Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

US-ईरान युद्ध: बुधवार, 1 जुलाई को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जब ईरान ने कहा कि वह US अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष को कुछ समय के लिए रोकने वाले नाज़ुक सीज़फ़ायर को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 50 सेंट, या 0.69% बढ़कर $73.45 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 63 सेंट, या 0.91% बढ़कर $70.13 प्रति बैरल हो गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेजी है?

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के दामाद, जेरेड कुशनर, और स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ मंगलवार को दोहा पहुँचे, जिसे व्हाइट हाउस ने हाई-लेवल बातचीत बताया। हालाँकि, ईरान और मेज़बान देश कतर ने साफ़ किया कि US डेलीगेशन सीधे ईरानी प्रतिनिधियों के बजाय मीडिएटर्स से बात करेगा। कतर ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी उन अधिकारियों में शामिल थे जो विटकॉफ और कुशनेर से मिले थे।

बुधवार की बढ़त के बावजूद, तिमाही आधार पर भारी गिरावट के बाद तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड साल की पहली और दूसरी तिमाही के बीच लगभग $45 प्रति बैरल गिरा, जो 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल संकट के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। इसी दौरान US क्रूड फ्यूचर्स लगभग $31 प्रति बैरल गिरा, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, जब COVID-19 महामारी ने ग्लोबल फ्यूल डिमांड को बुरी तरह प्रभावित किया था।

यह तेज गिरावट तब आई जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में हुई प्रगति ने उस रिस्क प्रीमियम को उलट दिया जिसने संघर्ष के दौरान कीमतों को बढ़ा दिया था।

मंगलवार को जारी रॉयटर्स के एक पोल से पता चला कि एनालिस्ट्स ने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार 2026 के लिए अपने तेल कीमतों के अनुमान को कम किया, जिससे लगातार पांच महीनों से ऊपर की ओर बदलाव का सिलसिला खत्म हो गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से ग्लोबल तेल सप्लाई में लंबे समय से रुकावटों की चिंता कम हो गई है। इस बीच, US के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने फिर कहा कि वॉशिंगटन ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाजों पर ट्रांज़िट फीस लगाने की इजाज़त नहीं देगा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ईरान के स्ट्रेटेजिक रूप से ज़रूरी इस पानी के रास्ते का इस्तेमाल करने वाले “जहाजों पर टोल वसूलने” से खत्म नहीं होगी।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

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Byju’s के लेंडर्स सेटलमेंट के लिए तैयार, लेकिन बदले में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में चाहते हैं 30% हिस्सा

एडटेक प्लेटफॉर्म Byju’s के ग्लोबल लेंडर्स (कर्ज देने वाले) फाउंडर बायजू रवींद्रन के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई वापस लेने को तैयार हैं। लेकिन बदले में कंपनी की हिस्सेदारी वाली आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहते हैं। इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि Byju’s के लेंडर्स विवाद को सुलझाने के अंतिम चरण में हैं और संभावना है कि वे ऑफलाइन कोचिंग संस्थान आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी लें।

समझौते के तहत सभी पक्ष एक साथ सभी मामले वापस ले लेंगे। Byju’s ने 2021 में 1 अरब डॉलर की डील में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज को खरीदा था। लेकिन तब से अब तक इसमें Byju’s की हिस्सेदारी काफी कम हो चुकी है और अब यह माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर है। अब आकाश में मणिपाल हेल्थ सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है।

Aakash पूरे भारत में 300 से ज्यादा सेंटर चलाती है, जो मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ स्कूल परीक्षाओं के लिए तैयारी कराते हैं। इसमें 5,000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स की फैकल्टी है और इसकी पिछली रिपोर्ट के अनुसार सालाना रेवेन्यू लगभग 25.4 करोड़ डॉलर था। रॉयटर्स के सूत्रों का कहना है कि सेटलमेंट की बातचीत में बायजू रवींद्रन, ग्लास ट्रस्ट, आकाश और मणिपाल हेल्थ शामिल हैं। आकाश की वैल्यू लगभग 2 अरब डॉलर आंकी गई है।

Byju’s: अर्श से यूं आई फर्श पर

Byju’s एक समय 21 से ज्यादा देशों में ऑपरेशनल थी और COVID-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन कोर्सेज के जरिए लोकप्रिय हुई थी। लेकिन 2023 की शुरुआत में हालात बदल गए, जब अमेरिका स्थित लेंडर्स के साथ कंपनी का बड़ा विवाद शुरू हुआ। अमेरिका स्थित ग्लास ट्रस्ट ने बायजू रवींद्रन पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया और 2024 में Byju’s के भारत में दिवालियापन के लिए आवेदन करने के बाद 1 अरब डॉलर के बकाया की मांग की।

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हालांकि रवींद्रन और Byju’s ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। लेकिन इस विवाद के चलते Byju’s ढह गई और 2024 में रवींद्रन ने कहा कि कंपनी की वैल्यू शून्य है। कानूनी विवाद Byju’s के दिवालिया होने के बाद से जारी है और भारत, सिंगापुर और अमेरिका की अदालतों में चल रहा है।

न IIT, न MIT… फिर भी 19 साल में करोड़ों की कमाई! जानिए आयुष सिंह की पूरी कहानी

आयुष सिंह मात्र 19 वर्ष की उम्र में ही चर्चा में आ गए हैं, क्योंकि बताया जा रहा है कि वे हर महीने करीब ₹1 करोड़ की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यात्रा बेहद साधारण परिस्थितियों से शुरू हुई, जब 13 साल की उम्र में COVID-19 महामारी के दौरान उनके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद से मशीन लर्निंग जैसी उन्नत तकनीक सीखनी शुरू की। धीरे-धीरे उनकी रुचि और मेहनत ने उन्हें टेक्नोलॉजी की दुनिया में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।

शुरुआती दौर में ही उन्होंने स्टार्टअप्स के साथ काम करना शुरू कर दिया, जिससे उनका अनुभव बढ़ता गया। कम उम्र में ही उनकी पहचान एक उभरते हुए टैलेंट के रूप में बनने लगी, और उनकी कहानी आज युवाओं के बीच प्रेरणा और चर्चा दोनों का विषय बनी हुई है।

टीनएज में ही स्टार्टअप्स की दुनिया में एंट्री

कुछ ही महीनों की मेहनत के बाद आयुष स्टार्टअप्स के साथ काम करने लगे। 14 साल की उम्र में ही उनके काम को MIT से भी सराहना मिली, जो इतनी कम उम्र में बेहद दुर्लभ माना जाता है। इसके बाद उन्होंने NLP सिस्टम पर काम किया और अमेरिका की एक कंपनी में योगदान दिया।

AI इंजीनियर से उद्यमी बनने तक का सफर

आयुष ने धीरे-धीरे खुद को डेटा साइंटिस्ट और MLOps इंजीनियर के रूप में स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने Antern नाम की कंपनी की शुरुआत की और Second Brain Labs की सह-स्थापना की, जहां AI इनोवेशन पर काम किया जाता है।

सीखने के साथ ‘सेलिंग स्किल’ ने बदली किस्मत

एक X पोस्ट के अनुसार, असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्हें अपनी स्किल्स को सही तरीके से पेश करना और बेचना सीखने को मिला। इसी रणनीति ने उनकी ग्रोथ को तेज कर दिया और उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए शिक्षा देना शुरू किया।

ऑनलाइन टीचिंग से बना बड़ा नेटवर्क

आयुष ने अपने सरल तरीके से AI जैसे कठिन विषयों को इंजीनियरों के लिए आसान बना दिया। इससे हजारों छात्रों ने उनसे सीखकर नौकरी पाई और उनका नेटवर्क तेजी से बढ़ता गया।

आज ₹1 करोड़ महीना और लगातार बढ़ती चर्चा

आज आयुष सिंह Topmate जैसे प्लेटफॉर्म से करीब ₹1 करोड़ महीना कमाते हैं। वे युवाओं को AI सिखाकर ग्लोबल लेवल पर प्रभाव बना रहे हैं। उनकी कहानी को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

कुछ लोगों ने उनकी मेहनत और सालों की सीख को सराहा, तो कुछ ने कोर्स बेचने की रणनीति पर सवाल उठाए। वहीं कई यूजर्स ने अपनी तुलना करते हुए हैरानी और मज़ाकिया प्रतिक्रियाएं भी दीं, जिससे यह कहानी और चर्चा में आ गई।

“मैं बॉस हूं’ वाले बयान पर ट्रंप की सफाई, बोले- मैं मजाक कर रहा था, मेरी बात को गलत समझा गया

Donald Trump: G7 नेताओं से “मैं बॉस हूं” (I’m the boss) वाली बात कहने के बाद, जब यह टिप्पणी वायरल हो गई और समिट के दौरान दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा और लोगों को इस बात पर हंसी भी आई, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा, “मैं मजाक कर रहा था। मैं बॉस बनने की कोशिश नहीं कर रहा था।” ट्रंप ने यह बात The Axios Show पर एक इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने बताया कि उनकी टिप्पणी का मकसद मजाक करना था, लेकिन उसे गलत संदर्भ में लिया गया।

उस पल को याद करते हुए जब शो के होस्ट ने ट्रंप से पूछा, “आप कमरे में आए और कहा, ‘मैं बॉस हूं।’ उनमें से कितने लोगों ने इस बात पर यकीन किया होगा?”

इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि जब वह उस कमरे में पहुंचे, जहां पहले से ही दुनिया के कई बड़े नेता बैठे थे, तो उन्होंने माहौल हल्का करने के लिए मजाक में यह बात कही थी। उनका कहना है कि इस बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं थी, लेकिन यह तेजी से वायरल हो गया।

“मैं बॉस हूं…” G7 बैठक में बोले ट्रंप 

बता दें कि बुधवार को, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने G7 शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन बैठक में प्रवेश करते समय एक मजाकिया टिप्पणी की, जिस पर सब हंस पड़े।

जब वह तीन दिवसीय जी7 समिट के अंतिम दिन की सुबह की बैठक में पहुंचे, तो बाकी देश के नेता पहले से अपनी सीटों पर बैठे हुए थे। उसी दौरान ट्रंप ने अंदर आते हुए कहा, “मैं बॉस हूं।”

इसी हंसी-मजाक के बीच, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस टिप्पणी को हल्के-फुल्के अंदाज में लिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने पूछा, “आप कैसे हैं?” ट्रंप ने जवाब दिया, “अच्छा हूं, धन्यवाद।”

G7 समिट का आयोजन कैसे होता है, और इसमें कितने देश शामिल हैं?

गौरतलब है कि G7 देश बारी-बारी से कार्यक्रमों की मेजबानी और आयोजन करते हैं। इस बार फ्रांस को पिछले साल के मेजबान कनाडा से G7 की अध्यक्षता मिली थी और 2027 में यह अमेरिका को सौंपी जाएगी।

वहीं, इस समूह का पहला शिखर सम्मेलन 1975 में फ्रांस के रैम्बौइलेट में हुआ था। इसमें छह देशों – फ्रांस, पश्चिमी जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका – के नेता एक साथ आए थे। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के बाद आई सबसे बड़ी आर्थिक मंदी से उबरने की गति तेज करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया था। अगले साल कनाडा भी इसमें शामिल हो गया, जिससे यह G7 बन गया।

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अमेरिका की राजनीति और खुफिया विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका की निवर्तमान डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे सीक्रेट दस्तावेज जारी किए हैं, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। गबार्ड ने सीधे तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची पर कोरोना महामारी (COVID-19) के सच को दबाने और अमेरिका की संसद से झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है।

गबार्ड के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने चीन की उसी वुहान लैब (WIV) को पैसे दिए थे, जहां से कोरोना वायरस के लीक होने का दावा पूरी दुनिया में किया जाता है।

चीनी लैब को दिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर

तुलसी गबार्ड ने अपने आखिरी दिन “पहले कभी न देखे गए” खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं:

खतरनाक रिसर्च की फंडिंग: डॉ. फाउची ने अमेरिकी जनता के टैक्स के लाखों-करोड़ों डॉलर चीन के ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (WIV) को दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ (वायरस की ताकत और फैलने की क्षमता बढ़ाने वाली) रिसर्च के लिए किया गया था।

सच्चाई को दबाया: जब 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी फैली, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस बात को पूरी तरह दबा दिया कि यह वायरस चीन की लैब से लीक (Lab-Leak) हुआ था।

‘डीप स्टेट’ का हथकंडा: खुफिया एजेंसियों को मोहरा बनाया

गबार्ड के दफ्तर द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. फाउची, जो 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के हेड रहे, उन्होंने बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के फायदे और ट्रिलियन डॉलर के वैक्सीन बाजार के चक्कर में इस खतरनाक रिसर्च को बढ़ावा दिया।

पीछे से घुमाई पूरी बाजी

बयान के मुताबिक, फाउची ने पर्दे के पीछे से खेल रचा। उन्होंने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर दबाव डाला कि वे जनता के सामने यही कहें कि कोरोना वायरस किसी लैब से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से जानवरों के जरिए फैला है। उन्होंने एक फर्जी रिसर्च पेपर भी तैयार करवाया ताकि लैब-लीक थ्योरी को झुठलाया जा सके। जो भी वैज्ञानिक या अधिकारी फाउची की बात से असहमत होता था, उसे नौकरी से हटाने या करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं।

“संसद के सामने कसम खाकर बोला झूठ”

तुलसी गबार्ड, जिन्होंने हाल ही में अपने बीमार पति की देखभाल के लिए डोनाल्ड ट्रंप की इंटेलिजेंस चीफ का पद छोड़ने का फैसला किया था, उन्होंने कहा कि फाउची के ये पैंतरे सीधे तौर पर ‘डीप स्टेट’ (पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले सीक्रेट नेटवर्क) जैसे हैं।

गबार्ड ने बताया कि जून 2024 में जब अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान फाउची से कसम खिलवाकर पूछा गया था कि— “क्या उन्होंने महामारी के पहले या बाद में एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) या किसी अन्य खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च को लेकर कोई बात की थी?” तो फाउची ने सवालों से बचते हुए साफ झूठ बोल दिया कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। जबकि नए दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि वे लगातार खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे।

अमेरिकी जनता को चाहिए इंसाफ

तुलसी गबार्ड ने भावुक होते हुए कहा, “कोविड-19 महामारी ने लाखों अमेरिकी नागरिकों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को असहनीय दर्द और तकलीफें दी हैं। सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच को छुपाने के खेल के बाद, अब अमेरिकी जनता पारदर्शिता, सच्चाई और इंसाफ की हकदार है।”

गबार्ड के इन बेहद संगीन और सीधे आरोपों पर फिलहाल डॉ. एंथनी फाउची या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन इस खुलासे ने दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक संकट यानी कोरोना वायरस के जन्म को लेकर एक बार फिर महासंग्राम छेड़ दिया है।

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चाचा से मिलने गया था खिलाड़ी, अब कंगारू टीम से खेलने का मिला मौका, 60 साल में पहली बार होगा कुछ ऐसा [VIDEO]

Nikhil Chaudhary Australia Team : क्रिकेट में किस्मत कब और कैसे पलट जाए, इसका ताजा उदाहरण हैं निखिल चौधरी। दिल्ली में जन्मे और पंजाब के लिए घरेलू क्रिकेट खेल चुके निखिल को ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज के लिए अपनी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया है। अगर उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है तो वह 60 साल से भी अधिक समय बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले भारत में जन्मे पुरुष क्रिकेटर बन जाएंगे।

 

निखिल चौधरी का चयन सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के इतिहास के लिए भी खास है। ऑस्ट्रेलिया की ओर से गुरिंदर संधू और तनवीर संघा जैसे भारतीय मूल के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं, लेकिन भारत में जन्मे किसी पुरुष क्रिकेटर को कंगारू टीम में जगह मिले छह दशक से ज्यादा समय बीत चुका है। इससे पहले गुजरात में जन्मे लेग स्पिनर रेक्स सेलर्स (Rex Sellars) ने 1964 में ऑस्ट्रेलिया के लिए खेला था। वहीं महिला क्रिकेट में पुणे में जन्मी दिग्गज क्रिकेटर लिसा स्थालेकर (Lisa Sthalekar) ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और उन्हें देश की महानतम महिला क्रिकेटरों में गिना जाता है।

 

ऑस्ट्रेलिया ने ट्रेविस हेड की अनुपस्थिति में निखिल को टीम में जगह दी है। चयनकर्ताओं का कहना है कि बिग बैश लीग में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें इस मौके का हकदार बनाया है।

 चाचा से मिलने गए, जिंदगी ने बदल दी दिशा

 

निखिल चौधरी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। साल 2020 में वह अपने चाचा से मिलने ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। लेकिन तभी कोरोना महामारी (Covid 19 Pandemic) के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद हो गईं और उन्हें वहीं रुकना पड़ा। शुरुआती दिनों में उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए, यहां तक कि पोस्टमैन की नौकरी भी की।

 

इसी दौरान उन्होंने स्थानीय क्रिकेट खेलना शुरू किया। उनकी प्रतिभा पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर जेम्स होप्स की नजर पड़ी, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। धीरे-धीरे निखिल ने ग्रेड क्रिकेट, राज्य क्रिकेट और फिर बिग बैश लीग में अपनी पहचान बना ली।

 

बिग बैश में चमके, चयनकर्ताओं का जीता भरोसा

 

30 वर्षीय निखिल लेग स्पिन गेंदबाजी के साथ उपयोगी बल्लेबाजी भी करते हैं। होबार्ट हरिकेंस के लिए खेलते हुए उन्होंने बिग बैश लीग के पिछले सीजन में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 300 से अधिक रन बनाए और टीम के खिताब जीतने में अहम भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय चयनकर्ता टोनी डोडेमेड ने कहा कि निखिल लंबे समय से चयनकर्ताओं की नजर में थे और बांग्लादेश दौरा उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का बड़ा अवसर होगा।

 

भारत में खेल चुके हैं घरेलू क्रिकेट

 

निखिल का जन्म 4 मई 1996 को दिल्ली में हुआ था। ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले वह पंजाब के लिए घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में पंजाब का प्रतिनिधित्व किया था। क्रिकेट जगत में यह भी चर्चा है कि वह अपने शुरुआती दिनों में शुभमन गिल के साथ ड्रेसिंग रूम साझा कर चुके हैं।

 

 बिना नागरिकता के भी खेल सकेंगे ऑस्ट्रेलिया के लिए

 

दिलचस्प बात यह है कि निखिल अभी ऑस्ट्रेलियाई नागरिक नहीं हैं। हालांकि उनके पास परमानेंट रेजिडेंसी है और वह पांच साल से अधिक समय से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं। ICC के नियमों के अनुसार वह ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह पात्र हैं।

 

ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज 17 जून से शुरू होगी। क्रिकेट प्रशंसकों की नजर अब इस बात पर होगी कि क्या दिल्ली में जन्मा यह खिलाड़ी कंगारू टीम की जर्सी पहनकर इतिहास रच पाता है या नहीं।

Australia T20I squad: Mitchell Marsh (c), Xavier Bartlett, Nikhil Chaudhary, Cooper Connolly, Tim David, Joel Davies, Nathan Ellis, Cameron Green, Aaron Hardie, Travis Head, Josh Inglis, Spencer Johnson, Matthew Kuhnemann, Riley Meredith, Josh Philippe, Matthew Renshaw, Adam Zampa.