मुस्लिम नाटो- पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के बीच रक्षा समझौता साइन:एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा; साझा ट्रेनिंग और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने ‘मुस्लिम नाटो’ की दिशा में बढ़ा कदम उठाया है। तीनों देशों ने शुक्रवार को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के मुताबिक, अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे तीनों देशों पर अटैक माना जाएगा। इस समझौते पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने संयुक्त रक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान साइन किए। समझौते के तहत तीनों देश आपस में रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे। इसके लिए संयुक्त सैन्य ट्रेनिंग, सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने और सुरक्षा समन्वय बढ़ाने पर काम किया जाएगा। साथ ही तीनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग भी मजबूत किया जाएगा। समझौते के तहत सैन्य मदद कितनी तय है विश्लेषकों के मुताबिक, तीनों देशों ने क्षेत्रीय विरोधियों को नाराज करने से बचने की कोशिश की है। यह अभी साफ नहीं है कि समझौता अपने किसी सदस्य पर हमला होने पर बाकी सदस्यों को उसकी रक्षा के लिए कितना मजबूर करेगा। किलोवेन ग्रुप सलाहकार कंपनी के चेयरमैन हार्लन उलमैन ने अल जजीरा से कहा, “हमने अभी मक्का घोषणा नहीं देखी है। हमारा मानना है कि इसमें कहा गया है कि एक पर हमला सभी पर हमला माना जाना चाहिए। यहां ‘माना जाना चाहिए’ महत्वपूर्ण शब्द हैं, क्योंकि इसका मतलब ‘जरूरी तौर पर’ नहीं है।” क्षेत्रीय खतरे इन देशों से दूर नहीं हैं। पाकिस्तान फरवरी से अफगानिस्तान के साथ सीमा संघर्ष में उलझा हुआ है। मई 2025 में उसका परमाणु शक्ति संपन्न भारत के साथ भी कई दिनों तक गोलीबारी का आदान-प्रदान हुआ था। सऊदी अरब पर फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान और उसके सहयोगी बार-बार हमले कर चुके हैं। तुर्किये कई साल से देश के अंदर और बाहर कुर्द सशस्त्र समूहों से लड़ता रहा है। इजराइल के साथ उसका तनाव भी बढ़ा है। उलमैन जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौता तीनों देशों को इनमें से किसी संघर्ष में कैसे खींच सकता है। उलमैन ने कहा, “मान लीजिए यमन में हूती सऊदी अरब पर हमला करते हैं, तो क्या इससे तुर्किये इसमें शामिल होगा? क्या पाकिस्तान शामिल होगा? यह अभी देखा जाना बाकी है।” मध्य पूर्व में बदलते समीकरण मध्य पूर्व में पिछले कुछ सालों में काफी उथल-पुथल हुई है। इसमें सबसे अहम घटनाएं 7 अक्टूबर 2023 को हमास का इजराइल पर हमला और उसके बाद गाजा में इजराइल का नरसंहार हैं। ईरान और इजराइल के बीच दशकों से चल रही धमकियां भी ऐसे क्षेत्रीय युद्ध में बदल गई हैं, जो अभी खत्म नहीं हुआ है। अब मध्य पूर्व और उसके बाहर के कई देश इस अव्यवस्था से निपटने और अगले दौर की तैयारी का तरीका तलाश रहे हैं। इनमें से कई देश पुराने मतभेद पीछे छोड़कर आपसी खतरों के सामने व्यावहारिक रास्ता अपनाने का फैसला करते दिख रहे हैं। तुर्किये और सऊदी अरब इसके उदाहरण हैं। 2018 में सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की अपने देश के इस्तांबुल वाणिज्य दूतावास में हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गहरी दरार आ गई थी। यह तनाव कई साल तक बना रहा। लेकिन 2022 तक रियाद और अंकारा ने पुराने मतभेद पीछे रखने शुरू कर दिए। सऊदी अरब पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा था, जबकि तुर्किये अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करना चाहता था। इसके बाद से इजराइल और ईरान ने मध्य पूर्व पर दबाव बनाया है और इस क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजनाओं पर आगे बढ़े हैं। माना जाता है कि इसी दबाव ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये को एक-दूसरे के करीब आने में मदद की है। तीनों देशों की अलग-अलग ताकत मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का मकसद तीनों देशों के सामने आने वाले किसी भी खतरे को रोकना है। अल जजीरा के संवाददाता उसामा बिन जावेद ने कहा कि तीनों देश इस समझौते में अलग-अलग ताकत लेकर आए हैं। बिन जावेद ने कहा, “इनमें से हर देश अपनी खास क्षमता लेकर आया है। पाकिस्तान के पास युद्ध का अनुभव रखने वाली सेना, हथियार और परमाणु हथियार हैं। मुस्लिम बहुल देश में परमाणु हथियार रखने वाला यह इकलौता देश है।” उन्होंने कहा, “नाटो के महत्वपूर्ण सदस्य तुर्किये के पास दुनिया की बेहतरीन ड्रोन तकनीक और उन्नत रक्षा निर्माण क्षमता है। सऊदी अरब इन सबको आर्थिक ताकत देने का काम करेगा।” अमेरिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नए सैन्य गठबंधनों और खतरों से बचाव के नए तरीकों की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है। सऊदी अरब और कुछ हद तक तुर्किये लंबे समय से अमेरिका को अपना प्रमुख सुरक्षा सहयोगी मानते रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति लगातार बदलती और अनिश्चित होती जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देश दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मध्य पूर्व में इजराइल अमेरिका की विदेश नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकता दिखाई देता है। इससे यह चिंता बढ़ी है कि अमेरिका अपने दूसरे सहयोगियों की रक्षा करने के लिए कितना तैयार होगा। उलमैन ने कहा, “ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि सहयोगियों को अपनी रक्षा खुद करनी होगी। मेरे लिए यह साफ है कि हमारे सहयोगी दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।” इजराइल और ईरान को लेकर सावधानी इजराइल और ईरान ने खुद को क्षेत्रीय खतरे के रूप में दिखाया है। फिर भी मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल देशों ने यह बताने से सावधानी बरती है कि यह गठबंधन किसी बाहरी ताकत के खिलाफ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इजराइल और ईरान से पैदा होने वाले खतरे साफ हैं। बिन जावेद ने कहा, “तीनों देशों के लिए इजराइल क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता का सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।” उन्होंने कहा, “ईरान इस खतरे की सूची में उसके ठीक बाद आता है। खासकर ईरान की ओर से वॉशिंगटन के हितों पर हमलों के बाद सऊदी अरब के लिए यह खतरा और ज्यादा है।” क्षेत्र के कई लोगों का मानना है कि इजराइल ने 2023 के बाद यह दिखाया है कि वह मतभेदों को बातचीत से सुलझाने के बजाय सैन्य ताकत से सुलझाने में ज्यादा रुचि रखता है। इससे पहले इजराइल ने सऊदी अरब के साथ रिश्ते सामान्य करने की कोशिश की थी। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उभरते हुए “सुन्नी गठबंधन” के खतरों की बात भी शुरू की है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया है कि उनका मतलब किस गठबंधन से है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेतन्याहू के बयान ऐसी स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिसमें सुन्नी बहुल ताकतें वास्तव में एक साथ आ जाएं। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये तीनों देशों में सुन्नी बहुसंख्यक हैं। ईरान पहले ही सऊदी अरब पर हमला कर चुका है। ईरान समर्थित दूसरे समूह भी सऊदी अरब पर हमले कर चुके हैं। इसके जवाब में सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित समूहों पर हमले किए हैं। क्या गठबंधन में नए देश जुड़ेंगे यह अभी साफ नहीं है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में मिस्र, कतर, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई जैसे दूसरे देश भी शामिल होंगे या नहीं। ऐसे गठबंधन के फायदे समझ में आते हैं। मध्य पूर्व के सुन्नी बहुल देश अक्सर अलग-अलग रहे हैं। कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसी वजह से वे इजराइल और ईरान से पैदा होने वाले खतरों से निपट नहीं पाए हैं। हालांकि, पुराने मतभेद और अलग-अलग हित इस गठबंधन के विस्तार को तय नहीं मानने की वजह देते हैं। सीरिया इस समय 13 साल चले भीषण संघर्ष के बाद युद्ध के बाद पुनर्निर्माण पर ध्यान दे रहा है। इजराइल की उत्तरी सीमा पर उसकी स्थिति ऐसी है कि वह ऐसे समझौते में शामिल होने से हिचक सकता है, जिसे इजराइल नकारात्मक नजर से देखे। मिस्र ने भी साफ संकेत दिए हैं कि उसका ध्यान अर्थव्यवस्था पर है और वह देश के अंदर किसी उथल-पुथल से बचना चाहता है। अतीत में वह क्षेत्र में जहाजों के रास्तों की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब की अगुआई वाले समुद्री गठबंधन में शामिल होने से हिचक चुका है। मिस्र को डर था कि वह क्षेत्रीय संघर्ष में खिंच सकता है। यूएई भी सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के गठबंधन में संभावित सदस्य हो सकता है। लेकिन हाल के सालों में यूएई के रुख कई बार इन देशों से अलग रहे हैं। यमन और इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने जैसे मुद्दों पर यह अंतर सबसे ज्यादा दिखाई दिया है। अमेरिका के समर्थन से हुए अब्राहम समझौते इजराइल के साथ ज्यादा करीबी रखने वाले एक दूसरे क्षेत्रीय समूह को सामने लाते हैं। इसे मक्का गठबंधन में शामिल देशों के प्रतिद्वंद्वी समूह के रूप में देखा जा सकता है। गठबंधन की असली परीक्षा कब होगी मध्य पूर्व के रिश्तों की जटिलता शुक्रवार को हुए समझौते के बाद नए क्षेत्रीय समीकरण के उभरने वाली किसी भी धारणा की मुश्किलें दिखाती है। इस क्षेत्र में गठबंधन दशकों से बदलते रहे हैं। आगे भी इनमें बदलाव हो सकते हैं। इस गठबंधन का असली आकलन तब होगा, जब इसकी वास्तविक परीक्षा होगी। इजराइल और ईरान ने दिखाया है कि वे युद्ध करने और उसके नतीजे झेलने के लिए तैयार हैं। अब सवाल यह है कि क्या सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान एक-दूसरे के लिए ऐसा करने को तैयार हैं। आज के मध्य पूर्व में ऐसी स्थिति बन सकती है, जो उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर करे। आखिरकार, उनके फैसले ही साफ करेंगे कि क्या वास्तव में एक तीसरा क्षेत्रीय ध्रुव उभर रहा है।

अरुणाचल की 27 जगहों को मैप पर अलग से दिखाया:राज्य से सलाह के बाद फैसला; चीन ने कई बार भारतीय सीमा वाले इलाकों के नाम बदले

भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है।

अरुणाचल की 27 जगहों को मैप पर अलग से दिखाया:राज्य से सलाह के बाद फैसला; चीन ने कई बार भारतीय सीमा वाले इलाकों के नाम बदले

भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है।

भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में

अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। अगर वहां भी बिल पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बनेगा। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। व्हाइट हाउस ने पहले भी रूस पर पाबंदियां लगाने की कोशिश की थी। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान जब होर्मुज बंद हुआ, तो तेल का संकट आ गया। इस वजह से अमेरिकी प्रशासन को तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए छूट देनी पड़ी थी। भारत ने जून में आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत बनाम श्रीलंका टेस्ट सीरीज का मजा स्टेडियम में मुफ्त लूट सकेंगे दर्शक

INDvsSL भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से गॉल में शुरू हो रही दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के दौरान क्रिकेटप्रेमियों को स्टेडियम में मुफ्त प्रवेश दिया जायेगा।श्रीलंका क्रिकेट ने एक विज्ञप्ति में कहा ,‘‘ श्रीलंका क्रिकेट यह घोषणा करता है कि भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट श्रृंखला के दौरान दर्शकों को मुफ्त प्रवेश दिया जायेगा जिससे क्रिकेटप्रेमियों को विश्व स्तरीय टेस्ट क्रिकेट देखने का मौका मिलेगा।’’पहला मैच गॉल स्टेडियम पर होगा जबकि दूसरा टेस्ट कोलंबो में 23 से 27 अगस्त के बीच खेला जायेगा।श्रीलंका में टेस्ट क्रिकेट देखने दर्शक कम ही आते हैं । पहले भी भारतीय टीमों ने खाली स्टेडियमों में मैच खेले हैं।

15 अगस्त से शुरु होने वाले पहले टेस्ट के लिए श्रीलंका ने अभी तक टीम घोषित नहीं की। श्रीलंका हाल ही में  वेस्टइंडीज के खिलाफ एक टेस्ट मैच हारकर आई थी। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में श्रीलंका भारत के ठीक नीचे छठवें स्थान पर है और उसका जीत प्रतिशत 41 है, वहीं भारत का जीत प्रतिशत 48 है।

कभी भारत की ताकत मानी जाने वाली स्पिन गेंदबाजी टेस्ट क्रिकेट में भारत की कमजोरी बनकर उभरी है। भारत ने अपने घर में पहले न्यूजीलैंड और फिर दक्षिण अफ्रीका से बिना कोई टेस्ट जीते सीरीज गंवानी पड़ी थी। इस सीरीज में 85 प्रतिशत विकेट स्पिन गेंदबाजों के थे।

श्रीलंका में भी भारत को स्पिन के मुफीद पिचें पेश की जाएंगी। हालांकि यह हो सकता है कि पहले ही दिन से पिच टर्न ना ले जैसा भारत में देखते हैं लेकिन भारत इस सीरीज को 2-0 से जीतने के लिए कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस ही बात से लगाया जा सकता है कि भारत के सभी नेट गेंदबाज स्पिनर हैं और अलग विविधता के हैं।

टीम में 4 स्पिनरों को जगह दी है और शीर्ष तेज गेंदबाजी क्रम अनुभवी है।टीम में कुलदीप यादव, रविंद्र जड़ेजा, अफगानिस्तान के खिलाफ ड्रीम डेब्यू करने वाले मानव सुथार और इस सीरीज में डेब्यू करने वाले स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को मौका मिला है।

विश्व टेस्ट चैंपियनशित चक्र 2025-27 को देखते हुए अब भारत की टीम ज्यादा जोखिम नहीं ले सकती। टीम इंडिया के लिए बचे हुए 9 मैचों में से 7 जीतने आवश्यक है।

जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका

जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका

जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जापान और चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।

फ्लॉप पेसर्स के बाद स्पिनर्स ने कराई भारत की वापसी, श्रीलंका ने जड़े 363 रन

INDvsSL कुलदीप यादव , रवींद्र जडेजा और मानव सुथार (दो-दो विकेट) की बेहतरीन गेंदबाजी की बदौलत भारत ने शुक्रवार को एकमात्र अभ्यास मैच के पहले दिन शुक्रवार को श्रीलंका इलेवन के 363 रन पर आठ विकेट झटक लिये।

आज यहां श्रीलंका इलेवन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। निशान मदुश्का और रविंदु रसंता की सलामी जोड़ी ने तेज शुरुआत करते हुए पहले विकेट के लिए 110 रनों की साझेदारी की। 21वें ओवर में निशान मदुश्का 65 गेंदों में (66) के रनआउट होने पर यह साझेदारी टूटी। मदुश्का ने अपनी पारी में 11 चौके और एक छक्का लगाया।

इसके बाद बल्लेबाजी करने आये संजूला सूर्याबंडारा ने रविंदु रसंता के साथ पारी को संभाला। 40वें ओवर में रवींद्र जडेजा ने संजूला सूर्याबंडारा (35) को बोल्ड कर इस साझेदारी का अंत किया। 50वें ओवर में सुथार ने रविंदु रसंता 143 गेंदों में (71) रन को आउट किया। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके और एक छक्का लगाया। पवन रत्नायके (39) को गुरनूर बराड़ ने आउट किया। अगले ही ओवर में अहान विक्रमसिंघे (31) को कुलदीप यादव ने आउट किया। अंजला बंडारा (13) रन को आउट कर कुलदीप ने अपना दूसरा विकेट लिया।

रमेश मेंडिस (32) को रवींद्र जडेजा ने आउट किया। कप्तान सोनल दिनुशा ने 72 गेंदों में पांच चौकों और एक छक्के की मदद से 52 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली। मानव सुथार ने दिनुशा को पगबाधा आउट कर भारत को आठवीं सफलता दिलाई।स्टंप्स के समय श्रीलंका इलेवन ने 90 ओवरों में आठ विकेट पर 363 रन बना लिये है। केशरा नुवंता (नाबाद नौ) और दिलम सुदीरा (नाबाद एक) रन क्रीज पर मौजूद हैं।

‘एक और पाकिस्तान…’, आतंकवाद पर को शेख हसीना के बेटे ने दिखाया आईना, भारत ने कही ये बात

भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी। बता दें कि, जॉय ने दावा किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बढ़ते आतंकवाद के कारण बांग्लादेश, भारत के पूर्वी हिस्से के लिए “एक और पाकिस्तान” बन गया है। शुक्रवार 8 अगस्त को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर कहा कि भारत पूरी तरह सतर्क है और पड़ोसी देशों में हो रही हर गतिविधि पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, “हम अपने क्षेत्र और पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। सुरक्षा के लिहाज से हर स्थिति की निगरानी की जाती है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम भी उठाए जाते हैं।”

हसीना के बेटे ने क्या दावा किया?

साजीब वाजेद जॉय ने यह बयान बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम साउथ एशिया फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (एफसीसी) की ओर से आयोजित किया गया था। उन्होंने यह बात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन से पहले कही। भारत की सुरक्षा का जिक्र करते हुए जॉय ने दावा किया कि “भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि बांग्लादेश उसके पूर्वी मोर्चे पर एक और पाकिस्तान बनता जा रहा है।” उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) को बांग्लादेश में खुलकर काम करने की छूट मिली हुई है।

शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। हसीना के पद छोड़ने के बाद मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनकी देखरेख में देश में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हुई और इस साल फरवरी में चुनाव कराए गए।

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा, “जिस कार्यक्रम की बात की जा रही है, उसका आयोजन एक निजी मीडिया संस्था कर रही है। इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है और न ही सरकार उस मंच पर रखे जाने वाले विचारों का समर्थन करती है।”

कड़ा हुआ खिलाड़ियों का फिटनेस टेस्ट, 5 मिनट में दौड़ने होगे 1200 मीटर

Team India

भारतीय खिलाड़ियों का फिटनेस परीक्षण पहले यो यो टेस्ट से होता था लेकिन अब रग्बी के खेल में फिटनेस जांचने का टेस्ट जिसे BRONCO कहते हैं वह अब भारतीय क्रिकेट टीम अपनाने वाली है। यह टेस्ट योयो टेस्ट से भी काफी कठिन होने वाला है।

ब्रोंको टेस्ट एक प्रशिक्षण अभ्यास है जिसमें खिलाड़ी 20 मीटर शटल रन से शुरुआत करता है, जिसके बाद 40 मीटर और 60 मीटर की दौड़ भी होती है। ये तीन रन मिलकर एक सेट बनाते हैं। गौरतलब है कि एक खिलाड़ी को ऐसे पाँच सेट करने होते हैं, जो बिना रुके कुल 1200 मीटर दौड़ के बराबर होंगे। खिलाड़ियों को यह टेस्ट छह मिनट में पूरा करना होता है।

समझा जाता है कि टीम के कुछ खिलाड़ी पहले ही बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के बेंगलुरु स्थित उत्कृष्टता केंद्र में ब्रोंको टेस्ट दे चुके हैं। ब्रोंको टेस्ट के अलावा, बीसीसीआई भारतीय टीम के सितारों के लिए फिटनेस टेस्ट के तौर पर यो-यो टेस्ट और 2 किलोमीटर का टाइम ट्रायल भी आयोजित करता है।

गौरतलब है कि ले रॉक्स जून 2025 में भारतीय टीम में स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच के रूप में शामिल हुए थे; जनवरी 2022 से मई 2023 तक टीम इंडिया में भी वह इसी पद पर थे और दक्षिण अफ्रीका के कोचिंग स्टाफ का भी हिस्सा रहे। इसके अलावा, उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स और पंजाब किंग्स जैसी आईपीएल टीमों में भी काम किया।

भारत के कई अनुबंधित खिलाड़ी इस टेस्ट के लिए बेंगलुरु पहुंचे

गौरतलब है कि भारत के कुछ अनुबंधित खिलाड़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शुरू किए गए ब्रोंको टेस्ट के लिए बेंगलुरु पहुँच चुके हैं। यह टेस्ट फिटनेस मानकों को बनाए रखने के लिए शुरू किया गया है और कोच तेज़ गेंदबाज़ों के लिए वेट ट्रेनिंग की बजाय रनिंग ड्रिल को ज़्यादा प्राथमिकता देने पर विचार कर रहे हैं।

एक प्रतिश्ठित अंग्रेजी अखबार के सूत्र के हवाले से बताया, “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ब्रोंको टेस्ट शुरू किया गया है। भारत के कुछ अनुबंधित खिलाड़ी बेंगलुरु पहुँच चुके हैं और उन्होंने यह टेस्ट दिया है। ब्रोंको टेस्ट का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि फिटनेस मानक स्पष्ट हों।”