श्री गंगानगर में लेमन ट्री होटल खोलने का ऐलान किया है जिसके बाद राजस्थान में इसके होटलों की संख्या 23 हो गई है। इस होटल का मैनेजमेंट कंपनी की सब्सिडियरी कार्नेशन होटल्स करेगी।

Balkrishna Industries

बालकृष्ण इंडस्ट्रीज के बोर्ड ने Saroj Kumar Khuntia को कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है, जो 18 जून से प्रभावी होगा। वहीं मधुसूदन बजाज रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने पर कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और KMP (की मैनेजेरियल पर्सनल) के पद से हट गए।

Lupin

लुपिन ने अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने ANDA (एब्रिविएटेड न्यू ड्रग एप्लीकेशन) को मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका में 40mg और 80mg की एजिलसार्टन मेडोक्सोमिल टैबलेट लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह एज़ुरिटी फार्मा की ‘एडार्बी’ (Edarbi) दवा का बायोइक्विवैलेंट है। इसका इस्तेमाल वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए किया जाता है।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Corona Remedies

प्राइवेट इक्विटी फर्म क्रिसकैपिटल की सहयोगी कंपनी सेपिया इन्वेस्टमेंट्स ने कोरोना रेमेडीज के 43.28 लाख शेयर (7.07% हिस्सेदारी) ₹748.9 करोड़ में बेच दी। इसके अलावा एंकर पार्टनर्स (Anchor Partners) ने भी कंपनी के 1.61 लाख शेयर (0.26% हिस्सेदारी) ₹28 करोड़ में बेच दी। ये ब्लॉक डील प्रति शेयर ₹1,730 के भाव पर हुईं। मार्च 2026 तक सेपिया इन्वेस्टमेंट्स की इस फार्मा कंपनी में 19.76% हिस्सेदारी (1.2 करोड़ शेयर) थी।

कोरोना रेमेडीज की इस ब्लॉक डील में एबरडीन एशियन स्मॉलर कंपनीज इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट पीएलसी, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, फैक्ट्री म्यूचुअल इंश्योरेंस कंपनी, टीसीडब्ल्यू व्हाइट ओक इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड, अशोका व्हाइटओक इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी एक्स-चाइना फंड, व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड, इनवेस्को म्यूचुअल फंड और कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड जैसे देशी-विदेशी निवेशकों ने हिस्सा लिया।

DOMS Industries

इटैलियन स्टेशनरी और विदेशी प्रमोटर FILA (Fabbrica Italiana Lapis ed Affini) ने डोम्स इंडस्ट्रीज में 7% इक्विटी हिस्सेदारी (42.48 लाख शेयर) ₹934.7 करोड़ में बेच दी। इनमें से 23.4 लाख शेयरों की बिक्री प्रति शेयर ₹2,200.55 और 19.08 लाख शेयरों की बिक्री प्रति शेयर ₹2,200.07 के भाव पर हुई। वहीं दूसरी तरफ एक्सिस म्यूचुअल फंड ने ₹79.56 करोड़ के अतिरिक्त 3.61 लाख शेयर और एसबीआई म्यूचुअल फंड ने ₹284.77 करोड़ के 12.94 लाख शेयर खरीदे। यह खरीदारी प्रति शेयर ₹2,200 के भाव पर हुई।

Finolex Industries

एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने पीवीसी पाइप बनाने वाली कंपनी फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज के प्रति शेयर ₹169.71 के भाव पर 42.7 लाख शेयर और ₹169.62 के भाव पर 37.77 लाख शेयर यानी 80.47 लाख शेयर (1.29% हिस्सेदारी) ₹136.54 करोड़ में बेच दी। मार्च 2026 तक एचडीएफसी लाइफ के पास कंपनी में 1.3% हिस्सेदारी (80.5 लाख शेयर) थी।

Baazar Style Retail

गर्ग ब्रदर्स ने बाजार स्टाइल रिटेल के 8.75 लाख शेयर (1.14% हिस्सेदारी) ₹28.76 करोड़ में प्रति शेयर ₹328.72 के भाव पर बेच दी। मार्च 2026 तक गर्ग ब्रदर्स के पास बाजार स्टाइल रिटेल में 1.38% हिस्सेदारी (10.51 लाख शेयर) थी।

लिस्टिंग

आज सुसान इलेक्ट्रिकल्स की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

आज एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, टाटा टेक्नोलॉजीज, जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक, ईमुद्रा, जीएचसीएल, मोनिका अल्कोबेव, स्वास्तिक इन्वेस्टस्मार्ट और विमटा लैब्स के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो ओएसिसि सिक्योरिटीज के राइट्स की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

आज कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : बाजार में तेजी जारी रहने के संकेत, 24100 के ऊपर टिकने पर निफ्टी में जल्द ही 24500 का लेवल मुमकिन

Trade setup for today : निफ्टी 50 ने लगातार चौथे सेशन में अपनी बढ़त बनाए रखी। यह सोमवार से ही 50-डे EMA के ऊपर टिका हुआ है। 17 जून को US फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों से पहले यह 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इस बैठक में सेंट्रल बैंक ने फेडरल फंड्स रेट में कोई बदलाव नहीं किया। इंडेक्स ने 24,100 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के पास बंद होकर’लोअर हाई-लो’स्ट्रक्चर को खत्म कर दिया। उधर शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे। इन्हें अच्छे मोमेंटम इंडिकेटर्स,गिरते VIX और वेस्ट एशिया में तनाव कम होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला।

तेजड़ियों के लिए,इंडेक्स को 24,500 के रेजिस्टेंस लेवल (जो 200-दिन के DEMA के पास है) तक ले जाने के लिए 24,100 के लेवल को पार करना और उसके ऊपर बने रहना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नीचे की तरफ 23,900–23,800 के जोन में तत्काल सपोर्ट मिल सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,002, 23,969 और 23,916

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,107, 24,140 और 24,193

निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक बुलिश कैंडल बनाई,जिसमें ऊपर और नीचे की तरफ छोटी शैडो (shadows) थीं। इससे संकेत मिलता है कि 24,100 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के आसपास पॉजिटिव रुख के साथ इंडेक्स एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में 50-डे EMA के ऊपर बना रहा और 100-डे EMA के करीब पहुंच गया,जबकि शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे। RSI बढ़कर 60.87 हो गया,जबकि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का पॉज़िटिव गैप और बढ़ गया। बढ़ते हुए हरे हिस्टोग्राम बार से ये बातें पता चलती हैं। ये सभी इंडिकेटर निकट भविष्य में बुलिश मोमेंटम के मज़बूत होने का संकेत दे रहे हैं।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,646, 57,746 और 57,908

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,323, 57,223 और 57,061

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,617, 55,897

बैंकिंग इंडेक्स में 0.5% की बढ़त हुई और डेली टाइमफ्रेम पर इसने’लोअर शैडो’के साथ एक’बुलिश कैंडल’बनाई। यह सीमित दायरे में हो रही ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव संकेत बने रहने के संकेत हैं। इंडेक्स अप्रैल के अपने उच्चतम स्तर से ऊपर बंद हुआ और सभी अहम’मूविंग एवरेज’से काफी ऊपर टिका रहा। 20-दिन का EMA, 50-दिन के EMA के ऊपर चला गया है,जबकि 10-दिन का EMA, 200-दिन के EMA के ऊपर जाने की कगार पर है। RSI बढ़कर 69.15 पर पहुंच गया और MACD में बुलिश क्रॉसओवर बना रहा,साथ ही हरे हिस्टोग्राम बार भी बढ़ते रहे। ये सभी इंडिकेटर बैंकिंग इंडेक्स में लगातार मजबूती और पॉजिटिव मोमेंटम की ओर इशारा करते हैं।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

17 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट खरीदार रहे। इन्होनें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी नेट खरीदार बने रहे और उन्होंने सेशन के दौरान 1,561 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया।

इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाले India VIX में 1.31% की गिरावट आई और यह 13.19 पर बंद हुआ। यह 26 फरवरी के बाद का इसका सबसे निचला क्लोजिंग लेवल है,जो दिखाता है कि तेजी की उम्मीद रखने वाले निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। VIX में लगातार गिरावट से बाजार के लोगों का भरोसा और बढ़ने और अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 17 जून को पिछले सेशन के 1.08 से बढ़कर 1.1 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

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LPG Price Today: देश में कहां सबसे सस्ता और कहां सबसे महंगा LPG सिलेंडर? देखें पूरी लिस्ट

LPG Price Today: LPG सिलेंडर खरीदने वालों के लिए आज राहत की खबर है। 18 जून को घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर ₹942 में मिल रहा है, जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3,113.50 बनी हुई है। इंडियन ऑयल के ताजा रेट के अनुसार, देश में सबसे महंगा घरेलू एलपीजी सिलेंडर लेह में ₹1,179 का है, जबकि सबसे सस्ता सिलेंडर मुंबई में ₹941 में उपलब्ध है।

इन शहरों में ₹1,000 से कम में मिल रहे सिलेंडर

मुंबई में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम ₹941.50 हैं। जबकि बेंगलुरु में ₹944.50, अहमदाबाद और गुरुग्राम में ₹949, जयपुर में ₹952.50 और गोवा में ₹956 हैं। वहीं, चेन्नई में घरेलू सिलेंडर के रेट ₹957.50, कोलकाता में ₹968, हैदराबाद में ₹994 और लखनऊ में ₹976.50 हैं।

3,700 रुपये के पार कमर्शियल सिलेंडर

होटल और रेस्टोरेंट में यूज किए जाने वाले 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें भी अलग-अलग शहरों में काफी अलग हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर लेह में ₹3,752 का मिल रहा है, जबिक नॉर्थ त्रिपुरा में इसकी कीमत ₹3,638, गंगटोक में ₹3,631.50, वेस्ट इंफाल में ₹3,599 और आइजॉल में ₹3,595.50 है।

इसके अलावा अंडमान में कमर्शियल सिलेंडर ₹3,544, श्रीनगर में ₹3,458 और हैदराबाद में ₹3,367 का बिक रहा है। वहीं, मुंबई में यही कमर्शियल सिलेंडर ₹3,067.50 में उपलब्ध है, जो कई शहरों के मुकाबले काफी सस्ता है।

इन शहरों में सिलेंडर 1000 के पार

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी राज्यों और शहरों के हिसाब से बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। सबसे महंगा 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर लेह में ₹1,179 का बिक रहा है। इसके बाद नॉर्थ त्रिपुरा में इसकी कीमत ₹1,119.50, गंगटोक में ₹1,094.50, आइजॉल में ₹1,094 और वेस्ट इंफाल में ₹1,093.50 है। वहीं, श्रीनगर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹1,058 में उपलब्ध है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मैदानी इलाकों में सिलेंडर की कीमतें पहाड़ी इलाकों से कम होती हैं। क्योंकि पहाड़ी इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से परिवहन लागत बढ़ जाता है। जिस कारण लोगों को एलपीजी सिलेंडर के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं।

सबसे सस्ती LPG दुनिया में कहां मिलती है

दुनिया के कई ऊर्जा उत्पादक देशों में एलपीजी भारत के मुकाबले काफी सस्ती मिलती है। सऊदी अरब, रूस, कजाकिस्तान और अल्जीरिया जैसे देशों में गैस की कीमतें काफी कम हैं। अनुमान के मुताबिक, अल्जीरिया में 14.2 किलो का एलपीजी सिलेंडर करीब ₹233 का पड़ता है। वहीं, अंगोला में इसकी कीमत लगभग ₹505 और कजाकिस्तान में करीब ₹592 है।

यह तुलना अंतरराष्ट्रीय LPG की खुदरा कीमतों (रुपये प्रति लीटर) पर आधारित अनुमान है। अलग-अलग देशों में सिलेंडर का साइज, टैक्सए सब्सिडी और वितरण लागत अलग होती है। इसलिए वास्तविक बाजार कीमतें कुछ अलग हो सकती हैं।

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