ITR Filing 2026: सेक्शन 87A में ₹60000 तक की टैक्स रिबेट, जानिए कौन कर सकता है क्लेम

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (FY 2025-26) के लिए ITR-1 से ITR-5 तक के फॉर्म जारी कर दिए हैं। साथ ही ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की एक्सेल यूटिलिटी भी शुरू कर दी है। इसकी मदद से टैक्सपेयर्स पहले ऑफलाइन रिटर्न भर सकते हैं। इसके बाद उसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।

अगर आप ITR भर रहे हैं, तो सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रिबेट के नियम जानना जरूरी है।

क्या है सेक्शन 87A का रिबेट?

सेक्शन 87A के तहत मिलने वाला रिबेट सीधे आपके कुल टैक्स से घट जाता है। यह टैक्स छूट (Exemption) या टैक्स डिडक्शन (Deduction) से अलग होता है। इसका मकसद कम और मध्यम आय वाले लोगों को टैक्स में राहत देना है।

कितना मिलेगा रिबेट?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है और आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये तक है, तो आपको अधिकतम 12,500 रुपये का रिबेट मिल सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं और आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये तक है, तो आपको 60,000 रुपये तक का रिबेट मिल सकता है।

इसमें ध्यान रखने वाली बात है कि यह रिबेट 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने से पहले टैक्स की रकम पर मिलता है।

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

सेक्शन 87A का फायदा सिर्फ इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को मिलता है। इसका मतलब है कि कंपनियां, HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) और NRI इसका फायदा नहीं ले सकते।

अगर आपको शेयर बेचने से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) हुआ है, तो उस टैक्स पर भी यह रिबेट नहीं मिलेगा। लॉटरी, गेम शो या दूसरी ऐसी कमाई, जिस पर विशेष टैक्स दर लागू होती है, उस पर भी यह सुविधा नहीं मिलती।

ITR में रिबेट कैसे क्लेम करें?

सबसे पहले पूरे साल की ग्रॉस टोटल इनकम निकालें। इसके बाद मिलने वाली छूट और डिडक्शन घटाकर टैक्सेबल इनकम निकालें। ITR में अपनी टैक्सेबल इनकम भरें। अगर आपकी आय तय सीमा के भीतर है, तो सेक्शन 87A के तहत रिबेट क्लेम कर दें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-2 और ITR-3 में भी यह सुविधा दी है।

क्या है मार्जिनल रिलीफ?

नए टैक्स रिजीम में अगर आपकी कमाई 12 लाख रुपये से थोड़ी ज्यादा है और बनने वाला टैक्स, 12 लाख से ऊपर की अतिरिक्त इनकम से ज्यादा है, तो आपको मार्जिनल रिलीफ मिलता है।

अब मान लीजिए आपकी टैक्सेबल इनकम 12.15 लाख रुपये है। यानी 12 लाख की सीमा से 15,000 रुपये ज्यादा। इस पर सामान्य नियम से 62,250 रुपये टैक्स बनता है।

लेकिन मार्जिनल रिलीफ मिलने के बाद आपका टैक्स घटकर सिर्फ 15,000 रुपये रह जाएगा। इस पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने के बाद आपकी टैक्स देनदारी 62,250 रुपये से घटकर 15,600 रुपये रह जाएगी।

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हीट वेव के बढ़ते खतरे के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार सतर्क, शिक्षकों के लिए विशेष दिग्दर्शिका जारी

Yogi government alert regarding safety of children amid increasing threat of heat wave

– ऑरेंज और रेड हीट अलर्ट के दौरान बाहरी गतिविधियां स्थगित करने के निर्देश, अभिभावकों की भी तय हुई जिम्मेदारी

– सुरक्षित पेयजल, प्राथमिक उपचार, छायादार परिसर, स्वास्थ्य जागरूकता और आपातकालीन तैयारियों पर विशेष जोर

– विद्यार्थियों को लू से बचाने में शिक्षकों की होगी अहम भूमिका, हर विद्यालय में बनेगा हीट एक्शन प्लान

– योगी सरकार ने विद्यालयों में स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए जारी किए निर्देश

Uttar Pradesh news : बदलती जलवायु चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और जलवायु-अनुकूल वातावरण देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी नीति के अन्तर्गत विद्यालयों को नए सत्र में खोलने के साथ बेसिक शिक्षा विभाग ने 'हीट-संबंधी बीमारियों के प्रति विद्यार्थियों के संवेदनशीलकरण हेतु शिक्षकों के लिए दिग्दर्शिका-2026' जारी की है।

 

अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा तथा माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर तैयार इस दिग्दर्शिका का उद्देश्य शिक्षकों को हीट वेव से बचाव, हीट एग्जॉशन एवं हीट स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान, प्राथमिक उपचार तथा विद्यार्थियों के प्रभावी बचाव के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही विद्यालयों में 'क्या करें-क्या न करें' संबंधी पोस्टरों के माध्यम से बच्चों, अभिभावकों और विद्यालय समुदाय को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि भीषण गर्मी बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और विद्यालयी जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव न डाल सके।

 

हीट वेव से विद्यार्थियों की सुरक्षा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी

दिग्दर्शिका में स्पष्ट किया गया है कि हीट वेव से विद्यार्थियों की सुरक्षा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होंगे। शिक्षक प्रार्थना सभा, कक्षा शिक्षण, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा विद्यालय की दैनिक दिनचर्या के माध्यम से विद्यार्थियों को हीट वेव से बचाव के उपायों से अवगत कराएंगे। उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, तेज धूप से बचने, हल्के एवं सूती वस्त्र पहनने, जलयुक्त फलों के सेवन तथा हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों की पहचान के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही बच्चों को यह भी सिखाया जाएगा कि यदि किसी सहपाठी की तबियत बिगड़ती है तो तत्काल शिक्षक को सूचना दें।

 

हर विद्यालय में बनेगा हीट एक्शन प्लान, होगी व्यापक तैयारी

योगी सरकार ने प्रत्येक विद्यालय में स्कूल हीट एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। विद्यालयों में स्वास्थ्य नोडल शिक्षक नामित किए जाएंगे, जो हीट वेव से संबंधित गतिविधियों का समन्वय करेंगे। शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का ओरिएंटेशन कराया जाएगा। विद्यालय परिसर में हीट वेव से बचाव संबंधी संदेश और आपातकालीन संपर्क नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रत्येक विद्यालय में फर्स्ट एड किट, ओआरएस, डिजिटल थर्मामीटर तथा 108 एम्बुलेंस सहित आवश्यक चिकित्सा संपर्क व्यवस्था उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।

 

पेयजल और सुरक्षित वातावरण पर विशेष फोकस

गाइडलाइन के अनुसार विद्यालयों का समय शासन के निर्देशों के अनुरूप निर्धारित किया जाएगा। प्रार्थना सभा, खेलकूद, शारीरिक शिक्षा तथा अन्य बाहरी गतिविधियां सुबह 10 बजे से पहले आयोजित की जाएंगी। ऑरेंज अथवा रेड हीट वेव अलर्ट के दौरान सभी कठिन शारीरिक एवं बाहरी गतिविधियां स्थगित रहेंगी।

विद्यालयों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी तथा विद्यार्थियों को प्रत्येक 20 से 30 मिनट के अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थी को पानी की बोतल साथ लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही कार्यशील पंखे, पर्याप्त वेंटिलेशन, छायादार स्थान, वृक्षारोपण तथा जहां संभव हो कूल रूफ और रिफ्लेक्टिव पेंट जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

 

स्वास्थ्य, पोषण और प्राथमिक उपचार पर विस्तृत दिशा-निर्देश

दिग्दर्शिका में हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनने, टोपी अथवा छाते का उपयोग करने, तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और अन्य जलयुक्त मौसमी फलों के सेवन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। कैफीनयुक्त, कार्बोनेटेड और अत्यधिक मीठे पेयों से बचने तथा मध्याह्न भोजन स्वच्छ एवं छायादार स्थान पर परोसने पर भी जोर दिया गया है।

यदि किसी विद्यार्थी में अत्यधिक पसीना, तेज प्यास, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल छायादार स्थान पर ले जाकर प्राथमिक उपचार देने, ठंडी पट्टी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर 108 एम्बुलेंस या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

संवेदनशील बच्चों की विशेष निगरानी, अभिभावकों और समुदाय की भी होगी सहभागिता

अस्थमा, हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, दिव्यांगता अथवा हाल ही में बुखार या दस्त से पीड़ित विद्यार्थियों की विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अभिभावकों से बच्चों को विद्यालय भेजने से पहले पर्याप्त पानी पिलाने, अस्वस्थ बच्चों को विद्यालय न भेजने तथा घर पर भी हीट वेव से बचाव संबंधी व्यवहार अपनाने की अपील की गई है।

विद्यालयों को हीट वेव संबंधी घटनाओं का अभिलेखीकरण करने, नियमित समीक्षा करने, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अलर्ट पर सतत निगरानी रखने तथा समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
Edited By : Chetan Gour 

Advit Jewels IPO अलॉटमेंट कल, 29 जून को; शेयर मिले या नहीं ऐसे कर सकते हैं चेक

जयपुर की कंपनी अद्वित ज्वेल्स का 165.16 करोड़ रुपये का IPO 25 जून को बंद हो चुका है। इसे 212.63 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। अब 29 जून को अलॉटमेंट फाइनल होने की उम्मीद है। उसके बाद कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 1 जुलाई को हो सकती है। जिन लोगों ने इस IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार Bigshare Services Pvt Ltd और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

BSE पर कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Advit Jewels IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

Bigshare Services की साइट से

  • https://www.bigshareonline.com/ipo_allotment.html पर जाएं।
  • 3 सर्वर्स में से किसी एक को चुनें।
  • कंपनी में Advit Jewels सिलेक्ट करें।
  • एप्लीकेशन नंबर/PAN/बेनिफीशियरी ID में से किसी एक को सिलेक्ट कर डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘सर्च’ बटन पर क्लिक करें।

कंपनी हाथ से बनी पारंपरिक और आधुनिक ज्वेलरी बनाती और बेचती है। यह रामभजो (Rambhajo) ब्रांड नेम के तहत कुंदन, पोलकी, डायमंड और जड़ाऊ गहनों में माहिर है। कंपनी के प्रमोटर नितिन गिलारा, प्रतीक गिलारा, विपुल गिलारा और श्री कृष्ण वर्धन गिलारा हैं। प्री-IPO राउंड में अद्वित ज्वेल्स ने एंकर इनवेस्टर्स को 18.32 लाख शेयर जारी करके 22.9 करोड़ रुपये जुटाए। वहीं इश्यू की ओपनिंग से एक दिन पहले एंकर विंडो के जरिए 49.52 करोड़ रुपये जुटाए।

Silver Consumer Electricals: प्री-IPO राउंड में जुटाए ₹150 करोड़; कंपनी में हार्दिक पांड्या, अर्पित खंडेलवाल जैसे दिग्गजों का है निवेश

कैसी रह सकती है लिस्टिंग?

अद्वित ज्वेल्स की लिस्टिंग अच्छी रहने के संकेत हैं। ग्रे मार्केट में शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड 138 रुपये से 35.51% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। IPO में 1.20 करोड़ नए शेयर जारी हुए। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 174.98 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 536.38 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 95.30 गुना भरा।

IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

कंपनी अपने IPO से हुई कमाई का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, कर्ज चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी। अद्वित ज्वेल्स की अप्रैल-दिसंबर 2025 अवधि में कुल इनकम 123.80 करोड़ रुपये रही। शुद्ध मुनाफा 25.44 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 64.92 करोड़ रुपये की उधारी थी। EBITDA 36.68 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025 के दौरान कुल इनकम 124.94 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 25.37 करोड़ रुपये था। EBITDA 37.15 करोड़ रुपये था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आयरलैंड की महिला टीम ने भी किया कमाल, इंडीज को हराकर पाई विश्वकप की पहली जीत

IREvsWI आयरलैंड की पुरुष टीम की विश्व चैम्पियन भारत पर जीत के बाद अब आयरलैंड की महिला टीम ने ओर्ला प्रेंडरगैस्ट ने शानदार ऑल-राउंड प्रदर्शन की बदौलत शनिवार को वेस्टइंडीज को छह विकेट से हराकर महिला टी 20 वर्ल्ड कप में अपनी पहली जीत दर्ज की।

वेस्टइंडीज को 29 रन देकर 1 विकेट लेकर 7 विकेट पर 128 रन पर रोकने में मदद करने के बाद, प्रेंडरगैस्ट ने 44 गेंदों पर 63 रन की मैच जिताने वाली पारी खेली, जिससे आयरलैंड ने 11 गेंद बाकी रहते टारगेट हासिल कर लिया। इस नतीजे ने न्यूजीलैंड की सेमीफाइनल की उम्मीदों को भी जिंदा रखा और अगर वे अपने आखिरी ग्रुप गेम में इंग्लैंड को हरा देते हैं तो वे आगे बढ़ जाएंगे। इस बीच, वेस्टइंडीज के चांस सीधे इंग्लैंड की जीत से जुड़े हैं।

पहले बैटिंग करने के लिए कहने पर, वेस्टइंडीज धीमी, दो-तरफ़ा पिच पर कभी भी आसानी से रन नहीं बना पाया। उन्होंने शेमेन कैम्पबेल को जल्दी खो दिया, जिसके बाद हेली मैथ्यूज (22), स्टेफनी टेलर (16) और डिएंड्रा डॉटिन (21) सभी ने शुरुआत की लेकिन जल्दी रन बनाने के लिए संघर्ष किया। आयरलैंड के बॉलर्स ने अपनी पेस को होशियारी से मिलाया और डिसिप्लिन्ड लाइन से बैट्समैन पर दबाव बनाया, जबकि स्पिनर खास तौर पर असरदार थे।

चिनेल हेनरी के 21 गेंदों पर नाबाद 27 रन ने वेस्टइंडीज को आखिर में बढ़त दिलाई, लेकिन आखिरी आठ ओवर में चार विकेट गंवाने के बाद भी वे 7 विकेट पर 128 रन ही बना पाए।

पांचवें ओवर में कप्तान गैबी लुईस के आउट होने के बावजूद आयरलैंड ने लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छी शुरुआत की। प्रेंडरगैस्ट और एमी हंटर ने दूसरे विकेट के लिए 62 रन की तेज़ साझेदारी करके पारी को संभाला और ज़रूरी रन रेट को कंट्रोल में रखा। हंटर ने एफी फ्लेचर का शिकार होने से पहले 28 रन बनाए, लेकिन प्रेंडरगैस्ट ने बीच के ओवरों में अपनी रफ़्तार बदली, और शानदार अर्धशतक बनाने के लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ स्वीप और पुल किया।

वेस्ट इंडीज ने थोड़ी उम्मीद जगाई जब हेली मैथ्यूज ने प्रेंडरगैस्ट को 63 रन पर आउट किया, जब अभी भी 21 रन चाहिए थे, लेकिन रेबेका स्टोकेल शांत रहीं और नाबाद 16 रन बनाए और लुईस लिटिल ने विजयी बाउंड्री लगाई, जिससे आयरलैंड ने 18.1 ओवर में लक्ष्य का पीछा पूरा कर लिया।

Satendra Soni: AICWA ने एमपी सीएम से की अपील, सत्येंद्र सोनी के आरोपों के बाद डायरेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा

Satendra Soni: आमिर खान की फ़िल्म ‘लापता लेडीज़’ में अहम भूमिका निभाने वाले सत्येंद्र सोनी ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी भरी स्थिति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि फ़िल्म सेट पर अपनी बकाया पेमेंट मांगने पर उन्हें पीटने की धमकी दी गई। एक्टर रो पड़े और बताया कि मध्य प्रदेश में एक फ़िल्म की शूटिंग के बाद उन्हें पेमेंट नहीं दिया गया। ‘ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन’ (AICWA) ने अब एक्टर की स्थिति पर ध्यान दिया है और अपने ऑफ़िशियल X अकाउंट पर इस बारे में एक नोट लिखा है।

उन्होंने नोट की शुरुआत इस बात से की- “’लापता लेडीज़’ में नज़र आए एक्टर सतेंद्र सोनी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि उन्हें एक फ़िल्म की शूटिंग के लिए मध्य प्रदेश के मैहर बुलाया गया था। उनके अनुसार, 8 दिन काम करने के बावजूद उन्हें तय की गई फ़ीस नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि उन्हें सिर्फ़ ₹50,000 का एडवांस मिला और यह भी आरोप लगाया कि फ़िल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर ने उन्हें धमकी दी। सतेंद्र सोनी का शेयर किया गया इमोशनल वीडियो उस दर्द और परेशानी को दिखाता है जिससे वे गुज़रे हैं। उनके आरोप भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और वर्करों के साथ होने वाले बर्ताव को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। किसी भी कलाकार या वर्कर को ऐसे बर्ताव का सामना नहीं करना चाहिए।”

नोट में आगे कहा गया, “कई वर्कर और कलाकार आरोप लगाते हैं कि उन्हें काम देने का वादा करके फिल्म की शूटिंग के लिए बुलाया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें पेमेंट में देरी या पेमेंट न मिलने का सामना करना पड़ता है और जब वे अपना हक मांगते हैं तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है। ऐसी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। सतेंद्र सोनी ने अपना इमोशनल वीडियो सबके साथ शेयर करके इन चिंताओं को सबके सामने रखा है और उन मुश्किलों को उजागर किया है जिनका सामना कलाकारों और वर्करों को करना पड़ सकता है।”

तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए, फिल्म वर्कर संगठन ने कहा, “यह कोई मामूली बात नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार को इस मामले पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। हर वर्कर और कलाकार सम्मान, समय पर पेमेंट और डराने-धमकाने से सुरक्षा का हकदार है। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव से अपील करता है कि वे पुलिस को निर्देश दें कि अभिनेता सतेंद्र सोनी के आरोपों के आधार पर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और मध्य प्रदेश में फिल्म वर्करों और कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”

सतेंद्र ने अपने इंस्टाग्राम कैप्शन में पूरी बात बताई। उन्होंने हिंदी में लिखा, “नमस्ते, मेरा नाम सतेंद्र सोनी है। मैं एक एक्टर हूँ। मैं मध्य प्रदेश के मैहर में ‘पेड़ पालकी’ नाम की फ़िल्म की शूटिंग के लिए गया था। इसके डायरेक्टर और प्रोड्यूसर पुष्पेंद्र सिंह हैं, जिन्होंने ‘अजमेर 92’ भी बनाई थी। उन्होंने मुझे शूटिंग के लिए आने के लिए एडवांस में ₹50,000 भेजे और बाकी पेमेंट शूटिंग के दौरान करने का वादा किया।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे कुल 10 दिन शूटिंग करनी थी। 7-8 दिन बीतने के बाद भी उन्होंने मुझे कोई पेमेंट नहीं दिया। वहां मैंने यूनिट के लोगों को यह कहते हुए भी सुना कि किसी को भी पेमेंट नहीं मिला है। जब मैंने पेमेंट के बारे में पूछा, तो मुझे पैक-अप करने के लिए कह दिया गया। पुष्पेंद्र ने मुझे धमकाना शुरू कर दिया और कहा, ‘तुम 10 मिनट में होटल से चेक-आउट कर लो, तुम होटल में नहीं दिखने चाहिए, वरना हम तुम्हें मार डालेंगे।’ उनकी पत्नी प्रगति चौहान, जो फ़िल्म की हीरोइन थीं, उन्होंने भी मुझे डांटा और बुरी-बुरी गालियां दीं। मैं बहुत डर गया था, और जब मैं डर के मारे होटल से चेक-आउट करने लगा, तो श्रीधर दुबे और पंकज शर्मा भी मेरे साथ आए।”

सतेंद्र ने कई जाने-माने प्रोजेक्ट्स में छोटे लेकिन अहम रोल निभाए हैं, जिनमें ‘डॉक्टर जी’, ‘बवाल’, ‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’ और टेलीविज़न शो ‘हेलो बच्चों’ शामिल हैं।

जब दुनिया थमने लगी, तब भारत ने दिखाया दम! युद्ध के बीच जारी रही पेट्रोल-डीजल और LPG की सप्लाई, ईंधन संकट से बचने की अनकही कहानी

Fuel Crisis News: फरवरी 2026 में जब अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, तो पूरी दुनिया पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर हड़कंप मच गया। होर्मुज वह रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। भारत के लिए यह स्थिति किसी बड़ी आपदा से कम नहीं थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल और 60% एलपीजी (LPG) आयात करता है। ईंधन संकट की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि भारत का 50% तेल और 90% एलपीजी इसी रास्ते से आता था, जो अगले चार महीनों के लिए पूरी तरह ठप हो गया।

संकट के बीच भारत ने दिखाया दम

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बावजूद भारत ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए संभावित ईंधन संकट को टाल दिया। सरकार का दावा है कि करीब चार महीने तक आपूर्ति बाधित रहने के बावजूद देश में कहीं भी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राशनिंग लागू नहीं करनी पड़ी। इस दौरान ईंधन की उपलब्धता सामान्य बनी रही।

जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है भारत

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत और एलपीजी का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंच गई। जबकि ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया। एलपीजी के आयात में भी करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सरकार ने कई मोर्चों पर बनाई रणनीति

ईंधन संकट के शुरुआती दिनों में ही केंद्र सरकार ने नियंत्रण संबंधी आदेश जारी किए। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक देशों से तेल और गैस की खरीद तेज कर दी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया कि वे बढ़ी हुई लागत का अधिकांश बोझ खुद वहन करें ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिली। इस फैसले से केंद्र सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का त्याग करना पड़ा।

बीते एक दशक में मजबूत हुई ऊर्जा सुरक्षा

सरकार का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए निवेश का लाभ इस संकट के दौरान मिला। वर्ष 2014 में जहां देश में 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, अब उनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इसी अवधि में एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई।

इसके अलावा भारत अब 27 की बजाय 41 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों को भी सप्लाई चेन में शामिल किया गया है। रूस और अमेरिका से भी आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार ने वैकल्पिक समुद्री रूट्स का भी इस्तेमाल बढ़ाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई।

एथेनॉल मिश्रण से भी मिली राहत

सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से भी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। सरकार का कहना है कि इससे हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की बचत हो रही है।

तेल कंपनियों पर पड़ा भारी वित्तीय बोझ

सरकार के अनुसार, सार्वजनिक तेल कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की। बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। इसके बावजूद कंपनियां एक समय प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अंडर रिकवरी का सामना कर रही थीं। यह बाद में घटकर करीब 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गई। अनुमान है कि चालू तिमाही में तेल कंपनियों को 1 से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आसमान छूती कीमतें और सरकार पर बढ़ता दबाव

होर्मुज होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गईं। भारत जो तेल $70 प्रति बैरल में खरीद रहा था, उसकी कीमत महज चार हफ्तों में $120 के पार पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल के अपने उच्चतम स्तर पर जा पहुंच गया। दूसरी ओर, एलपीजी की कीमतों में 46% की भारी बढ़ोतरी हुई। इससे एक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की आयात लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई। जहाजों का युद्ध-जोखिम बीमा (War-risk insurance) भी कई गुना बढ़ चुका था।

संकट के चक्रव्यूह को भारत ने कैसे तोड़ा?

इस अभूतपूर्व संकट के बीच भारत सरकार, तेल कंपनियों और कूटनीतिज्ञों ने मिलकर एक बहुआयामी रणनीति तैयार की, ताकि आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े:-

1. 10 साल की तैयारी आई काम (इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेड)

भारत पिछले 10 वसालों से अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर लगातार निवेश कर रहा था। साल 2014 में जहाँ देश में केवल 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई। इस वजह से एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन (2014) से बढ़कर 2026 में 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई। इसने संकट के समय एक बड़े सुरक्षा कवच का काम किया.

2. नए देशों से दोस्ती और नए रास्ते की खोज

भारत ने केवल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय आक्रामक आपूर्ति की नीति अपनाई। साल 2014 में भारत जहां 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 41 देश हो गई। भारत ने लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों से तेल मंगाना शुरू किया। साथ ही अमेरिका और रूस से तेल के आयात को और गहरा किया। नए समुद्री रास्तों की खोज की गई, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई।

3. घरेलू मोर्चे पर राहत और सरकारी खजाने पर बोझ

सरकार ने तुरंत डिमांड मैनेजमेंट (Demand-management) लागू किया और घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाया। इसके अलावा, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के ऊंचे स्तर ने एक बड़ा सहारा दिया। इससे हर साल भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात की बचत होती है।

सबसे बड़ा फैसला यह था कि सरकार ने कीमतों का बोझ सीधे आम जनता पर नहीं डाला। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। बाद में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केवल 7 रुपये प्रति लीटर की मामूली बढ़ोतरी की। इस वजह से तेल कंपनियों को प्रति दिन करीब 650 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। इस तिमाही में उन्हें कुल 1 लाख करोड़ से 1.2 लाख करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है।

अर्थव्यवस्था पर सीमित रहा असर

सरकार का दावा है कि पूरे संकट के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर बना रहा। चालू खाते का घाटा नियंत्रण में रहा। साथ ही खुदरा महंगाई भी भारतीय रिजर्व बैंक की तय सीमा के भीतर रही। जीडीपी वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत के आसपास बनी रही।

दूसरे देशों से अलग रही भारत की रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, जहां कई देशों को पेट्रोल-डीजल की राशनिंग लागू करनी पड़ी। वहीं भारत ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश और इथियोपिया जैसे देशों ने ईंधन संकट से निपटने के लिए अलग-अलग प्रतिबंध लगाए। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग किया। साथ ही उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी।

भारत में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए न तो ईंधन की राशनिंग लागू की गई और न ही स्कूल बंद करने या वर्किंग डे घटाने जैसे कदम उठाए गए। केवल कमर्शियल एवं थोक एलपीजी तथा डीजल और एविएशन फ्यूल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।

अब सामान्य हो रही स्थिति

सरकार के अनुसार, होर्मुज फिर से खुलने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का लगभग दो महीने का भंडार उपलब्ध है। साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (ISPRL) की क्षमता बढ़ाने का काम भी जारी है। इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। हालांकि, खबर है कि अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है।

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IMD Heavy Rain Alert: यूपी, असम-मेघालय समेत 22 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश, आंधी का अलर्ट, 4 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

India Weekly Weather Forecast: देश में मानसून की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश, असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल समेत देश के 22 से अधिक राज्यों में भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। आईएमडी के ताजा बुलेटिन के मुताबित देश के विभिन्न हिस्सों में 4 जुलाई तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा और मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा। 28 जून को मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मांडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के बचे हुए हिस्सों, यूपी और उत्तराखंड के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने की उम्मीद है। इसके बाद के 2-3 दिनों में मानसून हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में भी दस्तक दे देगा।

पूर्वोत्तर भारत और बंगाल में बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट

टमौसम विभाग ने पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है, जहां अगले 5 दिनों के दौरान 7 से 20 सेमी तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 28 और 29 जून को कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश होने का रेड अलर्ट है। इसके बाद 30 जून को बहुत भारी बारिश और 1 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है।

असम और मेघालय में 28 जून को कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। वहीं 29 और 30 जून को बहुत भारी बारिश और 1 से 3 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 28 जून को कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश हो सकती है। 29 जून को बहुत भारी बारिश और 30 जून से 2 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है।

उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-NCR में 3-4 जुलाई को व्यापक बारिश, जम्मू-कश्मीर में ओलावृष्टि

हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 28-29 जून और 1-2 जुलाई तक छिटपुट बारिश होगी, लेकिन 3 और 4 जुलाई को इन क्षेत्रों में व्यापक रूप से बारिश होने का अनुमान है। पंजाब और हरियाणा में 2-3 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 से 3 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी, जबकि 30 जून और 1 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 जुलाई को व्यापक बारिश देखी जा सकती है। पूरे यूपी में 28 जून से 4 जुलाई के दौरान 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की आशंका है।

उत्तराखंड में 29 जून से 4 जुलाई तक और हिमाचल में 2 से 4 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। हिमाचल में 1-4 जुलाई और उत्तराखंड में 30 जून से 4 जुलाई तक भारी बारिश का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 30 जून से 4 जुलाई तक व्यापक बारिश और 2-3 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। विशेष रूप से 30 जून को ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी गई है। पूर्वी राजस्थान में 2 से 4 जुलाई के बीच भारी बारिश और आंधी का अलर्ट है।

पूर्वी और मध्य भारत: बिहार-ओड़िशा में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

बिहार में 28-29 जून को भारी बारिश का अनुमान है, जबकि 30 जून और 1 जुलाई को राज्य के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद 2 जुलाई को भी भारी बारिश की संभावना है। ओड़िशा में 28-29 जून और 2-4 जुलाई को भारी बारिश होगी जबकि 30 जून और 1 जुलाई को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है। झारखंड में 30 जून और 1 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 1 जुलाई और फिर 3-4 जुलाई को भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। मध्य प्छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 28 जून से 4 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश और भारी बारिश का अनुमान है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 2-3 जुलाई और पूर्वी मध्य प्रदेश में 1-3 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।

पश्चिम और दक्षिण भारत: गोवा और केरल में मूसलाधार बारिश का कहर

कोंकण और गोवा में 28 जून से 4 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी, जिसमें 28 जून और फिर 1 से 4 जुलाई के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। मध्य महाराष्ट्र में 2 से 4 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। गुजरात क्षेत्र में 2 से 4 जुलाई के दौरान भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। केरल में 28 जून से 1 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश की गंभीर चेतावनी दी गई है, जबकि 2 से 4 जुलाई तक भारी बारिश जारी रहेगी। तटीय कर्नाटक में 28 जून से 4 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी, जिसमें 1 और 2 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 30 जून और 1 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है। तेलंगाना में 28 जून से 4 जुलाई तक और तटीय आंध्र प्रदेश में 28-29 जून तथा 1-4 जुलाई के दौरान भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

उत्तर प्रदेश में भीषण लू की चेतावनी

भारी बारिश के इस दौर के बीच, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 2 दिनों तक उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा। 28 जून को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू चलने की आशंका है। इससे तापमान में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसके अलावा अगले 2-3 दिनों तक मध्य और पूर्वी भारत में आकाशीय बिजली चमकने की घटनाएं भी काफी तीव्र रह सकती हैं।

Viral Post: 35 लाख की नौकरी छोड़ की UPSC की तैयारी, फिर… सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कहानी

ज्यादातर लोग आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी का सपना देखते हैं। लेकिन आईआईटी दिल्ली के एक पूर्व छात्र ने अलग रास्ता चुना। खबरों के मुताबिक, उन्हें एक जापानी कंपनी से 35 लाख रुपये सालाना के पैकेज का ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। उनका सपना आईपीएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना था। इसलिए उन्होंने मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया। उनकी ये मेहनत रंग लाई और पहली ही कोशिश में वो आईपीएस अधिकारी बन गए। अब उनकी ये स्टोरी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

आईईटी से की पढ़ाई

आईपीएस अधिकारी अर्चित चांडक की प्रेरणादायक कहानी हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विकास अल्विस नाम के एक यूजर ने शेयर की है। पोस्ट में अर्चित ने आरामदायक करियर का ऑप्शन छोड़कर सिविल सेवा की राह चुनी। वायरल पोस्ट के मुताबिक, “अर्चित चांडक नागपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने कम उम्र से ही पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन किया। 2012 में वह जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) में शहर के टॉपर बने, जिसके बाद उन्हें IIT दिल्ली में दाखिला मिला। वहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की पढ़ाई पूरी की।”

पहली ही कोशिश में मिली सफलता

साल 2016 में आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद अर्चित चांडक को एक जापानी कंपनी से करीब 35 लाख रुपये सालाना के पैकेज वाली नौकरी का ऑफर मिला था। लेकिन उन्होंने इस आकर्षक नौकरी को स्वीकार करने के बजाय यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। अर्चित चांडक की मेहनत आखिरकार सफल रही। यूपीएससी की तैयारी शुरू करने के करीब दो साल बाद उन्होंने साल 2018 में पहली ही कोशिश में सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। इस परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 184 हासिल की, जिसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए हुआ। उनकी यह सफलता कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई।

छोड़ी 35 लाख की नौकरी

उन्होंने आगे दावा किया कि चांडक ने अपने करियर की शुरुआत नागपुर में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) के रूप में की थी और फिलहाल वह महाराष्ट्र के अकोला में सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) के पद पर तैनात हैं। पोस्ट शेयर करने वाले यूजर ने लिखा, “मैं कहना चाहता हूं कि जिंदगी हमेशा हमारे कंट्रोल में होनी चाहिए। देखिए उन्हें कितना कॉन्फिडेंस था कि वह ₹35 LPA की नौकरी का ऑफर ठुकरा सकते थे और पूरी तरह से नए सिरे से कुछ करने की तैयारी कर सकते थे। खुद पर भरोसा कमाल कर सकता है।” ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही।

सोशल मीडिया यूजर्स ने किया कमेंट

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने फाइनेंशियल सिक्योरिटी चुनने के बजाय अपने सपने को पूरा करने के चांडक के कमिटमेंट की तारीफ की। एक यूजर ने कमेंट किया, “सफलता अक्सर आपके करियर को आपके मकसद के साथ जोड़ने से मिलती है, न कि सिर्फ सबसे ज्यादा सैलरी के पीछे भागने से।” एक तीसरे यूजर ने कहा, “यह सिर्फ खुद पर भरोसा नहीं था। यह उस मकसद के लिए सोच-समझकर रिस्क लेने की इच्छा भी थी जिस पर उसे सच में भरोसा था।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “तो फिर IIT JEE और बीच का क्या मकसद है जब मकसद पब्लिक सर्विस ही हो।” एक अन्य यूजर ने कहा, “कमाई ज्यादा है IAS IPS बनकर..35L तो महीना कमा लेगा।”

कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

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गर्मियों में पसीने से गंदा हुआ तकिया बन सकता है खतरा, ऐसे करें सफाई

गर्मियों के मौसम में रात को पसीना आना बहुत आम बात है, लेकिन यही पसीना धीरे-धीरे हमारे तकिये के अंदर जमा होने लगता है और हमें पता भी नहीं चलता। समय के साथ यह नमी बैक्टीरिया और गंदगी का कारण बनती है, जिससे तकिये से बदबू आने लगती है और उस पर पीले दाग-धब्बे भी दिखाई देने लगते हैं। ऐसा तकिया इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और सुबह उठने पर असहज महसूस होता है।

इतना ही नहीं, गंदे तकिये पर सोने से स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे एलर्जी, रैशेज और पिंपल्स का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए तकिये की साफ-सफाई पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, ताकि नींद भी अच्छी मिले और सेहत भी सुरक्षित रहे।

लोग क्यों डरते हैं तकिया धोने से?

अधिकतर लोग तकिये को धोने से इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वॉशिंग मशीन में डालने से उसका शेप और रुई खराब हो जाएगी। लेकिन सही तरीके अपनाकर आप आसानी से तकिये को नया जैसा साफ और फ्लफी बना सकते हैं।

धोने से पहले सबसे जरूरी चेक

सबसे पहले तकिये का केयर लेबल जरूर देखें। ज्यादातर कॉटन, सिंथेटिक और डाउन पिलो मशीन में धुल जाते हैं। लेकिन मेमोरी फोम वाले तकिये को कभी भी मशीन में नहीं डालना चाहिए, वरना वह खराब हो सकता है।

एक साथ दो तकिये क्यों जरूरी हैं?

वॉशिंग मशीन में सिर्फ एक तकिया डालने से उसका बैलेंस बिगड़ सकता है। इसलिए हमेशा दो तकिये साथ में धोएं। इससे मशीन भी सही चलेगी और दोनों तकिये अच्छे से साफ हो जाएंगे।

बदबू और दाग हटाने का घरेलू जादू

सिर्फ डिटर्जेंट काफी नहीं होता। इसके लिए डिटर्जेंट के साथ आधा कप बेकिंग सोडा और आधा कप सफेद सिरका मिलाएं। बेकिंग सोडा बदबू को खत्म करता है, जबकि सिरका पीले दागों को हटाने में मदद करता है।

सही वॉशिंग सेटिंग है गेम चेंजर

तकिये को हमेशा ‘जेंटल’ या ‘डेलिकेट’ मोड पर गुनगुने पानी के साथ धोएं। इससे बैक्टीरिया और धूल के कण भी साफ हो जाते हैं और तकिये का आकार भी सुरक्षित रहता है।

एक्स्ट्रा रिंस से मिलेगा परफेक्ट क्लीन रिजल्ट

धोने के बाद एक अतिरिक्त रिंस साइकल जरूर चलाएं। इससे तकिये के अंदर बचा हुआ साबुन और झाग पूरी तरह निकल जाता है और तकिया ज्यादा फ्रेश महसूस होता है।

तकिये को फिर से फ्लफी बनाने का सीक्रेट

अगर ड्रायर है तो उसके साथ 2–3 टेनिस बॉल्स डाल दें। ये तकिये के अंदर रुई को एक जगह चिपकने नहीं देते और तकिया फिर से फूला हुआ हो जाता है।

धूप है सबसे नेचुरल क्लीनर

ड्रायर न हो तो तकिये को धूप में अच्छे से सुखाएं। हल्के हाथों से थपथपाने के बाद उसे फ्लैट रखकर सूखने दें। धूप से नमी और बदबू दोनों खत्म हो जाती हैं और तकिया बिल्कुल नया जैसा हो जाता है।

छोटा सा हाइजीन रिमाइंडर

बेहतर हाइजीन के लिए तकिये को साल में 2–3 बार जरूर धोएं और हर हफ्ते तकिये का कवर बदलना न भूलें। इससे आपकी नींद भी बेहतर होगी और हेल्थ भी सुरक्षित रहेगी।