Jantar Mantar गोलीकांड के दावे पर नड्डा का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले- कोई गोली नहीं चली, जनता को गुमराह कर रहे

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित तौर पर पैलेट गन चलाने और फायरिंग का आरोप लगाया था। नड्डा ने कहा कि जंतर-मंतर पर कोई गोली नहीं चली और न ही वहां गोली चलाने का कोई आदेश दिया गया था। नड्डा ने राहुल गांधी पर जनता और देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेता लगातार अपने मुद्दे बदल रहे हैं और उनका उद्देश्य संसद को चलने नहीं देना है।

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'राहुल गांधी रोज बदल रहे हैं मुद्दा'

 

नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी संसद में चर्चा के मुद्दे को लगातार बदल रहे हैं। उनके मुताबिक, सत्र की शुरुआत में राहुल गांधी ने NEET पर चर्चा की मांग की थी। सरकार ने जब इस पर चर्चा के लिए सहमति जताई तो उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट का मुद्दा उठाया और इसके बाद जंतर-मंतर की घटना को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग शुरू कर दी। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का उद्देश्य संवाद करना नहीं बल्कि अराजकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 दिनों से संसद की कार्यवाही बाधित हो रही है।

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'जंतर-मंतर पर कोई गोली नहीं चली'

 

जेपी नड्डा ने कहा कि जब सरकार ने जंतर-मंतर के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए सहमति जताई, तब राहुल गांधी ने यह दावा करना शुरू कर दिया कि वहां गोली चलाई गई थी। नड्डा ने कहा, “जंतर-मंतर पर कोई गोली नहीं चली और न ही वहां गोली चलाने का कोई आदेश दिया गया।” उन्होंने राहुल गांधी से संसद में आकर चर्चा करने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह संसद में सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

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नड्डा ने झारखंड छात्र आंदोलन का भी उठाया मुद्दा

 

जेपी नड्डा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी झारखंड के छात्रों की आवाज नहीं सुन रहे हैं।

 

नड्डा ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के रास्ते में कांटेदार तारों वाली बैरिकेडिंग लगाई गई और कांग्रेस पर इसका आदेश देने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति और गैर-जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने का आरोप भी लगाया।

 

राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा था- आदेश किसने दिया?

 

इससे पहले राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने सवाल किया था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ लाठी, स्पाइक वाले डंडे और पैलेट गन के कथित इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था।

 

राहुल गांधी ने कहा था कि अगर अमित शाह ने खुद कार्रवाई का आदेश दिया था तो उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वहीं, अगर उन्हें इस फैसले की जानकारी नहीं थी तो यह गृह मंत्री की अक्षमता होगी। राहुल गांधी ने दोनों परिस्थितियों में अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।

 

'फैंटेसी बातचीत सुनने में दिलचस्पी नहीं'

 

राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष अमित शाह की किसी “फैंटेसी बातचीत” को सुनने में दिलचस्पी नहीं रखता। उनका कहना था कि विपक्ष केवल इस सवाल का स्पष्ट जवाब चाहता है कि क्या गृह मंत्री ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग और कथित फायरिंग का आदेश दिया था। इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि सरकार छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद पुलिस कार्रवाई पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर संसद में जवाब देंगे।

उत्तराखंड की सरकारी नीतियों में शामिल होंगे छात्रों के सुझाव, CM धामी बोले- विद्यार्थी ही करेंगे राज्य और देश का नेतृत्व

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन, में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने “मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन” पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली “मेरे सपनों का उत्तराखण्ड: एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण” विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

 

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का NEET, JEE, CLAT, SAT जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

 

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

 

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र – छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

 

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि AI हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर AI की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

 

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो.गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा श्रीमती ज्योति यादव, अपर सचिव श्रीमती नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, श्री गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम की अगुवाई में उमड़ा जन-समुद्र, गूंजा राष्ट्र प्रथम का उद्घोष

Yogi tiranga yatra

CM Yogi Adityanath Tiranga Yatra: अनगिनत गुब्बारों, झंडों के बीच तिरंगे में रंगा-सजा ढाई किलोमीटर का रास्ता। असंख्य हाथों में लहराता राष्ट्रध्वज तिरंगा, वंदे मातरम और भारत माता की जय के बारंबार तरंगित होते उच्च स्वर। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच पुष्पवर्षा की निर्बाधित श्रृंखला। राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सोमवार को निकाली गई तिरंगा यात्रा के जरिये गोरखपुर महानगर भव्य और नयनाभिराम दृश्य का साक्षी बना। नगर निगम परिसर से रेलवे स्टेशन चौक तक निकाली गई इस तिरंगा यात्रा में देशभक्ति की बयार बही तो राष्ट्र प्रथम का उद्घोष गुंजायमान होता रहा। हाथ में तिरंगा लेकर करीब ढाई किलोमीटर तक पदयात्रा करने वाले सीएम योगी पर पुष्पवर्षा करने के लिए गुरु गोरखनाथ की नगरी का हर नागरिक उत्साहित दिखाई दिया।

 

तिरंगा यात्रा का शुभारंभ करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निगम परिसर के पार्क में स्थापित वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पार्चन कर प्रथम स्वातंत्र्य समर में उनके योगदान को याद किया। तत्पश्चात मंच पर पहुंचकर उन्होंने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। अपने संबोधन के जरिये तिरंगा को केंद्र में रखकर उन्होंने लोगों में राष्ट्र प्रथम और देशभक्ति की भावना का संचार किया।

इसके बाद वह टाउन हाल पहुंचे और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर तिरंगा यात्रा की अगुवाई करते आगे बढ़े। तिरंगा यात्रा में सीएम के साथ सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और अन्य जनप्रतिनिधि साथ-साथ कदम बढ़ा रहे थे। और, इनके समानांतर चल रहे थे उत्साह से सराबोर स्कूली बच्चे। सबके हाथ में लहरा रहा था राष्ट्रध्वज और राष्ट्रभक्ति के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज रहा था।  

 

यात्रा शुरू होने से पहले ही नगर निगम परिसर में बड़ी संख्या में लोग जुट चुके थे। देशभक्ति के गीतों के बीच स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट्स और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग तिरंगा लेकर पहुंचे थे। बड़ी संख्या में लोग ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की टी-शर्ट व कैप पहने हुए थे। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, लोगों का उत्साह भी बढ़ता गया। सीएम योगी की अगुवाई वाली तिरंगा यात्रा में अपार जनसमूह शामिल हुआ। सभी लोग हाथों में तिरंगा झंडा लहराते हुए चल रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो सड़कों पर तिरंगे के साथ जनसमुद्र उमड़ पड़ा हो। जैसे जैसे यात्रा आगे बढ़ती रही, पूरा मार्ग राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से प्रतिबिंबित होता रहा।

तिरंगा यात्रा में वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे देशभक्ति के ज्वार का माहौल बना रहे थे। नगर निगम से लेकर रेलवे स्टेशन चौक स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा तक सड़क के किनारे पहले से मौजूद हर उम्र वर्ग के लोगों, विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक संगठनों के लोगों ने जयघोष के बीच पुष्पवर्षा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया।

सीएम ने मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन स्वीकार किया। पदयात्रा करते हुए मुख्यमंत्री रेलवे स्टेशन के सामने स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा तक पहुंचे। यहां उन्होंने प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर यात्रा को विराम दिया। महाराणा प्रताप की प्रतिमा के पास मुख्यमंत्री ने तिरंगे गुब्बारे छोड़े और इसके बाद सेल्फी लेकर उन्होंने इस पल को कैमरे में कैद किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुछ बच्चों को चॉकलेट भी दी।

16 स्थानों पर हुआ तिरंगा यात्रा का भव्य स्वागत

तिरंगा यात्रा के मार्ग पर 16 स्थानों पर विभिन्न संगठनों की तरफ से ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ पुष्पवर्षा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली तिरंगा यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। होटल शिवाय के सामने दवा विक्रेता समिति, पतंजलि स्टोर के सामने मारवाड़ी युवा मंच, कचहरी चौक पर अधिवक्ता परिषद, कृपाल वस्त्रालय के सामने सिंधी समाज, जलकल के सामने गोलघर व्यापार मंडल, गांधी आश्रम के सामने मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक सेवा समिति, बलदेव प्लाजा के सामने बलदेव प्लाजा व्यापार एसोसिएशन, गणेश चौक पर सिख समाज, नेशनल मेडिकल स्टोर के समीप अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, काली मंदिर के पास पार्षद मनु जायसवाल, साइबर थाना के सामने पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल, पुलिस लाइन तिराहा पर सराफा मंडल, सीओ कार्यालय के सामने अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, यातायात तिराहा पर राप्ती कॉम्प्लेक्स व्यापार एसोसिएशन, मालकिन होटल के पास चिकित्सा प्रकोष्ठ और वरदान होटल के सामने शिक्षक प्रकोष्ठ की तरफ से यात्रा का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

8 स्थानों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से तिरंगा यात्रा का अभिनंदन

तिरंगा यात्रा को यादगार बनाने के लिए संस्कृतिकर्मियों और लोक कलाकारों ने भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। यात्रा का 8 स्थानों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अभिनंदन किया गया। होटल शिवाय के पास बंटी बाबा ग्रुप, कचहरी चौक पर सोनिका सिंह ग्रुप, जलकल पर सुगम सिंह ग्रुप, गोलघर सेंट्रल के सामने रुचि कोरी ग्रुप, काली मंदिर के पास हीना कोमल शर्मा ग्रुप, पुलिस लाइन तिराहा पर प्रेम पराया ग्रुप, यातायात तिराहा पर गजेंद्र ग्रुप और वरदान होटल के पास विंध्याचल आजाद ग्रुप ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। 

तिरंगा यात्रा को मोबाइल कैमरों में कैद करने की होड़

तिरंगा यात्रा का दृश्य ऐसा अपूर्व था कि सड़क के किनारे खड़े लोगों में इसे अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने और रील बनाने की होड़ मची रही। रोड के डिवाइडर पर,  दुकानों के बाहर, घर की छतों पर हर व्यक्ति तिरंगा यात्रा की याद को तस्वीरों के जरिये अहर्निश जीवंत बनाने को आतुर दिखाई दिया।

उन्नाव में करणी सेना की बैठक में EWS, UGC मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाने का ऐलान

Karani sena Unnao

Rashtriya Rajput Karni Sena: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद से है, जहां उन्नाव में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की जिला कार्यकारिणी की बैठक रविवार को हुई। इसमें संगठन विस्तार के साथ ईडब्ल्यूएस आरक्षण की कथित विसंगतियों, यूजीसी से जुड़े मुद्दों, सामान्य वर्ग के लिए आयु सीमा में छूट और इतिहास से कथित छेड़छाड़ जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

 

बैठक के बाद पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन सामाजिक मुद्दों को लेकर लोगों को जागरूक करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल धर्म, जाति और इतिहास के नाम पर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। बैठक में यूजीसी से जुड़े कथित 'काले कानून' का मुद्दा भी उठाया गया। ईडब्ल्यूएस आरक्षण में जमीन, प्लॉट और मकान से संबंधित शर्तों में बदलाव तथा सामान्य वर्ग को पांच वर्ष की आयु सीमा में छूट देने की मांग पर भी चर्चा हुई।

 

 

पदाधिकारियों ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर संगठन जागरूकता अभियान चलाएगा। बैठक में इतिहास से कथित छेड़छाड़ को लेकर भी वक्ताओं ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जातियों के महापुरुषों को लेकर विवाद पैदा होने से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। लोगों से सामाजिक एकजुटता बनाए रखने की अपील की गई। यदि आगामी चुनाव में सरकारों ने संगठन की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

 

बैठक में संगठन को बूथ और क्षेत्र स्तर तक मजबूत करने तथा अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर भी जोर दिया गया। करणी सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना नहीं है। संगठन सामाजिक मुद्दों को लेकर काम करता है। उन्होंने कहा कि यूजीसी, ईडब्ल्यूएस और इतिहास से जुड़े विषयों पर आगे भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। बैठक में संगठन विस्तार और आगामी दिनों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।

 

Jharkhand Student Protest : रांची में उग्र हुए छात्र, तोड़े बैरिकेड्‍स, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, झड़प के साथ लाठीचार्ज

ranchi student protest

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को और उग्र हो गया। हजारों छात्र विधानसभा घेराव के लिए मार्च करते हुए पुलिस बैरिकेडिंग तक पहुंच गए। बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। झड़प में कुछ छात्रों के घायल होने की भी खबर है।

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9 दिन से भूख हड़ताल पर थे देवेंद्र नाथ महतो

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो नौ दिन से भूख हड़ताल पर हैं। सोमवार को उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद वह एंबुलेंस से आंदोलन स्थल पहुंचे और स्ट्रेचर पर लेटकर विधानसभा मार्च में शामिल हुए। महतो ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और यह अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

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विधानसभा गेट तक पहुंचे प्रदर्शनकारी

पुलिस की अपील के बावजूद छात्र विधानसभा के गेट तक पहुंच गए। विधानसभा का सत्र समाप्त होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वापस घर लौटने की अपील की, लेकिन छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। सरकार ने कथित भर्ती अनियमितताओं की न्यायिक निगरानी में जांच की पेशकश की है, लेकिन JSSC-CGL परीक्षा को एकतरफा रद्द करने से इनकार किया है।

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6 दौर की बातचीत के बाद भी नहीं निकला समाधान

 

सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक आंदोलन खत्म करने पर सहमति नहीं बन सकी है। छात्र कथित परीक्षा अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस बीच, झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते (L Khiangte) को कथित परीक्षा अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी से आंदोलन के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल और बढ़ गई है।

 

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। BJP नेता और झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस और JMM पर भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर निशाना साधा।

 

वहीं, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने झारखंड और महाराष्ट्र में हो रहे छात्र आंदोलनों को युवाओं में बढ़ते असंतोष का संकेत बताया और कहा कि जहां बातचीत की गुंजाइश हो, वहां संवाद और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि विधानसभा जैसे संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकना जरूरी था। सोमवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगहों पर तनाव और झड़प की स्थिति बनी। JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब झारखंड में युवाओं और सरकारी भर्ती व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। पूर्व JPSC प्रमुख की गिरफ्तारी और विधानसभा मार्च के बाद आने वाले दिनों में सरकार पर छात्रों की मांगों को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग

Yogi tiranga yatra

CM Yogi Adityanath Tiranga Yatra Gorakhpur: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सोमवार को गोरखपुर महानगर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। नगर निगम परिसर से रेलवे स्टेशन चौक तक करीब ढाई किलोमीटर की इस यात्रा में देशभक्ति का जनज्वार उमड़ पड़ा। ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव संग हाथ में तिरंगा लेकर पदयात्रा कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साथ देने के लिए हजारों कदम उसी दिशा में बढ़ चले। यात्रा का शुभारंभ करने से पहले मुख्यमंत्री ने उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का तिरंगा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की अमिट गाथा का नाम है।

 

तिरंगा यात्रा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सबसे पहले नगर निगम परिसर स्थित वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पार्चन कर स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान व बलिदान को नमन किया। इसके बाद मंचीय कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हमारा तिरंगा भारत की आन, बान व शान प्रतीक है। आजादी के आंदोलन में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अलग-अलग समय में, अलग-अलग प्रकार के ध्वज लेकर आंदोलन को नई गति दी थी। 1905 में भारत की आजादी का मूलमंत्र स्वदेशी बना था। इसके बाद 1930 के दशक में तिरंगे के बीच चरखा स्वतंत्रता सेनानियों का ध्वज बना था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात तिरंगे के साथ सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले चक्र को लेकर राष्ट्रध्वज स्वीकार किया गया।

पहले राष्ट्रध्वज फहराने के लिए लड़नी पड़ती थी न्यायालयों में लड़ाई

सीएम योगी ने कहा कि जिस राष्ट्रध्वज को फहराने के लिए नागरिकों को न्यायालयों में लड़ाई लड़नी पड़ती थी, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हर नागरिक के अधिकार से जोड़ दिया। कांग्रेस और अन्य दलों की सरकारें नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार नहीं दे पाई थीं, लेकिन मोदी जी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष 2022 में नेशनल फ्लैग कोड में संशोधन करते हुए यह सुनिश्चित किया कि सभी नागरिक अपने घर पर राष्ट्रध्वज को सम्मानपूर्वक लगा सकें। इसी का परिणाम है कि आज देश का हर नगारिक भारत की आन, बान, शान के रूप में अपने घर पर तिरंगा फहराता है। 

महापुरुष व क्रांतिकारी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तिरंगा यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘हर घर तिरंगा’ फहराने के आह्वान का हिस्सा है। 2022 से शुरू ‘हर घर तिरंगा’ अभियान प्रतिवर्ष चरम की ओर बढ़ रहा है। महापुरुष व क्रांतिकारी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। हमारा तिरंगा उन्हीं क्रांतिकारियों व महापुरुषों के बलिदान की अमिट गाथा है। युवाओं से उनका आदर्श छीना गया तो वे गौरव की अनुभूति करने से वंचित रह जाएंगे, इसीलिए पीएम मोदी ने हर घर तिरंगा फहराने का मंत्र दिया है।

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भारत की आजादी का मंत्र बना था तिरंगा

सीएम योगी ने कहा कि कभी यह तिरंगा भारत की आजादी का मंत्र बना था। मंगल पांडेय ने बैरकपुर में आजादी की चिंगारी जलाई थी। गोरखपुर में बंधु सिंह, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, बिठूर (कानुपर) में तात्या टोपे और मेरठ में धनसिंह कोतवाल ने आजादी के आंदोलन को दिशा दी। आजादी के लिए बहुत कीमत चुकानी पड़ी थी। 1922 में गोरखपुर में चौरीचौरा की ऐतिहासिक घटना ने अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं। 

 

1925 में लखनऊ के काकोरी में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, शचीन्द्र नाथ सान्याल, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी आदि क्रांतिकारियों ने देश का लूटा गया धन जो अंग्रेज इंग्लैंड ले जाना चाहते थे, वापस अपने कब्जे में लेने का कार्य किया था। अंग्रेजों ने इसे डकैती कहा था। दुर्भाग्य यह रहा कि 1947 में देश आजाद होने के बाद भी इस ऐतिहासिक घटना को डकैती कहकर पढ़ाया जाता रहा। क्रांतिकारियों का इससे बड़ा और क्या अपमान हो सकता है, लेकिन पीएम मोदी ने इस घटना को ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ का नाम दिया। इस घटना में शामिल क्रांतिकारियों को अलग-अलग जेलों में फांसी दी गई।

एक परिवार के नाम पर होता था संस्थाओं व सड़कों का नामकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रांतिकारियों को वह सम्मान नहीं मिल पाया था, जिसके वे हकदार थे। पूर्व की सरकारों में इनके नाम पर स्मारक नहीं बनाए जाते थे, इनके नाम पर संस्थाओं व सड़कों का नामकरण नहीं किया जाता था। तब एक ही परिवार के नाम पर संस्थानों के नाम रखे जाते थे, योजनाएं चलाई जाती थीं। आज भारत में स्वतंत्रता संग्राम बलिदानियों को सम्मान दिया जा रहा है। हर घर तिरंगा के माध्यम से भी उन्हें सम्मान देने का कार्य किया जा रहा है। 

इस वर्ष 5 करोड़ घरों पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने लोगों का आह्वान किया कि तिरंगा यात्रा के बाद वे अपने हाथों में मौजूद तिरंगे को अपने घर पर लगाएं और उसके साथ सेल्फी लेकर अपलोड करें। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष 5 करोड़ घरों में तिरंगा लहराने के लक्ष्य को तय किया है। इसके साथ सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी, निजी, व्यावसायिक तथा व्यापारिक संस्थानों के भवनों पर तिरंगा लहराया जाएगा। यह कार्य राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों के प्रति हमारे सम्मान का प्रतीक है। इन बलिदानियों ने जाति न देखकर राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ कार्य किया। हम तिरंगा, राष्ट्रगान तथा राष्ट्रगीत को सम्मान देकर इन क्रांतिकारियों एवं वीर आत्माओं को सम्मान दे सकते हैं। भारत सरकार ने राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत के अपमान को संज्ञेय अपराध बनाया है। हम सबका यह दायित्व है कि अपने राष्ट्र के प्रतीक को सम्मान दें।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद, सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, विपिन सिंह, सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ल, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता आदि प्रमुख रूप से मंच पर मौजूद रहे।

TVS, Bajaj, Ather, Ola, Vida की रिकॉर्ड बिक्री, लोगों की पसंद क्यों बन रहे हैं Electric Scooters

electric scooter

भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री ने जुलाई 2026 में नया रिकॉर्ड बनाया है। Federation of Automobile Dealers Associations (FADA) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में देश में पहली बार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री 2 लाख यूनिट के पार पहुंच गई। इस दौरान कुल 2,04,362 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री हुई, जो जुलाई 2025 में बिके 1,08,516 यूनिट के मुकाबले 88.3 फीसदी ज्यादा है।

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जून 2026 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की 1,94,963 यूनिट बिकी थीं। ऐसे में जुलाई में बिक्री में महीने-दर-महीने 4.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुल दोपहिया वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की हिस्सेदारी भी बढ़कर 11.2 फीसदी हो गई।

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TVS ने बनाया दबदबा

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में TVS Motor Company ने अपना दबदबा कायम रखा। कंपनी ने जुलाई 2026 में 55,499 इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचे। जुलाई 2025 में कंपनी की बिक्री 23,592 यूनिट थी। इस तरह सालाना आधार पर TVS की बिक्री में 135.2 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि हुई। TVS ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में 27.2 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की, जो कंपनी की अब तक की सबसे ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है। कंपनी के इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो में iQube और Orbiter जैसे मॉडल शामिल हैं।

 

Bajaj दूसरे नंबर पर

 

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिक्री में Bajaj Auto 45,613 यूनिट के साथ दूसरे स्थान पर रही। कंपनी ने जुलाई 2025 में 20,557 यूनिट की बिक्री की थी। इस तरह Bajaj की सालाना बिक्री में 121.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई। Bajaj भारतीय बाजार में Chetak EV इलेक्ट्रिक स्कूटर को अलग-अलग बैटरी पैक विकल्पों के साथ बेचती है।

 

Ather की बिक्री में 70 फीसदी से ज्यादा उछाल

Ather Energy 30,357 यूनिट की बिक्री के साथ तीसरे स्थान पर रही। जुलाई 2025 में कंपनी ने 17,834 यूनिट बेची थीं। यानी सालाना आधार पर Ather की बिक्री में 70.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कंपनी भारत में 450 और Rizta सीरीज के इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचती है।

 

Hero Vida चौथे और Ola पांचवें नंबर पर

 

Hero MotoCorp की Vida इलेक्ट्रिक स्कूटर रेंज ने जुलाई में 22,900 यूनिट की बिक्री दर्ज की। पिछले साल इसी महीने 10,835 यूनिट बिकी थीं। इस तरह कंपनी की बिक्री में 111.3 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई। Ola Electric 14,106 यूनिट की बिक्री के साथ पांचवें स्थान पर रही। हालांकि, कंपनी की बिक्री में सालाना आधार पर 23.5 फीसदी की गिरावट आई। जुलाई 2025 में Ola ने 18,450 इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचे थे।

इन कंपनियों की भी बढ़ी बिक्री

Greaves Electric Mobility ने Ampere इलेक्ट्रिक स्कूटरों के दम पर जुलाई 2026 में 10,125 यूनिट की बिक्री की। कंपनी की बिक्री में सालाना आधार पर 137.3 फीसदी की वृद्धि हुई। इसके अलावा River Mobility ने 5,954 यूनिट और BGauss Auto ने 5,518 यूनिट की बिक्री की। अन्य इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों की कुल बिक्री 14,290 यूनिट रही।

सबसे स्‍वच्‍छ शहर में समोसे में आलू नहीं, निकला कॉकरोच, लोग बोले यहां भी CJP

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इंदौर खानेपीने के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां खाने पीने की चीजों में सफाई और सुरक्षा का ध्‍यान नहीं रखा जा रहा है। इंदौर की एक प्रसिद्ध दुकान के समोसे में मरा हुआ काकरोच निकला। शख्‍स ने वीडियो बनाकर दिखाया तो दुकानदार ने कहा कि गलती से आ गया होगा। इसके बाद ग्राहक ने इसकी शिकायत सीएम हेल्‍पलाइन में की है।

घटना सोमवार को चिकमंगलूर चौराहा स्थित पर स्‍थित रतलाम नमकीन रेस्‍टोरेंट की है। इंदौर के पीयूष मौर्य बारिश के दौरान यहां रुके और रतलाम नमकीन से समोसा खरीदा। उन्होंने जैसे ही समोसे का एक टुकड़ा खाया, उसमें मरा हुआ कॉकरोच नजर आया। उन्होंने वीडियो बनाकर दुकानदार को इसकी जानकारी दी। पीयूष के मुताबिक, दुकानदार ने कहा कि कॉकरोच गलती से आ गया होगा। उसने यह भी कहा कि वीडियो बनाना है तो बना लो, इंसान से गलती हो जाती है। इसे जानबूझकर नहीं किया।

मामले को लेकर दोनों पक्षों में कुछ देर बहस हुई। इसके बाद दुकानदार ने शिकायत करने की बात कही। पीड़ित ने खाद्य विभाग में शिकायत दर्ज कराई है।

समोसे में कॉकरोच मिलने की शिकायत के बाद दुकान में खाद्य सामग्री की साफ-सफाई और रखरखाव पर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के मौसम में खाद्य पदार्थों के भंडारण और स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी जरूरी होती है। शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले में कार्रवाई की बात कही है।

Electric Flying Car : पेट्रोल-डीजल नहीं, बिजली से उड़ने की तैयारी, पहाड़ की समस्या से आया आइडिया, छात्र ने किया चमत्कार, चीन के दावे को नकारा

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अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किल रास्ते भी नई राह दिखा सकते हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले रवि तम्ता ने इसी सोच को हकीकत में बदलने की कोशिश की है। पहाड़ी इलाकों में सफर की मुश्किलों को करीब से देखने के बाद उन्होंने एक ऐसी इलेक्ट्रिक उड़ने वाली कार तैयार की है, जो भविष्य में पहाड़ों में यात्रा को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

 

रवि तम्ता ने अपने स्टार्टअप Hapida Sky Private Limited के जरिए सिंगल-सीटर फ्लाइंग व्हीकल HAPIDA SKYNeX डेवलप  किया है। इसके प्रोटोटाइप का सफल टेस्ट फ्लाइट भी किया जा चुका है। पेट्रोल-डीजल नहीं, बिजली से उड़ने की तैयारी

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HAPIDA SKYNeX की सबसे खास बात यह है कि इसे पारंपरिक विमान की तरह एविएशन फ्यूल से नहीं, बल्कि बिजली से चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी इसे पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल के तौर पर विकसित कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य में लोगों को परिवहन का ज्यादा साफ और सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराना है। फिलहाल यह वाहन प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसे व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं माना जा सकता। लेकिन इसकी शुरुआती उड़ान ने इस इनोवेशन को चर्चा में जरूर ला दिया है।

 

पहाड़ की समस्या से आया उड़ने वाली कार का आइडिया

 

रवि तम्ता के लिए यह सिर्फ कोई तकनीकी प्रयोग नहीं था। इसके पीछे उनके अपने पहाड़ी क्षेत्र की रोजमर्रा की समस्या थी। अल्मोड़ा के काफलीखान गांव, जो जागेश्वर धाम के पास स्थित है, से आने वाले रवि ने देखा कि पहाड़ों में कम दूरी भी सड़क मार्ग से तय करने में काफी समय लग जाता है।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उनके गांव और घर के बीच करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 90 मिनट तक लग सकते हैं। तम्ता का मानना है कि अगर व्यक्तिगत उड़ने वाला वाहन सफल होता है तो यही दूरी भविष्य में महज 10 से 15 मिनट में तय की जा सकती है। यही सोच धीरे-धीरे उनके सपने में बदली और फिर कई वर्षों की मेहनत के बाद HAPIDA SKYNeX का प्रोटोटाइप तैयार हुआ।

 

ड्रोन तकनीक को बनाया आधार

 

रवि तम्ता ने इस प्रोजेक्ट पर कई वर्षों तक काम किया। उन्होंने मॉडिफाइड ड्रोन टेक्नोलॉजी की मदद से ऐसा वाहन विकसित करने की कोशिश की, जो एक व्यक्ति को लेकर उड़ सके। अल्मोड़ा के खुले क्षेत्र में रवि और उनकी टीम ने इसके शुरुआती उड़ान परीक्षण किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वाहन के विकास और टेस्टिंग से जुड़े वीडियो भी साझा किए।

 

सफल प्रदर्शन के बाद उन्हें कई लोगों के संदेश और फोन आने लगे। रवि ने सोशल मीडिया पर बताया कि प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत नहीं कर पाने के कारण अब वह खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए वाहन के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भी शेयर किया वीडियो

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रवि तम्ता के फ्लाइंग व्हीकल का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। इससे इस स्थानीय इनोवेशन को और ज्यादा लोगों तक पहुंच मिली।

 

चीन से आयात के दावे को किया खारिज

फ्लाइंग व्हीकल को लेकर कुछ जगहों पर इसके चीन से आयात किए जाने के दावे भी सामने आए। रवि तम्ता ने इन दावों को खारिज किया है। उन्होंने पत्रकारों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में आने का न्योता दिया है, ताकि वे खुद देख सकें कि वाहन को किस तरह विकसित किया गया है।

 

बाकी है अभी लंबा सफर 

 

HAPIDA SKYNeX की सफल टेस्ट फ्लाइट निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे अभी व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह फिलहाल प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसके सुरक्षित, तकनीकी तथा व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले कई चरणों से गुजरना बाकी है। फिर भी रवि तम्ता की कहानी यह बताती है कि बड़े इनोवेशन हमेशा बड़े शहरों या बड़ी कंपनियों से ही नहीं आते। कभी-कभी किसी छोटे पहाड़ी गांव में रहने वाला व्यक्ति अपने आसपास की समस्या को देखकर ऐसा सपना देखता है, जिसे बाकी दुनिया असंभव मानती है।

यूपी के गांवों में खुलेगा कमाई का नया रास्ता, 10 रुपए लीटर खरीदा जाएगा गोमूत्र

Cow Urine Purchase Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है। बुलंदशहर में किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोमूत्र की खरीद शुरू की गई है। किसानों और पशुपालकों से 10 रुपए प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस मॉडल को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी है। इससे गोवंश पालने वाले परिवारों को दूध के साथ गोमूत्र से भी अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिल सकेगा।

 

बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एफपीओ के जरिए शुरू हुए इस प्रयोग से आसपास के 15 गांवों को जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र एकत्र करने के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्र बनाए गए हैं। वर्तमान में इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है। आगे खरीद की दर बढ़ाकर इसे 20 रुपए प्रति लीटर करने की भी योजना है।

गांवों में लगाए गए 200 लीटर क्षमता के टैंक

गोमूत्र के संग्रहण के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता के टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही इसकी खरीद और संग्रह की व्यवस्था की गई है। स्थानीय स्तर पर संग्रहण की व्यवस्था होने से पशुपालकों, विशेषकर महिलाओं को इससे जोड़ना आसान हुआ है।

 

इस पूरी व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। गांवों में गोमूत्र एकत्र करने में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपए कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए भी गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है।

300 महिलाएं बनीं शेयरहोल्डर

डॉ. प्रवीण ने बताया कि इस पहल को केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण से भी जोड़ा गया है। करीब 300 महिलाओं के सहयोग से यह काम शुरू किया गया है और इन सभी महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया गया है। इससे महिलाएं केवल संग्रहण व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इस पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जुड़ी हुई हैं।

 

गोमूत्र संग्रह के एवज में मिलने वाला कमीशन महिलाओं के लिए छोटी आय का नियमित साधन बन रहा है। इसका दायरा बढ़ने पर अधिक संख्या में ग्रामीण महिलाओं को इससे जोड़ने की संभावना है। खासतौर पर गोपालन करने वाले परिवारों की महिलाओं के लिए यह घर और गांव में रहते हुए आमदनी बढ़ाने का जरिया बन सकता है।

जड़ी-बूटियों और गोमूत्र से तैयार हो रहीं दवाएं

एकत्र किए गए गोमूत्र का उपयोग खेती के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर खेतों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं तैयार की जाती हैं। इन्हें बाद में समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है।

 

इस मॉडल का उद्देश्य खेती में रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित उत्पादों को बढ़ावा देना भी है। इससे एक तरफ गोवंश से मिलने वाले उत्पादों का उपयोग बढ़ेगा तो दूसरी तरफ प्राकृतिक और जैविक खेती को भी प्रोत्साहन मिल सकेगा। तैयार उत्पादों की बिक्री समितियों को किए जाने से इसके लिए स्थानीय स्तर पर बाजार की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी होगी कमाई

अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में गोपालन से होने वाली आय मुख्य रूप से दूध और दुग्ध उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस प्रयोग के जरिए गोमूत्र को भी आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। 10 रुपए प्रति लीटर की दर से खरीद होने पर पशुपालकों को गोवंश से अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। आगे इसे 20 रुपए प्रति लीटर तक ले जाने की योजना सफल होती है तो पशुपालकों की आय में और वृद्धि हो सकती है।

 

गोवंश से दूध के अतिरिक्त दूसरे उत्पादों के जरिए भी आय होने पर उनके संरक्षण को आर्थिक आधार मिल सकता है। गोमूत्र की नियमित खरीद की व्यवस्था विकसित होने से गोपालकों को पशुओं की देखभाल के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।

जैविक खेती और गो संरक्षण को एक साथ बढ़ावा

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि बुलंदशहर में शुरू हुए इस मॉडल को गो संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और जैविक/प्राकृतिक खेती को एक साथ जोड़ने वाले प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। इसमें गांव से गोमूत्र का संग्रह होता है, महिलाओं को इससे आय मिलती है और एकत्र गोमूत्र से खेती के लिए उत्पाद तैयार कर उन्हें समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। यह पूरी तरह से केमिकल मुक्त है और फसलों की वृद्धि में सहायक होता है।

 

पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों के आधार पर इसे प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में विस्तार देने की योजना है। इससे गांवों में गोमूत्र संग्रह केंद्रों का नेटवर्क विकसित होगा, जिससे पशुपालकों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत तैयार होने के साथ गो संरक्षण को भी आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।