WhatsApp ने बिना चेतावनी हजारों अकाउंट किए ब्लॉक, Meta ने बताया क्यों हुई कार्रवाई

whatsapp blocked thousands account for 24 hours

भारत के हजारों व्हाट्सऐप यूजर्स को सोमवार रात उस समय बड़ा झटका लगा जब हजारों अकाउंट्स ब्लॉक हो गए। दरअसल मेटा के स्वामित्व वाले इस लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने बिना किसी पूर्व चेतावनी हजारों व्हाट्सऐप अकाउंट्स को 24 घंटे के लिए 'अंडर रिव्यू' में डाल दिया है। इससे सब हैरान रह गए। इसके कारण प्रभावित लोग न तो किसी को मैसेज भेज पा रहे थे और न ही कॉल कर पा रहे थे। ALSO READ: E20 पर AAP का बड़ा प्रदर्शन, केजरीवाल 100 समर्थकों के साथ पीएम आवास की ओर करेंगे मार्च

 

अचानक हुई इस कार्रवाई से दैनिक कामकाज और बिजनेस के लिए व्हाट्सऐप पर निर्भर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह समस्या रात 8 बजे के आसपास शुरू हुई थी, जो देर रात तक चलती रही।

 

इससे सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा कि जब उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया तो उनके अकाउंट्स रिव्यू में क्यों डाल दिए गए?
 

व्हाट्सऐप ने भेजा यह मैसेज

ऐप ब्लॉक होने के बाद जैसे ही यूजर्स ने व्हाट्सऐप ओपन किया, उन्हें स्क्रीन पर एक नोटिस दिखाई दिया। इस पर लिखा था 'Account in review Your account activity and device info is being checked' इस संदेश में साफ लिखा था कि यूजर्स की एक्टिविटी और डिवाइस की जानकारी जांची जा रही है और इसका परिणाम आमतौर पर 24 घंटे के भीतर नोटिफाई किया जाएगा।

 

Meta ने दी सफाई

व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि हम अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखने और इसका दुरुपयोग रोकने के लिए लगातार काम करते हैं। इसके लिए सुरक्षा प्रणालियों के तहत अकाउंट्स बैन किए जाते हैं। कई बार हमारे ऑटोमेटेड सिस्टम से भी गलती हो जाती है। अगर ऐसा हुआ है, तो हम इसे जल्द से जल्द ठीक करने और लोगों को दोबारा चैटिंग से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

ओडिशा में परीक्षा के दौरान व्हाट्सऐप पर वायरल हुआ PG मेडिकल का पेपर, यूनिवर्सिटी ने दिए आंतरिक जांच के आदेश

Odisha Medical exam Paper Leak

Odisha Medical Exam Paper Leak: ओडिशा में पोस्टग्रेजुएट (PG) मेडिकल परीक्षा के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है। जनरल सर्जरी थ्योरी परीक्षा का प्रश्नपत्र हल किए जाने के समय ही व्हाट्सऐप पर लीक होने का आरोप लगा है। मामला सामने आते ही ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (OUHS) ने उच्चस्तरीय आंतरिक जांच शुरू कर दी है और बाकी परीक्षाओं के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

 

दरअसल, ओडिशा में स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। 2023-26 बैच के पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रों की 'जनरल सर्जरी थ्योरी' परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र कथित तौर पर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया। शुरुआती जांच के अनुसार, यह घटना बेरहामपुर स्थित एमकेसीजी (MKCG) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से जुड़ी मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि सोमवार को परीक्षा हॉल में छात्रों को प्रश्नपत्र बांटे जाने के महज कुछ ही मिनटों बाद किसी व्यक्ति ने उसकी तस्वीरें खींचकर व्हाट्सऐप पर वायरल कर दीं।

 

इस बात का खुलासा तब हुआ जब भुवनेश्वर के एक निजी मेडिकल कॉलेज के छात्र ने अधिकारियों को इसकी सूचना दी। उस छात्र के पास कथित तौर पर वायरल प्रश्नपत्र की तस्वीरें मौजूद थीं। ALSO READ: NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

यूनिवर्सिटी की आपात बैठक

मामले की गंभीरता को देखते हुए OUHS के कुलपति मानस रंजन साहू ने उन सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ वर्चुअल बैठक की, जहाँ ये परीक्षाएं आयोजित की जा रही थीं। एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य हरेकृष्ण दलई ने बताया कि कुलपति ने सभी संस्थानों को बची हुई परीक्षाओं के लिए सुरक्षा इंतजाम सख्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं। ALSO READ: NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारियों पर कार्रवाई

इसे पेपर लीक नहीं कह सकते

हालांकि, प्राचार्य हरेकृष्ण दलई का मानना है कि इसे तकनीकी रूप से 'पेपर लीक' नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया, अगर प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचने से पहले बाहर आ जाता, तो हम इसे लीक कहते। लेकिन इस मामले में प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने और छात्रों के हाथों में पहुंचने के बाद हॉल से बाहर गया है।

बची हुई परीक्षाओं पर नजर

PG थ्योरी परीक्षाओं का यह दौर 21 जुलाई से शुरू हुआ था। आगामी परीक्षाएं 1 अगस्त और 5 अगस्त को आयोजित होनी हैं। अकेले बेरहामपुर के एमकेसीजी कॉलेज में ही 150 से अधिक डॉक्टर-छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन अब किसी भी तरह की चूक के मूड में नहीं है।

सख्त कानून के बीच उठा मामला

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब संसद ने हाल ही में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को रोकने वाले कानून में संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है। इस नए और सख्त कानून में परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।

Boomer को लेकर शशि थरूर ने अपने बेटे को दिया ऐसा ज्ञान कि मामला वायरल हो गया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपने मजाकिया अंदाज से लोगों का ध्यान खींचा है। इस बार उन्होंने अपने बेटे ईशान थरूर की सोशल मीडिया पोस्ट पर हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए। उन्होंने जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू की उस राय का समर्थन किया, जिसमें छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई थी।

ईशान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं मानता हूं कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए। लेकिन उससे पहले भारत में व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वाले ‘बूमर्स’ पर रोक लगाने की जरूरत है।” इस पर शशि थरूर ने मजेदार अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां पश्चिमी देशों से अलग हैं। इसलिए यहां लगभग हर पीढ़ी को “बेबी बूमर” कहा जा सकता है। उन्होंने मजाक में अपने बेटे से कहा कि इस हिसाब से उसकी पीढ़ी भी इससे अलग नहीं है।

क्या है ‘बूमर’

बूमर’ शब्द, ‘बेबी बूमर’ का छोटा रूप है। आम तौर पर इसका इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जिनका जन्म दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1964 के बीच हुआ था। हालांकि, भारत में यह शब्द अक्सर ऐसे बुजुर्गों या पुराने विचारों वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो बिना मांगे सलाह देते हैं या पारंपरिक सोच रखते हैं। जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात उस समय कही थी, जब वह फ्रांस की संसद में पारित एक विधेयक पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। इस विधेयक में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया था।

फ्रांस के संसद ने दी मंजूरी

इस सप्ताह फ्रांस की संसद के दोनों सदनों ने इस कानून को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया। नए कानून के तहत स्कूल परिसर में छात्रों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे छोटे बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से बाहर निकलकर नई चीजें सीखने और वास्तविक दुनिया से जुड़ने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा, “भारत में भी छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगनी चाहिए। मेरा मानना है कि बच्चों को मोबाइल पर समय बिताने के बजाय किताबें पढ़नी चाहिए, धूप में बाहर खेलना चाहिए और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए।” हालांकि, वेम्बू के इस सुझाव पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने उनके विचार का समर्थन किया, जबकि कई लोगों का कहना था कि सरकार को लोगों की निजी जिंदगी और उनके फैसलों में जरूरत से ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए।

Instagram Ad Row: क्या भारत में बैन होगा इंस्टाग्राम? सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, जानिए क्या है विवाद

Instagram Ad Row: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘पेड’ विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े वीडियो और अन्य विवादित कंटेंट को लेकर मेटा (Meta) को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने यह नोटिस शनिवार 4 जुलाई की शाम को जारी किया। इस नोटिस में दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि मेटा, इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट, जो बच्चों के यौन शोषण संबंधी कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। साथ ही कंपनी से 7 दिनों के भीतर डिटेल्स जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को उन सभी विज्ञापनों और सामाग्रियों को हटाने का आदेश दिया है जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार को बढ़ावा देते हैं या उन तक पहुंच आसान बनाते हैं।”

क्या है आरोप?

यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश के एक दिन बाद उठाया गया है। इसमें उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से मेटा को तलब करने को कहा था। यह मामला इंस्टाग्राम विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने का आरोप है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा को भेजे नोटिस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के विज्ञापनों के आरोपों पर स्पष्टीकरण और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

7 दिन में देना होगा जवाब

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। कैलिफोर्निया मुख्यालय वाली दिग्गज टेक कंपनी मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व है। मंत्रालय का यह ताजा कदम BBC की एक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा का ‘रिकमेंडेशन एल्गोरिदम’ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले वीडियो को बढ़ावा दे रहा था। इससे सुरक्षा उपायों में गंभीर कमियां उजागर हुईं।

BBC की जांच में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन भी देखे गए। जबकि मेटा की विज्ञापन नीतियां स्पष्ट रूप से अश्लील कंटेंट पर रोक लगाती हैं। यह आरोप है कि इंस्टाग्राम ने ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले ‘पेड’ विज्ञापन दिखाए। ये यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसा कंटेंट बेचा जा रहा था।

सरकार क्या चाहती है?

मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, सरकार यह जानना चाहेगी कि ऐसे विज्ञापनों को कैसे मंजूरी दी गई आरोपों के सामने आने के बाद मेटा ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साथ ही कंपनी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वह क्या सुरक्षा उपाय करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने कहा कि अगर आरोप बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले ‘पेड’ विज्ञापनों से संबंधित हैं, तो एक मध्यस्थ होने के बावजूद मेटा किसी तीसरे पक्ष के कंटेंट के तर्क या बचाव का सहारा नहीं ले सकती।

सूत्रों में से एक ने कहा, “अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें उन विज्ञापनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा जिनसे प्लेटफॉर्म को रेवेन्यू मिलता है।” उसने कहा कि जहां मंत्रालय मामले के तकनीकी और नियामक पहलुओं की समीक्षा करेगा। वहीं, अगर किसी एजेंसी, प्राधिकरण या व्यक्ति को लगता है कि कानून के तहत अपराध हुआ है, तो वे विज्ञापनदाता या प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकार ने ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई

भारत सरकार ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट के मामले में ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई है। इसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट का तुरंत पता लगाने, उसे हटाने और उसकी रिपोर्ट करने के साथ-साथ डिजिटल परिवेश में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत उपाय करने की जरूरत है। सरकार ने समय-समय पर उन वेबसाइट को भी ब्लॉक किया है जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट होते हैं। यह कार्रवाई इंटरपोल से मिली लिस्ट के आधार पर की गई है, जो भारत की नेशनल नोडल एजेंसी CBI को मिलती है।

Meta पर बढ़ा दबाव

सरकार के इस नोटिस के बाद Meta पर अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। यदि कंपनी तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देती या निर्देशों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है CSEAM?

Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) वह अवैध कंटेंट होता है। इनमें बच्चों के यौन शोषण या उत्पीड़न से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट शामिल होते हैं। भारत में ऐसे कंटेंट का निर्माण, प्रसार, प्रचार या शेयर करना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि सभी डिजिटल कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं। ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मेटा को दूसरी बार भेजा गया है नोटिस

इस सप्ताह दूसरी बार मेटा जांच के दायरे में आया है। इससे पहले बुधवार को भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी करके व्हाट्सऐप पर प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचर’ के बारे में सवाल पूछा था। सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘फिशिंग’ डिजिटल अरेस्ट घोटाला और किसी और का रूप धारण किए जाने वाले हमले काफी बढ़ सकते हैं।

ये भी पढ़ें- Khamenei Funeral News: ‘मुझे लगा था लोग उनसे नफरत करते हैं…’; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ देख ट्रंप के उड़े होश

सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को रोक दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप ‘यूजरनेम फीचर’ को पेश करने में देरी करेगा।

Ketan Agarwal: हत्या से पहले गूगल पर क्या खोजा गया? पुणे केस में पुलिस का चौंकाने वाला दावा!

पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले में जांच ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि यह घटना अचानक हुई नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। आरोप है कि मृतक की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने वारदात से पहले इंटरनेट पर हत्या के तरीकों से जुड़ी जानकारी भी खोजी थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड्स से यह संकेत मिलता है कि दोनों के बीच लंबे समय से लगातार संपर्क बना हुआ था।

इस मामले ने स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला दी है और लोग इस रिश्ते, विश्वासघात और कथित साजिश को लेकर हैरान हैं। फिलहाल पुलिस सभी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की गहराई से जांच कर रही है और मामले की परतें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।

लोणावला के लोहेगढ़ फोर्ट पर रची गई ‘मौत की पटकथा’

जांच के अनुसार, 18 जून को लोहेगढ़ फोर्ट पर केतन को कथित तौर पर धक्का देकर गहरी खाई में गिराया गया। पुलिस का कहना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पहले से तैयार किया गया एक सुनियोजित प्लान था, जिसे फोर्ट की सुनसान लोकेशन पर अंजाम दिया गया।

डिजिटल ट्रेल से खुला राज

पुलिस जांच में सामने आया कि सिया और चेतन के बीच महीनों तक बेहद गहन संपर्क था। जनवरी से जून के बीच दोनों के बीच 2004 से अधिक कॉल्स रिकॉर्ड हुए, जिनमें घंटों लंबी बातचीत शामिल थी। व्हाट्सऐप और फेसटाइम कॉल्स ने उनके रिश्ते और कथित साजिश की परतें खोल दीं।

हत्या से पहले की तैयारी

जांचकर्ताओं के मुताबिक, दोनों ने घटना से पहले हत्या के तरीकों की ऑनलाइन खोज की थी। बताया गया कि वारदात वाले दिन दोनों पहले एक कैफे में मिले और फिर लोहेगढ़ फोर्ट के लिए रवाना हुए, जहां कथित योजना को अंतिम रूप दिया गया।

संदेह बढ़ाने वाली हरकतें

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि चेतन ने 18 जून को अपना फोन कई घंटों तक बंद रखा और लोकेशन से बचने के लिए कर्मचारी का मोबाइल इस्तेमाल किया। इससे जांच एजेंसियों को शक और गहरा हो गया।

CCTV ने खोला बड़ा सुराग

फोर्ट इलाके की CCTV फुटेज में एक हुडी पहना व्यक्ति केतन और सिया का पीछा करता नजर आया। सोशल मीडिया और तस्वीरों के मिलान के बाद पुलिस ने इस व्यक्ति की पहचान चेतन चौधरी के रूप में की।

रिश्ता, असमंजस और परिवार की मर्यादा

पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन के बीच रिश्ते थे, जबकि सिया की सगाई केतन से हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि शादी से बचने और रिश्ते को छिपाने की वजह से यह कथित साजिश रची गई। हालांकि, सिया परिवार की बदनामी के डर से भागने के पक्ष में नहीं थी।

गिरफ्तारी और आगे की जांच जारी

पुलिस ने डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड्स और CCTV फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच अभी जारी है और और भी खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

न IIT, न MIT… फिर भी 19 साल में करोड़ों की कमाई! जानिए आयुष सिंह की पूरी कहानी

जुकरबर्क की Meta का CRED में ₹8550 करोड़ निवेश, फाउंडर कुणाल शाह को बनाएगी WhatsApp का नया ग्लोबल CEO

Meta Investment In CRED: फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta ने भारतीय फिनटेक स्टार्टअप CRED में करीब 90 करोड़ डॉलर (लगभग ₹8,550 करोड़) निवेश करने का ऐलान किया है। दोनों कंपनियों ने 22 जून को इस डील की घोषणा की। इससे पहले Moneycontrol ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि Meta, CRED में 4 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर निवेश को लेकर बातचीत कर रही है।

WhatsApp की कमान संभालेंगे कुणाल शाह

इस निवेश के साथ CRED के फाउंडर कुणाल शाह Meta में शामिल होंगे और वह WhatsApp के नए ग्लोबल CEO बनेंगे। कुणाल मौजूदा विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने सात साल तक WhatsApp को लीड करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कुणाल शाह ने CRED को भारत की सबसे महत्वपूर्ण टेक कंपनियों में से एक बनाया है। उनके पास बिजनेस बनाने का अनुभव और वैश्विक नजरिया है। यह दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

जुकरबर्ग ने विल कैथकार्ट की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कैथकार्ट के नेतृत्व में WhatsApp 3 अरब से ज्यादा यूजर्स तक पहुंचा और उन्होंने यूजर्स की प्राइवेसी को प्राथमिकता दी। अब वह Meta में नई भूमिका संभालेंगे और नए प्रोडक्ट्स पर काम करेंगे।

CRED की कमान किसके हाथ में होगी?

कुणाल शाह के Meta में जाने के बाद CRED के ऑपरेशनल कामकाज की जिम्मेदारी मितेन संपत संभालेंगे। वह फिलहाल कंपनी में दूसरे सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव हैं।

मितेन संपत ने कहा कि 1.7 करोड़ से ज्यादा भरोसेमंद भारतीय CRED का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक कंपनी के पास मजबूत टीम, स्पष्ट विजन और लंबी अवधि की रणनीति है। उन्होंने कहा कि CRED के अगले चरण का लक्ष्य कंपनी को पब्लिक मार्केट तक ले जाना है।

कुणाल शाह ने क्या कहा?

कुणाल शाह ने कहा कि उन्होंने 2018 में CRED की शुरुआत इस भरोसे के साथ की थी कि अच्छी क्रेडिट स्कोर को सम्मान मिलना चाहिए। आठ साल से भी कम समय में कंपनी लाखों सदस्यों, लगभग ₹3,200 करोड़ रेवेन्यू, मुनाफे में कारोबार, कई लाइसेंस और मजबूत ब्रांड के साथ एक नई कैटेगरी बनाने में सफल रही है।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पूंजी और प्रतिभाशाली टीम के साथ CRED आने वाले दशकों तक एक मजबूत संस्था बन सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि टीम भविष्य में भी नए मानक स्थापित करेगी।

भारतीय स्टार्टअप जगत का बड़ा नाम हैं कुणाल शाह

यह दूसरा स्टार्टअप है जिससे कुणाल शाह बाहर निकल रहे हैं। इससे पहले उन्होंने डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म Freecharge की स्थापना की थी, जिसे बाद में बेच दिया गया था।

वर्षों के दौरान वह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए। CRED बनाने के अलावा उन्होंने सैकड़ों शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश किया है और देश के सबसे सक्रिय एंजेल इनवेस्टर्स में उनकी गिनती होती है।

1 अरब डॉलर जुटा चुकी है CRED

2018 में शुरू हुई CRED अब तक करीब 1 अरब डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। कंपनी में Tiger Global, Ribbit Capital, Peak XV Partners, Greenoaks Capital और DST Global जैसे बड़े निवेशकों ने निवेश किया है।

Peak XV Partners के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि CRED का सफर काफी शानदार रहा है। उनके मुताबिक कंपनी ने एक नई कैटेगरी बनाई, लाखों सक्रिय यूजर्स जोड़े और मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में CRED और मजबूत होकर उभरेगी।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर