राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

opposition chadawa chori drama in parliament

संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्ष के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने काफी दान किया। देखते ही देखते कुछ ही दिनों में दान पात्र में 2 लाख 14 हजार रुपए का चंदा हासिल हुआ। सपा सांसदों ने गुरुवार को इस रकम को कनाट पैलेस स्थित हनुमान मंदिर में जमा करा दिया। ALSO READ: नांदेड़ में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती, जानें कौन हैं सुखबीर बादल

 

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, मनोज झा समेत सभी विपक्षी सांसदों ने इस दान पात्र में पैसा डाला था। अब सपा सांसदों ने इस रकम को हनुमान मंदिर में जमा कराया है। उनका कहना है कि हम हनुमान मंदिर में यह दान इसलिए जमा करा रहे हैं क्योंकि वह धर्म के रक्षक माने जाते हैं।

 

चढ़ावा चोरी मामले में प्रदर्शन के दौरान जब सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद पहुंचे तो बवाल मच गया। भाजपा ने पप्पू यादव की इस हरकत की जमकर आलोचना की तो कई स्थानों पर साधु संतों ने भी उनका विरोध किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन पर हमला भी हुआ। ALSO READ: कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला- सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं सुनते

 

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन जब समाजवादी पार्टी के सांसद रुचि वीरा और अक्षय यादव ने दान पात्र खोला तो मकर द्वार के बाहर रोज एक घंटे के लिए रखे जाने वाले दानपात्र में 2 लाख 15 हजार 3 सौ 90 रुपए से ज्यादा का चंदा इकट्ठा हुआ।

 

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि बीजेपी ने राम मंदिर तक में चढ़ावा चोरी कर दी और संसद में चर्चा तक नहीं करा रहे हैं। इसी के चलते हमने दान पात्र रखकर विरोध किया है।

15 अगस्त 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर साझा करने के लिए खास शुभकामनाएं और विचार

15 अगस्त 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर साझा करने के लिए खास शुभकामनाएं और विचार

independance day 2026

15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने के बाद पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंग जाता है। इस ऐतिहासिक और पावन अवसर पर अपने दोस्तों, परिजनों और करीबियों को भेजने के लिए यहाँ 20 सबसे सुंदर और प्रेरणादायक स्वतंत्रता दिवस कोट्स दिए गए हैं।

 

1. सुंदर है जग में सबसे, नाम भी न्यारा है,

जहां जाती-भाषा से बढ़कर, देश-प्रेम की धारा है,

निशचल, पावन, प्रेम पुराना, वो भारत देश हमारा है।

 

2. कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,

हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा,

नशा ये हिन्दुस्तान का है!

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

 

3. चलो फिर से वो नजारा याद कर लें,

शहीदों के दिल में थी जो ज्वाला वो याद कर लें,

जिसमें बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पर,

बलिदानियों के खून की वो धारा याद कर लें!

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं 

 

4. गूंज रहा है दुनिया में हिंदुस्तान का नारा, 

चमक रहा है आसमान में तिरंगा हमारा।

 

5. न पूछो ज़माने को

क्या हमारी कहानी है,

हमारी पहचान तो सिर्फ ये हैं

की हम सिर्फ हिंदुस्तानी हैं!

 

6. फना होने की इजाज़त ली नहीं जाती,

ये वतन की मोहब्बत है जनाब,

पूछ कर की नहीं जाती।

 

7. कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना

कभी तपती धूप में जल के देख लेना

कैसे होती है हिफ़ाजत मुल्क की

कभी सरहद पर खड़े जवानों को जाकर देख लेना।

 

8. दें सलामी इस तिरंगे को जिससे हमारी शान है;

सिर हमेशा ऊंचा रहे इसका, इसमें बसती हमारी जान है!

 

9. सुन्दर है जग में सबसे, नाम भी न्यारा है,

जहा जाती-भाषा से बढ़कर देश-प्रेम की धारा है,

निश्छल, पावन, प्रेम पूर्ण वो भारत देश हमारा है।

 

10. लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमां पर,

भारत का नाम होगा सब की जुबान पर,

ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान,

कोई जो उठाएगा आंख हमारे हिंदुस्तान पर।

 

11. “ना पूछो ज़माने से कि क्या मेरी कहानी है,

हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम सब हिंदुस्तानी हैं।”

 

12. “कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,

हम लहराएंगे हर जगह यह तिरंगा,

 

13.”आओ झुककर सलाम करें उनको, 

जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है,

खुशनसीब होता है वो खून, 

देश के काम आता है।”

 

14. “आन देश की, शान देश की, देश की हम संतान हैं,

तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी यह पहचान है।”

 

15. “ना सर झुका है कभी और ना झुकाएंगे कभी,

जो अपने दम पर जिए, सच में वही जिंदगी है।”

 

16. “विभिन्नताओं से भरा यह देश, हमारी शान है,

सब मिलकर रहें यहाँ, यही भारत की पहचान है।”

 

17. “तैरना है तो समंदर में तैरो, नदी-नालों में क्या रखा है,

प्यार करना है तो वतन से करो, बेवफा लोगों में क्या रखा है।”

 

18. “फांसी के फंदे पर जो हंसते-हंसते झूल गए,

वतन की खातिर जो अपना सब कुछ भूल गए,

सलाम है उन वीरों को जिनकी बदौलत आज हम आजाद हैं।”

 

19. “दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फत,

मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वफ़ा आएगी।”

 

20. “विरासत में मिली स्वतंत्रता को सहेज कर रखना है,

हम सब का एक ही सपना—भारत को विश्वगुरु बनाना है।” 

 

नांदेड़ में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती, जानें कौन हैं सुखबीर बादल

नांदेड़ में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती, जानें कौन हैं सुखबीर बादल

Attack on Sukhbir Singh Badal in Nanded

Attack on Sukhbir Singh Badal in Nanded: महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष नेता सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला हुआ है। जानकारी के मुताबिक बादल परिवार के साथ गुरुद्वारा माता साहिब कौर में माथा टेकने गए थे। उन पर एक निहंग ने कृपाण से हमला किया। बादल के साथ-साथ उनका सुरक्षाकर्मी भी घायल हुआ है। 

जानकारी के मुताबिक बादल के हाथ में चोट आई है। हमले में घायल होने के बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। हमले में एक सुरक्षाकर्मी भी घायल हुआ है। घटना के बाद नांदेड़ और पंजाब के राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल धार्मिक और निजी दौरे पर नांदेड़ में थे, इसी दौरान उन पर हमला हुआ।

स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और घटना की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, सुखबीर बादल को प्राथमिक उपचार दिया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर के बाहर जुटने शुरू हो गए हैं।

कौन हैं सुखबीर सिंह बादल?

 शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल पंजाब के उपमुख्यमंत्री (2009 से 2017 तक) रह चुके हैं। वह पंजाब की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टियों में से एक 'शिरोमणि अकाली दल' के अध्यक्ष हैं और सिख राजनीति में एक बड़ा नाम माने जाते हैं। सुखबीर सिंह बादल, पंजाब के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बेटे हैं।

 

वह लोकसभा के सदस्य (सांसद) और केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। पंजाब की राजनीति में पिछले दो दशकों से उनका और उनके परिवार का सीधा असर रहा है।

कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला- सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं सुनते

कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला- सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं सुनते

kangana attacks rahul gandhi

मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने संसद में विपक्ष के हंगामे और राहुल गांधी के रवैये की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार से जवाब मांगता है, लेकिन चर्चा नहीं होने देता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। ALSO READ: हल्द्वानी में मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर भड़के खरगे, राज्यसभा में बोले- Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो

 

कंगना ने कहा कि ये बहुत आपत्तिजनक है। यहां पर पूरा माहौल खराब कर रखा है। दिन प्रतिदिन यहां पर माहौल ज्यादा खराब होता जा रहा है और राहुल गांधी गृह मंत्री से सवाल पूछ रहे हैं लेकिन वो कह रहे है कि हम गृह मंत्री को बात नहीं करने देंगे।

 

भाजपा सांसद ने कहा कि ये किस तरह की बात करते हैं कहते हैं कि हमें जवाब नहीं चर्चा चाहिए, फिर कहते हैं हमें चर्चा नहीं जवाब चाहिए। ये सिर्फ बातों में उलझा रहे हैं इसका मतलब इनके पास कोई मुद्दा नहीं है।

 

गौरतलब है कि अमित शाह ने मंगलवार को विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर विस्तार से चर्चा करने और उनका जवाब देने की पेशकश की थी। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष गृह मंत्री का भाषण सुनने में दिलचस्पी नहीं रखता। ALSO READ: बिना प्याज-लहसुन की मछली शाकाहारी? संजय निषाद के बयान पर नेहा सिंह राठौर का तंज, मुंबई में घर को लेकर भी बवाल

 

हंगामेदार रहा पूरा मानसून सत्र

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध की वजह से संसद का मानसून सत्र बेहद हंगामेदार रहा। इस सत्र में लोकसभा में 11 बिल बगैर चर्चा के पास हो गए जबकि केवल 1 पर चर्चा हुई। हंगामे की वजह से राज्यसभा की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई।

 

देश में पहली बार भोपाल में बना फ्लोटिंग तिरंगा, बड़े तालाब में निकली नौका तिरंगा यात्रा

देश में पहली बार भोपाल में बना फ्लोटिंग तिरंगा, बड़े तालाब में निकली नौका  तिरंगा यात्रा

भोपाल। 'मेरा रंग दे बसंती चोला..,' जैसे गीतों से राजधानी भोपाल के बोट क्लब का माहौल गुरुवार को देशभक्तिमय हो गया। मौका था स्वतंत्रता दिवस के पहले निकाली जा रही विशाल नौका तिरंगा यात्रा का। बड़े तालाब पर गुरुवार सुबह से यहां जहां देखो, वहां तिरंगा ही तिरंगा दिखाई दिया। धरती-जल-नभ, तीनों जगह तिरंगे के रंगों में रंगे नजर आईं। युवा खिलाड़ियों ने कयाकिंग-कनोइंग से ऐसे-ऐसे करतब किए कि लोग देखते ही रह गए। उन्होंने केनो सलालम शो के जरिये तिरंगे को सलाम किया। इतना ही नहीं, बोट क्लब पर देश में पहली बार तालाब के बीच फ्लोटिंग तिरंगा भी बनाया गया। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश में अपनी तरह की पहली फ्लोटिंग तिरंगा का न केवल शुभारंभ किया, बल्कि खुद भी नौका में बैठकर देश सेवा का संदेश दिया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद थे।  इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज बोट क्लब पर अद्भुत आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकतंत्र फल-फूल रहा है। उनके नेतृत्व में भारत ने दुनिया के सामने अलग पहचान बनाई है। दुनिया का सबसे युवा देश भारत है। भारत अपने सामर्थ्य के साथ, अपनी क्षमता के साथ समृद्धि के मार्ग पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह अद्भुत संयोग है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अलग-अलग राज्य जन-कल्याण का काम कर रहे हैं। 

यूसीसी के साथ बड़े राज्यों में शामिल हो गया एमपी-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि हमारे प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू होने जा रहा है। इसके साथ ही हमारा प्रदेश देश के बड़े राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य में समानता का पवित्र भाव आ गया है। यहां धर्मों के आधार पर व्यक्ति से व्यक्ति के बीच कोई अंतर नहीं होगा। क्या हिंदू-क्या मुस्लमान-क्या पारसी-क्या ईसाई, सभी के लिए समान कानून होगा। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी आजादी के साथ-साथ दुनिया में होने वाली हलचल को देखते हैं तो देश पर गर्व होता है। हमारी तीनों सेनाएं अद्भुत पराक्रम करती हैं। आज देश ने अभूतपूर्व सार्मथ्य हासिल किया है। 

युवाओं ने दिखाई संकल्प शक्ति- सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज की जल में निकाली गई तिरंगा यात्रा अद्भुत है। हमारे खिलाड़ियों ने तिरंगा लेकर अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। इसका रोमांच देखते ही बनता है। यह प्रदर्शन बताता है कि जीवन में समान समय नहीं रहता। संकल्प शक्ति समय के साथ चलती है। ये खिलाड़ी इसी तरह समुद्र में चट्टानी लहरों से टकराते हैं। जीवन-मृत्यु के संघर्ष के बीच अपने संकल्प-कौशल के बलबूते सिद्धता दिखाते हैं। आज देश और दुनिया देख रही है कि नौका के माध्यम से भी तिरंगा यात्रा होती है। आज प्रदेश का अद्भुत रिकॉर्ड बन रहा है। आज यहां चारों तरफ तिरंगा ही तिरंगा दिखाई दे रहा है। परमात्मा करे हमारे देश पर किसी की नजर न लगे। हमारा देश सर्वशक्तिमान हो-सामर्थ्यवान हो। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम सभी देश को आगे बढ़ाएं और अमृत काल की ओर सक्षमता के साथ चलें। मैं इस तिरंगा यात्रा के लिए सभी को बधाई देता हूं।

इंस्‍टाग्राम पर दोस्‍ती, प्‍यार, लिवइन और फिर ब्‍लॉक्‍ड, दो युवतियों ने बताई प्‍यार में मिले धोखे की कहानी, FIR दर्ज

इंस्‍टाग्राम पर दोस्‍ती, प्‍यार, लिवइन और फिर ब्‍लॉक्‍ड, दो युवतियों ने बताई प्‍यार में मिले धोखे की कहानी, FIR दर्ज

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इंदौर में दोस्‍ती, प्‍यार, लिवइन, शारीरिक संबंध और फिर धोखा देने के दो सनसनीखेज मामले सामने आए है। दो युवतियों ने अपने साथियों पर शादी का झांसा देकर दुष्‍कर्म का आरोप लगाया है। मामला इंदौर के भंवरकुआ थाने का है। दोनों मामलों में पुलिस ने बुधवार को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।

एक मामले में आरोपी युवती को लिवइन में रखकर शादी का आश्‍वासन दिया, लेकिन शादी नहीं की। दूसरे मामले में आरोपी ने शादी से इनकार कर पीड़िता का नंबर ब्लॉक कर दिया।

2024 में दोस्‍ती, शादी का वादा: पुलिस के मुताबिक 22 साल की युवती की शिकायत पर अजय पुत्र शंकर मंसारे के खिलाफ रेप की एफआईआर दर्ज की गई है। युवती ने बताया कि अजय उसके इलाके में ही रहता है और 2024 में दोनों की पहचान हुई थी। जुलाई 2024 में अजय ने युवती से कहा कि वह उसे पसंद करता है और उससे शादी करना चाहता है। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे और पिपल्यापाला में किराए का फ्लैट ले लिया।

लेकिन हर बार टाल दिया : पीड़िता के मुताबिक साथ रहने के दौरान दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने। युवती शादी के बारे में बात करती रही, लेकिन अजय हर बार बात टालता रहा। 20 जून 2026 को अजय ने शादी करने से इनकार कर दिया और कमरा छोड़कर चला गया। इसके बाद युवती ने परिजनों को पूरी बात बताई और पुलिस में शिकायत की।

इंस्टाग्राम पर मिले, लिव इन में रहने लगे : दूसरे मामले में शेफ का काम करने वाली युवती की शिकायत पर भंवरकुआ पुलिस ने कमलेश पुत्र राजाराम सोलंकी, निवासी बड़वानी, के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक दोनों की पहचान इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। अगस्त 2025 में कमलेश ने युवती से शादी की बात कही। इसके बाद दोनों तीन इमली इलाके में किराए का कमरा लेकर साथ रहने लगे।

ब्लॉक किया और चला गया : पीड़िता के मुताबिक 10 अगस्त 2026 को कमलेश ने शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने पीड़िता का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया और बड़वानी चला गया। पीड़िता ने कमलेश को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसने उसकी बात नहीं मानी। इसके बाद युवती ने भंवरकुआ थाने पहुंचकर रेप की एफआईआर दर्ज कराई।

मुख्यमंत्री विजय का मोदी सरकार को चैलेंज, तमिलनाडु विधानसभा ने लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखने का प्रस्ताव पारित किया

मुख्यमंत्री विजय का मोदी सरकार को चैलेंज, तमिलनाडु विधानसभा ने लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखने का प्रस्ताव पारित किया

CM C. Joseph Vijay

Tamil Nadu Assembly resolution on delimitation: तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण को लेकर नया घमासान छिड़ गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में केंद्र सरकार से लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या और राज्यों के बीच वर्तमान अनुपात को स्थिर रखने की मांग वाला एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कराया है। 

 

इस प्रस्ताव के जरिए तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि आबादी नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को परिसीमन की वजह से राजनीतिक प्रतिनिधित्व का नुकसान नहीं होना चाहिए। ALSO READ: केंद्र से टकराए तमिलनाडु के सीएम विजय! 'वंदे मातरम' नहीं, अब सबसे पहले गाया जाएगा राज्य गीत 'तमिल थाई वाझथु'

प्रस्ताव की मुख्य मांगें : महिला आरक्षण और 543 सीटें

विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी गई हैं:

  • 543 सीटों का ढांचा बरकरार रहे : लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के 2.2:1 अनुपात को यथावत रखा जाए।
  • 2029 से ही 33% महिला आरक्षण लागू हो : महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की जटिल प्रक्रिया से अलग करके आगामी 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद के विधानसभा चुनावों में तुरंत लागू किया जाए।

महिला आरक्षण कोई रियायत नहीं, संवैधानिक अधिकार है — CM विजय

प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में समान अवसर देना सामाजिक न्याय का विषय है।

  • आंकड़ों का हवाला : मुख्यमंत्री ने बताया कि तमिलनाडु में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहता है, लेकिन पिछली विधानसभा में 234 में से केवल 12 महिला विधायक थीं। हालांकि, मौजूदा विधानसभा में यह संख्या बढ़कर 23 हुई है।
  • देरी पर सवाल : 106वें संविधान संशोधन का जिक्र करते हुए विजय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के कारण महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को मिलने में वर्षों की देरी हो रही है।
  • 131वां संशोधन विधेयक : उन्होंने 2026 के 131वें संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में इस विधेयक को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका था।

दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर मंडराता खतरा

8 अगस्त को तमिलनाडु के सांसदों की बैठक में परिसीमन के संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री विजय के अनुसार, यदि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें 50% तक बढ़ाई जाती हैं और पुनर्गठन 2026 की आबादी के आधार पर होता है, तो दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी में भारी कमी आएगी। ALSO READ: उदयनिधि स्टालिन हिरासत में, CM विजय और अभिनेत्री तृषा पर विवादित टिप्पणी के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

 

प्रतिनिधित्वात्मक अन्याय : तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने राष्ट्रीय हित में जनसंख्या नियंत्रण को सफलता से लागू किया। अब यदि केवल आबादी को आधार बनाकर सीटें तय की गईं, तो यह उन राज्यों के साथ बड़ा अन्याय होगा जिन्होंने नीतियों का पालन किया।

डीएमके का रुख : 'हमने राष्ट्रीय स्तर पर उठाई आवाज'

विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने चर्चा के दौरान कहा कि परिसीमन से पैदा होने वाले खतरों को सबसे पहले DMK ने राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया था।

 

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पहलों को याद दिलाया, जिसमें सर्वदलीय बैठकें बुलाना, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखना और दक्षिण के 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) बनाना शामिल था।
 

उदयनिधि ने कहा कि 16 अप्रैल 2026 को एम.के. स्टालिन द्वारा परिसीमन विधेयक की प्रति जलाने और संसद में इसके विरोध में DMK ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। DMK मौजूदा स्थिति को अगले 25 वर्षों तक स्थिर रखने और महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के पक्ष में है।

AIADMK और विपक्ष का विरोध : 'राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश'

अन्नाद्रमुक (AIADMK) के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।

  • अमित शाह के आश्वासन का जिक्र : पलानीस्वामी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में स्पष्ट आश्वासन दिया था कि सीटें बढ़ने की स्थिति में भी तमिलनाडु का मौजूदा 7.18% प्रतिनिधित्व कम नहीं होने दिया जाएगा।
  • राजनीतिक स्टंट का आरोप : AIADMK का कहना है कि परिसीमन को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिकूल संकेत न होने के बावजूद सरकार केवल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए यह प्रस्ताव लाई है।

प्रस्ताव के मतदान के दौरान AIADMK, PMK, DMDK और BJP ने इसका विरोध किया, जबकि DMK और उसके सहयोगी दलों ने समर्थन दिया। हालांकि, विरोध करने वाले दलों ने भी भाषणों के दौरान महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जल्द लागू करने का समर्थन किया।

7वें दिन भी नहीं मिला अद्वैत, 4500 फीट ऊंची पहाड़ियों में जारी सर्च ऑपरेशन, CDR और मेंटल हेल्‍थ की भी होगी जांच

7वें दिन भी नहीं मिला अद्वैत, 4500 फीट ऊंची पहाड़ियों में जारी सर्च ऑपरेशन, CDR और मेंटल हेल्‍थ की भी होगी जांच

Advait

बेंगलुरु के नेलामंगला स्थित करीब 4500 फीट ऊंची शिवगंगे पहाड़ियों में ट्रेकिंग के दौरान लापता हुए इंदौर के 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय का सातवें दिन भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। अद्वैत की लगातार तलाश जारी है। सर्च ऑपरेशन में 100 से ज्‍यादा पुलिसकर्मी और SDRF के कर्मचारी लगे हुए हैं।

इस बीच पुलिस ने अद्वैत के फोन की सीडीआर यानी कॉल डिटेल और मैसेज भी खंगालना शुरू कर दिया है। उन सारी बातों को टटोला जा रहा है, जिनमें उसकी दोस्‍तों, रिश्‍तेदारों और अन्‍य परिचितों से बात हो रही थी। मंगेतर के साथ उसके अन्य महिला मित्रों और परिचितों से हुए संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। यहां तक कि उसकी मानसिक स्‍थिति को लेकर भी जांच पड़ताल की जा रही है।

कहीं पहाड़ी में फंसा तो नहीं : अब पुलिस ड्रोन के जरिए पहाड़ी के उन हिस्सों को भी खंगाल रही है, जहां रेस्क्यू टीमों का सीधे पहुंचना मुश्किल है। चप्पे-चप्पे की निगरानी कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं अद्वैत किसी दुर्गम हिस्से में फंसा तो नहीं है। DSP उमा रानी के साथ कई टीमें अद्वैत की तलाश और मामले की जांच में जुटी हैं।

महिला मित्रों की चैट खंगाल रही पुलिस : बेंगलुरु पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। शांताला ड्रॉप के पास अद्वैत का मोबाइल और ड्रोन मिलने के बाद पुलिस उसकी मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), SIM कनेक्शन, मंगेतर और महिला मित्रों से संपर्क के साथ ड्रोन की खरीद से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। पुलिस तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़कर अद्वैत के लापता होने से पहले और बाद की पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है।

क्‍या अद्वैत के नाम दूसरा SIM जारी हुआ था : अद्वैत का मोबाइल शांताला ड्रॉप के पास मिला है। पुलिस मोबाइल की लोकेशन, कॉल डिटेल और उसमें मौजूद डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों से यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि अद्वैत के नाम पर इस SIM के अलावा कोई दूसरा SIM जारी हुआ था या नहीं। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसके नाम पर किसी दूसरे नंबर का कनेक्शन तो नहीं था या किसी अन्य व्यक्ति के नाम से जारी SIM का इस्तेमाल अद्वैत कर रहा था। इस पड़ताल का उद्देश्य उन संपर्कों तक पहुंचना है, जिनकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

बैग और स्वेटर मिला : बता दें कि रविवार को तलाशी अभियान के दौरान अद्वैत उपाध्याय का बैग और स्वेटर मिला था। अब पुलिस उसकी डिजिटल गतविधियों के आधार पर डिजिटल मूवमेंट की टाइमलाइन देख रही है। साथ ही पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फोन बंद होने से कुछ समय पहले तक चालू था। ऐसे में सवाल है कि क्या उसका फोन किसी दूसरे के हाथ तो नहीं लग गया है।

अद्वैत की एक फोटो भी मिली : जांच के दौरान बेंगलुरु पुलिस को अद्वैत की एक फोटो मिली है, जिसे एक पर्यटक ने खींची थी। अद्वैत लापता तब हुआ है, जब वह 7 अगस्त को ट्रेकिंग के लिए शिवगंगे की पहाड़ियों पर गया था। उसके लैपटॉप की सर्च हिस्ट्री बहुत कुछ बयां कर रही हैं। 4 अगस्त को भी पहाड़ी पर जाने की संभावना है। ऐसे में पुलिस उसकी डिजिटल गतिविधियों को खंगाल रही है।

एआई सर्च ने बढ़ाया सस्पेंस : बता दें कि अद्वेत ने एएआई से यह भी सवाल किया था कि पहाड़ी से गिरने के बाद इंसान जीवित कितनी देर तक रह सकता है। उसके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में संभावना है कि वह खुद भी नुकसान पहुंचा सकता है। पुलिस की जांच में ये सारे बिंदु हैं। इसके साथ ही पुलिस उसके कॉल डिटेल्स की जांच भी कर रही है। आखिर अद्वैत ने लापता होने से पहले किन-किन लोगों से बात की थी। उसके निजी संपर्कों और रिश्तों की जानकारी भी जुटा रही है।

उत्तराखंड में बन रही देश की 5वीं साइंस सिटी, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में बदलेगी राज्य की तस्वीर

उत्तराखंड में बन रही देश की 5वीं साइंस सिटी, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में बदलेगी राज्य की तस्वीर

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उत्तराखंड में देश की 5वीं साइंस सिटी का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। इससे उत्तराखंड को विज्ञान, नवाचार और तकनीकी क्षेत्र में नई वैश्विक पहचान मिलेगी। 

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि हमारी सरकार विज्ञान, नवाचार और नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कृत संकल्पित है। इसी दिशा में देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है।

 

यह साइंस सिटी विद्यार्थियों और युवाओं के लिए विज्ञान एवं तकनीक की नई संभावनाओं से परिचित होने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी। यहां छात्रों को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, आधुनिक विज्ञान और नवाचार से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से सीखने और अपनी रचनात्मक क्षमता को विकसित करने का अवसर मिलेगा।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की पहली 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति' लागू की है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।

मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

monsoon changing pattern

मुरली कृष्णन

पीढ़ियों से भारत में जीवन और मानसून की लय साथ चलती आई है। लेकिन अब मानसून का मिजाज बदल रहा है। कहीं लंबा सूखा, तो कहीं बादल फटना और बाढ़ की घटनाएं ना सिर्फ जलवायु परिवर्तन, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी बिगाड़ रहे हैं। ALSO READ: जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप

 

आमतौर पर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून के महीने में दस्तक देता है और सितंबर आते-आते विदा लेने लगता है। देश की सालाना बारिश काफी हद तक इस मानसून पर ही निर्भर है।

 

हालांकि, मानसून के आने का समय और बारिश की तीव्रता पहले भी बदलती रही है, लेकिन एक तय पैटर्न रहता था। इसी के हिसाब से किसान, शहर और कारोबारी अपनी तैयारियां करते थे। अब मानसून का यह पुराना पैटर्न बदल रहा है।

 

जुलाई के अंत से लेकर अब तक भारत के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

 

इस साल पूर्वोत्तर राज्य असम इस मानसून की बलि चढ़ा है। यहां बाढ़ से 1।2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। दूसरी तरफ, केरल, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड में भी जान माल का भारी नुकसान हुआ है।

 

यहां दिक्कत ज्यादा बारिश की नहीं है, बल्कि बारिश के पैटर्न की है, जो अब बिल्कुल बदल चुका है। लंबे समय तक सूखा पड़ने के बाद जब अचानक कुछ ही घंटों में तेज बारिश होती है, तो नदियां उफान पर आ जाती हैं, शहरों के ड्रेनेज सिस्टम जवाब दे देते हैं और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।

 

मौसम में हो रही उठापटक को अल नीनो ने और गंभीर बना दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार बदल रहे मौसम की एक बड़ी वजह बदलती जलवायु है। ALSO READ: शार्क बता रही है तूफानों का पता

 

ये नए दौर का मानसून है?

यूके के नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस एण्ड यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक अक्षय देवरस भारतीय मानसून के बारे में कहते हैं कि वह “पूरी तरह एक अलग दौर” में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “तेज बारिश और थमी हुई बारिश, दोनों ही हमेशा से मानसून का हिस्सा रहे हैं। अब फर्क बस इतना है कि इनकी तीव्रता बढ़ रही है।”

 

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे वातावरण गर्म होता है, हवा में नमी जमा होती है। इससे बारिश कई गुना तेज और गंभीर हो जाती है।

 

जलवायु वैज्ञानिक और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव, माधवन नायर राजीवन का कहना है कि मानसून के मिजाज में बदलाव साफ नजर आ रहा है। उनका कहना है कि मानसून के पूरे सीजन में होने वाली कुल बारिश अभी भी लगभग पहले जितनी ही है। लेकिन बारिश कब होती है, कितनी तेजी से होती है और किस इलाके में कितनी बारिश होती है, इसमें साफ बदलाव नजर आ रहा है।

 

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “भारतीय मानसून का मिजाज पहले से काफी बदल गया है। अब कम समय में ज्यादा बारिश होने लगी है, लंबा सूखा पड़ने लगा है और मानसून की बारिश कब, कितनी और किस इलाके में होगी, इसमें भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है।”

 

उनका मानना है कि यह सिर्फ मौसम में होने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “यह मानसून के पूरे सिस्टम में हो रहे एक बड़े बदलाव का संकेत है।” ALSO READ: क्या स्वस्थ रहने के लिए 8 घंटे सोना सच में जरूरी है?

 

गांव और शहर दोनों खतरे में

भारत के किसान आज भी खेती के लिए  काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। लंबे समय में बारिश ना हो, तो बुवाई में देरी हो सकती है और मिट्टी में नमी कम हो सकती है। दूसरी तरफ, एकदम से आने वाली तेज बारिश फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

 

यह मुसीबत बस गांवों तक ही सीमित नहीं है। निर्माण के चलते कंक्रीट का जंगल फैलता जा रहा है और जमीन तक बारिश का पानी पहुंच नहीं पा रहा है।

 

एक और बड़ी समस्या यह भी है कि कई हफ्तों तक सूखा पड़ने के बाद मिट्टी सख्त हो जाती है और पानी को सोख नहीं पाती। ऐसे में जब तेज बारिश होती है, तो पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बाढ़ का रूप ले लेता है।

 

बारिश की दिक्कतों से निपटने के लिए भारत क्या कर रहा है

देओरस ने डीडब्ल्यू से कहा, “सबसे बड़ा खतरा कम समय में होने वाली बेहद तेज बारिश है।” उनका कहना है कि भारत का बुनियादी ढांचा इस खतरे को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। उनके मुताबिक, शहरों की जल निकास प्रणाली और बाढ़ से निपटने वाली व्यवस्था आज भी पुराने पैटर्न पर बनी है। जबकि अब असल मुसीबत कुछ ही घंटों में पूरे शहरों को डूबा देने वाली बारिश है।

 

उन्होंने कहा कि अब सटीक तरीके से मौसम का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन इसका फायदा तभी होगा, जब प्रशासन समय रहते उस चेतावनी पर कार्रवाई भी करे।

 

उनका कहना है कि “तुरंत, सटीक फैसले” लेना जरूरी है, जैसे भारी बारिश से पहले स्कूलों के समय में बदलाव करना, लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना या खतरे वाले इलाकों को बंद कर देना। पर्यावरण कानून विशेषज्ञ और लीगल इनिशिएटिव फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट के मैनेजिंग ट्रस्टी ऋत्विक दत्ता का कहना है कि समस्या सिर्फ बिगड़ते मौसम तक ही सीमित नहीं है।

 

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “अब विज्ञान भी साफ कहता है कि जलवायु परिवर्तन से बारिश का पैटर्न अनियमित हो रहा है। मानसून के दौरान कुछ ही दिनों में बहुत ज्यादा बारिश होती है और उसके बाद लंबे समय तक सूखा पड़ जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि समस्या इसलिए और बढ़ रही है क्योंकि भारत में निर्माण से जुड़े फैसले लेते समय जलवायु परिवर्तन को ध्यान में नहीं रखा जाता।

 

पुणे का उदाहरण देते हुए दत्ता समझाते हैं जैसे राज्य सरकार और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक साल 2030 तक पुणे में बारिश करीब 37 फीसदी बढ़ सकती है। इसके बावजूद शहर की विकास योजनाओं में इस अनुमान को ठीक से शामिल नहीं किया गया है। यहां तक कि नदी किनारे बन रहे रिवरफ्रंट में भी इस खतरे को पर्याप्त तवज्जो नहीं दिया गया है।

 

दत्ता ने कहा, “जलवायु परिवर्तन की वजह से बांध, तटबंध और सड़कें बड़े नुकसान का शिकार हो सकती हैं। फिर भी हम जलवायु परिवर्तन को सिर्फ कांफ्रेंस और वर्कशॉप तक ही सीमित किए हुए हैं।”

 

दत्ता मानते हैं, “हम पर्यावरण को अपने खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं।” दत्ता का कहना है कि भारत में पर्यावरण परियोजनाओं को मंजूरी देते समय जलवायु परिवर्तन के असर को ध्यान में रखना जरूरी नहीं माना जाता है। जाहिर है कि यह एक बड़ी समस्या है और प्रशासन का रवैया दिखाती है।

 

पिछले मानसून हजारों मारे गए

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में जिन 334 दिनों पर नजर रखी गई, उनमें से 331 दिन यानी करीब 99 फीसदी दिनों में भारत के किसी ना किसी हिस्से में चरम मौसम की घटनाएं देखने को मिलीं।

 

इसमें 4,000 से भी ज्यादा लोगों की जान गई, जिसमें करीब 3,000 मौतें मानसून के दौरान हुईं। लगभग 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगातार आठ महीनों तक चरम मौसमी घटनाएं दर्ज की गई।

 

इस संस्था की डायरेक्टर जनरल सुनीता नारायण का कहना है कि अब जलवायु परिवर्तन को देश की विकास रणनीति का अहम हिस्सा बनाना होगा।

 

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की बात नहीं है। भीषण गर्मी, तेज बारिश और विनाशकारी मौसमी घटनाओं के रूप में यह अब हमारे सामने खड़ा है।” उन्होंने आगे कहा, “अब चुनौती जलवायु परिवर्तन को साबित करना नहीं है, बल्कि असली चुनौती अपनी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को इस तरह बदलना है कि हम इसके असर का सामना कर सकें।”

 

वह मानती हैं, “अब शहरों, सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम को पुराने पैटर्न के हिसाब से नहीं बनाया जा सकता।” देश में होने वाला हर निवेश इस सोच के साथ किया जाना चाहिए कि आने वाले समय में मौसम और बिगड़ सकता है।

 

उनका मानना है कि भारत को हर बाढ़ को अलग आपदा मानने से बचना होगा। अब ऐसी योजना बनाने की जरूरत है, जो भविष्य की भीषण मौसमी घटनाओं के अनुसार हो।
 

गंभीर मौसमी घटनाओं से कैसे बचें

भारत मौसम के एक बिल्कुल नए पैटर्न का सामना कर रहा है। पूरे देश में बारिश कम हो सकती है, लेकिन कुछ इलाकों में बाढ़ के हालात बन सकते हैं। दूसरी तरफ कई हफ्तों से बारिश का इंतजार करने वाले किसानों की फसलें कुछ ही घंटों के अंदर तेज बारिश से बर्बाद हो सकती है। तेज बारिश शहरों की पूरी व्यवस्था को भी चरमरा सकती है।

 

जलवायु वैज्ञानिक और पूर्व सरकारी अधिकारी राजीवन ने कहा, “अब सिर्फ इन बदलावों को दर्ज करने और उन पर चर्चा करने से काम नहीं चलेगा। हमें ऐसी ठोस योजनाएं लागू करनी होंगी, जो बदलते मौसम के असर से निपट सकें।”

 

अब शहरों में बाढ़ से निपटने की बेहतर व्यवस्था, खेती के तरीकों में बदलाव, पानी को जमा करने की मजबूत प्रणाली और ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा, जो अचानक आने वाली बेहद तेज बारिश को थाम सके।

 

भारत मानसून या अल नीनो को नियंत्रित नहीं कर सकता और ना ही अकेले ग्लोबल वार्मिंग को रोक सकता है। लेकिन यह जरूर तय कर सकता है कि उसका हर निर्माण, हर प्रणाली और हर योजना भविष्य के मौसम को ध्यान में रखकर तैयार की जाए।