HDFC Bank ने पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को बनाया नया पार्ट-टाइम चेयरमैन, 3 साल रहेगा कार्यकाल

HDFC Bank ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को अपना नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी मिलने के बाद ही प्रभावी होगी।

बैंक के बोर्ड ने उन्हें तीन साल के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन बनाने को मंजूरी दी है। उनका कार्यकाल RBI की मंजूरी मिलने की तारीख से शुरू होगा।

स्वतंत्र निदेशक भी बनाए गए

बोर्ड ने राजीव कुमार को 30 जून 2026 से चार साल के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने को भी मंजूरी दी है। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।

HDFC Bank ने बताया कि यह नियुक्ति बैंक की गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर की गई है।

AGM के नोटिस में किया बदलाव

राजीव कुमार की नियुक्ति के बाद HDFC Bank ने अपनी 32वीं AGM के नोटिस में संशोधन किया है। इसमें उनकी नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल किए गए हैं।

बैंक ने यह भी कहा कि SEBI या किसी अन्य नियामक संस्था ने राजीव कुमार पर किसी कंपनी में निदेशक बनने पर कोई रोक नहीं लगाई है।

चार दशक का प्रशासनिक अनुभव

राजीव कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पूर्व अधिकारी हैं। उनके पास 40 साल से ज्यादा का प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने सार्वजनिक नीति, वित्तीय क्षेत्र में सुधार और संस्थागत विकास से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया है।

बैंकिंग सुधारों में निभाई बड़ी भूमिका

HDFC Bank के मुताबिक, राजीव कुमार 2017 से 2020 तक वित्तीय सेवा विभाग के सचिव रहे। इस दौरान उन्होंने सरकारी बैंकों में पूंजी डालकर उन्हें मजबूत करने (रीकैपिटलाइजेशन), बैंकों के मर्जर, बैंकिंग गवर्नेंस में सुधार और नियामकीय ढांचे को मजबूत बनाने जैसे बड़े सुधारों में अहम भूमिका निभाई।

विजया बैंक और देना बैंक का मर्जर

विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय कराने में राजीव कुमार की अहम भूमिका रही। उन्होंने बैंकिंग टेक्नोलॉजी में भी कई सुधार किए। डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने पर काम किया। डिपॉजिट प्रोटेक्शन को मजबूत बनाया। साथ ही वित्तीय स्थिरता से जुड़े कई अहम सुधारों की अगुआई की।

Axis Bank के CFO पुनीत शर्मा ने दिया इस्तीफा, HDFC Bank के बन सकते हैं नए CFO

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Bank Holidays July: जुलाई में कुल 12 दिन बंद रहेंगे बैंक! चेक कर लें RBI के छुट्टियों की ये पूरी लिस्ट

Bank Holidays List July 2026: अगर आपको जुलाई 2026 के महीने में बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो आपके लिए बेहद जरूरी खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, जुलाई महीने में अलग-अलग राज्यों के त्योहारों, सांस्कृतिक आयोजनों और वीकेंड्स को मिलाकर कई दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा।

चूंकि देश में बैंक छुट्टियां अलग-अलग राज्यों के स्थानीय त्योहारों के आधार पर तय होती हैं, इसलिए घर से निकलने से पहले अपने राज्य की छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक कर लें। आइए जानते हैं कि जुलाई 2026 में बैंक कब-कब और कहां बंद रहने वाले हैं।

जुलाई 2026 में त्योहारों के कारण इन तारीखों पर रहेगी छुट्टी

जुलाई के महीने में देश के विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय त्योहारों के कारण इन-इन दिन बैंक शाखाएं बंद रहेंगी:

6 जुलाई 2026 (मिजोरम): ‘मिज़ो ह्मेइछहे इन्सुइहखावम पावल’ (MHIP) डे के अवसर पर मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे।

9 जुलाई 2026 (मेघालय): मेघालय के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव ‘बेहदेइंखलम’ (Beh Deinkhlam) के कारण बैंकों में छुट्टी रहेगी।

16 जुलाई 2026 (ओडिशा, उत्तराखंड और मणिपुर): इन राज्यों में ‘रथ यात्रा’ और ‘हरेला’ उत्सव के कारण बैंक बंद रहेंगे।

17 जुलाई 2026 (मेघालय): स्वतंत्रता सेनानी ‘यू तिरोत सिंह’ की पुण्यतिथि के सम्मान में मेघालय में बैंकों का अवकाश रहेगा।

18 जुलाई 2026 (सिक्किम): प्रसिद्ध बौद्ध त्योहार ‘द्रुकपा त्शे-जी’ (Drukpa Tshe-zi) के मौके पर सिक्किम में बैंक बंद रहेंगे।

22 जुलाई 2026 (त्रिपुरा): त्रिपुरा के पारंपरिक उत्सव ‘खारची पूजा’ (Kharchi Puja) के कारण राज्य के बैंकों में छुट्टी रहेगी।

जुलाई 2026 में वीकेंड की छुट्टियां

आरबीआई के नियमों के अनुसार, देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक हर रविवार के साथ-साथ महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं। जुलाई 2026 में वीकेंड की छुट्टियां इस प्रकार हैं:

5 जुलाई 2026: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)

11 जुलाई 2026: दूसरा शनिवार (बैंक अवकाश)

12 जुलाई 2026: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)

19 जुलाई 2026: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)

25 –जुलाई 2026: चौथा शनिवार (बैंक अवकाश)

26 जुलाई 2026: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)

बैंक बंद रहने पर भी चालू रहेंगी ये डिजिटल सेवाएं

भले ही तय तारीखों पर बैंक की फिजिकल ब्रांच बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। देश भर में सभी जरूरी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं 24×7 चालू रहेंगी:

  • UPI और नेट बैंकिंग: पैसे के लेनदेन के लिए आप गूगल पे, फोनपे, पेटीएम या अपने बैंक के मोबाइल ऐप (UPI) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • ATM सेवाएं: कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम हमेशा की तरह काम करते रहेंगे।
  • NEFT/RTGS: ऑनलाइन फंड ट्रांसफर की सुविधाएं भी बिना किसी रुकावट के उपलब्ध रहेंगी।

वैसे कभी-कभी बैंकों के रूटीन मेंटेनेंस के कारण कुछ घंटों के लिए डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जानकारी बैंक पहले ही नोटिफिकेशन के जरिए दे देते हैं।

1 जुलाई 2026 से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर! फटाफट चेक करें पूरी लिस्ट

New Financial Rules From 1 July: हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आती है। ठीक इसी तरह 1 जुलाई 2026 से भी देश में पैसों से जुड़े कई बड़े नियम बदलने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम टैक्सपेयर्स, बैंक ग्राहकों, क्रेडिट कार्ड यूजर्स और पासपोर्ट के लिए अप्लाई करने वाले लोगों की जेब पर पड़ेगा।

एक तरफ जहां पासपोर्ट बनवाना अब काफी महंगा होने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों की मनमानी और गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने पर सख्त एक्शन की तैयारी में है। आइए समझते हैं कि 1 जुलाई से कौन से 6 बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं।

1. ITR Filing: आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन नजदीक

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। अगर आप इस डेडलाइन को मिस करते हैं, तो आपको न सिर्फ लेट फीस और पेनाल्टी भरनी होगी, बल्कि आप अपनी पसंद का टैक्स रिजीम चुनने और पुराने नुकसान को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का मौका भी गंवा बैठेंगे।

2. Aadhaar Update: आधार में ईमेल अपडेट कराना हुआ बिल्कुल फ्री

आधार कार्ड धारकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। 1 जुलाई से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए रजिस्टर्ड ईमेल आईडी अपडेट करने की ₹75 की फीस को पूरी तरह माफ कर दिया है। यह विशेष सुविधा अगले 6 महीनों के लिए यानी 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह मुफ्त रहेगी। आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, डिजिटल अपडेट को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

3. Credit Card Rules: एसबीआई और एचडीएफसी कार्ड यूजर्स को झटका

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए 1 जुलाई से दो बड़े बदलाव हो रहे हैं:

SBI Card: एसबीआई कार्ड अपने कुछ चुनिंदा ‘PhonePe SBI Credit Cards’ जैसे- PURPLE और SELECT BLACK के लिए रिवॉर्ड पॉइंट्स प्रोग्राम में संशोधन कर रहा है। नए नियमों के तहत रिवॉर्ड पॉइंट अर्निंग की सीमा तय की जा रही है और कुछ ट्रांजैक्शंस को इस लिस्ट से बाहर किया जा रहा है।

HDFC Bank: एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों को अब हर तिमाही में 3 मुफ्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस तभी मिलेंगे, जब उन्होंने पिछली तिमाही में कम से कम ₹60000 खर्च किए हों। उदाहरण के लिए, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में लाउंज का फायदा लेने के लिए आपको अप्रैल-जून 2026 के बीच ₹60000 खर्च करना जरूरी था।

4. Passport Fees: अब जेब करनी होगी ज्यादा ढीली, बढ़ गए दाम

अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो 1 जुलाई से आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 के तहत फीस में बढ़ोतरी कर दी है:

सामान्य पासपोर्ट (36 पेज): इसकी फीस ₹1500 से बढ़कर अब ₹2500 हो गई है।

तत्काल पासपोर्ट (36 पेज): तत्काल पॉलिसी के तहत अब आपको ₹3500 की जगह ₹5000 देने होंगे।

60 पेज का पासपोर्ट: साधारण के लिए फीस ₹3500 और तत्काल के लिए ₹6000 तय की गई है।

5. RBI New Rules: बैंकों की मनमानी खत्म, ‘मिस-सेलिंग’ पर मिलेगा पूरा रिफंड

बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 1 जुलाई 2026 से ‘रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट’ के तहत नया सख्त ढांचा लागू कर रहा है। अक्सर बैंक कर्मचारी या एजेंट ग्राहकों को बिना बताए या गुमराह करके इंश्योरेंस पॉलिसी या अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बेच देते थे।

नए नियम के मुताबिक, अगर मिस-सेलिंग साबित होती है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा और साथ ही नुकसान के लिए मुआवजा भी देना होगा। इस नियम के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों को झांसा देने वाले ‘डार्क पैटर्न्स’ पर भी रोक लगेगी।

कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Kotak Mahindra Bank के एमडी और सीईओ अशोक वासवानी इस साल के अंत में पद छोड़ देंगे

कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ अशोक वासवानी इस साल के अंत में पद छोड़ देंगे। बैंक ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंज को 27 जून को बताया। उसने कहा कि वह टॉप लीडरशिप में बदलाव की तैयारी कर रहा है, क्योंकि वासवानी ने कनफर्म कर दिया है कि कार्यकाल 31 दिसंबर, 2026 को खत्म होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे।

बैंक नए एमडी और सीईओ की तलाश करेगा

इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों की दी गई जानकारी में कहा गया है कि कोटक महिंद्रा बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 27 जून को हुई बैठक में वासवानी के फैसले पर विचार हुआ। बोर्ड ने नए एमडी एवं सीईओ की तलाश की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति जताई। बैंक ने कहा है कि नए एमडी एवं सीईओ की नियुक्ति आरबीआई की तरफ से तय डेडलाइन तक हो जाएगी।

फाइनेंशियल सेक्टर में बदलाव के वक्त किया बैंक का नेतृत्व

वासवानी ने कोटक महिंद्रा बैंक का नेतृत्व ऐसे वक्त किया है , जब भारत का फाइनेंशियल सेक्टर बड़े बदलाव से गुजर रहा था। इस साल के अंत तक उनके पद छोड़ने से उस दौर का अंत हो जाएगा, जिस दौरान बैंक ने बैंकिंग सेक्टर में कॉम्पटिशन का सामना करने के साथ ही रेगुलेटरी स्तर पर बदलावों का सामना किया।

अभी नए एमडी और सीईओ की नियुक्ति के लिए किसी नाम पर चर्चा नहीं

कोटक महिंद्रा बैंक के बोर्ड ने ऐसे किसी उम्मीदवार का नाम नहीं बताया, जिसे नया एमडी एवं सीईओ बनाने के बारे में विचार हुआ हो। उसने कहा कि उसे उम्मीद है कि तय समय पर नया लीडरशिप आएगा ताकि ऑपरेशन और स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन में निरंतरता बनी रहे। वासवानी 1 जनवरी, 2024 को उदय कोटक की जगह बैंक के एमडी और सीईओ बने थे।

वासवानी ने तीन दशकों तक सिटीग्रुप में किया है काम

कोटक महिंद्रा बैंक के बॉस की जिम्मेदारी संभालने से पहले वासवानी तीन दशकों तक सिटीग्रुप में थे। वह बार्कलेज में भी काम कर चुके हैं। वह बार्कलेज में ग्लोबल कंज्यूमर, प्राइवेट, कॉर्पोरेट और पेमेंट बिजनेस के सीईओ थे। वह ग्रुप के एग्जिक्यूटिव कमेटी के भी सदस्य थे।

यह भी पढ़ें: राजन भारती मित्तल ने कहा- इंडिया एक ग्लोबल ब्राइट स्पॉट है जो 10 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन सकता है

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से की है पढ़ाई

उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे के Sydenham College से इकोनॉमिक्स और अकाउंटेंसी के साथ बैचलर ऑफ कॉमर्स की पढ़ाई की है। वह एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी हैं। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एग्जिक्यूटिव एजुकेशन पूरा किया है।

UPPSC PCS 2026 Notification: यूपीपीएससी में 500 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू, आधिकारिक वेबसाइट पर इस तारीख तक करें अप्लाई

UPPSC PCS 2026 Notification: उत्तर प्रदेश में पीसीएस और अपर सबॉर्डिनेट परीक्षा की तैयारियों में लगे युवाओं के लिए यह अहम अपडेट है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) और प्रवर अधीनस्थ सेवा में भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यूपीपीएससी पीसीएस के पदों पर भर्ती के इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आयोग की ओर से यह नोटिफिकेशन 25 जून 2026 को जारी किया गया था और इसके साथ ही इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन भी शुरू हो गए हैं।

यूपीपीएससी ने राज्य सरकार की सेवाओं में अलग-अलग ग्रुप ए और ग्रुप बी प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए 25 जून 2026 को यूपीपीएससी पीसीएस 2026 नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत उम्मीदवार डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर जैसे पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के जरिए 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।

नोटिफिकेशन में दी गई है ये जानकारी

कहां देखें नोटिफिकेशन : आयोग ने पीसीएस परीक्षा 2026 के लिए विस्तृत विज्ञापन अपनी आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जारी किया है, जिसमें एप्लीकेंट्स के लिए भर्ती नियम और इंस्ट्रक्शन हैं।

वैकेंसी की जानकारी : डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और बीडीओ समेत ग्रुप ए और ग्रुप बी पदों के लिए करीब 500 पदों पर भर्ती निकली हैं।

जरूरी तारीखें : नोटिफिकेशन 25 जून 2026 को जारी किया गया था, ऑनलाइन एप्लीकेशन 25 जून 2026 से शुरू होंगे और अप्लाई करने की आखिरी तारीख 27 जुलाई 2026 है।

उम्र सीमा : यूपी सरकार के नियमों के मुताबिक, जनरल और ईडब्लूएस श्रेणी के लिए कैंडिडेट की उम्र 21 से 40 साल के बीच और रिजर्व कैटेगरी के लिए 45 साल तक होनी चाहिए।

शैक्षिक योग्यता : अधिकांश पदों के लिए बैचलर डिग्री जरूरी है, जबकि सब रजिस्ट्रार और स्टैटिस्टिकल ऑफिसर जैसे स्पेशलाइज्ड रोल के लिए संबंधित सब्जेक्ट में लॉ या पोस्टग्रेजुएट डिग्री की जरूरत होती है।

आवेदन प्रक्रिया और फीस : कैंडिडेट को आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करना होगा, ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा, डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे और फीस देनी होगी। जनरल और ओबीसी के लिए आवेदन शुल्क 125 रुपये, एससी और एसटी के लिए 65 रुपये और पीडब्लूडी कैंडिडेट के लिए 25 रुपये है।

चयन प्रक्रिया : चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू शामिल हैं। प्रारंभिक परीक्षा में ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों पर आधारित होती है। मेन एग्जाम वर्णनात्मक होता है और इंटरव्यू में पर्सनैलिटी और कम्युनिकेशन स्किल्स का आकलन किया जाता है।

कैंडिडेट्स को आखिरी तारीख से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरा करने की सलाह दी जाती है। साथ ही, एडमिट कार्ड, परीखा केंद्र की डिटेल्स और भर्ती प्रक्रिया के आगे के चरणों के बारे में अपडेट के लिए नियमित आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें। आयोग मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू का शेड्यूल सही समय पर जारी करेगा।

RBI Grade B Result 2026 Out: फेज 1 का स्कोर आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित, इसमें सफल उम्मीदवार 25 जुलाई को फेज 2 परीक्षा के लिए करें तैयारी

गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया, कहा-क्रूड में नरमी से इकोनॉमी पर घटा है दबाव

अमेरिका-ईरान में डील का पॉजिटिव असर इंडियन इकोनॉमी पर पड़ेगा। गोल्डमैन सैक्स ने भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। इनफ्लेशन को लेकर भी उसकी राय बदली है, क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है। साथ ही सरकार के इंपोर्ट बिल में कमी आई है।

क्रूड में नरमी से भारत के लिए अच्छी संभावनाएं

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मध्यपूर्व में तनाव घटने और क्रूड ऑयल में नरमी से भारतीय इकोनॉमी के लिए संभावनाएं बेहतर हुई हैं। उसने कहा है, “इस साल की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ हमारे पहले के अनुमान से ज्यादा रह सकता है। इससे हमें ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ाना पड़ा है।” अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंक ने इस साल यानी 2026 में भारत के ग्रोथ के अनुमान को 0.3 फीसदी बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है।

सप्लाई बढ़ने से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट 

अमेरिका-ईरान में डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स और दूसरे जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ी है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारत आने वाला काफी क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। हालांकि, इस साल की दूसरी छमाही में गोल्डमैन सैक्स क्रूड की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है, जो इसकी मौजूदा कीमत से ज्यादा है।

गोल्डमैन सैक्स ने इनफ्लेशन के अनुमान को घटाया

गोल्डमैन सैक्स ने भारत में इनफ्लेशन के अपने अनुमान को भी घटाया है। उसने इसे 5.1 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया गया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल यूरिया प्राइस में बड़ा करेक्शन आया है। इससे फर्टिलाइजर सब्सिडी में कमी आएगी। साथ ही क्रूड सस्ता होने से भी सरकार पर वित्तीय दबाव घटेगा।

मानसून में कम बारिश का अनुमान एक बड़ी चुनौती

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, पहले के मुकाबले स्थितियां पॉजिटिव होने के बावजूद भारत के लिए कुछ चुनौतियां नजर आ रही हैं। मौसम विभाग ने इस साल मानसून की बारिश कम होने का अनुमान जताया है। इस साल अल नीनो के असर का भी अनुमान जताया गया है। ऐसा होने पर ग्रामीण इलाकों में डिमांड पर असर पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें: RBI ने बनाए नए नियम, डिजिटल पेमेंट में फ्रॉड के शिकार को मिलेगी बड़ी राहत

आरबीआई रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़ा सकता है

उसने कहा है कि आरबीआईआ इस साल रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर सकता है। हालांकि, पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में लगातार गिरावट से इनफ्लेशन पर दबाव घटेगा, जिससे आरबीआई अपनी पॉलिसी सख्त करने में देर कर सकता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया।

Volkswagen Layoffs: 1 लाख तक लोगों की जा सकती है नौकरी, 4 फैक्ट्रियां बंद करने का भी प्लान

यूरोप की सबसे बड़ी कार मेकर फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और नौकरियों में कटौती के आंकड़े को लाख तक पहुंचा सकती है। कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम कंपनी को ज्यादा कॉम्पिटिटिव बनाने की तैयारी में हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मैनेजर मैगजीन को मामले की जानकारी रखने वालों से पता चला है कि इस हफ्ते की शुरुआत में बोर्ड की मीटिंग हुई।

इसमें CEO ने जो प्लान पेश किए, उनमें कर्मचारियों की छंटनी को दोगुना करके 1,00,000 तक करने की बात शामिल है। कंपनी में अभी लगभग 6,57,000 लोग काम करते हैं। फॉक्सवैगन AG, Porsche और Audi की भी मालिक है। ब्लूम की नई रीस्ट्रक्चरिंग योजना को चर्चा के लिए अगले महीने सुपरवाइजरी बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।

जर्मनी की 4 फैक्ट्रियां हो सकती हैं बंद

मैनेजर मैगजीन के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्लूम कंपोनेंट प्लांट्स और सबसे अहम, फॉक्सवैगन ब्रांड को अलग करने पर भी विचार कर रहे हैं। यह ब्रांड लंबे समय से कम मुनाफे की समस्या से जूझ रहा है। ब्लूम Volkswagen को छोटा और ज्यादा कुशल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह है कि कंपनी अमेरिकी टैरिफ, चीन में लगातार कमजोरी और यूरोप में BYD Co. और Stellantis NV जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से बढ़ते कॉम्पिटिशन का सामना कर रही है।

RBI ने अपर-लेयर NBFCs के लिए तय कर दीं गाइडलाइंस, अब Tata Sons की लिस्टिंग पर सबकी निगाहें

28,000 कर्मचारी Volkswagen छोड़ने के लिए राजी

लगभग 28,000 कर्मचारी फॉक्सवैगन छोड़ने के लिए सहमत हो गए हैं। यह 2030 तक पूरे ग्रुप में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले से घोषित योजना का हिस्सा है। लेबर लीडर्स ने फॉक्सवैगन की नई योजनाओं का विरोध किया है। फॉक्सवैगन में नौकरियों में कटौती करना मुश्किल है। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, और जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के पास 2 और सीटें हैं। यह राज्य अक्सर कर्मचारी यूनियनों का साथ देता है।

RBI Grade B Result 2026 Out: फेज 1 का स्कोर आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित, इसमें सफल उम्मीदवार 25 जुलाई को फेज 2 परीक्षा के लिए करें तैयारी

RBI Grade B Result 2026 Out: देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी की इच्छा रखने वाले उन उम्मीदवारों के लिए बड़ा और अहम अपडेट है। आरबीआई ने ग्रेड बी जनरल कैडर अधिकारी भर्ती के तहत फेज 1 परीक्षा आयोजित की थी। इस परीक्षा में शामिल परीक्षार्थी अब आधिकारिक वेबसाइट opportunities.rbi.org.in पर अपना स्कोर चेक कर सकते हैं। बता दें, आरबीआई ने ऑफिसर्स इन ग्रेड ‘B’ (DR) जनरल कैडर की भर्ती के लिए आरबीआई ग्रेड बी फेज I रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है। रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में है, जिसमें फेज II परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स के रोल नंबर हैं।

आरबीआई ग्रेड बी फेज 1 परीक्षा में सफल उम्मीदवार अब फेज 2 परीक्षा के लिए तैयारी करेंगे। ऑफिशियल नोटिस के अनुसार, ऑफिसर्स इन ग्रेड ‘B’ (DR) जनरल कैडर के लिए फेज II परीक्षा 25 जुलाई, 2026 को दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को फेज II परीक्षा की सभी शिफ्ट में सभी पेपर देने होंगे।

आरबीआई ग्रेड बी 2026 फेज 1 रिजल्ट कैसे चेक करें?

कैंडिडेट्स आरबीआई ग्रेड बी फेज I रिजल्ट 2026 डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:

  • आरबीआई की ऑफिशियल वेबसाइट opportunities.rbi.org.in पर जाएं।
  • होमपेज पर ‘करंट वैकेंसी’ टैब पर क्लिक करें।
  • ‘ऑफिसर्स इन ग्रेड B (DR) जनरल कैडर – पैनल ईयर 2026’ के लिए रिजल्ट लिंक चुनें।
  • शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स के रोल नंबर वाली PDF खोलें।
  • अपना रोल नंबर सर्च करें।
  • आगे के लिए PDF डाउनलोड करके सेव कर लें।

आरबीआई ग्रेड बी फेज II परीक्षा 2026

आरबीआई ग्रेड बी फेज II एग्जाम 25 जुलाई, 2026 को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा सिर्फ फेज I परीक्षा में शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स के लिए होगी। एग्जाम दो शिफ्ट में होगा, और कैंडिडेट्स को सभी शिफ्ट में सभी पेपर देने होंगे। फेज II के एडमिट कार्ड जल्द ही ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। आरबीआई ने यह भी बताया है कि तारीख, शिफ्ट, सेंटर या वेन्यू बदलने की कोई रिक्वेस्ट नहीं मानी जाएगी। शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स को फेज II एडमिट कार्ड और एग्जाम शेड्यूल के बारे में अपडेट के लिए रेगुलर ऑफिशियल वेबसाइट देखते रहना चाहिए।

UP Police Constable Exam 2026: आंसर की पर ऑब्जेक्शन विंडो हुई बंद अब रिजल्ट का इंतजार, जानें कैसे और कहां चेक सकेंगे रिजल्ट

Bank Holiday: दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत देश के कई राज्यों में आज बंद रहेंगे बैंक, जानें आरबीआई ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday Today: आज शुक्रवार, 26 जून को मोहर्रम के मौके पर दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत देश के कई बड़े राज्यों में सरकारी और प्राइवेट बैंक बंद रहेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आधिकारिक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, आज देश के ज्यादातर हिस्सों में बैंक बंद रहने के कारण बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा।

अगर आप आज बैंक से जुड़ा कोई बड़ा काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले बंद शहरों की लिस्ट और आने वाले लंबे वीकेंड की डिटेल्स जरूर चेक कर लें।

आज 26 जून को आपके शहर में बैंक खुले हैं या बंद?

आरबीआई के कैलेंडर के अनुसार, आज 26 जून को मोहर्रम के चलते देश के इन बड़े शहरों में बैंकों की छुट्टियां रहेंगी:

नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर, भोपाल, हैदराबाद, पटना, रांची, रायपुर, नागपुर, श्रीनगर, जम्मू, अगरतला, आइजोल और बेलापुर।

इन शहरों के अलावा जिन राज्यों में मोहर्रम की छुट्टी स्थानीय स्तर पर अधिसूचित नहीं है, वहां बैंक सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे।

लगातार 3 दिन की छुट्टी: आज से शुरू हुआ लॉन्ग वीकेंड

देश के कई राज्यों में आज से लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद रहने वाले हैं। ऐसे में अगर आपको बैंक ब्रांच जाना है, तो अब सीधे सोमवार को ही काम हो पाएगा:

26 जून (शुक्रवार): मोहर्रम के मौके पर देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक बंद हैं।

27 जून (शनिवार): महीने का चौथा शनिवार होने के कारण देशभर के सभी बैंक बंद रहेंगे।

28 जून (रविवार): साप्ताहिक अवकाश के कारण देशभर के बैंकों में ताला लटका रहेगा।

इसके अलावा, अगले हफ्ते की शुरुआत में भी कुछ राज्यों में क्षेत्रीय छुट्टियां हैं। जैसे 29 जून को संत गुरु कबीर जयंती के मौके पर शिमला में बैंक बंद रहेंगे और 30 जून को ‘रेमना नी’ (Remna Ni) त्योहार के चलते आइजोल में बैंकों की छुट्टी रहेगी।

बैंक बंद होने पर कैसे निपटाएं अपने जरूरी काम?

भले ही त्योहार और वीकेंड के कारण बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन इस दौरान डिजिटल बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के 24 घंटे काम करती रहेंगी:

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन: आप पैसे भेजने या मंगाने के लिए नेट बैंकिंग (Net Banking), मोबाइल बैंकिंग या यूपीआई (UPI) सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एटीएम और कैश: कैश निकालने के लिए देशभर के सभी एटीएम (ATMs) हमेशा की तरह काम करते रहेंगे।

डिजिटल फॉर्म और रिक्वेस्ट: चेकबुक रिक्वेस्ट, एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS) और डिजिटल अकाउंट मेंटेनेंस से जुड़े काम ऑनलाइन ऐप के जरिए किए जा सकते हैं।