Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Share Market Live Update: मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच बेंचमार्क Nifty50 इंडेक्स के लिए GIFT Nifty ने धीमी शुरुआत दिखाई, जबकि निवेशक US फेडरल रिजर्व की जून मीटिंग के मिनट्स का इंतज़ार कर रहे थे, जो इस हफ़्ते के आखिर में पब्लिश होने वाले हैं। फ्यूचर्स 24,354 पर फ्लैट कोट किए गए।

सोमवार को शुरुआती कारोबार में ज़्यादातर एशियाई बाज़ारों में बढ़त हुई क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही और टेक्नोलॉजी शेयरों में उछाल आया। कोस्पी और CSI 300 क्रमशः 0.62 प्रतिशत और 0.26 प्रतिशत ऊपर थे।

हालांकि US-ईरान बातचीत में कोई और प्रोग्रेस नहीं हुई, लेकिन जहाज़ होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रते रहे। इसके अलावा, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन और उसके सहयोगी (OPEC+) जून और जुलाई में इसी तरह के आउटपुट बढ़ोतरी के बाद अगस्त से आउटपुट बढ़ाने पर सहमत हुए।

जुलाई फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर $71.78 प्रति बैरल पर कोट किया गया, जो 0.47 प्रतिशत नीचे था।

सोने और चांदी के फ्यूचर्स क्रमशः 2.11 प्रतिशत और 3.56 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे थे।

Stock Market News: कच्चा तेल, मानसून और तिमाही नतीजे; इन बातों से तय होगी Sensex-Nifty की चाल

Stock Market Trend This Week: 6 जुलाई से शुरू हो रहे इस कारोबारी हफ्ते शेयर मार्केट में मार्केट सेंटिमेंट कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक रुझानों और कॉरपोरेट आय सीजन की शुरुआत पर निर्भर करेगी। एनालिस्ट्स के मुताबिक आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी टीसीएस 9 जुलाई को जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति और विदेशी निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली से भी बाजार की दिशा तय होगी। पिछले कारोबारी हफ्ते सेंसेक्स 663.44 प्वाइंट्स यानी 0.86% की बढ़त के साथ 77,763.91 तो निफ्टी 214.85 प्वाइंट्स यानी 0.89% के उछाल के साथ 24270.85 पर बंद हुआ।

मार्केट की चाल पर क्या है एक्सपर्ट्स का रुझान

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशकों की नजर 9 जुलाई को टीसीएस के कारोबारी नतीजे पर रहेगी। अजीत के मुताबिक निवेशकों का ध्यान खास तौर पर डिमांड ट्रेंड, डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग और एआई से जुड़े बिजनेस मौकों को लेकर मैनेजमेंट की बातों पर रहेगा।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ का भी कहना है कि घरेलू स्तर पर निवेशकों का ध्यान 9 जुलाई से शुरू होने रहे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन पर रहेगा। उनका मानना है कि कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री से डिमांड के माहौल, मार्जिन के रुझानों और अर्निंग्स विलिबिलिटी को लेकर अहम संकेत मिलेगा। प्रवेश के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून और खरीफ की बुवाई भी गांवों में मांग, महंगाई की रफ्तार और ओवरऑल इकनॉमिक ग्रोथ को लेकर अहम संकेत देगा।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच टेक्निकल बातचीत का अगला दौर 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि बैठक की जगह के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सप्लाई को लेकर चिंता कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल $68-$69 के आसपास स्थिर हो गए हैं और अब इन पर निवेशकों की नजर रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर फेड की जून पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स यानी बैठक के ब्यौरे पर रहेगी ताकि अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट रुझान मिल सकें।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स, घरेलू अर्निंग्स सीजन की शुरुआत और मानसून की दिशा से तय होगी।

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PB Fintech का शेयर बाजार खुलते ही क्रैश, ब्लॉक डील के बाद बढ़ा बिकवाली का दबाव

पीबी फिनटेक का शेयर 3 जुलाई को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। कंपनी के शेयरों में एक बड़ी ब्लॉक डील हुई। कंपनी के 2.3 फीसदी शेयरों की बिक्री करीब 1,741 करोड़ रुपये में हुई। इसके बाद शेयरों पर बड़ा दबाव दिखा। 10 बजे शेयर 7.31 फीसदी गिरकर 1,563.50 रुपये पर चल रहा था। पहले खबर आई थी कि सिंगापुर की सॉवरेन इनवेस्टमेंट फर्म टेमासेक होल्डिंग्स पीबी फिनटेक में अपनी हिस्सेदारी घटाना चाहती है।

इस साल अब तक 14 फीसदी गिर चुका है शेयर 

PB Fintech का शेयर इस साल अब तक करीब 14 फीसदी गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी में 7 फीसदी गिरावट आई है। पीबी फिनटेक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 72,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, ब्लॉक डील में 1.08 शेयरों का ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 1,601 रुपये के रेट पर हुआ है। यह 2 जुलाई को शेयर के 1,682.10 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से करीब 4.8 रुपये का डिस्काउंट है।

अभी खरीदार और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं

स्टॉक एक्सचेंजों पर अभी शेयर खरीदने वाले और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह ट्रांजेक्शन 2 जुलाई को आई खबरों के मुताबिक है। खबरों में कहा गया है था कि टेमासेक होल्डिंग्स अपनी एक सब्सिडियरी के जरिए पीबी फिनेटक के 1.19 करोड़ शेयर बेचना चाहती है। यह पीबी फिनेटक में 2.6 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। खबरों में प्रति शेयर करीब 1,909 रुपये की कीमत पर ब्लॉक डील होने का अनुमान जताया गया था।

बीते कुछ महीनों में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने बेची हिस्सेदारी

इस ट्रांजेक्शन से पहले टेमासेक होल्डिंग्स की सब्सिडियरी MacRitchie Investments की PB Fintech में 6.47 फीसदी हिस्सेदारी थी। सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया को इस डील का एकलौता प्लेसमेंट एजेंट बताया गया था। बताया गया था कि इस डील के बाद टेमासेक पर अपनी बाकी हिस्सेदारी बेचने के लिए 60 दिन का लॉक-अप लागू होगा। बीते कुछ महीनों में पीबी फिनटेक में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने हिस्सेदारी बेची है।

मई में दहिया और बंसल ने भी बेचे थे कंपनी के शेयर

इस साल मई में पीबी फिनेटक के को-फाउंडर्स यशीश दहिया और आलोक बंसल ने करीब 38 लाख शेयर बेचे थे। यह कंपनी में करीब 0.8 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर था। यह ट्रांजेक्शन 654 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के जरिए हुआ था। मई में ही चीन की टेक्नलोजी कंपनी Tencent ने पीबी फिनटेक में अपनी बाकी 1.05 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी।

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लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में तेजी

3 जुलाई को शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखी। 10:20 बजे निफ्टी 0.68 फीसदी यानी 165 अंक चढ़कर 24,342 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.65 फीसदी यानी 506 अंक के उछाल के साथ 78,000 पर था। बैंक निफ्टी में भी 0.23 फीसदी की तेजी दिखी। आज बाजार में अच्छी तेजी का लगातार तीसरा दिन है।

IT Stocks के दम पर Sensex में 500 अंकों का उछाल, 5 वजहों से Nifty भी 24150 के पार

Share Market Rally: इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के दूसरे दिन भी मार्केट में शानदार रौनक है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ी तो कच्चे तेल फिसल गया और मार्केट में रौनक छा गई। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स इंट्रा-डे में 500 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24150 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप आधे-आधे फीसदी मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:25 AM पर सेंसेक्स 295.10 प्वाइंट्स यानी 0.38% की बढ़त के साथ 77,217.74 और निफ्टी 50 भी 89.45 प्वाइंट्स यानी 0.37% की बढ़त के साथ 24,095.30 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 526.61 प्वाइंट्स चढ़कर 77,449.25 और निफ्टी 153.60 प्वाइंट्स उछलकर 24,159.45 तक पहुंचा था।

Share Market Rally: ये है वजह

अमेरिका-ईरान वार्ता

कतर का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। यह रास्ता कच्चे तेल के लिए काफी अहम है क्योंकि युद्ध से पहले वैश्विक सप्लाई का पांचवा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता था।

कच्चे तेल में गिरावट

लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल में गिरावट ने मार्केट में रौनक बिखेरी है। अमेरिका और ईरान के बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इस पर दबाव बढ़ा। ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक गिरकर प्रति बैरल $71 के नीचे आ गया को यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 1% से अधिक टूटकर प्रति बैरल $68 के नीचे आ गया।

रुपये की मजबूती

कच्चे तेल की गिरावट से रुपये को सपोर्ट मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 32 पैसे मजबूत 94.93 के भाव पर खुला।

India VIX में गिरावट

मार्केट को घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट में अनिश्चितता कम होने का संकेत दिया। फिलहाल यह 3.85% की गिरावट के साथ 12.73 पर है।

आईटी शेयरों की जोरदार खरीदारी

लगातार चार कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद निफ्टी आईटी ने आज जोरदार वापसी की और 3% से अधिक उछल पड़ा। फिलहाल सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स ग्रीन हैं लेकिन आईटी और मेटल को छोड़ सभी में 1% से कम तेजी है। निफ्टी मेटल में 1% से अधिक की बढ़त है।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंज जेम्स का कहना है कि अनुमान के मुताबिक कल की बढ़त 24000 के लेवल से आगे नहीं बढ़ पाई, लेकिन हाई VWAP से इसमें आगे तेजी का संकेत मिल रहा है। उनका कहना है कि निफ्टी को शुरुआत में 24170 के लेवल पर रेजिस्टेंस झेलना पड़ सकता है लेकिन इसके 24600 तक पहुंचने की संभावना अधिक है। हालांकि यह बुलिश रुझान तब तक है, जब तक निफ्टी का 23,970 का लेवल बना रहे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : निफ्टी आज कर सकता है 24200-24300 की ओर बढ़ने की कोशिश, 23900-23850 पर तत्काल सपोर्ट

Trade setup for today : कुछ दिनों की गिरावट के बाद,1 जुलाई को निफ्टी में 0.6 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह वापस 24,000 के स्तर पर आ गया। मोमेंटम इंडिकेटर्स ने साइडवेज मूवमेंट का संकेत दिया,लेकिन ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना रहा क्योंकि इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ था। बाजार को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का सपोर्ट मिला। अगर बेंचमार्क इंडेक्स 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को बनाए रखता है,तो यह 24,200-24,300 के रेजिस्टेंस जोन की ओर बढ़ने की कोशिश कर सकता है। अगर यह इस स्तर के ऊपर बना रहता है,तो 24,500 तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है। नीचे की तरफ,23,900-23,850 का दायरा तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। जानकारों के मुताबिक,पिछले कुछ सेशन में सपोर्ट लेवल धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसक रहा है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,924, 23,888 और 23,829

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,043, 24,079 और 24,138

डेली चार्ट पर निफ्टी ने पिछले दिन की बेयरिश कैंडल के अंदर एक बड़ी बुलिश कैंडल बनाई,जो सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के बीच पॉजिटिव संकेत देता है। इंडेक्स ने 20-दिन और 50-दिन के EMA के ऊपर बने रहते हुए 10-दिन का EMA फिर से हासिल कर लिया। असल में,20-दिन का EMA 50-दिन के EMA के ऊपर जाने वाला है,जो एक पॉजिटिव संकेत है। RSI बढ़कर 55.13 हो गया है और बुलिश क्रॉसओवर के करीब है। MACD हिस्टोग्राम की हरी बार लगातार आठवें सेशन में छोटी हुई,हालांकि MACD सिग्नल और जीरो लाइन,दोनों के ऊपर बना रहा। ये सभी इंडिकेटर बताते हैं कि बड़ा ट्रेंड पॉज़िटिव है,हालांकि मोमेंटम कम हुआ है,जिससे किसी निर्णायक ब्रेकआउट तक रेंज-बाउंड ट्रेड जारी रहने की संभावना है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,132, 58,284 और 58,531

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,638, 57,486 और 57,239

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,332, 56,465

बैंक निफ्टी ने निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन किया। डेली टाइमफ्रेम पर पिछले दिन की रेड कैंडल के साथ बुलिश कैंडल बनाने के बाद,यह 0.85 प्रतिशत बढ़कर 58,000 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा और शॉर्ट और मीडियम टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे। RSI बढ़कर 63.22 पर पहुंच गया,हालांकि यह अपनी सिग्नल लाइन से नीचे ही रहा। MACD सिग्नल और जीरो,दोनों लाइनों के ऊपर बना रहा। लेकिन MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। यह बात लगातार आठवें सेशन में हिस्टोग्राम के हरे बार के सिकुड़ने से पता चलती है। ये सभी इंडिकेटर बताते हैं कि अंडरलाइंग ट्रेंड बुलिश बना हुआ है,हालांकि मोमेंटम थोड़ा धीमा हुआ है। हाल के हाई लेवल से ऊपर लगातार बने रहने पर मजबूत अपवर्ड मोमेंटम फिर से लौट सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

1 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में ₹1,140 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार सातवें सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,159 करोड़ के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX 2.63 प्रतिशत गिरकर 13.24 पर आ गया और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा। यह बाजार में लौटते भरोसे का संकेत है। हालांकि, इस वोलैटिलिटी गेज में और गिरावट आने से बुल्स को और राहत मिलेगी। कुल मिलाकर,इससे पता चलता है कि बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव बना हुआ है और कम होती वोलैटिलिटी तेजी के रुझान को सपोर्ट कर रही है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 1 जुलाई को पिछले सेशन के 1.02 से बढ़कर 1.13 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

VA Tech Wabag Share: रेखा झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो वाला ये इंफ्रा सेक्टर का स्टॉक ऑर्डर मिलने के बाद 6% दौड़ा, जानें डिटेल

VA Tech Wabag Share Price: इंफ्रा सेक्टर की दिग्गज कंपनी और रेखा झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो वाला स्टॉक, VA Tech Wabag के शेयर बुधवार, 1 जुलाई को इंट्राडे में 6 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। शेयर में यह तेजी उस वक्त आई जब कंपनी ने बताया कि उसे ऑस्ट्रिया के वियना में डोनौइंसेल वॉटर वर्क्स के विस्तार के लिए एक “बड़ा” ऑर्डर मिला।

VA Tech Wabag का शेयर प्राइस ₹2,010.75 के पिछले बंद भाव के मुकाबले ₹2,039.95 पर खुला और सुबह के सेशन में 6.30% उछलकर ₹2,137.45 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। हालांकि, स्टॉक ने जल्द ही बढ़त कम कर दी और सुबह 11.20 बजे के आसपास 3.37% बढ़कर ₹2,075 पर ट्रेड करता नजर आया।

VA Tech Wabag को ऑस्ट्रिया में ऑर्डर मिला

बुधवार, 1 जुलाई को मार्केट खुलने से पहले, कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे वियना शहर, म्युनिसिपल डिपार्टमेंट MA 31 – वीनर वासर से ऑस्ट्रिया के वियना में डोनौइंसेल वॉटर वर्क्स को बढ़ाने के लिए एक बड़ा ऑर्डर मिला है। ऑर्डर की वैल्यू ₹250 से ₹600 करोड़ के बीच होने की उम्मीद है।

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, पूरी फैसिलिटी 2030 में पूरी होने और चालू होने वाली है, जिसके बाद एक्सेप्टेंस माइलस्टोन तय किए जाएंगे। कंपनी ने कहा, “Wabag के लिए, यह प्रोजेक्ट ऑस्ट्रिया में एक फ्लैगशिप रेफरेंस है और यूरोप पर ग्रुप के स्ट्रेटेजिक फोकस को दिखाता है।”

कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट वियना शहर की ‘वीनर वासर 2050’ स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। कंपनी ने अपनी फाइलिंग में कहा कि इसकी डिज़ाइन कैपेसिटी 1,000 लीटर प्रति सेकंड है, जो लगभग 86 MLD के बराबर है।

डोनौइनसेल वॉटर वर्क्स के विस्तार से वियना के पीने के पानी के सिस्टम की मज़बूती बढ़ेगी, क्योंकि इससे शहर के मशहूर अल्पाइन स्प्रिंग वॉटर सप्लाई के साथ एक कंट्रोल किया जा सकने वाला ग्राउंडवॉटर-बेस्ड सप्लाई पिलर जुड़ जाएगा। यह प्लांट सुरक्षित कुओं के खेतों से ग्राउंडवॉटर को ट्रीट करेगा और वियना के वॉटर सप्लाई सिस्टम में अच्छी क्वालिटी का पीने का पानी देगा।

VA टेक वबाग के CEO-यूरोप क्लस्टर, महमूत गेडेक ने कहा, “डोनौइनसेल वॉटर वर्क्स का विस्तार वियना की लंबे समय तक चलने वाली पीने के पानी की सप्लाई के लिए एक मील का पत्थर है और कंपनी की टेक्नोलॉजी की विशेषज्ञता का एक मज़बूत सबूत है।”

22 मई को CNBC-TV18 के साथ बातचीत में, VA टेक वबाग के चेयरमैन और MD, राजीव मित्तल ने कहा कि कंपनी के लिए पश्चिम एशिया प्रोजेक्ट का काम जारी है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में एग्जीक्यूशन 20% गाइडेंस को पार कर सकता है, जबकि इसका मीडियम-टर्म रेवेन्यू गाइडेंस 15% से 20% के बीच और इसका EBITDA 13% से 15% के बीच बना रहेगा।

रेखा झुनझुनवाला का एक पोर्टफोलियो स्टॉक

जानी-मानी इन्वेस्टर रेखा झुनझुनवाला की पिछली तिमाही में VA Tech Wabag में 8% से ज़्यादा हिस्सेदारी थी। FY25 की मार्च तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न डेटा के अनुसार, रेखा झुनझुनवाला के पास VA Tech Wabag में 50,00,000 शेयर थे, जो 8.02% हिस्सेदारी के बराबर है।

मार्च तिमाही के आखिर तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के पास कुल मिलाकर 1,03,44,924 शेयर या कंपनी में 16.60% हिस्सेदारी थी।

VA Tech Wabag एक मल्टीबैगर स्टॉक है

इस स्टॉक ने लंबे समय में मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। BSE डेटा के अनुसार, VA Tech Wabag के शेयर तीन साल और पांच साल में क्रमशः 325% और 500% बढ़े हैं।

पिछले एक साल में, स्टॉक ने 46% का रिटर्न दिया है। इस साल 27 जनवरी को ₹1,033.95 के 52-हफ़्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, स्टॉक 25 जून को ₹2,188.95 के 52-हफ़्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा था।

Share Market Live Update: सेंसेक्स 480 अंक चढ़ा, निफ्टी 24000 के पार, जून में GST कलेक्शन सालाना आधार पर 14% बढ़ा

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Share Market Live Update: वॉल स्ट्रीट की रात भर की रैली जारी रहने के बाद, ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों को देखते हुए, बुधवार को भारतीय स्टॉक मार्केट के सुस्त नोट पर खुलने की उम्मीद है। शुरुआती ट्रेड में एशियाई इक्विटी में मिला-जुला कारोबार हुआ, जबकि US मार्केट बढ़त के साथ बंद हुए, जो जियोपॉलिटिकल और मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितताओं के बावजूद लगातार उम्मीद को दिखाता है।

मंगलवार को, घरेलू बेंचमार्क बिकवाली के दबाव के बीच नीचे बंद हुए, जिसमें निफ्टी 50 23,900 के निशान से नीचे फिसल गया। BSE सेंसेक्स 249.70 पॉइंट या 0.33% गिरकर 76,478.67 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 80.50 पॉइंट या 0.34% गिरकर 23,865.75 पर बंद हुआ।

Market cues : मोमेंटम पड़ा कमजोर,शॉर्ट टर्म में 23800-24200 की रेंज में ट्रेड होने की उम्मीद

Trade setup for today : 30 जून को डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी से ठीक पहले,29 जून को निफ्टी में दूसरे हाफ में प्रॉफिट बुकिंग देखी गई और यह 0.50 फीसदी गिरकर बंद हुआ। इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है,इसलिए इसका अंडरलाइंग ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। हालांकि,मोमेंटम इंडिकेटर और ऑसिलेटर एक ऐसे दौर का संकेत दे रहे हैं जिसमें बाजार में कोई खास हलचल नहीं होगी और यह एक दायरे में बना रहेगा। शॉर्ट टर्म में इंडेक्स के 23,800-24,200 की रेंज में ट्रेड करने की संभावना है। जानकारों के मुताबिक,अगर यह इस रेंज से नीचे जाता है तो बाजार पर गिरावट का दबाव बन सकता है। जबकि अगर यह वापस ऊपर आता है और इस स्तर से ऊपर बना रहता है,तो इंडेक्स 24,500-24,600 के जोन की ओर बढ़ सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,922, 23,876 और 23,802

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,072, 24,118 और 24,192

निफ्टी ने डेली टाइमफ्रेम पर स्मॉल अपर और लोअर शैडो के साथ एक बेयरिश कैंडल बनाई। इससे पता चलता है कि सेलिंग प्रेशर है,रुकावट के लेवल पर ब्रेकआउट फेल हो गया है और उस लेवल के आसपास इंडेक्स एक दायरे में ही घूम रहा है। इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा था,लेकिन 100-दिन के EMA को वापस हासिल नहीं कर पाया और अप्रैल की रैली के 23.6 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल से नीचे आ गया। RSI 53.89 पर सिग्नल लाइन के करीब पहुंच गया,जबकि MACD हिस्टोग्राम पर हरा बार लगातार छठे सेशन में छोटा हो गया। इन सबसे पता चलता है कि तेजी का ट्रेंड तो बना हुआ है,लेकिन मोमेंटम कमज़ोर पड़ गया है,जिससे निकट भविष्य में रेंज-बाउंड ट्रेड की संभावना बढ़ गई है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,154, 58,315 और 58,575

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,634, 57,473 और 57,213

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,332, 56,465

बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडल’बनाई,जिससे पता चलता है कि प्रॉफिट बुकिंग हुई है और यह ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया। हालांकि, इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा और उनमें से ज़्यादातर ऊपर की ओर ही बढ़ रहे थे। RSI 60 के लेवल से ऊपर 61.92 पर रहा,हालांकि इसमें’बेयरिश क्रॉसओवर’दिखा। MACD जीरो और सिग्नल लाइन के ऊपर बना रहा,लेकिन MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। यह हिस्टोग्राम पर दिख रही हरी पट्टी से पता चलता है,जो लगातार छठे सेशन में छोटी हुई है। इन सबसे पता चलता है कि ओवरऑल ट्रेंड तो पॉज़िटिव है,लेकिन तेज़ी का मोमेंटम कम हो रहा है,जिससे संकेत मिलता है कि जल्द ही कंसोलिडेशन या रेंज-बाउंड ट्रेडिंग का दौर आ सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

29 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,350 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बन गए। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार पांचवें सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹2,800 करोड़ के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX 4.29 प्रतिशत बढ़कर 13.61 पर पहुंच गया,जिससे तेजड़ियों को थोड़ी परेशानी हुई। हालांकि,यह सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो’बुल्स’के लिए अच्छी बात है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 29 जून को पिछले सेशन के 1.06 से घटकर 0.85 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

 

HDFC बैंक ने एक्सिस बैंक के पूर्व एग्जीक्यूटिव पुनीत शर्मा को नियुक्त किया CFO, 1 दिसंबर से संभालेंगे कामकाज

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market cues : निफ्टी के 24200 के नीचे बने रहने तक कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद, 23800–23750 पर अहम सपोर्ट

Trade setup for today : 25 जून को,तेल की कम कीमतों और VIX के निचले स्तरों के बावजूद,दूसरे हाफ में प्रॉफिट बुकिंग के कारण निफ्टी 50 दिन के हाई से थोड़ा नीचे बंद हुआ। ऊपर की तरफ 24,100–24,200 का जोन निफ्टी के लिए एक अहम रेजिस्टेंस लग रहा है,क्योंकि पिछले हफ्ते यह क्लोजिंग के आधार पर इस लेवल से ऊपर टिक नहीं पाया था। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक निफ्टी 24,200 के नीचे ट्रेड करता रहेगा,तब तक कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। इसके लिए 23,800–23,750 पर अहम सपोर्ट है। हालांकि,जानकारों का यह भी मानना ​​है कि अगर इंडेक्स मजबूती से 24,200 के जोन के ऊपर बंद होता है तो यह 24,500–24,600 के अगले अहम रेजिस्टेंस जोन तक पहुंच सकता है। इससे निफ्टी के 24,800 के स्तर की ओर बढ़ने का रास्ता साफ हो रहा है। एक्सपर्ट्स की होर्मुज जलडमरूमध्य में नए तनाव के बाद सावधानी बरतने की भी सलाह है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,034, 23,981 और 23,896

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,204, 24,256 और 24,341

डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक छोटी बेयरिश कैंडल बनाई,जिसकी ऊपरी शैडो लंबी थी। इससे पता चलता है कि अहम रेजिस्टेंस लेवल पर बुल्स को रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इंडेक्स क्लोजिंग के आधार पर गिरती हुई रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन (जो 21 अप्रैल और 18 जून के हाई को जोड़ती है) के ऊपर टिक नहीं पाया। यह क्लोजिंग के आधार पर 100-दिन के EMA के ऊपर भी नहीं टिक सका,लेकिन शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। मोमेंटम इंडिकेटर्स ने कंसोलिडेशन का संकेत दिया,क्योंकि पॉजिटिव क्रॉसओवर के बावजूद RSI 56.97 पर स्थिर रहा। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। यह सब पॉजिटिव रुझान के साथ लगातार कंसोलिडेशन का संकेत देता है,हालांकि रैली के अगले चरण को शुरू करने के लिए रेजिस्टेंस जोन के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,559, 58,699 और 58,927

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 58,103, 57,963 और 57,735

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,332, 56,465

बैंक निफ्टी 27 पॉइंट्स की बढ़त के साथ दिन के हाई के पास बंद हुआ और डेली टाइमफ्रेम पर एक रेड कैंडल बनाई,जिसके ऊपरी हिस्से में एक बड़ी शैडो (upper shadow) थी। यह ऊंचे लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग का संकेत है। इस प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना रहा,क्योंकि बैंकिंग इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था और शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज,मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बने हुए थे। RSI बढ़कर 66.60 हो गया और इसमें बुलिश क्रॉसओवर देखा गया। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। इन सबसे पता चलता है कि ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है,हालांकि मोमेंटम थोड़ा धीमा हुआ है और निकट भविष्य में कुछ कंसोलिडेशन या रेंज-बाउंड मूवमेंट जारी रह सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

25 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 383 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,747 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX निचले स्तरों और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा। इसमें 2.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 13.05 पर आ गया,जिससे बुल्स को राहत मिली। अगर यह 12 के स्तर से नीचे आता है तो बुल्स का भरोसा और बढ़ सकता है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 25 जून को पिछले सेशन के 1.21 से गिरकर 1.06 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।