पैकेज्ड फूड में ज्यादा चीनी-नमक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, FSSAI से पूछा- लेबल लगाने में इतनी हिचकिचाहट क्यों?

पैकेज्ड फूड में ज्यादा चीनी-नमक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, FSSAI से पूछा- लेबल लगाने में इतनी हिचकिचाहट क्यों?

Supreme Court scolds FSSAI on packaged food

सुप्रीम कोर्ट ने शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले पैकेज्ड फूड पर फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी लेबल लगाने के मामले में FSSAI को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि ज्यादा चीनी-नमक और फैट की जानकारी दो, सरकार ऐसा नहीं करती तो हम आदेश देंगे। ALSO READ: राहुल गांधी ने मोदी की विदेश नीति का उड़ाया मजाक, 'गले मिलने' पर सियासी बवाल, मेलोनी के जिक्र से BJP नाराज

 

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि आखिर ऐसी व्यवस्था लागू करने में इतनी हिचकिचाहट क्यों है? कोर्ट ने यहां तक पूछा कि क्या एफएसएसएआई खाद्य उत्पाद बनाने वाली बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के दबाव में आ रहा है।


कोर्ट ने एफएसएसएआई से यह भी पूछा कि उसके आदेश के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और चेतावनी लेबल लागू करने के लिए उसे खुद पहल करनी होगी या कोर्ट को इस संबंध में आदेश जारी करना पड़ेगा।

 

काम नहीं आई FSSAI की सफाई

एफएसएसएआई ने तर्क दिया कि अगर ऐसे लेबल लागू किए गए तो नमकीन जैसे कई भारतीय खाद्य पदार्थ भी ज्यादा फैट, शुगर या नमक वाले उत्पादों की श्रेणी में आ जाएंगे। हालांकि कोर्ट इस तर्क से सहमत नहीं हुआ। उसने सवाल किया कि क्या आप चाहते हैं कि इस देश के लोग स्वस्थ न रहें? खासकर बढ़ते हुए बच्चे?

 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी एफएसएसएआई से जनस्वास्थ्य के हित में ऐसे चेतावनी लेबल लागू करने पर विचार करने को कहा था।

राहुल गांधी ने मोदी की विदेश नीति का उड़ाया मजाक, ‘गले मिलने’ पर सियासी बवाल, मेलोनी के जिक्र से BJP नाराज

राहुल गांधी ने मोदी की विदेश नीति का उड़ाया मजाक, 'गले मिलने' पर सियासी बवाल, मेलोनी के जिक्र से BJP नाराज

rahul gandhi with sandeep dixit

राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधने के दौरान कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के साथ गले मिलने और जॉर्जिया मेलोनी के संदर्भ वाले मजाक पर सियासी विवाद खड़ा हो गया। BJP नेताओं ने इसे महिला विरोधी टिप्पणी बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। ALSO READ: पीएम रात में नहीं सोते, अमित शाह संसद से भाग गए…राहुल गांधी ने दिखाए तेवर, कहा- हम इनको पागल कर देंगे!

 

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि आप अपने दोस्त के घर नहीं जा रहे हो। हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री दोस्ती करने नहीं जाता। उसका काम देश की रक्षा करना होता है। इनके दिमाग में पता नहीं कहां से घुस गया कि वो मेरा दोस्त है और ये गले लगने लगते हैं। पता नहीं इनके दिमाग में ये कैसे घुस गया कि विदेश नीति का मतलब ये होता है।

 

ऐसा कहने के बाद राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को जोर से गले लगाया। इसके बाद उन्होंने कहा कि मोदी जी को लगता है कि विदेश नीति का मतलब यही होता है।

संदीप दीक्षित को याद आई मेलोनी

इसके बाद संदीप दीक्षित ने राहुल गांधी को टोककर इटली की पीएम मेलोनी का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा कि एक बात पूछ सकता हूं? फिर आगे कहा, 'मेलोनी समझ कर तो नहीं पकड़ा था।' उनके इस तंज पर हॉल में ठहाके गूंज उठे। राहुल गांधी ने हंसते हुए कहा कि नहीं-नहीं, मैं अभी तक वहां नहीं पहुंचा हूं।

 

क्या बोले हिमंता बिस्वा सरमा?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, -कांग्रेस का वंशवादी नेतृत्व एक बार फिर शालीनता की सारी हदें पार कर गया है। एक मित्र देश का नेतृत्व करने वाली महिला राष्ट्राध्यक्ष के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जबकि मंच और दर्शकों में मौजूद महिलाएं भी इस पर हंसती नजर आईं। यह सिर्फ राजनीतिक शालीनता का उल्लंघन नहीं है, बल्कि भारत के विदेश संबंधों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी है। जब महिलाओं के प्रति अनादर मनोरंजन का जरिया बन जाए, तो यह उस संस्कृति के बारे में बहुत कुछ कहता है, जिसे बढ़ावा दिया जा रहा है। शर्मनाक। निंदनीय।

वानति श्रीनिवासन भी नाराज

बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वानति श्रीनिवासन ने लिखा, 'आलोचना करना हर राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन महिलाओं का अपमान करना और सार्वजनिक जीवन को भद्दे मज़ाक तक सीमित कर देना सही नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का मजाक उड़ाना, जबकि कांग्रेस के नेता साथ में हंस रहे हों, राजनीतिक परिपक्वता की गंभीर कमी को दिखाता है।'

कौशल विकास मिशन और आईआईए के बीच हुआ एमओयू, युवाओं को मिलेगा इंडस्ट्री का सीधा एक्सपोजर

कौशल विकास मिशन और आईआईए के बीच हुआ एमओयू, युवाओं को मिलेगा इंडस्ट्री का सीधा एक्सपोजर

 

 

 

 

 

 

 

 

उत्तर प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल बनाने तथा उन्हें रोजगार और अप्रेंटिसशिप के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के बीच गुरुवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे, संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार मौजूद रहे। इस समझौते का प्रमुख उद्देश्य इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट लिंकेज को मजबूत करना, अप्रेंटिसशिप एवं प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाना, इंडस्ट्री एक्सपोजर उपलब्ध कराना तथा प्रशिक्षार्थियों की रोजगार क्षमता को बेहतर बनाना है। इसके माध्यम से प्रशिक्षण व्यवस्था को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ते हुए युवाओं को व्यावहारिक एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। एमओयू के तहत आईआईए के क्षेत्रीय चैप्टर प्रमुखों को जिलों में कार्यरत जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) से जोड़ा जाएगा।

 

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक और उद्योगपरक बनाने के लिए उद्योगों द्वारा आवश्यक रॉ मैटेरियल यूपीएसडीएम प्रशिक्षण केंद्रों को उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशिक्षार्थी उद्योग विशेषज्ञों की देखरेख में वास्तविक औद्योगिक कार्यों का अनुभव प्राप्त करेंगे। आईआईए से जुड़े उद्यमी और तकनीकी विशेषज्ञ यूपीएसडीएम के प्रशिक्षण केंद्रों पर गेस्ट लेक्चर, मेंटरशिप और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। साथ ही प्रशिक्षार्थियों को सॉफ्ट स्किल्स, कार्यस्थल व्यवहार और उद्योग में बदलती तकनीकी जरूरतों की जानकारी दी जाएगी।

 

आईआईए पोर्टल, जॉब फेयर और अप्रेंटिसशिप मेले से बढ़ेंगे अवसर

प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए आईआईए के ऑनलाइन पोर्टल iiaonline.in का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा नियमित रूप से जॉब फेयर, अप्रेंटिसशिप मेले, औद्योगिक भ्रमण और इंडस्ट्री एक्सपोजर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस पहल को प्रथम चरण में लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमेठी, वाराणसी, एनसीआर और बरेली में लागू किया जाएगा। सफल क्रियान्वयन के आधार पर इस मॉडल को प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तारित करने की योजना है।

 

यूपीएसडीएम और आईआईए के बीच यह तीन वर्ष की गैर वित्तीय साझेदारी है। एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रगति की समीक्षा के लिए एक ज्वाइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया गया है। समिति द्वारा प्रत्येक तिमाही में कार्यक्रम की प्रगति, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अप्रेंटिसशिप, प्लेसमेंट और अन्य परिणामों का आकलन किया जाएगा।

चमोली में टनल हादसे से मचा हड़कंप, 7 मजदूरों की मौत; 3 अब भी लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

चमोली में टनल हादसे से मचा हड़कंप, 7 मजदूरों की मौत; 3 अब भी लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

chamoli tunnel accident

Uttarakhand Tunnel Accident : उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में भूस्खलन के बाद पानी, पत्थर और मलबा घुस गया। मीडिया खबरों के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में टनल में काम कर रहे 28 मजदूरों में से 7 की मौत हो गई। 18 लोगों को बचा लिया गया और 3 लोग अभी भी लापता है। राहत और बचाव कार्य जारी है। ALSO READ: उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल ढही, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

 

चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन 3 किमी लंबी टनल में गुरुवार शाम लैंडस्लाइड के बाद पानी रिसने लगा। मलबा और पानी भरने से अंदर काम कर रहे मजदूर फंस गए। रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक चलता रहा।

क्या बोले सीएम धामी?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पिपलकोटी के पास बिरही नदी पर निर्माणाधीन सुरंग के अंदर काम कर रहे मज़दूरों पर ऊपर से भूस्खलन जैसी घटना के बाद अचानक मिट्टी और मलबा आ गिरा। इसके कारण कुछ लोग अंदर फंस गए। अब तक 18 लोगों को निकाला जा चुका है। बचाए गए लोगों में से कुछ घायल हैं और उन्हें पिपलकोटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहां उनका इलाज चल रहा है।

 

उन्होंने कहा कि ऋषिकेश में भी तैयारियां पूरी हैं। 3-4 लोगों को ज़्यादा गंभीर चोटें आई हैं और उन सभी का इलाज चल रहा है। हमारी प्राथमिकता सभी को जल्द से जल्द बचाना है। NDRF, SDRF, ज़िला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर मौजूद हैं। मैंने पिपलकोटी अस्पताल में भर्ती घायल मज़दूरों से बात की और उनकी हालत स्थिर है।

 

गौरतलब है कि उत्तरकाशी में सिल्क्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में नवंबर, 2023 को भूस्खलन होने के कारण बीच का एक हिस्सा धंस गया था। सुरंग का निकासी वाला सिरा बंद होने 41 श्रमिक भीतर ही फंस गए। 17 दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में उन्हें बाहर निकाला गया था।

पाकिस्तान ने धोखे से हड़पा था बलूचिस्तान, क्यों कभी पाक सेना के आगे नहीं झुके धुरंधर बलोच? जानिए बलोच संघर्ष की पूरी कहानी

पाकिस्तान ने धोखे से हड़पा था बलूचिस्तान, क्यों कभी पाक सेना के आगे नहीं झुके धुरंधर बलोच? जानिए बलोच संघर्ष की पूरी कहानी

Balochistan conflict

Balochistan conflict: पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान आज हिंसा, विद्रोह और धमाकों की आग में झुलस रहा है। बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य लड़ाका गुट आए दिन पाकिस्तानी सेना और चीनी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस बलूचिस्तान को पाकिस्तान अपना हिस्सा बताता है, वहां के लोग इस्लामाबाद के खिलाफ इतने आक्रामक क्यों हैं? इसका जवाब छुपा है बलोचों के स्वाभिमानी इतिहास और दशकों से हो रहे उनके शोषण में।

बलोच लड़ाकों का निडर इतिहास: कभी किसी के आगे नहीं झुके

बलूचिस्तान का इतिहास शूरवीरता और अपनी स्वायत्तता की रक्षा करने की कहानियों से भरा हुआ है। इतिहासकार बताते हैं कि बलोच जनजाति के लोग मूल रूप से सीरिया और ईरान के पहाड़ी इलाकों से आकर यहाँ बसे थे।

  • अंग्रेजों से लोहा: 19वीं सदी में जब ब्रिटिश साम्राज्य पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर कब्जा कर रहा था, तब भी बलूचिस्तान की 'कलात रियासत' (State of Kalat) ने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी। अंग्रेजों को भी बलोचों की छापामार युद्ध शैली (Guerilla Warfare) के आगे समझौते करने पड़े थे।
  • लड़ाकू स्वभाव: बलोच समाज कबीलाई व्यवस्था पर चलता है। इनके लिए “गैरात” (आत्मसम्मान) और “जमीन” से बढ़कर कुछ नहीं है। यही वजह है कि साम्राज्य बदले, हुकूमतें बदलीं, लेकिन बलोच लड़ाकों का विद्रोही मिजाज कभी खत्म नहीं हुआ।

धोखे से पाकिस्तान में विलय : विवाद की असली जड़
15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के जाने के बाद कलात के खान (बलोच शासक) मीर अहमद यार खान ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया था। लगभग 7 महीने तक बलूचिस्तान एक आजाद मुल्क रहा।
मार्च 1948 में मोहम्मद अली जिन्ना के दबाव और सैन्य बल के प्रयोग के कारण कलात के खान को पाकिस्तान के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। बलोच जनता ने इस विलय को कभी दिल से स्वीकार नहीं किया और उसी दिन से पाकिस्तान के खिलाफ पहला सशस्त्र विद्रोह शुरू हो गया। ALSO READ: बलूचिस्तान में आजादी का जश्न, पाकिस्तानी प्रतीकों को हटाने का ऐलान, पाकिस्तानी सेना का कड़ा पहरा

baloch history and struggle

baloch history and struggle

बलूचिस्तान आंदोलन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका: नया और निर्णायक मोड़

बलूचिस्तान के आंदोलन में सबसे बड़ा और हैरान कर देने वाला बदलाव महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले बलोच समाज में आज महिलाएं केवल आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे इसका नेतृत्व कर रही हैं।

1. शांतिपूर्ण और राजनीतिक विरोध का नेतृत्व

पाकिस्तानी सेना द्वारा पुरुषों को गायब किए जाने के बाद बलोच महिलाओं ने मोर्चा संभाला।

2. सशस्त्र संघर्ष और BLA की 'माजिद ब्रिगेड'

आंदोलन का दूसरा पहलू और भी अधिक रणनीतिक और आक्रामक है। बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अपनी सुसाइड बॉम्बर विंग 'माजिद ब्रिगेड' में महिलाओं को शामिल किया है:

  • शारी बलोच (2022): कराची यूनिवर्सिटी में चीनी नागरिकों पर आत्मघाती हमला करने वाली शारी बलोच एक पढ़ी-लिखी शिक्षिका और दो बच्चों की मां थी। इस घटना ने दुनिया भर को स्तब्ध कर दिया।
  • सुम्बुल बलोच और महल बलोच: हाल के वर्षों में कई पढ़ी-लिखी बलोच महिलाओं ने आत्मघाती हमलों को अंजाम दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दमन के खिलाफ युवा महिलाएं किस सीमा तक जाने को तैयार हैं।

3. सामाजिक चेतना और बदलाव

अब बलोच महिलाएं केवल घरों में पीड़ित बनकर बैठने के बजाय अदालतों, प्रेस क्लबों और सड़कों पर अपने पतियों, भाइयों और बेटों की रिहाई के लिए आवाज उठा रही हैं। महिला शिक्षा और राजनीतिक चेतना ने इस आंदोलन को केवल एक कबीलाई विद्रोह न बनाकर एक राष्ट्रीय चेतना आंदोलन में बदल दिया है।

क्या है बलूचिस्तान का भविष्य?

पाकिस्तानी सेना ने दशकों तक सैन्य अभियानों के जरिए बलूचिस्तान की आवाज दबाने की कोशिश की है, लेकिन हर सैन्य कार्रवाई के साथ बलोचों का गुस्सा और बढ़ जाता है। चीन के अरबों डॉलर के निवेश (CPEC) पर मंडराते खतरे और बलोच विद्रोहियों के बढ़ते मनोबल ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है।

बलूचिस्तान की यह आग केवल पाकिस्तान के नक्शे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को बदलने का माद्दा रखती है। अब जब बलूचिस्तान की पढ़ी-लिखी युवा पीढ़ी और महिलाएं सड़क से लेकर सशस्त्र संघर्ष तक में आगे आ चुकी हैं, तब इस्लामाबाद के लिए इस आंदोलन को दबाना आसान नहीं रह गया है। चीन के अरबों डॉलर के निवेश (CPEC) पर मंडराते खतरे और बलोच विद्रोहियों की बढ़ती ताकत ने पाकिस्तान की रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Top News 14 August: चमोली टनल हादसे में 9 मौतें, राम मंदिर में बदला पुजारियों का ड्रेस कोड; Instagram का नया लुक

Top News 14 August: चमोली टनल हादसे में 9 मौतें, राम मंदिर में बदला पुजारियों का ड्रेस कोड; Instagram का नया लुक

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Top News 14 August : उत्तराखंड के चमोली में टनल हादसे में 9 मजदूरों की मौत, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन पर पीएम मोदी को पत्र लिखा। अयोध्या राम मंदिर में नया ड्रेस कोड लागू। सीजेआई का विरोध करने वाले छात्रों को राहत। मेटा ने बदला इंस्टाग्राम का लोगो। 14 अगस्त की बड़ी खबरें: 
 

चमोली में टनल हादसा, 9 की मौत

उत्तराखंड के चमौली में निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में भूस्खलन के बाद पानी, पत्थर और मलबा घुस गया। इस दर्दनाक हादसे में टनल में काम कर रहे 9 मजदूरों की मौत हो गई। 14 लोगों को बचाया गया। राहत और बचाव कार्य जारी है। ALSO READ: उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल ढही, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

 

परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय का PM मोदी को पत्र

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोकसभा सीटों की संख्या को स्थायी रूप से 543 पर बनाए रखने के लिए संविधान में संशोधन करने की मांग की। मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान 12 अगस्त 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में पारित प्रस्ताव की ओर आकर्षित किया। ALSO READ: परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

 

राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड 

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजित रामलला की सेवा-पूजा कर रहे पुजारियों की वेशभूषा में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। अब मंदिर के पुजारी बिना सिले वस्त्र धारण करके ही पूजा-पाठ करेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा नवगठित 'धार्मिक न्यास समिति' की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया है। ALSO READ: राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!

 

CJI का विरोध करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स को राहत

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने गुरुवार को हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों को बड़ी राहत दी है। BCI ने अपने उस विवादित सर्कुलर में बदलाव कर दिया है। इसके तहत 2026 में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई थी। BCI ने कहा है कि मामले की जांच रिपोर्ट आने तक छात्रों के खिलाफ कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। ALSO READ: NALSAR छात्रों को बड़ी राहत, BCI ने बदला अपना आदेश, CJI का विरोध करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स की प्रैक्टिस पर लगी रोक हटाई

 

इंस्टाग्राम ने बदला लोगो

मेटा ने इंस्टाग्राम के लिए एक नया वर्डमार्क लॉन्च किया है। यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का टेक्स्ट-ओनली लोगो है। इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी ने इस बदलाव के संबंध में एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि एप के शीर्ष पर वर्डमार्क 10 साल से नहीं बदला था, इसलिए इसे नया रूप देने का समय आ गया था।

 

NALSAR छात्रों को बड़ी राहत, BCI ने बदला अपना आदेश, CJI का विरोध करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स की प्रैक्टिस पर लगी रोक हटाई

NALSAR छात्रों को बड़ी राहत, BCI ने बदला अपना आदेश, CJI का विरोध करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स की प्रैक्टिस पर लगी रोक हटाई

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने गुरुवार को हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों को बड़ी राहत दी है। BCI ने अपने उस विवादित सर्कुलर में बदलाव कर दिया है। इसके तहत 2026 में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई थी। BCI ने कहा है कि मामले की जांच रिपोर्ट आने तक छात्रों के खिलाफ कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।  यह विवाद यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के कुछ छात्रों की ओर से विरोध जताने के बाद शुरू हुआ था। 

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नए आदेश में BCI ने स्पष्ट किया है कि NALSAR के 2026 बैच के सभी स्नातक अपनी पसंद के किसी भी राज्य बार काउंसिल में नामांकन के लिए आवेदन करने के हकदार होंगे। BCI ने अपने ताजा बयान में कहा कि विस्तृत चर्चा के बाद सदस्यों की सर्वसम्मत राय है कि उपलब्ध नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार NALSAR के 2026 बैच के अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और वे कथित तौर पर अनादर के कदम में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे।

 

BCI ने यह भी कहा कि कुछ विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी मिली है कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को कथित तौर पर उकसाने में भूमिका निभाई थी। बार काउंसिल ने कहा, “किसी भी छात्र को उसकी गलती के बिना नुकसान नहीं उठाना चाहिए।”

 

पहले BCI ने लगाई थी नामांकन पर रोक

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यह फैसला उस विवाद के कुछ घंटे बाद आया, जब BCI के पहले आदेश ने व्यापक आलोचना को जन्म दिया था। पहले जारी सर्कुलर में सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया गया था कि वे 2026 में NALSAR से कानून की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र का अगले आदेश तक अधिवक्ता के रूप में नामांकन न करें।

 

BCI का यह कदम उस विवाद के बाद आया था, जिसमें NALSAR के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने के कथित प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। पहले आदेश में कहा गया था कि 2026 में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से कानून की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र का BCI के अगले निर्देश तक अधिवक्ता के रूप में नामांकन नहीं किया जाएगा।

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इसके साथ ही BCI ने विश्वविद्यालय से तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इसमें उन छात्रों की पहचान करने को कहा गया था, जिन्होंने कथित तौर पर मुख्य न्यायाधीश को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित करने के प्रस्ताव के विरोध में अभियान शुरू करने, आयोजित करने या छात्रों को लामबंद करने में भूमिका निभाई थी। अब ताजा आदेश के बाद NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को अधिवक्ता के रूप में नामांकन का रास्ता साफ हो गया है।

परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोकसभा सीटों की संख्या को स्थायी रूप से 543 पर बनाए रखने के लिए संविधान में संशोधन करने की मांग की। मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान 12 अगस्त 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में पारित प्रस्ताव की ओर आकर्षित किया। 

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यह प्रस्ताव संसद और विधानसभा क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन के साथ-साथ महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से संबंधित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि लोकसभा यानी 'हाउस ऑफ द पीपुल' के सदस्यों की कुल संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय की जानी चाहिए।

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उन्होंने प्रधानमंत्री से इस संबंध में आवश्यक संवैधानिक संशोधन करने का अनुरोध किया है। परिसीमन को लेकर तमिलनाडु सरकार का कहना है कि लोकसभा सीटों की संख्या को स्थायी रखने से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर संभावित असंतुलन को रोका जा सकेगा।

उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल ढही, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल ढही, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

tunnel

उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार को एक बड़ा हादसा हो गया। विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए बनाई जा रही निर्माणाधीन टनल का एक हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे के बाद कई मजदूरों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल को मौके पर भेजा गया। रेस्क्यू टीम ने टनल के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया है।

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लैंडस्लाइड के बाद टनल का हिस्सा ढहने की आशंका

 

शुरुआती जानकारी के अनुसार निर्माणाधीन टनल के अंदर लैंडस्लाइड होने के कारण यह हादसा हुआ। मलबा गिरने के बाद टनल का एक हिस्सा ढह गया और वहां काम कर रहे मजदूर अंदर फंस गए। रेस्क्यू टीमें फिलहाल मलबा हटाकर अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। 

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मजदूरों को सुरक्षित निकालने में जुटी रेस्क्यू टीम

हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बचावकर्मी मलबे को हटाने के साथ टनल के अंदर सुरक्षित रास्ता बनाने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल कितने मजदूर टनल के अंदर फंसे हैं और उनकी स्थिति क्या है, इसकी सटीक जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति पर नजर रखी जा रही है।

राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!

राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!

Ram Mandir priest dress code: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजित रामलला की सेवा-पूजा कर रहे पुजारियों की वेशभूषा (ड्रेस कोड) में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा नवगठित 'धार्मिक न्यास समिति' की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया है। ​अब राम मंदिर के पुजारी सिलाई किए हुए वस्त्रों के बजाय बिना सिले वस्त्र (धोती और दुपट्टा/अंगवस्त्र) धारण करके ही पूजा-पाठ करेंगे।

क्यों बदला गया ड्रेस कोड?

​इससे पहले ट्रस्ट की ओर से पुजारियों के लिए पीले रंग की सिलाई वाली चौबंदी (कुर्ता/अंगरखा), सफेद धोती और पगड़ी तय की गई थी, जिस पर तीर्थ क्षेत्र का मोनोग्राम भी छपा हुआ था। हाल ही में हुई धार्मिक न्यास समिति की पहली बैठक में संतों ने इस पर आपत्ति जताई। संतों का तर्क था कि सिलाई वाले वस्त्र पहनना अयोध्या की प्राचीन वैष्णव परंपरा के प्रतिकूल है।

​संतों का सुझाव : गर्भगृह में प्रभु की सेवा के दौरान पुजारियों को पूर्णतः वैष्णव मर्यादा के अनुसार केवल बिना सिले वस्त्र ही धारण करने चाहिए। संतों के इस मार्गदर्शन को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

​रोस्टर बदलाव के साथ नई व्यवस्था प्रभावी

​बदला हुआ ड्रेस कोड सावन शुक्ल प्रतिपदा (13 अगस्त) से पूरी तरह लागू कर दिया गया है। रामलला के पुजारियों की ड्यूटी का रोस्टर हर माह अमावस्या और पूर्णिमा को बदलता है। सावन कृष्ण अमावस्या तक जो पुजारी सुबह की पाली में थे, वे प्रतिपदा से शाम की पाली में आ गए हैं और नई वेशभूषा के साथ अपनी सेवा दे रहे हैं।