कट्टरपंथ के विरोधी संत कबीर को हिंदुओं ने पूजा, मुसलमान उन्हें दूर से छूना भी नहीं चाहते : CM योगी

CM Yogi Sant Kabirnagar: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को संत कबीरनगर में खलीलाबाद व मेंहदावल विधानसभा क्षेत्र की 684 करोड़ से अधिक लागत की 201 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। सीएम ने आमजन को आश्वस्त किया कि आप डबल इंजन सरकार को आशीर्वाद दीजिए, विकास कार्यों में कमी नहीं होगी। इसके बाद उन्होंने बेबाकी से संत कबीर के प्रति दो पक्षों की धारणा रखी। कहा कि निर्गुण धारा के संत कबीर ने जितना मुस्लिम कट्टरपंथ के खिलाफ कहा, उतना ही हिंदु कट्टरपंथ के खिलाफ भी कहा, लेकिन हिंदुओं ने उन्हें पूजा जबकि मुसलमान उन्हें दूर से भी नहीं छूना चाहते। 

संत कबीर दास की वाणी कर रही समाज का मार्गदर्शन

सीएम योगी ने कहा कि यह जनपद संत कबीर के नाम पर है। उन्होंने जाति-पाति फैलाने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए समाज को बांटने वालों से सावधान किया था। यही कारण है कि सैकड़ों वर्ष बाद उनकी वाणी आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रही हैं। संत कबीर दास पाखंड के खिलाफ लड़ने के लिए मगहर आए थे। लोगों में मान्यता थी कि मगहर में मरने पर नर्क मिलता है, लेकिन उन्होंने कहा कि स्वर्ग और नर्क कर्मों पर निर्भर करता है। अच्छे कर्म, लोककल्याण, सदाचार, कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले को कहीं भी स्वर्ग प्राप्त हो सकता है। उन्होंने साबित किया कि यह भी स्वर्ग पाने की भूमि है। 

आंकड़ों के साथ बताई देश में आई प्रगति

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी व अखिलेश यादव को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पता नहीं ये लोग पढ़े-लिखे भी हैं या नहीं। इनकी हास्यास्पद बातें ही इन्हें कठघरे में खड़ा करती हैं। आंकड़े खुद देश में विकास व बदलाव की कहानी बताते हैं। 2014 के पहले देश में 16 आईआईटी थे, आज 23  हैं (44 प्रतिशत बढ़ोतरी)।  आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 22 हो गई (69 फीसदी की बढ़ोतरी)। 2014 के पहले प्रधानमंत्री कौशल विकास जैसी व्यवस्था अस्तित्व में ही नहीं थी। आज देश भर में 600 केंद्र संचालित हैं।

राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के माध्यम से अनवरत नेटवर्क को बढ़ाने का काम हो रहा है। 2014 से पहले 7 एम्स थे,  आज 23 हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 431 से बढ़कर 818 हो गई (93 फीसदी की वृद्धि), एमबीबीएस की सीटें 51,348 से बढ़कर 1,28,926 हो गईं (151 प्रतिशत की वृद्धि)। मेडिकल कॉलेज की पीजी सीटें 2014 से पहले 31,185 थीं, आज 85,822 हैं यानी 175 फीसदी की वृद्धि। 1947 से 2014 तक देश में 47.15 करोड़ रोजगार का सृजन हुआ। मोदी सरकार में 17.18 करोड़ की वृद्धि के साथ यह आंकड़ा 64.33 करोड़ तक पहुंचा है। 2014 से पहले 500 से भी कम स्टार्टअप थे, अब 2.23 लाख से अधिक हैं। देश में स्टार्टअप का नया ईको सिस्टम तैयार हुआ है। 2014 तक देश में चार यूनिकॉर्न थे, आज इनकी संख्या 125 हुई है।

केवल राजनीति कर रहे अखिलेश व राहुल 

सीएम ने कहा कि अखिलेश व राहुल गांधी केवल राजनीति कर रहे हैं। 2014 के पहले इनके दलों ने मेडिकल कॉलेज बनाने में रुचि ही नहीं ली तो बच्चा प्रवेश कहां ले पाता। इनके समय में नौकरियों में डकैती पड़ती थी, लेकिन अब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हुआ तो संपत्ति जब्त करने के साथ ही आजीवन कारावास की सजा दिलाएंगे। यहां भी जीरो टॉलरेंस की नीति दिखेगी। हमारे पास डेमोग्रोफिक डेविडेंट के रूप में 56-60 फीसदी युवा शक्ति है। इसकी स्किलिंग के लिए डबल इंजन सरकार ने कार्य को बढ़ाया। युवाओं की स्किलिंग, रोजगार, स्टार्टअप का इको सिस्टम, आईआईटी, एम्स, मेडिकल कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट सेंटर युवाओं के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के माध्यम बने हैं। 

मुख्यमंत्री ने दी सावन की शिवरात्रि की बधाई

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को सावन की शिवरात्रि की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी शिवालयों में भारी भीड़ है। संतकबीरनगर में तामेश्वरनाथ धाम, मेरठ में बाबा औघड़नाथ, गाजियाबाद में दूधेश्वर महादेव मंदिर, बागपत में पुरा महादेव, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम, मार्कंडेय महादेव मंदिर में लाखों श्रद्धालु देवाधिदेव महादेव पर जलाभिषेक कर श्रद्धा निवेदित कर रहे हैं।

बदलते यूपी की कहानी कह रहा बदलता संतकबीरनगर

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने मगहर में संत कबीर एकेडमी का निर्माण, सौंदर्यीकरण किया है। संत कबीर से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर शोध बढ़ाए गए। बदलता संतकबीरनगर बदलते उत्तर प्रदेश की कहानी कह रहा है। विकास के कार्यों से आमजन के जीवन में परिवर्तन लाना और क्षेत्र, विकास खंड, विधानसभा क्षेत्र और जनपद का विकास कराना हमारे जनप्रतिनिधियों का भाव है। हम आमजन के जीवन में प्रगति लाते हुए समृद्धि के नए सोपान को छूते हुए आत्मनिर्भर और विकसित उत्तर प्रदेश के सारथी बनेंगे, जिससे 2047 के पहले देश विकसित व आत्मनिर्भर भारत की कल्पना को साकार कर सके। 

बच्चों की जिंदगी को लेकर सशंकित रहती थी माताएं

सीएम ने कहा कि कांग्रेस व सपा के भ्रष्ट आचरण से कताई मिल बंद हो गई। उसे चालू करने के लिए कार्ययोजना प्रारंभ हो रही है। यह सीजन गोरखपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, कुशीनगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा के बच्चों के लिए भय और दहशत का कारण बनता था। हर मां सशंकित रहती थी कि मस्तिष्क ज्वर (नवकी बीमारी) न जाने किस बच्चे को निगल लेगी। कांग्रेस व चार बार सरकार बनाने वाली समाजवादी पार्टी कुछ नहीं कर पाई, लेकिन हमने इस बीमारी को समाप्त किया। कोई माफिया जैसे नौजवान के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता, वैसे ही अब मस्तिष्क ज्वर भी नहीं है। कांग्रेस व सपा ने यूपी को ‘बीमारू’ बनाया। इनके पाप और भ्रष्टाचार का खामियाजा आमजन, नौजवान, बच्चों को भुगतना पड़ता था। वे असमय काल कलवित होते थे। हमने बीमारी भी समाप्त की और माफिया को भी। 

अब लखनऊ से ही देख लेता हूं यहां की सुरक्षा 

सीएम ने 2017 से पहले के बिगड़े माहौल पर चर्चा करते हुए कहा कि त्योहारों के समय कभी खलीलाबाद, मेंहदावल, धनघटा में दुर्गापूजा पंडाल, मूर्ति विसर्जन, रामनवमी की शोभायात्रा को बढाने के लिए आना पड़ता था, लेकिन अब लखनऊ से ही देखता हूं कि पंडाल व मूर्ति सुरक्षित है। अब बेटी-व्यापारी को गुंडा परेशान नहीं कर सकता, क्योंकि उसे पता है कि वह जेल जाएगा या जहन्नुम। पैसा पहले भी था, लेकिन वह संत कबीर एकेडमी के लिए नहीं, बल्कि कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल पर खर्च होता था। 

जल्द होगा बैजूनाथ मंदिर का विकास

सीएम ने कहा कि हमारी देवाधिदेव के प्रति आस्था है। हम विरासत का सम्मान करते हैं,  इसलिए तामेश्वर नाथ कॉरिडोर की बात हो रही है। प्रभावित लोगों को मुआवजा देने के साथ ही हम उन्हें बसाने की भी व्यवस्था करेंगे। उनका सहयोग मिला तो भावी पीढ़ी के लिए उत्तम धाम का निर्माण होगा। हमने धर्मार्थ कार्य विभाग से कहा कि जल्दी से प्रस्ताव मंगाकर क्षतिग्रस्त हुए बैजूनाथ धाम मंदिर के लिए कार्य कराएं। यह कार्य आपकी आस्था को सम्मान कराने वाली सरकार ही करा पाएगी। जिनके मन में सम्मान का भाव नहीं है, वे छात्रवृत्ति हड़पने के साथ ही विकास कार्यों, नौजवान की नौकरी में लूट और किसानों की योजनाओं में भ्रष्टाचार करते थे। 

लैंडबैंक तैयार होते ही संत कबीरनगर में बनेगा विकास प्राधिकरण

सीएम ने सपा व कांग्रेसियों को आईना दिखाते हुए कहा कि 9 वर्ष में संत कबीरनगर में 95000 परिवारों को आवास मिला। साढ़े तीन लाख गरीबों के घर में शौचालय बने। 3 लाख किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि मिली। वृद्धावस्था, दिव्यांगजन, निराश्रित महिला पेंशन का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में 1.10 करोड़ परिवारों को सुविधा मिल रही है। सड़कें, बाईपास, बस स्टेशन, बहराइच से बांसी होते हुए खलीलाबाद तक बनने वाली रेल लाइन, ये सब विकास के आधार हैं। इससे बेहतर कनेक्टिविटी होगी। जैसे ही लैंडबैंक तैयार होगा, वैसे ही संत कबीरनगर में विकास प्राधिकरण का गठन होगा। 

हमने मेडिकल कॉलेज बनवाए, सपा-कांग्रेस ने क्या किया

सीएम ने सपा व कांग्रेस नेताओं से पूछा कि आपने अपने शासनकाल में क्या किया। गरीब का बच्चा बीमारी से मरता था तो आप मौन रहते थे। कानों में जूं नहीं रेंगती थी। पहले गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज था, आज एम्स भी बन गया। कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, बस्ती, संत कबीरनगर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, गोंडा, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, अमेठी, अंबेडकर नगर, अयोध्या, जौनपुर, मीरजापुर, चंदौली, सोनभद्र आदि जनपदों में मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। जब नीयत साफ होती है तो नीति बन जाती है और निर्माण भी हो जाता है। जब बच्चों को मंच मिला तो बच्चे यहीं पढ़-लिखकर कार्य कर रहे हैं। गोरखपुर के गीडा में 50 हजार से अधिक नौजवानों को नौकरी व रोजगार मिला है। स्किल डेवपलेमेंट के सेंटर बन रहे हैं। 

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम, विधायक अंकुर राज तिवारी, अनिल त्रिपाठी, गणेश चंद्र चौहान, विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश, संतोष सिंह, पूर्व सांसद अष्टभुजा शुक्ल, इंद्रजीत मिश्र, प्रवीण निषाद, जिला पंचायत प्रशासक बलिराम यादव, भाजपा की जिलाध्यक्ष नीतू सिंह आदि मौजूद रहे।

आजादी के रंग से संवर रही 30 हजार महिलाओं की जिंदगी, हर घर के लिए बना रहीं तिरंगा

Yogi Government Har Ghar Tiranga: आजादी के उत्सव में इस बार उत्तर प्रदेश की 30 हजार ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता का रंग भी शामिल है। स्वतंत्रता दिवस के लिए प्रदेश में फहराए जाने वाले तिरंगे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए कमाई का बड़ा जरिया

Yogi Government Har Ghar Tiranga: आजादी के उत्सव में इस बार उत्तर प्रदेश की 30 हजार ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता का रंग भी शामिल है। स्वतंत्रता दिवस के लिए प्रदेश में फहराए जाने वाले तिरंगे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए कमाई का बड़ा जरिया बने हैं। योगी सरकार ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए छह हजार महिला स्वयं सहायता समूहों की करीब 30 हजार महिलाओं को दो करोड़ राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन तिरंगों में से 1.90 करोड़ का निर्माण पूरा हो चुका है। अब इन्हें ग्राम पंचायतों और अन्य संस्थाओं के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।

 

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) को दो करोड़ राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का लक्ष्य मिला है। इसके लिए प्रदेश भर के स्वयं सहायता समूहों को काम सौंपा गया है। मिशन से जुड़ी महिलाएं सिलाई से लेकर तिरंगे को अंतिम रूप देने तक के काम में जुटी हैं। वर्तमान में 1.90 करोड़ तिरंगे तैयार किए जा चुके हैं।

छह हजार समूह, 30 हजार महिलाएं और दो करोड़ तिरंगे

हर घर तिरंगा अभियान का यह मॉडल एक साथ दो उद्देश्यों को साध रहा है। एक तरफ स्वतंत्रता दिवस पर घर-घर राष्ट्रीय ध्वज पहुंचाने की तैयारी हो रही है तो दूसरी तरफ गांवों की महिलाओं के हाथ में बड़े पैमाने पर काम पहुंचा है। करीब छह हजार स्वयं सहायता समूहों की 30 हजार महिलाओं को इससे सीधे जोड़ा गया है। तिरंगों का निर्माण पूरा होने के बाद इन्हें ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों और अन्य संस्थाओं को सौंपा जाएगा। वहां से ये तिरंगे हर घर तिरंगा अभियान के तहत लोगों तक पहुंचेंगे।

लखनऊ में महिलाओं के साथ संवाद कर परखी गई गुणवत्ता

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने मंगलवार को लखनऊ के चिनहट विकासखंड की ग्राम पंचायत जुग्गौर और सिकन्दरपुर पहुंचकर तिरंगा निर्माण को लेकर निरीक्षण लिया। उन्होंने महिलाओं के साथ संवाद कर उनके काम और गुणवत्ता को देखा। यहां तुलसी मां स्वयं सहायता समूह, छोटे साहब स्वयं सहायता समूह और बजरंगबली स्वयं सहायता समूह को 1.50 लाख राष्ट्रीय ध्वजों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया है। इसमें से करीब 1.30 लाख से अधिक तिरंगों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

राष्ट्रभक्ति के साथ महिलाओं की आत्मनिर्भरता : अरुण कुमार

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि हर घर तिरंगा अभियान केवल राष्ट्रभक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का भी प्रभावी माध्यम बना है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने परिश्रम और सामूहिक प्रयास से राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने के साथ आत्मनिर्भर भारत में भी योगदान दे रही हैं।

 

योगी सरकार का प्रयास इन महिलाओं को केवल तिरंगा निर्माण तक सीमित रखने का नहीं है। उन्हें वर्षभर आय देने वाली गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी भी साथ-साथ चल रही है। आजीविका मिशन विभिन्न विभागों के साथ मिलकर महिला समूहों को मसाला और खाद्य प्रसंस्करण, सोलर ड्रायर, सिलाई एवं परिधान निर्माण, अगरबत्ती, डेयरी, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन और हस्तशिल्प जैसे उद्यमों से जोड़ रहा है।

घर-परिवार की जिम्मेदारी के साथ-साथ देशसेवा

अभियान की खासियत यह है कि स्वतंत्रता दिवस के लिए गांवों में पहुंचने वाले राष्ट्रीय ध्वजों के निर्माण में स्थानीय महिलाओं की सीधी भागीदारी है। जिन हाथों में अब तक घर-परिवार की जिम्मेदारी थी, उन्हीं हाथों से तैयार तिरंगे प्रदेश भर में घरों और प्रतिष्ठानों पर फहराए जाएंगे।

चारधाम यात्रा ने बनाया नया रिकॉर्ड, 114 दिनों में 47 लाख पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या, CM धामी बोले- सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

पिछले वर्ष के मुकाबले यात्रियों की संख्या 4.68 लाख अधिक

तीर्थयात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : सीएम धामी

 

उत्तराखण्ड में मानसून की बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यात्रा को नियंत्रित और आवश्यकता के अनुसार रोककर संचालित कर रही है, लेकिन तीर्थयात्रियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। 114 दिनों में ही दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में साढ़े चार लाख से अधिक है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद राज्य आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से आपदा प्रबंधन पर नजर रखे हुए हैं। चारों धामों और यात्रा पड़ावों में यात्रियों के ठहरने, खाने और अन्य सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों की मदद के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है।

 

प्रदेश सरकार के बेहतर आपदा प्रबंधन और इंतजामों के चलते यात्रा नया कीर्तिमान बनाने की ओर बढ़ रही है। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। सोमवार 10 अगस्त तक इस यात्राकाल के 114 दिनों में कुल 47 लाख 02 हजार 703 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि बीते वर्ष 2025 में इतनी ही अवधि में 42 लाख 34 हजार 147 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 04 लाख 68 हजार 556 अधिक है। चारों धामों में अब तक की कुल संख्या की बात करें तो बद्रीनाथ में 16 लाख 12 हजार 112, केदारनाथ में 14 लाख 50 हजार 116, गंगोत्री में 07 लाख 37 हजार 629 और यमुनोत्री धाम में 06 लाख 62 हजार 347 यात्री दर्शन कर चुके हैं। जबकि हेमकुंट साहिब में 02 लाख 40 हजारे 499 श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं।

 

चारों धामों में एक दिन में पहुंचे 15 हजार से अधिक श्रद्धालु

 

मौसम लगातार खराब होने और प्रशासनिक अलर्ट के बावजूद सोमवार को 15 हजार 376 श्रद्धालु चारधाम दर्शन को पहुंचे। इनमें सर्वाधिक 9559 यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 4170, गंगोत्री में 1204 और यमुनोत्री धाम में 443 श्रद्धालुओं न दर्शन किए।

 

बद्रीनाथ पहुंचे 16.12 लाख से अधिक श्रद्धालु

 

भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों को श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। 23 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा सोमवार 10 अगस्त को 110 दिन की अवधि पूर्ण कर चुकी है। इस दौरान 16 लाख 12 हजार 112 श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम में शीश नवा चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 03 लाख 50 हजार 192 अधिक तीर्थयात्री दर्शनों को पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ष 04 मई 2025 को बद्रीनाथ यात्रा का श्रीगणेश हुआ था। तब 21 अगस्त यानी 110 दिन में यह आंकड़ा 12 लाख 61 हजार 280 था।

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिलाधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू हो सके। भूस्खलन या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए गए हैं। श्रद्धालुओं को मौसम के मिजाज को देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।

Gen Z के बाद Gen Alpha का आंदोलन, Hamirpur में सड़क की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट को घेरा

देश में Gen Z के बाद अब Gen Alpha का प्रदर्शन सामने आया है। उत्तरप्रदेश के हमीरपुर जिले से यह खबर सामने आई है। यहां बच्चों ने स्कूल तक पक्की सड़क की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया।  बच्चों का यह विरोध दिखाता है कि देश अब रुकने वाला नहीं है और नई पीढ़ी अपने अधिकारों व बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल पूछ रही है।

करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे इन लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर धरना- प्रदर्शन शुरू कर दिया और डीएम से मुलाकात करने की मांग पर अड़ गए। करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद बच्चों को सड़क बनवाने का आश्वासन मिला, तब वे घर लौट गए। हालांकि, बच्चों की जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी। 

 

हमीरपुर के बच्चों का यह प्रदर्शन भी एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है- क्या स्कूल जाने के लिए बच्चों को आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आंदोलन करना पड़ेगा?

अयोध्या राम मंदिर में 500 वर्षों में पहली बार बदला सावन झूलनोत्सव का नियम, जानिए कब झूलेंगे रामलला झूला?

​ayodhya ram mandir sawan jhulanotsav: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस बार सावन का झूलनोत्सव बेहद खास और भव्य होने जा रहा है। करीब 498 साल (लगभग 500 वर्ष) के इतिहास में पहली बार रामलला की झूला परंपरा में एक बड़ा बदलाव किया गया है। ​अब तक झूलनोत्सव की शुरुआत नाग पंचमी से होती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत रामलला पहली बार सावन शुक्ल तृतीया (15 अगस्त) से झूले पर विराजेंगे। इस बीच, श्रावण मास में अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्‍धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि देखी गई है। 

इस बार झूलनोत्सव में क्या होगा खास?

  • ​शुरुआत : 15 अगस्त की शाम 7 बजे से।
  • ​अवधि : यह उत्सव लगातार 12 दिनों तक चलेगा।
  • लाइव प्रसारण : पहली बार देश-विदेश के श्रद्धालु घर बैठे रामलला के झूलनोत्सव का सीधा (Live) प्रसारण देख सकेंगे।

पहली बार निकलेगी रामलला की 'पालकी यात्रा'

  • ​भूतल पर विराजमान रामलला के उत्सव विग्रह को विधि-विधान के साथ पालकी में विराजमान कराया जाएगा।
  • ​यह पालकी यात्रा परिसर में स्थित कुबेर टीला तक जाएगी, जहां भगवान का पूजन-अर्चन कर उन्हें झूला विहार कराया जाएगा।

सांस्कृतिक संध्या और सावन के गीत

  • ​झूलनोत्सव के दौरान रोजाना शाम को राम दरबार में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
  • ​विख्यात कलाकार रामलला को सावन और झूलनोत्सव से जुड़े पारंपरिक गीत सुनाएंगे।

​परकोटे के शिव मंदिर में पूरे सावन अनवरत जलाभिषेक

​श्रीराम जन्मभूमि परिसर के परकोटे में स्थित शिव मंदिर और कुबेर टीला पर भोले बाबा के जलाभिषेक के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। ​शिवलिंग के ठीक ऊपर छिद्रयुक्त पात्र लगाया गया है, जिससे पूरे सावन अनवरत जलधारा गिरती रहेगी। ​यह प्रक्रिया केवल रात्रि में भोले बाबा के शयन के समय रुकगी और सुबह पुनः शुरू होगी। 

​धर्म समिति सदस्य राजकुमार दास के अनुसार, मंदिर की पूजा और धार्मिक व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए आचार्य इंद्रदेव मिश्र को धार्मिक अनुष्ठानों का व्यवस्थापक बनाया गया है।

अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब

​सावन के महीने में रामलला के दर्शन के लिए प्रतिदिन लगभग 1 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए ट्रस्ट ने व्यवस्थाएं और कड़ी कर दी हैं।

अचानक लापता हुआ इंदौर का इंजीनियर, लैपटॉप में मौत से जुड़े AI वीडियो, गायब होने से पहले हुई थी मंगेतर से बात

इंदौर में एक खौफनाक घटना सामने आई है। एक इंजीनियर अचानक लापता हो गया है। बताया जा रहा है कि लापता होने से पहले उसने अपनी मंगेतर से बात की थी। हैरान करने वाली बात है कि उसके लैपटॉप से मौत से जुडे कुछ एआई वीडियो मिले हैं।

दरअसल, बेंगलुरु के नेलामंगला स्थित शिवगंगे पहाड़ियों में ट्रैकिंग के लिए गए इंदौर के 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय का पांचवें दिन भी कोई सुराग नहीं मिला है। शुक्रवार सुबह पहाड़ी पर जाने से पहले उन्होंने करीब 8:30 बजे अपनी मंगेतर से फोन पर बात की थी। इसके कुछ देर बाद मोबाइल बंद हो गया और परिवार से संपर्क टूट गया।

अद्वैत परिवार के इकलौते बेटे हैं। उनके पिता प्रमोद उपाध्याय इंदौर में प्रोफेसर थे और 2016 में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई थी। फिलहाल परिवार में अद्वैत और उनकी मां ही हैं। अद्वैत लंबे समय से बेंगलुरु में एक फाइनेंस कंपनी में बतौर इंजीनियर काम कर रहे थे।

अद्वैत की मां बेटे के लापता होने के बाद बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के गायब होने के बाद से उन्हें उसकी चिंता सता रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बेंगलुरु पुलिस को जितनी जानकारी है, उतनी ही जानकारी परिवार के पास भी है। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल इस स्थिति में ज्यादा बात नहीं कर पा रही हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि अद्वैत किराए की बाइक से शिवगंगे पहाड़ियों की तलहटी तक पहुंचे थे। उन्होंने बाइक एक दुकान के बाहर खड़ी की और पैदल पहाड़ी की ओर चले गए।

रास्ते में करीब 10 CCTV कैमरों में उन्हें पहाड़ी की तरफ जाते देखा गया। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। रविवार से स्थानीय पुलिस, SDRF, डॉग स्क्वॉड और ड्रोन की मदद से पहाड़ी और आसपास के इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में एक बार फिर रामपुर ने मारी बाजी

CM Yogi Adityanath

CM Dashboard Ranking News: योगी सरकार द्वारा पिछले साढ़े नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की जुलाई माह की रैंकिंग में एक बार फिर रामपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं शाहजहांपुर ने दूसरा और बरेली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। रामपुर, शाहजहांपुर और बरेली के जिलाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है।  

रामपुर ने 10 में से 9.58 अंक प्राप्त कर बाजी मारी

रामपुर डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं।

 

उन्होंने बताया कि जुलाई माह में सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से जिले की 59 योजनाओं की मॉनीटरिंग की गई। इसमें से 56 कार्यक्रमों में जिले ने ए ग्रेड प्राप्त किया। जिले ने वैकल्पिक ऊर्जा, ऊर्जा, कृषि विभाग, समाज कल्याण, पंचायती राज, लोक निर्माण विभाग, नियोजन विभाग, ग्राम्य विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पशुपालन, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, मत्स्य विभाग, उद्योग विभाग, सहकारिता एवं सिंचाई के कार्यक्रमों में शत-प्रतिशत लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए ए श्रेणी प्राप्त की है। सीएम डैशबोर्ड की जुलाई माह की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.58 अंक प्राप्त हुए। इसी के साथ एक बार फिर रामपुर ने सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा रामपुर पिछले कई माह से सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग में टॉप टेन में जिलों में बना हुआ है।

शाहजहांपुर ने 9.43 अंक हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया

शाहजहांपुर के जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शाहजहांपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही सीएम डैशबोर्ड के जरिये मिलने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण तरीके से त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की जुलाई माह की रैंकिंग में शाहजहांपुर को 10 में से 9.43 अंक प्राप्त हुए। इसी के साथ शाहजहांपुर ने प्रदेशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं बरेली ने 9.40 अंक हासिल कर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

टॉप टेन जिलों में अंबेडकरनगर, मैनपुरी और आजमगढ़ ने स्थान प्राप्त किया

सीएम डैशबोर्ड की जुलाई की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें अंबेडकरनगर ने 9.34 अंक हासिल कर चौथा, मैनपुरी ने 9.30 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह आजमगढ़ ने 9.27 अंक प्राप्त कर छठवां, महाराजगंज ने 9.25 अंक प्राप्त कर सातवां, बुलंदशहर और बागपत ने बराबर-बराबर 9.23 अंक हासिल कर आठवां स्थान प्राप्त किया है जबकि लखीमपुर खीरी ने 9.20 और सुल्तानपुर के साथ सोनभद्र ने बराबर-बराबर 9.18 अंक प्राप्त कर टॉप टेन में जगह बनायी है।

बलूचिस्तान में आजादी का जश्न, पाकिस्तानी प्रतीकों को हटाने का ऐलान, पाकिस्तानी सेना का कड़ा पहरा

Balochistan Independence Day

Balochistan Independence Day: कुछ समय पहले ही खुद को स्वतंत्र घोषित करने वाले बलूचिस्तान के बलूच राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता-समर्थक समूह 11 अगस्त को 'बलूच राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाते हैं। 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकूमत से कलात/बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा हुई थी, जिसे मार्च 1948 में पाकिस्तान ने जबरन अपने क्षेत्र में मिला लिया था। इस अवसर पर एक ओर बलूच जनसमूह स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा है, तो दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा बल सख्त पहरेदारी और सैन्य अभियानों के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हैं।

बलूच संगठनों द्वारा जारी 5 प्रमुख निर्देश

बलूच राष्ट्रीय संघर्ष और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' और बलूच अलगाववादी संगठनों (जैसे BLA समर्थकों) ने जनता से निम्नलिखित 5 प्रमुख कदम लागू करने की अपील की है:

  • बलूच राष्ट्रीय ध्वज फहराना : पाकिस्तानी झंडे को हटाकर सभी आवासीय घरों, दुकानों और व्यावसायिक परिसरों पर बलूचिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज अनिवार्य रूप से लगाना।
  • बलूच राष्ट्रगान का गायन : सार्वजनिक आयोजनों और घरों में बलूचिस्तान के घोषित राष्ट्रगान 'मां चुकैन बलोचानी' को गाना व बजाना।
  • पाकिस्तानी प्रतीकों को हटाना : सरकारी इमारतों, सड़कों और चौक-चौराहों से पाकिस्तानी झंडों व प्रतीकों को उतारकर बलूच ध्वज स्थापित करना।
  • 11 अगस्त को आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस मानना : 14 अगस्त (पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस) का पूर्ण बहिष्कार करते हुए 11 अगस्त को ही बलूचिस्तान का वास्तविक स्वतंत्रता दिवस मनाना।
  • पाकिस्तानी प्रशासन का बहिष्कार : पाकिस्तानी सरकार व सेना द्वारा आयोजित किसी भी 14 अगस्त समारोह में शामिल न होना और आम हड़ताल (शटडाउन) का कड़ाई से पालन करना।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मान्यता की मांग

स्व-घोषित 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' और प्रमुख बलूच नेताओं (जैसे मीर यार बलूच) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में कूटनीतिक मान्यता देने का आग्रह किया है। ALSO READ: पाकिस्तान से आजाद हुआ बलूचिस्तान! 11 अगस्त को मनाएगा स्वतंत्रता दिवस, क्या भारत देगा मान्यता?

पाकिस्तानी सेना का क्रैकडाउन और सैन्य ऑपरेशन

बलूच स्वतंत्रता दिवस के समारोहों को रोकने और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने पूरे बलूचिस्तान में कड़ा पहरा लगा रखा है। क्वेटा, कलात, खुजदार सहित राज्य के कई प्रमुख हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बलूचिस्तान के संवेदनशील इलाकों में पाकिस्तानी वायुसेना के हेलीकॉप्टर और ड्रोन लगातार हवाई गश्त कर रहे हैं।

 

ऑपरेशन 'रद्द-उल-फ़ितना-3' : पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा पंजगुर (Panjgur) जिले के सरकानी और छेडगी इलाकों में खुफिया जानकारी के आधार पर सैन्य ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें 5 विद्रोहियों को मारने का दावा किया गया है। इससे एक दिन पहले भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में 15 उग्रवादी मारे गए थे।

क्या है बलूचिस्तान से जुड़ा पूरा मामला?

1947 में भारत के विभाजन के समय बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित 'कलात' रियासत ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। मार्च 1948 में पाकिस्तानी सेना के दबाव के बाद कलात के शासक ने पाकिस्तान में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। बलूच लोगों का आरोप है कि यह विलय धोखे और सैन्य बल के दम पर कराया गया था, जिसे वे आज तक स्वीकार नहीं करते।

 

विवाद और संघर्ष के मुख्य कारण : बलूचिस्तान प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना और खनिज संसाधनों से समृद्ध है। इसके बावजूद यह पाकिस्तान का सबसे गरीब और कम विकसित क्षेत्र है। स्थानीय बलूच नागरिकों का मानना है कि पंजाब और केंद्र सरकार उनके संसाधनों का इस्तेमाल करती है, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं देती। दूसरी ओर, अरब सागर पर स्थित ग्वादर पोर्ट CPEC का प्रमुख केंद्र है। बलूच समूहों का विरोध है कि इस परियोजना से बाहरी लोगों (विशेषकर चीन और गैर-बलूच पाकिस्तानियों) को फायदा हो रहा है और स्थानीय लोगों को उनकी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है।

 

यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों (ISI) पर बलूच कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों के 'जबरन गायब होने' और हत्याओं के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। 'बलूच यकजेहती कमेटी' जैसे संगठन इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन करते हैं। बलूचिस्तान में कई अलगाववादी संगठन सक्रिय हैं, जिनमें बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) सबसे प्रमुख है। ये समूह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, चीनी नागरिकों और CPEC से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निशाना बनाते हैं।

इंदौर की TCS अधिकारी से रेप और ब्लैकमेलिंग, महेंद्र था और बाद में निकला शाहरुख

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इंदौर से सटे देवास में लव जिहाद और ब्लैकमेलिंग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें आरोपी ने IT कंपनी TCS में काम करने वाली एक अधिकारी को अपना शिकार बना लिया। पीड़ित युवती ने हिंदू युवक महेंद्र सिंह चंद्रावत उर्फ शाहरुख बेग पर शादी का झांसा देकर रेप करने, निजी फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने और 10 लाख रुपये ठग लेने का गंभीर आरोप लगाए हैं। 

आरोपी शाहरुख बेग को पिछले दिनों इंदौर राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने पकड़कर देवास के सेंट्रल कोतवाली थाने की पुलिस के हवाले किया था, जहां पुलिस ने दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

युवती ने इंदौर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए मीडिया को पूरी कहानी बताई और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। युवती के आरोपों के मुताबिक, उसकी आरोपी से पहली मुलाकात पुणे के एक रेस्टोरेंट में हुई थी। 

महेंद्र चंद्रावत बताया था नाम : आरोपी ने शुरुआत में अपना नाम महेंद्र चंद्रावत बताते हुए खुद को देवास का रहने वाला और ई-कॉमर्स, प्रॉपर्टी सहित कई कारोबार से जुड़ा बताया। युवती का आरोप है कि बातचीत बढ़ने के बाद आरोपी ने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। इसके बावजूद दोस्ती के नाम पर आरोपी उसे देवास स्थित अपने घर ले गया। वहां घर में कोई नहीं होने का फायदा उठाकर आरोपी ने उसकी इच्छा के खिलाफ संबंध बनाए।

युवती का दावा है कि बाद में उसे आरोपी की वास्तविक पहचान और उसके मुस्लिम होने की जानकारी मिली। युवती का आरोप है कि इसके बाद आरोपी शाहरुख उर्फ महेंद्र चंद्रावत ने निजी फोटो और वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और अलग-अलग तरीकों से करीब 8 से 10 लाख रुपए ले लिए। शाहरुख ने उसके नाम पर कई लोन और मोबाइल फोन लिए, जिनकी EMI का भुगतान वह अभी भी कर रही है। इंदौर के राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने आरोपी शाहरुख बेग उर्फ महेंद्र चंद्रावत को पकड़कर देवास की सेंट्रल कोतवाली पुलिस के हवाले किया। देवास पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है।

क्या बिना संसद में परिसीमन बिल पास हुए बदल जाएंगी लोकसभा की सीटें? जानिए संविधान का वो नियम जो कोई नहीं बताता

Delimitation Lok Sabha Seats

Delimitation Lok Sabha Seats: भारत की भावी राजनीति और संसदीय व्यवस्था को लेकर इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा में है—क्या लोकसभा की सीटों का नए सिरे से बंटवारा करने के लिए संसद से नया संवैधानिक संशोधन पारित कराना अनिवार्य है?

अमूमन यह माना जा रहा है कि जब तक सरकार संसद में दो-तिहाई बहुमत से परिसीमन (Delimitation) से जुड़ा विधेयक पास नहीं करा लेती, तब तक सीटों का गणित नहीं बदलेगा। परंतु भारत के संविधान में एक ऐसा प्रावधान पहले से मौजूद है, जो किसी भी नए संशोधन के बिना भी सीटों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को कानूनी रूप से आगे बढ़ा सकता है। ALSO READ: परिसीमन विधेयक पर संसद में सस्पेंस, क्या अगले 10 दिनों में अमित शाह चलने वाले हैं मास्टर स्ट्रोक?

Delimitation Lok Sabha Seats

सरकार ने अप्रैल 2026 में परिसीमन और सीटों की संख्या (संभावित 850 तक) बढ़ाने से संबंधित एक संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया था, जो पारित नहीं हो सका। लेकिन संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई नया संशोधन पास नहीं भी होता है, तब भी 2027 की जनगणना के आंकड़े जारी होते ही अनुच्छेद 81 और 82 के तहत परिसीमन की वैधानिक प्रक्रिया स्वतः शुरू की जा सकती है। ALSO READ: परिसीमन पर 5 बड़े बयान : स्टालिन से सोनिया गांधी तक किसने क्या कहा, उत्तर-दक्षिण विवाद क्यों गरमा रहा है?

Delimitation Lok Sabha Seats

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2027 की जनगणना से 2029 के चुनाव तक : समय की चुनौती

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3. राज्यों के बीच बदलेगा सीटों का समीकरण: उत्तर बनाम दक्षिण
यदि मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन होता है, तो 1973 से चला आ रहा सीटों का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों का बंटवारा 1971 की जनसंख्या पर आधारित है।

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इसके साथ ही, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत महिलाओं के लिए 33% आरक्षण भी इसी परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही प्रभावी होगा।

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 'जेरिमैंडरिंग' का जोखिम और निष्पक्षता की आवश्यकता

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इसीलिए, नए परिसीमन आयोग की निष्पक्षता और सभी राजनीतिक घटकों का विश्वास हासिल करना इस पूरी प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील हिस्सा होगा।

संविधान में यह स्पष्ट व्यवस्था है कि 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन रोका नहीं जा सकता। बिना किसी नए संवैधानिक संशोधन के भी राज्यों के बीच सीटों का पुनर्गठन, सीमाओं का निर्धारण और महिला आरक्षण का क्रियान्वयन संभव है। असली चुनौती यह होगी कि 'एक व्यक्ति, एक वोट' के लोकतांत्रिक अधिकार को लागू करते समय भारत के संघीय ढांचे और जिम्मेदार राज्यों के हितों की रक्षा कैसे की जाए।