प्रदेश की सबसे बड़ी तिरंगा यात्रा को सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी, कहा- युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा 2027

प्रदेश की सबसे बड़ी तिरंगा यात्रा को सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी, कहा- युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा 2027

राजधानी भोपाल में देश की आजादी का जश्न चारों तरफ दिख रहा है। जहां तक नजर जा रही थी, वहां तक केवल तिरंगा ही तिरंगा, चारों ओर बजते देशभक्ति गीत और उत्साहित युवा…यह नजारा था भोपाल के कोलार इलाके का। जैसे ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तिरंगा यात्रा को हरी झंडी दिखाई, वैसे ही हजारों युवा चल पड़े देश सेवा का संदेश देने। सभी का केवल एक उद्देश्य, जनता में देशभक्ति और जन सेवा की अलख जगाना।

तिरंगा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सादगी भरा अंदाज भी नजर आया। एक तरफ उन्होंने बच्चों को दुलार किया, तो दूसरी तरफ सेल्फी भी लीं। वे कुछ देर के लिए गाड़ी से उतरे और जनता के बीच पैदल भी चले। उन्होंने लोगों में उत्साह और देशभक्ति की भावना का संचार भी किया। तिरंगा यात्रा के दौरान उन्होंने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष घोषित किया जाएगा।

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज भोपाल के डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी नगर से निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि देश की सबसे बड़ी तिरंगा यात्राओं में से एक है। 80वें स्वतंत्रता दिवस के पूर्व आयोजित इस विशाल यात्रा के माध्यम से हम राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्साह और उमंग को और बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। 

 

निरंतर बढ़ रहा भारत का गौरव-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में आज देशभर में नभ, जल और थल हर जगह तिरंगा शान से लहरा रहा है। वहीं, तिरंगा यात्रा में उमड़ रहा जन उत्साह देशभक्ति की नई ऊर्जा का प्रतीक है। आज विश्व भारत की बढ़ती शक्ति और सामर्थ्य को देख रहा है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का गौरव वैश्विक मंच पर निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 को हमने निवेश वर्ष के रूप में मनाया। इससे आजीविका का मार्ग आसान हुआ। किसान कल्याण वर्ष में हमारी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष घोषित किया जाएगा। दुनिया के सामने भारत का मान-सम्मान-प्रतिमान गढ़ते हुए नए संकल्प के साथ चल रहे हैं। इस अद्भुत यात्रा के लिए सभी को बहुत-बहुत बधाई। 

 

जगह-जगह हुआ पुष्प वर्षा से स्वागत-गौरतलब है कि इस तिरंगा यात्रा का आयोजन कर्म श्री संस्था द्वारा किया गया था। यह वर्षा मदर टेरेसा स्कूल से संत हिरदाराम नगर तक जाएगी। तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में युवा बाइकर्स शामिल हुए। यात्रा का जगह-जगह पर पुष्प वर्षा कर उसका स्वागत किया गया। बाइकर्स के अलावा इस ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं भी शामिल हुईं। इस दौरान कई स्कूलों के बच्चों ने भी तिरंगा लहराकर यात्रा का अभिवादन किया। कई बच्चे भारत माता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वेशभूषा में थे। यात्रा के दौरान पूरा इलाका भारत माता की जय के नारों से गूंज रहा था।

Google Gemini 3.7 Flash लॉन्च : कोडिंग से लेकर AI एजेंट तक, कई मोर्चों पर हुआ और ताकतवर

Google Gemini 3.7 Flash लॉन्च : कोडिंग से लेकर AI एजेंट तक, कई मोर्चों पर हुआ और ताकतवर

gemini

Google ने अपने AI मॉडल की Flash सीरीज का नया वर्जन Gemini 3.7 Flash लॉन्च कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह मॉडल खास तौर पर कोडिंग, AI एजेंट, वेब डेवलपमेंट और जटिल नॉलेज वर्क के लिए तैयार किया गया है। खास बात यह है कि Gemini 3.7 Flash को Gemini 3.6 Flash के लॉन्च के महज तीन सप्ताह बाद पेश किया गया है।

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नए मॉडल में कोडिंग की सटीकता, मल्टी-स्टेप रीजनिंग और टूल इंटीग्रेशन को बेहतर किया गया है। Google ने इसकी शुरुआती कीमत भी Gemini 3.6 Flash के मुकाबले करीब आधी रखी है।

 

जटिल AI वर्कफ्लो को संभालने में सक्षम

 

Gemini 3.7 Flash को जटिल AI वर्कफ्लो के लिए डिजाइन किया गया है। Google इसे कोडिंग और AI एजेंट आधारित कामों के लिए अब तक का अपना सबसे स्मार्ट वर्कहॉर्स बता रहा है। मॉडल को मल्टी-लेयर प्रोजेक्ट, मुश्किल तकनीकी समस्याओं और डेवलपर के विस्तृत निर्देशों को बेहतर तरीके से समझने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट या कई टूल वाले वर्कफ्लो में डेवलपर्स को बार-बार खुद हस्तक्षेप न करना पड़े और कम रीट्राई में काम पूरा हो सके।

 

कोडिंग में बड़ा सुधार

 

कोडिंग के मामले में Gemini 3.7 Flash ने अपने पिछले वर्जन Gemini 3.6 Flash की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसमें डिबगिंग, बग फिक्सिंग और प्रोडक्शन-रेडी कोड तैयार करने की क्षमता में सुधार किया गया है।

FrontierCode 1.1 Main टेस्ट में Gemini 3.7 Flash ने 43.6 प्रतिशत स्कोर किया, जबकि Gemini 3.6 Flash का स्कोर 34.4 प्रतिशत था। वहीं DeepSWE v1.1 में नए मॉडल ने 65.3 प्रतिशत स्कोर हासिल किया, जबकि पुराने मॉडल का स्कोर 49 प्रतिशत था।

 

Google के मुताबिक, Gemini 3.7 Flash पहली कोशिश में ही ज्यादा भरोसेमंद कोड तैयार करता है। इससे डेवलपर्स को बाद में कोड की सफाई और सुधार में कम समय लग सकता है।

 

वेबसाइट और ऐप डेवलपमेंट भी हुआ बेहतर

 

वेब डेवलपमेंट में भी Gemini 3.7 Flash को बेहतर बनाया गया है। यह कम प्रॉम्प्ट में ज्यादा फंक्शनल लेआउट और फीचर से लैस ऐप तैयार कर सकता है। मॉडल स्क्रीनशॉट, इमेज और डिजाइन सिस्टम जैसे विजुअल रेफरेंस को समझकर डिजाइन में एकरूपता बनाए रखने में सक्षम है। Arena.ai के WebDev Arena में Gemini 3.7 Flash ने 1588 Elo स्कोर हासिल किया, जबकि Gemini 3.6 Flash का स्कोर 1538 था।

 

फाइनेंस, कानून और बायोसाइंस जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन

 

नॉलेज वर्क के मामले में भी नए मॉडल की क्षमता बढ़ाई गई है। खासकर फाइनेंस, कानून और बायोसाइंस जैसे क्षेत्रों में जटिल जानकारी को समझने और प्रोसेस करने में Gemini 3.7 Flash बेहतर प्रदर्शन करता है।

 

जटिल डॉक्यूमेंट पढ़ने वाले GDP.pdf बेंचमार्क में इस मॉडल ने 34 प्रतिशत स्कोर हासिल किया, जबकि Gemini 3.6 Flash का स्कोर 22 प्रतिशत था। AutomationBench में भी Gemini 3.7 Flash ने 30.4 प्रतिशत स्कोर किया, जो पुराने मॉडल के 17 प्रतिशत से काफी ज्यादा है।

 

Gemini Spark में भी मिलेगा नया मॉडल

 

Google ने Gemini 3.7 Flash को अपने पर्सनल AI एजेंट Gemini Spark में भी शामिल किया है। यह सुविधा Google AI Pro और Ultra सब्सक्राइबर्स के लिए 160 से ज्यादा देशों में उपलब्ध है। नए मॉडल के आने से Google Workspace ऐप्स में Spark की टूल-यूज क्षमता और वर्कफ्लो की सटीकता बेहतर होने की उम्मीद है।

 

Gemini 3.7 Flash की कीमत कितनी है?

 

Gemini 3.7 Flash की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत भी है। Google ने साल के अंत तक इसके लिए 0.75 डॉलर प्रति 10 लाख इनपुट टोकन और 3.75 डॉलर प्रति 10 लाख आउटपुट टोकन की शुरुआती कीमत तय की है। डेवलपर्स इसे Google AI Studio, Gemini API, Google Antigravity और Android Studio के जरिए इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं बिजनेस यूजर्स के लिए यह Gemini Enterprise Agent Platform और Gemini Enterprise ऐप के माध्यम से उपलब्ध है।

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें 5 देशभक्ति से भरपूर शायरियां, हर भारतीय के दिल में जगा देंगी देशप्रेम

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें 5 देशभक्ति से भरपूर शायरियां, हर भारतीय के दिल में जगा देंगी देशप्रेम

15 august independence day shayari

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन अमर बलिदानियों को याद करने का पवित्र अवसर है जिन्होंने देश की आन, बान और शान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन पर्व को और भी खास बनाने के लिए प्रस्तुत हैं देशभक्ति, मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम, सम्मान और राष्ट्रीय स्वाभिमान के रंगों में रंगी 5 बेहतरीन और दिल को छू लेने वाली शायरियाँ। इन शायरियों के माध्यम से आइए तिरंगे की आन को नमन करें और देशप्रेम का अलख जगाएं।

 

1. देश की शान और तिरंगे के नाम

कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

कुछ नशा मातृभूमि की शान का है।

हम लहराएंगे हर जगह यह तिरंगा,

यह नशा भारत माता के सम्मान का है!

 

2. शहीदों की शहादत को नमन

तन से बहती हुई जब खून की हर बूंद ढले,

तब कहीं जा के ये आज़ाद सवेरा निकले।

नमन है उन वीरों को जिनके बलिदानों से,

आज भारत की धरा पर ये तिरंगा फहरे!

15 August independance day

3. भारत देश का गौरव

अलग है भाषा, धर्म, जाति, पर एक हमारी पहचान है,

हम सब भारतीय हैं और भारत देश हमारी जान है।

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा,

यही हमारी सबसे बड़ी शान और अभिमान है!

 

4. देशभक्ति का अटूट संकल्प

ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी कहानी है,

हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम सब हिंदुस्तानी हैं।

देशभक्ति का लहू बहता है हमारी रगों में,

इसकी हिफाज़त में लुटा देंगे जो भी जिंदगानी है!

 

5. राष्ट्र प्रेम की अमिट भावना

तैरना है तो समंदर में तैरो, नदी-नालों में क्या रखा है,

प्यार करना है तो वतन से करो, बेवफा लोगों में क्या रखा है।

यह सरज़मीं है अमर वीरों और शहीदों की,

इसके लिए मर मिटने से बड़ा कोई नशा क्या रखा है!

 

स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ! जय हिंद, जय भारत!

नागपंचमी पर गोरखनाथ मंदिर में होगी दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता

नागपंचमी पर गोरखनाथ मंदिर में होगी दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता

Gorakhnath Temple Wrestling Competition: गोरखनाथ मंदिर परिसर में नागपंचमी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में वर्षों से होने वाली पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता 16 और 17 अगस्त को होगी। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप विगत कुछ साल से प्रदेश स्तरीय स्वरूप वाली हो चुकी इस कुश्ती प्रतियोगिता में इस बार तीनों खिताबों के विजेताओं को 1.01 लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। प्रदेश शासन के खेल विभाग एवं जिला कुश्ती संघ की तरफ से आयोजित दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सीनियर प्राइजमनी पुरुष कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबलों में पहलवानों के उत्साहवर्धन और विजेताओं को पुरस्कृत करने के लिए मुख्यमंत्री 17 अगस्त को स्वयं उपस्थित रहेंगे।

 

जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय पहलवान दिनेश सिंह ने बताया कि नागपंचमी पर्व पर देशज खेलों की प्राचीन परंपरा रही है। गोरखनाथ मंदिर का भी इस परंपरा से गहरा जुड़ाव है। मंदिर में हर वर्ष इस पर्व पर कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन होता है। कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बीते कुछ साल से प्रतियोगिता का स्वरूप विराट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तरीय सीनियर प्राइजमनी पुरुष कुश्ती प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश केसरी, उत्तर प्रदेश कुमार व वीर अभिमन्यु तीन वर्गों में होगी।

 

श्री सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रदेश के स्पोर्ट्स कॉलेजों, स्पोर्ट्स छात्रावासों, विभिन्न मंडलों और जिलों से करीब 325 पहलवान प्रतिभाग करेंगे। उत्तर प्रदेश केसरी, उत्तर प्रदेश कुमार और उत्तर प्रदेश वीर अभिमन्यु खिताब के विजेताओं (तीनों) को पुरस्कार के रूप में 1.01 लाख रुपये नकद व गदा, उप विजेताओं को 51 हजार रुपये और तीनों खिताबों में तीसरे स्थान पर रहने वाले दो-दो पहलवानों को 25-25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा सभी पहलवानों को प्रत्येक कुश्ती बाउट पर 500-500 रुपये की धनराशि खेल विभाग की तरफ से दी जाएगी।

 

कुश्ती प्रतियोगिता का उद्घाटन 16 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे से होगा जबकि समापन व पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम 17 अगस्त को दोपहर बाद 3 बजे होगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि, खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन व पुरस्कार वितरण के लिए उपस्थित रहेंगे।

योगी सरकार ने मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा, पनीर की गुणवत्ता को लेकर 25 इकाइयों पर बड़ी कार्रवाई

योगी सरकार ने मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा, पनीर की गुणवत्ता को लेकर 25 इकाइयों पर बड़ी कार्रवाई

CM Yogi Adityanath

Yogi government action against adulterators: आमजन को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। इसी क्रम में दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थों, विशेष रूप से पनीर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया।

 

प्राप्त अभिसूचना और जनहित को ध्यान में रखते हुए आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश द्वारा 24 विशेष प्रवर्तन टीमों का गठन किया गया। विशेष टीमों ने संबंधित जिलों की प्रमुख दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थ निर्माण इकाइयों का आकस्मिक निरीक्षण किया। अभियान के दौरान 25 विनिर्माण इकाइयों पर कार्रवाई की गई, जबकि 3 इकाइयां नॉन-ऑपरेशनल पाई गईं।

पनीर निर्माण में औद्योगिक रसायन और तेल के इस्तेमाल पर कार्रवाई

निरीक्षण के दौरान पनीर के निर्माण में औद्योगिक प्रयोगार्थ रसायनों तथा पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल और अस्वास्थ्यकर एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों के निर्माण से संबंधित मामले सामने आए। विभागीय टीमों ने निर्माण इकाइयों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, तैयार उत्पाद और निर्माण प्रक्रिया की जांच की। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित खाद्य सामग्री को नष्ट कराने के साथ ही अपमिश्रकों को जब्त किया गया।

72 नमूने जांच के लिए भेजे गए

अभियान के दौरान कुल 72 खाद्य नमूने एकत्र किए गए। इन नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अस्वास्थ्यकर एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में निर्मित पाई गई 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री को नष्ट कराया गया। नष्ट कराई गई खाद्य सामग्री का अनुमानित मूल्य करीब 10 लाख रुपये है। इसके अलावा 2,131 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रक जब्त किए गए, जिनका अनुमानित मूल्य करीब 4.75 लाख रुपये है। इस तरह अभियान में कुल 9,817 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

गंभीर मामलों में छह एफआईआर दर्ज

अभियान के दौरान पनीर निर्माण में औद्योगिक प्रयोगार्थ रसायनों तथा पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के प्रयोग और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों के निर्माण से संबंधित पांच प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। वहीं, विभागीय अधिकारियों को सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में भी एक एफआईआर दर्ज कराई गई। गाजियाबाद में तीन तथा मथुरा में दो प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है। सहारनपुर में भी संबंधित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।

खाद्य सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। विशेष रूप से पनीर जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट और अस्वच्छ परिस्थितियों में निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में खाद्य सुरक्षा, मिलावट पर प्रभावी अंकुश और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे। प्रयोगशाला जांच में नमूने मानकों के विपरीत पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

भारत हमारे रडार पर! ट्रंप के करीबी नवारो का बड़ा आरोप, कहा- चीन के ‘गुप्त नेटवर्क’ में शामिल है भारत, 26 अरब डॉलर के फ्रॉड का दावा

भारत हमारे रडार पर! ट्रंप के करीबी नवारो का बड़ा आरोप, कहा- चीन के 'गुप्त नेटवर्क' में शामिल है भारत, 26 अरब डॉलर के फ्रॉड का दावा

Peter Navarro on India

Peter Navarro on India: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और वाइट हाउस के व्यापार एवं विनिर्माण सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को लेकर अत्यंत तीखा और सनसनीखेज बयान दिया है। नवारो का दावा है कि भारत एक अंतरराष्ट्रीय 'गुप्त शिपमेंट नेटवर्क' का हिस्सा बन चुका है, जिसके जरिए चीनी सामानों की री-पैकेजिंग कर उन्हें भारी अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) से बचाया जा रहा है। नवारो ने चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा है— 'भारत पूरी तरह से हमारे रडार पर है'।

क्या है 'द ग्रेट ट्रांस-शिपमेंट स्कैम'?

पीटर नवारो द्वारा तैयार की गई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस विशाल व्यापारिक घोटाले के कारण अमेरिका को हर साल 19 अरब डॉलर से लेकर 26 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) के टैरिफ राजस्व का भारी चूना लग रहा है। 

 

रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 के बाद से कम्युनिस्ट चीन अपनी चालाकी से 40 से ज्यादा देशों के रास्ते अपने सामान का निर्यात (लॉन्ड्रिंग) कर रहा है। इस 'शैडो नेटवर्क' में भारत के अलावा मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों का नाम शामिल होने का सनसनीखेज दावा किया गया है।  ALSO READ: जब ईरानी हमले के डर से ट्रंप ने बदले 3 प्लेन : तुर्की में ईरान के निशाने पर थे अमेरिकी राष्ट्रपति? कैटरिंग ट्रक के पीछे छिपे सबसे बड़े सीक्रेट ऑपरेशन की पूरी कहानी

कैसे खेला जा रहा है यह खतरनाक खेल?

अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चीन इन मध्यस्थ देशों में अपना सामान भेजता है, जहां केवल नाममात्र की प्रोसेसिंग, री-लेबलिंग या नई पैकेजिंग की जाती है। सामान पर 'मेड इन चाइना' का ठप्पा हटाकर नया ओरिजिन (मूल देश) दिखा दिया जाता है। इसके बाद इस माल को बेझिझक अमेरिकी बाजारों में खपाया जाता है, जिससे चीनी सामानों पर लगने वाला भारी-भरकम अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह से शून्य हो जाता है।

रूसी तेल पर भी घेरा : लग सकता है 100% तक टैरिफ!

नवारो ने केवल चीनी सामानों के खेल पर ही निशाना नहीं साधा, बल्कि भारत द्वारा खरीदे जा रहे रूसी तेल को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी है। उनका आरोप है कि 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूसी तेल का व्यापार बेतहाशा बढ़ाया है। प्रस्तावित नए प्रतिबंध विधेयक के तहत लगातार रूसी तेल खरीदने के कारण भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों को 100% तक के दंडात्मक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। ALSO READ: ट्रंप का बड़ा फैसला! जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ से भारत की फार्मा इंडस्ट्री को कितना होगा नुकसान?

आलोचकों पर भड़के नवारो

भारत को पहले भी 'टैरिफ का महाराजा' कह चुके पीटर नवारो को अपने इन विवादित बयानों की वजह से सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय इंटरनेट यूजर्स की ओर से मिली कड़ी प्रतिक्रियाओं पर वाइट हाउस में बात करते हुए नवारो ने कहा कि इंटरनेट पर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर से मुझ पर कई भद्दे हमले किए गए। मैं उन आलोचकों से कहना चाहता हूं— ऐसा न करें। अमेरिका में हम समस्याओं को इस तरह से नहीं सुलझाते हैं।

 

नवारो के इस आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन के नए व्यापार ढांचे में भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ कड़े दंडात्मक प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में भारी तल्खी आ सकती है।

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

Drug Smuggler Virendra Singh Basoya

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने UAE से भगोड़े ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में एक नया मील का पत्थर बताया। ALSO READ: सत्ता की भूख में सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए, हिंदू बाहुल्य सिंध भी पाकिस्तान को दे दिया, विभाजन विभीषिका दिवस पर योगी की हुंकार

 

अमित शाह ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और एक कठोर दृष्टिकोण के साथ उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को नष्ट कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए, एनसीबी ने यूएई से भगोड़े ड्रग सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी सुनिश्चित की है। 'ऊपर से नीचे' और 'नीचे से ऊपर' के दृष्टिकोण से अपराधी का पता लगाकर, हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते। ALSO READ: Census 2027: पहली बार जाति भी पूछेगी सरकार, बैंक अकाउंट से कोविड वैक्सीन तक होंगे ये 40 सवाल

कौन है ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया?

ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को यूएई से दिल्ली लाया जा चुका है। वह दिल्ली, गुजरात और पंजाब से बरामद की गई 13 हजार करोड़ की ड्रग्स बरामदगी मामले में आरोपी है। उसे इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड भी माना जा रहा है। गिरफ्तारी से पहले ही बसोया दुबई भाग गया। इसके बाद, एनसीबी में भी उसके खिलाफ केस दर्ज किया था।

 

वीरेंद्र के भाई रविंदर बसोया को भी पुलिस ने अक्टूबर 2024 में ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार किया था। उसकी कार से करीब 1.096 किलो ड्रग्स बरामद हुई थी। वीरेंद्र के बेटे ऋषभ बसोया का नाम भी इस नेटवर्क में सामने आया है। वीरेंद्र को जून 2026 में इंटरपोल के नोटिस के आधार पर यूएई में गिरफ्तार किया गया था।

कितने लापता, कितने मिले और कितने मामले लंबित, हाईकोर्ट ने सरकार से इंदौर के मिसिंग महिला-बच्‍चों का मांगा हिसाब

कितने लापता, कितने मिले और कितने मामले लंबित, हाईकोर्ट ने सरकार से इंदौर के मिसिंग महिला-बच्‍चों का मांगा हिसाब

missing children indore

इंदौर में अब तक कितने बच्‍चे और महिलाएं लापता हुए, कितनों को बरामद किया गया और कितने मामले लंबित है। हाईकोर्ट ने इंदौर जिले में 2021 से अब तक लापता महिलाओं और बच्‍चों को सरकार से हिसाब मांगा है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।

गुरुवार को डबल बेंच में हुई सुनवाई में कोर्ट की तरफ से कहा गया कि सरकार लापता लोगों की संख्या, बरामदगी और लंबित मामलों की जानकारी दें।

पुलिस ने अब तक क्‍या किया : कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो महिलाएं और बच्चे अब तक नहीं मिले हैं, उनकी तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं। सरकार को इन मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी देनी होगी।

2021 से अब तक का पूरा डेटा: मामला महिलाओं और बच्चों के लापता होने से जुड़े जनहित के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने इंदौर जिले में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों के लापता होने, उनकी तलाश में देरी और मामलों से जुड़े अद्यतन आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है।

कमेटी बनाने की मांग : याचिकाकर्ता ने लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी गठित करने की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ आंकड़े सामने आना पर्याप्त नहीं हैं। लंबित मामलों की जांच किस स्तर पर है और लापता लोगों को तलाशने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, इसकी भी समीक्षा जरूरी है। अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखना होगा। आगामी सुनवाई में वर्ष 2021 से अब तक लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों, बरामदगी और लंबित प्रकरणों से जुड़े आंकड़े सामने आने की संभावना है।

सत्ता की भूख में सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए, हिंदू बाहुल्य सिंध भी पाकिस्तान को दे दिया, विभाजन विभीषिका दिवस पर योगी की हुंकार

सत्ता की भूख में सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए, हिंदू बाहुल्य सिंध भी पाकिस्तान को दे दिया, विभाजन विभीषिका दिवस पर योगी की हुंकार

Yogi Adityanath on India Partition

Yogi Adityanath on India Partition: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 1947 के विभाजन को विश्व मानवता के इतिहास का सबसे काला अध्याय करार दिया। सीएम योगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि तात्कालिक दौर में केवल सत्ता हासिल करने के लिए एक अखंड सनातन राष्ट्र का बंटवारा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उस समय पाकिस्तान समर्थकों ने जिन भूभागों की मांग भी नहीं की थी— जैसे हिंदू बहुल सिंध, पंजाब और बंगाल के कई हिस्से— उन्हें भी जबरदस्ती पाकिस्तान के सुपुर्द कर दिया गया।

संवेदनाओं और संस्कृति पर कुठाराघात

मुख्यमंत्री योगी ने इतिहास के पन्नों को याद दिलाते हुए कहा कि 1947 में हुआ विभाजन महज भौगोलिक रेखाएं खींचना नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों की संवेदनाओं और संस्कृति पर कुठाराघात था। उन्होंने कहा कि 1947 में सत्ता के भूखे लोगों की मौन सहमति के कारण सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए गए। सिंध, जो उस समय हिंदू बाहुल्य क्षेत्र था, उसे भी जबरन पाकिस्तान के हवाले कर दिया गया। पंजाब और बंगाल का एक बड़ा हिस्सा बिना मांगे पाकिस्तान समर्थकों को दे दिया गया। उस समय जो लोग मौन थे, उनकी नजरें केवल सत्ता की कुर्सी पर थीं और आज भी उनकी मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है।
 

बांग्लादेश को लेकर विपक्ष के 'मौन' पर प्रहार

बांग्लादेश में हाल में हुई राजनीतिक उथल-पुथल और अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने विपक्षी दलों पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब-जब हिंदुओं, बौद्धों, सिख और जैनियों पर अत्याचार होता है, तब-तब तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल मौन साधे रहते हैं। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि विरोधी दल बांग्लादेश में दलितों और हिंदुओं के कत्लेआम पर इसलिए चुप रहे क्योंकि उन्हें अपना वोट बैंक खिसकने का डर था। उनके लिए निर्दोष लोगों की जान से ज्यादा अपना राजनीतिक वोट बैंक प्यारा है।

 

उन्होंने कहा कि विभाजन के समय लाखों की संख्या में लोगों का कत्लेआम हुआ और करोड़ों को अपनी ही मातृभूमि से बेघर होना पड़ा। यह दिवस हमें इतिहास की उन गलतियों से सीखने और राष्ट्र की एकता को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। भारत के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत कभी भी वैभव या शक्ति के मामले में किसी से पीछे नहीं था। लेकिन आपसी फूट और विभाजनकारी शक्तियों के कारण देश को गुलामी झेलनी पड़ी। आज के समय में भी जो शक्तियां अव्यवस्था और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं, उनसे सतर्क रहने की सख्त जरूरत है।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का महत्व

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में 14 अगस्त के दिन को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' (Horrors of Partition Remembrance Day) के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य देशवासियों, विशेषकर युवा पीढ़ी को विभाजन के दौरान अपनों को खोने वाले लाखों लोगों के त्याग, पीड़ा और संघर्ष की याद दिलाना तथा राष्ट्र में सामाजिक समरसता और एकता की भावना को मजबूत करना है।

दलित सम्मान से आदिवासी अधिकार तक: कांग्रेस ने साधा सामाजिक न्याय का नया सियासी नैरेटिव?

दलित सम्मान से आदिवासी अधिकार तक: कांग्रेस ने साधा सामाजिक न्याय का नया सियासी नैरेटिव?

संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार पर बेहद अक्रामक रहने वाली कांग्रेस अब आदिवासी और दलित वोट बैंक को साधने के लिए एक नया नैरेटिव बनाते हुए दिखाई दे रही है। दरअसल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी के शुद्धिकरण विवाद से मध्यप्रदेश के छतरपुर के केन-बेतवा परियोजना से जुड़े आंदोलन तक,दलित और आदिवासी समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर कांग्रेस सामाजिक न्याय के नया सियासी नैरेटिव को धार देने की कोशिश में दिखाई दे रही है।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण अनुष्ठान को पार्टी ने दलित सम्मान और जातिगत भेदभाव से जोड़ा है। वहीं राहुल गांधी के मध्यप्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावित परिवारों, खासकर आदिवासियों के पुनर्वास और मुआवजे के सवाल को कांग्रेस जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे के तौर पर उठा रही है।

हल्द्वानी में शुद्धिकरण से दलित सम्मान का सवाल-उत्तराखंड के हल्द्वानी के 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद वहां शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने की खबर सामने आई। कांग्रेस ने इसे महज धार्मिक या सांस्कृतिक गतिविधि मानने के बजाय दलित अस्मिता से जोड़ दिया। खड़गे ने राज्यसभा में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वे अनुसूचित जाति से आते हैं और इस घटना से उन्हें छुआछूत का दर्द महसूस हुआ।

राज्यसभा में पूरे मामले को उठाते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि  हल्द्वानी में मेरे भाषण के बाद, बीजेपी के लोगों ने उस मंच को शुद्ध  करने के लिए वहां हवन किया, क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? उन्होंने आगे कहा कि मैं इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता। मैं बरसों से इस सदन का सदस्य रहा हूं। मैं अनुसूचित जाति से आता हूं और दलित हूं, मैंने कभी किसी से यह गुहार नहीं लगाई कि मेरी मदद करो या मेरी रक्षा करो।

कांग्रेस ने हल्द्वानी की पूरी घटना को दलित नेता के सम्मान बनाम जातिगत भेदभाव की मानसिकता के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक बराबरी के खिलाफ बताया है। कांग्रेस इस विवाद को व्यापक सामाजिक न्याय के मुद्दे में बदलने की कोशिश कर रही है। संदेश यह है कि खड़गे का अपमान केवल एक नेता का नहीं, बल्कि दलित समाज के सम्मान का सवाल है।

केन-बेतवा के सहारे आदिवासी वोटर्स को साधने की कोशिश-दलितों को साधने के साथ लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केन-बेतवा लिंक परियोजना के पीड़ित परिवारों से मिलकर आदिवासी वोट बैंक को साधने की कोशिश की। दरअसल मध्यप्रदेश के छतरपुर में  केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास को लेकर प्रभावित परिवारों का आंदोलन पिछले कई महीनों से जारी है। जुलाई में आदिवासी परिवारों ने जल सत्याग्रह, चिता आंदोलन और फांसी सत्याग्रह जैसे बड़े विरोध प्रदर्शन किए। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार प्रभावित लोगों के बीच पहुंच चुके हैं। उन्होंने इसे किसान, दलित और आदिवासी परिवारों के न्याय से जोड़ते हुए आंदोलन को समर्थन दिया है।

दलित-आदिवासी मुद्दों को जोड़ने की कोशिश-संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस हल्द्वानी और छतरपुर के जरिए दलित और आदिवासी वोट बैंक को साधने की कोशिश करती दिखाई दी। हल्द्वानी में सवाल सामाजिक सम्मान और जातिगत भेदभाव का है, जबकि छतरपुर में जमीन, विस्थापन और पुनर्वास का। एक तरफ कांग्रेस कह रही है कि दलित समाज के नेता के साथ कथित तौर पर भेदभाव हुआ, दूसरी तरफ वह आदिवासी परिवारों के लिए कह रही है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन और आजीविका की अनदेखी नहीं की जा सकती।

कांग्रेस अपने पुराने सामाजिक न्याय के एजेंडे को नए राजनीतिक संदर्भ में दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर सकती है। सियासी तौर पर देखें तो दलित और आदिवासी दोनों ही कांग्रेस के लिए कभी पारंपरिक वोट बैंक के तौर पर देखा जाता था लेकिन 2014 के बाद कांग्रेस के इस बड़े कोर वोट बैंक में सेंध लगी। उत्तर प्रदेश में जहां दलित वोट बैंक और मध्यप्रदेश में आदिवासी वोट बैंक किंगमेंकर के तौर पर माना जाता है। ऐसे में हल्द्वानी के दलित सम्मान और छतरपुर के आदिवासी अधिकार के मुद्दों को कांग्रेस के द्वारा लगातार उठाना उसकी चुनावी राजनीति में सामाजिन न्याय के नैरिटव को साधना है। कांग्रेस एक सीधा संदेश देने की कोशिश मे है कि दलित समुदाय का सामाजिक रूप से अपमान, आर्थिक असुरक्षा या विस्थापन का सामना कर रहे आदिवासियों के साथ पार्टी मजबूती के साथ खड़ी है।

कांग्रेस का यह संदेश दलित और आदिवासी मतदाताओं के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश का आधार बन सकता है। खासकर मध्य प्रदेश में, जहां आदिवासी क्षेत्रों में जमीन, वनाधिकार, विस्थापन और रोजगार जैसे मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं।

हल्द्वानी का शुद्धिकरण विवाद और छतरपुर का केन-बेतवा आंदोलन से आदिवासी अधिकारों को साथ रखकर कांग्रेस अपने लिए एक ऐसा राजनीतिक नैरेटिव तैयार कर रही है, जिसमें सम्मान, संविधान, जमीन, पुनर्वास और सामाजिक न्याय एक ही धागे में जुड़े दिखाई देते हैं। यह रणनीति कांग्रेस के लिए सिर्फ विपक्षी सरकारों पर हमला करने का माध्यम नहीं, बल्कि दलित और आदिवासी मतदाताओं के बीच यह संदेश मजबूत करने की कोशिश भी है कि ‘आपके सम्मान और अधिकार की लड़ाई में कांग्रेस आपके साथ है।