केंद्र से टकराए तमिलनाडु के सीएम विजय! ‘वंदे मातरम’ नहीं, अब सबसे पहले गाया जाएगा राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’

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Tamil Thai vazhthu vs Vande Mataram: केंद्र सरकार के निर्देशों और भाषाई-सांस्कृतिक पहचान की बहस के बीच तमिलनाडु सरकार ने एक बड़ा विधायी कदम उठाया है। राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत में अब सबसे पहले 'तमिल थाई वाझथु' (तमिलनाडु का राज्य गीत) अनिवार्य रूप से गाया जाएगा।

 

तमिलनाडु विधानसभा ने सोमवार (10 अगस्त 2026) को सर्वसम्मति से इस संबंध में एक सरकारी प्रस्ताव पारित कर दिया। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पहले जारी किए गए उस निर्देश के सीधे उलट है, जिसमें राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की शुरुआत में सबसे पहले 'वंदे मातरम' गाने को कहा गया था।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का बड़ा बयान : “तमिल केवल भाषा नहीं, हमारी आत्मा है”

विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य गीत की महत्ता और तमिल संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया:

  • सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक : मुख्यमंत्री ने कहा कि 'तमिल थाई वाझथु' तमिल भाषा और वहां की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।
  • संवैधानिक अधिकार : प्रस्ताव में कहा गया कि यह कदम भारतीय संविधान द्वारा दिए गए भाषाई व सांस्कृतिक अधिकारों के पूरी तरह अनुरूप है।
  • प्राचीन सभ्यता : प्रस्ताव में तमिल भाषा को विश्व की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए कहा गया कि यह सभ्यता विश्व की महानतम परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है।

तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा- 'तमिल हमारे लिए केवल संवाद का माध्यम या एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारा जीवन, हमारी भावना और हमारी पहचान है।'

क्या था केंद्र सरकार का निर्देश और विवाद की वजह?

केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस विवाद की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक पत्र से हुई थी:

  • गृह मंत्रालय का पत्र (9 जुलाई 2026) : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर टिप्पणी की थी कि राज्य स्तरीय आधिकारिक व शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत 'वंदे मातरम' के गायन से होनी चाहिए।
  • विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह का वाकया : इस निर्देश के बाद तिरुनेलवेली स्थित मनोन्मनीयम सुंदरनार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शुरुआत में 'वंदे मातरम' गाया गया था, जिस पर राज्य में राजनीतिक व सांस्कृतिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।
  • विधानसभा में प्रस्ताव का पलटवार : इस घटनाक्रम के जवाब में राज्य सरकार ने विधानसभा का विशेष प्रस्ताव लाकर 'तमिल थाई वाझथु' को ही पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता देने का वैधानिक ढांचा तय कर दिया।

तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित यह सर्वसम्मत प्रस्ताव केंद्र और राज्य के बीच भाषाई स्वायत्तता और संघवाद (Federalism) से जुड़ी एक नई बहस को जन्म देता है। जहां केंद्र सरकार राष्ट्रीय प्रतीकों व राष्ट्रगीत के एकरूप पालन पर बल दे रही थी, वहीं तमिलनाडु सरकार ने अपने राज्य गीत और क्षेत्रीय सांस्कृतिक अस्मिता को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिया है।

पूर्वी सिंहभूम के 7238 बच्चों के लिए प्रशासन का राहत भरा कदम

East Singhbhum News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में जन्म प्रमाणपत्र न होने की वजह से आधार कार्ड से वंचित 7,238 बच्चों के लिए राज्य प्रशासन ने राहत भरा कदम उठाया है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस समस्या के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इन कैंपों के माध्यम से पहले बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनाए जाएंगे, जिसके बाद ऑपरेटरों की प्रतिनियुक्ति कर उनके आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।

 

बैठक के दौरान उपायुक्त ने शिक्षा व्यवस्था और छात्र कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं की गहन समीक्षा की।

  • छात्र उपस्थिति पर सख्ती : चाकुलिया, डुमरिया और मुसाबनी प्रखंडों में कम उपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए अगली बैठक तक सभी प्रखंडों में न्यूनतम 70% उपस्थिति सुनिश्चित करने का सख्त लक्ष्य दिया गया है।
  • रिटायर्ड शिक्षकों की सेवा : 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए निजी स्कूलों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की मदद ली जाएगी। बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाया जाएगा।
  • आवासीय विद्यालय और योजनाएं : कस्तूरबा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों के अधूरे भवनों का निर्माण जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, बीते एक महीने में खुले 919 बैंक खातों की प्रगति को और बढ़ाने तथा बची हुई साइकिलों का तुरंत वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र बच्चे तक पहुंचे।

‘बादल फाड़’ तबाही: भारी बरसात से हिमाचल-उत्तराखंड से लेकर मप्र और राजस्थान में नदी-नाले उफान पर, पहाड़ों में रेड अलर्ट

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देश के कई राज्यों में मानसून का रौद्र रूप जारी है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से सड़कें और संपर्क मार्ग टूट चुके हैं, तो वहीं मैदानी राज्यों—मध्य प्रदेश और राजस्थान में मूसलाधार बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है।

राज्यवार मौसम रिपोर्ट और मैदानी हालात
1. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड (पहाड़ी राज्यों में रेड/ऑरेंज अलर्ट)
•    हिमाचल प्रदेश: सिरमौर, मंडी और शिमला जिलों में भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण सड़कें बाधित हो चुकी हैं। कई नदियां और स्थानीय नाले खतरनाक स्तर से ऊपर बह रहे हैं।

•    उत्तराखंड: देहरादून, चमोली, उत्तरकाशी और नैनीताल जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा मार्गों पर भूस्खलन (Landslide) की वजह से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है।

2. मध्य प्रदेश (उफान पर नर्मदा, चंबल और बेतवा)

मध्य प्रदेश: पूर्वी और पश्चिमी मप्र के जिलों (जैसे मंडला, बालाघाट, नरसिंहपुर, भोपाल) में रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश से नर्मदा, बेतवा और क्षिप्रा नदियां खतरे के निशान के पास पहुंच गई हैं।
•    निचले इलाकों में पानी भरने के कारण कई बांधों के गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है।

3. राजस्थान (पूर्वी जिलों में भारी बारिश)
•    राजस्थान: कोटा, झालावाड़, उदयपुर और जयपुर संभाग के जिलों में मानसून ट्रफ के असर से भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है।

•    छोटी नदियां और नाले उफान पर आने से ग्रामीण इलाकों का संपर्क शहरों से कट गया है।

Fact-Check: क्या यह वास्तव में 'बादल फटना' (Cloudburst) है?
सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में भारी तबाही को देखते हुए 'बादल फटने' की खबरें आ रही हैं। आइए मौसम विज्ञान के पैमाने पर इसकी पड़ताल करें:

•    मौसम विज्ञान (IMD) का पैमाना: मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी सीमित क्षेत्र (लगभग 20-30 वर्ग किमी) में 1 घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर (10 सेमी) या उससे अधिक बारिश होती है, तो उसे तकनीकी रूप से 'बादल फटना' (Cloudburst) कहा जाता है।

•    स्थिति का विश्लेषण: पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के कुछ दूरस्थ इलाकों में अत्यधिक बारिश और मलबे के अचानक बहाव (Flash Floods) के कारण बादल फटने जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है। हालाँकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थिति स्थानीय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के कारण हुई अत्यधिक भारी बारिश (Very Heavy Rainfall – 12 से 20 सेमी) की है।

सुरक्षा और बचाव हेतु सावधानियां
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक इन राज्यों में सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। यदि आप प्रभावित क्षेत्रों में हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

1.   नदी और नालों के करीब न जाएं: उफान वाले पुल-पुलियाओं को पार करने का जोखिम न उठाएं।
2.   यात्रा से बचें: पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों की ओर यात्रा टालें।
3.   आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें: सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के बजाय मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।

किसानों के लिए खुशखबरी, गुजरात सरकार स्थापित करेगी प्राकृतिक खेती के ‘मॉडल कैंपस’, ट्रेनिंग के साथ बीज भी मिलेंगे

Gujarat Natural Farming: राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसका दायरा बढ़ाने के लिए गुजरात सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य के चार जिलों में आधुनिक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (Center of Excellence) स्थापित करने के लिए वर्ष 2026-27 के बजट से ₹20 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इन केंद्रों के माध्यम से प्राकृतिक खेती कर रहे और इस पद्धति को अपनाने के इच्छुक किसानों को प्रशिक्षण, तकनीक और मार्गदर्शन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा।

पहले चरण में चार जिलों का चयन

योजना के पहले चरण के तहत नवसारी जिले के वांसदा तालुका के नानी भमती, मोरबी के हलवद, भावनगर के शिहोर तालुका के वलावड और छोटा उदयपुर जिले के जेतपुर पावी तालुका के चुडेल गांव में ये केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इस पूरी योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी ‘गुजरात प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड’ को सौंपी गई है। प्रत्येक केंद्र में एक साथ 100 किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए आधुनिक व्यवस्था तैयार की जाएगी।

प्राकृतिक खेती के 'मॉडल कैंपस' के रूप में विकास

स्थापित किए जाने वाले ये केंद्र केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित न रहकर प्राकृतिक खेती के उत्कृष्ट ‘मॉडल कैंपस’ के रूप में कार्य करेंगे। यहां किसानों को प्राकृतिक खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान दिए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के बायो-इनपुट्स तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

बायो-इनपुट्स का उत्पादन और सस्ती उपलब्धता

इन केंद्रों पर किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र जैसे जैविक इनपुट्स बनाने की वैज्ञानिक विधि सिखाई जाएगी। प्रशिक्षण देने के साथ-साथ इन केंद्रों पर ही बड़े पैमाने पर बायो-इनपुट्स का उत्पादन करके किसानों को बहुत ही मामूली कीमत पर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी।

बीज, पौधे और कलमों की सुविधा

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से विभिन्न फसलों के शुद्ध बीज, बागवानी फसलों के पौधे, कटिंग्स और गुणवत्तापूर्ण कलमों सहित प्लांटिंग सामग्री आसानी से मिल सकेगी। इसके अलावा किसानों को भूमि आच्छादन (मल्चिंग) के लिए उपयोगी सामग्री और तकनीकों के बारे में भी उचित मार्गदर्शन दिया जाएगा।

मृदा परीक्षण और खेत तक प्रत्यक्ष प्रशिक्षण

किसान अपनी भूमि की गुणवत्ता को समझ सकें, इसके लिए मृदा परीक्षण (Soil Testing) और फसल की गुणवत्ता जांच के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा। केंद्र के विशेषज्ञ किसानों के खेतों तक पहुंचकर पांच-स्तरीय प्राकृतिक खेती, मिश्रित फसल और सहजीवी फसल पद्धति का सीधा प्रदर्शन (डेमो) करेंगे और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के उपाय सिखाएंगे।

खेती की लागत में कमी और आय में वृद्धि

सरकार के इस कदम से किसानों को प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर मिलने से खेती की लागत में बड़ी कमी आएगी। इसके साथ ही फसल कटाई के बाद की प्रक्रिया, मूल्य संवर्धन (Value Addition), प्रोसेसिंग, भंडारण और पैकेजिंग से संबंधित प्रशिक्षण देकर किसानों को अपनी कृषि उपज का बेहतर बाजार मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

इथेनॉल मिश्रित डीजल सुरक्षा परीक्षणों में फेल : फ्लैश प्वाइंट बना बड़ी वजह, क्या अब भी इस्तेमाल करेगी सरकार?

Ethanol  Blended Diesel

Ethanol  Blended Diesel: भारत में हरित ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन घटाने के अभियानों के बीच एक बड़ी तकनीकी चुनौती सामने आई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs), वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए संयुक्त मूल्यांकन में इथेनॉल-मिश्रित डीजल (Ethanol-Blended Diesel) सुरक्षा मापदंडों पर खरा उतरने में विफल रहा है।

 

संसद में जानकारी देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि जब तक इस गंभीर तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज लिया जाता, तब तक इथेनॉल-मिश्रित डीजल के कमर्शियल या व्यापक इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा सकती।  ALSO READ: ATF में इथेनॉल मिलाएगी सरकार! केजरीवाल के दावे पर क्या बोले उड्डयन मंत्री किंजरापु?

सुरक्षा परीक्षण में क्यों फेल हुआ इथेनॉल डीजल?

वैज्ञानिक परीक्षणों और लैब असेसमेंट के दौरान पाया गया कि डीजल में इथेनॉल मिलाने से ईंधन का फ्लैश प्वाइंट (Flash Point) अत्यधिक कम हो जाता है।

 

क्या होता है फ्लैश प्वाइंट? फ्लैश प्वाइंट वह न्यूनतम तापमान होता है जिस पर किसी तरल ईंधन का वाष्प (Vapor) हवा के संपर्क में आकर आग पकड़ सकता है।

 

सुरक्षा जोखिम : डीजल का प्राकृतिक फ्लैश प्वाइंट अपेक्षाकृत अधिक (सुरक्षित) होता है, जिससे इसे ढोने, स्टोर करने और वाहनों में उपयोग करने के दौरान आग लगने का जोखिम न्यूनतम रहता है। लेकिन इथेनॉल मिलते ही इसका फ्लैश प्वाइंट अचानक गिर जाता है, जिससे परिवहन, ईंधन भरने और वाहन संचालन के दौरान आग लगने या विस्फोट होने का भारी सुरक्षा खतरा पैदा हो जाता है। ALSO READ: दूसरे देशों में इथेनॉल की वजह से क्यों नहीं होते वाहन खराब?

आइसोबुटानॉल और E20 से अधिक सम्मिश्रण पर स्थिति

संसद में दिए गए बयान के अनुसार, सरकार ने अन्य वैकल्पिक और उच्च-प्रतिशत सम्मिश्रणों पर भी अपना रुख स्पष्ट किया है:

  • आइसोबुटानॉल (Isobutanol) सम्मिश्रण : डीजल में आइसोबुटानॉल मिलाने के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
  • 20% से अधिक इथेनॉल सम्मिश्रण (E20+) : पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को 20% से आगे बढ़ाने को लेकर भी फिलहाल कोई नई नीति या निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का प्राथमिक ध्यान 20% इथेनॉल सम्मिश्रण (E20 Petrol) के लक्ष्य को सुरक्षित रूप से बनाए रखने पर है।

घरेलू इथेनॉल उत्पादन और भविष्य की योजनाएं

सुरक्षा संबंधी इन तकनीकी चुनौतियों के बावजूद, सरकार देश में इथेनॉल के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए तेल कंपनियों ने 10.485 अरब लीटर इथेनॉल का आवंटन किया है।

 

इथेनॉल उत्पादन क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार निम्नलिखित कदम उठा रही है:

  • ब्याज सब्सिडी योजना (Interest Subvention) : नई डिस्टिलरी स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता।
  • डिस्टिलरी अपग्रेडेशन : आधुनिक तकनीक के जरिए एथेनॉल निष्कर्षण क्षमता बढ़ाना।
  • दीर्घकालिक खरीद समझौते (Long-term Offtake Agreements) : इथेनॉल उत्पादकों को सुनिश्चित बाजार और मूल्य स्थिरता प्रदान करना।

एलपीजी (LPG) के विकल्प के रूप में इथेनॉल

भारत वर्तमान में अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इस आयात निर्भरता को कम करने के लिए सरकार अब इथेनॉल को खाना पकाने के लिए स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन (Clean Cooking Fuel) के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।

LNCT पैरामेडिकल कॉलेज के सैकड़ों छात्रों का छलका दर्द, 3 साल से नहीं दी स्कॉलरशिप, कलेक्ट्रेट पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

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इंदौर। कॉलेज प्रशासन की बहानेबाजी और 3 सालों से स्कॉलरशिप न मिलने से परेशान इंदौर के LNCT पैरामेडिकल कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। पिछले तीन साल से स्‍कॉलरशिप न मिलने से परेशान बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब कॉलेज प्रबंधन बहानेबाजी करता रहा, तो थक-हारकर भारी संख्या में विद्यार्थी न्याय की आस में कलेक्ट्रेट दफ्तर पहुंच गए। स्कॉलरशिप न मिलने के कारण बाहरी जिलों और राज्यों से आकर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के सामने अब अपना दैनिक खर्च और पढ़ाई जारी रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बता दें कि LNCT पैरामेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने स्‍कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था, लेकिन आवेदन के समय पोर्टल की लिंक एक्‍सेसिबल नहीं थी। ऐसे में कई छात्र-छात्राएं आवेदन नहीं कर सके, ऐसे में पोर्टल की तकनीकी खामी का नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है। कॉलेज प्रशासन इसे लेकर भी चुप है।

LNCT पैरामेडिकल कॉलेज की प्रिंसीपल निकिता अहिरवार ने बताया कि बच्‍चों को पहले साल से ही स्‍कॉलरशिप नहीं मिली है, वे मेरे पास आए थे। मैंने इस बारे में स्‍कॉरलरशिप डिपार्टमेंट को बताया था, जरूरी डॉक्‍यूमेंटेशन कर के भी उन्‍हें भेज दिया था। लेकिन पोर्टल की लिंक ओपन होने में कोई दिक्‍कत है शायद। लिंक री-ओपन हो जाएगी तो समस्‍या हल हो जाएगी। मैं भी इस बारे में एक बार स्‍कॉरलरशिप डिपार्टमेंट से बात करती हूं।

कॉलेज प्रशासन हर बार बनाता है बहाना : साक्षी, रिया, यामिनी, दक्ष, प्रमिला, रोशनी आदि बीपीटी और बीएमएलटी के छात्र-छात्राओं ने वेबदुनिया को बताया कि वे पिछले तीन सालों से कॉलेज प्रशासन से स्‍कॉलरशिप के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन कोई उन्‍हें ठीक से जवाब तक नहीं दे रहा है। हर बार कॉलेज प्रशासन कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देता है। विद्यार्थियों ने बताया कि स्‍कॉलरशिप नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई पर असर हो रहा है। दैनिक खर्च निकालना भी मुश्‍किल हो गया है।

बाहरी छात्रों के सामने खड़ा हुआ गंभीर संकट : बता दें कि विद्यार्थियों में बड़ी संख्या ऐसे छात्र-छात्राओं की है जो प्रदेश के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से इंदौर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि स्कॉलरशिप न मिलने के कारण वे अपने दैनिक खर्च, कमरे का किराया और मेस का बिल चुकाने में असमर्थ हैं।

कॉलेज प्रशासन पर टालमटोल का आरोप : छात्रों ने बताया कि उन्होंने कई बार कॉलेज प्रबंधन से इस विषय में बात की और अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन हर बार उन्हें कोई न कोई आश्वासन देकर टाल दिया गया। लगातार तीन साल से स्कॉलरशिप रोके जाने के कारण कई विद्यार्थियों की पढ़ाई पर संकट मंडराने लगा है। कलेक्ट्रेट पहुंचे विद्यार्थियों ने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि कॉलेज प्रशासन और स्‍कॉलरशिप के इस मामले की जांच की जाए। इस पर प्रशासन ने उन्‍हें आश्‍वासन दिया है।

स्‍कॉलरशिप न मिले तो क्‍या करें : बता दें कि प्रशासनिक या तकनीकी विसंगतियां: कई बार कॉलेज स्तर से डेटा फॉरवर्ड न होने या राज्य के छात्रवृत्ति पोर्टल (जैसे एमपी का MP Online पोर्टल) पर तकनीकी खराबी के कारण फंड रुक जाता है।

कई बार सरकारी नियमों के अनुसार, यदि छात्र का बैंक खाता NPCI (National Payments Corporation of India) से एक्टिव नहीं है या आधार कार्ड से लिंक नहीं है, तो स्कॉलरशिप का भुगतान रोक दिया जाता है।

कॉलेज के स्कॉलरशिप विभाग से मिलें: सबसे पहले LNCT University Scholarship Department के नोडल ऑफिसर या इनचार्ज से संपर्क करें और अपने फॉर्म का स्टेटस जानें।

सीएम हेल्पलाइन या जनसुनवाई में शिकायत: यदि कॉलेज प्रशासन या स्थानीय विभाग से कोई मदद नहीं मिल रही है, तो मध्य प्रदेश सरकार की CM Helpline (181) पर शिकायत दर्ज कराएं या जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन दें।

झारखंड बंद का असर: ABVP का विधानसभा घेराव, रांची में टायर जलाकर प्रदर्शन; कई कार्यकर्ता हिरासत में

jharkhand bjp protest

छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को भाजपा ने झारखंड बंद का आहवान किया। इस बीच एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने विधानसभा के घेराव का एलान किया है। नारेबाजी करते कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ धक्का मुक्की के बाद कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। ALSO READ: झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सियासी संग्राम, संसद में NDA का प्रदर्शन; राहुल गांधी से मांगा जवाब

 

राजधानी रांची में बंद का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। न्यूक्लियस मॉल के पास बंद समर्थकों ने टायर जलाकर प्रदर्शन किया, जिसके चलते सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रदर्शन के कारण इलाके में यातायात व्यवस्था पर असर पड़ा है। भाजपा और एबीवीपी के प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में संवेदनशील इलाकों और प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

सच्चाई को लाठी डंडो से छुपाना चाहती है सरकार 

झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार सच्चाई को लाठी डंडो से छुपाना चाहती है। बच्चों की एक ही मांग है कि CBI जांच कराओ। जो दोषी होंगे पकड़े जाएंगे। जो दोषी नहीं होंगे वे छूट जाएंगे। सरकार अपनी हठ पर अड़ी है कि बच्चों की मांग को मानने के लिए तैयार नहीं है। बच्चों के आवाज को लाठी डंडे से दबाना चाहती है। लाठी डंडे से किसी की आवाज नहीं दबती है। आवाज और बढ़ेगी। आंदोलन झारखंड के गांव-गांव तक पहुंचेगा। ALSO READ: Jharkhand Student Protest : विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज, CM हेमंत सोरेन बोले- 'बातचीत से सुलझाएंगे मामला'

 

अर्जुन मुंडा की प्रदेश वासियों से अपील

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड में छात्रों के साथ हुए अन्याय, नियुक्ति प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने आज झारखंड बंद का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि छात्रों के अधिकार, भविष्य और झारखंड के हित में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद कर बंद का समर्थन करें।

 

झारखंड में PSC-SSC में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है। लाठीचार्ज के बाद भी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। वे अब इस मामले में सीधे मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत की मांग कर रहे हैं।

झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सियासी संग्राम, संसद में NDA का प्रदर्शन; राहुल गांधी से मांगा जवाब

nda protest in parliament

छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा और NDA दिल्ली से झारखंड तक प्रदर्शन कर रहे हैं। झारखंड में भाजपा ने बंद का आह्वान किया है तो एनडीए सांसदों ने आज संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने झारखंड में हुई क्रूरता पर राहुल गांधी से जवाब मांगा। ALSO READ: Jharkhand Student Protest : विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज, CM हेमंत सोरेन बोले- 'बातचीत से सुलझाएंगे मामला'

 

मंगल मिलन बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समर्थन और विपक्ष के विरोध में NDA सांसदों ने संसद के मकर द्वार की ओर मार्च किया। उनके हाथों में बैनर और पोस्टर थे जिन पर लिखा था 'गृहमंत्री से चर्चा से राहुल गांधी भागो मत!', 'झारखंड में छात्र अत्याचार पर राहुल गांधी जवाब दो'।

 

भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने कहा कि ये जो राहुल गांधी का दोहरा चरित्र है जिस तरह से मोदी विरोध की उनकी आग है जिसमें देश तोड़ने वाले तत्वों के साथ वो हमेशा शामिल रहते हैं उनके लिए संदेश है कि अपनी दोहरी मानसिकता को बंद करें। आप छात्रों के साथ आए और उनको न्याय दिलाए।

 

पार्टी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इनके पास कोई रणनीति नहीं है उनका उद्देश्य सदन में चर्चा करना नहीं है। अब जब गृह मंत्री जवाब देने को तैयार हैं तो राहुल गांधी सुनने को तैयार नहीं हैं राहुल गांधी को सदन में आकर सुनना चाहिए और रांची जाना चाहिए।

 

वहीं भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि अब जब चर्चा हम करने को तैयार हैं तो राहुल गांधी भगोड़े बने हुए हैं। वह अमित शाह को सुनना नहीं चाह रहे हैं तो कैसे संसद चलेगा। देश इनकी करतूत देख रहा है इन्होंने इस बार एक दिन भी संसद चलने नहीं दिया है। जो कि शर्मनाक बात है। ALSO READ: कांवड़ की जगह हाथ में 'तेजस' का हैंडल, बीटेक छात्र ने बनाया अनोखा इलेक्ट्रिक वाहन, वीडियो वायरल

 

इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि मैंने पहली बार देखा है कि सत्ता के सांसद विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। कम से कम हमने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर तो कर लिया है इसलिए अब अमित शाह सदन में आएं और बयान दें।

अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला, गौतम अडानी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप हुए खारिज

gautam adani us court dismisses bribery fraud charges

अमेरिकी अदालत ने मंगलवार को भारतीय अरबपति और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी को राहत देते हुए उनके खिलाफ सभी आपराधिक आरोप खारिज कर दिए। यह कदम जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी का मामला वापस लेने का फैसला करने के बाद उठाया गया। ALSO READ: इस्लामी नाटो : क्या मोदी-नेतान्याहू की नजदीकियों का जवाब देने के लिए साथ आए पाक, सऊदी और तुर्की?

 

ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स की ओर से मामला खारिज करने की दुर्लभ अपील को मंजूरी दी। अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि केस खारिज करने के बदले किसी प्रकार का कोई सौदा नहीं हुआ।

 

हालांकि, जज ने न्याय विभाग से इस मामले को बंद करने की वजह भी पूछी थी। उन्होंने गौतम अडानी से भी ये स्पष्ट कराया कि क्या केस खत्म करने के बदले किसी तरह का कोई वादा किया गया था। इसके बाद ही अदालत ने औपचारिक रूप से मामला खारिज किया।

 

क्या था अडानी पर आरोप?

2024 में अडानी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताई थी ताकि उनके अडानी ग्रुप की एक सब्सिडियरी कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट बनाने की मंजूरी मिल सके, और फिर अपनी कंपनी की भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों के बारे में भरोसा दिलाने वाली जानकारी देकर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया गया था। हालांकि अडानी ग्रुप ने हमेशा गलत काम करने से इनकार किया है। 18 मई को जस्टिस डिपार्टमेंट ने घोषणा की कि वह अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा। ALSO READ: Colombia Earthquake: 7.4 तीव्रता के भूकंप से दहला कोलंबिया, 132 से ज्यादा मौतें; आपातकाल का एलान
 

फैसले पर क्या बोले गौतम अडानी?

अरबपति गौतम अडानी ने मंगलवार को अपने खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज करने के अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत किया और कहा कि कानूनी लड़ाई के दौरान “सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन” में उनका भरोसा अटूट रहा।

उन्होंने X पर अपनी पोस्ट में कहा कि मैं अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं। इस मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा भरोसा अडिग रहा। उन्होंने उन लोगों का भी शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उनके ग्रुप, कानूनी सिस्टम और भारत की न्याय दिलाने की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। हम जरूरी काम करते रहेंगे: अपने देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी बनी रहे और खुद से बढ़कर किसी मकसद के लिए काम करना। यही हमारा कमिटमेंट है। जय हिंद।

LIVE: छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में NDA सांसदों का मार्च

parliament 11 august

Latest News Today Live Updates in Hindi : संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अमित शाह के बयान के ऑफर पर भी नहीं बनी बात, कांग्रेस बोली- तीन मांगों पर समझौता नहीं। पल पल की जानकारी…

-NDA की साप्ताहिक संसदीय दल की बैठक 'मंगल मिलन' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और NDA के अन्य नेताओं ने तिरंगा लहराया।
-रांची में सोमवार को JPSC-JSSC विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में झारखंड BJP ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है।

-रांची में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में संसद परिसर में भाजपा सांसद करेंगे मार्च।

-NDA के सांसद विपक्ष के खिलाफ पोस्टर लेकर संसद के मकर द्वार की ओर मार्च करेंगे। इन पोस्टरों में कहा जाएगा कि गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं, जबकि विपक्ष इससे भाग रहा है।

मंगल मिलन बैठक के बाद संसद परिसर में NDA सांसदों का पैदल मार्च। झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं सत्ता पक्ष के सांसद।सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “दोनों मुद्दे एक दूसरे से जुड़े हैं… इसलिए दोनों मुद्दों पर बहस होनी चाहिए। जो बात आज कही जा रही है वो 1 हफ्ते पहले क्यों नहीं की गई क्योंकि वे चर्चा ही नहीं करना चाहते। चर्चा के साथ-साथ प्रभु राम का भी नाम नहीं लेना चाहते हैं…इनके लिए धन ही धर्म है।”