Delhi: दिल्ली के लुटियंस ज़ोन में ₹1,260 करोड़ में बिका बंगला! दिग्गज कारोबारी को 4 गुना हुआ फायदा

Delhi Subhash Chandra News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पॉश लुटियंस जोन इलाके में ₹1,260 करोड़ में एक बंगला बिका है। एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने लुटियंस एरिया में स्थित अपना बंगला 1,260 करोड़ रुपये में एक अज्ञात कारोबारी को बेच दिया है। इसे हाल के सबसे महंगे रियल एस्टेट डील में से एक माना जा रहा है। करीब तीन एकड़ में फैला यह बंगला कनॉट प्लेस और इंडिया गेट के पास भगवान दास रोड पर स्थित है।

सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई’ को बताया कि इस प्रॉपर्टी को दिल्ली स्थित एक कारोबारी परिवार ने खरीदा है। हालांकि, इस खरीदार की पहचान उजागर नहीं की गई है। यह बंगला उसी सड़क पर स्थित है जहां अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी की अगुवाई वाले ग्रुप ने साल 2020 में लगभग 400 करोड़ रुपये में एक प्रॉपर्टी खरीदी थी।

चार गुना बढ़ी बंगले की कीमत

सूत्रों ने कहा कि 1,260 करोड़ रुपये का यह सौदा दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। इस बीच, चंद्रा की अगुवाई वाले जी ग्रुप के प्रवक्ता ने इस लेन-देन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। चंद्रा ने यह प्रॉपर्टी साल 2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी।

इसका मतलब है कि इस प्रॉपर्टी कीमत पिछले एक दशक में चार गुना से अधिक हो गया है। लुटियंस एरिया भारत के सबसे महंगे रियल एस्टेट क्षेत्रों में से एक है। यहां करीब 3,000 हाई प्रोफाइल बंगले हैं। इनमें से लगभग 600 संपत्तियां निजी स्वामित्व में हैं, जो देश के सबसे अमीर लोगों के पास हैं।

लुटियंस जोन क्यों है खास?

दिल्ली का Lutyens Zone देश के सबसे प्रतिष्ठित और महंगे आवासीय इलाकों में गिना जाता है। यह एरिया लंबे समय से सत्ता, प्रतिष्ठा और ताकत का प्रतीक माना जाता रहा है। इस इलाके में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, जज, राजनयिक और चुनिंदा कारोबारी रहते हैं। सख्त निर्माण नियमों और सीमित भूमि उपलब्धता के कारण यहां संपत्तियों की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं।

लग्जरी रियल एस्टेट में तेजी

कोरोना वायरल (कोविड-19) महामारी के बाद दिल्ली के लुटियंस जोन और हरियाणा के गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड (Golf Course Road) पर कई बड़े रियल एस्टेट सौदे देखने को मिले हैं। विशेष रूप से गुरुग्राम में लग्जरी हाउसिंग की मांग तेजी से बढ़ी है। DLF की अल्ट्रा-लक्जरी प्रोजेक्ट्स The Camellias और The Dahlias में अपार्टमेंट्स की कीमतें रिकॉर्ड लेवल तक पहुंच चुकी हैं। इससे यह इलाका देश के सबसे महंगे आवासीय बाजारों में शामिल हो गया है।

कौन हैं सुभाष चंद्रा?

सुभाष चंद्रा एक प्रसिद्ध उद्योगपति, मीडिया उद्यमी और टेलीविजन क्षेत्र के दिग्गज व्यक्तियों में से एक हैं। उन्हें अक्सर ‘भारतीय निजी सैटेलाइट टेलीविजन के जनक’ कहा जाता है। उन्होंने 1992 में Zee TV की स्थापना की, जो भारत का पहला निजी सैटेलाइट टीवी चैनल था। चंद्रा का जन्म 30 नवंबर 1950 को हरियाणा के आदमपुर (हिसार) में हुआ था।

उन्होंने कम उम्र में पारिवारिक व्यापार से शुरुआत की और बाद में Essel Group की स्थापना की। इस ग्रुप ने पैकेजिंग, मनोरंजन, मीडिया, केबल टीवी और डीटीएच सेवाओं जैसे कई सेक्टर में कारोबार फैलाया।

ये भी पढ़ें- SP Split Buzz: ‘सहानुभूति रखें और तरस खाएं इन पर…’; सपा सांसदों में फूट के ओपी राजभर के दावों पर राजीव राय का पलटवार

इसके अलावा राजनीति में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। 2016 से 2022 तक वह हरियाणा से राज्यसभा सांसद रहे। व्यवसाय और मीडिया में उनके योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। इनमें 2011 का International Emmy Directorate Award भी शामिल है।

Share Bazaar में लगातार 5वें दिन तेजी, Sensex 77400 के पार, Nifty में भी जबरदस्त उछाल

Indian stock market maintained an upward trend for 5th consecutive trading session

Share Market Update News : मजबूत खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती दबाव को पछाड़ते हुए लगातार 5वें दिन बढ़त का सिलसिला कायम रखा। टेक्सटाइल सेक्टर में भी जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इसकी वजह भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA रहा, जो 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.33 फीसदी) की शानदार बढ़त के साथ 77409.98 के ऐतिहासिक स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 82.30 अंक (0.34 फीसदी) उछलकर 24168.00 के पार निकल गया, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।

 

टेक्सटाइल सेक्टर में जबरदस्त खरीदारी

मजबूत खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती दबाव को पछाड़ते हुए लगातार 5वें दिन बढ़त का सिलसिला कायम रखा। टेक्सटाइल सेक्टर में भी जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इसकी वजह भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA रहा, जो 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है।

ALSO READ: लगातार चौथे दिन Share Bazaar में उछाल, Sensex 77000 के पार, Nifty में भी जोरदार तेजी

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.33 फीसदी) की शानदार बढ़त के साथ 77409.98 के ऐतिहासिक स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 82.30 अंक (0.34 फीसदी) उछलकर 24168.00 के पार निकल गया, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।

 

बैंकिंग शेयरों ने पूरे बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई, वहीं मिडकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर, इंटरग्लोब एविएशन, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अडाणी एंटरप्राइजेज शामिल थे। मीडिया, फार्मा, PSU बैंक, प्राइवेट बैंक और रियल्टी में 0.5 फीसदी की बढ़त देखी गई।

ALSO READ: Share Bazaar में लगातार तीसरे दिन तेजी, Sensex 544 अंक उछला, Nifty पहुंचा 24000 के करीब

निवेशकों का भरोसा बढ़ा

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने घरेलू बाजार को एक बड़ा सपोर्ट दिया है। सस्ते कच्चे तेल और चुनिंदा खरीदारी के कारण घरेलू साइक्लिकल्स और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले सेक्टर्स में निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ा।

 

इससे पहले यानी बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का रुख रहा। इस दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसयू बैंक के शेयरों के समर्थन से बीएसई के सेंसेक्स और एनएसई के निफ्टी में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में निफ्टी एक बार फिर 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में सफल रहा।

ALSO READ: ट्रंप के बयान से Share Bazaar में तूफानी तेजी, Sensex 1695 अंक उछला, Nifty भी 23600 के पार

कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 347.14 अंक यानी 0.45 प्रतिशत के उछाल के साथ 77155.62 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं एनएसई का निफ्टी 96.55 अंक यानी 0.4 प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए 24085.70 पर पहुंच गया।
Edited By : Chetan Gour

SIP vs PPF: 30 साल तक हर महीने ₹5000 निवेश, किसमें बनेगा ज्यादा फंड? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs PPF: अगर लंबी अवधि के निवेश की बात करें, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। दोनों का इस्तेमाल घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट या लंबी अवधि में संपत्ति बनाने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, निवेश का फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं देखना चाहिए। अपनी कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करे तो PPF और SIP में से कौन ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है।

PPF में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

अगर PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दर बनी रहती है और आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपका कुल फंड करीब 61.80 लाख रुपये हो सकता है।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, ब्याज के रूप में करीब 43.80 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी निवेश से कहीं ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज से जुड़ सकती है। हालांकि, इस कैलकुलेशन में महंगाई का असर शामिल नहीं है।

chart pfss

SIP में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

वहीं, अगर आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये की SIP करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका कुल फंड करीब 1.41 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड 12% रिटर्न देते हैं। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, करीब 1.23 करोड़ रुपये का फायदा रिटर्न के रूप में मिल सकता है। इस तरह कुल फंड 1.41 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

महंगाई को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

निवेश की योजना बनाते समय महंगाई को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आज के 1 करोड़ रुपये की कीमत 30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। अगर SIP पर 12% रिटर्न मिले और महंगाई दर 6% मान ली जाए, तो 30 साल बाद आपके फंड की वास्तविक कीमत करीब 40.84 लाख रुपये रह जाएगी।

इसमें 18 लाख रुपये का निवेश और लगभग 22.84 लाख रुपये का वास्तविक रिटर्न शामिल होगा। यही वजह है कि निवेश का आकलन करते समय सिर्फ कुल फंड नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक खरीद क्षमता भी देखनी चाहिए।

SIP को क्यों पसंद करते हैं निवेशक?

  • SIP लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का आसान तरीका माना जाता है। इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं।
  • म्यूचुअल फंड में SIP छह महीने से लेकर किसी भी अवधि के लिए शुरू की जा सकती है। इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  • SIP में ज्यादा रिटर्न की संभावना है। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने अच्छे रिटर्न दिए हैं। हालांकि, रिटर्न पूरी तरह बाजार पर निर्भर करता है।
  • SIP निवेश की आदत भी बनती है। बैंक से ऑटो-डेबिट सेट करने के बाद हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है।
  • SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदने से लंबी अवधि में औसत खरीद लागत संतुलित रहती है।

इसके अलावा SIP में Systematic Withdrawal Plan (SWP) की सुविधा भी मिलती है। इसके जरिए निवेशक जरूरत पड़ने पर हर महीने एक तय रकम निकाल सकते हैं। इससे पूरे निवेश को एक साथ तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

Personal Loan 3 (1)

PPF को क्यों चुनते हैं निवेशक?

  • PPF लंबे समय से सुरक्षित निवेश का पर्याय माना जाता है। यह केंद्र सरकार की गारंटी वाली बचत योजना है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।
  • PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा है। फिलहाल इस पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। सरकार हर तिमाही ब्याज दर की समीक्षा करती है।
  • टैक्स बचत के लिहाज से भी PPF काफी आकर्षक है। यह EEE कैटेगरी का निवेश है। यानी निवेश की रकम, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स फ्री होती हैं।
  • पुराने टैक्स रिजीम में PPF में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है।
  • PPF खाते पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के एक साल बाद जमा राशि के आधार पर लोन लिया जा सकता है। आमतौर पर खाते में मौजूद बैलेंस का 25% तक लोन मिलता है।

निकासी के मामले में भी कुछ सुविधाएं हैं। PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। हालांकि, पांच साल बाद कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी की जा सकती है। मैच्योरिटी के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

आखिर किसे चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है और आप गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है और आप बाजार से जुड़े जोखिम उठा सकते हैं, तो SIP ज्यादा आकर्षक साबित हो सकती है।

यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार दोनों में संतुलित निवेश की सलाह देते हैं। इससे एक तरफ PPF की सुरक्षा मिलती है, तो दूसरी तरफ SIP के जरिए ज्यादा रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन की संभावना भी बनी रहती है।

ITR Filing 2026: कब तक भरना है ITR, देरी पर कितना लगेगा जुर्माना; जानिए हर एक डिटेल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

राहुल गांधी के साथ कोटा में खड़ा हुआ Gen-Z, NEET पेपर लीक और देश के एजुकेशन सिस्‍टम का किया पोस्‍टमार्टम

Gen Z  and Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने राजस्‍थान के कोटा में जब स्‍टेज पर एंट्री ली तो जो माहौल था वो किसी इंटरनेशनल पॉप सिंगर के कंसर्ट जैसा लग रहा था। लाइट्स, कैमरा, मोबाइल के फ्लैशेस और लाखों स्‍टूडेंट की भीड़ और उनका शोर। स्‍टूडेंट जिन्‍हें आजकल जेन-जी कहा जाता है। कोटा में नीट और यूपीएससी की तैयारी कर रहे जेन-जी राहुल को सुनने के लिए बेताब थे। यह शोर बता रहा था कि वे देश के एजुकेशन सिस्‍टम में बदलाव की जरूरत है।

हाफ स्‍लीव शर्ट और पतलून में राहुल गांधी ने स्‍टेज पर आते ही यह साफ कर दिया कि यह कोई राजनीतिक रेली नहीं है। यह आपके लिए हैं, यह उन नौजवानों को लिए है जो अपने भविष्‍य की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्‍होंने कहा— आज की शाम मेरे मुंह से बीजेपी, कांग्रेस और राजनीति जैसा एक भी शब्‍द नहीं निकलेगा। उन्‍होंने कहा कि मैं कश्‍मीर से लेकर कन्‍याकुमारी तक यात्राएं करता हुआ लगातार हमारे एजुकेशन सिस्‍टम के बारे में सोच रहा हूं, स्‍टूडेंट से बात कर रहा हूं। हमारा सिस्‍टम छात्रों के साथ न्‍याय नहीं करता।

हमारे सिस्‍टम की गलती है : इसके बाद उन्‍होंने एक नीट छात्रा स्‍नेहा का सुसाइड नोट दिखाया, कहा कि स्‍नेहा डॉक्‍टर बनना चाहती थी, इनके पिता पैरेलाइज्‍ड हैं, कर्ज लिया था। लेकिन नीट पेपर लीक हो गया और उसने आत्‍महत्‍या कर ली। उन्‍होंने कहा कि स्‍नेहा की गलती नहीं थी, उसके पिता की गलती नहीं थी, आपकी नहीं थी। यह हमारे एजुकेशन सिस्‍टम की गलती है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर काम करे। हम देखें कि हमारे सिस्‍टम में कहां गलती है और उसे सुधारे मिलकर। यह रेली सिर्फ इस बारे में है।

राहुल के साथ छात्रों की गूंज : राहुल गांधी ने देश के एजुकेशन सिस्‍टम के खिलाफ कोटा में आवाज उठाई और स्‍टूडेंट के साथ ही उनके परिजनों से बात कर के इसकी खामियां गिनाई और बताया कि कहां सुधार की जरूरत है। आम आदमी अपने बच्‍चों के लिए कर्ज लेकर डॉक्‍टर बनाने के लिए नीट एक्‍जाम में शामिल करता है और एक पेपर लीक उनके पूरे भविष्‍य और परिवार को बर्बाद कर देता है। इस पूरे अभियान में कोटा में नीट, यूपीएससी और अन्‍य परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्‍टूडेंट ने राहुल के साथ अपनी आवाज मिलाई।

कोटा जाने से पहले क्‍या लिखा राहुल ने : बता दें कि राजस्थान के कोटा रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कोटा के लिए निकल चुका हूं पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं उमेश और रिया। सीकर में उमेश और देहरादून में रिया दोनों ने दोबारा नीट की परीक्षा के दबाव में अपनी जिंदगी खत्म कर ली। उन्होंने आगे कहा कि 22 और 23 साल के बच्चे, जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था वो इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए।

5 साल में कितनी आत्‍महत्‍याएं : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2021 से लेकर वर्ष 2026 के बीच NEET से जुड़े कम से कम 93 छात्र आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में ऐसे मामलों की संख्या सबसे ज्यादा रही, जब कम से कम 32 छात्रों ने अपनी जान गंवाई। साल 2026 में अब तक 14 मामले सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 5 मामले 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद दर्ज किए गए। हालांकि ये आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।

कहां-कहां हुई आत्‍महत्‍याएं : रिपोर्ट्स के अनुसार NEET 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों से कई छात्रों की मौत के मामले सामने आए। 14 मई को गोवा, 15 मई को उत्तर प्रदेश और दिल्ली, 16 मई को राजस्थान तथा 24 मई को कर्नाटक से ऐसे मामले रिपोर्ट किए गए। इसके बाद जून में भी कई घटनाएं सामने आईं। 4 जून को राजस्थान के दौसा निवासी अजीत मीणा की मौत की खबर आई। 13 जून को दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाली 17 वर्षीय रेनू की मौत का मामला सामने आया था। 15 जून को राजस्थान के सीकर और 16 जून को उत्तराखंड के देहरादून से भी NEET अभ्यर्थियों की मौत की खबर सामने आई हैं।

हर साल 24 लाख बच्‍चे देते हैं नीट : नीट (NEET UG) परीक्षा में हर साल लगभग 22 लाख से 24 लाख के बीच छात्र बैठते हैं। उदाहरण के लिए, परीक्षा के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 22,79,743 छात्रों ने पंजीकरण कराया था और 22 लाख से अधिक उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए थे।

कितनी खर्च होता है नीट की तैयारी में : नीट (NEET) की 1 साल की फीस आपके द्वारा चुने गए माध्यम (ऑनलाइन/ऑफलाइन कोचिंग) और संस्थान पर निर्भर करती है। आमतौर पर 1 साल के कोर्स की फीस 50,000 से 2,50,000 के बीच होती है।

ऑनलाइन कोचिंग: यह सबसे सस्ता विकल्प है, जिसकी फीस करीब 4,000 से 1,00,000 प्रति वर्ष तक होती है।
ऑफलाइन कोचिंग (रेगुलर): किसी सामान्य कोचिंग सेंटर या ब्रांच में पढ़ने का खर्च 50,000 से 1,50,000 तक होता है।
प्रमुख कोचिंग संस्थान (जैसे कोटा या आकाश): बड़े संस्थानों में फीस 1,00,000 से 2,50,000 के बीच हो सकती है (हॉस्टल का खर्च अलग से)।

सरकार के लिए बड़ा वेक-अप कॉल : कोटा में राहुल गांधी और 'जेन-जी' (Gen-Z) का यह साथ सिर्फ एक राजनीतिक संवाद नहीं, बल्कि देश की जर्जर होती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का एक कड़ा आक्रोश है। नीट (NEET) पेपर लीक जैसी घटनाओं ने आज की पीढ़ी के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। युवाओं ने नेताओं के साथ मिलकर जिस तरह शिक्षा तंत्र की कमियों का 'पोस्टमार्टम' किया है, उसने यह साफ कर दिया है कि अब देश का युवा चुप बैठने वाला नहीं है। सरकार और प्रशासन के लिए यह एक बड़ा वेक-अप कॉल है—अगर समय रहते इस पूरे सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित नहीं बनाया गया, तो देश के भविष्य (युवाओं) का यह असंतोष एक बड़े आंदोलन की शक्ल ले सकता है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

सपा के लिए सैफई ही घर-परिवार, मेरे लिए उत्तर प्रदेश घर, 25 करोड़ लोग परिवार : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi inaugurated development projects in Unnao

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव में 570 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 101 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

– उन्नाव भी बना स्टेट कैपिटल रीजन का अंग, लखनऊ से उन्नाव होते हुए कानपुर तक रैपिड रेल का प्रस्तावः मुख्यमंत्री योगी

– गरीबों के लिए नहीं, माफिया के मरने पर निकलते हैं सपा-कांग्रेस नेताओं के आंसू : मुख्यमंत्री योगी

– मुख्यमंत्री योगी ने बच्चों का कराया अन्नप्राशन, प्रदर्शनी का भी किया अवलोकन

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गत 12 वर्षों में देश में और 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार ने जो कार्य किया, वह कांग्रेस व सपा सरकारें नहीं कर सकीं, क्योंकि भ्रष्ट व क्षमता विहीन ये लोग गरीब के बारे में नहीं, केवल अपने परिवार के बारे में सोचते थे। कांग्रेस ने नेहरू-गांधी परिवार से बाहर कभी नहीं सोचा और सपा के लिए केवल सैफई ही परिवार था जबकि प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत को घर और 140 करोड़ लोगों को ही परिवार माना है। मेरे लिए उत्तर प्रदेश घर और 25 करोड़ लोग परिवार के सदस्य हैं। उनकी समृद्धि के लिए कार्य करना ही हमारा मिशन है।

 

मुख्यमंत्री गुरुवार को 570 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 101 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ग्राम पंचायत डीह, भवानी खेड़ा चौराहा, हिंदु खेड़ा उन्नाव में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों को जानकारी दी कि वीर शहीद गुलाब सिंह लोधी की स्मृति में निर्मित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल की क्षमता भी दोगुनी कर दी गई है।

 

खर-दूषण जैसे थे सपा के सत्तापोषित माफिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार के समय गरीब या अन्य राजनीतिक दल आवाज उठाते थे तो इनके गुंडे व माफिया उनकी आवाज दबाने के साथ ही व्यापारियों का अपहरण कर प्रदेश में अराजकता का तांडव करते थे। रामायण काल में खर-दूषण, मारीच व सुबाहु का आतंक ऐसा ही रहा होगा, जैसे सपा सरकार के समय सत्तापोषित माफिया का था।

ALSO READ: CM योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को मिली बड़ी उपलब्धि, देश के प्रतिष्ठित 2 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्लब में हुआ शामिल

कांग्रेस व सपा के नेताओं को कभी गरीब के लिए आंसू बहाते नहीं देखा होगा। इनके आंसू माफिया के मरने पर बहते हैं। ये गरीबों के प्रति संवेदनहीन बन जाते हैं। सर्वाधिक समय तक शासन करने के बावजूद ये दोनों दल देश-प्रदेश को दुर्गति के गर्त में धकेलने के जिम्मेदार हैं। 

 

अध्यात्म, साहित्य व क्रांति की धरा है उन्नाव 

मुख्यमंत्री ने उन्नाव को अध्यात्म, साहित्य व क्रांति की धरा बताया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय आध्यात्मिक स्थलों, साहित्यकारों, क्रांतिकारियों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए। विधानसभा के पूर्व अध्य़क्ष हृदय नारायण दीक्षित के कार्यों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अस्मिता पर संकट के समय गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए राजा रामबख्श सिंह, वीर गुलाब सिंह लोधी ने अपने बलिदान से ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें उखाड़ दीं। 

 

उन्नाव को कभी पिछड़ने नहीं देंगे 

मुख्यमंत्री बोले,  स्वामी साक्षी महाराज जी कहते थे कि लखनऊ व कानपुर के बीच उन्नाव खुद को उपेक्षित महसूस करता है। तब मैंने कहा था कि विकास की हर योजना उन्नाव में भी आएगी। आज उन्नाव की कनेक्टिविटी हर तरफ से फोरलेन की हो गई है। गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए उन्नाववासी लखनऊ को बाईपास कर सीधे दिल्ली, प्रयागराज जा सकते हैं। कानपुर के लिए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भी बन रहा है। उन्नाव व कानपुर की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए गंगा नदी में अतिरिक्त ब्रिज की मांग भी पूरी की गई।

ALSO READ: डायट के 3,346 पदों का स्थायीकरण, शिक्षा सुधारों को स्थायी आधार दे रही योगी सरकार

हम उन्नाव को पिछड़ने नहीं देंगे। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर व गंगा एक्सप्रेसवे पर इंडस्ट्रियल कलस्टर विकसित करने के लिए जमीन अधिग्रहण हो चुका है। डिफेंस कॉरिडोर के लिए लगभग 700 एकड़ लैंड और लगभग 200 एकड़ लैंड इंडस्ट्री कलस्टर के लिए उन्नाव जनपद के लिए तैयार है। उद्योग लगने से स्थानीय नौजवानों को यहीं रोजगार प्राप्त होगा।

 

दुनिया के लिए प्रेरणा बना भारत का प्रबंधन 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दुनिया ऊर्जा, आर्थिक मंदी और पश्चिम एशिया के संकट के दौर से गुजर रही है, तब भी पीएम मोदी के नेतृत्व में जनता को राहत मिली और संकट से उबारा गया। भारत का प्रबंधन दुनिया के लिए प्रेरणा बना। अमेरिका महंगाई से त्रस्त है, लेकिन भारत ने उक्त संकटों का बखूबी सामना किया। भारत में सुरक्षा, आस्था का सम्मान व अर्थव्यवस्था को मजबूती से बढ़ाया जा रहा है। आतंकवादियों, उग्रवादियों व नक्सलवादियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देकर भारत की ताकत का अहसास कराया जा रहा है। 

 

गरीब, किसान, महिला व युवा को केंद्र में रखकर योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की नजर में चार जातियां (गरीब, किसान, महिला, युवा) ही हैं। योजनाएं इन्हें केंद्र में रखकर ही बन रही हैं। मिशन शक्ति के अंतर्गत नारी की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के कार्यक्रम हो रहे हैं। प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए अब गरीब हाथ नहीं फैलाते, बल्कि अधिकारी घर जाकर बताते हैं कि आपका चयन हुआ है। पहले घूस देकर भी योजना का लाभ नहीं मिलता था, आज बिना सिफारिश रसोई गैस, राशन, पेंशन, आयुष्मान आदि सुविधाएं मिल रही हैं। 

 

विपक्षियों के दोहरे चरित्र को देख आती है हंसी 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों के दोहरे चरित्र को देखकर हंसी आती है। प्रदेश को पहचान का संकट देने वाले, माफियाराज, दंगा-कर्फ्यू ग्रस्त बनाने वाले आज उपदेश दे रहे हैं। इनमें तनिक भी लज्जा हो तो अपने कार्यकाल को देख लें। जिन दलों ने युवाओं के रोजगार/नौकरियों, स्वाभिमान से खिलवाड़ किया,  यूपी का युवा इन भ्रष्टाचारियों को स्वीकार नहीं करेगा। युवा 2014 से इनसे अपमान का बदला ले रहा है।

ALSO READ: 'सिर्फ आवेदन शुल्क के 400 रुपए, न सिफारिश, न ही घूस', CM योगी के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर भावुक हुए युवा

स्वाभिमान से खिलवाड़ करने वाले बर्दाश्त नहीं 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले किसान को फसल का दाम और बिजली नहीं मिलती थी। ट्यूबवेल चोरी होते थे, आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता था। गन्ने का दाम, समय पर बीज-उर्वरक, कुछ नहीं मिलता था, इसलिए किसान भी इन्हें बर्दाश्त नहीं करेगा। मां जगतजननी की प्रतीक नारी शक्ति खर-दूषण व चंड-मुंड से निपटना जानती है। सपा के नाम पर ‘देख सपाई, बिटिया घबराई’ की चर्चा होती है। नया भारत व नया उत्तर प्रदेश सम्मान, स्वाभिमान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शता नहीं है।

 

यूपी पर बरसता है प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में प्रभु श्रीराम, बांके बिहारी, बाबा विश्वनाथ, मां गंगा का आशीर्वाद बरसता है, यहां पैसे की कमी नहीं है। अब कोई उपद्रव नहीं करता है। हर त्योहार अब गरीबों के लिए भी खुशहाली लाते हैं। गरीब इन त्योहारों पर अच्छे कपड़े पहनकर परिवार के साथ उत्साहित होते हैं। 

 

उन्नाव भी बना एससीआर का अंग 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्नाव भी स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) का अंग बना है। अमर नायक वीर गुलाब सिंह लोधी देश को आजाद कराने के लिए कभी उन्नाव से हजरतगंज, लखनऊ तक पहुंचे थे। अब विकास लखनऊ से उन्नाव होते हुए कानपुर तक जाएगा। देश की पहली रैपिड रेल दिल्ली से मेरठ तक पहुंची है। ऐसे ही लखनऊ से उन्नाव होते हुए कानपुर तक रैपिड रेल का प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। चारों ओर रिंग रोड बनेगी।

लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली जनपद आपस में जुड़ेंगे, विकास में सबकी बराबर की सहभागिता होगी। हमारे पास ऊर्जावान युवा, मेहनती किसान, आधी आबादी की ताकत, मां गंगा का आशीर्वाद है। अब यह जनपद भी विकसित उन्नाव के रूप में प्रस्तुत होगा। अलग-अलग जनपदों में इंडस्ट्रियल कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं। विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की तैयारी चल रही है। सरकार 100 वर्ष की कार्ययोजना को लेकर कार्य कर रही है। 

 

एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में यूपी सबसे आगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे पर कोई चलेगा तो उसे पता लग जाएगा कि ग्लोबल स्टैंडर्ड कैसे लागू किए जाते हैं। इस एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी वही है, जो दुनिया में सबसे अच्छी सड़क की है। हमने इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री जी को उन्नाव व हरदोई के बीच में आमंत्रित किया। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में यूपी सबसे आगे है। 

 

इस अवसर पर सांसद साक्षी महाराज, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, विधायक पंकज गुप्ता, अनिल सिंह, आशुतोष शुक्ल, बंबालाल दिवाकर, श्रीकांत कटियार, ब्रजेश रावत, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, जिला पंचायत अध्यक्ष शकुन सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी आदि मौजूद रहे।
Edited By : Chetan Gour

लगातार पांचवे दिन Sensex मजबूत, ₹3 लाख करोड़ बढ़ी दौलत, Indigo-Trent रहे टॉप गेनर

Share Market Rally: कच्चे तेल की फिसलन पर घरेलू स्टॉक मार्केट में आज लगातार पांचवे दिन रौनक रही। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो इंट्रा-डे में सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के एकदम करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस में भी अच्छी रौनक रही और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी से थोड़ी ही कम बढ़त रही।

सेक्टरवाइज आईटी सेक्टर ने मार्केट पर काफी दबाव बनाने की काफी कोशिश की और इसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर हुआ। हालांकि फार्मा, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर ने इसे संभाल लिया जिनके निफ्टी इंडेक्स आधे-आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुए। निफ्टी प्राइवेट बैंक भी आधा फीसदी मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 254.36 प्वाइंट्स यानी 0.33% के उछाल के साथ 77,409.98 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 82.30 प्वाइंट्स यानी 0.34% की बढ़त के साथ 24,168.00 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स आज 336.71 प्वाइंट्स उछलकर 77,492.33 और निफ्टी 103.55 प्वाइंट्स चढ़कर 24,189.25 तक पहुंच गया।

₹3.10 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,58,056.752 करोड़ था। आज यानी 18 जून 2026 को यह उछलकर ₹4,77,68,135.83 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,10,079.078 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 20 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 20 स्टॉक्स आज ग्रीन बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और बीईएल में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट इंफोसिस, टेक महिंद्रा और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

sensex 190

162 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4419 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2419 शेयर मजबूत हुए तो 1814 में गिरावट रही जबकि 186 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 162 शेयर एक साल के हाई और 46 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 7 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 7 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

bse 19

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यूक्रेन ने रूस पर सबसे बड़ा ड्रोन अटैक किया:1000 से ज्यादा ड्रोन, क्रूज मिसाइलें भी दागीं; ऑयल डिपो धमाके से तबाह, एक की मौत

यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें करीब 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र के एक ऑयल डिपो धमाके से तबाह हो गया, यहां मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। विस्फोट के बाद ऑयल डिपो टैंक का ढक्कन कई मीटर ऊपर उछल गया और आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पास के एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लग गई। ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। हमले के बाद मॉस्को के हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई। जेलेंस्की बोले- यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मॉस्को पर हुए हमले को पिछले हफ्ते कीव पर रूस की कार्रवाई का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो रूस के युद्ध अभियान को सहारा दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि अब समय आ गया है कि रूस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाए। उन्होंने यूक्रेन की विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई की तारीफ भी की। जेलेंस्की ने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।” हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेताओं के साथ शिखर बैठक में मौजूद थे। उन्होंने मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 2023 से रूसी राजधानी पर ड्रोन हमले बढ़े 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के ड्रोन हमले सीमित थे। 2023 में पहली बार उसके ड्रोन मॉस्को तक पहुंचे, लेकिन तब हमलों में कुछ ही ड्रोन इस्तेमाल किए जाते थे। अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है, जबकि रूस ने भी राजधानी के चारों ओर मजबूत एयर डिफेंस तैनात कर रखा है। इस वजह से युद्ध अब सिर्फ फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रहा। दोनों देश तेल डिपो, रिफाइनरी और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। G7 देशों ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया मॉस्को पर बड़े हमले के बीच G7 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य मदद बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि यूक्रेन को ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के हथियार दिए जाएंगे। इसके अलावा रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। G7 देशों ने सर्दियों से पहले यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मदद देने का भरोसा दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराना आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी वोलोदिमिर जेलेंस्की और व्लादिमिर पुतिन दोनों से अच्छी बातचीत हुई है और वह इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं। ———————— रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक मिसाइल से हमला किया:यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम; जेलेंस्की बोले- रूसी पागल हो चुके हैं रूस ने पिछले महीने यूक्रेन पर कई मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। हमलों का निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाके थे। रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेनी हमलों के जवाब में किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

यूक्रेन ने रूस पर सबसे बड़ा ड्रोन अटैक किया:1000 से ज्यादा ड्रोन, क्रूज मिसाइलें भी दागीं; ऑयल डिपो धमाके से तबाह, एक की मौत

यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें करीब 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र का एक ऑयल डिपो धमाके से तबाह हो गया, यहां मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। विस्फोट के बाद ऑयल डिपो टैंक का ढक्कन कई मीटर ऊपर उछल गया और आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पास के एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लग गई। ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। हमले के बाद मॉस्को के हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई। जेलेंस्की बोले- यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मॉस्को पर हुए हमले को पिछले हफ्ते कीव पर रूस की कार्रवाई का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो रूस के युद्ध अभियान को सहारा दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि अब समय आ गया है कि रूस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाए। उन्होंने यूक्रेन की विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई की तारीफ भी की। जेलेंस्की ने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।” हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेताओं के साथ शिखर बैठक में मौजूद थे। उन्होंने मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 2023 से रूसी राजधानी पर ड्रोन हमले बढ़े 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के ड्रोन हमले सीमित थे। 2023 में पहली बार उसके ड्रोन मॉस्को तक पहुंचे, लेकिन तब हमलों में कुछ ही ड्रोन इस्तेमाल किए जाते थे। अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है, जबकि रूस ने भी राजधानी के चारों ओर मजबूत एयर डिफेंस तैनात कर रखा है। इस वजह से युद्ध अब सिर्फ फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रहा। दोनों देश तेल डिपो, रिफाइनरी और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। G7 देशों ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया मॉस्को पर बड़े हमले के बीच G7 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य मदद बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि यूक्रेन को ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के हथियार दिए जाएंगे। इसके अलावा रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। G7 देशों ने सर्दियों से पहले यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मदद देने का भरोसा दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराना आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी वोलोदिमिर जेलेंस्की और व्लादिमिर पुतिन दोनों से अच्छी बातचीत हुई है और वह इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं। 17 मई- यूक्रेनी हमले में 1 भारतीय समेत 4 की मौत इससे पहले यूक्रेन ने 17 मई को भी रूस के कई इलाकों पर 1000 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें कम से कम 4 लोगों की मौत हुई थी। इसमें 1 भारतीय भी शामिल था। रूस में भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की थी। दूतावास के मुताबिक 3 भारतीय घायल भी हुए थे। रूस के अधिकारियों ने बताया था कि ड्रोन हमले में मॉस्को में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि यूक्रेन सीमा से लगे बेलगोरोद इलाके में एक और व्यक्ति की जान गई। मॉस्को में कुल 12 लोग घायल हुए। इनमें तेल रिफाइनरी में काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं। यूक्रेन ने मॉस्को में सैन्य और ईंधन से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें एंगस्ट्रेम प्लांट शामिल है, जो रूस की सेना के लिए सेमीकंडक्टर बनाता है। इसके अलावा मॉस्को ऑयल रिफाइनरी, सोलनेचनोगोर्स्क और वोलोडार्स्कोये ईंधन स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। पूरी खबर पढ़ें… ———————— रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक मिसाइल से हमला किया:यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम; जेलेंस्की बोले- रूसी पागल हो चुके हैं रूस ने पिछले महीने यूक्रेन पर कई मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। हमलों का निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाके थे। रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेनी हमलों के जवाब में किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

जामुन की बंपर पैदावार, सूखे का भय, क्या यह है प्रकृति की चेतावनी, आखिर क्या है सुसाइड फ्रूटिंग या बंपर क्रॉप

मालवा में इस साल जामुन के पेड़ों पर रिकॉर्ड संख्या में फल देखने को मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि पिछले कई दशकों में उन्होंने जामुनों की इतनी अधिक पैदावार नहीं देखी। जिन पेड़ों पर पिछले साल बहुत कम फल आए थे, वे भी इस बार जामुनों से लदे नजर आ रहे हैं।

 

इस असामान्य स्थिति ने लोगों के बीच एक पुरानी मान्यता को फिर चर्चा में ला दिया है। बुजुर्गों का मानना है कि जिस वर्ष जामुन के पेड़ों पर अत्यधिक फल लगते हैं, उस वर्ष सूखे या कड़ी गर्मी की संभावना बढ़ जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इस पारंपरिक मान्यता को वैज्ञानिक आधार भी मिलता है।

 

एक्सपर्ट्‍स के अनुसार इस प्रक्रिया को 'मास्टिंग' (Masting) या स्ट्रेस फ्रूटिंग” (Stress Fruiting) कहा जाता है। जब किसी पेड़ को मिट्टी में नमी की कमी, भूजल स्तर में गिरावट या मौसम में बड़े बदलावों का आभास होता है, तब वह अपनी अधिकांश ऊर्जा नए पत्तों और शाखाओं के विकास के बजाय अधिक से अधिक फल और बीज पैदा करने में लगा देता है।

ALSO READ: Weather Update : मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, इन लोगों को खास चेतावनी

वनस्पति विज्ञान के अनुसार यह पेड़ों की एक प्राकृतिक रणनीति होती है, जिसके जरिए वे अपनी अगली पीढ़ी को सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं। यदि पेड़ को लगता है कि भविष्य में उसके अस्तित्व पर खतरा हो सकता है, तो वह अधिक बीज उत्पन्न करके अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है।

 

जामुन के पेड़ों की जड़ें काफी गहराई तक जाती हैं और वे भूजल स्तर में होने वाले बदलावों को जल्दी महसूस कर सकती हैं। जब जमीन के भीतर पानी का स्तर सामान्य से अधिक नीचे चला जाता है, तब पेड़ पर तनाव बढ़ता है और वह असाधारण मात्रा में फल देने लगता है। यही कारण है कि कई वैज्ञानिक इसे संभावित सूखे या लंबे शुष्क मौसम का शुरुआती संकेत भी मानते हैं।

 

हालांकि केवल जामुन की अधिक पैदावार को सूखे की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता, लेकिन यह प्रकृति द्वारा दिए जाने वाले उन संकेतों में से एक है, जिन पर पर्यावरण वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञ नजर रखते हैं।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को इस प्राकृतिक संकेत को समझते हुए जल संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर ध्यान देना चाहिए। जामुन की भरपूर फसल जहां प्रकृति का अनोखा उपहार है, वहीं यह पर्यावरणीय बदलावों की ओर इशारा करने वाला महत्वपूर्ण संकेत भी हो सकता है। Edited by : Sudhir Sharma

Instagram पर 4.8 लाख फॉलोअर्स: ‘Peace Dog’ आलोका की एक झलक पाने उमड़ी भीड़

गुरुग्राम के एक लग्जरी होटल में मंगलवार शाम कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिला। यहां ना कोई बॉलीवुड स्टार था, ना कोई क्रिकेटर, लेकिन फिर भी लोगों की लंबी लाइनें लगी थीं। हर कोई बस एक झलक पाना चाहता था ‘आलोका’ की — उस इंडी स्ट्रीट डॉग की, जिसने अपनी मासूमियत और सफर से दुनिया भर के लोगों का दिल जीत लिया है।

 

कभी कोलकाता की गलियों में बेसहारा घूमने वाला यह डॉग आज “पीस डॉग” (Peace Dog) के नाम से जाना जाता है। लोग उसके साथ सेल्फी ले रहे थे, उसे गले लगा रहे थे, और उसके पंजों के निशान को ऑटोग्राफ की तरह संभालकर रख रहे थे। सोशल मीडिया पर आलोका की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Instagram पर उसके करीब 4.8 लाख Followers हैं।

aloka the peace dog

 

100 दिनों की यात्रा ने बदल दी जिंदगी

 

आलोका की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। साल 2022 में बौद्ध भिक्षुओं का एक समूह भारत और नेपाल की शांति यात्रा पर निकला था। उसी दौरान कोलकाता की सड़कों पर रहने वाला एक आवारा कुत्ता उनके पीछे-पीछे चलने लगा। शुरुआत में किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन धीरे-धीरे वह यात्रा का हिस्सा बन गया।

 

बताया जाता है कि आलोका करीब 100 दिनों तक भिक्षुओं के साथ जंगलों, गांवों और लंबी सड़कों पर चलता रहा। इस दौरान एक सड़क हादसे में वह घायल भी हुआ, लेकिन ठीक होते ही फिर उसी यात्रा में लौट आया। उसकी निष्ठा, शांत स्वभाव और साथ निभाने की भावना ने भिक्षुओं को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने उसे गोद ले लिया।

aloka the peace dog

 

उसे नया नाम मिला — ‘आलोका’, जिसका पाली भाषा में अर्थ होता है “प्रकाश” या “रोशनी”। और सच में, यह डॉग आज लाखों लोगों के लिए उम्मीद और दया की रोशनी बन चुका है।

 

अमेरिका से श्रीलंका तक… हजारों किलोमीटर का सफर

 

भारत से शुरू हुई आलोका की यात्रा जल्द ही दुनिया तक पहुंच गई। बौद्ध भिक्षु उसे अपने साथ अमेरिका ले गए, जहां उसने “वॉक फॉर पीस” (Walk for Peace) अभियान में हिस्सा लिया। टेक्सास से शुरू हुई इस यात्रा में आलोका ने करीब 3700 किलोमीटर पैदल चलकर सबको चौंका दिया।

 

अमेरिका के 10 राज्यों से गुजरते हुए यह इंडी डॉग शांति और करुणा का संदेश देता रहा। इसके अलावा वह श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों की यात्राओं का भी हिस्सा बना। जहां भी वह पहुंचा, लोगों ने उसे सिर्फ एक डॉग नहीं बल्कि प्रेम, वफादारी और इंसानियत की मिसाल के तौर पर देखा।

aloka the peace dog

 

उसके माथे पर बना दिल जैसा निशान भी लोगों को बेहद खास लगता है। कई लोग इसे “पीस मार्क” तक कहने लगे हैं।

 

 गुरुग्राम में उमड़ा प्यार, मेनका गांधी से भी मुलाकात

 

हाल ही में आलोका भारत लौटा और दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से भी मिला। इसके बाद गुरुग्राम के द वेस्टिन होटल में उसके लिए खास कार्यक्रम रखा गया, जहां पशु प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

 

कार्यक्रम का मकसद सिर्फ आलोका से लोगों को मिलवाना नहीं था, बल्कि बेसहारा जानवरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना भी था। बौद्ध भिक्षु पन्नाकारा ने लोगों से कहा कि शांति की शुरुआत इंसान के दिल से होती है और जानवरों के प्रति दया ही असली मानवता है।

 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आलोका बेहद शांत अंदाज में लोगों के बीच बैठा नजर आया। कोई उसके सिर पर प्यार से हाथ फेर रहा था तो कोई उसके सामने हाथ जोड़कर बैठा था।

 

आलोका सिर्फ एक डॉग नहीं, एक संदेश है

 

आलोका की कहानी इस बात का सबूत है कि प्यार और अपनापन किसी की भी जिंदगी बदल सकता है। जो डॉग कभी सड़कों पर अनजान और बेसहारा था, वही आज दुनिया भर में लोगों को compassion, kindness और peace का संदेश दे रहा है।

 

उसकी यात्रा सिर्फ एक जानवर की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत को आईना दिखाने वाली मिसाल है। शायद इसी वजह से लोग कहते हैं — “हर स्ट्रीट डॉग को बस एक मौका और थोड़ा प्यार चाहिए।”

 

आलोका आज सिर्फ एक डॉग नहीं, बल्कि उम्मीद का चेहरा बन चुका है।