Top News 13 August: संसद सत्र का आखिरी दिन, इमरान खान की मौत का दावा झूठा; IMD का भारी बारिश का अलर्ट

Top News 13 August: संसद सत्र का आखिरी दिन, इमरान खान की मौत का दावा झूठा; IMD का भारी बारिश का अलर्ट

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Top News 13 August : संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन, अभिजीत दिपके ने दावा किया कि सीजेपी का ‘Jantar-Mantar Season 2’ जल्द ही शुरू होने वाला है। पाक सेना ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की मौत संबंधी दावों का खंडन किया। भोपाल में सड़क से गायब हुआ फुटपाथ। मौसम विभाग ने कई राज्यों में जारी किया भारी बारिश का अलर्ट। 13 अगस्त की बड़ी खबरें : 

 

संसद में मानसून सत्र का अखिरी दिन

संसद में मानसून सत्र का आखिरी दिन भी हंगामेदार रहने के आसार है। छात्र आंदोलनकारियों पर लाठी चार्ज और अयोध्या राम मंदिर मामले में विपक्ष के हंगामा की वजह से इस सत्र में सदन की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। राज्यसभा सांसद सुष्‍मिता देव की लूंगी टिप्पणी के विरोध लूंगी में संसद परिसर में प्रदर्शन कर सकते हैं विपक्षी सांसद।

 

जंतर मंतर पर जल्द लौटेगी CJP

Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी के विरोध अभियान के अगले चरण को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी का ‘Jantar-Mantar Season 2’ जल्द ही शुरू होने वाला है। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगला प्रदर्शन कब और कहां होगा और इसमें किन मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी। ALSO READ: Cockroach Janta Party का 'Jantar-Mantar Season 2' जल्द, कौनसे होंगे मुद्दे, अभिजीत दिपके ने प्लान के बारे में क्या बताया

 

इमरान की मौत का दावा झूठा

पाकिस्तानी सेना ने उन खबरों का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि पूर्व पीएम इमरान खान की जेल में मौत हो गई है। सीनियर पाकिस्तानी पत्रकार ने वीडियो संदेश के जरिए दावा किया था कि रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय के 3 वरिष्ठ अधिकारियों ने आशंका जताई है कि इमरान खान की मौत हो गई है। ALSO READ: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की फिर अटकलें! क्या है इस तरह की खबरों की वजह

 

भोपाल में फुटपाथ गायब!

भोपाल के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी के 10 नंबर मार्केट में सरकारी पैसे से बनाए गए फुटपाथ के गायब होने का मामला अब राजधानी के हबीबगंज थाने तक पहुंच गया है। रहवासियों का कहना है कि देश की किसी स्मार्ट सिटी में संभवतः यह पहली ऐसी शिकायत है, जिसमें “गायब हुए फुटपाथ” के लिए जिम्मेदार अतिक्रमणकारियों के साथ-साथ नगर निगम और PWD के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी FIR की मांग की गई है। ALSO READ: फुटपाथ चोरी हो गया साहब! भोपाल में पुलिस से शिकायत, FIR लिखने की मांग

 

IMD का कई राज्यों में भारी बारिश अलर्ट

भारी बारिश से कई राज्य पानी पानी हो गए। नदी-नाले उफान पर है और सड़कों और घरों में पानी घुस गया। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा, बंगाल, जम्मू कश्मीर समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: Weather Update : 5,000 KM का क्लाउड बेल्ट क्यों है खास? क्या है चिंता कारण, IMD ने जारी किया अलर्ट

Airtel ने हटाए 4 प्रीपेड प्लान, 299 रुपए वाला रिचार्ज बंद, अब 349 रुपए में मिलेगा विकल्प

Airtel ने हटाए 4 प्रीपेड प्लान, 299 रुपए वाला रिचार्ज बंद, अब 349 रुपए में मिलेगा विकल्प

भारती एयरटेल (Bharti Airtel) ने अपने प्रीपेड प्लान पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव करते हुए 299 रुपए, 579 रुपए, 619 रुपए और 649 रुपए वाले चार प्लान बंद कर दिए हैं। इनमें 299 रुपए का प्लान काफी लोकप्रिय था। इसके हटने के बाद इस प्लान का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अब ज्यादा कीमत वाले विकल्प चुनने होंगे।

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299 रुपए वाले प्लान की जगह अब 349 रुपए का रिचार्ज

 

एयरटेल के इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर 299 रुपए वाले प्लान के ग्राहकों पर पड़ेगा। अब उन्हें इसके बदले 349 रुपए का प्लान लेना होगा। यानी ऐसे ग्राहकों के लिए रिचार्ज की कीमत में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। हालांकि, कंपनी की ओर से इस बदलाव को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है। मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, एयरटेल का यह कदम Average Revenue Per User (ARPU) यानी प्रति ग्राहक औसत कमाई बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

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199 और 219 रुपए वाले प्लान में कोई बदलाव नहीं

 

एयरटेल ने अपने शुरुआती स्तर के 199 रुपए और 219 रुपए वाले प्रीपेड प्लान को फिलहाल बरकरार रखा है। हालांकि, 299 रुपए वाला प्लान हटने के बाद ग्राहकों के लिए अगला प्रमुख विकल्प 349 रुपए का प्लान रह गया है। बताया जा रहा है कि 299 रुपए वाले प्लान के कई ग्राहक अपनी डेटा लिमिट खत्म होने के बाद अतिरिक्त डेटा टॉप-अप या दोबारा रिचार्ज कराते थे। इसके मुकाबले 349 रुपए वाला प्लान अनलिमिटेड 5G डेटा उपलब्ध कराता है।

 

Airtel के टैरिफ बढ़ाने के संकेत

 

पिछले सप्ताह हुई अर्निंग्स कॉल के दौरान भारती एयरटेल के प्रबंधन ने संकेत दिया था कि कंपनी कम कीमत वाले अनलिमिटेड डेटा प्लान के टैरिफ बढ़ाने की गुंजाइश देख रही है। टैरिफ में बदलाव को लेकर पूछे गए सवाल पर भारती एयरटेल के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा था कि कंपनी जब ‘टैरिफ रिपेयर’ की बात करती है तो उसका मतलब सिर्फ कीमत बढ़ाना नहीं, बल्कि मोबाइल प्लान की पूरी संरचना में बदलाव करना है।

 

विट्टल के मुताबिक, यदि बहुत कम कीमत में अनलिमिटेड डेटा उपलब्ध कराया जाता है तो इससे ARPU की सीमा तय हो जाती है। उन्होंने कहा कि मोबाइल सेवाओं में छोटे, मध्यम, बड़े और एक्स्ट्रा-लार्ज जैसे अलग-अलग स्तर के प्लान होने चाहिए और इसके लिए एक ‘सेंसिबल प्राइस आर्किटेक्चर’ जरूरी है।

 

Airtel का ARPU 264 रुपए पहुंचा

 

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एयरटेल इंडिया का ARPU 5.6 फीसदी बढ़कर 264 रुपए पहुंच गया। एक साल पहले यह 250 रुपए था। कंपनी का ARPU इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा बताया गया है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरटेल के इस कदम के बाद अन्य टेलीकॉम कंपनियां भी अपने प्रीपेड प्लान की कीमतों और संरचना में बदलाव कर सकती हैं। टेलीकॉम इंडस्ट्री में कंपनियां बेहतर रेवेन्यू और प्रति ग्राहक कमाई बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।

 

Airtel का मुनाफा 37.3 फीसदी बढ़ा

 

भारती एयरटेल ने जून तिमाही में टैक्स के बाद मुनाफे (PAT) में 37.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और यह 8,167 करोड़ रुपए रहा। भारत और अफ्रीका कारोबार में मजबूत प्रदर्शन से कंपनी को फायदा मिला। इस दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 18.3 फीसदी बढ़कर 58,539 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल जून तिमाही में 49,462.6 करोड़ रुपए था।

FCRA संशोधन विधेयक 2026 संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया, विपक्ष ने किया विरोध, अल्पसंख्यकों और NGOs को निशाना बनाने का लगाया आरोप

FCRA संशोधन विधेयक 2026 संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया, विपक्ष ने किया विरोध, अल्पसंख्यकों और NGOs को निशाना बनाने का लगाया आरोप

FCRA Amendment Bill 2026

Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को बुधवार को लोकसभा ने 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया। विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सदन में जोरदार विरोध किया। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाने वाला है। विपक्ष ने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग भी की। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनौती दी कि वह विधेयक का एक भी ऐसा प्रावधान बताए, जो किसी अल्पसंख्यक समुदाय के साथ भेदभाव करता हो।

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विपक्ष के विरोध के बीच JPC को भेजा गया बिल

 

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खुद इस विधेयक को विस्तृत जांच के लिए सदन की समिति के पास भेजने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समुदायों को गुमराह करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। इस दौरान विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे। JPC को 2026 के संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

 

NGOs और विदेशी फंडिंग पर बढ़ेगी सरकारी निगरानी

 

यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य देश में गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी फंडिंग पर सरकार की निगरानी को और मजबूत करना है।

 

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह कानून अच्छे काम करने वाले NGOs और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।

 

उन्होंने कहा कि एक तरफ RSS को विदेशी देशों से चंदा मिल रहा है, जबकि दूसरी तरफ सरकार अल्पसंख्यकों और NGOs को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने विधेयक वापस लेने की मांग की।

 

किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज

 

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी को विधेयक के प्रावधानों को लेकर आपत्ति है तो वह संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपनी बात रख सकता है। रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाकर नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खुद विधेयक को विस्तृत जांच के लिए समिति के पास भेजने की मांग की थी।

 

अखिलेश यादव को रिजिजू की चुनौती

 

समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव द्वारा विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी बताए जाने पर रिजिजू ने उन्हें चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव प्रस्तावित कानून का ऐसा एक प्रावधान बताएं, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो। रिजिजू ने कहा कि देश में झूठ फैलाया जा रहा है और संविधान की भावना के अनुरूप नियम-कायदे होने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित FCRA विधेयक में किसी भी अल्पसंख्यक संस्था को निशाना बनाने वाला एक भी प्रावधान नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विधेयक का कोई भी प्रावधान किसी अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ न हो। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य भारत के हर समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

 

31 सदस्यीय समिति करेगी विधेयक की जांच

 

बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल, जो उस समय पीठासीन थे, ने कहा कि सरकार ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग स्वीकार कर ली है। समिति में विधेयक पर विस्तृत और गहन चर्चा होगी। 31 सदस्यीय JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। लोकसभा सदस्यों को स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा सदस्यों को सभापति सीपी राधाकृष्णन नामित करेंगे।

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विधेयक में क्या है खास?

 

प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक में ऐसा प्रावधान है जिसके तहत यदि किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द हो जाता है तो उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जा सकेगा। विपक्षी दलों का कहना है कि विधेयक के कुछ प्रावधान ईसाई NGOs और अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण एवं शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली वैध विदेशी फंडिंग को प्रभावित कर सकते हैं।

 

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। इसका उद्देश्य देश में विदेशी योगदान को नियंत्रित और विनियमित करना है।

 

पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों ने भी उठाई थी चिंता

 

नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा पहले ही केंद्र से विधेयक को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग कर चुके हैं। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर केंद्र के सामने चिंता जताई थी।

 

विधेयक की कुछ अमेरिकी सांसदों ने भी आलोचना की थी और ईसाई संगठनों तथा सिविल सोसाइटी समूहों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। भारत ने इस आलोचना को खारिज करते हुए इसे देश का आंतरिक विधायी मामला बताया था।

 

राज्यसभा में भी JPC को भेजने का प्रस्ताव मंजूर

राज्यसभा ने भी विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश प्रस्ताव को उच्च सदन में ध्वनिमत से पारित किया गया।

फुटपाथ चोरी हो गया साहब! भोपाल में पुलिस से शिकायत, FIR लिखने की मांग

फुटपाथ चोरी हो गया साहब! भोपाल में पुलिस से शिकायत, FIR लिखने की मांग

भोपाल के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी के 10 नंबर मार्केट में सरकारी पैसे से बनाए गए फुटपाथ के गायब होने का मामला अब राजधानी के हबीबगंज थाने तक पहुंच गया है। रहवासियों का कहना है कि देश की किसी स्मार्ट सिटी में संभवतः यह पहली ऐसी शिकायत है, जिसमें “गायब हुए फुटपाथ” के लिए जिम्मेदार अतिक्रमणकारियों के साथ-साथ नगर निगम और PWD के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी FIR की मांग की गई है।

भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर के बीच फुटपाथ चोरी का अनोखा मामला सामने आया है। रहवासियों का आरोप है कि अरेरा कॉलोनी में भूमाफियाओ ने आवासीय भूखंडो पर सिर्फ अवैध मॉल ही नहीं बनाये बल्कि मुख्य बाजार 10 नंबर मार्केट के आसपास की सभी मुख्य सड़को के फूटपाथ चोरी कर लिए है और प्रशासन मूक दर्शक बना बेठा है|

 

अरेरा कॉलोनी के निवासी विवेक त्रिपाठी एवं लवनीश भाटी ने थाना हबीबगंज में शिकायत देकर पूछा है कि आखिर जनता के टैक्स के पैसे से बनाया गया फुटपाथ गया कहां? अब जनता सड़को पर कहा चले, यदि किसी भूमाफिया, भवन मालिक या व्यावसायिक प्रतिष्ठान ने फुटपाथ पर कब्जा किया तो वो कैसे संभव हुआ।

 

रहवासियों का आरोप है कि फुटपाथ धीरे-धीरे पार्किंग, निजी उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों की भेंट चढ़ गया। उनका कहना है कि भूमाफिया अकेले सार्वजनिक जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता—जब तक जिम्मेदार सरकारी तंत्र आंखें बंद न करे।

 

इसलिए शिकायत में केवल अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई की मांग नहीं की गई है, बल्कि नगर निगम और PWD के उन अधिकारियों की भूमिका की आपराधिक जांच कर FIR दर्ज करने की मांग की गई है, जिनकी जिम्मेदारी इन सड़कों और सार्वजनिक फुटपाथों की सुरक्षा की थी।


रहवासियों ने मांग की है कि पुराने नक्शे और रिकॉर्ड निकालकर फुटपाथ की पूर्व स्थिति और वर्तमान स्थिति का मिलान कराया जाए। यदि सरकारी रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो फुटपाथ कब्जाने वालों के साथ उन अधिकारियों को भी आरोपी बनाया जाए, जिनकी लापरवाही, संरक्षण या मिलीभगत से सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा हुआ।

 

विवेक त्रिपाठी एवं लवनीश भाटी ने कहा कि यह केवल फुटपाथ का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति को निजी हाथों में जाने से बचाने का सवाल है। दोषियों पर FIR, अतिक्रमण तत्काल हटाने और फुटपाथ को मूल स्वरूप में बहाल करने तक संघर्ष जारी रहेगा 

 

UP में अग्निवीरों की बंपर भर्ती, 6 बड़े शहरों में रैलियों की तैयारी शुरू, 17 अगस्त से अप्रैल 2027 तक चलेगा अभियान!

UP में अग्निवीरों की बंपर भर्ती, 6 बड़े शहरों में रैलियों की तैयारी शुरू, 17 अगस्त से अप्रैल 2027 तक चलेगा अभियान!

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सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का एक शानदार मौका आ गया है। प्रदेश के 6 प्रमुख शहरों में अग्निवीर भर्ती रैली का आयोजन होने जा रहा है, जिसकी तैयारियां प्रशासन ने तेज कर दी हैं।
 

​यह उत्तर प्रदेश में तीसरी अग्निवीर भर्ती रैली होगी, जो 17 अगस्त से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक चलेगी। भर्ती का आयोजन मेरठ, बरेली, लखनऊ, वाराणसी, आगरा और अयोध्या में किया जाएगा।

​उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने लोक भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को भर्ती स्थलों पर अभ्यर्थियों के रहने, आवागमन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

​भर्ती रैलियों का पूरा शेड्यूल (कब और कहाँ होगी रैली)

  मेरठ

आयोजन की तारीख

17 अगस्त से 9 सितंबर

 

बरेली

14 सितंबर से 30 सितंबर

 

लखनऊ

 

11 जनवरी से 28 जनवरी (2027)

 

वाराणसी

 

2 फरवरी से 27 फरवरी (2027)

 

आगरा

 

4 मार्च से 24 मार्च (2027)

 

अयोध्या

 

29 मार्च से 14 अप्रैल (2027)

 

रैली स्थल पर ले जाने वाले जरूरी दस्तावेज

 

​भारतीय सेना के डायरेक्ट जनरल ऑफ रिक्रूटिंग के अनुसार, अभ्यर्थियों को रैली में शामिल होने के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य है:

 

​मूल (Original) दस्तावेज:

 

​10वीं और 12वीं के शैक्षणिक प्रमाणपत्र

​मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicle Certificate)

​जाति प्रमाण पत्र

​सभी डाक्यूमेंट्स की 2 सेल्फ-अटेस्टेड फोटोकॉपी

​एडमिट कार्ड (Admit Card)

​₹10 के स्टाम्प पेपर पर एफ़िडेविट (अनिवार्य)

​पारदर्शी फोल्डर (सभी कागजात सुरक्षित रखने के लिए)

​ये 9 प्रमाणपत्र भी हैं बेहद जरूरी:

​स्कूल कैरेक्टर सर्टिफिकेट

 

​कैरेक्टर सर्टिफिकेट (चरित्र प्रमाण पत्र)

​अनमैरिड सर्टिफिकेट (अविवाहित होने का प्रमाण पत्र)

​पुलिस कैरेक्टर सर्टिफिकेट

​रेजीडेंस प्रूफ (आवास प्रमाण)

​NCC सर्टिफिकेट (A, B, या C – यदि लागू हो)

​स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)

​रिलेशन सर्टिफिकेट (केवल रिलेशन भर्ती उम्मीदवारों के लिए)

​एफ़िडेविट सर्टिफिकेट (₹10 के स्टाम्प पेपर पर)

 

​प्रशासन सख्त : भीड़ प्रबंधन और इमरजेंसी मेडिकल सेवाएं रहेंगी तैनात

 

​मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि भर्ती के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए पहले से ही ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही, किसी भी आकस्मिक स्थिति या आपातकाल से निपटने के लिए भर्ती स्थलों पर पर्याप्त चिकित्सकीय और मेडिकल सेवाएं हर समय उपलब्ध रहेंगी।

Cockroach Janta Party का ‘Jantar-Mantar Season 2’ जल्द, कौनसे होंगे मुद्दे, अभिजीत दिपके ने प्लान के बारे में क्या बताया

Cockroach Janta Party का 'Jantar-Mantar Season 2' जल्द, कौनसे होंगे मुद्दे, अभिजीत दिपके ने प्लान के बारे में क्या बताया

abhijeet dipke at jantar mantar

Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी के विरोध अभियान के अगले चरण को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी का ‘Jantar-Mantar Season 2’ जल्द ही शुरू होने वाला है। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगला प्रदर्शन कब और कहां होगा और इसमें किन मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी।

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दिपके ने कहा, “कई लोग इंस्टाग्राम पर कमेंट करके पूछ रहे थे कि ‘Jantar-Mantar Season 2’ कब शुरू होगा। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि ‘Jantar-Mantar Season 2’ बहुत जल्द शुरू होने वाला है।”

 

अगले आंदोलन को लेकर नहीं दी जानकारी

 

CJP संस्थापक ने अगले चरण के विरोध प्रदर्शन की तारीख, स्थान या इससे जुड़ी मांगों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। हालांकि, उनके बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी पहले के अभियान के बाद एक बार फिर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

 

 दिल्ली में वॉलंटियर्स मीट को लेकर दबाव का आरोप

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दिपके के ताजा बयान ऐसे समय में आए हैं, जब उन्होंने दिल्ली में CJP की वॉलंटियर्स मीट आयोजित करने में कथित परेशानियों का आरोप लगाया है। दिपके के मुताबिक, पार्टी को बैठक के लिए जगह तलाशने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि कई हॉल मालिकों ने कथित तौर पर कहा कि वे ‘ऊपर से दबाव’ में हैं।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि आखिरकार पार्टी को एक हॉल मिल गया, लेकिन बैठक वाले दिन सुबह हॉल मालिकों को कथित तौर पर धमकियां दी गईं। दिपके का दावा है कि उन्हें CJP की बैठक अपने परिसर में आयोजित नहीं करने की चेतावनी दी गई थी।
 

BJP पर लगाया दबाव बनाने का आरोप

 

CJP संस्थापक ने कथित दबाव के लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से पता चलता है कि BJP देश के युवाओं से “डरी हुई” है। दिपके ने यह भी कहा कि कथित तौर पर दबाव बनाने की ऐसी कोशिशों से CJP का अभियान रुकने वाला नहीं है और पार्टी अपने आंदोलन को आगे भी जारी रखेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से एमपी बनेगा आत्मनिर्भर, 15 हजार से अधिक रोजगार होंगे सृजित: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से एमपी बनेगा आत्मनिर्भर, 15 हजार से अधिक रोजगार होंगे सृजित: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। 'मध्यप्रदेश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति और राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में टोरेंट ग्रुप द्वारा प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। टोरेंट ग्रुप की संचालित एवं विकासाधीन विभिन्न परियोजनाओं से प्रदेश में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जिससे 15 हजार से अधिक युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।' यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को गुजरात के अहमदाबाद में टोरेंट ग्रुप एवं टोरेंट पावर लिमिटेड के चेयरमैन समीर मेहता से भेंट एवं उच्चस्तरीय विचार-विमर्श के बाद कही। इस दौरान आद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सचिव श्री जॉन किंसले और एमडी, एमपीआईडीसी चंद्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे।

 

राज्य की दीर्घकालिक विद्युत आपूर्ति एवं बेसलोड क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए अनूपपुर जिले में टोरेंट पावर द्वारा 1,600 मेगावाट क्षमता की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना स्थापित की जा रही है। लगभग 22,000 करोड़ रुपए के निवेश वाली इस परियोजना से लगभग 7000  प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) के साथ 27 जनवरी 2026 को पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) निष्पादित किया जा चुका है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य पूर्ण हो चुका है और एलएंडटी और टाटा प्रोजेक्ट्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं को कार्य आवंटित कर दिए गए हैं। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त होने के साथ ही वर्तमान में स्थल पर प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियां तेजी से जारी हैं।

पंप्ड स्टोरेज, पवन ऊर्जा और अतिरिक्त थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स का विस्तार-हरित ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देने के क्रम में छिंदवाड़ा जिले में 1,500 मेगावाट क्षमता की पातालकोट पंप्ड स्टोरेज परियोजना पर कार्य चल रहा है, जिसमें 7,500 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है और इससे लगभग 4,000 रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त रतलाम एवं उज्जैन में 250 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा परियोजना विकासाधीन है, जिसमें 2,000 करोड़ रुपए का निवेश और 500 रोजगार शामिल हैं। मंदसौर में समूह की 36 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा इकाई पूर्व से सफलतापूर्वक संचालित है। साथ ही टोरेंट ग्रुप द्वारा 800 मेगावाट क्षमता की एक और अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना पर भी कार्य किया जा रहा है, जिसमें 11,000 करोड़ रुपए के निवेश से 3,500 रोजगार मिलने का प्रावधान है।

 

भावी ऊर्जा जरूरतों के लिए 2,800 मेगावाट की DBFOO निविदा में आमंत्रण-राज्य की बढ़ती विद्युत मांग तथा भविष्य की विश्वसनीय विद्युत उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा वर्ष 2036-37 तक राज्य को लगभग 1,900 मेगावाट अतिरिक्त ताप विद्युत आवश्यकता का आंकलन किया गया है। इसके दृष्टिगत राज्य सरकार द्वारा कुल 2,800 मेगावाट ताप विद्युत क्षमता के क्रय हेतु DBFOO (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट) आधार पर पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टोरेंट पावर को इस विशाल निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।

 

पीथमपुर में फार्मा इकाई का सफल संचालन और समूह का वैश्विक विज़न-ऊर्जा क्षेत्र के साथ टोरेंट ग्रुप द्वारा धार जिले के पीथमपुर में USFDA अनुमोदित अत्याधुनिक फार्मा विनिर्माण इकाई का सफल संचालन किया जा रहा है। 300 करोड़ रुपए के निवेश से संचालित इस इकाई से 400 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अहमदाबाद स्थित टोरेंट ग्रुप की प्रमुख ऊर्जा कंपनी टोरेंट पावर की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 5.1 गीगावाट है और कंपनी वर्ष 2030 तक 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। टोरेंट ग्रुप का यह बहुआयामी निवेश मध्यप्रदेश के सर्वांगीण औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति देगा।

 

ऊर्जा, फार्मा और सिटी गैस क्षेत्र में सक्रिय है टोरेंट ग्रुप-अहमदाबाद स्थित टोरेंट ग्रुप देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल है। समूह की गतिविधियां ऊर्जा, फार्मास्युटिकल्स और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में हैं। समूह की प्रमुख ऊर्जा कंपनी टोरेंट पावर विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में कार्यरत है। कंपनी की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 5.1 गीगावाट है। कंपनी वर्ष 2030 तक लगभग 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य के साथ सौर, पवन, हाइब्रिड, बैटरी स्टोरेज एवं पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं में निवेश कर रही है।

मनमोहन सिंह के अपमान के लिए खुद को भी माफ कर लें मोदी, कोयला घोटाले में क्लीन चिट के बाद सोनिया गांधी का तीखा तंज

मनमोहन सिंह के अपमान के लिए खुद को भी माफ कर लें मोदी, कोयला घोटाले में क्लीन चिट के बाद सोनिया गांधी का तीखा तंज

Sonia Gandhi on Narendra Modi

Sonia Gandhi took aim at PM Modi: अगस्त 2026 में भारतीय राजनीति में एक पुराना और ऐतिहासिक अध्याय एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद कांग्रेस की शीर्ष नेता और संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा और तीखा हमला बोला है। सोनिया ने अपने विशेष लेख के जरिए पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि चूंकि प्रधानमंत्री इन दिनों उन छात्रों को 'माफ' कर रहे हैं, जिन्होंने उन पर हमला किया था, इसलिए उन्हें डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ की गई अपनी 'अमर्यादित टिप्पणी' के लिए खुद को भी माफ कर देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सोनिया गांधी का लेख

29 जुलाई 2026 को उच्चतम न्यायालय ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए डॉ. मनमोहन सिंह को पूरी तरह निर्दोष करार दिया। शीर्ष अदालत ने स्पेशल ट्रायल कोर्ट द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ बिना किसी ठोस आधार के प्रतिकूल टिप्पणियां करने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। इस बड़े अदालती फैसले के बाद सोनिया गांधी ने एक विशेष लेख में लिखा कि यह फैसला 'हमारे सार्वजनिक विमर्श के सबसे दुखद और दर्दनाक अध्यायों' में से एक का अंत है।

 

सोनिया गांधी ने लिखा कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चलाया गया अभियान पूरी तरह से सुनियोजित और योजनाबद्ध था। इसमें नौकरशाही, मीडिया का एक वर्ग, न्यायपालिका, नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) और संघ-भाजपा से जुड़े लोग शामिल थे। वर्षो तक चलाया गया वह 'बेबुनियाद क्रूसेड' आखिरकार शून्य साबित हुआ और डॉ. सिंह हर पैमाने पर निष्कलंक और निर्दोष साबित हुए। इतिहास डॉ. मनमोहन सिंह को एक शांत, सौम्य लेकिन देश के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में से एक के रूप में याद रखेगा। उनकी ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही का रिकॉर्ड वर्तमान सत्ता के कामकाज से पूरी तरह विपरीत है। ALSO READ: 'अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…' मनमोहन सिंह को लेकर SY कुरैशी की नई किताब में बड़ा खुलासा

2017 की विवादित ‘रेनकोट’ टिप्पणी का पुनर्जन्म

सोनिया गांधी ने अपने लेख में 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए उस चर्चित बयान का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि डॉ. मनमोहन सिंह को 'रेनकोट पहनकर नहाने की कला' आती है। सोनिया ने इस बयान को याद दिलाते हुए कहा कि यह 'भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे निचला और दुखद स्तर' था। 
 

उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल एक इत्तेफाक नहीं था कि नरेंद्र मोदी डॉ. सिंह की छवि को धूमिल करने वाले अभियानों के सबसे मुखर समर्थकों में शामिल थे। आत्मचिंतन को लेकर सोनिया ने लिखा कि दान की तरह आत्मचिंतन भी घर से ही शुरू होना चाहिए। आखिरकार डॉ. सिंह पर हमला उनके शानदार शासन के रिकॉर्ड से देश का ध्यान भटकाने की एक हताश कोशिश मात्र थी।

‘माफी’ के बहाने पीएम मोदी पर राजनीतिक तंज

हाल के दिनों में छात्र आंदोलनों और प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों के प्रति व्यक्त किए गए कुछ विचारों के संदर्भ को जोड़ते हुए सोनिया ने लिखा कि चूंकि प्रधानमंत्री इन दिनों उन छात्रों को अपने ऊपर हमला करने के लिए माफ कर रहे हैं, इसलिए शायद वे इस मौके का इस्तेमाल डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ अपनी अशोभनीय बदनामी के लिए खुद को भी माफ करने के लिए भी कर सकते हैं।

विरासत की बहाली और नैतिक प्रहार

सोनिया गांधी का यह हमला केवल पुरानी यादों को ताजा करने तक सीमित नहीं है। भाजपा के भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार करते हुए सोनिया ने आरोप लगाया कि जब कोई नेता विपक्ष में होता है तो भाजपा उस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाती है, लेकिन जैसे ही वह भाजपा के पाले में शामिल हो जाता है, वह पूरी तरह 'साफ' हो जाता है। उन्होंने कहा कि गंभीर और विश्वसनीय आरोपों पर वर्तमान सरकार पूरी तरह आंखें मूंद लेती है। ALSO READ: कोयला ब्लॉक आवंटन मामला, पूर्व PM मनमोहन सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बंद किया केस

क्या है कोयला ब्लॉक आवंटन मामला?

कोयला ब्लॉक आवंटन मामला, जिसे कोयला घोटाला भी कहा जाता है। भारत के सबसे बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों में से एक रहा है। यह मामला 1993 से 2010 के बीच केंद्र सरकार द्वारा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कोयला खदानों (Coal Blocks) के आवंटन में हुई अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी से जुड़ा है। यह मामला 2012 में तब सुर्खियों में आया जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की।

 

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच बिना किसी पारदर्शी बोली के, मनमाने ढंग से निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए। CAG का अनुमान था कि इस पारदर्शी प्रक्रिया का पालन न करने के कारण सरकारी खजाने को लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और चयनित कंपनियों को अनुचित लाभ मिला।

क्या थे मुख्‍य आरोप?

आवंटन के लिए 'स्क्रीनिंग कमेटी' बनाई गई थी, लेकिन उस पर आरोप लगा कि उसने बिना किसी स्पष्ट मानदंड या खुली नीलामी के पसंदीदा कंपनियों को खदानें बांटीं। कई ऐसी कंपनियों को कोयला खदानें आवंटित कर दी गईं जिनके पास न तो कोयला खनन का अनुभव था और न ही वित्तीय क्षमता। नेताओं, अधिकारियों और उद्योगपतियों की मिलीभगत से खदानें हासिल करने और उन्हें आगे मुनाफे पर बेचने के आरोप भी लगे।

Weather Update : 5,000 KM का क्लाउड बेल्ट क्यों है खास? क्या है चिंता कारण, IMD ने जारी किया अलर्ट

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wather update

उत्तरी भारत से लेकर एशिया के बड़े हिस्से तक बादलों का एक विशाल पट्टा सैटेलाइट तस्वीरों में साफ नजर आया है। करीब 5,000 किलोमीटर लंबा यह मॉनसून क्लाउड बेल्ट पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत से होते हुए चीन तक फैला हुआ दिखाई दे रहा है। मौसम की यह सक्रिय स्थिति आने वाले दिनों में क्षेत्र के कई हिस्सों में व्यापक बारिश करा सकती है।

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सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा विशाल बादलों का घेरा

 

सैटेलाइट इमेज में नजर आ रहा यह पूरा क्षेत्र किसी एक विशाल तूफानी बादल का हिस्सा नहीं है। इसके बजाय यह मॉनसून सर्कुलेशन से जुड़ा गहरे संवहन (Deep Convection) और घने बादलों का लंबा क्षेत्र है। इसके भीतर कई गरज-चमक वाले बादलों और बारिश वाले सिस्टम के क्लस्टर मौजूद हैं। यह बादलों का विशाल बेल्ट पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होकर चीन तक फैला हुआ दिखाई दे रहा है। इसकी लंबाई 5,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है।

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सक्रिय मॉनसून से बढ़ी बारिश की गतिविधियां

 

मॉनसून के इस सक्रिय चरण के कारण कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और भारी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर बने थंडरस्टॉर्म क्लस्टर बारिश को बढ़ा सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी देश के कई हिस्सों में व्यापक बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारों का पूर्वानुमान जताया है। उत्तरी भारत के कई इलाकों में भी मॉनसून की सक्रियता के चलते बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

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5,000 KM का क्लाउड बेल्ट क्यों है खास?

मॉनसून के दौरान इस तरह के लंबे बादल क्षेत्र बड़े पैमाने पर नमी और संवहन वाली गतिविधियों का संकेत देते हैं। हालांकि, पूरे बादल क्षेत्र को एक ही तूफानी सिस्टम मानना सही नहीं है। इसके भीतर अलग-अलग बारिश और गरज-चमक वाले सिस्टम सक्रिय हो सकते हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम को प्रभावित करते हैं। आने वाले दिनों में मॉनसून की यह सक्रियता उत्तर भारत समेत कई हिस्सों में बारिश का दौर बढ़ा सकती है।

इंदौर में 450 किलो लो-फैट पनीर जब्त, प्राकृतिक पदार्थों को बढ़ावा देने की मुहिम के चलते कार्रवाई

इंदौर में 450 किलो लो-फैट पनीर जब्त, प्राकृतिक पदार्थों को बढ़ावा देने की मुहिम के चलते कार्रवाई

इंदौर खाने-पीने के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां बडी संख्‍या में एनालॉग पनीर या अमानक वस्‍तुएं खिलाने के साथ ही खाने में मिलावट की जा रही हैं। हाल ही इंदौर के पालदा स्थित उमापति इंडस्ट्रीज पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। यहां से विभाग ने 450 किलोग्राम लो-फैट पनीर जब्त किया और फैक्ट्री में पनीर का निर्माण कार्य तुरंत बंद करवा दिया। अधिकारियों ने पनीर के नमूने लैब में जांच के लिए भेज दिए हैं।

450 किलोग्राम लो-फैट पनीर जब्त: कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 450 किलोग्राम लो-फैट पनीर जब्त किया और निर्माण कार्य तत्काल बंद करा दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। बता दें कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि राज्य में केवल प्राकृतिक दूध से बने पनीर और डेयरी उत्पादों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि एनालॉग पनीर को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। इससे पहले स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने एनालॉग पनीर पर रोक लगाने की घोषणा की थी। जब्त पनीर की अनुमानित कीमत करीब 1.17 लाख बताई गई है।

नियमों का हो रहा था उल्‍ल्‍ंघन : खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पालदा की उमापति इंडस्ट्रीज का निरीक्षण किया, जहां लो-फैट पनीर का निर्माण और पैकिंग चल रही थी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी के अनुसार निरीक्षण में परिसर की ड्रेनेज व्यवस्था सही नहीं पाई गई और दीवारें गंदी थीं। कच्चे माल का भंडारण निर्धारित तरीके से पैलेट्स पर रखने के बजाय अव्यवस्थित मिला। इसके अलावा पैकेजिंग के लेबल पर दर्ज पोषण संबंधी जानकारी की प्रामाणिक जांच रिपोर्ट मौके पर उपलब्ध नहीं थी। सामग्री सूची में पानी के उपयोग का उल्लेख था, लेकिन उपयोग किए जा रहे पानी की जांच रिपोर्ट भी नहीं मिली। निरीक्षण के दौरान परिसर की परिस्थितियां पनीर निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया।