लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लाल किले पर आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दूसरे साल शामिल नहीं हुए। 2024 में सीट व्यवस्था को लेकर हुए विवाद के बाद से यह मुद्दा फिर चर्चा में है। ALSO READ: युवाओं के लिए पीएम मोदी का बड़ा प्लान, 1 करोड़ को AI ट्रेनिंग, फ्री कोचिंग से लेकर स्पोर्ट्स टैलेंट हंट तक बड़े ऐलान

 

स्वतंत्रता दिवस समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को टेबल ऑफ प्रेसीडेंस के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के ठीक बाद सीट दी जानी थी। हालांकि मुख्य कार्यक्रम से राहुल गांधी समेत संपूर्ण विपक्ष ने दूरी बनाई।

 

बैठने की व्यवस्था को लेकर हुआ था विवाद

गौरतलब है कि 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बैठने की व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को परंपरा और प्रोटोकॉल से अलग हटकर दूसरी आखिरी पंक्ति में बैठाया गया था। ALSO READ: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के बड़े ऐलान, सप्तधारा से लेकर विजन विकसित भारत 2047 तक का प्रधानमंत्री के भाषण की 10 खास बातें

 

विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनता का अपमान करार दिया था, जबकि कार्यक्रम का आयोजन करने वाले रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी थी कि पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाले एथलीटों को सम्मानित करने और जगह देने के लिए बैठने के क्रम में बदलाव किया गया था।

 

बहरहाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2025 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से दूरी बनाई और इस बार भी वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। 2024 में हुए सीट विवाद को ही इस साल भी कार्यक्रम में न पहुंचने की वजह माना जा रहा है। ALSO READ: लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा विजन, ‘सप्तधारा’ की 7 शक्तियों से बदलेगा भारत; जानिए क्या हैं ये शक्तियां

7.7 की तीव्रता वाले भूकंप से थर्राया इंडोनेशिया, सुनामी का अलर्ट

7.7 की तीव्रता वाले भूकंप से थर्राया इंडोनेशिया, सुनामी का अलर्ट

earthquake in indonesia

Indonesia Earthquake : इंडोनेशिया में शनिवार सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप से हड़कंप मच गया। भूकंप के तेज झटकों से कई इमारतें ध्वस्त हो गई। अब तक 5 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। भूकंप के बाद सुनामी का अलर्ट भी जारी किया गया। ALSO READ: लद्दाख के लेह में 5.5 तीव्रता का भूकंप, सुबह-सुबह कांपी धरती; घरों से बाहर निकले लोग

 

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.7 रही। भूकंप का केंद्र फ्लोरेस द्वीप के उत्तरी तट के पास एंडे से लगभग 68 किमी उत्तर पश्चिम में था।

 

भूकंप के बाद इलाके में कई आफ्टरशॉक भी दर्ज किए गए। इनमें 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता के झटके शामिल थे। शुरुआत में कई तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी जिसे कुछ घंटे बाद हटा लिया गया। फिलहाल लोगों से सुरक्षित जगह पर रहने को कहा गया है।

 

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ इमारतें गिरती और क्षतिग्रस्त होती दिखाई दे रही हैं। कई लोग भूकंप के बाद घरों और इमारतों से बाहर निकलते नजर आए। हालांकि, इन वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है। ALSO READ: सूर्य ग्रहण से पहले कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, 250 की मौत और 3000 लापता; 21 आफ्टरशॉक से दहशत

गौरतलब है कि इंडोनेशिया में साल 2004 में इतिहास का सबसे विनाशकारी भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 9.1 मापी गई थी। भूकंप के बाद सुनामी की जोरदार लहरें उठी थीं जिससे पूरे क्षेत्र में 2 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे।

 

कैसे आता है भूकंप?

हमारी धरती मुख्य तौर पर 4 परतों से बनी हुई है- इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टलऔर क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत वर्गों में बंटी हुई है जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं। लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और उर्ध्वाधर दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट, दूसरी के नीचे आ जाती है।

 

कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन् 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।

 

इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह प्रति स्केल 32 गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुना बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

युवाओं के लिए पीएम मोदी का बड़ा प्लान, 1 करोड़ को AI ट्रेनिंग, फ्री कोचिंग से लेकर स्पोर्ट्स टैलेंट हंट तक बड़े ऐलान

युवाओं के लिए पीएम मोदी का बड़ा प्लान, 1 करोड़ को AI ट्रेनिंग, फ्री कोचिंग से लेकर स्पोर्ट्स टैलेंट हंट तक बड़े ऐलान

PM Modi announcement for youths in independence day speech

PM Modi Independence Day Speech : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और ‘शक्ति की सप्तधारा’ पर खास जोर दिया। इस दौरान  उन्होंन Gen-G और Gen-अल्फा के लिए भी बड़े एलान किए। 

 

1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में युवाओं के लिए बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि एक साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई (AI) स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। ALSO READ: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के बड़े ऐलान, सप्तधारा से लेकर विजन विकसित भारत 2047 तक का प्रधानमंत्री के भाषण की 10 खास बातें

 

छात्रों को मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था

पीएम मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराने के बाद देशवासियों को संबोधित करते हुए छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था की शुरू करने का भी एलान किया।

 

स्पोर्ट्स टैलेंट हंट 

प्रधानमंत्री ने स्पोर्ट्स टैलेंट हंट की भी घोषणा कर दी है. पीएम ने कहा कि गांवों और शहरों में 5 से लेकर 15 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के लिए देशव्यापी स्पोर्ट्स टैलेंट हंट अभियान चालाया जाएगा। इस अभियान का लक्ष्य भारत को 2036 ओलंपिक और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए एक मजबूत 'मेडल पावरहाउस' बनाना है। इस अभियान में चुने गए बच्चों को विश्व स्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान और आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी।

 

सिविल डिफेंस में सुधार

पीएम मोदी ने कहा कि हमें देश की सुरक्षा के लिए नागरिकों को भी आगे लाना है। मैं लाल किले से एलान कर रहा हूं कि हम जल्द ही नागरिक रक्षा (सिविल डिफेंस) का देश में एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करेंगे, जो आधुनिक चुनौतियों का सामना करेगा। इसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी होगी। ALSO READ: लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा विजन, ‘सप्तधारा’ की 7 शक्तियों से बदलेगा भारत; जानिए क्या हैं ये शक्तियां

 

न्यूक्लियर एनर्जी को लेकर बड़ा ऐलान

न्यूक्लियर एनर्जी को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए पीएम मोदी कहा कि भारत ने 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। अगले 6-7 साल में 5 नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू किए जाएंगे। आने वाले 7-8 सालों में 5 से 8 नए सेमीकंडक्टर प्लांट पर भी काम शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने 'मेड इन इंडिया 6G' को घर-घर तक पहुंचाने और साल 2030 तक 6G तकनीक के विकास में वैश्विक नेतृत्व करने का भी ऐलान किया।

 

ग्लोबल इनोवेशन हब

PM मोदी ने ग्लोबल इनोवेशन हब बनाने का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि हमने युवाओं को रिसर्च के नए अवसर दिए हैं। इनोवेशन के लिए एक लाख करोड़ रुपये का फंड बनाया गया है। हमारे प्राइवेट स्टार्टअप्स में 28 साल की औसत उम्र के युवाओं ने अपने ट्रायल सैटेलाइट लॉन्च करके कमाल दिखाया है। उन्होंने कहा कि आप आइडिया लेकर आइए हम संसाधनों की कमी नहीं होने देंगे।

स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के बड़े ऐलान, सप्तधारा से लेकर विजन विकसित भारत 2047 तक का प्रधानमंत्री के भाषण की 10 खास बातें

स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के बड़े ऐलान, सप्तधारा से लेकर विजन विकसित भारत 2047 तक का प्रधानमंत्री के भाषण की 10 खास बातें

PM Modi independence day speech

PM Modi Red Fort Speech : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और ‘शक्ति की सप्तधारा’ पर खास जोर दिया। इस दौरान  उन्होंन Gen G और Gen अल्फा के लिए भी बड़े एलान किए। 

 

शक्ति की सप्तधारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक-नवाचार, गतिशक्ति, रक्षा, ग्रीन-ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर को देश की 7 प्रमुख शक्तियां बताया। ALSO READ: लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा विजन, ‘सप्तधारा’ की 7 शक्तियों से बदलेगा भारत; जानिए क्या हैं ये शक्तियां

 

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया और तेज विकास पर जोर दिया। पीएम मोदी ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि मेहनत में कोई कमी न करते हुए हम विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करके रहेंगे। हमें मिलकर आगे बढ़ना है। सुधारों को आगे बढ़ाते रहना है। हम यह दृढ़ विश्वास से कर रहे हैं। देश के विकास में युवा सबसे बड़ी ताकत है और विकसित भारत का सबसे बड़ा साधक और लाभार्थी भी देश का युवा है। हमें युवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाते हुए आगे बढ़ना है। स्टार्ट अप इंडिया के चलते देश में स्टार्ट अप बनते जा रहे हैं। मैं युवाओं को कहना चाहता हूं कि आप सपने लेकर आएं, हम संसाधन की कमी नहीं होने देंगे। सस्ते डेटा ने युवाओं को आगे बढ़ाया है। देश के नौजवानों को इसने नई ताकत दी है। स्किल इंडिया को हमने आगे बढ़ाया। खेलो इंडिया बढ़ाया।

 

जनगणना के काम के लिए आगे आएं युवा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबधन में कहा, आज मुझे एक काम के लिए आपकी मदद चाहिए। सभी नौजवानों से मैं चाहता हूं कि आप नेतृत्व करिए। आपका एक या दो घंटे देश को बहुत बड़ी शक्ति देने वाला है। इन दिनों में देश में जनगणना का काम हो रहा है। गिनती सिर्फ आंकड़ों से बात बनती नहीं है। उसकी बारीकियों से योजनाएं बनती हैं, देश के आगे बढ़ने की रूप रेखा तैयार होती है। कभी कभी सरकार के प्रतिनिधि जल्दी में होते हैं, वे कुछ गड़बड़ी कर देते हैं। इस बार निर्णय हुआ है कि आप अपनी जानकारी जनगणना में भरकर दे सकते हैं। लेकिन आप परिवार के सब बैठकर डिजिटली अपनी रजिस्ट्री करा दें। आप जितनी परफेक्ट जानकारी देंगे, देश को उससे आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इससे देश की समय और शक्ति काम आएगी। ALSO READ: आजादी के 80 साल : अगर भगत सिंह और सरदार पटेल आज लौट आएं तो क्या पूछेंगे?

 

आत्मनिर्भरता के मंत्र से किया चुनौतियों का सामना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कहा, एक समय था, जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ लोग एसी में बैठकर बात करने वाले लोग हमें बता रहे थे कि वैश्वीकरण का क्या होगा। जहां से वैश्वीकरण की आवाज आती थी, उसने बोलना ही बंद कर दिया। लेकिन इस संकट के कालखंड में कुछ लोगों ने इन संसाधनों का हथियारीकरण करने का काम किया। संसाधनों का हथियारीकरण। पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयां, तकनीक की चीजें। अगर हम आत्मनिर्भर का मंत्र लेकर आगे नहीं चले होते तो ऐसी चुनौतियों का सामना कैसे करते। ऐसी चुनौतियां आगे बढ़ती जा रही हैं।

 

महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से अपील

उन्होंने कहा कि हमने संसद में महिला शक्ति को बल देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया था। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह कर रहा हूं कि महिलाओं के समार्थ्य के पुजारी बनिए। जल्द से जल्द हमारी माताओं-बहनों को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व मिले, वे भारत के विकास में योगदान दें। आइये महिला आरक्षण लागू कर के आप भी उन्हें आगे बढ़ाने का श्रेय लीजिए, लेकिन हमारी नारी शक्ति को बल दीजिए।

 

हथियार वाले नक्सली तो मारे गए, दिमाग वाले नक्सली देश में

प्रधानमंत्री ने कहा, देश की सत्ता में वर्षों तक माओवादी सोच वाले लोग जगह बनाकर बैठे थे। इन लोगों ने सरकारों की नीतियों को भी प्रभावित किया था। हमें नक्सलवादियों से देश को आजाद कराने में मदद मिली है। हथियार वाले नक्सल तो गए लेकिन दिमाग वाले नक्सल देश में हैं। यह देश को हिंसा में घसीटने की कोशिश में जुटे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन्हें अलग-थलग करना होगा। सुरक्षित भारत बनाना हमारा दायित्व है। सुरक्षा सीमा के अंदर हो या बाहर हम सबके लिए तैयार हैं। जरूरी नहीं कि युद्ध सीमाओं पर हो, आज तेल रिफाइनरियों पर हमले हो रहे हैं, बैंकिग क्षेत्र हमलों का शिकार हो रहे हैं। हमें इन क्षेत्रों की सुरक्षा भी करनी है। ALSO READ: 1971 युद्ध का वो 'संत', जिसके नाम से कांपती थी पाकिस्तानी टैंक रेजिमेंट : पढ़िए महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह की शौर्य गाथा

 

कुछ लोगों को देश को भयभीत करने में आनंद आता है

पीएम मोदी ने कहा कि हमने सोचा भी नहीं था कि हमें कुछ समस्याओं को झेलना पड़ेगा। 12 साल में हमने कोरोना जैसी महामारी झेली, जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया। कोरोना के बाद कहीं यूक्रेन तो कहीं पश्चिम एशिया, हर जगह तनाव का माहौल। कुछ लोगों को तो सिर्फ देश को भयभीत करने, डराने में मजा आता है। कोरोना वैक्सीन नहीं मिलेगी, यह नहीं होगा, पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी, डीजल नहीं मिलेगा, फर्टिलाइजर नहीं मिलेगा। कुछ लोगों को देश को डराने में आनंद आ रहा था। लेकिन देश ने देख लिया कि हम नागरिक देवो भवः के मंत्र को लेते हुए, जिस तरह से योजनाओं को आगे बढ़ाया था, उनसे देश को कोई समस्या नहीं हुई। आज देश में पेट्रोल भी है, गैस भी है, डीजल भी है। हम अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं।

 

वंदे मातरम्’ पर क्या बोले मोदी

80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री ने भी अपने भाषण में कहा कि आज देश नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है। आजादी के बाद 15 अगस्त को लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गूंज रहा है।

 

नागरिक रक्षा का बड़ा नेटवर्क

पीएम मोदी ने कहा कि हमें देश की सुरक्षा के लिए नागरिकों को भी आगे लाना है। मैं लाल किले से एलान कर रहा हूं कि हम जल्द ही नागरिक रक्षा (सिविल डिफेंस) का देश में एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करेंगे, जो आधुनिक चुनौतियों का सामना करेगा। इसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी होगी।

 

समय हमारा है, अवसर हमारा है, संकल्प हमारा

प्रधानमंत्री ने कहा, मैंने लाल किले से पंच प्राण की बात की थी। इसने हमारे संकल्पों को बड़ा बल दिया। जिस भारत का सपना, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बिरसा मुंडा, ज्योतिबा फुले ने देखा था। आइये इन संकल्पों को हम दोहराएं। मैं सभी देशवासियों से कहूंगा कि समय हमारा है, अवसर हमारा है, संकल्प हमारा है। आइये सपनों को संकल्प बनाएं, संकल्प को सामर्थ्य बनाएं और सामर्थ्य को सफलता में बदल कर रहें। आइये हर कदम को विकास का कदम बनाएं, कदम से कदम मिलाएं, मन से मन मिलाएं, लक्ष्य से जुड़े रहें, एक दीप से जलें दीप हजारों, आओ मिलकर विकसित भारत बनाएं।

लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा विजन, ‘सप्तधारा’ की 7 शक्तियों से बदलेगा भारत; जानिए क्या हैं ये शक्तियां

लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा विजन, ‘सप्तधारा’ की 7 शक्तियों से बदलेगा भारत; जानिए क्या हैं ये शक्तियां

PM Modi independence day speech from red fort

PM Modi Independence day Speech : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि सप्तधारा की यह सात शक्तियों से हमें राष्ट्र को आगे ले जाने को लेकर जो लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, उन्हें पार करना होगा। ALSO READ: आजादी के 80 साल : अगर भगत सिंह और सरदार पटेल आज लौट आएं तो क्या पूछेंगे?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं देश में शक्ति की सप्तधारा का आह्वान करता हूं। जो पांच दशक में नहीं हुआ, वह 5-7 साल में करने के लिए नई ऊर्जा देंगे। इसमें युवाओं की शक्ति भी जोड़ी जाएगी।

 

क्या है सप्तधरा की 7 शक्तियां

-पहली शक्ति : मैन्यूफैक्चरिंग पॉवर

-दूसरी शक्ति : कृषि उत्पादन 

-तीसरी शक्ति : तकनीक और इनोवेशेन

-चौथी शक्ति : गति शक्ति

-5वी शक्ति : रक्षा शक्ति

-6ठी शक्ति : ग्रीन ब्लू इकोनॉमी

-7वीं शक्ति : भारत का सॉफ्ट पॉवर ALSO READ: 1971 युद्ध का वो 'संत', जिसके नाम से कांपती थी पाकिस्तानी टैंक रेजिमेंट : पढ़िए महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह की शौर्य गाथा

 

उत्पादन शक्ति : पीएम मोदी ने उत्पादन को सप्तधारा की पहली शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि हमें विनिर्माण को बढ़ाना होगा। उत्पादन के साथ हमें छोटे-छोटे पुर्जे बनाने हैं और बड़े उत्पाद भी बनाने हैं। पूरी वैल्यू चेन पर हमारा अधिकार होना चाहिए। डिजाइन से उत्पादन तक भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनना होगा। उत्पादन के क्षेत्र में जो लोग हैं, यह उनके लिए अवसर है। इसलिए हमें गुणवत्ता और पैमाने में वैश्विक मानदंडों पर खरा उतरना होगा। हमारे उत्पाद यूजर फ्रेंडली हों, हमारे उत्पाद लोगों को लुभाने वाले हों। जीरो डिफेक्ट उत्पाद हमारी पहचान हों, यह तय करना होगा। वैश्विक बाजार में हमारी पहचान गुणवत्ता के आधार पर होगी। क्वालिटी से कोई समझौता नहीं। हमारा लक्ष्य गुणवत्ता, गुणवत्ता और गुणवत्ता होना चाहिए।

 

कृषि उत्पादन : प्रधानमंत्री ने कृषि उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग को भारत की दूसरी शक्ति बताया।

 

तकनीक और नवाचार : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मेरी सप्तधारा की तीसरी शक्ति है तकनीक और नवाचार। उभरती हुई तकनीक हर पल हमें चुनौती दे रही हैं। इसलिए देश को दुनिया के लिए बाजार बनाना है। हमें नवाचार का केंद्र बनना है। अब भारत को डिजिटल सार्वजनिक तकनीक को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाना है।

 

गति शक्ति : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, सप्तधारा की चौथी शक्ति है- गतिशक्ति। यह गतिशक्ति हमें देश में निर्बाध संपर्क चाहिए। हमें आधुनिक सड़क चाहिए, मल्टीमॉडल संपर्क चाहिए। बंदरगाहों को विकास और संवर्धन की दिशा में बढा़ना होगा

 

रक्षा शक्ति : पांचवी शक्ति है- रक्षा शक्ति। रक्षा में आत्मनिर्भर होना, दुनिया ने समझ लिया इसके बिना कोई चारा नहीं है। हमें रक्षा के क्षेत्र में भी बाजार बनना होगा। हमें रक्षा उत्पादों की श्रृंखला बनना होगा। ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम को देखना होगा।

 

रक्षा शक्ति : पीएम मोदी ने ऊर्जा शक्ति को छठी शक्ति बताते हुए कहा कि हमें हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ना है। दुनिया जब ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा करती है तो हम इस ओर आगे बढ़ते हैं। हमारी समुद्री तटरखेा बहुत मजबूत है। इसमें हम आगे बढ़ सकते हैं। 

 

भारत का सॉफ्ट पॉवर : उन्होंने कहा कि भारत की सॉफ्ट पावर की ताकत है। आज योग ने दुनिया को भारत से जोड़कर रखा है। जिस भारत के पास आयुर्वेद हो, आस्था के केंद्र हों। हमारी फिल्में हों, हैंडलूम हों, हमारी गेमिंग हों। क्रिएटिव वर्ल्ड के अंदर भारत का लोहा माना जा रहा है। भारत का ऑडियो-वीडियो औऱ एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में दुनिया हमारी राह देखती है। हमारे पास वन संपदा है, 100 से ज्यादा राष्ट्रीय पार्क हैं। लेकिन विदेशियों को आकर्षिक करने में हम पीछे रहे हैं। हमारा काम है कि हम इस क्षेत्र में आगे बढ़ें और पूरी दुनिया को आकर्षित करें।

1971 युद्ध का वो ‘संत’, जिसके नाम से कांपती थी पाकिस्तानी टैंक रेजिमेंट : पढ़िए महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह की शौर्य गाथा

1971 युद्ध का वो 'संत', जिसके नाम से कांपती थी पाकिस्तानी टैंक रेजिमेंट : पढ़िए महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह की शौर्य गाथा

Hanut Singh Battle of Basantar 1971: 15 अगस्त का यह पावन अवसर न केवल भारत की आजादी का उत्सव मनाने का दिन है, बल्कि उन वीर सपूतों को नमन करने का क्षण भी है जिनकी बदौलत हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। भारतीय सेना का इतिहास अदम्य साहस, असाधारण शौर्य और बलिदान की अनगिनत कहानियों से भरा पड़ा है। ऐसी ही एक अमर गाथा है लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह की—जिन्हें भारतीय सेना का सबसे बेहतरीन 'आर्मर्ड कमांडर' माना जाता है। 

 

सेना में उनके साथी और अधीनस्थ उन्हें प्यार और सम्मान से “हनूत साहब”, उनके आध्यात्मिक झुकाव के कारण “द सेंट” (The Saint) और उनकी शांत कार्यशैली की वजह से “खामोश जनरल” कहकर पुकारते थे।

शाही परंपरा से रणजीत मैदान तक का सफर

हनूत सिंह का जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के ऐतिहासिक जसोल गांव में 6 जुलाई 1933 को हुआ था। उनका निधन देहरादून में 10 अप्रैल 2015 को ध्‍यान/समाधि के दौरान हुआ था।  वे प्रसिद्ध 'राठौड़' राजपूत वंश से ताल्लुक रखते थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के चचेरे भाई थे।

 

रगों में बहते राजपूती खून और मातृभूमि की रक्षा के संकल्प के साथ उन्होंने भारतीय सेना में प्रवेश किया और अपनी अद्वितीय प्रतिभा व योग्यता के बल पर 17 पूना हॉर्स (17 Poona Horse) रेजिमेंट की कमान संभाली।

1971 बसंतर की लड़ाई : रणनीतिक चक्रव्यूह को भेदना

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बसंतर नदी का युद्ध (Battle of Basantar) भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे भीषण और निर्णायक टैंक लड़ाइयों में से एक माना जाता है। उस समय तत्कालीक लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर तैनात हनूत सिंह 17 पूना हॉर्स की कमान संभाल रहे थे।

 

पाकिस्तानी सेना ने बसंतर नदी के आसपास भारी बारूदी सुरंगें (Minefields) बिछा रखी थीं और उनके पास अत्याधुनिक व शक्तिशाली पैटन टैंकों का काफिला था। दुश्मन का इरादा भारतीय बढ़त को रोकना था। लेकिन हनूत सिंह की रणनीति और अदम्य साहस के आगे दुश्मन का हर चक्रव्यूह धराशायी हो गया। उन्होंने बिना किसी डर के अपनी रेजिमेंट का नेतृत्व करते हुए माइन्स बिछे क्षेत्र को पार किया और दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक प्रवेश कर गए।

48 पाकिस्तानी टैंकों का विनाश और अरुण खेत्रपाल की शहादत

  • दुश्मन के टैंकों का सफाया : हनूत सिंह के कुशल और आक्रामक नेतृत्व में पूना हॉर्स ने पाकिस्तान के लगभग 48 शक्तिशाली टैंकों को तबाह कर दिया।
  • परमवीर चक्र विजेता से जुड़ाव : इसी ऐतिहासिक लड़ाई में भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने भी हनूत सिंह के ही ओजस्वी नेतृत्व और मार्गदर्शन में अभूतपूर्व वीरता का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था।
  • अद्वितीय संयम और नेतृत्व : युद्ध के मैदान में जब चारों तरफ गोले और गोलियां बरस रही थीं, तब भी 'हनूत साहब' पूरी तरह शांत रहकर अपने वायरलेस सेट पर सटीक निर्देश देते थे। उनके इस अकल्पनीय संयम से जवानों का हौसला कई गुना बढ़ जाता था।

'महावीर चक्र' से सम्मान और अटूट विश्वास

हनूत सिंह के अदम्य साहस, शांत नेतृत्व और असाधारण सामरिक सूझबूझ के लिए उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार 'महावीर चक्र' (MVC) से सम्मानित किया गया।

 

एक कमांडर के रूप में वे हमेशा अपने सैनिकों के साथ सबसे आगे खड़े रहते थे। जवानों के दिल में उनके प्रति ऐसा अटूट विश्वास था कि अगर 'हनूत साहब' नेतृत्व कर रहे हैं, तो विजय निश्चित है।

टैंक युद्धकला के महान गुरु

टैंक युद्धकला (Armoured Warfare) पर हनूत सिंह की पकड़ इतनी मजबूत और वैज्ञानिक थी कि उनके द्वारा तैयार की गई रणनीतियों और युद्ध की बारीकियों को आज भी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अकादमियों में केस स्टडी के रूप में पढ़ाया जाता है।

 

युद्ध के मैदान में एक निष्णात योद्धा और निजी जीवन में एक संत जैसी त्यागमयी जीवनशैली जीने वाले ले. जनरल हनूत सिंह भारतीय सेना के अनुशासन, रणनीति और शौर्य के अमर प्रतीक हैं। इस 80वें स्वतंत्रता दिवस पर, आइए हम भारत मां के इस महान सपूत और देश के लिए बलिदान देने वाले सभी वीरों को शत-शत नमन करें।

 

जय हिंद! जय भारत!

आजादी के 80 साल : अगर भगत सिंह और सरदार पटेल आज लौट आएं तो क्या पूछेंगे?

आजादी के 80 साल : अगर भगत सिंह और सरदार पटेल आज लौट आएं तो क्या पूछेंगे?

Independence Day 2026

कल्पना कीजिए, 15 अगस्त 2026 की सुबह है।

लाल किले पर तिरंगा लहरा रहा है। देश आजादी का 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। भाषण हो रहे हैं, राष्ट्रगान बज रहा है और सोशल मीडिया देशभक्ति के संदेशों से भरा है।

तभी इतिहास के दो चेहरे हमारे सामने आ खड़े होते हैं—भगत सिंह और सरदार वल्लभभाई पटेल।

दोनों के सामने अपने-अपने समय की अलग चुनौतियां थीं। एक विदेशी सत्ता से मुक्ति चाहता था, दूसरे बिखरे हुए भारत को एक राष्ट्र में जोड़ रहे थे। आज वे लौटें तो शायद उपलब्धियों का हिसाब न मांगें।

वे पूछें—

भगत सिंह : जिस आजादी के लिए हमने जान दी, तुमने उससे क्या हासिल किया?”
पटेल : जिस भारत को हमने जोड़ा था, वह आज कितना एकजुट है?”

इन दो सवालों के बीच शायद भारत@80 का सबसे जरूरी आत्ममंथन छिपा है।

भगत सिंह: सिर्फ शहीद नहीं, सवाल करने वाली युवा चेतना

भगत सिंह को हमने एक तस्वीर में कैद कर दिया है—टोपी पहने युवा चेहरा, हाथ में पिस्तौल और साथ में शहीद का दर्जा। लेकिन उनकी असली विरासत शायद उनकी तस्वीर नहीं, सवाल पूछने का साहस है।

वे पढ़ते थे, बहस करते थे और स्थापित विचारों को चुनौती देते थे। Why I Am an Atheist में उन्होंने लिखा कि “criticism and independent thinking” एक क्रांतिकारी के लिए अनिवार्य गुण हैं। 

यही वह जगह है जहां 23 साल का भगत सिंह आज के Gen-Z से जुड़ता दिखाई देता है।

आज का युवा पूछता है—

Why?
How do you know?
Where is the evidence?

करीब एक सदी पहले भगत सिंह भी अपने समय की स्थापित मान्यताओं से सवाल कर रहे थे। उनके लिए किसी विचार को केवल इसलिए स्वीकार कर लेना पर्याप्त नहीं था कि उसे समाज या कोई बड़ा व्यक्ति सही मानता है।

फर्क सिर्फ इतना है कि तब सवाल औपनिवेशिक सत्ता से थे; आज सवाल हैं—बेरोजगारी, असमानता, AI से बदलती नौकरियां, जलवायु संकट, शिक्षा, राजनीतिक ध्रुवीकरण और डिजिटल misinformation से।
भगत सिंह शायद आज के युवा से कहते— सिर्फ react मत करो। पढ़ो। समझो। फिर सवाल करो।

क्रांति का हथियार आज भी विचार है

भगत सिंह को केवल हिंसक क्रांति के प्रतीक के रूप में देखना उनकी बौद्धिक विरासत को छोटा करना होगा। लाहौर हाईकोर्ट में दिए अपने बयान में उन्होंने कहा था—

“The sword of revolution is sharpened on the whetting-stone of ideas.”

अर्थात, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।

आज के डिजिटल भारत में यह बात और प्रासंगिक लगती है। जब एक वायरल वीडियो लाखों लोगों की राय बदल सकता है और misinformation तथ्य से तेज दौड़ सकती है, तब स्वतंत्र सोच की पहली शर्त है—हर सूचना पर तुरंत विश्वास न करना।

आज की क्रांति शायद बंदूक से नहीं, बेहतर विचार और बेहतर सवालों से होगी।

उस युवा से होगी जो कहे— मुझे सिर्फ यह मत बताइए कि क्या सोचना है; बताइए क्यों सोचना है।

फिर पटेल पूछेंगे—“क्या हमने भारत को सच में जोड़ा?”

1947 का भारत आज के भारत जैसा नहीं था। ब्रिटिश भारत के साथ सैकड़ों रियासतें थीं। विभाजन की त्रासदी सामने थी और राजनीतिक एकीकरण सबसे बड़ी चुनौतियों में था।

सरदार पटेल के नेतृत्व में रियासतों का एकीकरण हुआ और आधुनिक भारतीय संघ की नींव मजबूत हुई। 80 साल बाद उनका सवाल शायद अलग होगा—

जिस भारत को हमने नक्शे पर जोड़ा, क्या उसके लोगों के बीच की दूरी भी कम हुई?”

आज हमारे पास संविधान है, संसद है, सर्वोच्च न्यायालय है, एक मुद्रा है और एक विशाल साझा बाजार है।

लेकिन समाज? क्या हम राजनीतिक मतभेदों के बावजूद साथ रह सकते हैं? क्या भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्र हमारी पहचान हो सकते हैं—बिना हमारी साझा भारतीयता को कमजोर किए?

पटेल शायद याद दिलाते कि एकता केवल सीमाओं की रक्षा का नाम नहीं; नागरिकों के बीच भरोसा बनाए रखना भी उसकी शर्त है।

पटेल की नागरिकता की समझ में अधिकारों के साथ कर्तव्य भी आते थे। उनके शब्दों में—

“Every citizen of India must remember that he is an Indian and he has every right in this country but with certain duties.”

अर्थात, हर नागरिक को यह याद रखना चाहिए कि वह भारतीय है और उसे इस देश में अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन कुछ कर्तव्य भी हैं।

नक्शे पर भारत को जोड़ना इतिहास की उपलब्धि थी। नागरिकों के बीच भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र की रोजमर्रा की जिम्मेदारी है।

भगत सिंह का सवाल, पटेल की कसौटी

शायद दोनों की बातचीत कुछ ऐसी हो—

भगत सिंह: “क्या युवा को सवाल पूछने की आजादी है?”

पटेल: “और क्या वह सवाल पूछते हुए भी दूसरे भारतीय के साथ खड़ा रह सकता है?”

भगत सिंह: “क्या असहमति की जगह है?”

पटेल: “और क्या असहमति के बावजूद राष्ट्र एक रह सकता है?”

यही लोकतंत्र की असली परीक्षा है। सवाल करने वाले नागरिक और साथ रहने वाला समाजलोकतंत्र को दोनों चाहिए।

भारत@80: उपलब्धियां बड़ी हैं, लेकिन सवाल भी

इन 80 वर्षों में भारत ने असाधारण यात्रा तय की है। गरीबी और अशिक्षा से जूझता नवस्वतंत्र देश आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है। अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, रक्षा और विज्ञान में उसने अपनी क्षमता साबित की है। लोकतंत्र भी कायम रहा और दुनिया में भारत की आवाज पहले से कहीं ज्यादा प्रभावशाली हुई।

इन उपलब्धियों पर गर्व होना चाहिए। लेकिन किसी राष्ट्र की महानता केवल उसकी आर्थिक और सैन्य शक्ति से तय नहीं होती।

यह भी देखना होता है कि उसका सबसे कमजोर नागरिक कितना सुरक्षित, सम्मानित और आशावान है।
यहीं भगत सिंह से जुड़ा वह मूल सवाल आज के भारत के सामने फिर खड़ा होता है—

आजादी किसके लिए?

1947 का सवाल और 2026 का सवाल

1947 में सवाल थाभारत पर शासन कौन करेगा?

2026 में सवाल हैभारत किस तरह का समाज बनेगा?

  • क्या नागरिक बिना भय के सवाल कर सकता है?
  • क्या असहमति लोकतंत्र का हिस्सा मानी जाती है?
  • क्या युवाओं और कमजोर तबकों तक विकास के पर्याप्त अवसर पहुंच रहे हैं?
  • क्या सोशल मीडिया हमें informed बना रहा है या सिर्फ angry?

और सबसे बड़ा सवाल— क्या हम दूसरे की स्वतंत्रता का उतना ही सम्मान करते हैं जितना अपनी स्वतंत्रता का?

अगर वे आज लौट आएं…

शायद भगत सिंह किसी 20 वर्षीय युवा के हाथ से फोन लेकर पूछें—

तुम रोज कितनी चीजें पढ़ते हो और कितनी सिर्फ forward करते हो?”

और पटेल किसी राजनीतिक बहस के बीच पूछें—

तुम्हारा विरोध इतना बड़ा कब हो गया कि सामने वाला भारतीय छोटा हो गया?”

फिर दोनों शायद हमसे एक ही सवाल पूछें—

तुम्हें जो आजादी मिली, उसका इस्तेमाल तुमने कैसा भारत बनाने में किया?”

इसका जवाब किसी भाषण, hashtag या एक दिन के उत्सव में नहीं मिलेगा।

इसका जवाब हमारे रोजमर्रा के व्यवहार में मिलेगा—

हम कैसे असहमत होते हैं।

हम कैसे खबरों पर विश्वास करते हैं।

हम कमजोर के साथ कैसे खड़े होते हैं।

और हम दूसरे भारतीय की स्वतंत्रता का कितना सम्मान करते हैं।

80 साल बाद असली सवाल

15 अगस्त 1947 को भारत ने विदेशी शासन से आजादी हासिल की थी।

15 अगस्त 2026 को सवाल अंग्रेजों का नहीं है। सवाल हमारा है।

भगत सिंह शायद पूछेंगे—

“क्या तुम स्वतंत्र होकर भी स्वतंत्र सोचते हो?”

पटेल शायद पूछेंगे—

“क्या स्वतंत्र सोचते हुए भी साथ रह सकते हो?”

शायद आजादी के 80 साल बाद भारत की सबसे बड़ी परीक्षा इन्हीं दो सवालों के बीच है। क्योंकि महान राष्ट्र केवल शक्तिशाली नहीं होते। वे विचारों में स्वतंत्र और समाज में एकजुट भी होते हैं। 1947 में आजादी हमें विरासत में मिली थी। 2026 में उसकी गुणवत्ता तय करना हमारी जिम्मेदारी है।

और इन दो सवालों का जवाब—भाषण से नहीं, हमारे आचरण से मिलेगा।

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भारत-इटली संबंधों पर सरकार का जोर, राहुल गांधी के ‘मेलोनी’ तंज के बाद MEA ने कहा- कूटनीतिक संवाद में सम्मान जरूरी

भारत-इटली संबंधों पर सरकार का जोर, राहुल गांधी के 'मेलोनी' तंज के बाद MEA ने कहा- कूटनीतिक संवाद में सम्मान जरूरी

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के संदर्भ में की गई टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत और इटली के संबंध हर स्तर पर मजबूत और व्यापक हुए हैं। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए।

 

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के इटली के साथ मजबूत संबंध हैं और पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों का हर क्षेत्र में विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक व्यवहार के तहत दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करते समय एक-दूसरे के प्रति सम्मान और आपसी समझ का ध्यान रखना जरूरी है।

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राहुल गांधी ने क्या कहा था?

 

गुरुवार को रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय सम्मेलन में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मन में यह बात कैसे बैठ गई कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है।

 

अपनी बात को समझाने के लिए राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद रचनात्मक कांग्रेस के प्रमुख संदीप दीक्षित को गले लगाया और इसे मौजूदा सरकार की विदेश नीति के उदाहरण के तौर पर पेश किया। इसी दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का संदर्भ भी आया, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

 

विदेश मंत्रालय ने दिया कूटनीतिक संदेश

 

राहुल गांधी और संदीप दीक्षित की टिप्पणियों के बाद विदेश मंत्रालय ने सीधे तौर पर किसी नेता पर टिप्पणी करने के बजाय कूटनीतिक संवाद में आपसी सम्मान पर जोर दिया।

 

MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत-इटली संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते हाल के वर्षों में हर तरह से मजबूत हुए हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच आपसी सम्मान और समझ बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

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बीजेपी ने राहुल गांधी पर बोला हमला

 

राहुल गांधी की विदेश नीति संबंधी टिप्पणी पर बीजेपी ने भी तीखा हमला बोला। बीजेपी ने इसे आपत्तिजनक भाषा बताते हुए कांग्रेस नेता की आलोचना की। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ऐसा लगता है कि राहुल गांधी का “अहंकार अब सनक में बदल रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की टिप्पणी यह सवाल खड़ा करती है कि यह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति निराशा और ईर्ष्या से उपजी अपरिपक्वता है या फिर किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा। सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर देश के “स्वस्थ लोकतंत्र के लिए चुनौती” बनने का आरोप भी लगाया।

 

राहुल गांधी ने विदेश नीति को लेकर सरकार पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी भारत के हितों की रक्षा करना है, न कि केवल दूसरे देशों के नेताओं के साथ दोस्ताना रिश्तों और सार्वजनिक तौर पर गर्मजोशी दिखाने पर ध्यान देना।

 

कांग्रेस नेता की टिप्पणी के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि सरकार भारत-इटली संबंधों को लेकर सम्मानजनक और संतुलित कूटनीतिक संवाद को महत्वपूर्ण मानती है।

Mahindra Scorpio Lifestyler Pickup की धांसू इंट्री, Scorpio-N पर आधारित, 19.79 लाख से कम होगी कीमत

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Mahindra ने भारतीय बाजार के लिए अपनी नई Scorpio Lifestyler पिकअप ट्रक को पेश कर दिया है। यह पिकअप 2023 में दिखाए गए Global Pik Up Concept पर आधारित है और इसके प्लेटफॉर्म व कई मैकेनिकल हिस्से Scorpio-N से लिए गए हैं। कंपनी इसे एक दमदार और रग्ड लाइफस्टाइल पिकअप के तौर पर बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।

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डबल-कैब डिजाइन में आएगा Scorpio Lifestyler

 

Mahindra Scorpio Lifestyler को डबल-कैब डिजाइन दिया गया है। इसके पीछे बड़ा कार्गो बेड मिलेगा, जो इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के साथ-साथ एडवेंचर और यूटिलिटी जरूरतों के लिए भी उपयोगी बनाएगा। पिकअप के फ्रंट में बड़ा और सीधा डिजाइन वाला ग्रिल दिया गया है। इसके साथ स्लिम LED हेडलैंप और पीछे C-शेप LED टेललाइट्स मिलती हैं।

 

रग्ड लुक के साथ कई डिजाइन एलिमेंट्स

 

Scorpio Lifestyler में व्हील आर्च और डोर सिल्स के आसपास मजबूत क्लैडिंग दी गई है। इसके अलावा पिकअप में साइड स्टेप्स, रूफ रेल्स और डुअल-टोन अलॉय व्हील्स भी देखने को मिलेंगे। कुल मिलाकर इसका डिजाइन Scorpio-N की तुलना में ज्यादा रग्ड और यूटिलिटी-केंद्रित नजर आता है।

 

केबिन में मिलेगा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर

 

इंटीरियर की बात करें तो Scorpio Lifestyler में मजबूत डिजाइन वाला डैशबोर्ड दिया गया है। इसमें पोर्ट्रेट-ओरिएंटेड सेंट्रल टचस्क्रीन, 3-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर शामिल हैं। फीचर्स की बात करें तो इसमें ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay जैसे फीचर्स मिलेंगे। इसके अलावा अलग-अलग परिस्थितियों में ड्राइविंग के लिए टेरेन मोड्स भी दिए जाएंगे।