योगी सरकार ने स्मार्ट मीटर पर फैला भ्रम किया दूर, यूपीपीसीएल ने दी पूरी जानकारी

  • स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा नया आर्थिक बोझ
  • सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक खबरों का यूपीपीसीएल ने किया खंडन
  • प्रीपेड से पोस्टपेड व्यवस्था में लौटने के बाद नियमानुसार जमा हो रही सिक्योरिटी राशि
  • यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, एसएमएस एवं व्हाट्सएप पर मिल रही बिजली बिल की सुविधा

 

लखनऊ, 28 जुलाई। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी बीच स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों पर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया कि पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के बाद पहले समायोजित या वापस की गई सिक्योरिटी राशि ही नियमानुसार दोबारा जमा कराई जा रही है। इसे नया शुल्क या स्मार्ट मीटर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताना पूरी तरह भ्रामक है।

 

यूपीपीसीएल की ओर से बताया गया कि हाल के दिनों में कुछ समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर नया आर्थिक बोझ डालने और उसने पुनः सिक्योरिटी धनराशि वसूलने संबंधी खबरें प्रसारित की जा रही है, जो कि तथ्यों के अनुरूप नहीं है और अधूरी जानकारी के आधार पर प्रस्तुत की गई है। 

 

यूपीपीसीएल के अनुसार, प्रदेश में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पूर्व में प्रीपेड प्रणाली पर संचालित किया गया था। उस समय उपभोक्ताओं द्वारा पूर्व में जमा की गई सिक्योरिटी धनराशि को नियमानुसार उनके बकाया विद्युत देयकों के विरुद्ध समायोजित कर दिया गया था तथा जिन उपभोक्ताओं पर कोई बकाया नहीं था, उनकी जमा सिक्योरिटी राशि उनके प्रीपेड खाते में रिचार्ज के रूप में क्रेडिट कर दी गई थी। तत्पश्चात उपभोक्ताओं की सुविधा एवं जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पुनः पोस्टपेड प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया। वर्तमान में सभी उपभोक्ताओं को प्रत्येक माह पूर्व की भांति नियमित मासिक विद्युत बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस संबंध में आवश्यक आदेश पूर्व में ही निर्गत किए जा चुके हैं।

 

यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया कि पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के फलस्वरूप अब वही सिक्योरिटी धनराशि, जो पूर्व में उपभोक्ताओं को समायोजित अथवा वापस कर दी गई थी, नियमानुसार पुनः जमा कराई जा रही है। इसे किसी प्रकार का नया शुल्क अथवा स्मार्ट मीटर लगाए जाने के कारण उपभोक्ताओं पर डाला गया अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया जाना पूर्णतः भ्रामक एवं तथ्यों से परे है। उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का एकमुश्त वित्तीय भार न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए इस धनराशि को चार समान मासिक किस्तों में वसूल किए जाने का निर्णय लिया गया है। 

 

प्रथम किस्त जून-2026 की ऊर्जा खपत के बिल, जो जुलाई-2026 में जारी हुआ था, उसमें शामिल थी। बाकि तीन किस्तें आगामी तीन मासिक बिलों में स्वतः सम्मिलित होकर आएंगी। यह संपूर्ण प्रक्रिया बिलिंग प्रणाली द्वारा स्वतः संपादित की जाएगी। इसके लिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की अतिरिक्त औपचारिकता पूर्ण करने की आवश्यकता नहीं होगी।

 

यूपीपीसीएल ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश के सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को नियमित पोस्टपेड मासिक बिल जारी किए जा रहे हैं। भविष्य में दिए जाने वाले नए विद्युत संयोजन भी पूर्व की भांति पोस्टपेड स्वरूप में ही प्रदान किए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर, प्रीपेड व्यवस्था तथा सिक्योरिटी धनराशि को परस्पर जोड़कर प्रस्तुत किए जा रहे समाचार तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और इनसे केवल उपभोक्ताओं में अनावश्यक भ्रम उत्पन्न हो रहा है।

 

सभी उपभोक्ताओं को उनका मासिक विद्युत बिल यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, विभागीय वेबसाइट, पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे जाने वाले एसएमएस एवं व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अभी तक पंजीकृत नहीं है अथवा किसी कारणवश गलत दर्ज है, वे संबंधित वितरण निगम के अधिकृत व्हाट्सएप Chatbot, निकटतम विद्युत कार्यालय अथवा 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से अपना बिल प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार विद्युत बिल का भुगतान भी यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, विभागीय वेबसाइट, विभागीय काउंटर, जन सुविधा केंद्र (सीएससी), विद्युत सखी तथा अन्य अधिकृत डिजिटल एवं फिनटेक के माध्यमों से अत्यंत सरलता से किया जा सकता है।

 

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सभी विद्युत उपभोक्ताओं से अनुरोध किया कि वे सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक समाचारों पर विश्वास न करें। केवल यूपीपीसीएल एवं संबंधित वितरण निगमों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानें। सभी उपभोक्ताओं से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे प्रत्येक माह अपना विद्युत बिल समय से डाउनलोड कर निर्धारित तिथि तक उसका भुगतान करें, जिससे किसी प्रकार की असुविधा अथवा विलंब अधिभार से बचा जा सके।

सरकार ने किसानों को दिलाया भरोसा, यूपी में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध

UP fertilizer availability: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार वर्तमान खरीफ सीजन में मुख्य फसल धान की रोपाई और अन्य फसलों की बुवाई के उपरांत किसानों को फसल संस्तुति के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि परेशान न हों, प्रदेश में उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि व संबंधित विभाग के अधिकारी लगातार मॉनीटरिंग करें। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भ्रामक सूचनाओं व अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से उर्वरक भंडारण न करें। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। 

प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खरीफ सीजन- 2026 के तहत सोमवार (27 जुलाई) तक कुल 28.25 लाख मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री की जा चुकी है, जबकि 29.05 लाख मीट्रिक टन उर्वरक अब भी उपलब्ध है। सरकार किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 

 

किसी भी समस्या पर जनपद व मंडल के अधिकारियों से संपर्क करें किसान

कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सभी 18 मंडलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। जनपदों में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो वे जनपद, मंडल के कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। मंडलवार यूरिया उपलब्धता के आंकड़े इस प्रकार हैं-

  • सहारनपुर : 43,275 मी. टन
  • मेरठ : 67551 मी. टन
  • आगरा : 95852 मी. टन 
  • अलीगढ़ : 86474 मी. टन 
  • बरेली : 116987 मी. टन
  • मुरादाबाद : 83972 मी. टन
  • कानपुर : 143076 मी. टन
  • प्रयागराज : 111070 मी. टन
  • झांसी : 47722 मी. टन
  • चित्रकूट : 50189 मी. टन
  • वाराणसी : 109312 मी. टन
  • मीरजापुर : 36014 मी. टन
  • आजमगढ़ : 73086 मी. टन
  • गोरखपुर : 91659 मी. टन
  • बस्ती : 51638 मी. टन
  • गोंडा : 59199 मी. टन
  • लखनऊ : 138186 मी. टन
  • अयोध्या : 71695 मी. टन

नौकरी ढूंढ़ने नहीं, नौकरी देने की सोच पैदा कर रहा ‘यूथ अड्डा’

CM Yuva Yojana: आज की जेनरेशन जेड (Gen Z) पारंपरिक नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह पीढ़ी नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और आत्मनिर्भरता में अपना भविष्य देखती है। जिन युवाओं का जन्म 1997 के बाद हुआ, वे इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक के साथ बड़े हुए हैं। ऐसे में उन्हें केवल रोजगार नहीं, बल्कि अवसर, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और उद्यमिता का पूरा इकोसिस्टम चाहिए।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बहुत पहले समझ लिया था। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने केवल रोजगार योजनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाने की सोच के साथ सीएम युवा और यूथ अड्डा जैसी अभिनव अवधारणा को विकसित किया। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इस पहल का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि विचार, कौशल, तकनीक, मार्गदर्शन और बाजार सभी को एक मंच पर उपलब्ध करवा कर युवाओं के लिए उद्यमिता का नया इकोसिस्टम तैयार करना है। 

 

Gen Z की क्षमता और भविष्य की कार्यशक्ति में उसकी अहम भूमिका को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक वर्ष पहले ही पहचान लिया था। इसी सोच के तहत युवाओं और उद्यमिता के बीच मौजूद दूरी को कम करने की पहल की गई। कॉफी या चाय पर सहज, खुले और व्यावहारिक संवाद के माध्यम से युवाओं को कौशल, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास हुआ। इसी अनौपचारिक लेकिन प्रभावी मॉडल को ‘यूथ अड्डा’ नाम दिया गया, जहां कॉफी शॉप जैसे माहौल में युवा अपने विचार साझा कर सकें, विशेषज्ञों से संवाद कर सकें और अपने उद्यमी सपनों को वास्तविक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

Gen Z की जरूरतों के अनुरूप तैयार हुआ यूथ अड्डा

आज का युवा केवल ऋण या अनुदान नहीं चाहता। वह चाहता है कि कोई उसके विचार को समझे, बिजनेस मॉडल बनाने में मदद करे, अनुभवी मेंटर्स से जोड़े, बैंकिंग प्रक्रिया आसान बनाए और बाजार तक पहुंच दिलाए। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यूथ अड्डा को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्र के बजाय एक समग्र उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। यहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, फ्रेंचाइजी मॉडल, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन सब कुछ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।

 

यूथ अड्डा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सरकारी सेवा वितरण की पारंपरिक सोच को बदलता है। यहां युवा केवल किसी योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि अवसर का आकांक्षी है, जिसकी जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित की गई हैं। यह दृष्टिकोण शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

कॉलेज से सीधे स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर

प्रदेश सरकार ने महसूस किया कि उद्यमिता की शुरुआत नौकरी मिलने के बाद नहीं, बल्कि कॉलेज और तकनीकी संस्थानों के दिनों से ही होनी चाहिए। इसलिए यूथ अड्डा का फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक और आईटीआई के विद्यार्थियों पर रखा गया है। यहां छात्रों को प्रेरित किया जाता है कि वे डिग्री पूरी होने के बाद केवल नौकरी के लिए आवेदन करने की बजाय यह सोचें कि वे किस समस्या का समाधान कर सकते हैं और उससे किस प्रकार सफल उद्यम स्थापित किया जा सकता है। योगी सरकार ने यह भी समझा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक आधारित होगी। इसी कारण यूथ अड्डा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और आधुनिक डिजिटल टूल्स पर विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रदेश का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, पूरे बिजनेस सफर में साथ

यूथ अड्डा केवल प्रशिक्षण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। यहां युवाओं को बिजनेस आइडिया तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी, डिजिटल ब्रांडिंग, गूगल बिजनेस प्रोफाइल, वॉट्सएप बिजनेस, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और व्यवसाय विस्तार तक लगातार मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही 100 से अधिक तैयार फ्रेंचाइजी मॉडल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं का जोखिम काफी कम हो सके।

ग्रामीण युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष फोकस

यूथ अड्डा की अवधारणा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाना है, ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का सहयोग देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पूरे वर्ष चलता रहेगा उद्यमिता का अभियान

यूथ अड्डा को केवल एक केंद्र नहीं, बल्कि वर्षभर सक्रिय रहने वाले उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया गया है। यहां बैंकर्स मीट, टेक फेस्ट, स्टार्टअप क्लिनिक, बिजनेस आइडिएशन वर्कशॉप, फाउंडर्स टॉक, नारी शक्ति श्रृंखला, कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम और सफल उद्यमियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक पांच लाख युवाओं को इस पहल से जोड़ना, ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराना, 10,000 से अधिक नए उद्यम एवं फ्रेंचाइजी स्थापित करना तथा 25,000 से अधिक एमएसएमई को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बनते हैं, तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

यूपीकॉन निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी पहल के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीकॉन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह के मुताबिक,  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) के अंतर्गत यूपीकॉन द्वारा संचालित यूथ अड्डा को प्रदेश में उद्यमिता के एक सशक्त मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। यूपीकॉन युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, परियोजना परामर्श, बैंकिंग सहायता, डिजिटल सशक्तीकरण और उद्योग जगत से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित कर रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल योजनाओं का लाभ दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश तथा एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में सहभागी बनाना है।

योगी सरकार में जल संरक्षण बना जन आंदोलन, यूपी ने हासिल किया संयुक्त राष्ट्र का छठवां सतत विकास लक्ष्य

Yogi government water conservation: कभी जल संकट और गिरते भूजल स्तर की चुनौती से जूझने वाला उत्तर प्रदेश आज जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया गया। इसी क्रम में यूपी, संयुक्त राष्ट्र के छठवें सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6) को हासिल कर चुका है। यूपी में जल दोहन की दर 2017 के 71.26 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत हो गई है, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य का मानक है। यह उपलब्धि जल संरक्षण के लिए सम्मलित प्रयासों से मिली है।

 

भूजल गर्भ विभाग निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, आधुनिक तकनीक के सम्मलित प्रयासों ने प्रदेश को जल सरंक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धियां दिलाई हैं। प्रदेश सरकार और विभाग के प्रयासों का सबसे बड़ा परिणाम भूजल पुनर्भरण में वृद्धि के रूप में सामने आया है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 69.91 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) था, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 73.39 बीसीएम हो गया। वहीं भूजल दोहन की दर 71.26 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6) को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश सफल रहा।

प्रदेश में अतिदोहित विकासखंड़ों की संख्या हुई कम

उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल संरक्षण अभियानों का असर अतिदोहित क्षेत्रों में भी दिखाई पड़ा। वर्ष 2017 में प्रदेश में 82 अतिदोहित विकासखंड थे, जिनकी संख्या घटकर 44 रह गई। वहीं सुरक्षित श्रेणी के विकासखंडों की संख्या 540 से बढ़कर 563 हो गई। यह परिवर्तन वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन व योजनाबद्ध कार्यों की वजह से संभव हो पाया।

अभियान बना भूजल रिचार्ज की ताकत

'कैच द रेन' अभियान के तहत वर्ष 2021 से 2025 के बीच 3.39 लाख वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं, 1.34 लाख पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया, 14.38 लाख जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्य हुए। साथ ही 1.33 लाख भूजल पुनर्भरण एवं पुनः उपयोग से जुड़ी संरचनाएं विकसित की गईं। इन प्रयासों ने वर्षा जल संचयन व भूजल रिचार्ज को नई गति दी।

2 मीटर तक बढ़ा भूजल स्तर

डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अटल भूजल योजना ने भी सकारात्मक बदलाव में अहम भूमिका निभाई। 26 विकासखंडों में ग्राम पंचायत आधारित वाटर सिक्योरिटी प्लान लागू किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्र अतिदोहित या सेमी-क्रिटिकल श्रेणी से सुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़े। एक स्वतंत्र अध्ययन में 550 ग्राम पंचायतों में से 303 पंचायतों में भूजल स्तर में 0.5 से 2 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया।

 

रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग से लाभ

योगी सरकार ने रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सरकारी एवं अर्धसरकारी भवनों पर भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया। प्रदेश में 1,05,593 उपयुक्त भवनों की पहचान की गई, जिनमें से 35,206 भवनों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। भूगर्भ जल विभाग द्वारा 227 भवनों पर प्रणाली स्थापना से प्रतिवर्ष लगभग 4252.80 लाख लीटर संभावित भूजल पुनर्भरण क्षमता भी विकसित की गई है।

करोड़ों लीटर भूजल रिचार्ज क्षमता बढ़ी

योगी सरकार में लगभग सभी विभागों ने जल संरक्षण अभियान को प्राथमिकता में शामिल किया। इसके तहत पिछले कुछ वर्षों में लघु सिंचाई विभाग ने 6,627 चेकडैम का निर्माण किया, जिनकी भंडारण क्षमता 14 हजार करोड़ लीटर व भूजल रिचार्ज क्षमता 10 हजार करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है। इसके साथ ही 1,417 तालाबों का जीर्णोद्धार किया, जिसकी भूजल रिचार्ज क्षमता 1,400 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है। वहीं 6,800 से अधिक भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित की।

 

ग्राम्य विकास विभाग ने लगभग 19,974 अमृत सरोवर विकसित किए। कृषि विभाग ने 37,273 खेत तालाबों का निर्माण कराया। इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और कृषि उत्पादकता दोनों में सुधार हुआ। यह सभी प्रयास यूपी में भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण के लिए काफी अहम साबित हो रहे हैं।

ऑनलाइन बैठकों में अब नहीं चलेगी लापरवाही, योगी सरकार ने तय की जवाबदेही

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जवाबदेह, अनुशासित और परिणामोन्मुख प्रशासन की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन समीक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बना दिया है। अब निदेशालय स्तर पर आयोजित प्रत्येक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) तथा जनपद स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनिवार्य सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। अनुपस्थिति या अनधिकृत प्रतिनिधित्व की गुंजाइश नहीं होगी। इस संबंध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

 

निर्देशों में कहा गया है कि समय-समय पर आयोजित महत्वपूर्ण ऑनलाइन समीक्षा बैठकों में कई जनपदों से अपेक्षित स्तर की सहभागिता नहीं हो रही थी। कई मामलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं बैठक में शामिल नहीं होते थे और न ही किसी अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित होती थी। इसे प्रशासनिक जवाबदेही के अनुरूप नहीं मानते हुए अब स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है। सभी अधिकारी केवल अपनी आधिकारिक ई-मेल आईडी के माध्यम से ही बैठक में शामिल होंगे, जिससे प्रतिभागियों की पहचान सुनिश्चित होगी और समीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।

अधिकारी स्वयं होंगे बैठक में शामिल

नए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) तथा जनपद स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं प्रतिभाग करेंगे। यदि किसी अपरिहार्य शासकीय कारण से वे उपस्थित नहीं हो सकते हैं, तो अपने स्थान पर किसी वरिष्ठ अधीनस्थ अधिकारी को विधिवत अधिकृत कर बैठक में भेजेंगे, ताकि किसी भी मंडल अथवा जनपद का प्रतिनिधित्व प्रभावित न हो।

एक जनपद से एक ही अधिकृत लॉगिन

निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि एक ही जनपद या मंडल से अलग-अलग डिवाइस और अलग-अलग आईडी से बैठक में जुड़ने की व्यवस्था स्वीकार नहीं होगी। यदि एक से अधिक अधिकारियों की उपस्थिति आवश्यक हो तो सभी अधिकारी एक ही स्थान पर बैठकर एक अधिकृत लॉगिन आईडी के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। इससे तकनीकी अव्यवस्था समाप्त होगी और समीक्षा अधिक सुव्यवस्थित बनेगी।

जवाबदेही के साथ तेज होगा क्रियान्वयन

बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति से समीक्षा बैठकों की गुणवत्ता बेहतर होगी, निर्णयों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित होगा और शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाओं की निगरानी तथा क्रियान्वयन में और अधिक गति आएगी।

 

योगी सरकार की बड़ी सौगात, 48.79 करोड़ से काशी की तर्ज पर संवरेगा लोधेश्वर महादेव धाम

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  • बाराबंकी का लोधेश्वर महादेव बनेगा हाईटेक तीर्थ, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
  • अगले वर्ष अक्टूबर तक पूरा होगा मेगा प्रोजेक्ट, बनेंगे कवर्ड कॉरिडोर, कमांड सेंटर और मेडिकल सुविधा केंद्र
  • सीएम योगी की पहल से लोधेश्वर धाम में पर्यटन विकास को मिली नई उड़ान

 

बाराबंकी, 26 जुलाई। जिले के प्राचीन लोधेश्वर महादेव मंदिर को शीघ्र ही काशी जैसा भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत लगभग 48.79 करोड़ रुपये की समेकित पर्यटन विकास परियोजना के तहत मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र को और अधिक सुगम बनाएगी, बल्कि पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए हाईटेक विजिटर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स भी तैयार करेगी। इसके साथ ही यहां कवर्ड कारीडोर भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री ने गत 20 जुलाई को इस परियोजना का शिलान्यास किया है।

 

लोधेश्वर महादेव धाम बाराबंकी का महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यहां आधुनिक सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं को आरामदायक प्रवास, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और बेहतर व्यवस्था मिलेगी। प्रवेश द्वार, कवर्ड कॉरिडोर, क्लॉक रूम, मेडिकल सेंटर और कमांड सेंटर जैसी सुविधाएं परिसर को हाईटेक विजिटर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स का रूप देंगी। लैंडस्केपिंग व दुकानों की व्यवस्था से पर्यटन अनुभव और समृद्ध होगा। कुल 12980 वर्गमीटर क्षेत्र में यह विकास कार्य हो रहा है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस कर रही है।

 

पुरुषों व महिलाओं के लिए होंगे 26-26 टॉयलेट
 

परियोजना के अंतर्गत 5 प्रवेश द्वार, 2734 वर्गमीटर।का लैंडस्केप एरिया, 3.25 मीटर चौड़ा व 652 रनिंग मीटर लंबा परकोटा कवर्ड कॉरिडोर, 412 वर्गमीटर का क्लॉक रूम, पुरुषों व महिलाओं के लिए 26-26 तथा दिव्यांगजनों के लिए 4 टॉयलेट, पेयजल व्यवस्था, सिक्योरिटी स्टाफ हॉल, 9 दुकानें, सीसीटीवी सिस्टम, कंट्रोल रूम एवं कमांड सेंटर, पेंट्री तथा मेडिकल सेंटर जैसी सुविधाओं का निर्माण शामिल है। इन सुविधाओं से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और परिसर आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।

 

अगले वर्ष अक्टूबर माह तक हो जाएगा तैयार
 

सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक देवव्रत पवार ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य तेज गति से शुरू हो गया है। वर्तमान में मुख्य भवन का फाउंडेशन और पाइलिंग का कार्य चल रहा है। हम समयबद्ध तरीके से सभी सुविधाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगले वर्ष अक्टूबर माह तक इसके निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

 

स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा फायदा: डीएम
 

जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप बाराबंकी के प्राचीन धार्मिक स्थल लोधेश्वर महादेव मंदिर को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। भूमि संबंधी बाधाओं के बावजूद अब कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है। यह परियोजना आस्था और पर्यटन का सुंदर संगम बनाएगी। जिला प्रशासन इस महत्वपूर्ण विकास कार्य की नियमित निगरानी कर रहा है ताकि निर्धारित समय में पूर्ण गुणवत्ता के साथ काम पूरा हो सके। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और अधिक से अधिक पर्यटक यहां आकर्षित होंगे।

 

मान्यता: महाभारत काल में पांडवों ने यहां किया था महायज्ञ
 

बाराबंकी जिले की रामनगर तहसील के महादेवा गांव में घाघरा नदी के तट पर स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र शिव मंदिर है। यहां का शिवलिंग भारत के 52 दुर्लभ शिवलिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां महायज्ञ किया था, जिसका प्रमाण आज भी मौजूद पांडव-कूप है। इस मंदिर का नाम लोधरम नामक ब्राह्मण से जुड़ा है, जिन्होंने स्वप्न में भगवान शिव के आदेश पर शिवलिंग की खोज की। यह मंदिर लोधी राजपूतों का कुलदेवता भी है। चारों युगों में इसकी पूजा का उल्लेख मिलता है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर लाखों भक्त यहां आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। पौराणिक महत्व, श्रद्धा और चमत्कारों के कारण लोधेश्वर महादेव आस्था का प्रमुख केंद्र है।
 

केसरिया और भगवा कपड़ों से समाजवादी पार्टी की जन्मजात दुश्मनी: मुख्यमंत्री योगी

CM Yogi Barabanki Speech

 

 

  • सीएम योगी ने मैनपुरी में 682 करोड़ रुपये की 111 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास
  • मुख्यमंत्री योगी ने कहा- धूम-धाम से निकलेगी कांवड़ यात्रा, प्रदेशभर में होंगे जन्माष्टमी के आयोजन
  • सीएम बोले –‘अब कर्फ्यू न दंगा, यूपी में सब चंगा’, विकास के लिए भी पैसों की कमी नहीं
  • देश की हर समस्या का समाधान उत्तर प्रदेश में, अब यूपी की काबिलियत पर कोई प्रश्न नहीं करता

 

लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी कहती थी, कांवड़ यात्रा में शिव भक्त आएंगे तो दंगा हो जाएगा। सपा शंख व घंटा भी नहीं बजाने देती थी। समाजवादी पार्टी की केसरिया और भगवा कपड़ों से मानो जन्मजात दुश्मनी थी। हालांकि अब कोई कांवड़ यात्रा पर रोक नहीं लगा पाएगा, अब धूमधाम से कांवड़ यात्रा भी निकलेगी और शिवभक्त शिवालयों में जलाभिषेक भी करेंगे। उन्होंने कहा कि सपा ने जन्माष्टमी के आयोजनों पर भी रोक लगा दी थी, जिसे डबल इंजन सरकार ने फिर से शुरू कराया।

 

सीएम योगी मैनपुरी में 682 करोड़ रुपये से अधिक की 111 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के दौरान संबोधन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज हमारा प्रदेश उपद्रवग्रस्त नहीं, उत्सव प्रदेश बन गया है। अब कर्फ्यू न दंगा है, यूपी में सब चंगा है। 

 

उन्होंने कहा कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है और उसके बाद सावन का महीना शुरू हो जाएगा। कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। पहले समाजवादी पार्टी कहती थी कि कांवड़ यात्रा नहीं होने देंगे, शिव भक्त जाएंगे तो दंगा हो जाएगा। वे शंख नहीं बजने देते थे, घंटा भी नहीं बजने देते थे। केसरिया व भगवा कपड़ों से मानो समाजवादी पार्टी की जन्मजात दुश्मनी थी। उन्होंने कहा, प्रदेश में डबल इंजन सरकार आते ही हमने तय किया कि धूम-धाम से कांवड़ यात्रा निकलेगी।

 

कांवड़ यात्रा पर नहीं लगने दी रोक

सीएम ने कहा कि हमने सुनिश्चित किया कि कांवड़ यात्रा पर कोई रोक नहीं लगाएगा। हमारी डबल इंजन सरकार ने आते ही कहा कि हम सुविधा देंगे और अनुशासित तरीके से शिव भक्त कांवड़ यात्रा निकालेंगे। कांवड़िए यात्रा कर जल लेकर आएंगे और शिवालयों में जलाभिषेक भी करेंगे। 

 

सपा ने जन्माष्टमी के आयोजन पर लगा दी थी रोक

सीएम ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन को अब कोई रोक नहीं सकता। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा, वृंदावन से लेकर मैनपुरी, इटावा समेत उत्तर प्रदेश के हर जिले में भव्यता के साथ आयोजन होते हैं। हर थाने, पुलिस लाइन, जेल में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन होता है, जिस पर पहले सपा ने रोक लगा दी थी।

 

उन्होंने कहा कि आज पर्यटन और संस्कृति विभाग के द्वारा मंदिरों के सुंदरीकरण के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले ये पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल के लिए चला जाता था। अब मंदिरों के सुंदरीकरण में वही पैसा खर्च हो रहा है। सपाई विकास की योजनाओं का पैसा अपने परिवार के विकास में लगा देते थे और गरीब देखता रहता था। छात्र की छात्रवृत्ति नहीं आती थी, नौजवान की नौकरी चली जाती थी, महिला स्वावलंबन के नाम पर सुरक्षा का संकट खड़ा कर देते थे।

 

मैनपुरी की पौराणिक और ऐतिहासिक पहचान

सीएम ने कहा कि आज का मैनपुरी अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत की वजह से पहचाना जा रहा है। एक समय ऐसा भी था, जब मैनपुरी के नाम पर लोग घबराते थे। यहां के नौजवानों को होटल में कमरे नहीं मिलते थे। दूसरे शहरों में मैनपुरी के लोगों को किराए का मकान नहीं मिलता था। आज मयन ऋषि व च्यवन ऋषि की इस धरा को डबल इंजन की सरकार ने नई पहचान दी है। आज मैनपुरी का नौजवान, किसान, व्यापारी देश के किसी कोने में जाता है तो उसे सम्मान मिलता है। यह पहचान का संकट पूर्व की सरकारों ने पैदा किया था।

 

पहले जो गरीब नौजवान पैसा नहीं दे सकता था, उसकी नौकरी नहीं लगती थी। आज डबल इंजन की सरकार में नौकरी निकलती है तो मैनपुरी व इटावा का नौजवान भी नियुक्ति पत्र प्राप्त करता है। बड़ी शान के साथ अपनी सेवाएं देता है, नए भारत के नए उत्तर प्रदेश के निर्माण में योगदान भी करता है।

 

यूपी में विकास के लिए पैसों की कमी नहीं

सीएम ने कहा कि आज यूपी बीमारू नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस राज्य है, भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था में अपना स्थान बनाया है। अब यूपी में पैसे की कमी नहीं है, विकास के लिए जितना पैसा चाहिए दिया जाएगा। नौजवानों के लिए नौकरी और किसानों के लिए योजनाओं की भी कमी नहीं है।

 

सीएम ने कहा कि हमने योजनाओं का लाभ बिना जातिगत के भेदभाव के दिया है। फसल ऋण माफी के जरिए 86 लाख अन्नदाता किसानों को लाभ पहुंचाया गया, किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ। वह किसान दलित, वंचित, पिछड़ा समेत हर जाति के थे, जिन्हें लाभान्वित किया गया। एक जिला एक उत्पाद की योजना भी बिना भेदभाव के चलाई गई। मैनपुरी तारकशी कारीगरी को वैश्विक पहचान दिलाया गया। 

 

सपा के गुंडों ने बेटियों का जीना मुश्किल किया था

सीएम ने कहा कि पूर्व की सरकारों में बहुत सारे संभ्रांत परिवार अपनी बेटियों को यूपी के बाहर हॉस्टल या रिश्तेदारों के घर पढ़ने के लिए भेज देते थे। क्योंकि समाजवादी पार्टी के गुंडों ने बेटियों व उनके परिवार का जीना मुश्किल कर दिया था। व्यापारी यूपी में निवेश नहीं करना चाहता था, उसे पूंजी के साथ अपनी सुरक्षा का भी भय रहता था।

 

सपा सरकार में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को मारी गोली

सीएम योगी ने कहा कि सपा सरकार में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मदन चौहान को उनके मैनपुरी स्थित पेट्रोल पंप में घुसकर गोली मारी गई थी। पूर्व सरकार में व्यापारी घर से निकलता था तो शाम को परिवार का मुंह देख पाने की प्रार्थना करता था। इसी को देखते हुए भाजपा सरकार ने अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉरलेंस अपनाया। इटावा हो या मैनपुरी यहां के संगठित अपराध की कमर तोड़ दी। प्रदेश को माफिया मुक्त किया गया। बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। अपराधियों को जेल या जहन्नुम भेज दिया गया और माफियों को मिट्टी में मिला दिया।

 

यह कार्य 2017 से पहले हो सकता था, लेकिन विकास, विरासत, उत्सवपूर्ण माहौल के लिए समय चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 12 बजे सोकर उठेगा, 2 बजे तैयार होगा, 5 बजे जिम जाएगा और 7 बजे अपनी महफिल में चला जाएगा, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। विकास का कोई विजन उस व्यक्ति के पास नहीं था, केवल लूट कर अपने परिवार का खजाना भरा गया। यही यूपी की दुर्गति का कारण था।

 

देश की हर समस्या का समाधान यूपी में

सीएम ने कहा कि सपा सरकार में नौकरी निकलते ही वसूली शुरू हो जाती थी। आज नियुक्ति पत्र बांटते वक्त पूछने पर मैनपुरी के युवाओं से भी पता चलता है कि उन्हें कहीं सिफारिश, वसूली या किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि 9 लाख से ज्यादा नौजवानों को सरकारी नौकरी मिली है। परंपरागत उद्यम जीवित हुआ तो सवा तीन करोड़ लोगों को रोजगार मिला। सुरक्षा का बेहतर माहौल बना तो 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव यूपी में प्राप्त हुआ। आज यूपी के प्रति व्यक्ति की आय बढ़ी है। अब यूपी पर कोई सवाल नहीं उठाता, बल्कि देश की हर समस्या का समाधान यूपी में ढूंढता है। सीएम ने कहा कि लोग फिर जाति, क्षेत्र के नाम पर बांटने आएंगे, लेकिन ये समाज और देश के दुश्मन हैं। कभी ऐसे लोगों के कारण विदेशी हमले होते थे, फिर से वैसी ही साजिश पैदा हो रही हैं। 

 

सपा को महापुरुष पसंद नहीं

सीएम ने कहा कि हम लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल एंप्लॉयमेंट जोन बना रहे हैं, समाजवादी पार्टी को इससे कोई लेना-देना नहीं था। हम लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के नाम पर श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रहे हैं, समाजवादी पार्टी उनके नाम पर बने हुए संस्थानों का नाम मिटाती थी। डबल इंजन सरकार बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कर रही है, समाजवादी पार्टी ने कन्नौज में बाबा साहब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम ही हटा दिया था। इन्हें सामाजिक न्याय से जुड़े हुए पुरोधा और महापुरुष पसंद नहीं हैं। इनको केवल परिवार के नाम पर सबकुछ पसंद है। यूपी को विकसित उत्तर प्रदेश बनना है, तो मैनपुरी को विकसित बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैनपुरी जिले को विकसित बनाने के लिए जरूरी है कि मैनपुरी व करहल क्षेत्र का हर विधानसभा क्षेत्र, हर विकासखंड विकसित बने और उसी की कार्ययोजना को आगे बढ़ा जा रहा है। 

 

किसानों को जरूर मिलेगी 10 घंटे बिजली

सीएम ने कहा कि अन्नदाता किसान को कम से कम 10 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। मैनपुरी के किसानों को ये जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि वह जुलाई के महीने में मैनपुरी इसलिए आए हैं, ताकि पानी, बरसात की स्थिति देख सकें। उन्होंने कहा कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर मैनपुरी जिले की सभी समस्याओं का समाधान निकालकर विकास कार्य को आगे बढ़ा रही है। मैनपुरी के लोगों को कहीं भी निराश और हताश नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विकसित यूपी के लिए मैनपुरी को भी तैयार होना है। 

 

सीएम योगी ने कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण से की। इसके बाद महिलाओं को फलों की टोकरी देकर गोदभराई की रस्म और बच्चों का अन्नप्राशन कराया। उन्होंने बच्चों को गोद में लेकर दुलार किया व उपहार भेंट किए। सीएम ने यहां आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बेसिक शिक्षा विभाग के स्टॉल पर स्कूली बच्चों को स्कूल बैग व किट उपहार स्वरूप भेंट की। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए विकास से जुड़े विभिन्न मॉडलों को देखकर खुशी व्यक्त की। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को देखा। सीएम ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी, मिशन शक्ति समेत अन्य स्टॉलों का भी अवलोकन किया।

 

इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापति, विधायक रामनेरश अग्निहोत्री, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी, जिला अध्यक्ष ममता राजपूत, जिला प्रभारी अनिल चौधरी, डीसीबी चेयरमैन नरेंद्र सिंह राठौर, मैनपुरी जिला पंचायत प्रशासक अर्चना भदौरिया, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष संगीता गुप्ता समेत अन्य भाजपा नेता व गणमान्य उपस्थित रहें।

CM योगी का बड़ा ऐलान, आक्रमणकारियों नहीं, भारत के राष्ट्रनायकों के नाम पर बनेंगे म्यूजियम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा में समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपना शौर्य दिखाया था, सपा सरकार वहां मुगल म्यूजियम बना रही थी। हमने कहा, उत्तर प्रदेश की जनता का पैसा किसी आक्रमणकारी के नाम पर म्यूजियम नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रनायकों के नाम पर म्यूजियम बनेगा। छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर भव्य म्यूजियम के निर्माण का कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा। सीएम ने कहा कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण नोड आगरा के अंदर विकसित करने जा रहे हैं। 

 

सीएम ने 53 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आगरा में आगरा उत्तर, आगरा ग्रामीण और आगरा दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों के लिए 342 करोड़ रुपए से अधिक की 53 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का स्वागत 'जय श्री राम'  एवं 'भारत माता की जय' के नारों के साथ गदा भेंट कर किया गया। इस दौरान उन्होंने स्कूली छात्रों की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत कर उन्हें चॉकलेट्स दी। साथ ही अन्य स्टॉल्स का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने नन्हे शिशुओं को गोद में लेकर दुलारा, उन्हें तिलक लगाया और खिलौने भेंट किए। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मुझे ब्रजभूमि में आगरा की इस पौराणिक और महाराजा सूरजमल की शौर्य एवं पराक्रम की इस धरा पर एक बार फिर से आने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस धरा को नमन करते हुए कहा कि जब तीन महीने पहले जब मैं आया था, तब 6,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का अवसर मुझे प्राप्त हुआ था। आज एक बार फिर से विधानसभाओं के कार्यक्रम की श्रृंखला में मुझे आगरा की इन तीन विधानसभाओं के साथ संवाद बनाने का अवसर प्राप्त हो रहा है। 

 

आगरा ने 2022 और 2024 में बीजेपी को अपना आशीर्वाद दिया

 

सीएम ने आगरा की जनता जनार्दन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आगरा ने 2022, 2024 में डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी को अपना आशीर्वाद दिया है। इसका परिणाम यह है कि आगरा ने जो सोचा, उससे पहले डबल इंजन सरकार उस योजना को लेकर आगरा के अंदर आ गई। आज आगरा स्मार्ट सिटी के साथ-साथ सेफ सिटी के एक नए मॉडल की तरफ आगे बढ़ रहा है। आगरा का यह मॉडल अभी तीन दिन पहले माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद तो और भी उसका उज्ज्वल पक्ष हम सबके सामने आया है। 468 औद्योगिक इकाइयों के एनओसी से जुड़े हुए कार्यक्रम टीटीजेड के नाते जो पेंडिंग पड़े हुए थे, उन सबको स्वीकृति मिल गई। यानी अब आगरा में उद्योग लगने से कोई रोकेगा नहीं, कोई रोक भी नहीं पाएगा।

 

आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि आगरा में हम इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। अब आगरा एक बार ब्रजभूमि के औद्योगिक गतिविधियों का ही नहीं, टूरिज्म के भी एक नए केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। बेहतरीन कनेक्टिविटी हो गई है। आगरा के अंदर हर प्रकार की कनेक्टिविटी को मजबूती प्रदान करने की दिशा में डबल इंजन सरकार ने जो कार्य प्रारंभ किया, आज वह आप सबके सामने है। पेरू का इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर भारत के अंदर कहीं खुलना था, हम लोगों ने कहा कि आगरा में हम जमीन उपलब्ध करवाते हैं, और अब इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर ने यहां पर सफलतापूर्वक काम करना प्रारंभ कर दिया है। यहां के अन्नदाता किसानों को लाभ होगा, किसान के उत्पाद को वैल्यू एडिशन मिलेगा, और कई गुना दाम मिलने के बाद अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इससे उनके चेहरे पर खुशहाली आएगी। 

 

ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने जैसे कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जाएंगे

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से टीटीजेडी के कारण लंबित पड़ी विकास परियोजनाओं को उच्चतम न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद अब आगरा को स्मार्ट, सेफ और फ्यूचर रेडी सिटी के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अब शहर में मल्टी लेवल पार्किंग, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने जैसे कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जाएंगे। आगरा के विकास के साथ-साथ किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा किसानों की समस्याएं उठाए जाने पर सरकार ने उनका समाधान निकाला है। किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिले, इसके लिए सर्किल रेट बढ़ाने की दिशा में काम किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां नए मूल्य के अनुरूप भुगतान संभव नहीं होगा, वहां सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं करेगी और किसी भी किसान को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

 

10 नई टाउनशिप विकसित करने को मंजूरी दी गई

 

सीएम ने कहा कि आगरा से आने वाले विकास प्रस्तावों को सरकार प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दे रही है। इसी क्रम में ग्रेटर आगरा परियोजना के तहत करीब 5,200 करोड़ रुपये की लागत से 10 नई टाउनशिप विकसित करने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा आगरा-ग्वालियर रोड पर 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अटलपुरम टाउनशिप विकसित की जा रही है, जहां करीब 10 हजार परिवारों के लिए आवास और व्यावसायिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। साथ ही ओडीओपी और ओडीओसी योजना के तहत आगरा के लेदर उद्योग के बाद अब पेठा को भी वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है।

 

500 महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल के निर्माण की घोषणा

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज के आगरा प्रवास से जुड़ी ऐतिहासिक कोठी के अधिग्रहण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा बटेश्वर धाम, कैलाश मंदिर, गुरु का ताल, गीत गोविंद वाटिका, अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मस्थली बटेश्वर, फतेहपुर सीकरी और सौरीपुर जैन तीर्थ के विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगरा में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की स्मृति में 500 महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने स्वीकृति देने के साथ बजट भी जारी कर दिया है। 

 

आगरा में विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगरा में हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं में पुल, फ्लाईओवर, सड़कों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, पॉलिटेक्निक, आईटीआई, नए कॉलेज और विश्वविद्यालयों का निर्माण शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले जो प्रदेश में सरकार चला रहे थे, वे सिर्फ अपने विकास में व्यस्त थे। जनता का पैसा सैफई सिंडीकेट की लूट-खसोट और डकैती का माध्यम बन गया था। 

 

सपा और कांग्रेस पर मुख्यमंत्री ने साधा निशाना

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी और उससे पहले कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में नौजवानों की नौकरियों में भ्रष्टाचार, गरीबों की योजनाओं में अनियमितता और किसानों के हितों की उपेक्षा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के कारण प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ, किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हुए तथा बेटियां और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके और बिना किसी भेदभाव के गांव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाओं सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान और विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

 

यूपी में 9 सालों में 9 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार बिना किसी भेदभाव के गांव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाओं और समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। पिछले एक वर्ष में केंद्र सरकार ने 12 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ वर्षों में नौ लाख युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी है। अब भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा सहित प्रदेश के सभी जिलों के युवाओं को समान अवसर मिल रहे हैं। अन्यथा इससे पहले सैफई सिंडीकेट उसमें कुंडली मारकर बैठ जाता था। चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली करके उस पूरे कार्यक्रम को इतना विवादित कर देते थे कि पूरा का पूरा अभियान फेल हो जाता था। न्यायालय को स्टे करना पड़ता था। 

 

2017 से पहले के मुख्यमंत्री 12 बजे सोकर उठते थे

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। जो भी उनकी सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश करेगा, उसके लिए केवल दो ही जगह हैं, जेल या जहन्नुम। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास विकास के लिए न समय था, न सोच और न ही जनप्रतिनिधियों तथा जनता से संवाद की इच्छा। जहां पर मुख्यमंत्री 12 बजे सोकर उठता हो, 2 बजे तक तैयार होता हो, 5 बजे जिम चला जाता हो और 7 बजे के बाद अपनी मित्र मंडली के साथ मौज-मस्ती में लिप्त हो जाता हो, वहां का तो भगवान ही मालिक था। पहले प्रदेश के हर जिले में माफिया सक्रिय थे, थाने और तहसीलें गुंडों के प्रभाव में थीं तथा प्रदेश अराजकता, दंगों और कर्फ्यू के माहौल से जूझ रहा था।

 

आज यूपी दंगा, कर्फ्यू और माफियाराज से मुक्त होकर विकास की नई पहचान बन चुका

 

मुख्यमंत्री ने कहा आज उत्तर प्रदेश दंगा, कर्फ्यू और माफियाराज से मुक्त होकर विकास और सुशासन में नई पहचान बना चुका है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है और विकास की गति तेज हुई है। आगरा में सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं इसी विकास यात्रा का हिस्सा हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी आगरा को 6,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार बुलेट ट्रेन की गति से विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है और आगरा को स्मार्ट, सेफ एंड फ्यूचर रेडी सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के उत्साह की सराहना करते हुए आगरा ग्रामीण, आगरा उत्तरी और आगरा दक्षिण के नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

 

 

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, टैबलेट व चाबी वितरित किए

 

-राघव शर्मा, डॉली त्यागी और चेतना राणा (स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत टैबलेट)

 

-सुनीता (चमड़ा उत्पाद के लिए टूल किट)

 

-सचिन कुमार, राम प्रकाश पचौरी (कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत चाबी)

 

-उपासना (प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चाबी)

 

-योगेश कुमार, मलखान सिंह (आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड)

 

-अमित गर्ग (66 लाख रुपए का चेक)

 

-शोभित बंसल, राजकुमार भगत, चित्रा चौहान (10 लाख रुपए का चेक)

 

-पुष्पा, नंद किशोर जैन (50 हजार रुपए का चेक)

 

ये रहे मौजूद 

इस अवसर पर  मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रदेश की मंत्री बेबी रानी मौर्य,  मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, मंत्री धर्मवीर प्रजापति, भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरनलाल लोधी, महापौर हेमलता दिवाकर, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, सांसद नवीन जैन, सांसद राजकुमार चाहर, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, धर्मपाल सिंह, डॉ. जी.एस. धर्मेश, चौधरी बाबूलाल, भगवान सिंह कुशवाहा, छोटेलाल वर्मा, रानी पक्षालिका सिंह, विधान परिषद सदस्य विजय शिवहरे, विधान परिषद सदस्य मानवेंद्र प्रताप सिंह, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया, महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ

Sarnath included in UNESCO World Heritage List

– यूपी की बौद्ध विरासत को मिली वैश्विक पहचान, बौद्ध स्थली सारनाथ बना चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

– 28 वर्षों के इंतजार के बाद सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा, बना देश का 45वां विश्व धरोहर स्थल

– आगरा से आगे बढ़ा उत्तर प्रदेश का यूनेस्को विरासत मानचित्र, वैश्विक पहचान में शामिल हुई बौद्ध धरोहर

– यूनेस्को की मान्यता गौरवपूर्ण उपलब्धि,उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को मिलेगी नई वैश्विक गतिः जयवीर सिंह

Sarnath Uttar Pradesh News : लगभग 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिल गया है। योगी सरकार के प्रयास रंग लाए और अब सारनाथ भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। इस उपलब्धि के साथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल सारनाथ को वैश्विक विरासत के सर्वोच्च मंच पर नई पहचान मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मानचित्र पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
 

उल्लेखनीय है कि सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (संभावित सूची) में शामिल किया गया था। ऐसे में, लगभग 28 वर्षों बाद मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश के लिए भी विशेष महत्व रखती है। अब तक राज्य के तीनों विश्व धरोहर स्थल- ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी (आगरा क्षेत्र) तक सीमित थे। मगर, योगी सरकार के प्रयासों से सारनाथ भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है। इससे उत्तर प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान अब पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है। इस कदम से राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक मान्यता मिली है।

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चौखंडी और धामेक स्तूप

यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। ये दोनों स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर हैं। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के मिलन की स्मृति का प्रतीक है, जबकि पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष तथा अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्मारक शामिल हैं। ये सभी मिलकर सारनाथ के विश्व के प्रमुख बौद्ध आस्था और ज्ञान केंद्र के रूप में हुए विकास की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाते हैं।

 

बौद्ध धर्म सारनाथ क्यों महत्वपूर्ण?

सारनाथ, वह पावन धरती है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद मानवता को अपना प्रथम उपदेश देकर 'धर्मचक्र प्रवर्तन' का शुभारंभ किया था। योगी सरकार के प्रयास से अब यह विश्व धरोहर के रूप में विशिष्ट पहचान प्राप्त कर चुका है। बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल सारनाथ को प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में 'ऋषिपत्तन' के नाम से वर्णित किया गया है।

यही वह ऐतिहासिक स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को धर्म का उपदेश देकर करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का संदेश समस्त मानवता तक पहुंचाया। आज यह गौरवशाली विरासत वैश्विक मंच पर और अधिक प्रतिष्ठित हो गई है। उल्लेखनीय है कि करीब 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध आस्था और तीर्थ परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। यह स्थल आज भी बौद्ध मठ जीवन, प्राचीन स्थापत्य और समृद्ध कला विरासत का साक्षी है।

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28 वर्षों की प्रतीक्षा का प्रतिफल : जयवीर सिंह

योगी सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 'यह सम्मान प्रदेश की बहुआयामी सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के सतत प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने आगे कहा, भगवान बुद्ध और रामायण की पावन भूमि उत्तर प्रदेश जैन, सूफी तथा अन्य आध्यात्मिक परंपराओं की भी समृद्ध विरासत समेटे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने सभी आस्था और विरासत स्थलों के संरक्षण एवं विकास को समान प्राथमिकता दी है।
 

जयवीर सिंह ने ये भी कहा कि 28 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और गति मिलेगी। साथ ही, प्रदेश का शांति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समावेशिता का संदेश दुनिया के अधिक व्यापक समुदाय तक पहुंचेगा।'

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'सारनाथ की पहचान स्मारकों से आगे'

सारनाथ के यूनेस्को नामांकन की तैयारी में अहम भूमिका निभाने वाली संरक्षण वास्तु विशेषज्ञ आभा नारायण लांबा ने कहा कि 'सारनाथ की पहचान केवल इसके स्मारकों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यही वह पावन स्थली है जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम धर्मदेशना दी, बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बौद्ध स्थापत्य की प्रारंभिक परंपराओं का विकास हुआ। उन्होंने कहा कि लगभग ढाई हजार वर्षों से यहां बौद्ध तीर्थ परंपरा जीवित है, जो समग्र सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत सारनाथ को विश्व धरोहर के रूप में विशिष्ट बनाती है।'

 

हमारे सतत प्रयासों का परिणाम : अमृत अभिजात

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि 'सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने इसे योगी सरकार के पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को बौद्ध तीर्थाटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सारनाथ की हमेशा केंद्रीय भूमिका रही है। राज्य सरकार ने बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार प्रमुखता से प्रस्तुत किया है। इसके लिए फैम ट्रिप (फैमिलियराइजेशन ट्रिप), ट्रैवल ट्रेड सहभागिता, बौद्ध उत्सवों के आयोजन तथा पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष बल दिया गया।

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अमृत अभिजात ने आगे कहा कि अक्टूबर 2025 में लखनऊ को यूनेस्को की 'क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी' की मान्यता मिलना भी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रमाण है। अब सारनाथ को मिली विश्व धरोहर की मान्यता विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने, उनके प्रवास अवधि को विस्तार तथा उन्हें उत्तर प्रदेश के व्यापक बौद्ध सर्किट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एसटीएफ और बागपत पुलिस की मुठभेड़ में 50 हजार का इनामी बदमाश विपुल उर्फ खूनी ढेर

Criminal with Rs 50000 bounty killed in encounter with STF and Baghpat police

उत्तर प्रदेश एसटीएफ फील्ड यूनिट मेरठ और बागपत पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में शनिवार को सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के दौरान 50 हजार रुपए का इनामी बदमाश विपुल उर्फ खूनी पुत्र नेत्रपाल सिंह, निवासी ग्राम भभीसा, थाना कांधला, जनपद शामली घायल हो गया। पुलिस उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक मुठभेड़ स्थल से दो पिस्टल (.32 बोर), भारी मात्रा में खोखा एवं कारतूस तथा एक अपाचे मोटरसाइकिल बरामद की गई है।

 

पुलिस का दावा है कि विपुल उर्फ खूनी शातिर अपराधी था और कुख्यात सुशील मूंछ गैंग का सक्रिय सदस्य एवं शार्प शूटर था। उसके विरुद्ध हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, गैंगस्टर, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, रंगदारी समेत तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे शामली, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, दिल्ली और अन्य स्थानों के विभिन्न थानों में दर्ज थे।

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पुलिस के अनुसार वर्ष 2014 में उसने एलम क्षेत्र में चर्चित बदमाश भीम भभीसा की हत्या के मामले में भी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वर्ष 2017 में सहारनपुर जनपद के मानपुर गांव में वाहन लूट के बाद पुलिस को सूचना देने के संदेह में तत्कालीन महिला प्रधान की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था।

 

पुलिस के अनुसार 14 जुलाई 2014 को ग्राम भभीसा निवासी पवन की हत्या के मामले (थाना कांधला) में भी वह आरोपी था। यह मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था। पुलिस का कहना है कि जमानत पर बाहर आने के बाद वह अदालत में पेश नहीं हो रहा था और उसके खिलाफ वारंट जारी थे।

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पुलिस के अनुसार हाल ही में उसने इसी मुकदमे के वादी अशोक पुत्र सुखबीर से मुकदमे में हुए खर्च की रकम मांगते हुए जान से मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में थाना कांधला में वर्ष 2026 में बीएनएस की धारा 308(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले में शामली पुलिस द्वारा उस पर 50000 रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

 

पुलिस के मुताबिक विपुल उर्फ खूनी के विरुद्ध वर्ष 2005 से 2026 तक हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, गैंगस्टर, रंगदारी, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट सहित कुल 38 आपराधिक मुकदमे विभिन्न जनपदों में दर्ज थे। पुलिस का कहना है कि उसकी मृत्यु के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक कुख्यात अपराधी का अध्याय समाप्त हुआ है। मुठभेड़ के संबंध में पुलिस द्वारा अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।