CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

प्राइवेट सेक्टर के CSB Bank के शेयरों में 25 जून को दिन में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी। बीएसई पर भाव 322 रुपये के लो तक गया। शेयर में गिरावट की दो वजहें सामने आ रही हैं। पहली मुख्य वजह यह है कि ऐसी खबर है कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की अगुवाई वाली फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स, CSB बैंक में अपनी पूरी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चला है कि फेयरफैक्स ने IDBI बैंक में हिस्सेदारी की खरीद के लिए एक नई बोली लगाई है।

इस सौदे से सरकार और LIC, दोनों मुख्य शेयरधारकों को लगभग 50,000 करोड़ रुपये या 5 अरब डॉलर से कुछ अधिक मिलने की संभावना है। संशोधित प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और सौदा सही दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

इसलिए CSB Bank में बेच सकती है पूरा हिस्सा

संबंधित लोगों का यह भी कहना है कि फेयरफैक्स ने प्रतिबद्धता जताई है कि बैंकिंग क्षेत्र में IDBI बैंक ही उसका एकमात्र निवेश होगा। नतीजतन, IDBI Bank का अधिग्रहण करने पर वह CSB बैंक में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। ऐसा इसलिए क्योंकि RBI के नियमों के तहत कोई प्रमोटर दो बैंकिंग लाइसेंस नहीं रख सकता है।

फेयरफैक्स ने 2018 में CSB बैंक (जिसे तब कैथोलिक सीरियन बैंक के नाम से जाना जाता था) को बचाने के लिए एक बेलआउट डील के तहत 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। एक साल बाद बैंक को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया।

गोल्ड की कीमत में गिरावट भी एक वजह

सोने की कीमतों में दबाव के कारण गुरुवार को गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। साथ ही CSB बैंक लिमिटेड जैसे गोल्ड फाइनेंसिंग से जुड़े लेंडर्स के शेयरों में भी गिरावट है। गोल्ड के फिसलने की वजह है कि महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते US फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने और उसके बाद US डॉलर के मजबूत होने का डर बना हुआ है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है, जो पिछले 7 महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है। CSB Bank के कुल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा लगभग 42-45% है।

CSB Bank का मार्केट कैप घटकर 5600 करोड़ रुपये रह गया है। शेयर साल 2026 में अब तक 33 प्रतिशत गिरा है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया 37 पैसे मजबूत, जानें क्या है वजह

INR vs USD:  गुरुवार (25 जून) को भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 94.30 पर मज़बूती से खुला, जो बुधवार (26 जून) के 94.67/$ के बंद भाव से 37 पैसे ज़्यादा है। इसे ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के संभावित दखल से सपोर्ट मिला।

पिछले सेशन में साइकोलॉजिकली ज़रूरी 95/$ के निशान के पास पहुंचने के बाद करेंसी में सुधार हुआ। ट्रेडर्स ने कहा कि RBI ने शायद उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए मार्केट में कदम रखा, जबकि RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​के कमेंट्स ने भी फॉरवर्ड प्रीमियम लेवल को नीचे खींच लिया, जिससे सेंटिमेंट को मदद मिली।

तेल की कीमतों ने रुपये को और किया मज़बूत

ब्रेंट क्रूड रात भर में 4% से ज़्यादा गिरा और एशियाई ट्रेडिंग में 2% और गिरकर लगभग $72.28 प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट तब आई जब ईरान के साथ US-इज़राइल संघर्ष को खत्म करने के मकसद से शुरुआती समझौते के बाद टैंकरों ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से फिर से मूवमेंट शुरू कर दिया।

ब्रेंट की कीमतें अब 28 फरवरी को लड़ाई बढ़ने से पहले के लेवल से नीचे आ गई हैं।

इस हफ़्ते बेंचमार्क 10% से ज़्यादा और इस महीने 21% से ज़्यादा नीचे है, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी पर दबाव कम हुआ है।

एक बैंक के करेंसी ट्रेडर ने कहा, “तेल की कम कीमतों और RBI के दखल के असर से रुपये में अच्छी तेज़ी आ रही है।”

एशियाई करेंसी में लगातार कमज़ोरी के बावजूद रुपये में बढ़त आई। फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट को लंबे समय तक ऊंचा रखने की उम्मीद के बीच US डॉलर की मज़बूत सेफ-हेवन डिमांड से रीजनल करेंसी पर दबाव बना रहा।डॉलर इंडेक्स 101.50 के आस-पास रहा, जो कई महीनों के हाई के करीब है, क्योंकि इन्वेस्टर्स का मानना ​​है कि मज़बूत US इकॉनमिक ग्रोथ और स्थिर महंगाई फेड को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की ओर धकेल सकती है।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने कहा कि बुधवार (24 जून) को रुपये में रिकवरी, क्रूड ऑयल की कम कीमतों के साथ मिलकर, लोकल करेंसी को जल्द ही स्टेबल होने में मदद कर सकती है, भले ही ग्लोबल डॉलर में मज़बूती बनी रहे।

ING ने एक नोट में कहा कि हाल के प्राइस एक्शन से पता चलता है कि मार्केट अब होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए शिपिंग एक्टिविटी के तेज़ी से नॉर्मल होने की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई में रुकावट का डर कम हो गया है।

रुपये का आउटलुक

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के मुताबिक, भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 94.30 पर मज़बूती से खुला, जिसे ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ करेक्शन से सपोर्ट मिला, जो ईरान लड़ाई से पहले के लेवल से नीचे आ गई हैं। ब्रेंट क्रूड इस हफ़्ते 10% से ज़्यादा और इस महीने 21% से ज़्यादा गिरा है, जिससे भारत के इंपोर्ट बिल को लेकर चिंता कम हुई है और घरेलू करेंसी को सपोर्ट मिला है।

यादव ने बताया कि मई में एशियाई बॉन्ड मार्केट में विदेशी इनफ्लो तीन महीने के हाई पर पहुंच गया, जिससे सेंटिमेंट को और मदद मिली। उन्होंने यह भी बताया कि RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने हाल ही में दोहराया कि इंटरेस्ट रेट बढ़ाने पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी और इस बात पर ज़ोर दिया कि सेंट्रल बैंक रुपये के लिए किसी खास एक्सचेंज रेट को टारगेट नहीं करता है। हालांकि, मार्केट पार्टिसिपेंट्स को उम्मीद है कि RBI सरकारी बैंकों के ज़रिए बहुत ज़्यादा करेंसी वोलैटिलिटी को रोकने के लिए दखल देगा।

पॉज़िटिव फ़ैक्टर्स के बावजूद, रुपये की बढ़त पर रोक लगी रही क्योंकि US डॉलर डॉलर इंडेक्स पर एक साल के हाई 101.5 के पास रहा, इस उम्मीद के बीच कि फ़ेडरल रिज़र्व लंबे समय तक सख्त मॉनेटरी पॉलिसी बनाए रख सकता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

इकोनॉमी पर भी पड़ेगी कमजोर मानसून की मार, S&P ने कहा- घट सकती है भारत की GDP ग्रोथ

रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की GDP ग्रोथ घटकर 6.6% रह सकती है। एजेंसी का मानना है कि गैस-तेल के ऊंचे दाम, कमजोर मानसून और वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत की GDP ग्रोथ FY26 में 7.7% रही थी। वहीं FY25 में यह 7.1% थी। S&P का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.6% के अनुमान के बराबर है। महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए S&P को उम्मीद है कि RBI इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

क्यों घट सकती है GDP ग्रोथ?

S&P के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एनर्जी मार्केट दबाव में हैं। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और महंगाई के जोखिम में इजाफा होता है।

एजेंसी ने यह भी कहा कि अल नीनो के असर से मानसून कमजोर पड़ा है। 22 जून तक देश में बारिश सामान्य से 43% कम दर्ज की गई थी। कमजोर मानसून का असर खेती और ग्रामीण मांग दोनों पर पड़ सकता है।

स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राज्यों के लिए वैकल्पिक फसल योजनाएं तैयार की हैं। इनमें कम बारिश की स्थिति में होने वाली फसलों की सिफारिश की गई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

S&P का कहना है कि तेल का दाम बढ़ने से उद्योगों का खर्च बढ़ रहा है। सप्लाई चेन पर भी दबाव दिखाई दे रहा है। इसके अलावा उर्वरक (Fertiliser) महंगे होने से खेती की लागत बढ़ सकती है। यह फैक्टर खाद्य उत्पादन और खाद्य कीमतों दोनों पर असर डाल सकता है।

एजेंसी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की रिटेल इंफ्लेशन बढ़कर 5.1% तक पहुंच सकती है। तीसरी तिमाही में महंगाई 0.5 से 0.6 प्रतिशत अंक तक ज्यादा रह सकती है।

S&P के मुताबिक, कंपनियां तेल के बढ़े दाम का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। हाल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी भी महंगाई बढ़ाएगी।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर क्या कहा?

अपनी रिपोर्ट ‘Economic Outlook Asia-Pacific Q3 2026: AI-Exposed Markets To Outperform’ में S&P ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की तस्वीर तीन बड़े फैक्टर से तय होगी। इनमें वैश्विक आर्थिक गतिविधियों की मजबूती, कच्चे तेल का दबाव और AI बेस्ड टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट में तेजी शामिल है।

एजेंसी का कहना है कि फिलहाल भारत समेत पूरे क्षेत्र पर कच्चे तेल की लागत और महंगाई का दबाव बना हुआ है। इसका असर आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।

अभी महंगे नहीं होंगे होम लोन और कार लोन, RBI गवर्नर ने इंटरेस्ट रेट में वृद्धि से किया इनकार

ITR Filing 2026: क्या पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं?

ITR Filing 2026: कई टैक्सपेयर्स के मन में हमेशा यह सवाल चलता रहता है कि क्या पति और पत्नी अलग-अलग इनकम टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ मनीकंट्रोल ने एक्सपर्ट से इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की। दरअसल, इस बारे में एक रीडर ने सवाल पूछा है।

पति और पत्नी अलग रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं

रीडर ने पूछा था कि हम पति और पत्नी दोनों नौकरी करते हैं। मैं इनकम टैक्स की नई रीजीम के तहत सेकेक्ट 87ए के तहत मिलने वाले रिबेट का फायदा उठाना चाहती हूं। लेकिन, मेरे पति सेक्शन 80सी के बेनेफिट्स क्लेम करने के लिए इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में रिटर्न फाइल करना चाहते हैं। क्या हम पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन से पूछा।

परिवार का हर सदस्य इनकम टैक्स के लिहाज से अलग इकाई है

जैन ने कहा कि टैक्स के लिहाज से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग मानता है। सिर्फ कुछ खास स्थितियों में इनकम की क्लबिंग का प्रावधान है। सामान्य स्थितियों में हर सदस्य अपने हिसाब से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है। इंडिया में इनकम टैक्स के नियम में परिवार को टैक्स के लिहाज से एक इकाई मानने का प्रावधान नहीं है।

परिवार के सदस्य को कम लायबिलिटी वाली रीजीम चुनने का हक

उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य जैसे पति और पत्नी इनकम टैक्स की उस रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें उनकी टैक्स लायबिलिटी कम आती हो। अगर किसी परिवार में पत्नी नई रीजीम के तहत सेक्शन 87ए के तहत 12 लाख रुपये तक की इनकम पर रिबेट का फायदा उठाना चाहती है तो वह नई रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकती है। पति सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाले डिडक्शन का फायदा उठाने के लिए इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने के लिए डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करना होगा

जैन ने कहा कि ध्यान देने वाली बात यह है कि पति को पुरानी रीजीम के तहत तय अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल कर देना होगा। अगर उनकी सैलरी के अलावा कोई बिजनेस इनकम नहीं है तो रिटर्न फाइल करने के लिए उनकी डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 होगी। अगर सैलरी के साथ उनकी कोई बिजनेस इनकम भी है तो वह 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

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डेडलाइन बीत जाने के बाद नई रीजीम में रिटर्न फाइल करना होगा 

उन्होंने कहा कि अगर पति अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो ओल्ड टैक्स रीजीम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। फिर उन्हें नई टैक्स रीजीम के तहत रिटर्न फाइल करना होगा। पति संबंधित वित्त वर्ष से जुड़े होम लोन के इंटरेस्ट पर भी डिडक्शन क्लेम कर सकते है। अगर होम लोन ज्वाइंट है तो वह अपने शेयर पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

अभी महंगे नहीं होंगे होम लोन और कार लोन, RBI गवर्नर ने इंटरेस्ट रेट में वृद्धि से किया इनकार

अभी कार लोन और होम लोन महंगे होने नहीं जा रहे हैं। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने खुद इस बारे में बताया है। उन्होंने 24 जून को उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि इंटरेस्ट रेट बढ़ने जा रहा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति में अभी सख्ती की बात करना बहुत जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन और ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इकोनॉमी से जुड़े डेटा के आधार पर फैसला लेगा आरबीआई

ईटी नाउ और ईटी नाउ स्वदेश से बातचीत में मल्होत्रा ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने जून की अपनी पॉलिसी में अपना रुख न्यूट्रल बनाए रखने का फैसला किया था। इसकी वजह यह है कि अभी इकोनॉमी की तस्वीर साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन और इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए रिस्क के आकलन के लिए आने वाले डेटा पर निर्भर करेगा।

इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से पहले रुख में बदलाव करेगा केंद्रीय बैंक

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर केंद्रीय बैंक को यह लगेगा कि निकट भविष्य में इंटरेस्ट रेट बढ़ाना जरूरी है तो वह अपने रुख में बदलाव करेगा। इसे न्यूट्रल से बदलकर रिस्ट्रक्टिव करेगा। इस महीने की शुरुआत में छह सदस्यीय एमपीसी ने रेपो रेट अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। कमेटी का कहना था कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, सप्लाई चेने की बाधा और मौसम से जुड़े रिस्क को देखते हुए रेपो रेट को 5.25 फीसदी बनाए रखने का फैसला लिया गया।

अप्रैल और मई में रिटेल इनफ्लेशन में तेज उछाल

इंटरेस्ट रेट बढ़ने की चर्चा रिटेल इनफ्लेशन में उछाल के बाद शुरू हुई। अप्रैल और मई के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा से यह साफ हो गया है कि जरूरी चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसे क्रूड की कीमतों में उछाल का नतीजा माना जा रहा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर होना पड़ा।

फ्यूल महंगा होने से महंगाई का खतरा बढ़ जाता है

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। यही वजह है कि RBI ने इस महीने की शुरुआत में पेश अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रिटेल इनफ्लेशन का अनुमान बढ़ा दिया। उसने इस वित्त वर्ष के ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया। माना जा रहा है कि महंगाई बढ़ने की वजह से इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है।

इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने पर बढ़ सकात है रेपो रेट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही आरबीआई गवर्नर ने यह साफ कर दिया है कि अभी केंद्रीय बैंक का रेपो रेट बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है, लेकिन अगर महंगाई हाई लेवल पर बनी रहती है तो आगे रेपो रेट बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

Ram Mandir Daan Chori Case: एसआईटी ने सरकार को सौंपी राम मंदिर में कथित चंदा चोरी की रिपोर्ट, जानें- बड़ी बातें

Ayodhya Ram temple donation case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंगलवार (23 जून) को यूपी सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी। लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को यह शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच अभी भी चल रही है। मामले में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

अयोध्या राम मंदिर में मिले चंदे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। SIT द्वारा शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद, पंत ने PTI वीडियो को बताया कि SIT अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की कोशिश कर रही है। पंत ने कहा, “अब तक सामने आई जानकारी और हमारे पास मौजूद तथ्यों के आधार पर हमने आज पहली रिपोर्ट सौंपी है। यह केवल शुरुआती रिपोर्ट है और अंतिम रिपोर्ट कुछ समय बाद सौंपी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट गोपनीय है। उन्हें इस चरण में मीडिया के साथ जांच के नतीजों का विवरण साझा करने की अनुमति नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या टीम आगे की जांच के लिए अयोध्या लौटेगी क्योंकि सौंपी गई रिपोर्ट केवल शुरुआती थी? इस पर पंत ने PTI से कहा, “बिल्कुल, हम जरूरत के हिसाब से ऐसा करेंगे।”

अखिलेश यादव ने उठाया था मामला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें दावा किया गया था कि राम मंदिर में दिए गए चंदे में से करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। यादव ने SIT जांच पर रोज़ाना जानकारी देने की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि एजेंसी पर जनता का भरोसा कम हो गया है, जिसे उन्होंने BJP सरकार के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का नतीजा बताया था।

मंदिर से जुड़े लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का निर्देश

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है।

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Bank Holiday List: इस सप्ताह तीन दिन बंद रहेंगे बैंक, ब्रांच जाने से पहले जरूर देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट

Bank Holiday Alert: जून 2026 का आखिरी सप्ताह बैंक ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि आप इस हफ्ते बैंक ब्रांच में जाकर कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले छुट्टियों का कैलेंडर जरूर देख लें। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार 26 जून से 28 जून के बीच लगातार तीन दिनों तक देश के विभिन्न हिस्सों में बैंक बंद रहेंगे। हालांकि, इस दौरान इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, UPI, ATM और अन्य डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी।

26 से 28 जून के बीच बैंकिंग कार्यों के लिए ग्राहकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी> लेकिन शाखाओं से जुड़े कार्यों के लिए पहले से योजना बनाना बेहतर रहेगा।

कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

26 जून (शुक्रवार): मुहर्रम के अवसर पर अवकाश रहेगा।

मुहर्रम के कारण देश के कई शहरों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। जिन प्रमुख शहरों में बैंक अवकाश रहेगा, उनमें शामिल हैं:-

नई दिल्ली

लखनऊ

मुंबई

कोलकाता

चेन्नई

बेंगलुरु

हैदराबाद

भोपाल

पटना

कानपुर

नागपुर

रायपुर

रांची

विजयवाड़ा

अगरतला

आइजोल

बेलापुर

जम्मू

श्रीनगर

इन शहरों में ग्राहकों को ब्रांच आधारित सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी।

27 जून (शनिवार): चौथा शनिवार

RBI के नियमों के अनुसार हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को देशभर के बैंक बंद रहते हैं। जून 2026 का चौथा शनिवार 27 जून को पड़ रहा है। इसलिए सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक बंद रहेंगे।

28 जून (रविवार): साप्ताहिक अवकाश

रविवार होने के कारण 28 जून को देशभर में सभी बैंक ब्रांच बंद रहेंगी।

जून के अंत में और भी हैं रहेगी छुट्टी

29 जून: संत गुरु कबीर जयंती

29 जून को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संत गुरु कबीर जयंती के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे।

30 जून: रेमना नी (Remna Ni)

30 जून को आइजोल में क्षेत्रीय पर्व रेमना नी के कारण बैंक अवकाश रहेगा।

बैंक बंद रहेंगे, लेकिन ये सेवाएं चलती रहेंगी

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग सेवाओं में कोई परेशानी नहीं होगी। निम्नलिखित सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी:-

UPI भुगतान

मोबाइल बैंकिंग

इंटरनेट बैंकिंग

फंड ट्रांसफर (NEFT/IMPS)

बिल भुगतान

बैलेंस चेक

एटीएम से नकदी निकासी

ऑनलाइन अकाउंट मैनेजमेेेट

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ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

यदि आपको चेक जमा करना है, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है, केवाईसी अपडेट करानी है या कोई अन्य शाखा आधारित काम करना है, तो उसे छुट्टियों से पहले पूरा कर लें। लगातार तीन दिन बैंक बंद रहने से अंतिम समय में परेशानी हो सकती है।

एक नजर में छुट्टियां

तारीख                                                               दिन                                        कारण

26 जून 2026                                                     शुक्रवार                                   मुहर्रम

27 जून 2026                                                     शनिवार                         चौथा शनिवार

28 जून 2026                                                     रविवार                साप्ताहिक अवकाश

29 जून 2026                                                     सोमवार             संत गुरु कबीर जयंती(शिमला)

30 जून 2026                                                    मंगलवार                            रेमना नी (आइजोल)

EPFO: लगातार 10 साल तक सर्विस की है तो आपको मिलेंगी पेंशन, ऐसे कर सकते हैं मंथली पेंशन का कैलकुलेशन

ईपीएफओ अपने सब्सक्राइबर्स के लिए ईपीएफ के साथ ही एक रेगुलर पेंशन स्कीम भी चलाता है। इसका नाम एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। इस स्कीम के तहत सब्सक्राइबर्स को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलती है। इसकी शुरुआत 16 नवंबर, 1995 को हुई थी। इस स्कीम ने फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 की जगह ली थी। इसका मकसद सब्सक्राइबर्स को सोशल सिक्योरिटी देना है।

हर महीने ईपीएस में भी होता है कंट्रिब्यूशन

ईपीएफ के सब्सक्राइबर्स अपनी बेसिक मंथली सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ में कंट्रिब्यूट करते हैं। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में कंट्रिब्यूट करता है। लेकिन उसका कंट्रिब्यूशन दो हिस्सों में बंटा होता है। 8.33 फीसदी कंट्रिब्यूशन ईपीएफ में जाता है और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएस अकाउंट में जाता है।

ईपीएस में हर महीने पेशन का प्रावधान

फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 के तहत सब्सक्राइबर की मौत के बाद परिवार को बेनेफिट्स मिलते थे। लेकिन, ईपीएस में सब्सक्राइबर्स को पेंशन की सुविधा भी देने की शुरुआत हुई। इतना ही नहीं, सब्सक्राइबर के परिवार को भी पेंशन का प्रावधान इस स्कीम में है। इससे रिटायरमेंट के बाद सब्सक्राइबर और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा हासिल होती है।

ईपीएस के बेनेफिट्स के लिए ये हैं शर्तें

ईपीएस का हिस्सा बनने के लिए सब्सक्राइबर्स के लिए कुछ शर्तें तय हैं। पहला, सब्सक्राइबर की नौकरी कम से कम 10 साल पूरी होनी चाहिए। इस दौरान पेंशन स्कीम में उसकी तरफ से रेगुलर कंट्रिब्यूशन किया गया होना चाहिए। सब्सक्राइबर 58 साल की उम्र में रिटायर करने के बाद ईपीएफए की तरफ से मंथली पेंशन का हकदार होगा।

न्यूनतम पेंशन हर महीने 1000 रुपये

केंद्र सरकार के 2014 के नियम के मुताबिक, ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये है। हालांकि, इसे बढ़ाकर हर महीने 7,500 रुपये करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। किसी सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट पर हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी, इसका कैलकुलेशन उसकी पेंशनएबल सर्विस और रिटायरमेंट से पहले के 60 महीनों की एवरेज सैलरी के आधार पर होता है।

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ऐसे कर सकते हैं पेंशन का कैलकुलेशन 

इसके लिए पहले से एक फॉर्मूला है। इसमें पेंशनएबल सैलरी को पेंशनएबल सर्विस से गुणा किया जाता है। फिर जो संख्या आती है, उसमें 70 से भाग दिया जाता है। पेंशनएबल सैलरी का मतलब अंतिम 60 महीनों की एवरेज सैलरी से है। अगर किसी एंप्लॉयी की पेंशनएबल सैलरी 15,000 रुपये है और उसने 10 साल की सर्विस पूरी की है तो उसकी हर महीने की पेंशन करीब 2,143 रुपये बनेगी।

DA Hike: महंगाई भत्ते में 20% का तगड़ा इजाफा, बंगाल सरकार का अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ा तोहफा

DA Hike: पश्चिम बंगाल की नव-निर्वाचित बीजेपी सरकार ने सोमवार को अपना पहला बजट पेश किया। इसमें राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत दी। सरकार ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 20% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है।

इस बढ़ोतरी के बाद राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाला DA/DR उनकी बेसिक सैलरी का 38% हो जाएगा। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से पश्चिम बंगाल के कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर DA की मांग कर रहे थे। नए ऐलान के बाद राज्य और केंद्र के कर्मचारियों के DA के बीच का अंतर 42 प्रतिशत अंक से घटकर 22 प्रतिशत अंक रह गया है।

क्या होता है DA?

महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) कर्मचारियों और पेंशनर्स को बढ़ती महंगाई के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है। यह बेसिक सैलरी का एक हिस्सा होता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर समय-समय पर संशोधित किया जाता है। DA पूरी तरह टैक्सेबल होता है।

क्यों उठ रही थी DA बढ़ाने की मांग?

केंद्र सरकार के कर्मचारी फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत वेतन और भत्ते पा रहे हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के कई कर्मचारी अभी भी 5वें और 6वें वेतन आयोग की व्यवस्था के दायरे में हैं। इससे दोनों के वेतन और भत्तों में बड़ा अंतर बना हुआ है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह अंतर और बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी।

7वें वेतन आयोग का भी वादा

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जनवरी 2027 से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने का भी आश्वासन दिया है। इसके अलावा सरकार ने बजट में 1 लाख सरकारी नौकरियां भरने, महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना पर ₹36,000 करोड़ खर्च करने और फ्री बस सेवा के लिए ₹550 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की है।

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क्या ऑनलाइन पर्सनल लोन के लिए वीडियो KYC जरूरी है?

पर्सनल लोन एक ऐसा फाइनेंशियल टूल है, जो मेडिकल बिल्स, एजुकेशन फीस या दूसरी जरूरी फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है. डिजिटल लेंडिंग के बढ़ने से ऑनलाइन पर्सनल लोन लेना अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो गया है. इस प्रोसेस का एक अहम स्टेप है KYC (Know Your Customer) वेरिफिकेशन, जिसके जरिए लेंडर्स आपकी आइडेंटिटी यानि कि आपकी पहचान वेरिफाई करते हैं. जब ये प्रोसेस डिजिटली होता है, तो इसे e-KYC कहते हैं.

प्रोसेस को और तेज व आसान बनाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अब लेंडर्स को वीडियो कॉल के जरिए e-KYC करने की इजाजत देता है, जिसे वीडियो KYC कहते हैं. इससे फिजिकल डॉक्युमेंट्स जमा करने की जरूरत खत्म हो जाती है, जिससे लोन अप्रूवल तेज और हैसल-फ्री हो जाता है.

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पर्सनल लोन वीडियो KYC क्या है?

जैसा कि नाम से पता चलता है, वीडियो KYC आपकी आइडेंटिटी वेरिफाई करने का वीडियो-बेस्ड तरीका है. ये एक नॉर्मल वीडियो कॉल की तरह ही है. आपके लैपटॉप, कंप्यूटर या स्मार्टफोन का फ्रंट-फेसिंग कैमरा यूज होता है ताकि लेंडिंग इंस्टीट्यूशन के ऑफिशियल्स आपकी आइडेंटिटी वेरिफाई कर सकें. इस दौरान ऑफिशियल्स आपकी इमेज कैप्चर कर सकते हैं.

इस प्रोसेस में आपको आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे जरूरी डॉक्युमेंट्स दिखाने होते हैं. ऑफिशियल्स एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और KYC गाइडलाइंस के हिसाब से कुछ सवाल पूछ सकते हैं. साथ ही, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग ऑन रखना जरूरी है ताकि लेंडर को आपकी लोकेशन पता रहे.

क्या पर्सनल लोन के लिए वीडियो KYC जरूरी है?

वीडियो KYC की जरूरत हर लेंडर के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. कुछ लेंडर्स इसे पर्सनल लोन देने के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ के लिए ये ऑप्शनल हो सकता है. आप बैंक-वाइज पर्सनल लोन वीडियो KYC डिटेल्स चेक कर सकते हैं ताकि पता चल सके कि किसी खास बैंक से ऑनलाइन लोन लेने के लिए वीडियो KYC जरूरी है या नहीं.

वीडियो KYC के फायदे

वीडियो KYC के कुछ बड़े फायदे हैं:

फिजिकल डॉक्युमेंट्स की जरूरत नहीं: वीडियो KYC का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई डॉक्यूमेंट फिजिकली जमा नहीं करना पड़ता. आप वीडियो कॉल में डॉक्युमेंट्स दिखाकर प्रोसेस पूरा कर सकते हैं.

फास्ट लोन अप्रूवल: वीडियो KYC से आइडेंटिटी वेरिफिकेशन मिनटों में हो जाता है, जिससे लोन सैंक्शन का टाइम कम हो जाता है.

लेकिन आपको कौन सा लोन चुनना चाहिए? मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप लेंडर्स के लोन चेक कर सकते हैं. आप 50 लाख रुपए तक का लोन ले सकते हैं, जिसमें इंटरेस्ट रेट्स 9.99% सालाना से शुरू होते हैं. ये लोन सर्च करने का तेज और ऑनलाइन तरीका है और कोई चीज गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ती है.

बढ़ी हुई एक्सेसिबिलिटी और रिमोट बोर्डिंग: वीडियो KYC से कस्टमर्स अपने घर से ही पर्सनल लोन KYC प्रोसेस पूरा कर सकते हैं. ये स्ट्रेस-फ्री और कन्वीनियंट है और कस्टमर्स को लेंडर की लोकल ब्रांच में जाने की जरूरत नहीं पड़ती. ये खास तौर पर रिमोट और कम सर्विस वाले इलाकों में रहने वालों के लिए फायदेमंद है.

वीडियो KYC पूरा करने के स्टेप्स

वीडियो KYC पूरा करने के लिए आपको ये स्टेप्स फॉलो करने होंगे:

डिवाइस सेट करें: पहले तय करें कि आप वीडियो KYC के लिए कौन सा डिवाइस यूज करेंगे. आप डेस्कटॉप, लैपटॉप या स्मार्टफोन यूज कर सकते हैं. इसमें वेबकैम या फ्रंट-फेसिंग कैमरा और अच्छा इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए. रूम में पर्याप्त लाइटिंग हो और कोई नॉइज न हो.

आधार-बेस्ड e-KYC पूरा करें: लेंडर आपको एक लिंक देगा, जिससे आपको आधार वेरिफिकेशन पूरा करना होगा. आपके आधार-रजिस्टर्ड नंबर पर एक ओटीपी आएगा, जिसे आपको एंटर करना होगा.

वीडियो KYC लिंक रिसीव करें: लेंडर आपको वीडियो कॉल जॉइन करने का लिंक भेजेगा. आपका अपॉइंटमेंट KYC ऑफिशियल्स की अवेलेबिलिटी के हिसाब से शेड्यूल होगा.

वीडियो कॉल जॉइन करें: शेड्यूल के हिसाब से टाइम पर वीडियो कॉल जॉइन करें. कैमरा और माइक्रोफोन ऑन करें ताकि प्रोसेस शुरू हो सके.

जरूरी डॉक्युमेंट्स दिखाएं: वीडियो कॉल में आपको आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे रिलेवेंट डॉक्युमेंट्स ऑफिसर को दिखाने होंगे. आपको एम्प्लॉयमेंट या इनकम प्रूफ भी दिखाना पड़ सकता है.

सवालों के जवाब दें: KYC ऑफिसर आपके लोन एप्लिकेशन और दिखाए गए डॉक्युमेंट्स के आधार पर कुछ सवाल पूछेगा. सभी सवालों के सही जवाब दें.

KYC प्रोसेस पूरा करें: KYC ऑफिशियल्स को आपकी KYC एप्लिकेशन चेक करने और अप्रूव या रिजेक्ट करने में आमतौर पर कुछ मिनट लगते हैं.

अगर वीडियो KYC सक्सेसफुल होती है, तो लेंडर आपकी लोन एप्लिकेशन का मूल्यांकन करेगा. लोन अप्रूव होने पर लोन अमाउंट आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा.

वीडियो KYC लोन एप्लिकेशन प्रोसेस में एक शानदार स्टेप है. ये KYC पूरा करने का बहुत कन्वीनियंट और सिक्योर तरीका है. इससे आपका काफी टाइम और मेहनत बचती है और ये फाइनेंशियल इनक्लूजन को भी बढ़ावा देता है. अगर आप पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं, तो मनीकंट्रोल ऐप पर आप लेंडर्स से 50 लाख रुपए तक का लोन अप्लाई कर सकते हैं. आपको बस लोन सेक्शन में जाना है, अपने लिए सही लोन चुनना है, एप्लिकेशन फॉर्म भरना है और जरूरी डॉक्युमेंट्स अपलोड करने हैं. इंटरेस्ट रेट्स 9.99% सालाना से शुरू होते हैं.