योगी सरकार में बिजली उपभोक्ताओं की जुलाई में 99.01 फीसदी शिकायतें निस्तारित

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UP Electricity Complaints: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि जुलाई 2026 में प्रदेश के विभिन्न विद्युत वितरण निगमों में कुल 20.17 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से करीब 99.01 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। शिकायतों के प्रभावी और समयबद्ध समाधान के लिए विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई की गई। बिजली आपूर्ति, बिल, मीटर, कनेक्शन समेत विभिन्न समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी गई। शिकायत निस्तारण की यह स्थिति प्रदेश में बेहतर उपभोक्ता सेवा, सक्रियता और विभागीय जवाबदेही को दर्शाती है।

सभी डिस्कॉम की अधिकांश शिकायतों का समयबद्ध समाधान

जुलाई महीने में प्रदेश के पांचों विद्युत वितरण निगमों में उपभोक्ताओं की ओर से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गईं। इनमें डीवीवीएनएल में 3.64 लाख से अधिक, एमवीवीएनएल में 6.42 लाख से अधिक, पीयूवीवीएनएल में 3.12 लाख से अधिक, पीवीवीएनएल में 5.34 लाख से अधिक और केस्को में 1.64 लाख से अधिक शिकायतें आई थीं। विभागीय स्तर पर इन शिकायतों के निस्तारण के लिए लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई की गई, जिसके चलते अधिकांश शिकायतों का समाधान समय रहते कर दिया गया।

बिजली आपूर्ति की शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण

सभी डिस्कॉम में सबसे अधिक शिकायतें बिजली सप्लाई से संबंधित प्राप्त हुईं। विभाग ने इन शिकायतों को प्राथमिकता देते हुए उनका शत-प्रतिशत निस्तारण किया। इसके अलावा बिल संशोधन, मीटर संबंधी समस्या, स्मार्ट मीटर, नए बिजली कनेक्शन समेत उपभोक्ताओं से जुड़ी अन्य शिकायतें भी सामने आईं। इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से त्वरित कार्रवाई की गई।

24×7 सक्रिय है 1912 हेल्पलाइन

उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए बिजली विभाग की 1912 हेल्पलाइन लगातार 24 घंटे उपलब्ध है। बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या या सहायता के लिए उपभोक्ता 1912 पर संपर्क कर सकते हैं। विभागीय टीम शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेकर जल्द से जल्द समाधान सुनिश्चित करने के लिए 24×7 सक्रिय रहती है।

मानसून में बिजली सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता

मानसून के दौरान बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों, मीटर बॉक्स और जलभराव वाले स्थानों के आसपास करंट का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में विभाग की ओर से लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। बच्चों को बिजली के उपकरणों, खंभों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने तथा ऐसे स्थानों पर खेलने या घूमने से रोकने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल 1912 हेल्पलाइन या नजदीकी पावरहाउस से संपर्क करने की अपील की गई है।

अगस्त में विशेष उपभोक्ता सेवा शिविर, एक जगह मिलेंगी कई सुविधाएं

उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 1 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक यूपीपीसीएल के विशेष उपभोक्ता सेवा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में उपभोक्ता बिजली सेवाओं से संबंधित अपनी समस्याओं का समाधान करा सकते हैं। शिविरों में बिल संशोधन, नया बिजली कनेक्शन, मीटर संबंधी शिकायत, भार वृद्धि, विधा परिवर्तन, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी अपडेट समेत कई सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रात में भी मैदान में डटे बिजलीकर्मी

प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विभागीय बिजलीकर्मी दिन-रात अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान कर्मचारी मेंटेनेंस और मरम्मत कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि हेल्पलाइन नंबर 1912 पर आने वाली शिकायतों का लगातार मॉनिटर करें और यह सुनिश्चित करें कि समयबद्ध तरीके से उनका निस्तारण हो।

Independence Day 2026: आजादी के लिए लड़े ये 10 महान क्रांतिकारी, इनके बलिदान से मिली स्वतंत्रता

Mangal Pandey, Rani Lakshmibai, Subhash Chandra Bose, Bhagat Singh, Chandrashekhar Azad

15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। भारत की स्वतंत्रता किसी एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि यह मातृभूमि के प्रति अनगिनत वीरों के समर्पण, साहस और बलिदान का परिणाम थी। ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाने और देश को आजादी की दहलीज तक पहुंचाने में गरमदल के इन 10 प्रमुख क्रांतिकारियों का योगदान अविस्मरणीय है।

 

1. भगत सिंह (Shaheed Bhagat Singh)

योगदान: भारत की आजादी के आंदोलन को वैचारिक और क्रांतिकारी दिशा देने वाले भगत सिंह ने युवाओं के भीतर देशभक्ति की प्रचंड लहर पैदा की।

प्रमुख घटना: सांडर्स वध और सेंट्रल असेंबली में बम धमाका करके अंग्रेजों के कानों तक भारतीय स्वतंत्रता की आवाज पहुंचाई।

प्रभाव: 23 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूमा। उनका नारा “इंकलाब जिंदाबाद” स्वतंत्रता संग्राम का मूलमंत्र बन गया।

 

2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose)

योगदान: अंग्रेजों को सैन्य स्तर पर चुनौती देने वाले और आजादी की लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले महानायक।

प्रमुख घटना: 'आजाद हिंद फौज' (INA) का पुनर्गठन करके “दिल्ली चलो” और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का आह्वान किया।

प्रभाव: उनकी संगठित सैन्य कार्रवाई ने ब्रिटिश सरकार को यह अहसास करा दिया कि अब भारतीय सेना पर उनका नियंत्रण समाप्त हो चुका है।

 

3. चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad)

योगदान: हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के मुख्य रणनीतिकार और क्रांतिकारियों के मार्गदर्शक।

प्रमुख घटना: काकोरी ट्रेन एक्शन और सांडर्स वध की रणनीति में मुख्य भूमिका निभाई।

प्रभाव: “आजाद थे, आजाद हैं और आजाद रहेंगे” की प्रतिज्ञा निभाते हुए अल्फ्रेड पार्क (प्रयागराज) में अंतिम गोली स्वयं को मारकर आत्मबलिदान दिया।

 

4. मंगल पांडे (Mangal Pandey)

योगदान: 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत।

प्रमुख घटना: बैरकपुर छावनी में चर्बी वाले कारतूसों के विरोध में ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह की पहली गोली चलाई।

प्रभाव: उनके इस विद्रोह ने पूरे देश में 1857 की क्रांति की आग भड़का दी, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन की नींव हिला दी।

 

5. रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai of Jhansi)

योगदान: मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए रणभूमि में प्राण न्योछावर करने वाली अमर वीरांगना।

प्रमुख घटना: अंग्रेजों की 'हड़प नीति' के खिलाफ “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी” का उद्घोष कर अपनी सेना के साथ विशाल ब्रिटिश सेना से लोहा लिया।

प्रभाव: उनका अदम्य साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।

 

6. राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil)

योगदान: महान क्रांतिकारी, कवि और 'मातृवेदी' व HSRA संस्थाओं के संस्थापक सदस्य।

प्रमुख घटना: क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाने हेतु ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन (1925) का कुशल नेतृत्व किया।

प्रभाव: उनकी कालजयी पंक्तियाँ “सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” स्वतंत्रता संग्राम का राष्ट्रगान बन गईं।

 

7. अशफाक उल्ला खां (Ashfaqulla Khan)

योगदान: सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक और मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने वाले निर्भीक क्रांतिकारी।

प्रमुख घटना: काकोरी ट्रेन एक्शन में राम प्रसाद बिस्मिल के साथ प्रमुख भूमिका निभाई।

प्रभाव: हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूलकर उन्होंने यह सिद्ध किया कि देश की आजादी का सपना हर धर्म के भारतीय का साझा सपना था।

 

8. बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt)

योगदान: भगत सिंह के करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता संग्राम के प्रखर सेनानी।

प्रमुख घटना: 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह के साथ दिल्ली सेंट्रल असेंबली में पर्चे और बम फेंके, ताकि बहरे अंग्रेजों को जगाया जा सके।

प्रभाव: उन्होंने भागने के बजाय स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी और जेल में बंद कैदियों के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक भूख हड़ताल की।

 

9. लाला लाजपत राय (Lala Lajpat Rai – 'पंजाब केसरी')

योगदान: 'लाल-बाल-पाल' की क्रांतिकारी तिकड़ी के प्रमुख नेता और गरम दल के स्तम्भ।

प्रमुख घटना: 1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जहाँ पुलिस ने उन पर बर्बर लाठीचार्ज किया।

प्रभाव: लाठियों के प्रहार से शहीद होने से पहले उनका कथन—”मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के कफ़न की कील साबित होगी”—सत्य सिद्ध हुआ।

 

10. उधम सिंह (Shaheed Udham Singh)

योगदान: जलियांवाला बाग हत्याकांड के नरसंहार का बदला लेने वाले महान क्रांतिकारी देशभक्त।

प्रमुख घटना: जलियांवाला बाग में हुए निर्दोषों के कत्लेआम का बदला लेने के लिए 21 साल तक इंतजार किया और 1940 में लंदन जाकर माइकल ओ'डायर को गोली मारी।

प्रभाव: उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत अपने शहीदों का अपमान कभी नहीं भूलता और अंग्रेजों के घर में घुसकर उनके अन्याय का जवाब दे सकता है।

कौन बनेगा राम मंदिर ट्रस्ट का CEO? 5200 आवेदनों में से 18 शॉर्टलिस्ट

Ram Mandir CEO Recruitment: ​श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या की व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की भर्ती प्रक्रिया अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। देशभर से आए 5200 आवेदनों में से कड़ी छंटनी के बाद अंतिम चरण के साक्षात्कार के लिए 18 उम्मीदवारों को चुना गया है।

​PFC में दो दिवसीय इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया

  • ​अंतिम इंटरव्यू : चयनित 18 उम्मीदवारों का अंतिम साक्षात्कार 11 और 12 अगस्त को राम मंदिर परिसर स्थित पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर (PFC) में आयोजित किया जा रहा है।
  • ​तीन सदस्यीय चयन समिति : साक्षात्कार की कमान सेवानिवृत्त जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति संभाल रही है।
  • ​प्रारंभिक समीक्षा : इससे पहले समिति ने समीक्षा के बाद प्रथम चरण में 54 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया था, जिसमें से 18 नाम अंतिम चरण के लिए चुने गए।

​2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक : तीन नामों के पैनल पर होगा फैसला

​चयन समिति साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी करने के बाद 3 सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी। 2 सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की आधिकारिक बैठक में इन तीन नामों पर विचार-विमर्श के बाद नए CEO के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। ALSO READ: त्रेता युग सा अहसास! अनूठी है रात की रोशनी में नहाई रामनगरी अयोध्या

​नया CEO और पूर्णकालिक महासचिव मिलने के बाद होंगे बड़े बदलाव

​2 सितंबर की बैठक केवल CEO पद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मंदिर प्रशासन में कई बड़े प्रशासनिक बदलावों की भी उम्मीद जताई जा रही है। बैठक में किसी ट्रस्टी को पूर्णकालिक महासचिव का प्रभार सौंपा जा सकता है। ट्रस्ट के 3 रिक्त सदस्य पदों के साथ-साथ नए प्रवक्ता और सचिव की नियुक्ति पर भी निर्णय लिया जाएगा। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

 

​मंदिर में हाल ही में चढ़ावे की धनराशि में अनियमिताएं सामने आने और SIT-पुलिस जांच के बीच कर्मचारियों में हलचल है। माना जा रहा है कि नया CEO आने के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कर्मचारियों के पुनर्गठन और नए स्टाफ की तैनाती की जाएगी।

80वां स्वतंत्रता दिवस 2026: जानिए इस बार की खास तैयारियां और पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण

narendra modi 80th Independence Day 2026

भारत 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। लाल किले की प्राचीर से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे और ध्वजारोहण करेंगे। इस वर्ष के आयोजन में कई नई और ऐतिहासिक पहल की जा रही हैं। खास बात यह कि 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारत का राष्ट्रगीत वंदे मातरम भी गाया जाएगा। इस गीत के लिखे जाने के 150 साल पूरे होने के अवसर पर पहली बार लालकिले के प्राचीर से यह राष्ट्रगीत गाया जाएगा।

 

1. 80वें स्वतंत्रता दिवस (2026) की मुख्य थीम और खास बातेंथीम:

इस वर्ष का मुख्य विषय “विकसित भारत@2047 के लिए युवा शक्ति” (Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047) है। इसके साथ ही राष्ट्रगान के साथ-साथ 'वंदे मातरम' के सार को प्रदर्शित किया जा रहा है।

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'वंदे मातरम' के 150 वर्ष:

राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में लाल किले पर पहली बार पीएम मोदी के आगमन पर 'वंदे मातरम' का विशेष गायन होगा। NCC और 'माई भारत' के लगभग 2,500 कैडेट्स प्राचीर के सामने पुष्पों और मानव-श्रृंखला से 'वंदे मातरम' की आकृति बनाएंगे।

 

प्रधानमंत्री के लाल किले पर पहुंचने पर यह गाना गाया जाएगा, जिसके बाद वे राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और स्वतंत्रता दिवस पर अपना पारंपरिक भाषण देंगे। रक्षा मंत्रालय ने इस कदम को गाने की सदाबहार विरासत और भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों को प्रेरित करने में इसकी भूमिका के सम्मान के तौर पर बताया है।

 

भारतीय वायुसेना का रूसी हेलीकॉप्टर बरसाएगा फूल:

भारतीय वायु सेना का एक रूसी MI-17 हेलीकॉप्टर 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक बैनर लेकर उड़ेगा और लाल किले पर मौजूद लोगों पर फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करेगा।

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हर घर तिरंगा अभियान 2026:

इस बार 'सूर्यापथ तिरंगा' और “तिरंगा सैल्यूट टू वंदे मातरम” के तहत देश भर में तिरंगा यात्राएं, बाइक रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

 

स्वदेशी रक्षा उपकरण:

आत्मनिर्भर भारत की झलक के रूप में लाल किले पर प्रयुक्त होने वाली तोपों व गॉर्ड ऑफ ऑनर की सलामी सामग्री पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनी है।

 

विशेष अतिथि:

इस बार लगभग 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें अंतर्राष्ट्रीय साइंस/मैथ्स ओलंपियाड 2026 के पदक विजेता छात्र, पीएम इंटर्नशिप योजना के युवा, स्टार्ट-अप उद्यमी और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता शामिल हैं।

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2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन (भाषण) के मुख्य संभावित बिंदु

लाल किले से प्रधानमंत्री के भाषण में 'विकसित भारत 2047' के रोडमैप पर मुख्य ध्यान केंद्रित रहेगा:

युवा शक्ति और नवाचार (Youth & Innovation): देश के युवाओं की उपलब्धियों (तकनीक, खेल, स्टार्ट-अप्स) को रेखांकित करते हुए उन्हें 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का मुख्य वाहक बताना।

 

आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक: सेमीकंडक्टर मिशन, 6G तकनीक, AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का ब्योरा।

 

हर घर तिरंगा व 'वंदे मातरम': राष्ट्रीय गीत के 150 वर्षों के इतिहास और देशवासियों में देशभक्ति के भाव को 'वंदे मातरम' के माध्यम से जागृत करना।

 

भाषा-बाधाओं का अंत (भाषिणी AI): डिजिटल इंडिया के 'भाषिणी' AI टूल की मदद से पीएम मोदी का यह भाषण वास्तविक समय (Real-Time) में 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में प्रसारित किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में बाढ़ से घिरे 527 लोगों को रेस्क्यू, कंट्रोल रूम पहुंचकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने लिया हालात का जायजा

राजधानी भोपाल सहित मध्यप्रदेश के कई जिलों में हो रही लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव और कई स्थानों पर लोगों के बाढ के पानी से घिरने की खबरों के बीच मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होमगार्ड मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने राज्य आपदा प्रबंधन के सिचुएशन रूम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को देखा और उससे प्रभावित लोगों का हालचाल जाना। उन्होंने प्रभावितों से सीधा संवाद किया।

गौरतलब है कि अब पानी से घिरे 527 बाढ़ प्रभावितों का रेस्क्यू  किया गया है। राहत-बचाव का कार्य लगातार जारी है। जानकारी लेने के बाद सीएम डॉ. मोहन ने राहत -बचाव कार्य में जुटे मैदानी अमले को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जहां बारिश ज्यादा हुई है वहां आमजनों को राहत पहुंचाने का कार्य जारी है। रेस्क्यू टीम ने अभी तक 527 लोगों की जान बचाई है। खंडवा में 7 कांवड़ियों का रेस्क्यू किया गया। बारिश में अचानक नदी का जल स्तर बढ़ने से खतरे की स्थिति बनती है।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रेस्क्यू टीम दिन रात बचाव का काम करती है। मुख्यमंत्री ने  वीसी के माध्यम से बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। जिन लोगों को रेस्क्यू करके बचाया गया उनसे भी बात की। उन्होंने लोगों से अपील कि  है कि जिन लोगों के घर नदी-नालों के किनारे बने हैं, मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वे विशेष सावधानी बरतें। यदि जरूरत पड़ती है तो पड़ोस के जिलों से भी मदद लें। हम प्रदेश स्तर पर भी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्तर पर आम नागरिकों की सुविधा के लिए काम कर रही है।
 
 

सुप्रिया सुले की बेटी की शादी में राहुल गांधी और अमित शाह, क्‍या मुलाकात हुई, कुछ बात हुई?

Rahul Gandhi

संसद और राजनीति में हमेशा एक दूसरे के आमने- सामने रहने वाले गृहमंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक शादी में भी आमने- सामने हो गए। मौका था सुप्रिया सुले की बेटी की शादी का। जहां शाह और गांधी एक दूसरे के सामने से गुजरे, ऐसे में लोगों के बीच चर्चा चल पडी कि आखिर क्‍या दोनों के बीच बात हुई, मुलाकात हुई।

अगर मुलाकात हुई तो क्‍या बात हुई होगी। हालांकि कहा जा रहा है कि दोनों ने एक दूसरे से नजरें चुरा लीं।
बता दें कि महाराष्‍ट्र की नेता और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले की शादी की तस्‍वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। शादी में कई दिग्‍गज नेता पहुंचे, जिनमें पीए मोदी, सोनिया गांधी, अमित शाह, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, स्‍मृति ईरानी, गिरीराज सिंह समेत कई नेता पहुंचे।


हंसकर मिलते रहे मोदी : शादी समारोह की तस्वीरों में कहीं पीएम मोदी मेहमानों से हंसकर बातचीत करते नजर आए तो कहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी परिवार के साथ खुशियां बांटते दिखे। अमित शाह ने भी वर-वधू को शुभकामनाएं दीं। शरद पवार के लिए यह मौका खास था, क्योंकि बेटी के घर की इस खुशी में देश के कई बड़े नेता और खास मेहमान हंसी-खुशी शामिल हुए।


सियासत पर भारी समारोह : पीएम मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी और शरद पवार जैसे बड़े नेता एक ही समारोह में नजर आए। हालांकि इस मौके पर सियासत से ज्यादा परिवार की खुशी दिखाई दी। तस्वीरों में बड़े नेताओं की मौजूदगी के साथ शादी का खुशनुमा माहौल भी साफ नजर आ रहा है। शादी में पहुंचे मेहमानों ने वर-वधू को नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। किसी ने हाथ जोड़कर बधाई दी तो किसी ने गर्मजोशी से मुलाकात की। पूरे समारोह में खुशी, अपनापन और पारिवारिक माहौल साफ नजर आया। इसी तरह प्रियंका और राहुल भी वर-वधू से मिलते दिखे।

केंद्र से टकराए तमिलनाडु के सीएम विजय! ‘वंदे मातरम’ नहीं, अब सबसे पहले गाया जाएगा राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’

tamil thai vazhthu state anthem mandatory

Tamil Thai vazhthu vs Vande Mataram: केंद्र सरकार के निर्देशों और भाषाई-सांस्कृतिक पहचान की बहस के बीच तमिलनाडु सरकार ने एक बड़ा विधायी कदम उठाया है। राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत में अब सबसे पहले 'तमिल थाई वाझथु' (तमिलनाडु का राज्य गीत) अनिवार्य रूप से गाया जाएगा।

 

तमिलनाडु विधानसभा ने सोमवार (10 अगस्त 2026) को सर्वसम्मति से इस संबंध में एक सरकारी प्रस्ताव पारित कर दिया। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पहले जारी किए गए उस निर्देश के सीधे उलट है, जिसमें राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की शुरुआत में सबसे पहले 'वंदे मातरम' गाने को कहा गया था।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का बड़ा बयान : “तमिल केवल भाषा नहीं, हमारी आत्मा है”

विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य गीत की महत्ता और तमिल संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया:

  • सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक : मुख्यमंत्री ने कहा कि 'तमिल थाई वाझथु' तमिल भाषा और वहां की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।
  • संवैधानिक अधिकार : प्रस्ताव में कहा गया कि यह कदम भारतीय संविधान द्वारा दिए गए भाषाई व सांस्कृतिक अधिकारों के पूरी तरह अनुरूप है।
  • प्राचीन सभ्यता : प्रस्ताव में तमिल भाषा को विश्व की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए कहा गया कि यह सभ्यता विश्व की महानतम परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है।

तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा- 'तमिल हमारे लिए केवल संवाद का माध्यम या एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारा जीवन, हमारी भावना और हमारी पहचान है।'

क्या था केंद्र सरकार का निर्देश और विवाद की वजह?

केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस विवाद की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक पत्र से हुई थी:

  • गृह मंत्रालय का पत्र (9 जुलाई 2026) : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर टिप्पणी की थी कि राज्य स्तरीय आधिकारिक व शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत 'वंदे मातरम' के गायन से होनी चाहिए।
  • विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह का वाकया : इस निर्देश के बाद तिरुनेलवेली स्थित मनोन्मनीयम सुंदरनार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शुरुआत में 'वंदे मातरम' गाया गया था, जिस पर राज्य में राजनीतिक व सांस्कृतिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।
  • विधानसभा में प्रस्ताव का पलटवार : इस घटनाक्रम के जवाब में राज्य सरकार ने विधानसभा का विशेष प्रस्ताव लाकर 'तमिल थाई वाझथु' को ही पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता देने का वैधानिक ढांचा तय कर दिया।

तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित यह सर्वसम्मत प्रस्ताव केंद्र और राज्य के बीच भाषाई स्वायत्तता और संघवाद (Federalism) से जुड़ी एक नई बहस को जन्म देता है। जहां केंद्र सरकार राष्ट्रीय प्रतीकों व राष्ट्रगीत के एकरूप पालन पर बल दे रही थी, वहीं तमिलनाडु सरकार ने अपने राज्य गीत और क्षेत्रीय सांस्कृतिक अस्मिता को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिया है।

पूर्वी सिंहभूम के 7238 बच्चों के लिए प्रशासन का राहत भरा कदम

East Singhbhum News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में जन्म प्रमाणपत्र न होने की वजह से आधार कार्ड से वंचित 7,238 बच्चों के लिए राज्य प्रशासन ने राहत भरा कदम उठाया है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस समस्या के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इन कैंपों के माध्यम से पहले बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनाए जाएंगे, जिसके बाद ऑपरेटरों की प्रतिनियुक्ति कर उनके आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।

 

बैठक के दौरान उपायुक्त ने शिक्षा व्यवस्था और छात्र कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं की गहन समीक्षा की।

  • छात्र उपस्थिति पर सख्ती : चाकुलिया, डुमरिया और मुसाबनी प्रखंडों में कम उपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए अगली बैठक तक सभी प्रखंडों में न्यूनतम 70% उपस्थिति सुनिश्चित करने का सख्त लक्ष्य दिया गया है।
  • रिटायर्ड शिक्षकों की सेवा : 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए निजी स्कूलों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की मदद ली जाएगी। बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाया जाएगा।
  • आवासीय विद्यालय और योजनाएं : कस्तूरबा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों के अधूरे भवनों का निर्माण जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, बीते एक महीने में खुले 919 बैंक खातों की प्रगति को और बढ़ाने तथा बची हुई साइकिलों का तुरंत वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र बच्चे तक पहुंचे।

‘बादल फाड़’ तबाही: भारी बरसात से हिमाचल-उत्तराखंड से लेकर मप्र और राजस्थान में नदी-नाले उफान पर, पहाड़ों में रेड अलर्ट

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देश के कई राज्यों में मानसून का रौद्र रूप जारी है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से सड़कें और संपर्क मार्ग टूट चुके हैं, तो वहीं मैदानी राज्यों—मध्य प्रदेश और राजस्थान में मूसलाधार बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है।

राज्यवार मौसम रिपोर्ट और मैदानी हालात
1. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड (पहाड़ी राज्यों में रेड/ऑरेंज अलर्ट)
•    हिमाचल प्रदेश: सिरमौर, मंडी और शिमला जिलों में भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण सड़कें बाधित हो चुकी हैं। कई नदियां और स्थानीय नाले खतरनाक स्तर से ऊपर बह रहे हैं।

•    उत्तराखंड: देहरादून, चमोली, उत्तरकाशी और नैनीताल जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा मार्गों पर भूस्खलन (Landslide) की वजह से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है।

2. मध्य प्रदेश (उफान पर नर्मदा, चंबल और बेतवा)

मध्य प्रदेश: पूर्वी और पश्चिमी मप्र के जिलों (जैसे मंडला, बालाघाट, नरसिंहपुर, भोपाल) में रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश से नर्मदा, बेतवा और क्षिप्रा नदियां खतरे के निशान के पास पहुंच गई हैं।
•    निचले इलाकों में पानी भरने के कारण कई बांधों के गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है।

3. राजस्थान (पूर्वी जिलों में भारी बारिश)
•    राजस्थान: कोटा, झालावाड़, उदयपुर और जयपुर संभाग के जिलों में मानसून ट्रफ के असर से भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है।

•    छोटी नदियां और नाले उफान पर आने से ग्रामीण इलाकों का संपर्क शहरों से कट गया है।

Fact-Check: क्या यह वास्तव में 'बादल फटना' (Cloudburst) है?
सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में भारी तबाही को देखते हुए 'बादल फटने' की खबरें आ रही हैं। आइए मौसम विज्ञान के पैमाने पर इसकी पड़ताल करें:

•    मौसम विज्ञान (IMD) का पैमाना: मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी सीमित क्षेत्र (लगभग 20-30 वर्ग किमी) में 1 घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर (10 सेमी) या उससे अधिक बारिश होती है, तो उसे तकनीकी रूप से 'बादल फटना' (Cloudburst) कहा जाता है।

•    स्थिति का विश्लेषण: पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के कुछ दूरस्थ इलाकों में अत्यधिक बारिश और मलबे के अचानक बहाव (Flash Floods) के कारण बादल फटने जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है। हालाँकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थिति स्थानीय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के कारण हुई अत्यधिक भारी बारिश (Very Heavy Rainfall – 12 से 20 सेमी) की है।

सुरक्षा और बचाव हेतु सावधानियां
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक इन राज्यों में सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। यदि आप प्रभावित क्षेत्रों में हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

1.   नदी और नालों के करीब न जाएं: उफान वाले पुल-पुलियाओं को पार करने का जोखिम न उठाएं।
2.   यात्रा से बचें: पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों की ओर यात्रा टालें।
3.   आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें: सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के बजाय मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।

किसानों के लिए खुशखबरी, गुजरात सरकार स्थापित करेगी प्राकृतिक खेती के ‘मॉडल कैंपस’, ट्रेनिंग के साथ बीज भी मिलेंगे

Gujarat Natural Farming: राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसका दायरा बढ़ाने के लिए गुजरात सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य के चार जिलों में आधुनिक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (Center of Excellence) स्थापित करने के लिए वर्ष 2026-27 के बजट से ₹20 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इन केंद्रों के माध्यम से प्राकृतिक खेती कर रहे और इस पद्धति को अपनाने के इच्छुक किसानों को प्रशिक्षण, तकनीक और मार्गदर्शन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा।

पहले चरण में चार जिलों का चयन

योजना के पहले चरण के तहत नवसारी जिले के वांसदा तालुका के नानी भमती, मोरबी के हलवद, भावनगर के शिहोर तालुका के वलावड और छोटा उदयपुर जिले के जेतपुर पावी तालुका के चुडेल गांव में ये केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इस पूरी योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी ‘गुजरात प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड’ को सौंपी गई है। प्रत्येक केंद्र में एक साथ 100 किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए आधुनिक व्यवस्था तैयार की जाएगी।

प्राकृतिक खेती के 'मॉडल कैंपस' के रूप में विकास

स्थापित किए जाने वाले ये केंद्र केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित न रहकर प्राकृतिक खेती के उत्कृष्ट ‘मॉडल कैंपस’ के रूप में कार्य करेंगे। यहां किसानों को प्राकृतिक खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान दिए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के बायो-इनपुट्स तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

बायो-इनपुट्स का उत्पादन और सस्ती उपलब्धता

इन केंद्रों पर किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र जैसे जैविक इनपुट्स बनाने की वैज्ञानिक विधि सिखाई जाएगी। प्रशिक्षण देने के साथ-साथ इन केंद्रों पर ही बड़े पैमाने पर बायो-इनपुट्स का उत्पादन करके किसानों को बहुत ही मामूली कीमत पर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी।

बीज, पौधे और कलमों की सुविधा

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से विभिन्न फसलों के शुद्ध बीज, बागवानी फसलों के पौधे, कटिंग्स और गुणवत्तापूर्ण कलमों सहित प्लांटिंग सामग्री आसानी से मिल सकेगी। इसके अलावा किसानों को भूमि आच्छादन (मल्चिंग) के लिए उपयोगी सामग्री और तकनीकों के बारे में भी उचित मार्गदर्शन दिया जाएगा।

मृदा परीक्षण और खेत तक प्रत्यक्ष प्रशिक्षण

किसान अपनी भूमि की गुणवत्ता को समझ सकें, इसके लिए मृदा परीक्षण (Soil Testing) और फसल की गुणवत्ता जांच के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा। केंद्र के विशेषज्ञ किसानों के खेतों तक पहुंचकर पांच-स्तरीय प्राकृतिक खेती, मिश्रित फसल और सहजीवी फसल पद्धति का सीधा प्रदर्शन (डेमो) करेंगे और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के उपाय सिखाएंगे।

खेती की लागत में कमी और आय में वृद्धि

सरकार के इस कदम से किसानों को प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर मिलने से खेती की लागत में बड़ी कमी आएगी। इसके साथ ही फसल कटाई के बाद की प्रक्रिया, मूल्य संवर्धन (Value Addition), प्रोसेसिंग, भंडारण और पैकेजिंग से संबंधित प्रशिक्षण देकर किसानों को अपनी कृषि उपज का बेहतर बाजार मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाएगा।