NSE दुनिया के 30 से ज्यादा इनवेस्टर्स को इस महीने अपने आईपीओ के बारे में बताएगा

एनएसई इस महीने दुनिया के 30 से ज्यादा बड़े इनवेस्टर्स को अपने आईपीओ के बारे में जानकारी देगी। एक्सचेंज ने पिछले महीने सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए थे। इस साल दो बड़े मेगा आईपीओ बाजार में आने वाले हैं। एनएसई के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स का भी आईपीओ आने वाला है। ये दोनों ही बड़े आईपीओ होंगे।

एनएसई के आईपीओ के बारे में जानकारी देने वाले सूत्रों ने बताया कि अगले हफ्ते इनवेस्टर मीटिंग्स शुरू हो जाने की उम्मीद है। एक्सचेंज के शेयरों की लिस्टिंग अक्तूबर में हो जाने की उम्मीद है। इस बारे में पूछने पर एनएसई के प्रवक्ता ने कहा कि एक्सचेंज ने रेगुलेटर के पास पेपर फाइल कर दिए हैं। इस वक्त इस बारे में इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती।

रायटर्स ने पिछले महीने अपने सूत्रों और प्राइवेट मार्केट ट्रेड्स के हवाले से बताया था कि एनएसई का आईपीओ 3.3 अरब डॉलर का हो सकता है। एनएसई के मौजूदा शेयरहोल्डर्स आईपीओ में करीब 6 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। भारत के दूसरे बड़े एक्सचेंज BSE का आईपीओ 2017 में आया था। लिस्टिंग के बाद से बीएसई के शेयर की कीमत 30 गुना से ज्यादा हो गई है।

बीएसई का मुकाबला एनएसई से है। बीते कुछ सालों में बीएसई के प्रदर्शन में सुधार दिखा है। FY26 में इसकी रेवेन्यू ग्रोथ 88 फीसदी रही। एनएसई के रेवेन्यू में इस दौरान 3 फीसदी की गिरावट आई। इसमें डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के सेबी के सख्त नियमों का ब़ड़ा हाथ है। हालांकि, एनएसई का रेवेन्यू बीएसई का करीब छह गुना है।

NSE इनवेस्टर्स को अपने संभावित प्रदर्शन के बारे में बताएगा। वह इनवेस्टर्स को बताएगा कि अगले पांच सालों में कैश इक्विटीज और इक्विटीज फ्यूचर्स की सालाना टर्नओवर ग्रोथ 12 फीसदी रह सकती है। इक्विटी ऑप्शंस की ग्रोथ अगले पांच सालों में सालाना 10 फीसदी रह सकती है। अभी इक्विटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग में एनएसई की हिस्सेदारी 100 फीसदी है। कैश मार्केट में हिस्सेदारी 93 फीसदी है और इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी है।

एनएसई ने कहा है कि भारत में शेयर बाजार तक लोगों की पहुंच अभी विकसित देशों के मुकाबले बहुत कम है। इसलिए शेयर ट्रेडिंग का वॉल्यूम बढ़ने की काफी ज्यादा संभावना है। एनएसई को करेंसी डेरिवेटिव्स मार्केट में भी अपनी ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद है। एनएसई का सीनियर मैनेजमेंट अगले हफ्ते से संस्थागत निवेशकों से मुलाकात का सिलसिला शुरू करेगा। मैनेजमेंट सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग इस महीने के अंत तक रोडशो कर सकता है।

एक साल में ₹1 लाख को बना दिया ₹10 लाख! AI या डिफेंस नहीं, कंडोम बनाने वाली इस कंपनी ने किया कमाल

Cupid Share Price Multibagger Return: शेयर बाजार में पिछले एक साल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिफेंस सेक्टर के शेयरों की धूम है। लेकिन इन सबके बीच मार्केट का सबसे बड़ा वेल्थ क्रिएटर एक ऐसे बिजनेस से निकलकर आया है जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था।

मेल और फीमेल कंडोम, ल्यूब्रिकेंट्स और डायग्नोस्टिक उत्पाद बनाने वाली स्मॉलकैप कंपनी क्यूपिड लिमिटेड (Cupid Ltd) के शेयरों ने पिछले एक साल में निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया है। पिछले एक साल में इस शेयर ने 866% से ज्यादा की तूफानी तेजी दिखाई है। आइए जानते हैं कि कैसे इस स्मॉलकैप शेयर ने बाजार में गदर मचाया है और इसके पीछे की वजह क्या है।

1 साल का जादुई रिटर्न: ₹1 लाख बन गए ₹9.7 लाख

क्यूपिड लिमिटेड के शेयरों की रफ्तार पिछले कुछ महीनों से लगातार तेज है:

1 साल का रिटर्न: एक साल पहले जिन निवेशकों ने इस शेयर में ₹1 लाख लगाए थे, उनकी वैल्यू आज बढ़कर करीब ₹9.7 लाख हो चुकी है।

शॉर्ट टर्म का रिटर्न: पिछले 6 महीने में यह शेयर 145%, पिछले 3 महीने में 128% और महज पिछले एक महीने में 40% से ज्यादा चढ़ चुका है।

मार्केट कैप: 10 जुलाई को क्यूपिड के शेयर ₹212.24 पर बंद हुए, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब ₹28,500 करोड़ पर पहुंच गया है।

क्यों भाग रहा है शेयर? मुनाफे में आया बंपर उछाल

बाजार में कई स्मॉलकैप शेयर बिना किसी ठोस वजह के सिर्फ हवा में भागते हैं, लेकिन क्यूपिड के साथ ऐसा नहीं है। इस शेयर की तेजी को कंपनी के मजबूत वित्तीय नतीजों का पूरा सपोर्ट मिला है:

सालाना प्रदर्शन (FY26): वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू दोगुने से अधिक बढ़कर ₹391 करोड़ हो गया, जो इससे पिछले साल ₹183 करोड़ था।

नेट प्रॉफिट में उछाल: कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹41 करोड़ से बढ़कर सीधे ₹108 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, ऑपरेटिंग मार्जिन भी सुधरकर 38% हो गया।

मार्च तिमाही के नतीजे: मार्च तिमाही में सालाना आधार पर रेवेन्यू 116% बढ़कर ₹132 करोड़ और नेट प्रॉफिट 214% बढ़कर ₹36 करोड़ से ज्यादा रहा, जो कंपनी के इतिहास की सबसे बेहतरीन तिमाहियों में से एक है।

मैनेजमेंट का भरोसा: रेवेन्यू गाइडेंस में बड़ी बढ़ोतरी

जून तिमाही के लिए कंपनी द्वारा जारी किए गए मजबूत बिजनेस अपडेट ने इस शेयर में रॉकेट जैसी तेजी ला दी है:

Q1 FY27 का अनुमान: मैनेजमेंट को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) में रेवेन्यू ₹150 करोड़ के पार निकल जाएगा।

पूरे साल का टारगेट बढ़ाया: कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने रेवेन्यू गाइडेंस को ₹600 करोड़ से बढ़ाकर ₹660 करोड़ से अधिक कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग, घरेलू प्राइवेट सेक्टर की डिमांड, सरकारी खरीद और PFSCM के साथ हुई रणनीतिक साझेदारी के दम पर कंपनी को आने वाले दिनों में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद है।

सिर्फ कंडोम नहीं, डायग्नोस्टिक्स में भी जलवा

क्यूपिड को भले ही लोग कंडोम बनाने वाली कंपनी के रूप में जानते हैं, लेकिन अब इसका दायरा काफी बड़ा हो चुका है। कंपनी कंडोम और वाटर-बेस्ड ल्यूब्रिकेंट्स के अलावा पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स और इन विट्रो डायग्नोस्टिक्स (IVD) किट्स भी बनाती है।

क्यूपिड दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जिसे पुरुष और महिला दोनों कंडोम की सप्लाई के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) से प्री-क्वालिफिकेशन मिला हुआ है। इसी वजह से यह कंपनी वैश्विक स्तर पर बड़े-बड़े हेल्थकेयर टेंडर्स में आसानी से हिस्सा ले पाती है।

रिटेल निवेशकों की भीड़, लेकिन वैल्यूएशन बहुत महंगा

कंपनी के शानदार प्रदर्शन को देखकर रिटेल निवेशक इस शेयर पर टूट पड़े हैं। मार्च 2026 तक कंपनी के शेयरधारकों की संख्या बढ़कर 2.09 लाख के पार पहुंच गई है, जो तीन साल पहले महज 26,000 थी। कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी करीब 46% है।

एक्सपर्ट नोट- दे रही छप्परफाड़ रिटर्न लेकिन सावधानी है जरूरी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्यूपिड कंपनी के फंडामेंटल्स बेहद मजबूत हैं, लेकिन इस भारी तेजी के कारण शेयर का वैल्यूएशन काफी महंगा हो गया है। क्यूपिड का शेयर फिलहाल अपनी कमाई के मुकाबले 264 के पीई मल्टीपल और बुक वैल्यू के 63 गुना से अधिक पर ट्रेड कर रहा है, जो एफएमसीजी सेक्टर की अन्य कंपनियों से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि निवेशकों ने भविष्य की बड़ी ग्रोथ को पहले से ही इस कीमत में शामिल कर लिया है, इसलिए नए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

विदेशी निवेशकों के खरीदारी शुरू करने से बाजार में लौटी रौनक, जुलाई में 1968 करोड़ रुपये की खरीदारी की

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भारतीय शेयर बाजारों को लेकर बदला है। उन्होंने 10 जुलाई को भी भारतीय बाजार में अच्छी खरीदारी की। उन्होंने 2,603.72 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवशकों (डीआईआई) ने भी 2,019.68 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा पर आधारित है। एफआईआई और डीआईआई की खरीदारी से 10 जुलाई को भारतीय बाजार में अच्छी रौनक दिखी।

10 जुलाई को ज्यादातर सूचकांकों में रही तेजी

बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स सहित सभी दूसरे सूचकांक 10 जुलाई को हरे निशान में बंद हुए। Nifty 1.02 फीसदी यानी 244.10 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.08 फीसदी यानी 827 अंक के उछाल के साथ 77,569 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.39 फीसदी की तेजी आई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स को छोड़ बाकी सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। 9 जुलाई को भी बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे। 8 जुलाई को बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटना था।

10 जुलाई को FIIs ने की 2019 करोड़ रुपये की खरीदारी

FII ने 10 जुलाई को 15,318.07 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 12.714.35 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह भारतीय बाजार में उनकी शुद्ध खरीदारी 2,603.73 करोड़ रुपये की रही। DII ने 17,171.75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 15,152.07 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह उनकी शुद्ध खरीदारी 2,019 करोड़ रुपये की रही। डीआआई ने लगातार खरीदारी कर घरेलू शेयर बाजार को सहारा दिया है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही तो चढ़ेगा बाजार

विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख में बदलाव दिख रहा है। जुलाई में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) ने भारतीय बाजारों में शुद्ध रूप से खरीदारी की है। उन्होंने इस महीने 1,968.81 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इस दौरान DII ने 9,245.91 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का लौटना भारतीय शेयर बाजारों के लिए शुभ संकेत है। अगर आगे वे खरीदारी जारी रखते हैं तो बाजार में तेज रिकवरी आ सकती है।

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निवेशकों की नजरें जून तिमाही के नतीजों पर

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इनवेस्टर्स का फोकस अब जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर है। आगे इन नतीजों से बाजार की दिशा तय होगी। डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता है। अगर क्रूड की कीमतें भी स्टेबल रहती हैं तो बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव रह सकता है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह बाजार के लिए बड़ा रिस्क है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

IPOs This Week: 13 जुलाई से शुरू हफ्ते में SBI Funds Management समेत 3 नए इश्यू, 4 कंपनियां होंगी लिस्ट

13 जुलाई से शुरू हफ्ते में देश के IPO मार्केट में तगड़ी हलचल दिखने वाली है। 3 नए पब्लिक इश्यू खुल रहे हैं। इनमें से 2 मेनबोर्ड सेगमेंट से हैं, जिनमें से एक है- SBI Funds Management IPO। यह इश्यू ₹11692.91 करोड़ का है। इसके अलावा नए सप्ताह में पहले से खुले 3 IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। इनमें से एक मेनबोर्ड है। जहां तक शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली नई कंपनियों की बात है तो नए शुरू हो रहे सप्ताह में 4 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत करने वाले हैं। इनमें से 2 कंपनियां मेनबोर्ड सेगमेंट की हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नए IPO

SBI Funds Management IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में यह इश्यू 14 जुलाई को लॉन्च होगा और 16 जुलाई को बंद होगा। IPO का साइज ₹11692.91 करोड़ है। IPO के​ लिए प्राइस बैंड ₹545-574 प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 26 शेयर है। कंपनी के शेयर 21 जुलाई को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

Alpine Texworld IPO: यह इश्यू भी मेनबोर्ड सेगमेंट का है। कंपनी ₹126.25 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू 14 जुलाई को खुलेगा और 16 जुलाई को बंद होगा। बोली ₹100-₹105 प्रति शेयर के भाव पर लगा सकते हैं। लॉट साइज 142 शेयर है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 21 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

Millworks Technologies IPO: ₹160.34 करोड़ का पब्लिक इश्यू 14 जुलाई को लॉन्च होने जा रहा है। प्राइस बैंड ₹315-₹331 प्रति शेयर और लॉट साइज 400 शेयर है। इश्यू की क्लोजिंग 16 जुलाई को होगी। कंपनी BSE SME पर 21 जुलाई को लिस्ट होने वाली है।

पहले से खुले IPO

Laser Power & Infra IPO: मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹742 करोड़ का इश्यू 9 जुलाई को खुला था। यह फुली सब्सक्राइब हो चुका है। इसकी क्लोजिंग 13 जुलाई को होने वाली है। प्राइस बैंड ₹203—₹214 प्रति शेयर और लॉट साइज 70 शेयर है। शेयर NSE और BSE पर 16 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

Devson Catalyst IPO: ₹42.34 करोड़ का इश्यू 9 जुलाई को खुला था और 13 जुलाई को बंद होने वाला है। अभी तक 29.35 गुना भरा है। फाइनल इश्यू प्राइस ₹118 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। कंपनी BSE SME पर 16 जुलाई को लिस्ट हो सकती है।

Happy Steels IPO: यह भी 9 जुलाई को खुला था और 13 जुलाई को बंद होगा। कंपनी ₹25 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू अभी तक 3.14 गुना सब्सक्राइब हुआ है। बोली ₹62-₹66 प्रति शेयर के भाव पर और 2,000 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। शेयरों के NSE SME पर 16 जुलाई को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Milky Mist IPO: जुलाई में ही लॉन्च हो सकता है डेयरी सेक्टर का सबसे बड़ा इश्यू, ₹2035 करोड़ जुटाने पर नजर

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नए सप्ताह में 15 जुलाई को मेनबोर्ड सेगमेंट में NSE और BSE पर Kusumgar की लिस्टिंग हो सकती है। इसके बाद 16 जुलाई को Laser Power & Infra के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने वाले हैं। इसी दिन BSE SME पर Devson Catalyst और NSE SME पर Happy Steels के शेयरों के लिस्ट होने की उम्मीद है।

भारत के बारे में विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर बदले, कहा-जल्द बाजार में लौटने वाली है रौनक

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर भारतीय शेयर बाजारों पर बदल गए हैं। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में टेंशन फिर से बढ़ने से बाजार में तेज गिरावट के बावजूद निवेशकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर हायर इनपुट कॉस्ट्स और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर पड़ सकता है। लेकिन, कॉर्पोरेट अर्निंग्स में रिकवरी की संभावनाओं पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।

मीडियम टर्म में बाजार की संभावनाओं पर असर नहीं

मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि भारतीय बाजार में आई गिरावट की वजह साइक्लिकल है, न कि स्ट्रक्चरल। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि मीडियम टर्म में भारतीय शेयर बाजार की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उसने इसकी कई वजहें बताई हैं। जैसे ग्रोथ मोमेंटम में इम्प्रूवमेंट है। इकोनॉमी की सेहत अच्छी है। भारतीय बाजार को लेकर ब्रोकरेज फर्मों की राय बदलने की बड़ी वजह यह है कि डिमांड को लेकर उनकी चिंता कम हुई है।

जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

जेफरीज को जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ बीती 13 तिमाहियों में सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है। इसमें बढ़ती इकोनॉमिक एक्टिविटी और हायर नॉमिनल जीडीपी का हाथ है। ऑयल एंड गैस और मेटल्स को छोड़ कंपनियों की अर्निंग्स साल दर साल आधार पर करीब 12 फीसदी बढ़ने की उम्मीद। फिलिप कैपिटल ने भी ऑयल एंड गैस को छोड़ निफ्टी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है।

निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह

ब्रोकरेज फर्मों ने निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह दी है। कई स्ट्रेटेजिस्ट्स का कहना है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मार्केट का फोकस अर्निंग्स मोमेंटम पर बढ़ेगा। यूपीएस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में फिर से टेंशन बढ़ने का असर भारत में मध्यम अवधि के निवेश पर नहीं पड़ेगा।

इन सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद

ज्यादातर ब्रोकरेज फर्मों को फाइनेंशियल्स स्टॉक्स का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। इसकी वजह अच्छी क्रेडिट ग्रोथ और मजबूत बैलेंसशीट है। इंडस्ट्रियल और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि इनवेस्टमेंट से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने से शेयरों बाजार के प्रदर्शन में इम्प्रूवमेंट आएगा। जेपी मॉर्गन ने कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स को अपनी पसंद बताया।

इन सेक्टर की अर्निंग्स ग्रोथ ज्यादा रह सकती है

फिलिप कैपिटल ने जून तिमाही में एनबीएफसी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, डिफेंस और ऑर्गेनाइज्ड रिटेल की अर्निंग्स ग्रोथ सबसे ज्यादा रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, ऑयल एंड गैस, सीमेंट, हेल्थकेयर और मेटल्स का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे पेश करने शुरू कर दिए हैं। टीसीएस ने 9 जुलाई को अपने नतीजे पेश किए।

ONGC का महा-प्लान: मंगलुरु में जमा होगा 17.5 लाख टन कच्चा तेल, दुनिया में संकट आने पर भी नहीं रुकेगा भारत

ONGC Strategic Petroleum Reserve: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। समुद्री रास्तों पर ब्लॉकबेड के खतरों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बेहद बड़ा फैसला लिया है। देश की सबसे बड़ी तेल और गैस खोजकर्ता कंपनी ओएनजीसी (ONGC) दक्षिण भारत के मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता का एक नया ‘नेशनल स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) यानी रणनीतिक कच्चा तेल भंडार बनाएगी।

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी दी है। आइए समझते हैं कि स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व क्या होता है और संकट के समय यह भारत के लिए कितना जरूरी साबित होगा।

क्यों पड़ी नए ऑयल रिजर्व की जरूरत?

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश होने के कारण भारत अपनी जरूरतों का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। हाल ही में ईरान पर इजरायल-अमेरिकी हमलों के बाद जब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया, तो भारत को कच्चे तेल की सप्लाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज के सकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध या किसी भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय मुसीबत के समय जब विदेशों से तेल आना बंद हो जाए, तब देश के कामकाज को बिना रुकावट चलाने के लिए इन ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ में जमा तेल का इस्तेमाल किया जाता है।

कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सरकार से मांगी जाएगी मंजूरी

ONGC ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि वह ‘राष्ट्रहित’ में बनाए जाने वाले इस विशालकाय स्टोरेज का एक हिस्सा व्यावसायिक यानी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए उपयोग करने की खातिर केंद्र सरकार से अनुमति मांगेगी।

मौजूदा समय में केंद्र सरकार पहले से ही दक्षिण भारत के तीन स्थानों मंगलुरु, पादुर और विशाखापट्टनम में बने रणनीतिक भंडारों के एक हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए मंजूरी देती है। इन तीनों जगहों पर कुल मिलाकर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल स्टोर करने की क्षमता है, जिसका प्रबंधन सरकारी कंपनी ‘इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ (ISPRL) करती है।

UAE और जापान के साथ बढ़ रहा है सहयोग

भारत एमर्जेंसी स्टॉक को मजबूत करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात और जापान जैसे मित्र देशों के साथ लगातार अपनी एनर्जी पार्टनरशिप बढ़ा रहा है। मंगलुरु में ओएनजीसी की सहायक कंपनी ‘मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड’ (MRPL) 3 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है। यहां पहले से मौजूद 1.5 मिलियन टन के स्टोरेज का आधा हिस्सा MRPL और बाकी आधा हिस्सा यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने लीज पर ले रखा है।

इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के समय, ADNOC ने भारत में अपने कच्चे तेल के स्टोरेज को बढ़ाकर 3 करोड़ बैरल करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही यूएई भारत के रणनीतिक रिजर्व के हिस्से के रूप में फुजैराह में भी तेल भंडारण की संभावनाएं तलाश रहा है।

ओडिशा और पादुर में भी बनेंगे रिजर्व

मंगलुरु में ओएनजीसी के इस नए प्रोजेक्ट के अलावा, भारत सरकार देश के अन्य हिस्सों में भी तेल भंडारण क्षमता को कई गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है:

ओडिशा (पूर्वी भारत): चंडीखोल में 4 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक नया रणनीतिक तेल भंडार बनाया जाएगा।

पादुर (दक्षिण भारत): कर्नाटक के पादुर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली एक नई अतिरिक्त फैसिलिटी तैयार की जाएगी।

कुल मिलाकर ओएनजीसी का यह कदम वैश्विक तनाव के बीच भारत की तेल आत्मनिर्भरता और संकट प्रबंधन क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगा, ताकि ग्लोबल मार्केट में मंदी या युद्ध होने पर भी देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो।

SBI के इस IPO ने खुलने से पहले ही मचाई हलचल! ग्रे मार्केट से आए चौंकाने वाले संकेत, जानें सभी जरूरी डिटेल्स

SBI Funds Management IPO GMP Today: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का मेगा आईपीओ 14 जुलाई से सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने जा रहा है। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के इस सबसे बड़े खिलाड़ी के आईपीओ को लेकर बाजार में भारी उत्साह है। अनऑफिशियल मार्केट में कंपनी के अनलिस्टेड शेयरों की खूब डिमांड देखने को मिल रही है।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का यह पब्लिक इश्यू ₹11,692.91 करोड़ का है। आइए जानते हैं इस बड़े आईपीओ की पूरी डिटेल, प्राइस बैंड, जरूरी तारीखें और कंपनी का बिजनेस प्रोफाइल।

IPO प्राइस बैंड और मार्केट वैल्यूएशन

  • प्राइस बैंड: ₹545 से ₹574 प्रति शेयर
  • एंकर इनवेस्टर बिडिंग: 13 जुलाई, 2026
  • आईपीओ ओपनिंग डेट: 14 जुलाई, 2026
  • आईपीओ क्लोजिंग डेट: 16 जुलाई, 2026
  • अलॉटमेंट फाइनल होने की तारीख: 17 जुलाई, 2026
  • रिफंड और डिमैट क्रेडिट: 20 जुलाई, 2026
  • शेयर बाजार में लिस्टिंग: 21 जुलाई, 2026 BSE और NSE पर

पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) है यह इश्यू

यह ₹11,692.91 करोड़ का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत आ रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी के प्रमोटर्स अपनी 10% हिस्सेदारी बेच रहे हैं और इससे मिलने वाला पूरा पैसा उन्हीं के पास जाएगा, कंपनी को अपने काम के लिए कोई फंड नहीं मिलेगा।

SBI बेचेगा: 12.83 करोड़ शेयर (6.3% हिस्सेदारी)

Amundi India Holding बेचेगी: 7.56 करोड़ शेयर (3.7% हिस्सेदारी)

इस बड़े इश्यू को संभालने के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज, एचएसबीसी, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, जेफरीज, जेएम फाइनेंशियल, मोतीलाल ओसवाल और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स जैसी दिग्गज संस्थाएं बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स की भूमिका निभा रही हैं।

कैसा है कंपनी का बिजनेस?

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) है, जो एसबीआई म्यूचुअल फंड के निवेश को मैनेज करती है। 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी 15.4 फीसदी है।

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कंपनी का तिमाही औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) ₹12,49,970 करोड़ रहा है। अगर इसमें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अन्य एडवाइजरी फंड्स को भी जोड़ दिया जाए, तो कंपनी का कुल QAAUM ₹29,04,026 करोड़ के विशाल स्तर पर पहुंच जाता है।

लगातार बढ़ रहा ग्रे मार्केट प्रीमियम

10 जुलाई की सुबह ग्रे मार्केट को ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के अनऑफिशियल शेयरों में मजबूती देखी जा रही है। आईपीओ वॉच के मुताबिक, इसका जीएमपी फिलहाल ₹85 प्रति शेयर चल रहा है, जो करीब 14.81% के लिस्टिंग गेन की ओर इशारा करता है। वहीं इनवेस्टरगेन के अनुसार इसका जीएमपी ₹86 के आस-पास है, जो लगभग 15% का मुनाफा दिखाता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kalyan Jewellers Share Price: लगातार तीसरे दिन कल्याण ज्वेलर्स के शेयरों को लगे पंख, सिर्फ तीन दिन में 35% उछला

कल्याण ज्वेलर्स के शेयरों में लगातार तीसरे दिन बड़ी तेजी दिखी। बाजार खुलते ही कंपनी के शेयर रॉकेट बन गए। एक समय शेयर 7 फीसदी तक चढ़ गया था। बीते तीन सत्रों में यह शेयर करीब 35 फीसदी चढ़ चुका है। खास बात यह है कि शेयरों में उछाल के साथ ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा है।

दोपहर तक शेयरों में ट्रेडिंग वॉल्यूम करीब 4 करोड़ शेयरों तक पहुंच गया। 20 दिनों का इसका का एवरेज ट्रेडिंग वॉल्यूम 22 लाख शेयरों का है। करीब 13 फीसदी ट्रेडेड शेयर डिलीवरी वाले हैं। 9 जुलाई को यह शेयर अपने 100-दिन और 200-दिन मूविंग एवरेजेज के ऊपर बंद हुआ। यह गुरुवार को निफ्टी 500 का सबसे ज्यादा ट्रेडिंग वाला स्टॉक बन गया।

कल्याण ज्वेलर्स के शेयरों में तेजी की वजह जून तिमाही का इसका बिजनेस अपडेट है। इसके अलावा विदेशी ब्रोकरेज फर्म सिटी ने फिर से इस शेयर को ‘बाय’ रेटिंग दी है। उसने शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसकी वजह कंपनी का शानदार प्रदर्शन है। जून तिमाही में कल्याण के इंडिया बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ साल दर साल आधार पर 38 फीसदी रही। इसमें सेम-सेल्स में 28 फीसदी ग्रोथ का बड़ा हाथ रहा।

कल्याण ने जून तिमाही में नए 12 कल्याण स्टोर्स ओपन किए। सिटी ने कहा है कि कंपनी के मैनेजमेंट ने प्रमुख बाजारों में डिमांड स्ट्रॉन्ग रहने की जानकारी दी है। अधिक मास के बावजूद कंपनी की सेल्स अच्छी रही। जून में कुल सेल्स में पुराने ज्वेलरी एक एक्सचेंज सेल की हिस्सेदारी बढ़कर 55 फीसदी से ज्यादा हो गई। कपनी के इंटरनेशनल बिजनेस का प्रदर्शन भी अच्छा रहा।

सिटी ने कल्याण ज्वेलर्स के शेयरों को लेकर कुछ रिस्क भी बताए हैं। उसने कहा है कि इंडिया में कल्याण के ज्वेलरी बिजनेस का प्रदर्शन टाइटन के मुकाबले कमजोर रहा। बीती 13 तिमाहियों में पहली बार ऐसा हुआ है। इसके अलावा कंपनी के प्रमोटर ने काफी ज्यादा शेयर गिरवी रखे हैं। अगर आगे कंज्यूमर डिमांड में सुस्ती आती है तो इसका असर कंपनी के बिजनेस पर पड़ सकता है।

10 जुलाई को कल्याण ज्वेलर्स का शेयर 11:30 बजे 6.90 फीसदी चढ़कर 473.75 रुपये पर चल रहा था। उधर, शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में भी तेजी थी। निफ्टी 0.85 फीसदी यानी 204 अंक चढ़कर 24,168 पर चल रहा था। सेंसेक्स भी 0.90 फीसदी यानी 682 अंक के उछाल के साथ 77,429 पर था। बैंक निफ्टी 1 फीसदी से ज्यादा ऊपर था। मिडकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी थी।

Stock Market Rally: सेंसेक्स 846 अंक तक उछला, निफ्टी फिर 24200 के पार; 6 कारणों से लगातार दूसरे दिन तेजी

शेयर बाजार में शुक्रवार, 10 जुलाई को लगातार दूसरे दिन तेजी का आलम है। सेंसेक्स हरे निशान में खुलने के बाद 846 अंक तक चढ़ गया। इसके पीछे IT शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, एशियाई बाजारों की तेजी जैसे कई फैक्टर हैं। सेंसेक्स की ओपनिंग हरे निशान में 77,395.63 पर हुई। फिर यह पिछली क्लोजिंग से 846.26 अंक से ज्यादा चढ़कर 77,588.08 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी बढ़त के साथ 24,124.70 पर खुला और फिर 263.25 अंक उछलकर 24,226.05 के हाई तक गया।

गुरुवार को सेंसेक्स 238.22 अंक या 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,741.82 पर और निफ्टी 80.75 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 23,962.80 पर बंद हुआ था। आइए जानते हैं शुक्रवार की तेजी के अहम कारण…

US-ईरान युद्ध के समाधान की उम्मीद

गुरुवार को एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ मसलों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है और हालिया तनाव के बावजूद तकनीकी बातचीत जारी है। इस खबर से भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव बढ़ने की चिंता कम हुई है, जिससे बाजार को सहारा मिला है।

IT शेयरों में खरीदारी

TCS के शेयरों में 3% से ज्यादा की बढ़त के बाद निफ्टी IT इंडेक्स में जबरदस्त तेजी है। यह 3% तक चढ़ गया। TCS के अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों और मैनेजमेंट की बातों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। उम्मीद जगी है कि दूसरी तिमाही से मांग में धीरे-धीरे सुधार होगा, जिसके चलते ब्रोकरेज हाउस ने इस स्टॉक पर अपना पॉजिटिव नजरिया बरकरार रखा है।

TCS का जून तिमाही के लिए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.61% की बढ़ोतरी के साथ ₹13,349 करोड़ रहा। कंपनी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित मांग में मौजूदा तिमाही में सुधार की उम्मीद है।

एशियाई बाजारों की तेजी

एशियाई बाजार बढ़त में हैं। इसका असर भी देश के शेयर बाजार पर है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 4% से ज्यादा चढ़ा है, जापान का निक्केई 225 1.91% बढ़ा है। इसी तरह शंघाई का SSE कंपोजिट 0.76% और हांगकांग का हैंग सेंग 1.73% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए थे।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड की कीमत 76.19 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बावजूद, तेल की कीमतों में नरमी है। कच्चे तेल की कम कीमतें भारत के लिए इसलिए अच्छी हैं क्योंकि देश अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। सस्ते तेल से आयात लागत कम होती है, महंगाई का दबाव घटता है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट मजबूत होता है।

रुपये की मजबूती

रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 15 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.32 पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू मुद्रा को बल मिला। रुपया गुरुवार को एक पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.47 पर बंद हुआ था।

इंडिया VIX में गिरावट

बाजार में अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX, लगभग 6 प्रतिशत तक गिरकर 12.63 पर आ गया। इंडिया VIX में गिरावट का मतलब है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीदें कम हो रही हैं और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।