
सुप्रीम कोर्ट ने शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले पैकेज्ड फूड पर फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी लेबल लगाने के मामले में FSSAI को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि ज्यादा चीनी-नमक और फैट की जानकारी दो, सरकार ऐसा नहीं करती तो हम आदेश देंगे। ALSO READ: राहुल गांधी ने मोदी की विदेश नीति का उड़ाया मजाक, 'गले मिलने' पर सियासी बवाल, मेलोनी के जिक्र से BJP नाराज
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि आखिर ऐसी व्यवस्था लागू करने में इतनी हिचकिचाहट क्यों है? कोर्ट ने यहां तक पूछा कि क्या एफएसएसएआई खाद्य उत्पाद बनाने वाली बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के दबाव में आ रहा है।
कोर्ट ने एफएसएसएआई से यह भी पूछा कि उसके आदेश के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और चेतावनी लेबल लागू करने के लिए उसे खुद पहल करनी होगी या कोर्ट को इस संबंध में आदेश जारी करना पड़ेगा।
काम नहीं आई FSSAI की सफाई
एफएसएसएआई ने तर्क दिया कि अगर ऐसे लेबल लागू किए गए तो नमकीन जैसे कई भारतीय खाद्य पदार्थ भी ज्यादा फैट, शुगर या नमक वाले उत्पादों की श्रेणी में आ जाएंगे। हालांकि कोर्ट इस तर्क से सहमत नहीं हुआ। उसने सवाल किया कि क्या आप चाहते हैं कि इस देश के लोग स्वस्थ न रहें? खासकर बढ़ते हुए बच्चे?
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी एफएसएसएआई से जनस्वास्थ्य के हित में ऐसे चेतावनी लेबल लागू करने पर विचार करने को कहा था।


