जिन्ना की नापाक चाल और 77 साल का दर्द… 14 अगस्त को क्यों रोता है PoK? जानिए पाकिस्तान की आजादी के दिन ‘काले दिवस’ का पूरा सच

जिन्ना की नापाक चाल और 77 साल का दर्द... 14 अगस्त को क्यों रोता है PoK? जानिए पाकिस्तान की आजादी के दिन 'काले दिवस' का पूरा सच

14 August Black Day in PoK

14 August Black Day in PoK: एक तरफ जहां पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों में जुटा है, वहीं पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने इस दिन को 'ब्लैक डे' यानी 'काला दिवस' के रूप में मनाने का ऐलान किया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नागरिकों और स्थानीय राजनीतिक संगठनों का कहना है कि 13 और 14 अगस्त को वह काला दिवस के रूप में मनाएंगे। उनके लिए यह आजादी का नहीं, बल्कि पाकिस्तान के जबरन कब्जे और शोषण का दिन है।

 

पीओके में में अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान की आजादी के दिन से पहले विरोध-प्रदर्शनों के एक नए दौर की घोषणा की है। उन्होंने 13 और 14 अगस्त को 'काला दिन' करार दिया है। संगठन ने दुनिया भर के कश्मीरियों से अपील की है कि वे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ़ प्रदर्शन करें। इस समूह ने 13 अगस्त को पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ औपचारिक विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। ALSO READ: PoK का सच दिखाया तो भड़का पाकिस्तान! 'अल जजीरा' पर कसा शिकंजा, जानिए क्या है PoK की हकीकत

पाक सेना की फायरिंग में 100 की मौत का दावा

अवामी एक्शन कमेटी के नेता उमर नजीर कश्मीरी ने विदेशों में रह रहे कश्मीरियों से अपील की है कि वे 13 अगस्त को रैलियां करें और PoK में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग और दमन की बात को दुनिया के सामने लाएं। उमर ने दावा किया है कि PoK में हाल ही में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में लगभग 100 कश्मीरी मारे गए। इस कदम का मकसद पाकिस्तान के आजादी के दिन और उससे पहले के दिन को इस इलाके पर इस्लामाबाद के कंट्रोल का विरोध करने के मंच के तौर पर इस्तेमाल करना है। 

 

जम्मू-कश्मीर के इस हिस्से में लंबे समय से पाकिस्तान की हुकूमत और उसकी सेना के खिलाफ गुस्सा सुलग रहा है। आइए समझते हैं आखिर क्या है PoK से जुड़ा पूरा मामला, क्यों वहां के नागरिक पाकिस्तान से सख्त नाराज हैं और क्या है इसका इतिहास? ALSO READ: 'हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं', PoK में प्रदर्शनकारियों का ऐलान, आखिरी अल्टीमेटम से उड़ी शाहबाज और मुनीर की नींद

पाकिस्तान से क्यों नाराज हैं PoK के निवासी?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोग लंबे समय से इस्लामाबाद और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इस नाराजगी की एक नहीं कई वजहें हैं। 

  • मानवाधिकारों का हनन : PoK में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी (ISI) का कड़ा नियंत्रण है। सरकार या सेना के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आम लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया जाता है या उन्हें गायब कर दिया जाता है।
  • आर्थिक शोषण और संसाधनों की लूट : नीलम-झेलम और अन्य जलविद्युत परियोजनाओं से पाकिस्तान भारी मुनाफा कमाता है, लेकिन PoK के लोगों को अत्यधिक महंगे दामों पर बिजली बेची जाती है। स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान अपना खजाना भरता है, जबकि स्थानीय नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसते हैं। 
  • महंगाई और चीजों की किल्लत : क्षेत्र में आटा, बिजली, दवाइयां और साफ पानी जैसी बुनियादी चीजों की भारी किल्लत है। सरकार सब्सिडी खत्म कर रही है, जिससे आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।
  • राजनीतिक स्वतंत्रता की कमी : कहने को PoK का अपना 'राष्ट्रपति' और 'प्रधानमंत्री' होता है, लेकिन असली सत्ता इस्लामाबाद के 'कश्मीर काउंसिल' और पाकिस्तानी थल सेना के हाथ में होती है। PoK के नेता केवल कठपुतली बनकर काम करते हैं।

क्या है PoK का इतिहास? (1947 से अब तक)

PoK (Pakistan Occupied Kashmir) भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य का वह हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में अवैध रूप से कब्जा कर लिया था।

  • 1947 का पाकिस्तानी हमला : 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के समय जम्मू-कश्मीर एक स्वतंत्र रियासत थी, जिसके महाराजा हरि सिंह थे। 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी सेना ने कबायली लड़ाकों के भेष में कश्मीर पर आक्रमण कर दिया।
  • भारत में विलय : जब पाकिस्तानी हमलावर श्रीनगर के करीब पहुंच गए, तब महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ 'इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसिबिलिटी' (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सेना ने कश्मीर पहुंचकर पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे खदेड़ना शुरू किया।
  • सीजफायर और बंटवारा : जब भारतीय सेना कब्जाए गए इलाकों को वापस छुड़ा रही थी, तब यह मामला संयुक्त राष्ट्र (UN) में चला गया। 1 जनवरी 1949 को युद्धविराम (Ceasefire) लागू हुआ। इसके नतीजे में जम्मू-कश्मीर का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में ही रह गया, जिसे आज PoK कहा जाता है।

दो हिस्सों में बंटा है पीओके

पाकिस्तान ने कब्जे वाले कश्मीर को दो हिस्सों में बांट रखा है। आजाद जम्मू और कश्मीर, जिसे आमतौर पर PoK कहा जाता है। इसकी राजदानी मुजफ्फराबाद है। दूसरी ओर, गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान ने 2009 में अलग प्रशासनिक इकाई का दर्जा दे दिया था।

14 अगस्त को क्यों चुना 'ब्लैक डे'?

PoK के स्थानीय नागरिक आंदोलनों (जैसे 'अवामी एक्शन कमेटी') और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि 14 अगस्त 1947 के बाद से ही उनके क्षेत्र की तबाही की नींव पड़ी थी। पाकिस्तान खुद को स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाता दिखाता है, लेकिन PoK की जनता के लिए यह दिन एक दमनकारी शासन की शुरुआत का प्रतीक है। यही वजह है कि इस दिन विरोध प्रदर्शन, रैलियां और काली पट्टियां बांधकर पाकिस्तानी झंडे और सेना के खिलाफ 'ब्लैक डे' मनाया जाता है। 

भारी बारिश से हाहाकार! MP-राजस्थान में नदी-नाले उफान पर, दिल्ली-UP समेत इन राज्यों में IMD का अलर्ट

भारी बारिश से हाहाकार! MP-राजस्थान में नदी-नाले उफान पर, दिल्ली-UP समेत इन राज्यों में IMD का अलर्ट

weather update : 12 august

Weather Update : देश में कई मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से दक्षिण-पश्चिम मानसून तेज है। मध्य प्रदेश, राजस्थान में भारी बारिश की वजह से नदी नाले उफान पर है तो केरल और असम में बाढ़ की वजह से हालात खराब है। मुंबई के कुर्ला में बारिश की वजह से हुए भूस्खलन की वजह से 2 लोगों की मौत हो गई। IMD ने कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ALSO READ: मुंबई के कुर्ला में तड़के बड़ा हादसा, चॉल पर गिरा मिट्टी का पहाड़; 2 की मौत
 

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान, यूपी और बिहार सहित देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और ओडिशा के कुछ जिलों में भी मूसलाधार बारिश होगी। छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम, मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड में भी कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। केरल, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, कर्नाटक और गोवा में भारी बारिश का अलर्ट है।

 

उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उसके आस-पास के इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र की वजह से भारी बारिश हो रही है। मॉनसून ट्रफ अभी राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है। 12 अगस्त के आस-पास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का एक और क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे आने वाले दिनों में पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने में मदद मिल सकती है। इस दौरान 70 Kmph की स्पीड से हवाएं चल सकती हैं।

राजस्थान पानी-पानी

राजस्थान में बुधवार को चित्तौड़गढ़, सलूंबर, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सवाईमाधोपुर समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। लगातार बरसात के कारण चित्तौड़गढ़ का देवलिया बांध छलक गया है। सलूंबर में कलेक्टर आवास के बाहर पानी भर गया तो बांसवाड़ा में सड़कें जलमग्न नजर आई। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल के एक हिस्से में पानी भरने से उसे बंद कर दिया गया है। 14 अगस्त से अगले एक सप्ताह तक राज्य में बहुत कम बारिश की संभावना है।

 

मध्यप्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट

उत्तर पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसून ट्रफ की वजह से पूरे मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश हो रही है। पिछले 3 दिनों से हो रही बारिश की वजह से कई स्थानों पर नदी नाले उफान पर हैं। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत सभी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। 

 

यूपी में कैसा है मौसम?

यूपी में मानसून की चाल बुधवार यानी 12 अगस्त को थोड़ी बदली हुई है। IMD ने आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, गोरखपुर, झांसी, जालौन, ललितपुर, मिर्जापुर, चंदौली और सोनभद्र समेत कई जिलों में बारिश के आसार हैं। अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर, आजमगढ़, बलिया और मऊ में भी बारिश हो सकती है। गोरखपुर और देवरिया में भी हल्की बारिश हो सकती है।

संसद के बाहर अमित शाह के बयान के बाद क्यों भड़के राहुल गांधी? मीडिया पर दागे तीखे सवाल

संसद के बाहर अमित शाह के बयान के बाद क्यों भड़के राहुल गांधी? मीडिया पर दागे तीखे सवाल

Rahul Gandhi

संसद भवन परिसर के बाहर राजनीतिक पारा उस वक्त और चढ़ गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए पत्रकारों के रुख पर ही तीखे सवाल खड़े कर दिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने मीडिया पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का सीधा आरोप लगाया।

1. “जब वे बोलते हैं तब आप चुप रहते हैं”— मीडिया पर तीखे सवाल
संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जब एक पत्रकार ने सवाल पूछना शुरू किया, तो राहुल गांधी ने बीच में टोकते हुए मीडिया के रवैये पर आपत्ति जताई:

•    इंटरप्ट करने का आरोप: राहुल गांधी ने कहा कि जब विपक्ष का कोई नेता बोलता है तो मीडिया उन्हें हर 24 घंटे टोकता (interrupt) है, लेकिन जब सत्ता पक्ष या गृह मंत्री बोलते हैं तो कोई सवाल नहीं पूछा जाता।

•    “चूहे की तरह खड़े हो जाते हैं”: राहुल गांधी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “उनमें ऐसी क्या खास बात है कि पूरा मीडिया उनके सामने चुप होकर खड़ा हो जाता है? जब वे बोलते हैं तो आप उन्हें इंटरप्ट क्यों नहीं करते?”

•    डरने की जरूरत नहीं: देश भर में चल रहे छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जब देश के युवा और छात्र सरकार से नहीं डर रहे हैं, तो मीडिया को भी डरने की जरूरत नहीं है।

2. अमित शाह पर निशाना: “गुब्बारे से हवा निकल चुकी है”
गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी और उनके सुरक्षा घेरे को लेकर राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाया:
“सवाल यह नहीं है कि अमित शाह क्या कहते हैं, हमें इससे फर्क नहीं पड़ता। समझने वाली बात यह है कि वे 20 दिनों तक गायब रहे। उनके घर के बाहर 30-30 गाड़ियां और हजारों पुलिसवाले तैनात रहते हैं ताकि कोई छात्र वहां न पहुंच सके। हवा भरे गुब्बारे से अब गैस निकल चुकी है और वे अंतिम समय में फिर से हवा भरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गुब्बारा फट चुका है।”
— राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष)
राहुल गांधी ने गृह मंत्री की हिम्मत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें सदन में आकर सीधी चर्चा का सामना करने का साहस नहीं है।

संसद के बाहर राहुल गांधी का यह बयान न केवल गृह मंत्री अमित शाह और सरकार पर सीधा हमला है, बल्कि भारत में मुख्यधारा मीडिया की भूमिका और उसकी निष्पक्षता पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। विपक्ष लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकार जनमुद्दों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का सामना करने से बच रही है।

मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव को लेकर गर्माई सियासत, कांग्रेस की मांग, प्रत्यक्ष प्रणाली से हो चुनाव

मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव को लेकर गर्माई सियासत, कांग्रेस की मांग, प्रत्यक्ष प्रणाली से हो चुनाव

भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की तैयारी और इसकी प्रक्रिया और चुनाव प्रणाली को लेकर सियासत तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने छात्रसंघ चुनाव को प्रत्यक्ष तरीके से कराने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव अगर प्रत्यक्ष तरीके से नहीं होंगे तो पार्टी पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। वहीं मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर कहा कि सरकार कोर्ट के निर्णय के अनुसार आगे बढ़ रही है।

प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग?-मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव के आसार बन रहे है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे या किसी अन्य प्रणामी से, इसको लेकर बहस तेज हो गई है। प्रदेश में छात्र संगठनों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्र अपने अध्यक्ष समेत प्रमुख पदाधिकारियों को सीधे वोट देकर चुनें।

कांग्रेस और उसकी छात्र ईकाई एनएसयूआई ने छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रत्यक्ष तरीके से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के निर्देश पर जो छात्रसंघ चुनाव हो रहे है, वह प्रत्यक्ष प्रणाली से हो। अगर चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से नहीं हुए तो कांग्रेस पार्टी, यूथ कांग्रेस और NSUI के साथ मिलकर हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में आंदोलन करेगी। कांग्रेस का मानना है कि प्रत्यक्ष चुनाव से विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का सीधा अधिकार मिलेगा और फीस, छात्र सुविधाओं, परीक्षा, छात्रावास तथा विश्वविद्यालय-कॉलेजों से जुड़े मुद्दों पर निर्वाचित प्रतिनिधि प्रभावी तरीके से आवाज उठा सकेंगे।

वहीं छात्रसंघ चुनाव को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा है कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार कोर्ट के निर्णय के अनुसार आगे बढ़ रही है। वहीं छात्रसंघ चुनाव किस तरीके से होंगे इस पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इसको लेकर छात्र संगठनों से लगातार चर्चा हो रही है और छात्र संगठनों से चर्चा के बाद यह तय किया जाएगा कि चुनाव किस प्रणाली से हो।

छात्रसंघ चुनाव में अब तक क्या हुआ?- मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव आखिरी बार 2017 में हुए थे। इसके बाद करीब नौ साल तक कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नियमित छात्रसंघ चुनाव नहीं हो सके। अब हाईकोर्ट की कार्यवाही और आदेश के बाद चुनाव कराने का रास्ता खुलने की स्थिति बनी है। सरकार ने 2026-27 के सत्र में चुनाव कराने की तैयारी शुरू की है और सितंबर का समय प्रस्तावित बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि छात्रसंघ चुनाव केवल कॉलेज परिसरों तक सीमित मुद्दा नहीं हैं। मध्यप्रदेश में छात्र राजनीति ने लंबे समय से मुख्यधारा की राजनीति को नेतृत्व दिया है। ऐसे में करीब नौ साल के अंतराल के बाद चुनाव होने की संभावना ने भाजपा और कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठनों को सक्रिय कर दिया है। प्रत्यक्ष चुनाव की मांग के बीच सरकार पर जल्द और स्पष्ट निर्णय लेने का दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर सरकार कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कह रही है। नौ साल बाद लौटती छात्र राजनीति में फिलहाल चुनाव कराने पर सहमति का माहौल है, लेकिन चुनाव का तरीका सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बना हुआ है। 
 

संसद में छाया कंगना रनौत का 56 लाख रुपये वाला ‘लग्जरी लुक’: 35 लाख का बैग और रोलेक्स घड़ी बनी चर्चा का विषय

संसद में छाया कंगना रनौत का 56 लाख रुपये वाला 'लग्जरी लुक': 35 लाख का बैग और रोलेक्स घड़ी बनी चर्चा का विषय

Kangana Ranaut

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत अपने बयानों के साथ-साथ अपने खास फैशन सेंस को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दिल्ली में बारिश के बीच संसद परिसर से बाहर निकलते हुए कंगना का एक ऐसा 'लग्जरी लुक' सामने आया, जिसकी कीमत करीब 56 लाख रुपये बताई जा रही है।

पारंपरिक भारतीय हथकरघा (Handloom) साड़ी के साथ दुनिया के सबसे प्रीमियम ब्रांड्स के एक्सेसरीज के इस कॉम्बिनेशन की सोशल मीडिया और फैशन जगत में जमकर चर्चा हो रही है।


क्या-क्या शामिल था कंगना के 56 लाख के लुक में?
कंगना रनौत के इस एलिगेंट पार्लियामेंट अवतार में भारतीय हस्तशिल्प और वैश्विक लग्जरी ब्रांड्स का एक अनूठा संगम देखने को मिला:

1. एरी सिल्क साड़ी (Eri Silk Saree)
कंगना ने पूर्वोत्तर भारत के मणिपुरी ब्रांड NUPI की हल्के नीले (Baby Blue / Pale Blue) रंग की एरी सिल्क साड़ी पहनी थी। इसे उन्होंने एक साधारण सफेद शॉर्ट-स्लीव ब्लाउज और आइवरी सुएड स्लिप-ऑन शूज के साथ स्टाइल किया था।

2. हर्मीस बिर्किन बैग (35 लाख)
पूरे लुक में सबसे ज्यादा ध्यान उनके हाथ में मौजूद काले रंग के Hermès Birkin (टोगो लेदर) हैंडबैग ने खींचा। फैशनेबल और लग्जरी पसंद करने वालों के बीच बिर्किन बैग को स्टेटस सिंबल माना जाता है। टोगो लेदर अपनी स्क्रैच-रेसिस्टेंट और वाटरप्रूफ क्वालिटी के लिए जाना जाता है। इस बैग की बाजार में कीमत करीब 35 लाख रुपये आंकी गई है।

3. रोलेक्स लेडी-डेटजस्ट घड़ी (21 लाख)
कंगना की कलाई पर Rolex Oyster Perpetual Lady-Datejust घड़ी नजर आई, जिसका डायल चॉकलेट ब्राउन रंग का था। 18 कैरेट गोल्ड/स्टील और ऑटोमैटिक क्रोनोमीटर तकनीक वाली इस आइकॉनिक घड़ी की कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई जा रही है।

4. गुड अर्थ की डिजाइनर छतरी (6,100)
दिल्ली की बारिश से बचने के लिए कंगना ने Good Earth ब्रांड का प्रिंटेड छाता ले रखा था। 'रत्नाकर' (हिंद महासागर) थीम पर आधारित ट्रॉपिकल प्रिंट्स और शेवरॉन पैटर्न वाली इस छतरी की कीमत करीब 6,100 रुपये है।


हैंडलूम और हाई-फैशन का अनोखा मिश्रण
संसद में अक्सर महिला सांसद औपचारिक या पारंपरिक लिबास में नजर आती हैं। कंगना रनौत शुरू से ही संसद की कार्यवाहियों के दौरान क्षेत्रीय भारतीय साड़ियों और हैंडलूम वस्त्रों को प्राथमिकता देती रही हैं। हालाँकि, सिंपल सिल्क साड़ी के साथ 35 लाख के बर्किन बैग और 21 लाख की रोलेक्स घड़ी का यह कंट्रास्ट स्टाइल उन्हें संसद की 'फैशन क्वीन' के रूप में स्थापित कर रहा है

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले अहमदाबाद में बड़ा बदलाव, शहर से बाहर होंगे सभी उद्योग

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले अहमदाबाद में बड़ा बदलाव, शहर से बाहर होंगे सभी उद्योग

ahmedabad industries shift

अहमदाबाद शहर को वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) और 2036 के ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत अहमदाबाद नगर निगम (AMC) और औडा (AUDA) की सीमा में स्थित सभी स्थानीय उद्योगों और जीआईडीसी (GIDC) इकाइयों को 2030 तक शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित (शिफ्ट) करने का प्रस्ताव रखा गया है।

 

 ओलंपिक और कॉमनवेल्थ के लिए विशेष मास्टर प्लान

अहमदाबाद को वैश्विक स्तर के स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर योजना बनाई गई है। 2030 कॉमनवेल्थ और 2036 ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से पहले शहर के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और पर्यावरण में सुधार के उद्देश्य से यह नीति बनाई गई है, ताकि अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।

 

 औद्योगिक क्षेत्र का गैर-औद्योगिक क्षेत्र में रूपांतरण

नई योजना के अनुसार, AMC और AUDA की सीमा में आने वाले सभी औद्योगिक क्षेत्रों को गैर-औद्योगिक क्षेत्रों (Non-Industrial Zones) में बदलने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, शहर के भीतर नए उद्योगों की स्थापना पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इतना ही नहीं, वर्तमान में कार्यरत इकाइयों को अपनी सुविधाओं के विस्तार या पुनर्गठन की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।

 

THRIVE योजना और उद्योगों को संपत्ति संबंधी लाभ

शहर से बाहर स्थानांतरित होने के इच्छुक उद्योगों की सहायता के लिए राज्य सरकार ने 'THRIVE' योजना का विकल्प दिया है, जिसे इस वर्ष जून में पेश किया गया था। जो उद्योग अपनी इकाइयों को नई जगह पर ले जाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से दोगुना एफएसआई (FSI) और भूमि-उपयोग (Land Use) में बदलाव सहित कई महत्वपूर्ण प्रोत्साहन और छूट दी जाएगी।

 

 स्थानांतरण के लिए 2030 तक की समय-सीमा

राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को तुरंत बंद करने के बजाय दो से तीन साल तक अपना संचालन जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। इस अवधि के दौरान विवरणों को अंतिम रूप दिया जाएगा और शहर की सीमा में स्थित सभी प्रदूषणकारी उद्योगों को थ्राइव (THRIVE) योजना का लाभ उठाकर 2030 तक शहर के बाहर निर्धारित क्षेत्रों में पूरी तरह से स्थानांतरित होना होगा।

 

 शहरी प्रदूषण घटाने पर विशेष जोर

इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य अहमदाबाद शहर में प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम करना और शहरी पर्यावरण में सुधार लाना है। ओलंपिक जैसे विश्व स्तरीय आयोजन से पहले एथलीटों और पर्यटकों के लिए एक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान करने के प्रयासों के तहत ये सख्त और आक्रामक नियम लागू किए जा रहे हैं।

 

सरकारी विभागों और स्थानीय प्रशासन की कार्यान्वयन योजना

राज्य का शहरी विकास विभाग इस प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। AMC और AUDA दोनों निकायों को एक निश्चित समय-सीमा आधारित योजना लागू करने के लिए कहा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समय रहते शहर के सभी औद्योगिक क्षेत्रों को बाहर स्थानांतरित कर दिया जाए और अहमदाबाद को एक आधुनिक व पर्यावरण-अनुकूल महानगर बनाया जा सके।

जम्मू के राजौरी में 2 दर्जन स्कूल बंद, बच्‍चें घरों में कैद, CRPF तैनात, वजह जानकर चौंक जाएंगे

जम्मू के राजौरी में 2 दर्जन स्कूल बंद, बच्‍चें घरों में कैद, CRPF तैनात, वजह जानकर चौंक जाएंगे

Dogs

जम्‍मू के राजौरी में करीब 2 दर्जन स्‍कूल एक दिन के लिए बंद कर दिए गए। बच्‍चे जब स्‍कूल के लिए तैयार हो रहे थे तो उनके परिजनों को सूचना मिली कि बच्‍चों को स्‍कूल न भेजें। स्‍कूल बंद करने के पीछे दरअसल वजह हैं वहां के आवारा कुत्‍ते।

दरअसल, स्‍थानीय प्रशासन ने निर्देश जारी किए कि स्‍कूल बदं रखे जाएं, क्‍योंकि एक सरकारी हेल्थ सेंटर में कुत्तों के काटने से घायल 6 लोग भर्ती हुए, इसके बाद सोमवार को 3 और लोग भर्ती हुए। इस तरह लगातार कुत्‍तों के काटने से लोग अस्‍पताल में भर्ती हो रहे हैं। प्रशासन ने पुलिस और CRPF के जवानों के साथ-साथ एक एग्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और विलेज डिफ़ेंस गार्ड (VDG) को तैनात करने का आदेश दिया।

दरअसल, इसके लिए पुलिस और CRPF के जवानों को तैनात किया गया। इसके पीछे कोई VIP विज़िट या बॉर्डर खतरा नहीं था। यह फ़ैसला आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए लिया गया था, जिन्होंने कथित तौर पर पिछले दो दिनों में नौ लोगों को काटा था।

बता दें कि सोमवार शाम को एक कुत्ते ने एक शख्‍स को काट लिया था, इसके बाद लोकल गांव वालों ने डंडे से कुत्‍ते को पीटकर मार डाला। ADC के ऑर्डर में कहा गया है कि ये कुत्ते कथित तौर पर अभी भी इलाके में घूम रहे हैं और आम जनता, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बने हुए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में डर और घबराहट फैल रही है।

कुत्‍तों को सुरक्षित पकड़े, उन्‍हें नुकसान न पहुंचाएं : स्कूल बंद करने का आदेश देते हुए, ADC ने कंडी पुलिस स्टेशन के SHO से कहा, “जहां भी ज़रूरत हो, वहां काफ़ी पुलिस वाले तैनात करें, साथ ही CRPF और VDGs/स्थानीय लोगों के साथ मिलकर संदिग्ध पागल/खूंखार कुत्तों को जल्द से जल्द सुरक्षित पकड़ने/ट्रैप करने के लिए, लागू नियमों और एनिमल वेलफेयर प्रोटोकॉल के अनुसार सख्ती से काम करें।”

चीन सदमे में: ‘लॉन्ग मार्च 7A’ रॉकेट में उड़ान भरते ही हुआ बड़ा विस्फोट, ISRO से बराबरी करने में मुंह की खाई

चीन सदमे में: 'लॉन्ग मार्च 7A' रॉकेट में उड़ान भरते ही हुआ बड़ा विस्फोट, ISRO से बराबरी करने में मुंह की खाई

china long march 7A mission failed

चीन के महात्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक बड़ा झटका लगा है। हैनान द्वीप पर स्थित वेनचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड के भीतर चीन का नया और शक्तिशाली 'लॉन्ग मार्च 7A' (Long March 7A) रॉकेट एक भीषण विस्फोट का शिकार हो गया। यह हादसा रॉकेट की उड़ान के प्रथम चरण (First-stage flight) में ही घटित हुआ, जिससे पूरा मिशन पूरी तरह असफल हो गया। ALSO READ: सूर्य ग्रहण से पहले कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, 250 की मौत और 3000 लापता; 21 आफ्टरशॉक से दहशत

 

उड़ान भरते ही आसमान में बना आग का गोला

प्रत्यक्षदर्शियों और लॉन्च के दौरान जारी वीडियो फुटेज के अनुसार, रॉकेट ने लॉन्च पैड से सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी। लेकिन महज कुछ ही सेकंड बाद, जब रॉकेट अपने पहले चरण की उड़ान में ही था, उसमें एक अचानक और तीव्र विस्फोट हुआ। देखते ही देखते आसमान में धुएं का गुबार और आग की लपटें फैल गईं तथा रॉकेट के टुकड़े समुद्र और आसपास के क्षेत्रों में जा गिरे।

 

प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, यह हादसा रॉकेट के पहले चरण में किसी तकनीकी खराबी, थ्रस्ट असंतुलन या ईंधन रिसाव के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि, चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (CNSA) ने अभी तक विस्फोट के सटीक कारणों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ALSO READ: बलूचिस्तान में आजादी का जश्न, पाकिस्तानी प्रतीकों को हटाने का ऐलान, पाकिस्तानी सेना का कड़ा पहरा

 

क्या था मिशन का उद्देश्य?

'लॉन्ग मार्च 7A' रॉकेट चीन की नई पीढ़ी के मध्यम-भारी लिफ्ट रॉकेटों का हिस्सा है। इसे विशेष रूप से उच्च-कक्षा (High-orbit) उपग्रहों, भू-समकालिक कक्षा (GEO) अभियानों और चीन के निर्माणाधीन अंतरिक्ष स्टेशनों तक भारी रसद व पेलोड भेजने के लिए डिजाइन किया गया है। यह विफलता चीन के आगामी अंतरिक्ष कार्यक्रमों और उपग्रह प्रक्षेपण शेड्यूल को प्रभावित कर सकती है।

 

विफलता के मायने और आगे की राह

चीन आमतौर पर अपने अंतरिक्ष हादसों और असफलताओं की जानकारी को सार्वजनिक करने से बचता है या उसमें देरी करता है। लेकिन वेनचांग लॉन्च सेंटर तटवर्ती क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस हादसे को छुपाया नहीं जा सका।

 

अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि इस विफलता के बाद चीन के 'लॉन्ग मार्च' रॉकेट शृंखला की सुरक्षा समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों की एक समिति इस हादसे के डेटा का विश्लेषण करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि खराबी इंजन में थी, सॉफ्टवेयर नियंत्रण में या संरचनात्मक ढांचे में। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक 'लॉन्ग मार्च 7A' की आगामी उड़ानों पर रोक लगने की संभावना है।

झारखंड में 25 बसों से छात्रों की सुरक्षित घर वापसी, प्रशासन ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

झारखंड में 25 बसों से छात्रों की सुरक्षित घर वापसी, प्रशासन ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

jharkhand

झारखंड सरकार ने रांची में छात्र आंदोलन में शामिल होने आए छात्रों को घर भेजने के लिए 25 बसों की व्यवस्था की। प्रशासन द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर इन छात्रों ने घर जाने की इच्छा जताई थी।

 

ऑफिस ऑफ चीफ मिनिस्टर झारखंड ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि छात्र आंदोलन में शामिल होने आए विभिन्न जिलों के छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए जिला प्रशासन ने मंगलवार को 25 बसों की व्यवस्था की। प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर छात्रों की सुगम यात्रा सुनिश्चित की।

 

इसके तहत रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद और गिरिडीह के छात्रों को बसों से उनके गृह जिले भेजा गया। प्रशासन द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर छात्रों ने घर जाने की इच्छा जताई थी।

“छात्रों की बात – छात्रों के साथ”

इससे पहले सीएम सोरेन छात्रों को लिखे खुले पत्र में कहा था कि “छात्रों की बात – छात्रों के साथ” अभियान के तहत अब तक झारखंड के 8,500 से अधिक युवा साथियों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। OMR से लेकर परीक्षा कैलेंडर, स्कोरकार्ड, प्रश्नपत्र, परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, तकनीक के बेहतर उपयोग और JPSC सहित दोनों आयोगों में संवैधानिक दायरे में आवश्यक और जरूरी सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव हमारे पास आ रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि जैसा मैने पहले भी कहा हमारा उद्देश्य केवल समस्याओं पर चर्चा करना ही नहीं है। हम वर्तमान की चुनौतियों का समाधान करते हुए ऐसी परीक्षा व्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं, जो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए और पारदर्शी, निष्पक्ष, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह हो। इसलिए मैं झारखंड के अपने सभी युवा साथियों से फिर अपील करता हूँ कि आप सभी अपने सुझाव देना जारी रखें।

15 अगस्त 2026 पर तिरंगा फहराने से पहले जान लें ये नियम, इन गलतियों से बचना जरूरी

15 अगस्त 2026 पर तिरंगा फहराने से पहले जान लें ये नियम, इन गलतियों से बचना जरूरी

jhanda vandan ke niyam: 80th Independence Day 2026

15 अगस्त भारत के लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा देश के गौरव और अखंडता का प्रतिनिधित्व करता है। इसके सम्मान, उपयोग और संरक्षण के लिए भारत सरकार ने 'भारतीय ध्वज संहिता 2002' बनाई है, जिसका पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।

ALSO READ: Independence Day 2026: आजादी के लिए लड़े ये 10 महान क्रांतिकारी, इनके बलिदान से मिली स्वतंत्रता

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मुख्य अंतर

फहराने का तरीका: 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को झंडे को नीचे से खींचकर ऊपर ले जाया जाता है और फिर फहराया जाता है, जिसे ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहते हैं। वहीं 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को झंडा ऊपर ही बंधा रहता है और उसे खोलकर फहराया जाता है, जिसे झंडा फहराना (Flag Unfurling) कहते हैं।

 

मुख्य अतिथि: 15 अगस्त पर देश के प्रधानमंत्री (केंद्र सरकार के प्रमुख) लाल किले से ध्वजारोहण करते हैं। 26 जनवरी पर राष्ट्रपति (देश के संवैधानिक प्रमुख) कर्तव्य पथ (राजपथ) पर झंडा फहराते हैं।

 

समारोह का स्वरूप: गणतंत्र दिवस पर देश अपनी सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन करता है, जिसमें मुख्य अतिथि भी शामिल होते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन मुख्य आकर्षण होता है।

independance day 2026

तिरंगे के रंग और उनका महत्व

केसरिया: साहस और बलिदान।

सफेद: शांति और सत्य।

हरा: समृद्धि और विकास।

अशोक चक्र: न्याय और निरंतर प्रगति (24 तीलियां)।

ALSO READ: 80वां स्वतंत्रता दिवस 2026: जानिए इस बार की खास तैयारियां और पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण

ध्वज संहिता के अनुसार जरूरी नियम

आकार व अनुपात: ध्वज हमेशा आयताकार होना चाहिए और इसकी लंबाई व चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना अनिवार्य है।

सामग्री: तिरंगा केवल कपड़े (सूती, रेशमी, खादी या पॉलिएस्टर) का होना चाहिए, प्लास्टिक का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।

सही स्थिति: सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होना चाहिए। ध्वज कटा-फटा, गंदा या झुका हुआ नहीं होना चाहिए।

समय: ध्वज सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच फहराया जाता है। यदि रात में फहराना हो, तो उस पर पर्याप्त रोशनी का प्रबंध होना चाहिए।

स्थान व अन्य ध्वज: तिरंगा हमेशा अन्य झंडों से ऊपर और सम्मानजनक स्थान पर होना चाहिए।

 

इन गलतियों से बचें (अपमान पर सजा का प्रावधान)

  • तिरंगे का उपयोग कपड़ों, सजावट, मेजपोश या किसी वस्तु/व्यक्ति को ढकने के लिए नहीं किया जा सकता।
  • इसे कभी जमीन से नहीं छूने देना चाहिए और इस पर कुछ भी लिखना मना है।

 

नोट करें: 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971' की धारा 2 के तहत तिरंगे का अनादर या अपमान करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।