अमेरिका-ईरान युद्ध अब होर्मुज पर आकर अटक गया है। डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हर दिन कोई न कोई दावा करते हैं और ईरान इस पर प्रतिक्रिया देने से चूकता नहीं है। ताजा घटना क्रम में डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है। जिसका मुंहतोड़ जवाब ईरान ने भी दे दिया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि ईरान से लड़ाई खत्म होने के बाद वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का इलाका घोषित करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया का यह अहम समुद्री रास्ता अमेरिकी सेना के नियंत्रण में है।
रिपब्लिकन उम्मीदवारों की रैली में ट्रंप ने कई बातें कहींं
लॉन्ग आईलैंड में रिपब्लिकन उम्मीदवारों की रैली में ट्रंप ने ईरान से चल रही लड़ाई के बारे में कई बाते कहीं। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी इलाका घोषित करने का ऐलान वह ईरान की पराजय के बाद करेंगे। उन्होंने कहा, “ईरान को पूरी तरह हराने के बाद जल्द ही मैं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका का इलाका घोषित कर दूंगा।”
ट्रंप ने कहा कि ईरान लड़ाई में बुरी तरह से हार रहा है
ट्रंप ने यह भी कहा कि लड़ाई में ईरान बुरी तरह से हार रहा है। उन्होंने सैन्य शक्ति के इस्तेमाल के अपने सरकार के फैसले को भी सही बताया। उन्होंने कहा, “मैंने उससे ज्यादा सेना की तैनाती की है, जितना मैं पहले चाहता था।” उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लगातार दबाव बनाना जरूरी था।
अमेरिका किसी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर यह दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल समझौते के संकेत नहीं दिख रहे है। 17 जून को दोनों देशों के बीच शांति को लेकर सहमति बनी थी। लेकिन, यह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में दो सबसे बड़ी बाधा
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता नहीं होने की दो बड़ी वजहें हैं। पहला, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह से रोक लगाना चाहता है। इसके लिए ईरान तैयार नहीं है। दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान अपना नियंत्रण चाहता है। अमेरिका इसके लिए भी तैयार नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनियाभर में क्रूड ऑयल की सप्लाई का एक बड़ा समुद्री रास्ता है।
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पहले भी ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बयान दे चुके है्ं
ऐसा पहली बार नहीं है कि ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मजु को अमेरिका का इलाका बनाने की बात कही है। उन्होंने मार्च में भी कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर ‘स्ट्रेट ऑफ अमेरिका’ किया जा सकता है। भारत और चीन देशों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज काफी अहम है। भारत के क्रूड इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है।
भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल गेन्स टैक्स को कम कर दिया है। एक सरकारी आदेश के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं पेट्रोल पर ड्यूटी को 3.5 रुपये से घटाकर शून्य रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर टैक्स को पहले के 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
विंडफॉल गेन्स टैक्स की नई दरें शनिवार, 15 अगस्त से लागू हो गई हैं। इससे पहले 3 अगस्त 2026 को सरकार ने विंडफॉल गेन्स टैक्स बढ़ाया था। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। डीजल के एक्सपोर्ट पर कुल लेवी 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 25.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर ड्यूटी 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दी थी। डीजल पर 25.5 रुपये की लेवी में दो तरह की ड्यूटी शामिल थीं- स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC)।
क्या है विंडफॉल गेन्स टैक्स
अगर ऑयल कंपनियां 75 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पर कच्चे तेल की बिक्री करती हैं, तो इससे हासिल होने वाले प्रॉफिट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात के लिए यह लेवी तब लागू होती है, जब मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है। पिछले दो सप्ताह में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर 15 दिनों पर विंडफॉल गेन्स टैक्स की रेट का रिव्यू किया जाता है। बता दें कि कच्चे तेल को जमीन और समुद्र से निकाल कर रिफाइन किया जाता और इसे पेट्रोल, डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) में कनवर्ट किया जाता है।
मार्च 2026 से फिर लगने लगा है यह टैक्स
भारत ने विंडफॉल गेन्स टैक्स सबसे पहले जुलाई 2022 में लागू किया था। फिर 2 साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया। लेकिन फिर फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिका-इजराइल युद्ध से तेल की कीमतों में तगड़ा उछाल आया। इसे देखते हुए मार्च 2026 में यह लेवी फिर से लागू की गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान को हराने के बाद वे होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का ‘इलाका’ घोषित करेंगे। उन्होंने यह बात शुक्रवार को न्यूयॉर्क में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कही। वे न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन पार्टी की रैली को संबोधित कर रहे थे। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान करीब छह महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए समझौते की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद ईरान ने भी पलटवार किया। उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज ईरान की था, है और रहेगा। इसे किसी ट्वीट या चुनावी भाषण के जरिए नहीं कब्जाया जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान न तो धमकियों से डरता है और न ही किसी ताकत के आगे झुकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता माना जाता है। इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक तेल, प्राकृतिक गैस और खाद पहुंचती है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती थी।
ट्रम्प बोले- अमेरिका का होर्मुज पर पूरा कंट्रोल ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। इससे पहले भी ट्रम्प दावा कर चुके हैं कि अमेरिका का इस समुद्री मार्ग पर पूरा नियंत्रण है और वह इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा। ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को स्टील की दीवार बताया था। उन्होंने दावा किया था कि ईरान के पास इसका मुकाबला करने का कोई रास्ता नहीं है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेहरान का सैन्य ढांचा बुरी तरह कमजोर हो चुका है। ईरान ने ट्रम्प के दावे को खारिज किया ट्रम्प के बयान के तुरंत बाद ईरान ने उनके दावे को खारिज कर दिया। ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अब भी बंद है और जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं, इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा। पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार यह कहने से कि होर्मुज स्ट्रेट खुल गया है, जमीनी हकीकत नहीं बदलती। अथॉरिटी के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है और ईरान की शर्तें पूरी होने तक बंद ही रहेगा
ईरान ने रखीं 7 बड़ी शर्तें होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले ईरान ने भी अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघदार के मुताबिक, अमेरिका को… 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई प्रभावित रही 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई लगातार प्रभावित रही। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी तथा बढ़ी बीमा लागत के कारण इस रास्ते से हर दिन गुजरने वाला कच्चा तेल 2 करोड़ बैरल से घटकर 37 लाख बैरल रह गया। होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है? हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है। शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी। इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान को हराने के बाद वे होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का ‘इलाका’ घोषित करेंगे। उन्होंने यह बात शुक्रवार को न्यूयॉर्क में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कही। वे न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन पार्टी की रैली को संबोधित कर रहे थे। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान करीब छह महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए समझौते की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद ईरान ने भी पलटवार किया। उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज ईरान की था, है और रहेगा। इसे किसी ट्वीट या चुनावी भाषण के जरिए नहीं कब्जाया जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान न तो धमकियों से डरता है और न ही किसी ताकत के आगे झुकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता माना जाता है। इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक तेल, प्राकृतिक गैस और खाद पहुंचती है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती थी। ट्रम्प बोले- अमेरिका का होर्मुज पर पूरा कंट्रोल ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। इससे पहले भी ट्रम्प दावा कर चुके हैं कि अमेरिका का इस समुद्री मार्ग पर पूरा नियंत्रण है और वह इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा। ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को स्टील की दीवार बताया था। उन्होंने दावा किया था कि ईरान के पास इसका मुकाबला करने का कोई रास्ता नहीं है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेहरान का सैन्य ढांचा बुरी तरह कमजोर हो चुका है। ईरान ने ट्रम्प के दावे को खारिज किया ट्रम्प के बयान के तुरंत बाद ईरान ने उनके दावे को खारिज कर दिया। ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अब भी बंद है और जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं, इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा। पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार यह कहने से कि होर्मुज स्ट्रेट खुल गया है, जमीनी हकीकत नहीं बदलती। अथॉरिटी के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है और ईरान की शर्तें पूरी होने तक बंद ही रहेगा ईरान ने रखीं 7 बड़ी शर्तें होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले ईरान ने भी अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघदार के मुताबिक, अमेरिका को… 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई प्रभावित रही 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई लगातार प्रभावित रही। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी तथा बढ़ी बीमा लागत के कारण इस रास्ते से हर दिन गुजरने वाला कच्चा तेल 2 करोड़ बैरल से घटकर 37 लाख बैरल रह गया। होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है? हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है। शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी। इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया।
Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अगस्त यानी शुक्रवार को सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। हालांकि, चांदी की कीमतों में स्थिरता रही। सोना 800 रुपये गिरकर 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी बगैर किसी बदलाव के 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेतों का असर
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर पड़ा। हालांकि, अमेरिका में प्रोड्यूसर प्राइस डेटा उम्मीद के मुकाबले नरम रहे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में गिरावट की दूसरी वजह मुनाफावसूली रही।
लगातार 7 सत्रों की तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली
13 अगस्त से पहले लगातार सात सत्रों में सोने में तेजी दिखी थी। इससे इसका भाव 12000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा चढ़ गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी तेजी आने के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। इनवेस्टर्स सोने में उछाल के बाद नई खरीदारी करने से हिचक रहे हैं। इसका असर भी सोने की कीमतों पर पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की नरमी दिखी। इसका भाव 4,351 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी में तेजी दिखी। इसका भाव 0.33 फीसदी की तेजी के साथ 64.68 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड की कीमतों में 14 अगस्त को तेजी दिखी। जब तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहेगी, महंगाई बढ़ने का डर बना रहेगा। इससे फेडरल रिजर्व अनुमान से पहले इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।
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क्रूड में उछाल जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के कोई संकेत नहीं दिखे हैं। इसका सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है। इस रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही नाममात्र की हो रही है। इससे क्रूड की सप्लाई में कमी दिखी रही है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।
Ekta Kapoor: टीवी एक्टर्स गौरव खन्ना और श्रद्धा आर्या जल्द ही एक नए शो में साथ नजर आ सकते हैं। खबरों के मुताबिक, दोनों एक्टर्स स्टार प्लस के लिए एकता कपूर के आने वाले रोमांटिक फैमिली ड्रामा में लीड रोल निभाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती स्टेज में है और मेकर्स ने अभी तक कास्ट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इस जोड़ी के बारे में सुनकर ही टीवी दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है। इससे दोनों एक्टर्स की डेली सोप में वापसी होगी।
नया शो किस बारे में है?
टेली मसाला के अनुसार, आने वाली सीरीज को एक रोमांटिक फैमिली ड्रामा के तौर पर प्लान किया जा रहा है, जिसमें रिश्तों और परिवार के आपसी समीकरण कहानी का अहम हिस्सा होंगे। इस प्रोजेक्ट को एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफ़िल्म्स द्वारा डेवलप किया जा रहा है और माना जा रहा है कि अभी इसकी कास्टिंग चल रही है।
ऐसी भी अटकलें हैं कि नया शो स्मृति ईरानी के शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ की जगह ले सकता है। हालांकि, इसके लॉन्च शेड्यूल या प्रस्तावित टाइम स्लॉट के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि इस सीरीज को अक्टूबर 2026 में स्टार प्लस पर लॉन्च करने का प्लान है।
एक्टर्स के बारे में
गौरव खन्ना ‘अनुपमा’ में अनुज कपाड़िया के रोल से घर-घर में मशहूर हुए। इस पॉपुलर डेली सोप से अलग होने के बाद भी, एक्टर रियलिटी टीवी के ज़रिए चर्चा में बने रहे। वह अभी ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ का हिस्सा हैं और इससे पहले ‘बिग बॉस 19’ के विनर भी रह चुके हैं।
खबर है कि श्रद्धा आर्या को इसी शो में फीमेल लीड रोल के लिए सोचा जा रहा है। यह एक्ट्रेस ‘कुंडली भाग्य’ में प्रीता का रोल निभाने के लिए जानी जाती हैं, इस रोल ने उन्हें हिंदी टेलीविज़न का एक जाना-माना चेहरा बना दिया। उन्होंने 2017 से 2024 तक यह रोल निभाया। यह टीवी शो ‘कुमकुम भाग्य’ का स्पिन-ऑफ था और इसे एकता कपूर ने प्रोड्यूस किया था। इसलिए, अगर सब कुछ ठीक रहा, तो एकता के बैनर तले यह उनका दूसरा प्रोजेक्ट होगा।
‘कुंडली भाग्य’ के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने के बाद श्रद्धा रेगुलर डेली फिक्शन रोल से दूर रही हैं। एक्ट्रेस की शादी हुई और जुड़वां बच्चे हुए, जिसके बाद उन्होंने ब्रेक लिया। लेकिन, उन्हें कुछ समय के लिए ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में देखा गया था। अगर कास्टिंग फाइनल हो जाती है, तो यह शो गौरव और श्रद्धा को एक नई टेलीविज़न जोड़ी के तौर पर साथ ला सकता है।
अभी ऑफिशियल अनाउंसमेंट का इंतज़ार है
फिलहाल, यह प्रोजेक्ट अभी डेवलपमेंट स्टेज में है और गौरव खन्ना और श्रद्धा आर्या की कास्टिंग की खबरों की ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है। न तो एक्टर्स और न ही एकता कपूर या स्टार प्लस ने शो के बारे में कोई अनाउंसमेंट किया है।
El Nino & Monsoon update: प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे अल नीनोके असर से साल 2026 के इतिहास का सबसे गर्म साल बनने की संभावना बेहद बढ़ गई है। अमेरिका के नॉन प्रॉफिट रिसर्च ग्रुप बर्कले अर्थ के ग्लोबल वेदर के मंथली एनालिसिस के मुताबिक अल नीनो के शक्तिशाली रूप लेने के कारण 2026 के सबसे गर्म साल बनने की संभावना जुलाई में दर्ज 12 फीसदी से बढ़कर अगस्त में सीधे 69 फीसदी पर पहुंच गई है। रिसर्चर्स का मानना है कि इसके अलावा साल 2027 में गर्मी के नए रिकॉर्ड बनने की पूरी उम्मीद है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक बर्कले अर्थ के चीफ साइंटिस्ट रॉबर्ट रोडे ने इसे लेकर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगले एक साल या उससे थोड़े अधिक समय में हम कुछ बहुत ही नाटकीय बदलाव देख सकते हैं। यह हमें ऐसी मौसमी स्थितियां देगा जिसकी उम्मीद हम आम तौर पर एक दशक या उससे अधिक समय बाद करते हैं। यह एक बहुत बड़ी घटना साबित होने वाली है।
क्या होता है अल नीनो और कैसे बदलेगा बारिश का पैटर्न?
अल नीनो महीनों तक चलने वाला एक रिकरिंग वेदर फेज है। इसके ग्लोबल लेबल पर गंभीर असर होते हैं। अल नीनो के असर से दुनिया के कई हिस्सों में सूखा पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा प्रतिकूल असर भारत, पश्चिमी और दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में देखने को मिलता है। अल नीनो की वजह से इन इलाकों में बारिश की कमी हो जाती है। वहीं दूसरी ओर अल नीनो की वजह से कुछ दूसरे क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश होती है। उदाहरण के लिए इसके असर से दक्षिणी अमेरिका के इलाकों में भारी बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
कितना शक्तिशाली है यह अल नीनो?
वैज्ञानिक पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के एक विशिष्ट क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान से अल नीनो की ताकत का आकलन करते हैं। अनुमान बताते हैं कि प्रशांत महासागर के उस विशिष्ट हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस तक असाधारण रूप से अधिक बढ़ जाएगा। इसकी तुलना में 2015 से 2016 के अल नीनो के दौरान समुद्र का तापमान सामान्य से 2.75 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ा था। इससे यह साफ पता चल रहा है कि मौजूदा अल नीनो कितना खतरनाक है।
यह अल नीनो इस साल जून में शुरू हुआ था। हालांकि इस साल देर वसंत और शुरुआती गर्मियों में पड़ी भीषण गर्मी के लिए अल नीनो जिम्मेदार नहीं था क्योंकि तब तक इसका असर इतना तेज नहीं हुआ था।
जून-जुलाई में टूटे गर्मी के रिकॉर्ड
बर्कले अर्थ के मुताबिक प्रमुख जलवायु डेटासेट के मुताबिक बीता जुलाई का महीना अब तक दर्ज किया गया सबसे गर्म या दूसरा सबसे गर्म जुलाई रहा। जुलाई के महीने में भीषण गर्मी की वजह से फ्रांस और स्पेन में विनाशकारी जंगलों की आग भड़क उठी जबकि अमेरिका के कई हिस्से हीट डोम की वजह से झुलस गए। अमेरिका के मुख्य भूभाग में जुलाई का औसत अधिकतम तापमान 90 साल पुराने उस रिकॉर्ड को तोड़ गया जो डस्ट बाउल के दौर में बना था। वैज्ञानिक रोडे ने चुटकी लेते हुए कहा कि दुनिया का इतना बड़ा हिस्सा झुलस रहा है कि उन जगहों का नाम लेना आसान है जो गर्म नहीं हैं, अंटार्कटिका में इस बार बहुत ही अत्यधिक ठंड वाली सर्दियां रही हैं।
ग्लोबल इकॉनमी और व्यापार पर अल नीनो की मार
कई देशों विशेष रूप से उभरते बाजारों में अल नीनो द्वारा लाई गई भीषण गर्मी और मूसलाधार बारिश ईरान युद्ध के कारण उपजे आर्थिक संकट को और बढ़ा सकती है। उदाहरण के लिए समुद्र के पानी के गर्म होने की वजह से पेरू में एंकोवी मछली के शिकार/पकड़ने पर पूरी तरह से रोक लग गई है।
ग्रीनहाउस गैसों का स्थायी असर
बर्कले अर्थ के वैज्ञानिक ज़ेक हॉसफादर ने अल नीनो की तुलना एक बड़े हथौड़े से करते हुए कहा कि अल नीनो एक विशाल हथौड़े की तरह है जिससे जलवायु पर प्रहार होता है इसलिए यह बहुत सी अलग-अलग चीजों को अस्त-व्यस्त कर देगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि अल नीनो किसी एक महीने या साल के तापमान को नाटकीय रूप से प्रभावित कर सकता है लेकिन ग्रीनहाउस गैसों के प्रदूषण से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग हमेशा मौजूद रहती है और लगातार बढ़ रही है।
ईरान अमेरिका के बीच अब युद्ध के मैदान में धमाके और मिसाइल अटैक तो नहीं हो रहे हैं लेकिन मानसिक दबाव बनाने के लिए जुबानी जंग तेज हो गई है। ट्रंप के हर दिन अलग-अलग दावों पर ईरान भी मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। अब दोनों देशों के बीच होर्मुज को लेकर भारी तनाव देखने को मिल रहा है। ताजा घट
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्रिटेन पर तंज कसते हुए उसे ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ऐसा इस्लामिक देश बन सकता है, जिसके पास परमाणु हथियार हों। नेतन्याहू ने यह बात गुरुवार को आर्मी रेडियो के एक पॉडकास्ट में कही। नेतन्याहू ने ब्रिटेन की मौजूदा स्थिति की तुलना ईरान से करते हुए कहा कि इजराइल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। नेतन्याहू ने कहा- आप ब्रिटेन को ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन’ कह सकते हैं। किसी ने कहा था कि परमाणु हथियार रखने वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन होगा। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ऐसा दूसरा देश न हो… आप जानते हैं मैं ईरान की बात कर रहा हूं।” नेतन्याहू का बयान सुनिए…
नेतन्याहू बोले- ब्रिटेन में इजराइल को लेकर सोच बदली नेतन्याहू ब्रिटेन और यूरोप में आबादी में हो रहे बदलावों की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले ब्रिटेन में इजराइल को लेकर सोच आज से काफी अलग थी। उन्होंने 1967 में अरब देशों के साथ हुए युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के बेटे और पोते उस समय पत्रकार बनकर इजराइल आए थे। उन्होंने युद्ध की रिपोर्टिंग इजराइल के पक्ष में की थी। नेतन्याहू ने कहा कि आज के ब्रिटेन में ऐसा माहौल देखना मुश्किल है। नेतन्याहू यूरोप को लेकर ऐसा क्यों कहते हैं? नेतन्याहू ने यह भी कहा कि पूरे यूरोप में ब्रिटेन जैसी स्थिति बन रही है। वह पहले भी यूरोप में बढ़ती मुस्लिम आबादी और दूसरे देशों से आने वाले मुस्लिम प्रवासियों को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ वहां की सरकारों का इजराइल के प्रति रुख भी बदल रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले के बाद गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई शुरू हुई। इसके बाद कई यूरोपीय देशों ने इजराइल की कार्रवाई और गाजा में आम लोगों की स्थिति को लेकर उसकी आलोचना की। नेतन्याहू का मानना है कि यूरोप में आबादी में हो रहे बदलाव भी इजराइल के खिलाफ बढ़ती आलोचना की एक वजह हैं। वेंस ने भी ब्रिटेन को लेकर ऐसा बयान दिया था नेतन्याहू का यह बयान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की 2024 की एक टिप्पणी से मिलता-जुलता है। उन्होंने एक भाषण में बताया था कि वह और उनका एक दोस्त इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि परमाणु हथियार रखने वाला पहला इस्लामी देश कौन होगा। वेंस ने कहा- मुझे लगा कि शायद यह ईरान हो सकता है। पाकिस्तान तो पहले से ही परमाणु हथियार रखने वाला देश है। हालांकि ब्रिटेन भी ऐसा देश बन सकता है, क्योंकि वहां लेबर पार्टी सत्ता में आ गई है। दरअसल, उस समय ब्रिटेन में लेबर पार्टी की जीत के बाद कीर स्टार्मर प्रधानमंत्री बने थे। वेंस ब्रिटेन में प्रवासियों को लेकर लेबर पार्टी की नीतियों पर तंज कसते हुए यह टिप्पणी कर रहे थे। वेंस उस समय ओहायो से अमेरिकी सीनेटर थे।

