कुवैत ने अपना पहला 15 साल का गोल्डन वीजा भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को सौंपा! जानिए लुलु ग्रुप के चेयरमैन की पूरी कहानी

MA Yusuff Ali news: खाड़ी देशों में अपने बिजनेस का लोहा मनवाने वाले भारतीय मूल के दिग्गज कारोबारी और लुलु ग्रुप के चेयरमैन एमए यूसुफ अली के नाम एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। कुवैत सरकार ने अपने नए लॉन्च किए गए 15 साल के गोल्डन रेजिडेंसी (गोल्डन वीजा) का पहला रिसीपिंट भारतीय अरबपति एमए यूसुफ अली को चुना है। यह सम्मान कुवैत द्वारा निवेशकों, बिजनेस लीडर्स और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए लॉन्ग-टर्म वीजा कार्यक्रम के औपचारिक रोलआउट के क्रम में किया गया है।

हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत सिटी में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान कुवैत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा ने लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन और एमडी यूसुफ अली को यह सम्मान सौंपा।

कौन हैं एमए यूसुफ अली?

एमए यूसुफ अली खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली भारतीय मूल के व्यवसायियों में से एक हैं। यूसुफ अली रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘लुलु ग्रुप इंटरनेशनल’ के संस्थापक हैं। केरल में जन्मे यूसुफ अली ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर लुलु को मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक बना दिया है। लुलु ग्रुप का बिजनेस आज खाड़ी देशों, एशिया और उससे आगे कई देशों में फैला हुआ है।

यह ग्रुप मुख्य रूप से हाइपरमार्केट्स, सुपरमार्केट्स, शॉपिंग मॉल्स और लॉजिस्टिक्स के कारोबार चलाता है। यूसुफ अली का यह बिजनेस नेटवर्क दुनिया भर में हजारों लोगों को रोजगार देता है। रिटेल के अलावा खाड़ी क्षेत्र के हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी उनका भारी निवेश है।

कुवैत ने एमए यूसुफ अली को ही क्यों चुना?

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक फैसला देश की अर्थव्यवस्था में यूसुफ अली के लंबे समय से चले आ रहे योगदान को ध्यान में रखकर लिया गया है। लुलु ग्रुप ने कुवैत के रिटेल सेक्टर में अपनी एक बेहद मजबूत उपस्थिति स्थापित की है। इसके साथ ही इस ग्रुप ने कुवैत में फूड सप्लाई चेन को मजबूत करने, कंज्यूमर मार्केट का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या है कुवैत का नया गोल्डन रेजिडेंसी प्रोग्राम?

यह गोल्डन रेजिडेंसी कार्यक्रम कुवैत की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रखकर उसका डाइवर्सिफाई करने की कोशिश से जुड़ा एक इनिशिएटिव है। इसके जरिए देश में बड़े निवेश और कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की योजना है। पारंपरिक निवास परमिट अक्सर एंप्लॉयर स्पॉन्सरशिप से जुड़े होते हैं और उन्हें बार-बार रिन्यू कराना पड़ता है। इनके उलट कुवैत का यह नया कार्यक्रम निवेशकों को लंबे समय की स्थिरता और अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

कुवैती अधिकारियों के मुताबिक इस पहल को इंटीरियर मिनिस्ट्री, कुवैत प्रत्यक्ष निवेश संवर्धन प्राधिकरण और नागरिक सूचना के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण (PACI) के बीच आपसी समन्वय के जरिए तैयार किया गया है।

इस गोल्डन वीजा की खासियतें जान लीजिए

कुवैत का यह नया वीजा कार्यक्रम प्रमुख रूप से बड़े निवेशकों, उद्यमियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अत्यधिक कुशल पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

15 साल का परमिट: इसके तहत योग्य लोगों को 15 साल का रिन्यूएबल (नवीकरणीय) रेजिडेंसी परमिट दिया जाता है।

लॉन्ग-टर्म स्थिरता: बार-बार वीजा रिन्यू कराने की झंझटों से मुक्ति मिलती है।

एंप्लॉयर पर निर्भरता नहीं: यह वीजा एंप्लॉयर स्पॉन्सर्ड वीजा पर निर्भरता को काफी कम करता है।

परिवार को भी लाभ: इस योजना के तहत मिलने वाले रेजिडेंसी के लाभ मुख्य लाभार्थी के साथ-साथ उसके करीबी परिवार के सदस्यों को भी मिल सकते हैं।

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2017 से पहले तत्कालीन सरकार ही सबसे बड़ी अपशगुन थी : योगी आदित्यनाथ

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के सम्मान समारोह कार्यक्रम को संबोधित किया

– 2017 से पहले नौकरी निकलती नहीं थी और निकल गई तो चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली पर निकल पड़ती थी

– मुख्यमंत्री ने जताया युवा शक्ति पर भरोसा, कहा- युवाओं के दम पर बनेगा वन ट्रिलियन डॉलर का उत्तर प्रदेश

– पहले यूपी के नाम पर बाहर के लोग चिढ़ते थे, सरकारी नौकरी पर एक खानदान का अधिकार था

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए न रोजगार था और न पारदर्शी भर्ती प्रणाली। सरकारी नौकरियों पर एक परिवार का अधिकार था और बिना पैसे कोई काम नहीं होता था। उत्तर प्रदेश कभी बीमारू नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकार की सोच व कार्यशैली बीमार थी। 2017 से पहले तत्कालीन राज्य सरकार ही प्रदेश की सबसे बड़ी अपशगुन थी। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां दी हैं, जबकि सवा तीन करोड़ से अधिक युवा व कारीगर रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े हैं।

 

मुख्यमंत्री बुधवार को विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, प्रशिक्षित युवाओं से संवाद किया और उनके उत्पादों की सराहना की।

 

सीएम ने कहा कि इस वर्ष यूनेस्को ने विश्व युवा कौशल दिवस की थीम “साझा भविष्य के लिए कौशल” निर्धारित की है। अवसर तभी साकार होते हैं, जब दूरदृष्टि और सकारात्मक सोच वाली सरकार हो। दुनिया का सबसे अधिक युवा वर्ग उत्तर प्रदेश में है और यह गर्व का विषय है। यह हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है। हम इस स्केल को स्किलिंग से जोड़कर यूपी की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। युवा शक्ति किसी भी चुनौती का समाधान बन सकती है। युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण व अवसर मिलें तो वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। 

 

पहले यूपी के नाम से चिढ़ते थे बाहरी लोग

सीएम ने कहा कि पिछली सरकारों ने ऐसे हालात बना दिए कि बाहर के लोग यूपी के नाम से चिढ़ते थे। कोई युवा डिप्लोमा या डिग्री लेकर प्रदेश से बाहर जाता था तो उसे अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता था। सरकारी नौकरियों पर एक खानदान का अधिकार था, पारदर्शिता का अभाव था। भर्ती प्रक्रियाओं में भाई-भतीजावाद व भ्रष्टाचार हावी था। बिना पैसे कोई काम नहीं होता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि धन्ना सेठ हो या झोपड़ी में रहने वाला इंसान, रोटी केवल दो ही खाता है। जिसके पास सीमित आवश्यकता है, उसको नींद अच्छी आती है। जिसके पास चोरी का पैसा होगा, वह ठीक से सो भी नहीं पाता। उसके लिए तो जीवन नर्क से बदतर है।

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स्किल डेवलपमेंट को मिली नई पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पहली बार देश में कौशल विकास मंत्रालय का गठन कर स्किल डेवलपमेंट को नई पहचान और दिशा दी। इसे युवाओं के रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनाया गया है। करीब 10 वर्ष पहले यहां मौजूद अधिसंख्य युवा छात्र थे और माता-पिता पर निर्भर थे। तब प्रदेश की स्थिति बेहद खराब थी।

युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। स्कूल शिक्षा की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी और युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। कानून-व्यवस्था की स्थिति भी कमजोर थी। न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी और न ही आम नागरिक।

 

उत्तर प्रदेश पर प्रकृति व परमात्मा की विशेष कृपा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रकृति व परमात्मा की विशेष कृपा वाला प्रदेश है। यहां गंगा, यमुना, सरयू, गोमती, राप्ती व घाघरा जैसी नदियों के रूप में प्रचुर जल संसाधन उपलब्ध हैं, जो दुनिया के बहुत कम क्षेत्रों को प्राप्त हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन, नैमिषारण्य, विंध्यवासिनी धाम, मां पाटेश्वरी धाम, शाकंभरी धाम और महाकुंभ जैसी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों ने उत्तर प्रदेश को विशिष्ट पहचान दी है।

प्रदेश के पास प्रतिभाशाली युवा और मेहनती अन्नदाता किसान जैसी अमूल्य शक्तियां भी हैं। उत्तर प्रदेश कभी बीमारू नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की सोच और कार्यशैली बीमारू मानसिकता का प्रतीक थी। जो सरकार अपने युवाओं की उपेक्षा करे, कारीगरों को पलायन के लिए मजबूर करे और अन्नदाता किसानों का सम्मान न करे, ऐसी व्यवस्था जनता के हित में नहीं हो सकती। 

 

कोरोना काल में भी जारी रहा ब्रह्मोस प्रोजेक्ट

2017 के बाद सरकार की कार्यशैली में आए परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सीएम ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की ओर से लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव आया था। उस समय रक्षा मंत्री ने भी इच्छा जताई थी कि यदि भूमि निःशुल्क उपलब्ध हो जाए तो परियोजना को लखनऊ में स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद करीब 200 एकड़ भूमि चिह्नित की गई। कोरोना काल के दौरान भी प्रोजेक्ट का काम चलता रहा। इस प्रोजेक्ट को यूपी में स्थापित करने को लेकर कई सुझाव आए, लेकिन हमने इसे लखनऊ में लगाने का ही निर्णय किया, ताकि इस प्रोजेक्ट में यूपी के नौजवानों को रोजगार भी सुनिश्चित कराया जा सके।

इसके लिए एकेटीयू को कैंपस चयन का केंद्र बनाया गया। इसके बाद आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके 500 युवाओं को रोजगार मिला। इनमें लखनऊ, प्रतापगढ़, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर, बदायूं, बरेली, गोरखपुर, आजमगढ़, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा और अयोध्या समेत कई जिलों के युवा शामिल हैं।

 

एमएसएमई इकाइयां यूपी की मजबूत आधारशिला

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग, मेरठ का खेल उद्योग, भदोही का कालीन उद्योग, लखनऊ की चिकनकारी, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और बनारसी साड़ी जैसे पारंपरिक उत्पाद उत्तर प्रदेश की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकारों ने इन पारंपरिक उद्योगों को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं दिया।

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बदलती तकनीक के अनुरूप ट्रेनिंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती तकनीक के अनुरूप प्रदेश के आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3 डी प्रिंटिंग से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये सुविधाएं केवल लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा या गाजियाबाद तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि महोबा, चित्रकूट, सोनभद्र, बलिया, बहराइच समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी आधुनिक कौशल प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनने का लक्ष्य रखें। दुनिया कुशल युवाओं का इंतजार कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक जिले में एमएसएमई, कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, श्रम एवं सेवायोजन विभाग के समन्वय से सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन स्थापित किए जा रहे हैं।

 

विदेशी भाषा का भी मिलेगा प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई युवा जापान या किसी अन्य देश में रोजगार करना चाहता है तो उसे संबंधित देश की भाषा का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और रोजगार उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाएगा। राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रोजगार की मांग के अनुरूप युवाओं को तैयार करने की व्यापक व्यवस्था विकसित की जा रही है। हर घर नल योजना, पीएनजी गैस विस्तार, डिजिटल इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत विनिर्माण और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना होगा।

 

ये 27 हजार रुपए कई लाख पर भारी

सीएम योगी ने कार्यक्रम में उपस्थित एक युवती का उल्लेख करते हुए कहा कि वह 27 हजार रुपए प्रतिमाह की आय अपने दम पर अर्जित कर रही है और अपनी मां का उपचार करा रही है। यही वास्तविक स्वावलंबन है। यह 27000 रुपए कई लाख पर भारी हैं। उन्होंने उस युवती की मां के उपचार में हरसंभव सरकारी सहायता देने का आश्वासन दिया।

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कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास विभाग के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान एवं मुकेश शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा डॉ. हरिओम, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन एम.के. सुंदरम और प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यूपी की हर्बल टी की सुगंध पहुंची अमेरिका-यूरोप

Vidur Herbal Tea

Vidur Herbal Tea: ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब जड़ी-बूटियों से तैयार ऑर्गेनिक हर्बल टी के जरिए विदेशों में भी अपनी पहचान बना रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार से मिल रहे प्रोत्साहन और योजनाओं के सहयोग से शुरू हुआ यह प्रयास आज सफल महिला उद्यमिता का मॉडल बन चुका है। इस 'विदुर हर्बल टी' की फ्रेंचाइजी की मांग अब अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से हो रही है, जबकि दिल्ली, पंजाब, ओडिशा, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में यह बड़ी मात्रा में मंगाई जा रही है।

 

एक लाख के ऋण से शुरू हुआ सफल कारोबार

बिजनौर के ब्लॉक कोतवाली गांव टांडा मैदास लखी वाला की बबिता रानी बताती हैं कि योगी सरकार की योजना से समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत समूह ने एक लाख रुपये का ऋण लेकर 'विदुर हर्बल टी' की शुरुआत की थी। आज समूह की 10 महिलाएं मिलकर पूरी तरह ऑर्गेनिक हर्बल टी तैयार कर रही हैं। इस उद्यम ने महिलाओं को नियमित आय के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का नया माध्यम भी तैयार किया है। इसके जरिए समूह की महिलाएं लखपति बन रही हैं।

जड़ी-बूटियों से तैयार होती है खास हर्बल टी

विदुर हर्बल टी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक संरचना है। इसे ऑर्गेनिक लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, जामुन, कच्ची हल्दी, अमरूद की पत्ती, दालचीनी, तुलसी, हरी इलायची और सौंफ से तैयार किया जाता है। यह दो प्रकार से तैयार होती है। पहली पारंपरिक जड़ी-बूटियों से बनी ऑर्गेनिक हर्बल टी और दूसरी 'अर्जुना हृदय शक्ति', जिसे दूध और पानी दोनों के साथ तैयार किया जा सकता है।

 

प्रदेश से बाहर भी तेजी से बढ़ रहा कारोबार

तत्कालीन सीडीओ बिजनौर और वर्तमान में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने इन ग्रामीण महिलाओं को योगी सरकार की योजनाओं से जोड़ा। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह की ये महिलाएं आज आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम हुई हैं। 

 

विदुर हर्बल टी का कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है। बिजनौर में 35 आउटलेट और कैफे में इसका प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा मुरादाबाद में भी महिलाओं द्वारा दो विदुर हर्बल टी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। हाल ही में मुरादाबाद के सिविल लाइन स्थित कचहरी गेट के पास नया विदुर हर्बल टी सेंटर शुरू किया गया है। जल्द ही मुरादाबाद में 5 और कैफे की शुरुआत करने की तैयारी है।

Vidur Herbal Tea

महिलाएं ही तैयार करती हैं यहां का हर उत्पाद

इस पहल की एक और विशेषता यह है कि विदुर हर्बल टी से जुड़े सभी उत्पादों का निर्माण स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही करती हैं। उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथ में है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को भी नई पहचान मिली है।

ग्रामीण आजीविका मिशन बना महिला सशक्तीकरण का माध्यम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। विदुर हर्बल टी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं स्थानीय संसाधनों के आधार पर ऐसा उद्यम खड़ा कर सकती हैं, जो देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना सके।

 

लखनऊ में शहीद पथ पर बनेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, नितिन गडकरी ने दिए डीपीआर बनाने के निर्देश

new elevated corridor will be built on Shaheed Path in Lucknow

– योगी सरकार की कानून व्यवस्था और विकास मॉडल की सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की सराहना

– रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले- योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों पर

– शहीद पथ पर एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक बनेगा 23 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

– केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गिनाईं यूपी में भावी योजनाएं

Uttar Pradesh News : लखनऊ में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए शहीद पथ पर बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साकार होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक लगभग 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं। नितिन गडकरी ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर तक भूमि पूजन कर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। दोनों वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने योगी सरकार की कार्यशैली की खुलकर सराहना की। 

 

सोमवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,850 करोड़ रुपए से अधिक की 3 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। 

 

शहीदपथ पर वाहन चालकों को जाम से मिलेगी राहत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र सरकार थी, तब उनके सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए शहीद पथ का शिलान्यास हुआ था। आज यही शहीद पथ लखनऊ की लाइफलाइन बन चुका है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए अब इसके ऊपर एलिवेटेड रोड बनाना समय की आवश्यकता है, जिससे वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में इसी कॉरिडोर पर मेट्रो भी संचालित की जाए, ताकि लोगों को तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सके।

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तीन लेयर फ्लाईओवर बनेगा दुनिया के आकर्षण का केंद्र

नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ में प्रस्तावित तीन लेयर एलिवेटेड फ्लाईओवर विश्व स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस परियोजना में आधुनिक मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे सड़क और सार्वजनिक परिवहन दोनों को मजबूती मिलेगी। किसी भी राज्य के विकास की नींव मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होती है। पानी, बिजली, परिवहन और संचार व्यवस्था बेहतर होने से उद्योग, व्यापार और निवेश बढ़ता है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी व बेरोजगारी कम होती है।

 

लखनऊ-सीतापुर सिक्स लेन हाईवे सहित कई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि लखनऊ से सीतापुर तक प्रस्तावित छह लेन राजमार्ग को भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तत्काल स्वीकृति दे दी है और जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 से 60 हजार करोड़ रुपए की नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

अगले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग पांच लाख करोड़ रुपए के विकास कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ के किसान पथ पर सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा अयोध्या-गोंडा बाईपास, आनंदनगर-महराजगंज बाईपास, पडरौना-तमकुही बाईपास तथा दादरी-लालकुआं छह लेन एलिवेटेड रोड जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

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रक्षा मंत्री और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी की सराहना की

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास पूरे देश में चर्चा का विषय है। किसी भी प्रदेश के विकास की पहली शर्त मजबूत कानून व्यवस्था होती है और योगी सरकार ने यह स्थापित करके दिखाया है। लखनऊ के विकास से जुड़े हर प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया और आने वाले समय में लखनऊ के आसपास बड़े उद्योग स्थापित होंगे।

 

यूपी में सीएम योगी ने समाप्त किया गुंडाराजः नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत कर लोगों का विश्वास जीता और गुंडाराज को समाप्त किया। किसी भी देश और राज्य के विकास में चार बातें महत्वपूर्ण होती हैं।

सबसे पहली आवश्यकता मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की होती है। इंफ्रास्ट्रक्चर के चार प्रमुख आधार हैं वाटर, पावर, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन, जहां ये चारों व्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, वहां व्यापार, उद्योग और कारोबार तेजी से बढ़ते हैं।

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इसके साथ ही पूंजी निवेश आता है। जहां व्यापार, उद्योग और निवेश बढ़ता है, वहां रोजगार का सृजन होता है और जहां रोजगार का निर्माण होता है, वहां गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी स्वतः दूर हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है। 

भारत में इंजीनियर बनने का सपना फीका क्यों पड़ रहा है?

Engineering Colleges Closing in India

समीरात्मज मिश्र

एक समय इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना एक सुरक्षित कारोबार माना जाता था। आज उनमें से कई खाली हैं या बंद हो रहे हैं। आखिर ऐसा क्या बदला कि इंजीनियर बनने का सपना लाखों युवाओं के लिए पहले जैसा आकर्षक नहीं रहा? ALSO READ: पर्यावरण संरक्षण में क्यों पिछड़ रहा है भारत

 

करीब डेढ़ दशक पहले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता था। हर साल हजारों छात्र बीटेक में दाखिला लेते थे और निजी कॉलेजों का तेजी से विस्तार हो रहा था। लेकिन अब वही संस्थान छात्रों के इंतजार में खाली पड़े हैं। कई कॉलेज बंद हो चुके हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं। एक समय जिस तकनीकी शिक्षा को रोजगार की गारंटी माना जाता था, वही मॉडल आज सवालों के घेरे में है।

 

यही नहीं, इंजीनियरिंग की महंगी डिग्री लेने के बाद छात्रों को या तो बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है या फिर बहुत कम तनख्वाह वाली नौकरियां मिलती हैं। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियरिंग और एमबीए जैसे तमाम अन्य तकनीकी संस्थान धीरे-धीरे बंद होते जा रहे हैं।

 

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी एआईसीटीई की एक ताजा रिपोर्ट ने न सिर्फ इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक गंभीर चेतावनी दी है बल्कि देश के शैक्षिक परिवेश और बेरोजगारी की स्थिति पर भी सोचने को मजबूर किया है। एआईसीटीई के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देश भर में 58 से ज्यादा इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

 

जिन राज्यों में ये कॉलेज बंद हुए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष पर हैं। इन दोनों राज्यों में 12-12 संस्थान बंद हुए हैं जबकि मध्य प्रदेश में आठ और तेलंगाना और पंजाब में चार-चार संस्थान बंद हुए हैं। इन 58 संस्थानों में से तीन सरकारी मदद वाले थे, जबकि बाकी निजी तौर पर संचालित हो रहे थे। ALSO READ: अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

 

क्यों बंद हो रहे हैं कॉलेज?

दरअसल, एआईसीटीई उन स्थितियों में किसी संस्थान को बंद करने का आदेश देती है जब वहां छात्रों का दाखिला लगातार कम हो रहा हो, संस्थान में स्वीकृत संख्या में शिक्षकों की कमी हो और इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन के नियमों का सही तरीके से पालन न हो रहा हो।

 

एआईसीटीई भारत में तकनीकी शिक्षा के लिए कानूनी तौर पर बनी राष्ट्रीय संस्था और नियामक है। यह इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे कार्यक्रमों की देख-रेख करती है और गुणवत्ता और मानक बनाए रखने की निगरानी करती है।

 

नोएडा के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनेकिल इंजीनियरिंग पढ़ाने वाले एक शिक्षक नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि चार साल की पढ़ाई के दौरान एक छात्र औसतन आठ-दस लाख रुपये खर्च करता है लेकिन इस खर्च के अनुरूप उन्हें नौकरी नहीं मिलती।

 

उनके मुताबिक, “कई कॉलेजों की फीस तो और भी ज्यादा है। चार साल में इंजीनियर बनकर जब छात्र बाहर जाते हैं तो उन्हें 15-20 हजार महीने की नौकरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। यही नहीं, इसके बाद वो फिर उन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं जिसके लिए सिर्फ स्नातक की अर्हता होती है। तो धीरे-धीरे पेरेंट्स को भी लगता है कि बीटेक कराने से फायदा ही क्या?” ALSO READ: पश्चिम बंगाल: पुलिस मुठभेड़ में अभियुक्त की मौत से उठे सवाल

 

समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है

यानी समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है, बल्कि चार साल की पढ़ाई पर होने वाले निवेश और उससे होने वाले लाभ या रिटर्न के बिगड़ते समीकरण की भी है। दीपाली राज मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं। नोएडा के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। वो बताती हैं, “कैंपस प्लेसमेंट में जो ऑफर मिले, उनकी सैलरी चार साल की पढ़ाई पर हुए खर्च के मुकाबले बहुत कम थी। इसलिए मैंने बैंकिंग की तैयारी शुरू कर दी। कम से कम वहां नौकरी की स्थिरता तो है”

 

दीपाली पिछले तीन साल से तैयारी में हैं लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। दीपाली कहती हैं कि उनकी तरह हजारों की संख्या में इंजीनियरिंग करने वाले छात्र इन परीक्षाओं की तैयारी क रहे हैं। वजह यह कि कम से कम स्थाई नौकरी तो मिल जाएगी, बीटेक की डिग्री में इसकी गारंटी नहीं है।

 

प्राइवेट संस्थानों के बंद होने के पीछे और भी कई कारण हैं। जानकारों के मुताबिक, एक तो ये अभी भी पुराने पाठ्यक्रमों के हिसाब से चल रहे हैं जबकि आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के जमाने में चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं। इसके अलावा बीटेक के पाठ्यक्रमों का विकल्प अन्य पाठ्यक्रमों में भी है जिन्हें पूरा करने में समय भी कम लगता है और खर्च भी।

 

गाजियाबाद के एबीईएस कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर आदित्य टंडन बताते हैं, “बीटेक में भीड़ बढ़ गई है। डेटा साइंस में भरमार हो गई है और इसमें सिर्फ बीटेक ही नहीं चाहिए, दूसरे क्षेत्रों के लोग भी आते हैं। इसके अलावा, बीटेक के विकल्प के रूप में बीसीए, बीएससी कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्स तीन साल में ही हो जा रहे हैं। इनका पाठ्यक्रम बीटेक जैसा ही है। यही नहीं, कई प्रोग्राम ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग मोड में भी हैं। तो छात्रों को यह भी एक विकल्प मिल जाता है। छात्रों की संख्या में कमी की वजह ये भी है।”

 

तकनीक तेजी से बदल रही है

पिछले कुछ वर्षों में आईटी और तकनीकी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया भी बदली है। कई कंपनियां अब केवल डिग्री के आधार पर भर्ती करने के बजाय उम्मीदवार के कौशल, प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और समस्या सुलझाने की क्षमता पर ज्यादा जोर दे रही हैं। ऐसे में केवल बीटेक की डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं रह गई है।

 

यहीं एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा होता है कि यदि इंजीनियरिंग का आकर्षण कम हो रहा है, तो फिर हर साल लाखों छात्र जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी क्यों कर रहे हैं?

 

दिल्ली, कोटा, पुणे, कानपुर जैसी जगहों पर लाखों की संख्या में छात्र इन्हीं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। दिल्ली में एक इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले दुर्गेश कुमार खुद भी आईआईटी से इंजीनियर रहे हैं। नौकरी करने की बजाय उन्होंने छात्रों को पढ़ाने का फैसला किया।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में दुर्गेश कहते हैं, “यह कहना ठीक नहीं है कि इंजीनियरिंग में लोगों की दिलचस्पी कम हो गई है। लेकिन हां, उन संस्थानों से बीटेक का क्रेज जरूर खत्म हुआ है जहां पढ़ाई, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट का स्तर कमजोर है। जो संस्थान इसे सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाए हुए हैं। आज भी आईआईटी, एनआईटी और तमाम अन्य संस्थानों की मांग वैसी ही बनी हुई है जैसी बीस-तीस साल पहले थी। इसका कारण है कि इन संस्थानों ने अपनी गुणवत्ता बरकरार रखी है और आधुनिक तकनीक और समय के हिसाब से खुद को ढालते रहे हैं। ज्यादातर संस्थान सरकारी नियंत्रण में हैं जहां पैसा कमाना संस्थान का लक्ष्य नहीं बल्कि संस्थान से बेहतर प्रशिक्षित लोग तैयार करना है।”

 

सिर्फ यही संस्थान टिक पाएंगे

जानकारों का मानना है कि उद्योगों की मांग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी नई तकनीकों की ओर बढ़ रही है। जिन संस्थानों ने समय के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम, प्रयोगशालाओं और उद्योगों से जुड़ाव को मजबूत नहीं किया, वहां छात्रों का रुझान लगातार घटा है। आदित्य टंडन कहते हैं कि आने वाले समय में वही संस्थान टिक पाएंगे, जो आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ कौशल आधारित शिक्षा और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर देंगे।

 

उनके मुताबिक, “चूंकि निजी क्षेत्र के ज्यादातर संस्थान किसी तरह मान्यता लेने की कोशिश करते हैं, इसके लिए तमाम मानकों का उल्लंघन भी करते हैं लेकिन जब छात्र यहां आते हैं तो खुद को ठगा महसूस करते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे वहां छात्रों की संख्या में कमी आने ही लगती है। यही नहीं, संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की गुणवत्ता और उनका प्रोफाइल भी बहुत मायने रखता है। बहुत से निजी संस्थान इस तरफ भी ज्यादा ध्यान नहीं देते। नतीजा, छात्रों की कमी होना ही है।”

 

दरअसल, यह कहानी केवल 58 इंजीनियरिंग कॉलेजों के बंद होने की नहीं है बल्कि यह भारत की तकनीकी शिक्षा के उस दौर के खत्म होने की कहानी है, जिसमें सिर्फ डिग्री मिल जाना ही सफलता की गारंटी माना जाता था। अब छात्र डिग्री नहीं, रोजगार तलाश रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में वही इंजीनियरिंग संस्थान टिक पाएंगे जो बदलती तकनीक, उद्योगों की जरूरत और छात्रों की अपेक्षाओं के साथ खुद को बदल सकेंगे। बाकी संस्थानों के लिए चुनौती और कठिन होती जाएगी।

EPFO का बड़ा अपडेट, नौकरी बदलने पर अब 2 तरीकों से करें PF ट्रांसफर, मिनटों में होगा पूरा प्रोसेस

epfo

अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है, तो अब आपका Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) में जमा Provident Fund (PF) बैलेंस ट्रांसफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। EPFO के नए सदस्य पोर्टल पर कर्मचारियों को अपने पुराने नियोक्ता (Employer) के PF खाते से नए खाते में राशि ट्रांसफर करने के लिए दो आसान विकल्प दिए गए हैं।

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EPFO का कहना है कि इस नए फीचर का उद्देश्य PF ट्रांसफर प्रक्रिया को सरल बनाना, कागजी कार्रवाई कम करना और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को बिना किसी अनावश्यक देरी के एक ही खाते में समेकित करना है।

 

EPFO पोर्टल में हुआ बड़ा अपग्रेड

 

हाल ही में EPFO के सदस्य पोर्टल में डेटाबेस कंसोलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड किया गया था। इस दौरान पोर्टल लगभग दो सप्ताह तक प्रभावित रहा और ऑनलाइन सेवाओं की बहाली में कई बार देरी हुई। अब पोर्टल की सेवाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। हालांकि EPFO ने कहा है कि फिलहाल PF क्लेम और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के निपटान में कुछ समय लग सकता है।

 

नौकरी बदलने पर PF बैलेंस ट्रांसफर करने के दो तरीके

 

PF ट्रांसफर शुरू करने से पहले कर्मचारियों को अपने Universal Account Number (UAN) की मदद से EPFO सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वे निम्नलिखित दो तरीकों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं।

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1. 'Request for Transfer of Account' विकल्प
 

2. 'Member Service History' के जरिए

 

EPFO 3.0 में कर्मचारियों को Member Service History सेक्शन में अपने पुराने और वर्तमान रोजगार की पूरी जानकारी देखने की सुविधा मिलती है।

 

  • यदि कोई PF ट्रांसफर लंबित नहीं होगा तो स्टेटस “No” दिखाई देगा।
  • इसके बाद Claim लिंक पर क्लिक करें।
  • Form 13 के जरिए Service Transfer Claim दर्ज करें।
  • इसके बाद आपकी PF ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
  • UAN नहीं पता तो क्या करें?

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अगर आपको अपना Universal Account Number (UAN) याद नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इसे—

 

  • अपनी नवीनतम Salary Slip में देख सकते हैं।
  • या फिर अपने Employer (नियोक्ता) से प्राप्त कर सकते हैं।
  • कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
  • PF ट्रांसफर की प्रक्रिया होगी आसान।
  • कागजी कार्रवाई में होगी कमी।
  • पुराने और नए PF खाते को एक जगह समेकित करना होगा सरल।
  • रिटायरमेंट सेविंग्स का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
  • नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर में देरी की संभावना होगी कम।

योगी के नेतृत्व में सबसे बड़ा जल संरक्षण अभियान, देश के 27% अमृत सरोवर यूपी में

amrit sarovar uttar pradesh: उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश के लिए एक नया मॉडल तैयार कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रिकॉर्ड 20 हजार अमृत सरोवर बनाए जा चुके हैं और पिछले पांच वर्षों में करीब पौने दो लाख तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और पूरे देश के कुल अमृत सरोवरों में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की है।

 

पिछले पांच वित्तीय वर्षों में जल संबंधी कार्यों पर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक का काम किया गया, जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है। जल संरक्षण की इस व्यापक मुहिम का असर अब खेती, भूजल स्तर, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।

 

जल संरक्षण बढ़ाने के लिए पहले मनरेगा के तहत कुल 266 अनुमन्य कार्यों में से 78 कार्य जल संरक्षण से संबंधित रहे। वहीं, अब वीबी-जीराम-जी के तहत कुल 318 अनुमन्य कार्य हैं, जिनमें से 107 कार्य जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण से संबंधित हैं। इनमें चेक डैम का निर्माण, सोक पिट का निर्माण, रुफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, तालाब का निर्माण, जलाशयों का पुनरोद्धार, बांधों का निर्माण, मेड़बन्दी, पौधारोपण शामिल हैं।

yogi adityanath in rampur

उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ा

जल संरक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है, जिसकी तुलना में उत्तर प्रदेश लगभग तीन गुना आगे है। यह उपलब्धि केवल सरकारी निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को जनभागीदारी से जोड़ने का परिणाम है।

हर गांव में जल संरक्षण बना जन आंदोलन

योगी सरकार ने अमृत सरोवर योजना को केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया। गांवों में पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, नए जलाशयों का निर्माण, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ी और जल संकट से जूझ रहे इलाकों को स्थायी समाधान मिलने लगा।

खेती, भूजल और पर्यावरण को मिल रहा बड़ा सहारा

अमृत सरोवरों और तालाबों के निर्माण का सबसे बड़ा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को राहत मिली है और भूजल स्तर में व्यापक सुधार आया है। जलाशयों के आसपास हरियाली बढ़ी है, जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिली है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया आधार

जल संरक्षण अभियान का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ा है। अमृत सरोवरों में मत्स्य पालन, पशुपालन, सिंचाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के नए अवसर विकसित हुए हैं। वीबी-जीराम-जी के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला, जबकि जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भी काफी वृद्धि हुई है।

जल संरक्षण में राष्ट्रीय मॉडल बना उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण को विकास, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे देश के अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है। अमृत सरोवरों, तालाबों के पुनर्जीवन और व्यापक जल संरक्षण कार्यों ने यह साबित किया है कि सुनियोजित नीति, जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से जल संकट का स्थायी समाधान संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है।

नेपाल में फिर जेन-जी प्रदर्शन; 3 दिन में 3 आत्मदाह:बेरोजगारी के खिलाफ गुस्सा; पीएम बालेन शाह का इस्तीफा मांगा

नेपाल में युवाओं की बढ़ती नाराजगी फिर से सड़कों पर दिखाई देने लगी है। पिछले तीन दिनों में तीन युवाओं ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। इनमें से दो की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से झुलसा हुआ अस्पताल में भर्ती है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ‘बालेन’ के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। राजधानी काठमांडू में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने सरकार पर युवाओं में उम्मीद और भरोसा जगाने में विफल रहने का आरोप लगाया है। जेन-जी नेपाल संगठन ने प्रधानमंत्री बालेन शाह पर जनविरोधी और निरंकुश तरीके से शासन चलाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि बजट व नीतियों में युवाओं के रोजगार और आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। 2023 में बालेन शाह ने आत्मदाह को सरकार की विफलता कहा था 2023 की वह घटना भी चर्चा में है, जब प्रेम आचार्य ने आत्मदाह किया था। उस समय काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह ने इसे राज्य की चरम विफलता बताया था। अब मौजूदा घटनाओं पर उनकी चुप्पी विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के निशाने पर है। नेपाल में लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने युवाओं की मानसिक स्थिति, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए तो विरोध और तेज हो सकता है। GenZ प्रोटेस्ट में विरोध का चेहरा बने बालेन 2022 में मेयर बनने के बाद बालेन ने शहर की सफाई, विरासत संरक्षण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के कदम उठाए। अवैध निर्माण पर कार्रवाई से ट्रैफिक सुधरा, हालांकि इसका विरोध भी हुआ, खासकर सड़क किनारे दुकानदारों और झुग्गी बस्तियों के लोगों से। बालेन शाह का प्रभाव केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहा। पिछले साल सितंबर में हुए प्रदर्शनों के दौरान उनके गाने युवाओं के बीच गूंजते रहे। इन प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई थी और इसके पीछे सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और धीमी अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा था। प्रदर्शनकारियों ने उनके गाने ‘नेपाल हंसेको’ को एक तरह का प्रतीक बना लिया। 5 मार्च को हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की, जिससे नेपाल की पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका लगा। बालेन शाह ने झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। 35 साल की उम्र में प्रधानमंत्री पद संभालते ही वह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं।

योगी सरकार का नकली दवा माफिया पर सबसे बड़ा प्रहार, आगरा में जालसाज सिंडिकेट की कमर टूटी

Yogi government's biggest crackdown on spurious drug mafia

– एफएसडीए आयुक्त के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 13 फर्मों पर मारे एक साथ छापे, अंतरराज्यीय नेटवर्क का हुआ खुलासा

– सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, नकली दवाएं, फर्जी बिलिंग और री-लेबलिंग का संगठित नेटवर्क बेनकाब

– बड़ी कार्रवाई के दौरान 14 संचालकों पर 3 नई एफआईआर, अब तक 58 थोक लाइसेंस निरस्त/निलंबित

– अब तक हुई कार्रवाई में कुल 9 मुकदमे दर्ज और 3.63 करोड़ रुपए की दवाएं जब्त

– एफएसडीए अब अवैध वसूली करने वालों पर भी कस रहा शिकंजा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ चल रहे प्रदेशव्यापी अभियान में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी और सबसे निर्णायक कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए के संगठित दवा सिंडिकेट की परतें खोल दी हैं। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, अवैध री-लेबलिंग, फिजीशियन सैंपलों की बिक्री और अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया।

कार्रवाई के बाद 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या 9 और निरस्त अथवा निलंबित थोक लाइसेंसों की संख्या 58 पहुंच गई है।

 

15 ड्रग इंस्पेक्टरों ने एक साथ मारे छापे

आयुक्त डॉ रोशन जैकब के नेतृत्व में गठित 15 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार (शू मार्केट), कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई की। जिन 13 फर्मों पर छापेमारी हुई उनमें मोहन ट्रेडर्स (कम्बूटोला), मनी मेडिकल (मुबारक महल), नीलकंठ (कृष्णा कॉम्प्लेक्स), वंश फार्मा (कम्बूटोला), प्रशांत मेडिकल (कम्बूटोला), पोरवाल मेडकेयर (शू मार्केट), एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस (मुबारक महल), डॉली ड्रग हाउस (कम्बूटोला), मनु फार्मा (कोतवाली के सामने), आरडीएम फार्मास्युटिकल्स (नवबिया मार्केट), इनाया फार्मा (कम्बूटोला) और नूर फार्मा (कम्बूटोला) शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल के परिसरों को पूरी तरह सील कर दिया गया, जबकि नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्स स्थित प्रतिष्ठान और मनु फार्मा पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 22(1)(d) के तहत रोक लगा दी गई। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए।

 

विभोर मेडिकल एजेंसी से खुला नकली दवाओं का अंतरराज्यीय नेटवर्क

एफएसडीए की ताजा जांच टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की Chymoral Forte और Shelcal के नकली होने संबंधी शिकायत से शुरू हुई। 7 नवंबर 2025 को अंशिका फार्मा के मालिक मनोज गुप्ता की जांच में पता चला कि उन्होंने Chymoral Forte की खेप विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदकर पाल ब्रदर्स (कोलकाता) को बेची थी। विभोर मेडिकल एजेंसी के प्रो. संजीव कुमार गुप्ता के यहां जांच में खरीद के बिल फर्जी मिले।

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उन्होंने दवाएं गुप्ता मेडिकल एजेंसी (गोरखपुर) और हर्षित ट्रेडर्स (आगरा) से खरीदने का दावा किया, लेकिन दोनों फर्मों ने इससे इनकार कर दिया। वहीं वरदान मेडिकल एजेंसी में “ESI SUPPLY NOT FOR SALE” अंकित दवाएं मिलीं और लैब जांच में Chymoral Forte अधोमानक तथा ACILOC नकली पाई गई, जिसकी टोरेंट फार्मा ने भी पुष्टि की। पूछताछ में अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने नकली दवाएं संजीव कुमार गुप्ता से बिना वैध बिल के खरीदी थीं।

जांच में विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और पाल ब्रदर्स का अंतरराज्यीय सिंडिकेट सामने आने पर संजीव कुमार गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, प्रियंका बंसल, अरुण कुमार गुप्ता और पाल ब्रदर्स के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 276, 277, 278, 316 और 318 में एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

 

अस्पताल की दवाओं की री-लेबलिंग से लेकर फर्जी बिलिंग तक, कई परतों में खुला सिंडिकेट

एफएसडीए की जांच में अस्पताल और सरकारी आपूर्ति की जीवनरक्षक दवाओं की री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ। 21 मई को युग फार्मा के प्रो. सचिन गुप्ता के यहां बिना कोल्ड-चेन रखे इंसुलिन इंजेक्शन और री-लेबलिंग मिली। पूछताछ में दवाओं की सप्लाई शारदा फार्मा के शिवम गुप्ता और आरएमडी फार्मा के राजेश गुप्ता तक पहुंची, जिसके बाद तीनों फर्में सील कर दी गईं। बाद में शारदा फार्मा के सीसीटीवी में नबील खान और सोनू बघेल संदिग्ध दवाएं हटाते दिखे।

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एसटीएफ गाजियाबाद की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे मोहित गुप्ता (महादेव फार्मा) से अस्पताल व सरकारी आपूर्ति की दवाएं बिना बिल खरीदकर उन पर लगी 'Not for Sale' पहचान हटाकर फर्जी लेबल और नई एमआरपी के साथ बाजार में बेचते थे। इस मामले में सचिन गुप्ता, शिवम गुप्ता, नितिन गुप्ता, राजेश गुप्ता, मोहित गुप्ता और हितेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं 1 से 3 जुलाई की जांच में वी.ए. मेडिकोज में Jardiance, Telma-H, Thyrox और Gluconorm PG-2 जैसी दवाओं की री-लेबलिंग, नकली Telma-H और फर्जी खरीद बिल मिले।

शोभित अग्रवाल ने दवाएं लाइसेंस निरस्त हो चुके हर्षित ट्रेडर्स से लेने की बात स्वीकार की, जबकि जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी के पुराने बिलों से करीब 1.88 करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग, अंकुर अग्रवाल द्वारा संजीव गुप्ता (विभोर मेडिकल एजेंसी) से बिना बिल नकली दवाएं खरीदने और सबूत मिटाने के प्रयास का खुलासा हुआ। साथ ही मोहित बंसल (रुद्रा एंटरप्राइजेज) और प्रवीण अग्रवाल (श्री भगवती मेडिकल एजेंसी, मथुरा) द्वारा फर्जी बिल, UP-80 EL-0069 वाहन व ऑटो-रिक्शा के जरिए नकली दवाओं को वैध दिखाने का खेल सामने आया।

इसके आधार पर वी.ए. मेडिकोज, शोभित अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, संजीव गुप्ता, मोहित बंसल और प्रवीण अग्रवाल समेत संबंधित आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

 

 3.63 करोड़ रुपए की अवैध दवाएं जब्त, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की परतें खुलीं

एफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आगरा में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ मई 2026 से लगातार चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक 3.63 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की नकली, अवैध तथा सरकारी और डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। यह अभियान केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिंडिकेट की आर्थिक और आपराधिक श्रृंखला को तोड़ने पर केंद्रित है।

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उन्होंने बताया कि पूरे अभियान के दौरान अनियमितताओं और अवैध कारोबार में संलिप्तता पाए जाने पर अब तक 58 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए जा चुके हैं। इस सिंडिकेट के खिलाफ पहले ही 6 नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं। अब 10 जुलाई की कार्रवाई के आधार पर तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए आगरा के कोतवाली फव्वारा थाने में तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर 9 हो जाएगी।

आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नकली दवाओं, अवैध री-लेबलिंग, फिजिशियन सैंपलों की कालाबाजारी और अंतरजनपदीय मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाए। इसके अलावा विभाग को ड्रग एसोसिएशनों द्वारा कुछ दवा व्यापारियों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें भी मिली हैं। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में किसी व्यापारी के आर्थिक शोषण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एक्सटॉर्शन का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।