दिव्यांगजनों को डिजिटल सशक्त बना रही योगी सरकार, स्मार्टफोन-टैबलेट से बढ़ी पहुंच

दिव्यांगजनों को डिजिटल सशक्त बना रही योगी सरकार, स्मार्टफोन-टैबलेट से बढ़ी पहुंच

Yogi government is Divyangjan empowering persons with Divyangjan

– कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना बनी दिव्यांगजनों का मजबूत संबल

– ब्रेल किट और स्मार्ट केन से आसान हुआ दिव्यांगजनों का दैनिक जीवन

– जरूरत के मुताबिक ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और अन्य उपकरण उपलब्ध

– 40 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता वाले पात्र लाभार्थियों को मिल रहा लाभ

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और सुविधाजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के माध्यम से पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

 

स्मार्टफोन और टैबलेट से बढ़ी डिजिटल पहुंच

डिजिटल युग में शिक्षा, संचार, सूचना और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने के उद्देश्य से योजना के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को स्मार्टफोन एवं टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे विशेष रूप से दिव्यांग छात्र-छात्राओं और युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल संचार, अध्ययन सामग्री तथा विभिन्न ऑनलाइन सरकारी सेवाओं एवं सूचनाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।

 

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। डिजिटल उपकरणों को योजना से जोड़ने से दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को तकनीक का नया आयाम मिला है।

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जरूरत के अनुसार मिल रहे अनेक सहायक उपकरण

कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उनकी शारीरिक आवश्यकता एवं चिकित्सकीय संस्तुति के आधार पर विभिन्न प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, एमआर किट, ब्रेल किट, एडीएल किट, वॉकर, रोटेटर और स्मार्ट केन सहित अनेक सहायक उपकरण शामिल हैं।

 

दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ब्रेल किट एवं स्मार्ट केन जैसे उपकरण दैनिक जीवन को अधिक सुगम बनाने में सहायक हैं, जबकि गतिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर एवं अन्य मोबिलिटी उपकरण आवागमन और स्वतंत्र गतिशीलता को बढ़ावा देते हैं। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंग भी उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को 15 हजार रुपये तक की लागत वाले निर्धारित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

 

योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित है पात्रता

कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना का संचालन विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है। योजना का लाभ सामान्यतः 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता प्रमाणित होने पर निर्धारित पात्रता के अनुसार दिया जाता है। संबंधित उपकरण की आवश्यकता के संबंध में चिकित्साधिकारी की संस्तुति भी आवश्यक होती है।

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पात्रता के लिए आवेदक को निर्धारित आय सीमा एवं अन्य शर्तों को पूरा करना होता है। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक पारिवारिक आय सीमा 46,080 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 56,460 रुपये निर्धारित है। आवेदक को पिछले तीन वर्षों में उसी उद्देश्य के लिए समान उपकरण का लाभ नहीं मिला होना चाहिए।

नियमित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए निर्धारित अवधि एक वर्ष है। आवेदन के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, फोटो तथा संबंधित उपकरण के लिए चिकित्सकीय संस्तुति सहित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होते हैं।

 

ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता और सुगमता

योजना को ऑनलाइन किए जाने से पात्र दिव्यांगजनों के लिए आवेदन एवं योजना तक पहुंच अधिक सुगम हुई है। विभाग का प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों का चिन्हांकन, सत्यापन एवं उपकरण वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम तरीके से पूरी की जाए।

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दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्राथमिकता

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, रोजगार, डिजिटल सेवाओं और समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ मोबिलिटी एवं अन्य सहायक उपकरण दिव्यांगजनों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके जीवन को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Diamond State Summit: ‘हमारे युवा प्रतिभाशाली हैं…’ , CM योगी ने की Gen-Z युवाओं की जमकर तारीफ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यूज18 इंडिया के खास कार्यक्रम डायमंड स्टेट समिट में देश युवाओं की काफी तारीफ की। डायमंड स्टेट्स समिट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि, युवा देश का भविष्य हैं। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की मदद के लिए उनकी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

बता दें कि, सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में दिल्ली में नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक विवाद को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में Gen-Z युवाओं का बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। न्यूज18 इंडिया के ‘डायमंड स्टेट्स समिट’ कार्यक्रम में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने बताया कि यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके लोग इस योजना के तहत कम से कम एक घंटे का समय उन छात्रों को देते हैं, जो यूपीएससी, नीट, आईआईटी और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

युवाओं पर सीएम योगी आदित्यनाथ का फोकस

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी सबसे युवा आबादी का नेतृत्व करता है। हमारा युवा प्रतिभाशाली है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए हैं, जहां मॉडर्न टेक्नोलॉजी सिखाई जा रही है। AI, स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर तमाम आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत यूपी के सरकारी इंटर कॉलेजों का कायाकल्प किया गया। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिला। UPSC, UPPSC, NEET और IIT-JEE की तैयारी के लिए वर्चुअल और फिजिकल कोचिंग की व्यवस्था की गई। जिलों में तैनात UPSC पास अधिकारी युवाओं को मार्गदर्शन दे रहे।

सीएम योगी ने कहा कि देश के युवा प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की बड़ी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में काफी लंबी दूरी तय की है और क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह सिर्फ आंकड़ों के आधार पर बदलाव की बात नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जब आम लोग खुद अपनी आंखों से बदलाव देख रहे हैं, तो यह साफ है कि वास्तव में काफी बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में काशी और प्रयागराज को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में विश्वविद्यालय नहीं था। लेकिन पिछले 9 वर्षों में गोरखपुर, आजमगढ़, बलरामपुर और मिर्जापुर में नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में भदोही में भी काशी नरेश विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के बनने से प्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

जिनकी जेब से राममंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं निकला, वे लोग कर रहे चंदा चोरी की बात : CM योगी

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

Yogi Adityanath statement on Ram Temple funds: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने गरीब, युवा, महिला व किसान के मुद्दे पर विपक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ये सभी डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है।

एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन, तय होगा न्यूनतम मानदेय 

सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है। 

किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने  

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया। उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।

खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश 

सीएम ने किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, 21 चीनी मिलें औने-पौने दाम पर बेच दी गईं, लेकिन हमारी सरकार में 3.23 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है। 122 में से 105 से अधिक चीनी मिलें चौथे-पांचवें दिन ही किसानों के खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था। ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

नकारात्मकता की राजनीति त्यागें विपक्ष के साथी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। सीएम ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है। 

संवाद से ही सरकार कर सकी बेहतर काम

सीएम ने कहा कि 9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।

विधायिका से संभव होता है गरीबों के जीवन में परिवर्तन

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है। 

सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।

आधी आबादी के जीवन में व्यापक परिवर्तन

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधी आबादी के जीवन में भी व्यापक परिवर्तन आया है। 2017 में जो महिला श्रमबल 12 फीसदी था, वह अब बढ़कर 37-38 फीसदी से अधिक हो गया है। डबल इंजन सरकार सभी बड़े महानगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और उसमें 20 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ प्रदेश सरकार ने कीर्तिमान स्थापित किया है।

 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे युवाओं का अभिनंदन 

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सुरक्षा व अन्य कारणों से निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। लाखों युवाओं को अपने जनपद, क्षेत्र में नौकरी व रोजगार की गारंटी मिली है। परंपरागत उद्यम को प्रोत्साहित करते हुए एक जनपद-एक उत्पाद और पीएम विश्वकर्मा आदि योजनाओं से व्यापक बदलाव हुए हैं। करोड़ों नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे युवाओं का अभिनंदन किया।  

विधानसभा व परिषद के सदस्य सावन के आयोजनों में लेंगे भाग 

मुख्यमंत्री ने सावन में शिवभक्तों की आस्था को भी नमन किया और कहा कि  देश-प्रदेश में शिवभक्त हर-हर, बम-बम के उत्साहपूर्ण माहौल में शिवभक्ति को निवेदित कर रहे हैं। अभी से करोड़ों शिवभक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार के पावन धाम में हर की पैड़ी से गंगाजल लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। शासन, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी, सामाजिक, व्यापारिक व धार्मिक संगठनों ने उनके स्वागत, सुरक्षा, सुविधा के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विधानसभा व परिषद के सदस्य भी 7 अगस्त से इन आयोजनों में भाग लेंगे। 

सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा करें जनप्रतिनिधि 

सीएम ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा बनाए रखने के लिए कार्य करें। सरकारी कर्मचारियों, आउटसोर्स व संविदा कार्मिकों ने 9 वर्षों में मेहनत की पराकाष्ठा दिखाई है, ऐसे में सरकार उनके वेलफेयर के लिए भी कार्य कर रही है। अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा दी गई। साथ ही सरकार ने अनुदेशकों, शिक्षामित्रों के मानदेय को भी बढ़ाया है। 

 

पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश

-प्रोफेसर डॉ. कमलेश 'कौन्तेय' 

Yogi Adityanath Kanwar Yatra vision: सनातन धर्म में आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि शिव कहीं बाहर नहीं, वे हर उस जीव में विद्यमान हैं जो प्रेम, त्याग और तप से जीवन को साधता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं मानती। जो शिव का ध्यान करता है, वह स्वयं शिवमय हो जाता है। सावन में जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, तो वे केवल जल चढ़ाने नहीं जाते, वे स्वयं उस तप की जीवंत छवि बन जाते हैं जिसे शिव ने कैलाश की एकांत साधना में साकार किया था। उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि में यही भाव सबसे गहरा है, कांवड़िया केवल एक श्रद्धालु नहीं, चलता-फिरता शिव का प्रतिरूप है और अब जबकि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, उत्तर प्रदेश इन तपस्वियों के स्वागत और उन पर पुष्प वर्षा को तैयार है। 

 

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने समय रहते ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी देखरेख कर रहे हैं। यह आस्था के प्रति ऐसी सम्वेदना है जिसमें शासन श्रद्धालु के साथ खड़ा दिखाई देता है। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। सरकार जब सड़क को शिव-पथ मानकर संवारती है, तो वह प्रशासन और आस्था के बीच की दीवार गिरा देती है। इसी भाव से सुरक्षा की चिंता भी उपजी है। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है। 

 

इसी सोच ने चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित किया है। एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े l मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने का निर्णय, दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने की अनिवार्यता, यह सब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, यह पवित्रता के सम्मान का प्रश्न है। शुद्ध आचरण और संयम ही तप की पहली शर्त है और योगी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं तो कहा जा सकता है कि वह भक्तों के संकल्प में भागीदार बन चुकी है।

 

इसी सहभागिता ने डीजे की ध्वनि को निर्धारित मानकों में बांधा है। भक्ति में उल्लास स्वाभाविक है, पर यह कोलाहल नहीं बनने पाए, इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुगमता को केंद्र में रखते हुए ही यातायात प्रबंधन के तहत वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन प्वाइंट, आरक्षित पार्किंग और आपातकालीन कॉरिडोर बनाए गए हैं। इसी तरह अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर दृष्टि रखने वाली विशेष टीमें, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरता की चेतावनी, यह दिखाती हैं कि सरकार आस्था की इस विराट धारा को किसी भी विघ्न से बचाने के लिए सतर्क है। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रशासन से समन्वय और कांवड़ संघों से नियमित संवाद यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सुरक्षा-चक्र किसी एक राज्य की सीमा में सिमटा न रहे।

Kanwar Yatra UP 2026

नौ वर्षों के अनुभव ने योगी सरकार को यह सिखाया है कि आस्था की सेवा निरंतर परिष्कृत होने वाली प्रक्रिया है। हर वर्ष व्यवस्था में नई तकनीक, नए संसाधन और नए अनुभव जुड़ते हैं, ड्रोन निगरानी हो या डिजिटल हेल्पलाइन, ये सब पारंपरिक आस्था को आधुनिक प्रशासनिक कुशलता से जोड़ने के प्रयास हैं। पर इन सबके मूल में वही भाव है जिससे यह लेख शुरू हुआ था, कांवड़िया शिव का प्रतिरूप है, और उसकी सेवा शिव की ही आराधना है। 

 

शिव को औघड़दानी कहा जाता है। वे भक्त की भावना देखते हैं, उसकी हैसियत या साधन-संपन्नता नहीं। राजा हो या रंक, भस्म रमाए वनवासी हो या नगर का साधारण मजदूर, कांवड़ मार्ग पर शिव के लिए सब समान हैं। यही समानता की भावना उस प्रशासनिक निर्देश में झलकती है जिसमें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश के हर जिले में व्यवस्था का स्तर एक जैसा होना चाहिए, चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नगर हो या पूर्वांचल का दूरस्थ कस्बा। जब शासन खुद को इस समभाव में ढालता है, तो वह शिव-तत्व की उसी मूल भावना को आत्मसात करता है जिसमें भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं।

 

कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जिस तरह पूर्व अनुभवों से सीख ली गई है, वह किसी योगी की साधना-प्रक्रिया जैसी ही लगती है। प्रशासन ने बीते नौ वर्षों में यात्रा को शनैः-शनैः क्रमबद्ध ढंग से सुगम बनाया है। निरंतर सुधार की प्रक्रिया ही किसी भी बड़े जनआयोजन को सफल बनाती है, और यही प्रक्रिया कांवड़ यात्रा को साल-दर-साल अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती जा रही है। इस पूरी तैयारी का सबसे अधिक भावनात्मक पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वतः आत्मसात कर लिया है। जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं अधिकारियों को यह निर्देश देता है कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो वह यह संदेश देता है कि राज्य की संवेदना आस्था के साथ खड़ी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की तैयारियां अब सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का रूप ले चुकी हैं। 

 

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से ही उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा अब राज्य और समाज के साझा संकल्प का प्रतीक है। जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए उत्तर प्रदेश की सड़कों पर उतरेंगे, तो उनके पीछे एक ऐसा तंत्र सक्रिय रहेगा जो हर कदम पर उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का ध्यान रखेगा, क्योंकि सरकार जानती है कि वह किसी सामान्य यात्री की नहीं, शिव के उस अंश की सेवा कर रही है जो हर कांवड़िए के भीतर बसता है। यही भाव इस यात्रा को निर्विघ्न बनाने की सबसे बड़ी गारंटी है, और यही भाव उत्तर प्रदेश को हर वर्ष इस दायित्व के लिए और अधिक तैयार करता जा रहा है और इसी भाव की वजह से उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में लोगों को इंतजार है सावन के पहले दिन का। श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा-आस्था से सराबोर है। जोश अभी से ही हिलोंरे लेने लगा है कि कब वह वक्त आए कि वे कंधे पर कांवड़ लेकर बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री की ओर बढ़ चलें। (लेखक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं) 

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Yogi Adityanath Kanwar Yatra vision: सनातन धर्म में आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि शिव कहीं बाहर नहीं, वे हर उस जीव में विद्यमान हैं जो प्रेम, त्याग और तप से जीवन को साधता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं मानती। जो शिव का ध्यान करता है, वह स्वयं शिवमय हो जाता है। सावन में जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, तो वे केवल जल चढ़ाने नहीं जाते, वे स्वयं उस तप की जीवंत छवि बन जाते हैं जिसे शिव ने कैलाश की एकांत साधना में साकार किया था। उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि में यही भाव सबसे गहरा है, कांवड़िया केवल एक श्रद्धालु नहीं, चलता-फिरता शिव का प्रतिरूप है और अब जबकि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, उत्तर प्रदेश इन तपस्वियों के स्वागत और उन पर पुष्प वर्षा को तैयार है। 

 

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने समय रहते ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी देखरेख कर रहे हैं। यह आस्था के प्रति ऐसी सम्वेदना है जिसमें शासन श्रद्धालु के साथ खड़ा दिखाई देता है। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। सरकार जब सड़क को शिव-पथ मानकर संवारती है, तो वह प्रशासन और आस्था के बीच की दीवार गिरा देती है। इसी भाव से सुरक्षा की चिंता भी उपजी है। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है। 

 

इसी सोच ने चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित किया है। एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े l मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने का निर्णय, दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने की अनिवार्यता, यह सब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, यह पवित्रता के सम्मान का प्रश्न है। शुद्ध आचरण और संयम ही तप की पहली शर्त है और योगी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं तो कहा जा सकता है कि वह भक्तों के संकल्प में भागीदार बन चुकी है।

Kanwar Yatra UP 2026

इसी सहभागिता ने डीजे की ध्वनि को निर्धारित मानकों में बांधा है। भक्ति में उल्लास स्वाभाविक है, पर यह कोलाहल नहीं बनने पाए, इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुगमता को केंद्र में रखते हुए ही यातायात प्रबंधन के तहत वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन प्वाइंट, आरक्षित पार्किंग और आपातकालीन कॉरिडोर बनाए गए हैं। इसी तरह अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर दृष्टि रखने वाली विशेष टीमें, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरता की चेतावनी, यह दिखाती हैं कि सरकार आस्था की इस विराट धारा को किसी भी विघ्न से बचाने के लिए सतर्क है। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रशासन से समन्वय और कांवड़ संघों से नियमित संवाद यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सुरक्षा-चक्र किसी एक राज्य की सीमा में सिमटा न रहे।

 

नौ वर्षों के अनुभव ने योगी सरकार को यह सिखाया है कि आस्था की सेवा निरंतर परिष्कृत होने वाली प्रक्रिया है। हर वर्ष व्यवस्था में नई तकनीक, नए संसाधन और नए अनुभव जुड़ते हैं, ड्रोन निगरानी हो या डिजिटल हेल्पलाइन, ये सब पारंपरिक आस्था को आधुनिक प्रशासनिक कुशलता से जोड़ने के प्रयास हैं। पर इन सबके मूल में वही भाव है जिससे यह लेख शुरू हुआ था, कांवड़िया शिव का प्रतिरूप है, और उसकी सेवा शिव की ही आराधना है। 

 

शिव को औघड़दानी कहा जाता है। वे भक्त की भावना देखते हैं, उसकी हैसियत या साधन-संपन्नता नहीं। राजा हो या रंक, भस्म रमाए वनवासी हो या नगर का साधारण मजदूर, कांवड़ मार्ग पर शिव के लिए सब समान हैं। यही समानता की भावना उस प्रशासनिक निर्देश में झलकती है जिसमें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश के हर जिले में व्यवस्था का स्तर एक जैसा होना चाहिए, चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नगर हो या पूर्वांचल का दूरस्थ कस्बा। जब शासन खुद को इस समभाव में ढालता है, तो वह शिव-तत्व की उसी मूल भावना को आत्मसात करता है जिसमें भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं।

 

कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जिस तरह पूर्व अनुभवों से सीख ली गई है, वह किसी योगी की साधना-प्रक्रिया जैसी ही लगती है। प्रशासन ने बीते नौ वर्षों में यात्रा को शनैः-शनैः क्रमबद्ध ढंग से सुगम बनाया है। निरंतर सुधार की प्रक्रिया ही किसी भी बड़े जनआयोजन को सफल बनाती है, और यही प्रक्रिया कांवड़ यात्रा को साल-दर-साल अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती जा रही है। इस पूरी तैयारी का सबसे अधिक भावनात्मक पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वतः आत्मसात कर लिया है। जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं अधिकारियों को यह निर्देश देता है कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो वह यह संदेश देता है कि राज्य की संवेदना आस्था के साथ खड़ी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की तैयारियां अब सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का रूप ले चुकी हैं। 

 

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से ही उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा अब राज्य और समाज के साझा संकल्प का प्रतीक है। जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए उत्तर प्रदेश की सड़कों पर उतरेंगे, तो उनके पीछे एक ऐसा तंत्र सक्रिय रहेगा जो हर कदम पर उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का ध्यान रखेगा, क्योंकि सरकार जानती है कि वह किसी सामान्य यात्री की नहीं, शिव के उस अंश की सेवा कर रही है जो हर कांवड़िए के भीतर बसता है।

यही भाव इस यात्रा को निर्विघ्न बनाने की सबसे बड़ी गारंटी है, और यही भाव उत्तर प्रदेश को हर वर्ष इस दायित्व के लिए और अधिक तैयार करता जा रहा है और इसी भाव की वजह से उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में लोगों को इंतजार है सावन के पहले दिन का। श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा-आस्था से सराबोर है। जोश अभी से ही हिलोंरे लेने लगा है कि कब वह वक्त आए कि वे कंधे पर कांवड़ लेकर बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री की ओर बढ़ चलें। (लेखक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं) 

 

 

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना : अनाथ और असहाय बच्चों के भविष्य की मजबूत आधारशिला, योगी सरकार में एक लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच रहा योजना का लाभ

Under Yogi government benefits of Bal Seva Yojana are reaching over one lakh children

– योगी सरकार का उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो

– सरकार जरूरतमंद बच्चों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए गंभीरता के साथ कार्य कर रही

– पढ़ाई जारी रखने पर 23 वर्ष की आयु तक मिलती है आर्थिक सहायता

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) माता-पिता को खो चुके और असहाय परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के लिए बड़ा सहारा है। संवेदनशील शासन और सामाजिक सुरक्षा की सोच के साथ शुरू की गई यह योजना ऐसे बच्चों को आर्थिक मदद देने के साथ उनकी शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने का काम कर रही है। योगी सरकार का उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। यही कारण है कि योजना के माध्यम से बचपन से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है।

 

12वीं के बाद भी नहीं रुकती मदद

इस योजना को केवल बचपन तक सीमित नहीं रखा गया है। ऐसे छात्र-छात्राएं, जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है और कक्षा 12 के बाद स्नातक या डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2500 रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता 23 वर्ष की आयु पूरी होने अथवा पाठ्यक्रम समाप्त होने तक, जो पहले हो, जारी रहती है। 

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1 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंचा योजना का लाभ

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 1,09,539 बच्चे इस योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सरकार जरूरतमंद बच्चों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

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नियमित आर्थिक सहायता मिलने से बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा, पोषण और दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। साथ ही उनके संरक्षक परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।

भदोही का नाम संत रविदास नगर होगा, रविदासिया समाज ने किया योगी का स्वागत

Yogi Adityanath Ravidassia Community

Yogi Adityanath Ravidassia Community: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली वाराणसी से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भदोही जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा का रविदासिया समाज ने स्वागत किया है। इस संबंध में गुरुवार को ग़ाज़ीपुर में भाजपा अनुसूचित मोर्चा जिलाध्यक्ष शैलेश कुमार के नेतृत्व में रविदासिया समाज के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला संत शिरोमणि गुरु रविदास के प्रति और रविदासिया समाज की भावनाओं का सम्मान है। समाज मुख्यमंत्री को इस निर्णय के लिए हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करता है। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग से समाज के उत्थान एवं विकास के लिए भविष्य में भी इसी प्रकार के सकारात्मक निर्णय लिए जाते रहेंगे।

 

इस अवसर पर श्री गुरु रविदास जन्मस्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, वाराणसी के सचिव धर्मपाल सिंह ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर जिले का नाम होना उनके अनुयायियों के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय ऐतिहासिक, जन भावनाओं के अनुरूप और अत्यंत सम्मानजनक कदम है। इससे समस्त रविदासिया समाज एवं दलित समाज  स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

 

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य एवं संत रविदास नगर (पूर्व नाम भदोही) के पूर्व जिला प्रभारी कौशलेन्द्र सिंह पटेल ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने जनपद का नाम बदलकर संत रविदास के सम्मान को ठेस पहुंचाने का कार्य किया था। जनपद का नाम पुनः संत रविदास नगर किए जाने से समाज के लोग बेहद खुश हैं। योगी सरकार के इस निर्णय का पूरे प्रदेश में स्वागत किया जा रहा है।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव : सीएम योगी ने किया महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन

Guru Purnima Mahotsav CM Yogi Adityanath

Guru Purnima Mahotsav CM Yogi Adityanath: गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार प्रातःकाल गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का नाथपंथ की परंपरा के अनुसार विशिष्ट पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, योगिराज बाबा गंभीरनाथ समेत नाथपंथ के सभी गुरुजन का भी विधि विधान से पूजा की।

 

गोरक्षपीठाधीश्वर ने भगवान गोरखनाथ और अन्य गुरुजन को श्रद्धा निवेदित कर लोक कल्याण के पथ पर मार्गदर्शन के लिए भावपूर्ण कृतज्ञता व्यक्त की की।  गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष अनुष्ठान प्रातः काल से ही प्रारंभ हो गया और सामूहिक आरती के साथ अनुष्ठान की पूर्णता हुई।

गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। वैसे तो गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं, गुरु गोरखनाथ जी तथा नाथपंथ के गुरुजन का दर्शन-पूजन उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा होता है। पर, गुरु पूर्णिमा का अवसर गोरखनाथ मंदिर में विशिष्ट पूजा का होता है। बुधवार को गोरक्षपीठाधीश्वर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महायोगी गोरखनाथ, मंदिर परिसर में मौजूद सभी देव विग्रहों और नाथपंथ के गुरुओं की प्रतिमाओं के समक्ष विधि विधान के साथ पूजन किया।

 

आनुष्ठानिक कार्यक्रमों के क्रम में उन्होंने सबसे पहले नाथपंथ के आदिगुरु भगवान गोरखनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनकी विशिष्ट पूजा की। वह परिसर में मौजूद सभी देव-विग्रहों के पास पहुंचे और उनका पूजन किया। उसके बाद वह बारी-बारी से बाबा गंभीरनाथ, अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ समेत ब्रह्मलीन गुरुओं की समाधि पर गए। सभी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर आशीर्वाद लिया।

 

गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार गुरु गोरखनाथ को रोट का महाप्रसाद भी अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना की आनुष्ठानिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद गुरु पूर्णिमा पर होने वाली परंपरागत सामूहिक आरती हुई तथा सभी गुरुओं के प्रति आस्था निवेदित की गई।

जालौन के पिछड़ेपन के जिम्मेदार अब घड़ियाली आंसू बहाकर युवाओं को गुमराह कर रहे

CM Yogi Adityanath Jalaun

CM Yogi Adityanath Jalaun: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालौन में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बुंदेलखंड के पिछड़ेपन, सूखे और पलायन के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लोगों को यह याद रखना चाहिए कि आखिर वे कौन लोग थे, जिन्होंने जालौन और बुंदेलखंड के पिछड़ेपन का आधार तैयार किया। जिन लोगों के काले कारनामों के कारण जालौन दस्यु प्रभावित क्षेत्र घोषित हो गया था, उन्हें भी याद करने की जरूरत है। सीएम योगी ने कहा कि बुंदेलखंड को अभाव और सूखे के कारण पलायन के लिए मजबूर करने वाले भी वे ही लोग थे। आज वही लोग घड़ियाली आंसू बहाकर नौजवानों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। 

 

उन्होंने सवाल किया कि यमुना, बेतवा और पहूज जैसी पावन नदियों की त्रिवेणी वाले क्षेत्र को आखिर क्यों पिछड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा और हर योजना में यह क्षेत्र पीछे क्यों दिखाई देता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में शनिवार को जालौन के उरई, माधौगढ़ व कालपी विधानसभा क्षेत्रों में 1275 करोड़ रुपए की 375 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उरई के स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को किट/चेक/स्वीकृति पत्र भी वितरित किए। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जालौन और पूरा बुंदेलखंड अपनी पुरानी पहचान से बाहर निकलकर विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। आज बुंदेलखंड में 56 हजार एकड़ से बड़े क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र बीडा के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी कनेक्टिविटी का आधार जालौन बन रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और फोरलेन कनेक्टिविटी ने जालौन की तस्वीर बदलने का काम किया है। अब यह क्षेत्र बीहड़ और दस्यु प्रभावित क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विकास और नई संभावनाओं के क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

कालपी का कागज बना ग्लोबल ब्रांड

सीएम योगी ने कहाकि जालौन के कालपी में तैयार होने वाला हस्तशिल्प कागज अब स्थानीय पहचान से निकलकर वैश्विक ब्रांड बन रहा है। कालपी के इस पारंपरिक कागज को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और बाजार दोनों का विस्तार हुआ है। आज कालपी का कागज देश की सीमाओं को पार कर ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे देशों तक पहुंच रहा है। कालपी के कागज की खासियत इसकी पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़ी पहचान है। जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान मिली है और इससे स्थानीय कारीगरों एवं उद्यमियों के लिए नए बाजार खुलने की उम्मीद बढ़ी है।

कोंच की रामलीला ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

सीएम योगी ने कहा कि इतिहास हमें इस बात का आगाह करता है। महर्षि वेदव्यास ने यहां जन्म लिया इस पावन धारा में और कहते हैं भगवान कृष्ण के पौत्र सांब ने प्राचीन सूर्य मंदिर का निर्माण भी यहीं पर करवाया था। याद करिए कोंच की रामलीला ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। यानी रामलीला का इतिहास कैसे होना चाहिए। ऐसी उरई, माधवगढ़ और कालपी विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी धरा पर आज 1275 करोड़ रुपए की परियोजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास के लिए मुझे आने का अवसर प्राप्त हुआ।

 

सीएम योगी ने आदिशक्ति मां भगवती जालौन माता और बैरागढ़ की शारदा माता के श्रीचरणों में नमन करते हुए महर्षि वेदव्यास की पावन जन्मभूमि और इसी जालौन की तपोभूमि को कोटि-कोटि नमन किया। जालौन और कालपी अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और नाना साहेब पेशवा की समर भूमि के रूप में जो धरती जानी जाती हो, कालपी का हैंडमेड कागज और यहां की विश्व विख्यात मटर इस जनपद को एक नई पहचान दिलाते हैं।

अपराधी के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई जगह नहीं

मुख्यमंत्री ने सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश का नौजवान देश-दुनिया में सीना चौड़ा कर चल रहा है और उसके सामने पहचान का संकट नहीं है। योगी ने कहा कि सपा शासन में बुंदेलखंड के संसाधनों का माफिया ने जमकर दोहन किया और विकास के नाम पर वसूली होती थी। बुंदेलखंड के विकास के लिए आने वाला पैसा सैफई में फिल्मी कार्यक्रमों पर खर्च किया जाता था। आज यही धन फोरलेन कनेक्टिविटी, युवाओं के रोजगार और किसानों के हित में खर्च हो रहा है।

 

गरीबों को राशन, पेंशन, आयुष्मान भारत और रसोई गैस जैसी योजनाओं का लाभ मिल रहा है कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि अब बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रहीं हैं। किसी बेटी से छेड़छाड़ या व्यापारी का उत्पीड़न करने वाले अपराधी के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई जगह नहीं है। आज व्यापारी निर्भय होकर कारोबार और बेटियां स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

जालौन में सड़क-पेयजल परियोजनाओं को रफ्तार

सीएम योगी ने कहा कि जालौन जिले में सड़क, पेयजल और कनेक्टिविटी से जुड़ी कई परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। गोहन-माधौगढ़ से मध्य प्रदेश सीमा तक जिला मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं बंगरा-जगम्मनपुर मार्ग पर रामपुरा, निनावली, नारोल, राठौर और अनपुरा होते हुए मध्य प्रदेश सीमा तक टू-लेन सड़क का निर्माण भी पूरा होने की जानकारी दी गई। 

 

एट-बंगरा-बीकेपुर तथा कालपी-मदारीपुर संपर्क मार्ग भी तैयार हो चुके हैं। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की नगरपालिका परिषद उरई, कोटा-मस्तकिल ग्राम पेयजल परियोजना और सलाघाट वाटर सप्लाई ग्रामीण पेयजल योजना पर काम जारी है। सीएम योगी ने कानून-व्यवस्था नीति का जिक्र करते हुए कहा कि संगठित अपराध में शामिल माफिया की 600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की गई हैं। नकल माफिया के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही। परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

जालौन में आएंगे रोजगार के नए अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि झांसी और चित्रकूट में बन रहे डिफेंस कॉरिडोर का लाभ जालौन को भी मिलेगा। जालौन से होकर कनेक्टिविटी विकसित होने के साथ यहां 56 हजार एकड़ में फ्यूचर रेडी इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाने की योजना है, जिससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जालौन में डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की बात भी कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत आधुनिक तकनीक के विकास के लिए डेटा सेंटर महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे का काम तेजी से चल रहा है। बुंदेलखंड के सभी सात जिलों को यूपी एग्रीज योजना में शामिल किया गया है। महिला शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बैलैनी मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से महिलाओं की क्षमता की सराहना की।

CM Yogi Adityanath Jalaun

सीएम योगी ने लाभार्थियों को प्रमाणपत्र, चेक वितरित किया 

  • गीता, रेनू, शकीला खातून और ममता (उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 13,14,30000 का चेक)
  • उमेदा (मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पत्र)
  • आस्था ( कन्या सुमंगला योजना के तहत चेक)
  • शैलेंद्र सिंह सेंगर (कृषि यंत्र)
  • शिवा त्रिपाठी (प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलार रूफ टॉप यंत्र, पत्र) 
  • विनय राजपूत (प्रधानमंत्री स्वनिध योजना के तहत पत्र)
  • रानी देवी (प्रधानमंत्री शहरीय आवास योजना के तहत पत्र)
  • समर सिंह (कुक्कुट योजना के तहत ब्याज मुक्त ऋण पत्र)
  • कुशाग्र गुप्ता (एआईएफ के तहत 4 करोड़ रुपए का चेक)
  • अंबदा रहमान (आयुष्मान भारत के तहत गोल्डन कार्ड)।

ये रहे मौजूद 

इस अवसर पर मंत्री संजय सिंह गंगवार, विधायक विनोद कुमार चतुर्वेदी, विधायक गौरी शंकर वर्मा, विधायक मूलचंद निरंजन, विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन, विधान परिषद सदस्य बाबू लाल तिवारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू, जिलाध्यक्ष उर्विजा दीक्षित, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ घनश्याम अनुरागी, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य बाबा बालक दास, कोऑपरेटिव बैंक के सभापति बृजभूषण सिंह मुन्नू, अपना दल के अध्यक्ष अनिल कोदारी, राष्ट्रीय लोक दल के जिलाध्यक्ष रविंद्र श्रीवास्तव, नगर पालिका परिषद उरई की अध्यक्ष गिरिजा चौधरी, नगर पालिका परिषद कोंच के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, नगर पालिका परिषद जालौन के अध्यक्ष नेहा पुनीत आदि मौजूद रहे।

 

उच्च शिक्षा के 1.28 लाख शिक्षकों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा, मुख्यमंत्री योगी रविवार को आगरा में करेंगे योजना का शुभारंभ

– प्रति परिवार 5 लाख रुपए तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी, 1900 से अधिक उपचार पैकेज होंगे शामिल

– पंजाब नेशनल बैंक के साथ एमओयू, शिक्षकों और कर्मचारियों को मिलेंगी अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं

– सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस उपचार का लाभ

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 जुलाई को आगरा में उच्च शिक्षा विभाग की 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना' का शुभारंभ करेंगे। इस योजना के लागू होने के बाद प्रदेश के विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों एवं उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक के साथ एमओयू का भी आदान-प्रदान होगा। 

 

योजना के लागू होने के बाद पात्र शिक्षकों और उनके परिवारों को सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। वर्तमान में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण इलाज का आर्थिक भार शिक्षकों को स्वयं वहन करना पड़ता है। नई व्यवस्था से उन्हें समय पर बेहतर उपचार और आर्थिक सुरक्षा दोनों मिलेंगी। 

 

योगी सरकार का मानना है कि शिक्षकों की स्वास्थ्य सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना शिक्षकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच देने के साथ आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करेगी। यह पहल शिक्षक कल्याण और उच्च शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। 

 

प्रति परिवार पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवर

योजना के अंतर्गत पात्र प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाएगा। कार्ड बनने के बाद पहले दिन से ही निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का पूरा खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया जाएगा। 

 

एमओयू से मिलेगा अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा कवच

कार्यक्रम के दौरान पंजाब नेशनल बैंक के साथ होने वाले एमओयू के तहत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को 1.50 करोड़ रुपए तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 3 करोड़ रुपए तक का हवाई दुर्घटना बीमा, 60 हजार रुपए तक का अस्पताल नकद लाभ तथा 12 लाख रुपए तक का टर्म लाइफ बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 

1900 से अधिक उपचार पैकेज का मिलेगा लाभ

योजना के माध्यम से सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों में 1900 से अधिक उपचार पैकेजों का लाभ मिलेगा। इनमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, जटिल सर्जरी सहित अनेक गंभीर बीमारियों का उपचार शामिल है। योजना का संचालन साचीज (SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा और आयुष्मान भारत की निर्धारित उपचार दरें लागू होंगी।