ममता बनर्जी के साथ साये की तरह रहने वाले पुलिस वालों को हटाया, क्या है इनसाइड स्टोरी?

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने उनके पुराने सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को हटाकर नई टीम तैनात की, लेकिन ममता बनर्जी ने नए सुरक्षाकर्मियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

टीएमसी के मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ करीब 20 साल से जुड़े सुरक्षा अधिकारी अचानक हटा दिए गए हैं। इसके बाद उनके कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर फिलहाल कोई आधिकारिक सरकारी सुरक्षा तैनात नहीं है। पार्टी का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो निजी गार्ड लगाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के पांच पीएसओ उस समय से उनके साथ थे जब वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री थीं। बाद में 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इन अधिकारियों को राज्य पुलिस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया था। हाल ही में उन्हें उनकी मूल यूनिट में वापस भेजने के निर्देश दिए गए, जबकि कोलकाता पुलिस ने उनकी जगह तीन नए सुरक्षाकर्मी भेजे। ममता ने इन नए अधिकारियों को स्वीकार नहीं किया।

मामला तब चर्चा में आया जब टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी के पुराने सुरक्षा अधिकारी हटा दिए गए हैं और उनके घर के बाहर कोई सुरक्षा तैनात नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पूरी रात अपने वाहन के साथ घर के बाहर मौजूद रहेंगे, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।

टीएमसी ने इस कदम को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह ममता बनर्जी को अलग-थलग करने और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है।

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राजनीति का नहीं, बल्कि सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी का विषय है।

वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता को बिना जानकारी दिए लंबे समय से जुड़े सुरक्षाकर्मियों को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु से पुराने सुरक्षा इंतजाम बहाल करने और ममता के दो पुराने पीएसओ को वापस लाने की मांग की।

टीएमसी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा समर्थित नई सत्ता व्यवस्था आने के बाद से ममता बनर्जी के आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे कम की गई है। पहले हरिश चटर्जी स्ट्रीट पर लगे बैरिकेड हटाए गए और अब उनके पुराने सुरक्षाकर्मियों को भी हटा दिया गया है।

इसके अलावा, ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर की सुरक्षा भी सरकार बदलने के बाद वापस ले ली गई थी।

फिलहाल इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताकर भाजपा और राज्य प्रशासन पर लगातार निशाना साध रही है।

ममता बनर्जी की सुरक्षा हटाने के आरोपों को कोलकाता पुलिस ने किया खारिज

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने जानबूझकर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है। 

बुधवार रात टीएमसी के दो राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन और सागरिका घोष तथा लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के सामने मौजूद पुलिस चौकी खाली दिखाई दे रही थी। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रशासन के निर्देश पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था हटा दी गई है।

हालांकि, राज्य पुलिस के सूत्रों ने इन दावों को गलत बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ममता बनर्जी की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। केवल उनकी सुरक्षा में तैनात दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बदला गया है।

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पुलिस सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी चाहती थीं कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, उस दौरान उनकी सुरक्षा संभालने वाले दो कोलकाता पुलिस अधिकारियों को ही उसी ड्यूटी पर बनाए रखा जाए। लेकिन सरकारी नियमों के तहत किसी अधिकारी की नियुक्ति या तैनाती व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं की जा सकती।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा सुरक्षा अधिकारियों का तबादला ड्यूटी रोस्टर और तय सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार होता है। इस मामले में भी सामान्य प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, जिन दो नए सुरक्षा अधिकारियों को बुधवार रात कालीघाट स्थित आवास पर भेजा गया था, उन्हें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों ने ड्यूटी संभालने की अनुमति नहीं दी। बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री उन अधिकारियों से परिचित नहीं थीं।

इस बीच, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा कम नहीं बल्कि और मजबूत की गई है। बुधवार से उनके घर के बाहर ऊंचे सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए गए हैं।

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इंग्लैंड मैच जीत गया, लेकिन 33 साल की इस ग्लैमरस लड़की ने लूट ली सारी लाइमलाइट

क्रोएशिया की सोशल मीडिया सेंसेशन और मॉडल Ivana Knoll एक बार फिर फुटबॉल वर्ल्ड कप में छा गई हैं। “वर्ल्ड कप की सबसे हॉट फैन” के नाम से मशहूर इवाना ने 2026 टूर्नामेंट में अपनी पहली मौजूदगी से ही सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया।

 

बुधवार को AT&T Stadium में इंग्लैंड और क्रोएशिया के मुकाबले के दौरान इवाना स्टैंड्स में नजर आईं। हमेशा की तरह उन्होंने क्रोएशिया की पहचान वाला रेड-एंड-व्हाइट चेकर्ड आउटफिट पहना था, जिसने फैंस का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लिया।

 

मैच के दौरान इवाना ने अपनी कई तस्वीरें और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किए, जिन्हें उनके लाखों फॉलोअर्स ने जमकर पसंद किया। उनका बोल्ड और स्टाइलिश अंदाज़ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

 

2022 वर्ल्ड कप से मिली थी ग्लोबल पहचान

 

इवाना पहली बार 2022 के कतर वर्ल्ड कप में दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी थीं। उस समय उन्होंने अपने ग्लैमरस आउटफिट्स से काफी सुर्खियां बटोरी थीं। कतर के सख्त ड्रेस कोड के बावजूद उन्होंने अपने स्टाइल से इंटरनेट पर अलग पहचान बना ली थी।

 

पूर्व मिस क्रोएशिया रह चुकी इवाना का जन्म जर्मनी में हुआ था, लेकिन बाद में उनका परिवार ज़ाग्रेब शिफ्ट हो गया। 2016 में मिस क्रोएशिया पेजेंट से उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा, लेकिन असली लोकप्रियता उन्हें फुटबॉल स्टेडियम्स से मिली।

 

अब सिर्फ फुटबॉल नहीं, F1 में भी छाईं

 

फुटबॉल के अलावा इवाना अब Formula 1 इवेंट्स में भी लगातार दिखाई देती हैं। हाल ही में मियामी ग्रां प्री के दौरान वह फिर वायरल हो गई थीं, जब लाइव टीवी कवरेज के बीच उनका अचानक कैमरे में आ जाना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

 

Sky Sports के शो के दौरान Simon Lazenby, Naomi Schiff और Jenson Button कैमरे पर मौजूद थे, तभी इवाना वहां से गुजरती दिखाई दीं। कुछ सेकंड का यह मोमेंट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया।

 

 DJ बनकर भी जीत रहीं दिल

 

इवाना अब सिर्फ मॉडल या फुटबॉल फैन नहीं रहीं। उन्होंने DJ के तौर पर भी अपनी नई पहचान बनाई है। हाल ही में उन्होंने लॉस एंजेलिस में FIFA Fan Festival में लाइव DJ परफॉर्मेंस दी, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया।

 

सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और आज उन्हें दुनिया की सबसे चर्चित स्पोर्ट्स फैंस में गिना जाता है।

Cotton Production: USDA ने जारी की रिपोर्ट, 2026-27 के ग्लोबल उत्पादन अनुमान पर है कायम

यूएसडीए (USDA) ने अपनी जून की वर्ल्ड एग्रीकल्चर सप्लाई एंड डिमांड एस्टीमेट (WASDE) रिपोर्ट में वर्ष 2026-27 के लिए वैश्विक कपास उत्पादन लगभग 116 मिलियन गांठ अनुमानित है। इसके मुकाबले खपत में बढ़ोतरी (लगभग 121.7 मिलियन गांठ) होने के आसार हैं, जो इसे 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा सकती है। मांग में वृद्धि और कम शुरुआती स्टॉक के कारण वैश्विक अंतिम स्टॉक में गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

USDA को चीन में मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि कॉटन की मांग बांग्लादेश, पाकिस्तान में गिरी। साउथ कोरिया में कॉटन की मांग गिरी। कॉटन की ग्लोबल खपत मई में 121.69 मिलियन बेल्स (अनुमान) रहा जबकि जून में 121.76 मिलियन बेल्स (अनुमान) रहा।

कॉटन के ओपनिंग स्टॉक पर USDA ने कहा कि मई 2026-27 में 77.27 मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है। जबकि जून के लिए 76.63मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है। जबकि कॉटन के क्लोजिंग स्टॉक पर USDA ने जून के लिए 71.13 मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है।

भारत में कॉटन उत्पादन अनुमान

USDA ने मई का उत्पादन अनुमान कायम रखा है। 2026-27 में 24 मिलियन बेल्स उत्पादन संभव है। 2026-27 में 26 मिलियन बेल्स की खपत संभव है। 1.50 मिलियन बेल्स के एक्सपोर्ट की भी उम्मीद है। 2026-27 में 2.50 मिलियन इंपोर्ट की संभावना है।

15 जुलाई से UK FTA लागू

भारत-UK के बीच FTA 15 जुलाई से लागू होगा । भारत के 99% सामान पर UK में कोई टैक्स नहीं लगेगा । टेक्सटाइल, गारमेंट, केमिकल और बेस मेटल पर जीरो ड्यूटी होगी। अभी टेक्सटाइल, गारमेंट पर करीब 12% ड्यूटी लगती है। केमिकल पर 8% और बेस मेटल पर 10% ड्यूटी है। प्रोसेस फूड पर इंपोर्ट ड्यूटी 70% से घटकर जीरो होगी। मरीन प्रोडक्ट पर UK में इपोर्ट डूयटी 20% से घटकर जीरो होगी। UK के 91% एक्सपोर्ट पर भारत में ड्यूटी में रियायत मिलेगी। UK की व्हीस्की पर भारत में इंपोर्ट ड्यूटी 150% से घटकर 40% पर रहा। UK कार पर भारत में इंपोर्ट ड्यूटी 100% से घटकर 10% तक आएगी। कई चरणों में UK कार पर इंपोर्ट ड्यूटी में कमी आएगी।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Mumbai Water Crisis: मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले वॉटर रिजर्वायर में अब सिर्फ 10% स्टॉक! इन चीजों पर तो पड़ने लगा फौरन असर

Mumbai Water Crisis: मुंबई में पीने के पानी की सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों (वॉटर रिजर्वायर) में पानी का स्टॉक घटकर कुल उपयोगी क्षमता का सिर्फ 10.01 प्रतिशत रह गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने में हो रही देरी के बीच मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने पानी की भारी किल्लत से निपटने के लिए बड़े और कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पानी की इस भारी कमी का सीधा और फौरन असर मुंबई के कई सेक्टरों पर दिखने लगा है। इसमें कंस्ट्रक्शन से लेकर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और स्विमिंग पूल्स तक शामिल हैं।

जलाशयों में पानी की ताजा स्थिति (बुधवार तक के आंकड़े)

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएमसी के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को सातों झीलों में कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का केवल 10.01 प्रतिशत यानी 144918 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध था। हालांकि, यह स्टॉक पिछले दो वर्षों की इसी अवधि की तुलना में थोड़ा बेहतर है। पिछले साल इसी दिन 141510 मिलियन लीटर (9.78%) पानी था। 2024 में यह आंकड़ा 77851 मिलियन लीटर (5.38%) दर्ज किया गया था।

आपको बता दें कि मुंबई को रोजाना करीब 4000 मिलियन लीटर पीने के पानी की सप्लाई करने वाली सातों झीलों की कुल उपयोगी भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर है। वर्तमान में विभिन्न झीलों में पानी की स्थिति इस प्रकार है:-

भातसा (ठाणे जिला- सबसे बड़ा स्रोत): 66,627 मिलियन लीटर (उपयोगी क्षमता का 9.29%)

मोदक सागर: 37,933 मिलियन लीटर (29.42%)

मिडल वैतरणा: 20,008 मिलियन लीटर (10.34%)

विहार (मुंबई के भीतर): 42.11% क्षमता

तुलसी (मुंबई के भीतर): 23.06% क्षमता

(नोट: सातों झीलों में भातसा, अपर वैतरणा, मिडल वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, विहार और तुलसी शामिल हैं।)

इन चीजों पर पड़ा फौरन और सीधा असर

पानी के गिरते स्तर को देखते हुए मंगलवार को एक समीक्षा बैठक बुलाई गई। इसके बाद बीएमसी ने पीने के पानी को सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है। बीएमसी ने निर्माण स्थलों के लिए नए पानी के कनेक्शन जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही मौजूदा साइटों को दी जाने वाली सप्लाई में भी कटौती की गई है।

मुंबई में चल रहे सभी स्विमिंग पूल्स और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए पानी की सप्लाई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बीएमसी ने औद्योगिक, कमर्शियल और खेल प्रतिष्ठानों को दी जाने वाली पानी की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। ये कटौती 17 जून से प्रभावी हो गई है। इसके पहले 15 मई से ही पूरे शहर में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू है।

सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, आरसीएफ, एचपीसीएल, बीपीसीएल, नेवी, एमआईडीसी और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी जैसे बड़े प्रतिष्ठानों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिचालन और माध्यमिक कार्यों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का दोबारा उपयोग करें।

रियल एस्टेट और होम डिलीवरी पर संकट के बादल

बीएमसी द्वारा कंस्ट्रक्शन साइट्स के पानी पर रोक लगाने से मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट में हड़कंप मच गया है। इससे नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मंजूरियों और उनकी लॉन्चिंग पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। इससे इस साल पूरे होने वाले हजारों घरों की डिलीवरी समय पर होने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म ‘एनरॉक’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मुंबई में लगभग 1.43 लाख घर बनकर तैयार होने वाले हैं। अगर पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की बात करें, तो करीब 2.07 लाख घर निर्माण के अंतिम चरण में हैं। एमएमआर में वर्तमान में लगभग 6.86 लाख आवास इकाइयां निर्माणाधीन हैं। इनमें से 75% से अधिक (लगभग 5.15 लाख इकाइयां) अकेले मुंबई में स्थित हैं।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: रुक सकती है रफ्तार

एनरॉक के मुताबिक इस फैसले का तत्काल असर चल रहे निर्माण कार्यों के बजाय प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और अप्रूवल पर अधिक महसूस होगा। निर्माण कार्य के लिए साइटें मुख्य रूप से भूजल और गैर-पेय स्रोतों पर निर्भर रहती हैं, जबकि बीएमसी के पानी का उपयोग मुख्य रूप से वहां काम करने वाले मजदूरों के कल्याण और पीने के लिए किया जाता है। इस पाबंदी से कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने की स्थिति और मजदूरों की उत्पादकता प्रभावित होगी, जो पहले से ही वैश्विक संघर्षों के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और लेबर शॉर्टेज से जूझ रहे हैं।

यह पाबंदी मुंबई के कुछ खास माइक्रो-मार्केट्स के लिए स्थानीय जोखिम पैदा कर सकती है। इनमें दक्षिण मुंबई, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), अंधेरी, बोरीवली और मुलुंड शामिल हैं। अगर मानसून की स्थिति और बिगड़ती है और एमएमआर के अन्य नगर निगम भी बीएमसी की राह पर चलते हैं तो पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण जारी सप्लाई चेन व्यवधानों के बीच साल 2026 में होम डिलीवरी पर गंभीर दबाव आ सकता है। यह स्थिति महामारी के दौर की याद दिला सकती है जब योजनाबद्ध घरों में से केवल 46% की ही वास्तविक डिलीवरी हो पाई थी।

नारेडको (NAREDCO) महाराष्ट्र के अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने भी चिंता जताते हुए कहा कि कंक्रीटिंग, क्योरिंग, प्लास्टरिंग और फिनिशिंग जैसे निर्माण कार्य पूरी तरह से पानी की विश्वसनीय आपूर्ति पर निर्भर होते हैं। लंबे समय तक होने वाला व्यवधान प्रोजेक्ट्स के शेड्यूल को प्रभावित कर सकता है, निर्माण लागत बढ़ा सकता है और घरों व इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी कर सकता है।

मानसून में देरी और अल नीनो का साया

मुंबई में आमतौर पर मानसून 10 जून के आसपास दस्तक दे देता है, लेकिन इस साल इसकी शुरुआत में देरी हुई है। पिछले साल मानसून मई में ही समय से काफी पहले आ गया था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बार अल नीनो (El Niño) की स्थिति विकसित होने की संभावना जताई है, जिससे मानसून की रफ्तार और इसके वितरण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में मानसून मुंबई पहुंच सकता है जिससे बीएमसी और मुंबईकरों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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UP ने पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार किया, 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात (Export) किया है, जिससे 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के उसके लक्ष्य को मजबूती मिली है। DGCIS के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का निर्यात बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह पिछले साल के 1,86,060 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.16 फीसदी ज्यादा है।

खास बात यह है कि यूपी की निर्यात वृद्धि देश के औसत 5.45 फीसदी से काफी बेहतर रही। इससे पता चलता है कि राज्य में मैन्युफैक्चरिंग (प्रोडक्शन), उद्योग और वैश्विक बाजारों तक पहुंच लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक के बाद उत्तर प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य है।

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के यूपी चैप्टर के चेयरमैन मुकेश सिंह ने कहा कि निर्यात में बढ़ोतरी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। इससे रोजगार बढ़ेंगे, निवेश आएगा, MSME (छोटे और मध्यम उद्योग) मजबूत होंगे और यूपी के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर निर्यात लगातार बढ़ता रहा तो यूपी के 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी। ज्यादा निर्यात का मतलब है कि राज्य में बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और विदेशी मुद्रा की आमद भी बढ़ेगी। इसका फायदा छोटे उद्योगों, कारीगरों और किसानों तक पहुंचेगा, जो निर्यात से जुड़े कारोबार का हिस्सा हैं।

योगी आदित्यनाथ सरकार भी राज्य की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, डेटा सेंटर और जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं से निर्यात को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यूपी सरकार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि 2 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए निर्यात को और तेजी से बढ़ाना होगा। सरकार आने वाले वर्षों में निर्यात को 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए नए निर्यात केंद्र बनाए जाएंगे, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं बेहतर की जाएंगी, एयर कार्गो नेटवर्क का विस्तार होगा और निर्यातकों के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाई जाएंगी।

FICCI यूपी चैप्टर के चेयरमैन मनोज गुप्ता और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल का कहना है कि निर्यात के आंकड़ों में सुधार और बेहतर रिपोर्टिंग व्यवस्था ने भी कई राज्यों की वृद्धि दर बढ़ाने में भूमिका निभाई है।

हालांकि उद्योग जगत का मानना है कि यूपी के सामने अभी कुछ चुनौतियां भी हैं। राज्य के पास समुद्री बंदरगाह नहीं हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत तटीय राज्यों की तुलना में अधिक पड़ती है। इसके अलावा, यूपी के छोटे उद्योगों की वैश्विक बाजारों में पहुंच अभी सीमित है और हाई-टेक व इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात भी अन्य बड़े औद्योगिक राज्यों के मुकाबले कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ राज्यों में निर्यात में दिखी असाधारण बढ़ोतरी का कारण रिपोर्टिंग सिस्टम और कस्टम वर्गीकरण में बदलाव भी रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश की वृद्धि कई अलग-अलग क्षेत्रों में वास्तविक निर्यात बढ़ने का नतीजा है, जिससे उसने देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है।

अब निर्यात को आर्थिक विकास का अहम आधार मानते हुए उत्तर प्रदेश अपने उत्पादों की विविधता बढ़ाने, उद्योगों को और प्रतिस्पर्धी बनाने तथा वैश्विक बाजारों से बेहतर जुड़ाव पर जोर देगा। उद्योग जगत का मानना है कि यदि राज्य आने वाले वर्षों में निर्यात में लगातार दो अंकों की वृद्धि बनाए रखता है, तो 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का सपना हकीकत बन सकता है।

जिज्ञासा से नवाचार तक बेटियों को नई उड़ान, IIT गांधीनगर पहुंचेंगी UP की बालिकाएं

Female students in Uttar Pradesh will get opportunity to engage with science, innovation and creative learning

– देश के प्रतिष्ठित आईआईटी गांधीनगर में आयोजित ओरिएंटेशन सेशन में शामिल होंगी कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राएं

– उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्रयागराज और गाजियाबाद के केजीबीवी का हुआ चयन

– विज्ञान, नवाचार और रचनात्मक अधिगम से जुड़ने का मिलेगा अवसर

– दो छात्राएं और एक शिक्षिका करेंगी उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व

Uttar Pradesh news : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बालिकाओं को केवल विद्यालयी शिक्षा तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, वैज्ञानिक नवाचारों और आधुनिक अधिगम के अवसरों से भी जोड़ रही है। इसी क्रम में आईआईटी गांधीनगर, गुजरात द्वारा संचालित क्यूरियोसिटी प्रोग्राम 2026-27 के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन सेशन में उत्तर प्रदेश के दो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का चयन किया गया है। यह उपलब्धि न केवल इन विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है, बल्कि योगी सरकार द्वारा बालिका शिक्षा को नए अवसरों और राष्ट्रीय मंचों से जोड़ने के प्रयासों की भी पुष्टि करती है। 

 

विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 13 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले इस विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कौड़िहार-1, प्रयागराज तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय लोनी (नगर पालिका), गाजियाबाद की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में चयनित प्रत्येक विद्यालय से दो छात्राएं और एक शिक्षिका भाग लेंगी। छात्राओं को देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में सीखने और समझने का अवसर प्राप्त होगा। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को बालिका सशक्तीकरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रभावी केंद्रों के रूप में विकसित कर रही है। डिजिटल शिक्षण, नवाचार आधारित गतिविधियों, विज्ञान एवं गणित कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ाव जैसी पहलों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश की बेटियां देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंच रही हैं।

प्रयागराज और गाजियाबाद की छात्राओं का आईआईटी गांधीनगर में चयन इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की बालिकाएं अब अवसरों की मुख्यधारा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं और भविष्य के वैज्ञानिक, शोधकर्ता तथा नवप्रवर्तक बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। 

 

पूरे वर्ष क्यूरियोसिटी कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों का चयन

आईआईटी गांधीनगर के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल) द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार चयन उन विद्यालयों का किया गया है जिन्होंने पूरे वर्ष क्यूरियोसिटी कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कौड़िहार-1, प्रयागराज ने कार्यक्रम के 50 में से 46 सत्रों में भागीदारी करते हुए 92 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की तथा 48 में से 39 वर्कशीट जमा कराईं।

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वहीं केजीबीवी लोनी (नगर पालिका), गाजियाबाद ने 50 में से 49 सत्रों में भाग लेकर 98 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की तथा 48 में से 42 वर्कशीट जमा कराईं। उत्कृष्ट सहभागिता और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर दोनों विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर के इस विशेष कार्यक्रम के लिए चुना गया है। 

 

विज्ञान, गणित, नवाचार, रचनात्मक अधिगम और समस्या समाधान आधारित गतिविधियों से परिचित छात्राएं

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को विज्ञान, गणित, नवाचार, रचनात्मक अधिगम और समस्या समाधान आधारित गतिविधियों से परिचित कराया जाएगा। वे आईआईटी गांधीनगर के शैक्षणिक वातावरण, शोध संस्कृति और नवाचार आधारित शिक्षण मॉडल को निकट से समझ सकेंगी।

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इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा, जिज्ञासा को नई दिशा मिलेगी और उच्च शिक्षा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ेगा। विशेष रूप से ग्रामीण एवं वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं के लिए यह अनुभव नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा।
Edited By : Chetan Gour

Rakesh Bedi: सुपरडुपर हिट फिल्म ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट PMO से आई थी? राकेश बेदी ने ऐसी अफवाहों पर किया मजेदार रिएक्ट

Rakesh Bedi: जबरदस्त एक्शन और खूनखराबे के बावजूद, रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ने दर्शकों का दि जीत लिया। इनमें से कई पल ऑनलाइन वायरल भी हुए। अब एक्टर राकेश बेदी ने बताया है कि कॉमेडी का आइडिया उन्हीं का था। उन्होंने यह भी कहा कि डायरेक्टर आदित्य धर शुरू में इस स्पाई थ्रिलर में कॉमेडी शामिल करने को लेकर हिचकिचा रहे थे। एक्टर ने उन लंबे समय से चल रहे दावों पर भी बात की जिनमें कहा जाता रहा है कि ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट प्रधानमंत्री कार्यालय से आई थी।

बुधवार को राकेश ने नई दिल्ली में ‘अमृत रत्न 2026’ समिट में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर’ फ़्रैंचाइज़ी में अपनी भूमिका के बारे में बात की। बातचीत के दौरान, एक्टर ने बताया कि आदित्य शुरू में इस स्पाई थ्रिलर में कॉमेडी वाले पल शामिल करने को लेकर हिचकिचा रहे थे।

इस अनुभवी एक्टर को ‘धुरंधर’ फ़्रैंचाइज़ी में अपनी परफ़ॉर्मेंस से नई लोकप्रियता मिली है। एक्टर ने एक भारतीय एजेंट, जमील जमाली का किरदार निभाया, जो पाकिस्तान के पॉलिटिकल सिस्टम में घुसपैठ करने के बाद वहां राजनेता बन जाता है। यह बात कि वह असल में एक भारतीय एजेंट था, फ़िल्म के क्लाइमेक्स तक छिपी रखी गई, जिससे यह कहानी के सबसे बड़े सरप्राइज़ में से एक बन गया। राकेश मानते हैं कि उन्हें शुरू से ही इस किरदार के अंजाम और ट्विस्ट के बारे में पता था।

पीछे मुड़कर देखते हुए राकेश ने कहा, “जब मैंने स्क्रिप्ट दो-तीन बार पढ़ी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत तनावपूर्ण फ़िल्म है – न सिर्फ़ तनावपूर्ण, बल्कि बहुत गंभीर भी। फिर मुझे लगा कि एक एक्टर के तौर पर – क्योंकि मेरा झुकाव स्वाभाविक रूप से कॉमेडी की तरफ़ है और मेरा दिमाग़ मज़ाक-मस्ती की ओर ज़्यादा जाता है – मैं कुछ ऐसे पल देख पा रहा था जहां हम थोड़ा कॉमिक रिलीफ (हल्का-फुल्का मज़ाक) डाल सकते थे। इसलिए मैंने आदित्य से कहा, ‘मुझे कुछ ऐसी जगहें दिख रही हैं जहां हम थोड़ा ह्यूमर जोड़ सकते हैं। क्या मैं कोशिश करूं?’ उन्होंने जवाब दिया, ‘राकेश जी, अभी कुछ कहना मुश्किल है। देखते हैं कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं और इस पर काम करते हैं, चीज़ें कैसे आगे बढ़ती हैं।’ शुरू में तो वे थोड़े हिचकिचा रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, उन्हें भी मज़ा आने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा।”

बातचीत के दौरान, राकेश से पूछा गया कि उन्होंने फिल्म में कॉमेडी जोड़ने के लिए कहां से सुझाव दिए, जिसके बाद उन्होंने अपना डॉयलॉग सुनाया, “तुम्हारे अंडकोष बहुत सफेद हैं”, जो धुरंधर फिल्म के एक सीन में बत्तखों के संदर्भ में बोला गया था।

इसके बाद, राकेश ने उन दावों का खंडन किया कि धुरंधर की पटकथा प्रधानमंत्री कार्यालय से आई थी। अभिनेता ने कहा, “अब ये लाइन कोई नहीं लिख सकता। जब ये फिल्म हिट हुई तो कुछ लोगों ने कहा धुरंधर की स्क्रिप्ट जो है वो पीएमओ से लिख कर आती है। मैंने कहा बताओ पीएमओ में कौन सा ऐसा आदमी है जो ये लाइन लिख सकता है। ऐसा सोच भी नहीं सकता कोई।” फिल्म हिट हो गई, कुछ लोगों ने दावा किया कि धुरंधर की स्क्रिप्ट सीधे प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) से आई थी। मैंने कहा, ‘मुझे बताओ, पीएमओ में कौन इस तरह की पंक्ति लिख सकता है?’

हालांकि इन फ़िल्मों की कहानी कहने के शानदार अंदाज़ की तारीफ़ हुई, लेकिन कई लोगों ने शिकायत की कि इनमें पिछली सरकारों की उपलब्धियों को कम करके दिखाया गया और BJP सरकार को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

‘धुरंधर’ 5 दिसंबर, 2025 को और ‘धुरंधर 2’ इस साल 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। इन दोनों फ़िल्मों में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, राकेश बेदी, गौरव गेरा और दानिश पंडोर ने काम किया है। पहली फ़िल्म ने दुनिया भर में ₹1307 करोड़ कमाए, जबकि इसके सीक्वल ने ₹1790 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की है।

ये फ़िल्में जसकीरत सिंह रंगी (उर्फ़ हमज़ा अली मज़ारी) की कहानी बताती हैं, जिन्हें पाकिस्तान के लियारी में एक आतंकी गुट को खत्म करने के लिए भेजा जाता है। इस काम को पूरा करने के लिए वे बलोच गैंग में घुसपैठ करते हैं, लियारी के एक नेता की बेटी से शादी करते हैं और वहाँ के समाज का हिस्सा बन जाते हैं। अब ये दोनों फ़िल्में दुनिया भर में स्ट्रीम हो रही हैं।

International Picnic Day 2026: पिकनिक दिवस का महत्व: क्यों मनाया जाता है यह खास दिन?

Families celebrating moments of joy amidst nature on International Picnic Day

World Picnic Day: हर साल 18 जून को अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस मनाया जाता है। यह दिन परिवार, दोस्तों और प्रियजनों के साथ प्रकृति की गोद में समय बिताने, खुशियां साझा करने और व्यस्त जीवनशैली से कुछ पल का विराम लेने का अवसर प्रदान करता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में लोग अक्सर अपने रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे में पिकनिक दिवस लोगों को खुली हवा, हरियाली और अपनों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए प्रेरित करता है।ALSO READ: पृथ्वी और पर्यावरण पर कविता: काश प्रकृति भी बोल पाती

 

  • पिकनिक दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास
  • अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस का महत्व
  • पिकनिक को मजेदार कैसे बनाएं?

 

आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास, महत्व और आप इसे कैसे खास बना सकते हैं:

 

पिकनिक दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास

'पिकनिक' शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से फ्रांसीसी भाषा के शब्द 'पिकनिक' (Pique-nique) से हुई है। माना जाता है कि 19वीं सदी के मध्य में फ्रांस में क्रांति (French Revolution) के बाद जब शाही बागानों को आम जनता के लिए खोला गया, तब लोगों ने वहां जाकर एक साथ खाना और समय बिताना शुरू किया। यहीं से खुले आसमान के नीचे दोस्तों और परिवार के साथ भोजन करने का चलन शुरू हुआ।

 

इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना और बिना किसी तनाव के अपनों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए प्रेरित करना है। पिकनिक के दौरान लोग एक-दूसरे के साथ खुलकर बातचीत करते हैं, जिससे आपसी समझ और प्रेम बढ़ता है। परिवार और दोस्तों के साथ बिताया गया समय रिश्तों को और मजबूत बनाता है।

 

अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस का महत्व

आज के डिजिटल युग में, जहां लोग सोशल मीडिया और फोन में व्यस्त रहते हैं, पिकनिक डे हमें असल जिंदगी में एक-दूसरे से जुड़ने का मौका देता है। हरी-भरी घास, पेड़ों की छांव और खुली हवा में वक्त बिताने से मानसिक तनाव दूर होता है और मूड फ्रेश होता है तथा मानसिक ताजगी मिलती है।

यह अवसर पारिवारिक जुड़ाव को बढ़ाता है। घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर जब पूरा परिवार एक साथ खेलता है, बातें करता है और हंसता है, तो आपसी रिश्ते (Family Bonding) और मजबूत होते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम प्रकृति का हिस्सा हैं और हमें पर्यावरण के बीच कुछ समय जरूर बिताना चाहिए, यह प्रकृति से लगाव बढ़ावा है।

 

पिकनिक को मजेदार कैसे बनाएं?

पिकनिक मनाने के लिए किसी बहुत बड़ी या महंगी जगह पर जाना जरूरी नहीं है। आप इसे बेहद साधारण तरीके से भी खास बना सकते हैं:

 

जगह का चुनाव: अपने शहर का कोई खूबसूरत पार्क, झील का किनारा या फिर अगर बाहर जाना मुमकिन न हो, तो घर की छत या बालकनी को ही पिकनिक स्पॉट बना लें।

 

घर का बना खाना: पिकनिक की जान होता है खाना। घर से सैंडविच, फल, जूस, चिप्स या अपनी पसंद का कोई भी लाइट स्नैक पैक करें।

 

गैजेट्स को कहें 'ना': इस दिन फोन, लैपटॉप और टैबलेट को बैकपैक में ही रहने दें।

 

आउटडोर गेम्स: खेलकूद, पैदल चलना, लूडो, ताश, बैडमिंटन या अंताक्षरी जैसे खेल खेलें, जो बचपन की यादें ताजा कर दें।

 

एक जरूरी बात: पिकनिक मनाते समय पर्यावरण का ध्यान रखें। अपने साथ एक गारबेज बैग/ कचरे की थैली जरूर ले जाएं और यहां-वहां कचरा न फैलाएं।

 

अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस केवल घूमने-फिरने का दिन नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतुलन, खुशियां और रिश्तों की अहमियत को समझने का अवसर भी है। प्रकृति के बीच बिताया गया एक दिन मन को नई ऊर्जा देता है और अपनों के साथ बिताए गए पल जीवनभर की यादें बन जाते हैं। इसलिए इस खास दिन पर कुछ समय निकालें, प्रकृति का आनंद लें और अपने प्रियजनों के साथ खुशियां बांटें।

 

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BitCoin Crash: 8 ही महीने में 50% टूटा बिटकॉइन, इन 4 वजहों से क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार

BitCoin Crash: क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार अब भी मचा हुआ है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो बिटकॉइन रिकॉर्ड हाई से करीब 50% नीचे आ चुका है। बाकी भी क्रिप्टो की हालत अच्छी नहीं है और अधिकतर क्रिप्टो अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। बिटकॉइन की बात करें तो 7 अक्टूबर 2025 को $1.26 लाख के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के करीब आठ महीने में यह करीब 50% टूटकर $64 हजार के नीचे आ गया। सिर्फ यही नहीं, इस महीने तो यह $60 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी नीचे की तरफ तोड़ दिया था जो इसके लिए पिछले डेढ़ साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

BitCoin Crash: इन 4 वजहों से मचा हाहाकार

अमेरिकी नीतियों के सपोर्ट से बदलकर झटका देने वाले में बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की क्रिप्टो समर्थक नीतियों ने बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसीज की चमक बढ़ा दी थी और संस्थागत निवेशकों ने जमकर पैसा डाला। हालांकि टैरिफ वार और अमेरिका की ईरान से जंग ने निवेशकों को डरा दिया और वे क्रिप्टो जैसे रिस्की एसेट्स से पैसे निकालकर सेफ एसेट्स में पैसे डालने लगे।

बिटकॉइन के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार माइकल का बेयरेश रुझान

माइकल सायलर (Michael Saylor) ने साल 2020 में अपनी कंपनी स्ट्रैटेजी की नकदी का बड़ा हिस्सा बिटकॉइन में निवेश करना शुरू किया और स्ट्रैटेजी ने इसके बाद लगातार बिटकॉइन खरीदना जारी रखा और यह दुनिया के सबसे बड़े कॉरपोरेट बिटकॉइन होल्डर कंपनियों में शामिल हो गई। हालांकि ‘स्ट्रैटेजी’ ने साल 2022 के बाद से पहली बार अपनी होल्डिंग का कुछ हिस्सा बेचा तो हड़कंप मच गया। कुछ हफ्ते पहले उन्होंने $25 लाख के 32 बिटकॉइन बेचे तो बिटकॉइन टूटकर $72 हजार के नीचे आ गया था। इससे पहले स्ट्रैटेजी ने साल 2022 में 704 बिटकॉइन %$18 हजार के भाव पर बेचे थे।

SpaceX का जादू

हाल ही में स्पेसएक्स ने दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था। एआई पर इसकी आक्रामक स्ट्रैटेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया और इसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि क्रिप्टो मार्केट का भी कुछ पैसा इसमें आया। स्पेसएक्स ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को और अमीर बनाया और दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर बन गए।

BitCoin ETF से ताबड़तोड़ निकासी

पिछले महीने बिटकॉइन ईटीएफ से $200 करोड़ से अधिक यानी करीब ₹16 हजार करोड़ की निकासी ने क्रिप्टो मार्केट पर दबाव डाला।

SpaceX ने Elon Musk को बनाया ट्रिलेनियर, लेकिन अब लटकी यह तलवार

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि क्रिप्टो मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।