QS Ranking 2027: IIT दिल्ली ने रचा इतिहास, दुनिया में 118वीं रैंक के साथ बना भारत का नंबर-1 संस्थान, जानिए टॉप 10 संस्थानों की रैंकिंग

QS Ranking 2027: IIT दिल्ली एक बार फिर भारत का सबसे बेहतर एजुकेशन और रिसर्च इंस्टीट्यूट बनकर उभरा है। आज यानी 18 जून 2026 को जारी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली को दुनिया में 118वां स्थान मिला है। पिछले साल यह 123वें स्थान पर था, यानी इस बार इसकी रैंकिंग में 5 स्थान का सुधार हुआ है। वहीं, इस उपलब्धि के साथ IIT दिल्ली ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में किसी भारतीय संस्थान द्वारा अब तक हासिल की गई सबसे ऊंची ग्लोबल रैंक की बराबरी भी कर ली है।

रैंकिंग के बारे में बात करते हुए, IIT दिल्ली के डीन, प्लानिंग और रैंकिंग सेल के हेड, प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय ने कहा, “IIT दिल्ली दुनिया भर के स्कॉलर्स के लिए एक पसंदीदा जगह बनने और वर्ल्ड-क्लास, किफायती टेक्निकल एजुकेशन देने के अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है।” उन्होंने आगे कहा कि संस्थान के नए करिकुलम (पाठ्यक्रम), नए इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेशनल लेवल पर बढ़ती भागीदारी से आने वाले सालों में ग्लोबल स्तर पर इसकी स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।

आईआईटी दिल्ली ने बताया कि पिछले चार वर्षों में उसकी वैश्विक रैंकिंग में 79 स्थान का सुधार हुआ है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 में संस्थान 197वें स्थान पर था, जबकि QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में यह 118वें स्थान पर पहुंच गया है।

दुनिया के टॉप-10 यूनिवर्सिटी

रैंकयूनिवर्सिटीदेश
1एमआईटी (MIT)अमेरिका
2स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटीअमेरिका
3इंपीरियल कॉलेज लंदनयूके
4ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटीयूके
5हार्वर्ड यूनिवर्सिटीअमेरिका
6कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटीयूके
7कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech)अमेरिका
8यूसीएल (UCL)यूके
9ETH ज्यूरिखस्विट्जरलैंड
10नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS)सिंगापुर

हायर एजुकेशन के क्षेत्र में दुनियाभर में भारत का जलवा

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में भारत को हायर एजुकेशन के क्षेत्र को बड़ी बढ़त हासिल हुई है। देश की रैंकिंग में शामिल आधी से ज्यादा यूनिवर्सिटीज ने अपनी ग्लोबल रैंकिंग में सुधार किया है। इस रैंकिंग में भारत के 52 संस्थानों को जगह मिली है। बता दें कि रैंकिंग में IIT दिल्ली पिछले साल 123वें नंबर पर था। लेकिन इस साल उसने 118वीं रैंक हासिल की है, जो बड़ी उपलब्धि है। वह इस ताजा रैंकिंग में सबसे ऊंची रैंक वाला इंडियन इंस्टीट्यूट बन गया है।

भारत के टॉप संस्थानों की ग्लोबल रैंकिंग

भारतीय संस्थानवैश्विक रैंक (QS World University Rankings 2027)भारतीय रैंक/स्थिति
IIT दिल्ली118भारत में नंबर 1
IIT बॉम्बे134भारत में नंबर 2
IIT मद्रास170भारत में नंबर 3
IIT खड़गपुर205भारत में नंबर 4
IIT कानपुर221भारत में नंबर 5
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU)322रैंकिंग में सुधार (पिछले साल 328वीं)
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU)555भारत में 15वां स्थान (पिछले साल 558वीं)
जामिया मिलिया इस्लामिया686भारत में 20वां स्थान (पिछले साल 761-770 बैंड)

यह भी पढ़ें: आज का मौसम 18 June: IMD ने बिहार संग इन 13 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया! राजस्थान में 80 Kmph की आंधी, दिल्ली-यूपी का ऐसा रहेगा मौसम

QS Ranking 2027: IIT दिल्ली ने रचा इतिहास, दुनिया में 118वीं रैंक के साथ बना भारत का नंबर-1 संस्थान, जानिए टॉप 10 संस्थानों की रैंकिंग

QS Ranking 2027: IIT दिल्ली एक बार फिर भारत का सबसे बेहतर एजुकेशन और रिसर्च इंस्टीट्यूट बनकर उभरा है। आज यानी 18 जून 2026 को जारी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली को दुनिया में 118वां स्थान मिला है। पिछले साल यह 123वें स्थान पर था, यानी इस बार इसकी रैंकिंग में 5 स्थान का सुधार हुआ है। वहीं, इस उपलब्धि के साथ IIT दिल्ली ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में किसी भारतीय संस्थान द्वारा अब तक हासिल की गई सबसे ऊंची ग्लोबल रैंक की बराबरी भी कर ली है।

रैंकिंग के बारे में बात करते हुए, IIT दिल्ली के डीन, प्लानिंग और रैंकिंग सेल के हेड, प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय ने कहा, “IIT दिल्ली दुनिया भर के स्कॉलर्स के लिए एक पसंदीदा जगह बनने और वर्ल्ड-क्लास, किफायती टेक्निकल एजुकेशन देने के अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है।” उन्होंने आगे कहा कि संस्थान के नए करिकुलम (पाठ्यक्रम), नए इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेशनल लेवल पर बढ़ती भागीदारी से आने वाले सालों में ग्लोबल स्तर पर इसकी स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।

आईआईटी दिल्ली ने बताया कि पिछले चार वर्षों में उसकी वैश्विक रैंकिंग में 79 स्थान का सुधार हुआ है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 में संस्थान 197वें स्थान पर था, जबकि QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में यह 118वें स्थान पर पहुंच गया है।

दुनिया के टॉप-10 यूनिवर्सिटी

रैंकयूनिवर्सिटीदेश
1एमआईटी (MIT)अमेरिका
2स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटीअमेरिका
3इंपीरियल कॉलेज लंदनयूके
4ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटीयूके
5हार्वर्ड यूनिवर्सिटीअमेरिका
6कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटीयूके
7कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech)अमेरिका
8यूसीएल (UCL)यूके
9ETH ज्यूरिखस्विट्जरलैंड
10नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS)सिंगापुर

हायर एजुकेशन के क्षेत्र में दुनियाभर में भारत का जलवा

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में भारत को हायर एजुकेशन के क्षेत्र को बड़ी बढ़त हासिल हुई है। देश की रैंकिंग में शामिल आधी से ज्यादा यूनिवर्सिटीज ने अपनी ग्लोबल रैंकिंग में सुधार किया है। इस रैंकिंग में भारत के 52 संस्थानों को जगह मिली है। बता दें कि रैंकिंग में IIT दिल्ली पिछले साल 123वें नंबर पर था। लेकिन इस साल उसने 118वीं रैंक हासिल की है, जो बड़ी उपलब्धि है। वह इस ताजा रैंकिंग में सबसे ऊंची रैंक वाला इंडियन इंस्टीट्यूट बन गया है।

भारत के टॉप संस्थानों की ग्लोबल रैंकिंग

भारतीय संस्थानवैश्विक रैंक (QS World University Rankings 2027)भारतीय रैंक/स्थिति
IIT दिल्ली118भारत में नंबर 1
IIT बॉम्बे134भारत में नंबर 2
IIT मद्रास170भारत में नंबर 3
IIT खड़गपुर205भारत में नंबर 4
IIT कानपुर221भारत में नंबर 5
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU)322रैंकिंग में सुधार (पिछले साल 328वीं)
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU)555भारत में 15वां स्थान (पिछले साल 558वीं)
जामिया मिलिया इस्लामिया686भारत में 20वां स्थान (पिछले साल 761-770 बैंड)

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QS Ranking 2027: IIT दिल्ली ने रचा इतिहास, दुनिया में 118वीं रैंक के साथ बना भारत का नंबर-1 संस्थान, जानिए टॉप 10 संस्थानों की रैंकिंग

QS Ranking 2027: IIT दिल्ली एक बार फिर भारत का सबसे बेहतर एजुकेशन और रिसर्च इंस्टीट्यूट बनकर उभरा है। आज यानी 18 जून 2026 को जारी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली को दुनिया में 118वां स्थान मिला है। पिछले साल यह 123वें स्थान पर था, यानी इस बार इसकी रैंकिंग में 5 स्थान का सुधार हुआ है। वहीं, इस उपलब्धि के साथ IIT दिल्ली ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में किसी भारतीय संस्थान द्वारा अब तक हासिल की गई सबसे ऊंची ग्लोबल रैंक की बराबरी भी कर ली है।

रैंकिंग के बारे में बात करते हुए, IIT दिल्ली के डीन, प्लानिंग और रैंकिंग सेल के हेड, प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय ने कहा, “IIT दिल्ली दुनिया भर के स्कॉलर्स के लिए एक पसंदीदा जगह बनने और वर्ल्ड-क्लास, किफायती टेक्निकल एजुकेशन देने के अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है।” उन्होंने आगे कहा कि संस्थान के नए करिकुलम (पाठ्यक्रम), नए इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेशनल लेवल पर बढ़ती भागीदारी से आने वाले सालों में ग्लोबल स्तर पर इसकी स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।

आईआईटी दिल्ली ने बताया कि पिछले चार वर्षों में उसकी वैश्विक रैंकिंग में 79 स्थान का सुधार हुआ है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 में संस्थान 197वें स्थान पर था, जबकि QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में यह 118वें स्थान पर पहुंच गया है।

दुनिया के टॉप-10 यूनिवर्सिटी

रैंकयूनिवर्सिटीदेश
1एमआईटी (MIT)अमेरिका
2स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटीअमेरिका
3इंपीरियल कॉलेज लंदनयूके
4ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटीयूके
5हार्वर्ड यूनिवर्सिटीअमेरिका
6कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटीयूके
7कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech)अमेरिका
8यूसीएल (UCL)यूके
9ETH ज्यूरिखस्विट्जरलैंड
10नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS)सिंगापुर

हायर एजुकेशन के क्षेत्र में दुनियाभर में भारत का जलवा

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में भारत को हायर एजुकेशन के क्षेत्र को बड़ी बढ़त हासिल हुई है। देश की रैंकिंग में शामिल आधी से ज्यादा यूनिवर्सिटीज ने अपनी ग्लोबल रैंकिंग में सुधार किया है। इस रैंकिंग में भारत के 52 संस्थानों को जगह मिली है। बता दें कि रैंकिंग में IIT दिल्ली पिछले साल 123वें नंबर पर था। लेकिन इस साल उसने 118वीं रैंक हासिल की है, जो बड़ी उपलब्धि है। वह इस ताजा रैंकिंग में सबसे ऊंची रैंक वाला इंडियन इंस्टीट्यूट बन गया है।

भारत के टॉप संस्थानों की ग्लोबल रैंकिंग

भारतीय संस्थानवैश्विक रैंक (QS World University Rankings 2027)भारतीय रैंक/स्थिति
IIT दिल्ली118भारत में नंबर 1
IIT बॉम्बे134भारत में नंबर 2
IIT मद्रास170भारत में नंबर 3
IIT खड़गपुर205भारत में नंबर 4
IIT कानपुर221भारत में नंबर 5
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU)322रैंकिंग में सुधार (पिछले साल 328वीं)
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU)555भारत में 15वां स्थान (पिछले साल 558वीं)
जामिया मिलिया इस्लामिया686भारत में 20वां स्थान (पिछले साल 761-770 बैंड)

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किन-किन देशों में होता है कैट मीट का सेवन? यहां देखिए पूरी लिस्ट

चीन के झांगजियागांग (Zhangjiagang) इलाके में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1000 बिल्लियों को बचाया। बताया जा रहा है कि इन बिल्लियों को अवैध तरीके से बूचड़खाने ले जाकर मांस के रूप में बेचने की तैयारी थी। कुछ जगहों पर इसे चिकन और पोर्क जैसे दूसरे मीट के नाम पर भी बेचने की कोशिश की जा रही थी, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल्लियों को लकड़ी के बक्सों में बंद करके एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा था।

यह पूरा नेटवर्क काफी समय से सक्रिय बताया जा रहा है। अगर यह योजना सफल हो जाती, तो आरोपी इससे बड़ी रकम का अवैध मुनाफा कमा सकते थे। इस घटना ने अवैध पशु व्यापार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

वियतनाम में 400 से ज्यादा बिल्लियों का रेस्क्यू ऑपरेशन

इसी तरह वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में पुलिस ने छापेमारी कर 400 से अधिक जिंदा बिल्लियों को बचाया। ये सभी बिल्लियाँ एक संगठित अवैध नेटवर्क का हिस्सा थीं, जहाँ उन्हें मांस के लिए रखा जाता था।

छापेमारी के दौरान कई पिंजरे मिले और कुछ बिल्लियाँ मृत अवस्था में भी पाई गईं। यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है।

संगठित तस्करी का बड़ा खेल, 9 लोग गिरफ्तार

जांच में सामने आया कि यह गिरोह कई प्रांतों से बिल्लियों को चोरी या पकड़कर इकट्ठा करता था और अवैध व्यापार में बेचता था। इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पालतू बिल्लियाँ भी बनीं शिकार

रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बिल्लियाँ लोगों के घरों से चोरी की गई थीं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि जिनके पालतू जानवर गायब हैं, वे सामने आकर अपनी पहचान बताएं ताकि उन्हें वापस किया जा सके।

पशु अधिकार संगठनों की गंभीर चिंता

पशु संरक्षण संगठनों का कहना है कि हर साल लाखों बिल्लियाँ और कुत्ते इस तरह के अवैध व्यापार का शिकार बनते हैं। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

आखिर किन देशों में खाया जाता है बिल्ली का मांस?

बिल्ली का मांस दुनिया के बहुत कम हिस्सों में खाया जाता है और यह मुख्यधारा का भोजन नहीं माना जाता, लेकिन कुछ देशों में इसके सेवन की खबरें सामने आती रहती हैं।

वियतनाम में इसे कुछ इलाकों में “लिटिल टाइगर” कहा जाता है और अवैध रूप से इसका व्यापार भी पाया जाता है।

चीन के दक्षिणी हिस्सों में भी कभी-कभी इसका सेवन या अवैध बिक्री की घटनाएँ सामने आती हैं, जहां इसे मटन या पोर्क के नाम पर बेचा जाता है।

इंडोनेशिया के कुछ क्षेत्रों जैसे सुलावेसी और सुमात्रा में भी ऐसे मामलों की रिपोर्ट मिलती है।

क्रूरता या परंपरा? सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे बेहद क्रूर और अवैध व्यापार बता रहे हैं, जबकि पशु अधिकार कार्यकर्ता इसे पूरी तरह रोकने की मांग कर रहे हैं।

किन-किन देशों में होता है कैट मीट का सेवन? यहां देखिए पूरी लिस्ट

चीन के झांगजियागांग (Zhangjiagang) इलाके में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1000 बिल्लियों को बचाया। बताया जा रहा है कि इन बिल्लियों को अवैध तरीके से बूचड़खाने ले जाकर मांस के रूप में बेचने की तैयारी थी। कुछ जगहों पर इसे चिकन और पोर्क जैसे दूसरे मीट के नाम पर भी बेचने की कोशिश की जा रही थी, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल्लियों को लकड़ी के बक्सों में बंद करके एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा था।

यह पूरा नेटवर्क काफी समय से सक्रिय बताया जा रहा है। अगर यह योजना सफल हो जाती, तो आरोपी इससे बड़ी रकम का अवैध मुनाफा कमा सकते थे। इस घटना ने अवैध पशु व्यापार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

वियतनाम में 400 से ज्यादा बिल्लियों का रेस्क्यू ऑपरेशन

इसी तरह वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में पुलिस ने छापेमारी कर 400 से अधिक जिंदा बिल्लियों को बचाया। ये सभी बिल्लियाँ एक संगठित अवैध नेटवर्क का हिस्सा थीं, जहाँ उन्हें मांस के लिए रखा जाता था।

छापेमारी के दौरान कई पिंजरे मिले और कुछ बिल्लियाँ मृत अवस्था में भी पाई गईं। यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है।

संगठित तस्करी का बड़ा खेल, 9 लोग गिरफ्तार

जांच में सामने आया कि यह गिरोह कई प्रांतों से बिल्लियों को चोरी या पकड़कर इकट्ठा करता था और अवैध व्यापार में बेचता था। इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पालतू बिल्लियाँ भी बनीं शिकार

रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बिल्लियाँ लोगों के घरों से चोरी की गई थीं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि जिनके पालतू जानवर गायब हैं, वे सामने आकर अपनी पहचान बताएं ताकि उन्हें वापस किया जा सके।

पशु अधिकार संगठनों की गंभीर चिंता

पशु संरक्षण संगठनों का कहना है कि हर साल लाखों बिल्लियाँ और कुत्ते इस तरह के अवैध व्यापार का शिकार बनते हैं। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

आखिर किन देशों में खाया जाता है बिल्ली का मांस?

बिल्ली का मांस दुनिया के बहुत कम हिस्सों में खाया जाता है और यह मुख्यधारा का भोजन नहीं माना जाता, लेकिन कुछ देशों में इसके सेवन की खबरें सामने आती रहती हैं।

वियतनाम में इसे कुछ इलाकों में “लिटिल टाइगर” कहा जाता है और अवैध रूप से इसका व्यापार भी पाया जाता है।

चीन के दक्षिणी हिस्सों में भी कभी-कभी इसका सेवन या अवैध बिक्री की घटनाएँ सामने आती हैं, जहां इसे मटन या पोर्क के नाम पर बेचा जाता है।

इंडोनेशिया के कुछ क्षेत्रों जैसे सुलावेसी और सुमात्रा में भी ऐसे मामलों की रिपोर्ट मिलती है।

क्रूरता या परंपरा? सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे बेहद क्रूर और अवैध व्यापार बता रहे हैं, जबकि पशु अधिकार कार्यकर्ता इसे पूरी तरह रोकने की मांग कर रहे हैं।

IT Sector का भारी दबाव, Sensex-Nifty कभी लाल तो कभी हरा, इन 5 वजहों से दोनों तरफ भाग रहा मार्केट

Stock Market moving up and down: कच्चे तेल की नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन में कमी के बावजूद घरेलू स्टॉक मार्केट में खास जोश नहीं दिख रहा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में ग्रीन और रेड जोन में झूल रहे। ब्रोडर लेवल पर भी मिला-जुला रुझान है और निफ्टी मिडकैप 100 में फिलहाल मामूली बढ़त है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। फिलहाल 10:14 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 120.12 प्वाइंट्स यानी 0.16% की बढ़त के साथ 77,275.74 और और निफ्टी (Nifty) भी 43.20 प्वाइंट्स यानी 0.18% के उछाल के साथ 24,128.90 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 111.23 प्वाइंट्स फिसलकर 77,044.39 और 164.70 की बढ़त के साथ 77,320.32 तक पहुंचा तो निफ्टी भी 26.85 प्वाइंट्स गिरकर 24,058.85 और 53.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,085.70 तक पहुंचा।

Stock Market in pressure: ये है वजह

अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर लेकिन आगे बढ़ाने के संकेत

अमेरिकी फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श ने अपनी अगुवाई में पहली बार तय हुई मौद्रिक नीतियों में दरों को स्थिर रखा है। हालांकि फेडरल रिजर्व ने इस साल दरों में बढ़ोतरी के संकेत भी दिए हैं। इसके चलते ही मार्केट में उठा-पटक दिख रही है।

IT Sector का दबाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दिया जिससे दुनिया भर में टेक स्टॉक्स को लेकर निवेशकों का रुझान फीका पड़ा। भारतीय मार्केट में भी इसने आईटी शेयरों को तोड़ दिया और निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी से अधिक फिसल गया। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची होने पर आमतौर पर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर दबाव आता है क्योंकि इससे भविष्य की कमाई का वर्तमान मूल्य घट जाता है और वैश्विक कंपनियों के खर्च में भी कमी आ सकती है और यही वैश्विक कंपनियां भारतीय आईटी सेवा कंपनियों की प्रमुख ग्राहक हैं। वहीं दूसरी तरफ मेटल, पीएसयू बैंक, फार्मा और एफएमसीजी जैसे अहम सेक्टर मार्केट को ऊपर खींचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की बढ़त है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 1.66% की गिरावट के साथ 12.97 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी का बढ़ना और नीचे आने का मतलब होता है वोलैटिलिटी का कम होना।

एशियाई बाजारों से मिला-जुला रुझान

घरेलू मार्केट पर आज एशियाई बाजारों के मिले-जुले रुझानों का भी असर दिख रहा है। एक तरफ जापान का निक्केई 225 करीब 2% उछल पड़ा तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी तो 2% चढ़कर 9,040.52 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब 1% की बढ़त है। वहीं दूसरी तरफ इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1% से अधिक और चीन के शंघाई कंपोजिट में आधे फीसदी की गिरावट है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में दोनों तरफ मूवमेंट दिख रहा है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

18 जून को क्यों याद की जाती हैं रानी लक्ष्मीबाई? जानें उनके बलिदान की पूरी कहानी

A portrait of the heroic Rani Lakshmibai leading the battle against the British during the First War of Independence in 1857. Image caption: Rani Lakshmibai Martyrdom Day

June 18, Rani Lakshmibai Sacrifice Day: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो साहस, देशभक्ति और बलिदान के प्रतीक बन चुके हैं। उनमें सबसे प्रमुख नाम है रानी लक्ष्मीबाई। हर वर्ष 18 जून को रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस अदम्य साहस और वीरता की याद दिलाता है, जब एक युवा रानी ने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने के बजाय मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

 

हर साल 18 जून को उनकी पुण्यतिथि को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो हमें याद दिलाता है कि कैसे एक 29 वर्ष की युवा वीरांगना ने दुनिया की सबसे बड़े ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी।

 

1. 'मनु' से 'लक्ष्मीबाई' बनने का सफर

2. वह मोड़ जिसने इतिहास बदल दिया: 'डॉकट्रिन ऑफ लैप्स'

3. 1857 की क्रांति और झांसी का युद्ध

4. अंतिम लड़ाई और 18 जून का सर्वोच्च बलिदान

5. युद्ध के अंतिम क्षणों की घटना

6. अंग्रेजों ने भी माना उनकी वीरता का लोहा

 

आइए जानते हैं मणिकर्णिका के 'झांसी की रानी' बनने और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की पूरी कहानी:

 

1. 'मनु' से 'लक्ष्मीबाई' बनने का सफर

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था और प्यार से लोग उन्हें 'मनु' बुलाते थे। बहुत कम उम्र में मां के निधन के बाद, उनके पिता मोरोपंत तांबे उन्हें बिठूर में पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में ले आए। वहां मणिकर्णिका की प्रतिभा को देखकर उन्हें 'छबीली' नाम मिला। उस दौर में जहां लड़कियों को घर की दहलीज में रखा जाता था, मनु ने नाना साहब और तात्या टोपे जैसे योद्धाओं के साथ युद्ध कौशल की शिक्षा ली, जिसमें उन्होंने घुड़सवारी, तलवारबाजी, तीरंदाजी और मल्लखंभ सीखा। साल 1842 में उनका विवाह झांसी के महाराजा गंगाधर राव नेवलकर से हुआ, जिसके बाद वे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बनीं।

 

2. वह मोड़ जिसने इतिहास बदल दिया: 'डॉकट्रिन ऑफ लैप्स'

साल 1851 में रानी ने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन मात्र चार महीने की उम्र में उस बालक का निधन हो गया। राजा गंगाधर राव इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए। स्वास्थ्य बिगड़ता देख, राजा ने अपनी मृत्यु से पहले एक दूर के रिश्तेदार के बच्चे को गोद लिया, जिसका नाम दामोदर राव रखा गया।

 

1853 में राजा के निधन के बाद, क्रूर ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी ने अपनी 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के तहत दामोदर राव को झांसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और झांसी को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने का ऐलान कर दिया। तब महलों में रहने वाली रानी गर्ज उठीं:

 

'मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी!'

 

3. 1857 की क्रांति और झांसी का युद्ध

जब 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भड़का, तो रानी लक्ष्मीबाई मध्य भारत में विद्रोह का मुख्य चेहरा बन गईं। उन्होंने न केवल पुरुषों की बल्कि महिलाओं की भी एक फौज तैयार की, जिसमें उनकी हमशक्ल झलकारी बाई भी शामिल थीं।

 

झांसी की घेराबंदी (मार्च 1858): ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने एक विशाल सेना के साथ झांसी के किले को घेर लिया। दो हफ़्तों तक रानी और उनकी सेना ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया।

 

किले से हैरतअंगेज फरारी: जब अंग्रेजों ने गद्दारों की मदद से किले के एक फाटक को खोल दिया और झांसी का पतन तय दिखने लगा, तब रानी लक्ष्मीबाई ने अपने 12 साल के दत्तक पुत्र दामोदर राव को अपनी पीठ पर बांधा और अपने वफादार घोड़े 'बादल' पर सवार होकर किले की ऊंची दीवार से छलांग लगा दी।

 

4. अंतिम लड़ाई और 18 जून का सर्वोच्च बलिदान

झांसी से बचकर रानी कालपी पहुंचीं और फिर तात्या टोपे के साथ मिलकर उन्होंने ग्वालियर के किले पर कब्जा कर लिया। अंग्रेज इस बात से पूरी तरह बौखला गए थे। जनरल ह्यूरोज ने ग्वालियर को चारों तरफ से घेर लिया। 17-18 जून 1858 कोटा की सराय, ग्वालियर में उस वक्त रानी लक्ष्मीबाई ने पुरुषों के सैनिक वस्त्र पहने थे और दोनों हाथों में तलवार लिए वे अंग्रेजों पर बिजली बनकर टूट पड़ीं। उन्होंने सैकड़ों अंग्रेज सैनिकों को गाजर-मूली की तरह काट डाला।

 

5. युद्ध के अंतिम क्षणों की घटना:

उनका नियमित वफादार घोड़ा घायल हो चुका था, इसलिए वे एक नए घोड़े पर सवार थीं। सामने एक बरसाती नाला आ गया। नया घोड़ा चौंक गया और उसने नाला पार करने से इनकार कर दिया। वह वहीं गोल-गोल घूमने लगा। रानी समझ गईं कि वे घिर चुकी हैं, फिर भी उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय लड़ना जारी रखा। पीछे से एक अंग्रेज सैनिक ने उनके सिर पर तलवार से जोरदार वार किया और एक गोली उनके सीने में लगी। बदहवास हालत में भी वे अंग्रेजों के हाथ नहीं आईं। उनके वफादार सैनिक उन्हें पास के गंगादास साधु की कुटिया में ले गए। 

 

दम तोड़ने से पहले रानी की केवल एक ही अंतिम इच्छा थी- 'मेरा शव अंग्रेजों के हाथ नहीं लगना चाहिए।' साधु और उनके सैनिकों ने तुरंत कुटिया की लकड़ियों से ही उनकी चिता बनाई और उन्हें मुखाग्नि दे दी। इस तरह 18 जून 1858 को भारत की यह महान बेटी इतिहास में अमर हो गई।

 

6. अंग्रेजों ने भी माना उनकी वीरता का लोहा

रानी लक्ष्मीबाई की वीरता का प्रभाव ऐसा था कि उनका सबसे बड़ा दुश्मन, ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज, जिसने उन्हें हराया था, उसने अपनी आधिकारिक युद्ध रिपोर्ट में लिखा था:

'यहां वह महिला सोई हुई है, जो विद्रोही नेताओं में एकमात्र 'मर्द' (सबसे अधिक वीर) थी।'

 

सुभद्रा कुमारी चौहान की वे पंक्तियां आज भी हर भारतीय की रगों में देशभक्ति का संचार कर देती हैं:

 

'बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी,

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी॥'

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