Trump का बिजनेस आइडिया! हर महीने ₹9500000 के खर्च में Truth Social पर दिखेगी सबसे पहले पोस्ट, सांसदों ने की शिकायत

Trump Effect: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी ने एक नई पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत सब्सक्राइबर्स को ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर आने वाली पोस्ट्स, खासतौर से हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स की पोस्ट्स, आम यूजर्स से पहले देखने की सुविधा मिलेगी। खास बात ये है कि इस सर्विस के लिए सब्सक्राइबर्स को हर महीने $1 लाख यानी करीब ₹95 लाख रुपये देने होंगे। हालांकि इसने ट्रंप की राजनीतिक भूमिका और उनके कारोबारी हितों के बीच कनफ्लिक्ट ऑफ इंटेरेस्ट यानी हितों के टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप मीडिया और एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (TMTG) ने शनिवार को Truth API नाम से सब्सक्रिप्शन-बेस्ड सर्विस शुरू की। इसके तुरंत बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने अमेरिकी बाजार नियामक एसईसी से इसकी जांच करने की मांग कर दी।

क्या है पेड सर्विस की खास बात

ट्रंप मीडिया ने ट्रुथ एपीआई नाम से सब्सक्रिप्शन सर्विस पेश किया है। कंपनी के अंतरिम सीईओ केविन मैकगर्न (Kevin McGurn) का कहना है कि इसके जरिए बिजनेसेज को मार्केट पर असर डालने वाली अहम जानकारियां आम लोगों से पहले तुरंत ही मिल जाएंगी। इसके तहत ट्रेडिंग फर्म्स और अन्य सब्सक्राइबर्स को आम यूजर्स से पहले जानकारी मिल जाएगी और इसके लिए उन्हें हर महीने $1 लाख तक की फीस देनी होगी।

क्यों हो रहा विरोध

अब इसे लेकर विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सर्विसेज होने के बावजूद ट्रंप के चलते ट्रुथ सोशल के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। ट्रंप ट्रुथ सोशल के सबसे प्रभावशाली यूजर होने के साथ-साथ इसकी पैरेंट कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर भी हैं। वह अकसर इसी के जरिए अहम सरकारी नीतियों, टैरिफ, आर्थिक फैसलों और अन्य बड़े मुद्दों पर ऐलान करते हैं जिसका मार्केट पर सीधा असर पड़ता है। अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर कुछ लोगों को ट्रंप की पोस्ट पहले देखने को मिल जाए तो बाकी लोगों की तुलना में उन्हें अनुचित बढ़त मिल जाएगी। उनके बयानों पर मार्केट में काफी तेज मूवमेंट दिखता है।

क्या कहना है Trump Media का

अमेरिकी सांसदों ने एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने एसईसी के चेयरमैन पॉल एटकिन्स (Paul Atkins) को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि अगर बाजार को प्रभावित करने वाली जानकारी कुछ चुनिंदा कंपनियों को पहले मिलती है, तो क्या यह बाजार के नियमों का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने इसे राष्ट्रपति के पद का व्यक्तिगत लाभ लेने के लिए गंभीर दुरुपयोग बताया। वहीं ट्रंप मीडिया का कहना है कि बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सर्विसेज की तरह ट्रुथ एपीआई एक कमर्शियल डेटा प्रोडक्ट की तरह है। बता दें कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप मीडिया के शेयरों में 70% से अधिक की गिरावट आ चुकी है और इससे कंपनी के शेयरहोल्डर्स की दौलत में अरबों डॉलर की कमी आई है।

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CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता ने बेटे की विदेश में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की

CJP protest ends Abhijeet Dipke

कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति और उनके बेटे की विदेश में हुई उच्च शिक्षा के खर्च को लेकर सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की है। RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से भी वित्तीय पहलुओं की जांच करने का आग्रह किया है।

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अमित तिवारी ने सवाल उठाया है कि महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी भगवानराव दिपके ने अपने बेटे की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस तरह वहन किया। उन्होंने भगवानराव दिपके की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग करते हुए उनकी सरकारी सेवा और सेवानिवृत्त कर्मचारी होने की स्थिति का हवाला दिया है।

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कपिल सिब्बल के 1 करोड़ रुपए के कानूनी सहायता फंड पर भी सवाल

 

RTI कार्यकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की ओर से CJP प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित 1 करोड़ रुपए के कानूनी रक्षा कोष को लेकर भी निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से जांच की मांग की है।

 

सिब्बल ने सोमवार को NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हुए आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए CJP की ओर से बनाए गए फंड में 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। तिवारी ने इस फंड की प्रकृति और इसके वित्तीय स्रोतों की भी जांच किए जाने की मांग की है।

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CJP के राजनीतिक दल के रूप में संचालन पर भी सवाल

 

अमित तिवारी ने कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि CJP एक अपंजीकृत संस्था है, लेकिन राजनीतिक दल के नाम से काम कर रही है। तिवारी के मुताबिक, यदि CJP के लिए 1 करोड़ रुपए का कानूनी रक्षा कोष घोषित किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या यह संगठन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि संस्था पंजीकृत नहीं है, तो राजनीतिक दल के नाम से उसका संचालन और धन का संग्रह या प्राप्ति जांच के दायरे में आ सकती है।

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GST को लेकर भी जांच की मांग

RTI कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) का भी रुख किया है। उन्होंने बोर्ड से यह जांचने का अनुरोध किया है कि सिब्बल की प्रस्तावित 1 करोड़ रुपए की राशि पर GST लागू होता है या नहीं। फिलहाल, इन सभी मुद्दों पर RTI कार्यकर्ता की ओर से जांच की मांग की गई है। उनके आरोपों और सवालों के आधार पर संबंधित प्राधिकरणों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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कौन हैं अमित तिवारी

अमित तिवारी गुजरात के सूरत जिले के रहने वाले हैं। वे एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। अभिजीत दिपके और उनके पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के बाद अमित तिवारी सुर्खियों में हैं। यह पहला मामला है जब अमित तिवारी किसी तरह की सुर्खियों में आए हो। इससे पहले उन्हें कम लोग ही जानते थे।

Iran-US War Update: ईरान को धमकाते हुए क्यों पीछे हटे ट्रंप? फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, सैन्य कार्रवाई रोकी

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।

इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।

इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।

अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।

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हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।

US-Iran War : ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप तो तेहरान ने कसा तंज, रुबियो बोले- अब चुकानी होगी ‘बहुत बड़ी कीमत’; इराक में ड्रोन अटैक से आग

US Iran peace deal missed track Photo  : AI Generated

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने के फैसले को लेकर तेहरान की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने ट्रंप के फैसले का मजाक उड़ाते हुए इसे अमेरिकी रुख में बदलाव और पीछे हटने के तौर पर पेश किया है।

 

ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, IRIB ने दावा किया कि तेहरान और क्षेत्रीय ताकतों के दबाव के कारण ट्रंप को अपने रुख से पीछे हटना पड़ा। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे वॉशिंगटन की आक्रामक सैन्य बयानबाजी से पीछे हटने के रूप में बताया है।

 

ईरान को ‘बहुत बड़ी कीमत’ चुकानी होगी: मार्को रुबियो

 

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर तेहरान अपनी क्रांति को दूसरे देशों तक फैलाने की कोशिश करता है, तो उसे “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी होगी। फॉक्स न्यूज से बातचीत में रुबियो ने कहा कि ईरान के व्यवहार में बदलाव तभी संभव है, जब उसके कार्यों की कीमत इतनी बढ़ा दी जाए कि वह उसे वहन न कर सके। उन्होंने कहा कि ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने और उसकी नीतियों में बदलाव के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई के परिणामों को बढ़ाना जरूरी है।

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इराक में ड्रोन हमले के बाद लगी भीषण आग

 

इस बीच, इराक के सुलेमानियाह में पेशमर्गा के 70वीं ब्रिगेड मुख्यालय के पास ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। इराकी मीडिया के अनुसार, ड्रोन को रोक लिया गया था, लेकिन उसके जलते हुए मलबे के कारण सैन्य ठिकाने के पास आग भड़क गई।

 

अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, अल-मायादीन ने इसे ईरान समर्थित समूहों से जोड़कर बताया है। वहीं, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने इस स्थान को “ईरान विरोधी आतंकवादियों” का ठिकाना बताया है।

 

ट्रंप बोले- हमला करने के लिए अमेरिका पूरी तरह तैयार था

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पर कार्रवाई रोकने से पहले अमेरिका सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “पूरी तरह तैयार” था और उसके पास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई सैन्य ताकत के साथ कार्रवाई करने की क्षमता थी।

 

ट्रंप के मुताबिक, ईरान और मध्य-पूर्व के कुछ अन्य देशों ने बातचीत के लिए समय मांगा था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तत्काल दोबारा खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल है।

 

ट्रंप ने यह भी कहा कि इजरायल ने सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने के फैसले का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि हमला अभी के लिए रद्द किया गया है और आगे की कार्रवाई बातचीत में तेजी से होने वाली प्रगति पर निर्भर करेगी।

ईरान का बड़ी चेतावनी, अमेरिका या इजरायल ने हमला किया तो मचेगी तबाही, शेयर किया टारगेट लिस्ट

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इन खबरों के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी योजना तैयार कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अमेरिका या इज़राइल ईरान पर नया हमला करते हैं, तो ईरान मध्य पूर्व में मौजूद महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है।

ईरान की बड़ी चेतावनी

यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस (Axios) को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की पूरी तैयारी

ईरान ने कथित तौर पर ऐसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों की सूची तैयार की है, जिन्हें अमेरिका या इज़राइल के नए हमले की स्थिति में निशाना बनाया जा सकता है। तस्नीम न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य मध्य पूर्व में तेल और गैस से जुड़े अहम ढांचे को प्रभावित करना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संभावित लक्ष्यों में सऊदी अरब का घावर तेल क्षेत्र भी शामिल है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में गिना जाता है। इसके अलावा, अबकैक और खुरैस की तेल सुविधाओं का भी नाम लिया गया है, जहां हर दिन 70 लाख बैरल से ज्यादा तेल का उत्पादन होता है।

UAE ने इन ठिकानों का किया जिक्र

संयुक्त अरब अमीरात में भी कुछ प्रमुख ऊर्जा ठिकानों का जिक्र किया गया है। इनमें ज़कुम तेल क्षेत्र और रुवाइस रिफाइनरी शामिल हैं। बताया गया है कि रुवाइस रिफाइनरी में रोजाना 10 लाख बैरल से अधिक तेल का प्रसंस्करण किया जाता है।तस्नीम न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की तैयार की गई सूची में कतर के नॉर्थ फील्ड और रास लाफान भी शामिल हैं। ये दोनों मिलकर दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) कारोबार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संभावित लक्ष्यों में कुवैत का बुरगन तेल क्षेत्र भी शामिल है, जहां हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता है। इसके अलावा, बहरीन की सिट्रा रिफाइनरी और अल-मिहाज क्षेत्र का भी जिक्र किया गया है। वहीं, इज़राइल के लेविआथन और तामार गैस क्षेत्रों को भी संभावित निशानों की सूची में शामिल बताया गया है।

ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए उसने पूरी तैयारी कर ली है। तस्नीम न्यूज के मुताबिक, ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “अमेरिका की किसी भी कार्रवाई का जवाब देने के लिए हमारे पास व्यापक योजना तैयार है।” अधिकारी ने 40 दिन तक चले संघर्ष का भी जिक्र किया। उनका दावा था कि उस दौरान ईरान ने कतर की एक प्रमुख गैस रिफाइनरी को निशाना बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस मामले को लेकर टिप्पणी की थी। ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी? ट्रंप की खुली चेतावनी, बोले- बहुत जोरदार वार करेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उस पर पहले से भी ज्यादा बड़े हमले किए जा सकते हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म करने के लिए बातचीत भी चल रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला इस सप्ताह के अंत में हो सकती है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने सेना को ईरान पर नए हमले की तैयारी करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना है, ताकि वह युद्धविराम की शर्तों को स्वीकार करे।

ट्रंप ने किया ये ऐलान 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान पर पहले से भी ज्यादा बड़ा हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे और एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब वे इसे और सहन नहीं कर सकते।” ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य जीत हासिल करना है। ट्रंप ने ईरान पर भरोसा न होने की बात भी कही। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारी कई बार अपने वादे तोड़ चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत की बात तो करता है, लेकिन बाद में अपनी बात से पीछे हट जाता है। उनके अनुसार, ईरान के अधिकारी सही जानकारी नहीं देते और बार-बार अपने बयान बदलते हैं।

अमेरिका और इजरायल करेंगे हमला

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल मिलकर एक ऐसे हमले की योजना बना रहे हैं, जिसे अब तक के सबसे बड़े और सबसे भीषण बमबारी अभियानों में से एक माना जा रहा है। अगर इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो कई हफ्तों बाद ईरान के खिलाफ कार्रवाई में इजरायल पहली बार सीधे तौर पर शामिल होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि इस हमले का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाज़ारों पर पड़ सकता है। इसी वजह से बाजार खुलने से पहले हमले की योजना को अंतिम रूप देने की तैयारी की जा रही थी। बताया गया है कि इज़रायल को इस योजना की जानकारी दे दी गई है और वह अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमले को लेकर अंतिम मंजूरी नहीं दी है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला करते हैं, तो उसका जवाब देने के लिए तेहरान ने पहले से ही पूरी तैयारी कर रखी है। अधिकारी ने दावा किया कि ईरान के पास ऐसे किसी भी हमले का जवाब देने के लिए एक व्यापक योजना मौजूद है। ईरानी अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया में संभावित हमलों को लेकर चल रही खबरों की भी आलोचना की। उन्होंने इन रिपोर्टों को “पागलपन” बताते हुए कहा कि इस तरह की खबरें तनाव बढ़ाने का काम कर रही हैं।

हमास हथियार छोड़ने को राजी, अब तक क्या पता चला है?

hamas ready for disarmament

निखिल रंजन

हमास ने शुक्रवार को इजराइल के साथ युद्ध खत्म करने पर सहमति की घोषणा की है जिसमें उसके हथियार छोड़ने और गाजा पट्टी से इस्राएली सेनाओं की वापसी जैसे मुद्दे हैं। समझौते का मसौदा अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है, ना ही इजराइल की तरफ से कोई बयान आया है। इस डील के बारे में अब तक क्या पता चला है? ALSO READ: क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

 

हमास के साथ समझौते में क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हमास के “पूरी तरह हथियार छोड़ने” की घोषणा की है और इसे गाजा में नई फलीस्तीनी सरकार की तरफ अहम कदम बताया है। ट्रंप का कहना है “हथियार छोड़ना पूरा होने” होने के बाद इजराइली सेना गाजा से निकल जाएगी।

 

हमास के अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा है कि गाजा का प्रशासन संभालने के लिए ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की बनाई एक कमेटी इस्लामी आंदोलन के हथियारों को जमा करने की कार्रवाई को पूरा कराएगी। हमास ने उम्मीद जताई है कि मध्यस्थ और बोर्ड ऑफ पीस यह सुनिश्चित करेंगे की इस्राएल समझौते की शर्तों को माने , जिसमें इजराइल का गाजा से “धीरे धीरे बाहर निकलना” शामिल है।

 

हमास के वार्ताकारों की टीम में शामिल गाजी हमाद ने कहा है कि आंदोलन, “गाजा पट्टी में हमारे लोगों को मारे जाने और निर्वासन से बचाने के लिए छूट दे रहा है।” हमाद ने यह भी कहा है, “समझौते में इस बात के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं कि इजराइल अपनी प्रतिबद्धता पूरी करे। अगर इजराइल ने समझौते का पालन नहीं किया तो हम भी नहीं करेंगे।”

 

एक राजनयिक सूत्र ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि डील की घोषणा होने से पहले, “सारी सुरंगों, हथियारों के डिपो और हथियार उत्पादन के केंद्रों को खत्म करने की प्रक्रिया” की योजना बनाई गई है। ALSO READ: फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

 

समझौते को लागू कौन कराएगा

बोर्ड ऑफ पीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डाले एक पोस्ट में इस बात की पुष्टि की है कि हमास, “गाजा सीजफायर के अगले चरणों को लागू करने के विस्तृत रोडमैप पर सहमत हो गया है।”

 

संगठन की तरफ से कहा गया है, “हमारा ध्यान अब इसे लागू करने पर है।” इसके साथ ही पोस्ट में यह भी लिखा है कि ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की बनाई नेशनल कमेटी फॉर एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (एनसीएजी), “जल्दी ही पूर्ण अधिकार के लिए चरणों में बंटी प्रक्रिया को शुरू करेगी।”

 

ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स, “गाजा को उसके निवासियों ओर पड़ोसियों के लिए सुरक्षित बनाने पर फलीस्तीन की नई पुलिस के साथ काम करेगी।” ALSO READ: नेपाल: बालेन शाह के खिलाफ जेन-जी में क्यों है उबाल

 

गाजा में फिलहाल क्या स्थिति है?

2025 के अक्टूबर में इजराइल और हमास के बीच संघर्षविराम हुआ था जो अब भी कायम है, हालांकि इससे गाजा में हिंसा नहीं रुकी है। युद्ध को खत्म करने  के लिए स्थायी समझौता करने की कोशिशें रुकी हुई हैं।

 

इजराइल लगभग रोज हमले करना जारी रखे हुए है। संघर्षविराम के बाद से यहां के 60 फीसदी इलाके पर इस्राएल का नियंत्रण है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक संघर्षविराम शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 1,214 फलीस्तीनी मारे गए हैं।

 

मंत्रालय के आंकड़ों को संयुक्त राष्ट्र भरोसे के लायक मानता है। गुरुवार को भी इस्राएली हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक इनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।

 

गाजा में दसियों हजार लोग अब भी टेंट में रह रहे हैं। लगभग तीन साल से चल रहे हमलों में फलीस्तीन के बुनियादी ढांचे और इमारतों का ज्यादातर हिस्सा ध्वस्त हो चुका है।

 

हमास ने इजराइल पर बार बार संघर्षविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इनमें हवाई हमले, आम लोगों पर गोलीबारी और कथित येलो लाइन के पार जाना शामिल है। यह एक अनौपाचिक सीमा है जो इस्राएली सैन्य नियंत्रण ओर हमास के नियंत्रण वाले इलाकों को अलग करती है।

 

अब आगे क्या होगा?

इजराइल ने समझौते की घोषण पर अब तक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मिस्र की सरकार से जुड़े अल काहेरा न्यूज ने शुक्रवार सुबह कहा कि काहिरा जल्दी ही गाजा के मध्यस्थों के साथ बैठक करेगा। इसमें अमेरिका, कतर और तुर्की भी शामिल हैं। इसमें गाजा संघर्षविराम योजना के दूसरे चरण पर ध्यान रहेगा।

 

बोर्ड ऑफ पीस में गाजा के लिए प्रतिनिधि निकोलाय म्लादेनोव का कहना है कि शुरुआती समझौते से ज्यादा महत्व इसे लागू करने का है। म्लादेनोव ने एक्स पर लिखा है, “लागू और पुष्टि होने को असली होना होगा। सैन्य वापसी और हथियारों को निष्क्रिय करना एक साथ और समान गति से होना चाहिए।”

 

हमाद ने एएफपी से कहा कि हमास अब समझौते के लागू होने की प्रक्रिया का ब्यौरा मध्यस्थों के साथ साझा करेगा और समझौता पूरा करने के लिए एक टाइमटेबल पर सहमत होगा। हमाद का कहना है, “इस प्रक्रिया में 14 दिन या उससे ज्यादा लगेंगे। हमें हर ब्यौरे पर सहमत होना होगा। कैसे समझौता लागू होगा, कब लागू होगा और इसे लागू करने का तरीका क्या होगा। आने वाले दिनों में यह सब होगा।”

गाजा पर अब किसका होगा शासन? जानिए हमास के हथियार छोड़ने की सहमति के बाद अब क्या बदलेगा

Hamas agrees to phased disarmament in Gaza: गाजा में जारी संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने एक रोडमैप पर सहमति जताई है। इसके तहत वह अपने हथियार डालेगा और गाजा का प्रशासनिक नियंत्रण एक फिलिस्तीनी नागरिक समिति को सौंपेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों के साथ काहिरा में हमास नेताओं की बातचीत के बाद इस कथित ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया है। हालांकि इस रोडमैप के सामने आते ही कई सवाल भी खड़े हुए हैं। सवाल ये उठ रहा है कि अब गाजा पर वास्तविक अधिकार किसका होगा, हथियारों और सुरक्षा पर किसका नियंत्रण रहेगा और गाजा में हुए विध्वंश के बाद इसके पुनर्निर्माण का खर्चा कौन उठाएगी।

इस समझौते में कई शर्तें, पेच और अनसुलझे मुद्दे मौजूद हैं। आइए इसको समझने की कोशिश करते हैं –

1- गाजा का प्रशासन कौन देखेगा?

प्रस्तावित रोडमैप के तहत गाजा के रोजमर्रा के सिविल एडमिनिस्ट्रेशन को संभालने की जिम्मेदारी नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा को दी जाएगी। यह फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स की एक गैर-राजनीतिक समिति होगी। इस समिति में हमास की कोई हिस्सेदारी या भागीदारी नहीं होगी। यह समिति सरकारी सेवाओं, कर्मचारियों के प्रबंधन, वित्त और दूसरे प्रशासनिक काम स्वतंत्रता पूर्वक देखेगी।

2- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और पुनर्निर्माण कौन देखेगा?

गाजा के प्रशासनिक कामकाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर की निगरानी और सुरक्षा से अलग रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाला गाजा बोर्ड ऑफ पीस रणनीति, स्थिरता और पुनर्निर्माण की फंडिंग की निगरानी करेगा। ट्रंप के पास इसके चार्टर के तहत व्यापक कार्यकारी अधिकार हैं। इसके फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर शामिल हैं। अल जजीरा के मुताबिक एक अलग गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड का भी प्रस्ताव है। ये पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को डायरेक्शन देने और क्षेत्रीय कूटनीतिज्ञों के साथ तालमेल बिठाने का काम करेगा।

3- गाजा में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?

जैसे-जैसे हमास हथियार छोड़ने के मामले को आगे बढ़ाएगा और अपने कंट्रोल वाले इलाकों को खाली करेगी, वैसे ही सुरक्षा व्यवस्था दो स्तरों पर संभाली जाएगी। हमास द्वारा खाली किए गए इलाकों की कमान एक नई फिलिस्तीनी पुलिस फोर्स संभालेगी। इस ट्रांजिशन के दौरान सुरक्षा में सहयोग के लिए एक बहुराष्ट्रीय इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स तैनात की जाएगी। इजरायल ने गाजा में बहुराष्ट्रीय बल को प्रवेश देने के लिए कानूनी ढांचे को मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स को एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि शुरुआती मिशन में युगांडा और मोरक्को जैसे देशों के लगभग 200 कर्मी शामिल होंगे। हर देश की टुकड़ी के लिए अलग से इजरायली मंजूरी की जरूरत होगी। ये टुकड़ियां कब तैनात की जाएंगी, इसकी कोई तारीख अभी तय नहीं है।

4- हमास के हथियारों और सुरंगों का क्या होगा?

हथियारों को लेकर रोडमैप और जमीनी दावों में अंतर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक इस रोडमैप गाजा में हमास और अन्य सभी सशस्त्र समूहों को पूरी तरह से हथियार छोड़ना होगा। रॉयटर्स को हमास के एक सूत्र ने बताया कि मसौदे के अनुसार हमास के भारी हथियारों को जमा कर फिलिस्तीनी प्रशासन के नियंत्रण में रखा जाएगा और इन हथियारों को इजरायल को नहीं सौंपा जा सकता। बातचीत में शामिल एक राजनयिक ने रॉयटर्स को बताया कि योजना में सुरंगों, हथियारों के जखीरे और हथियार निर्माण सुविधाओं को नष्ट करने का भी आह्वान किया गया है ताकि प्रक्रिया के अंत में गाजा में कोई उग्रवादी ढांचा न बचे।

5- क्या इजरायल ने इस समझौते को स्वीकार कर लिया है?

इजरायल ने अभी तक घोषित शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। ट्रंप के ऐलान से पहले एक इजरायली अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इजरायल ने 15-सूत्रीय प्रस्ताव को खारिज कर दिया था क्योंकि यह पूर्ण निरस्त्रीकरण और विसैन्यीकरण की उसकी मांग का संतोषजनक जवाब नहीं देता था। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक इजरायल को अभी भी इस बात का पूरा यकीन नहीं है कि हमास हथियार डाल ही देगा। गाजा के बड़े हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण है। रोडमैप इजरायल की चरणबद्ध वापसी को भी हमास के हथियार डालने के साथ जोड़ा तो गया है लेकिन अंतिम वापसी की कोई समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। हमास के एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि यह दस्तावेज फिलहाल एक ड्राफ्ट एग्रीमेंट है। इससे यह साफ होता है कि अंतिम सहमति बनने से पहले कई पेचीदा मुद्दों को सुलझाना बाकी है।

होर्मुज में ईरान का बड़ा धमाका! US सुरक्षा को चीरते हुए तेहरान ने 2 ऑयल टैंकरों पर दागीं मिसाइलें

Iran US Hormuz Conflict Update: मिडिल ईस्ट से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी सैन्य ‘एयर एस्कॉर्ट’ के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें रोक दिया है।

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग अभी भी पूरी तरह बंद है और बिना उसकी इजाजत के किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दिया जाएगा।

अमेरिकी सुरक्षा के बावजूद ईरान का हमला

IRGC द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों तेल टैंकर अमेरिकी सैन्य विमानों की सुरक्षा के बीच एक ‘अनाधिकृत मार्ग’ से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे थे।

ईरान ने दावा किया कि नियमों का पालन न करने वाले इन दो टैंकरों पर निशाना साधा गया, जिससे वे वहीं रुकने पर मजबूर हो गए। इस हमले के तुरंत बाद पीछे आ रहे चार अन्य तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया और वापस अपनी पुरानी स्थिति में लौट गए।

होर्मुज पर ईरान का दावा और नया नियम

सीजफायर टूटने के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर दोबारा अपनी नाकेबंदी सख्त कर दी है। ईरान का कहना है कि, ‘होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी मर्चेंट वेसल को अब ईरान से विशेष परमिट लेना होगा और ट्रांजिट टैक्स चुकाना होगा। ईरान ने जहाजों की आवाजाही को केवल अपने तटीय क्षेत्र से सटे पानी के गलियारों तक सीमित कर दिया है।

अमेरिका का रुख और नया प्रतिबंध

दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला और सुरक्षित है। अमेरिका ने भी ईरान के प्रमुख बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी बरकरार रखी है।

हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने IRGC से जुड़ी संस्थाओं पर नए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों से अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है।

होर्मुज में डेरा डाले क्यों बैठा है ईरान?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और हिंद महासागर के बीच एक बेहद संकरा और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस गतिरोध और नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की कीमतों में भारी उछाल और अस्थिरता देखी जा रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

ट्रंप की धमकी के बाद ताबड़तोड़ हमले, IRGC के दर्जनों ठिकाने तबाह; ईरान के हमले नाकाम- अमेरिका का दावा

मिडिल ईस्ट में एकबार फिर भारी तनाव देखने को मिल रहा है। ईरान युद्ध में ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद दुनिया को राहत मिली थी, लेकिन एकबार फिर दोनों तरफ से हमले शुरू हो गए हैं। जिससे दुनियाभर में लोगों की चिंता बढ़ गई है।सीजफायर के बाद ईरान ने फिर समंदर में कुछ जहाजों को निशाना ब

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