पिता को जला दो और डेथ सर्टिफिकेट भिजवा दो, 4 बेटों- बेटियों के पिता का शव वृद्धाश्रम में करता रहा इंतजार

death of a father

समाज में रिश्‍ते किस कदर दरक रहे हैं, इसका एक और उदाहरण सामने आया है। पिता की मौत के बाद उनका शव वृद्धाश्रम में रखा रहा। बच्‍चे अंतिम संस्‍कार तक में नहीं पहुंचे। जब उन्‍हें सूचना दी गई तो उन्‍होंने कहा कि पिता का शव जला दो और डेथ सर्टिफिकेट भिजवा दो। बता दें कि इसके पहले एक मामला सामने आया था जिसमें पिता की मौत के बाद उनकी तीन बेटियों ने अंतिम संस्‍कार में पहुंचने से यह कहकर मना कर दिया था कि फुर्सत नहीं है।

ताजा मामला भोपाल में 'अपना घर' वृद्धाश्रम का प्रबंधन 70 वर्षीय घनश्याम की मौत का है। उनकी मौत के बाद दो दिन तक उनके परिजन के आने का इंतजार किया गया। बेटियों ने आने से इनकार कर दिया, बेटों ने भी पहुंचने में असमर्थता जताई। परिवार की ओर से बार-बार आश्रम प्रबंधन से ही अंतिम संस्कार करने और डेथ सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने को कहा जाता रहा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा ने बताया कि बुजुर्ग घनश्याम की मौत 4 अगस्त 2026 को हुई थी। परिवार से संपर्क की कोशिशें की गईं, लेकिन कोई अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। शव को दो दिन तक इस उम्मीद में रखा गया कि शायद कोई अपना आएगा। बाद में पुलिस की मदद से अंतिम संस्कार कराया गया।

हमारे लिए कुछ नहीं किया : माधुरी मिश्रा ने बताया कि बुजुर्गों की मौत के बाद परिवार के नहीं पहुंचने की स्थिति में आश्रम के सामने सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि शव को सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। घनश्याम की मौत के बाद प्रबंधन ने उनकी बेटी से संपर्क किया। उसने कहा कि पिता ने अपनी संपत्ति बेटों को दे दी थी। उसे पिता की संपत्ति में कुछ नहीं मिला, इसलिए वह अंतिम संस्कार के लिए क्यों आए?

जला दो और डेथ सर्टिफिकेट भेज दो : घनश्याम टायर-ट्यूब कारोबारी थे और 4 अगस्त को उनकी मौत हो गई थी। उन्‍होंने अपने 4 बच्चों को पालपौस कर बडा किया था। वे इंदौर के थे और अपनी जिंदगी के आखिरी 4 साल ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में ही रहे। आश्रम में प्रवेश के समय बुजुर्गों से परिवार और संपर्क की पूरी जानकारी ली जाती है। घनश्याम इंदौर के रहने वाले थे। परिवार भी इंदौर में ही रहता है। वे साइकिल के टायर-ट्यूब का थोक कारोबार करते थे। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। बेटों बेटियों से संपर्क किया तो वे दो दिन तक आने को लेकर तरह-तरह के बहाने बनाते रहे। कभी ट्रेन का टिकट नहीं होने की बात कही तो कभी बस में जगह नहीं होने की। इस बीच आश्रम शव को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद करता रहा। बाद में उन्‍होंने कहा कि पिता को जला दो और डेथ सर्टिफिकेट भेज दो। जब परिवार की ओर से डेथ सर्टिफिकेट की मांग की गई तो माधुरी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के अंतिम संस्कार में परिवार शामिल नहीं हुआ, उसके मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी आश्रम पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।

योगी सरकार की ओटीएस योजना : करदाताओं को राहत, निकायों की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

UP Property Tax Relief: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। योगी सरकार ने प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों में लंबित संपत्ति कर यानी गृहकर, जलकर एवं सीवरकर की प्रभावी वसूली के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार की इस पहल से लंबे समय से संपत्ति कर के बकाये में फंसे लाखों करदाताओं को राहत मिलने के साथ ही नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी।

 

योजना का लाभ प्रदेश के 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायतों में लंबित संपत्ति कर के बकायेदारों को मिलेगा। सरकार का उद्देश्य पुराने कर बकायों का सरल एवं व्यावहारिक तरीके से निस्तारण कराना, करदाताओं पर आर्थिक दबाव कम करना और कर संबंधी न्यायालयीय विवादों में कमी लाना है।

15 अगस्त से 15 दिसंबर तक चलेगी योजना

एकमुश्त समाधान योजना की अवधि चार माह निर्धारित की गई है और इसका क्रियान्वयन 15 अगस्त 2026 से 15 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। नगरीय निकायों द्वारा 15 अगस्त से 14 सितंबर 2026 के बीच सभी संबंधित करदाताओं एवं हितधारकों को योजना की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा। जिससे अधिक से अधिक पात्र करदाता योजना का लाभ उठा सकें।

तीन किस्तों में जमा कर सकेंगे बकाया

वहीं करदाताओं को राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने ओटीएस के अंतर्गत बकाया संपत्ति कर के भुगतान के लिए अधिकतम तीन किस्तों की सुविधा भी प्रदान की है। करदाता को योजना लागू होने की तिथि से 30 दिन के भीतर कुल बकाये की एक-तिहाई धनराशि जमा करनी होगी। बाकी शेष दो-तिहाई धनराशि अगले दो माह में दो मासिक किस्तों के माध्यम से जमा की जा सकेगी। इस प्रकार योजना के अंतर्गत देय संपूर्ण धनराशि का भुगतान अधिकतम तीन माह की अवधि में अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। 

निकायों की आय बढ़ेगी, शहरों में होंगे विकास कार्य

नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ नागरिकों को बेहतर नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ओटीएस योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे लंबे समय से लंबित कर बकाये का समाधान होगा और करदाताओं को पुराने बकाये के निस्तारण का सरल अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि योजना के जरिए नगरीय निकायों को लंबित राजस्व की प्रभावी एवं समयबद्ध वसूली हो सकेगी।

 

मंत्री एके शर्मा ने बताया कि प्राप्त राजस्व का उपयोग शहरों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक जनसुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकायों की आय के स्रोत मजबूत हों और वे अपने विकास कार्यों के लिए अधिक सक्षम बनें। ओटीएस योजना के माध्यम से सरकार ने करदाताओं की सुविधा और नगरीय निकायों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण, दोनों को प्राथमिकता दी है।

जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

Janta Darshan Gorakhpur CM Yogi : रविवार शाम गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करने के बाद सोमवार सुबह जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात की। उन्होंने समस्या लेकर आए सभी लोगों की ध्यान से बात सुनी। उनके प्रार्थना पत्र लिए और आत्मीयता से बोले, ‘घबराइए मत, आपकी समस्या का समाधान जरूर कराया जाएगा।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका त्वरित, गुणवत्तापूर्ण व पारदर्शी निराकरण कराएं।

 

सोमवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। अपनत्व के भाव से ‘कहां से आए हैं, क्या बात है’, कहते हुए एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। भरोसा दिया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी परेशान होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। 

इलाज के लिए देंगे पर्याप्त आर्थिक सहायता

जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सहायता का अनुरोध लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा देते हुए कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी, सरकार पर्याप्त आर्थिक सहायता देगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए धनराशि दी जाएगी। 

मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने की गोसेवा

गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान सोमवार सुबह मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। शिवावतार गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। उन्होंने मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गोशाला में सीएम योगी ने गोवंश को खूब दुलारा और अपने हाथों से उन्हें गुड़ खिलाया।

Sarangpur : सारंगपुर में दर्दनाक हादसा, 11 लोगों से भरी ईको कार नाले में बही, 7 की मौत, 2 ने कूदकर बचाई जान, 2 लापता

sarangpur

मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर के पड़ाना कस्बे में सोमवार को बारिश के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। सड़क के ऊपर से बह रहे तेज पानी को पार करने की कोशिश में 11 लोगों से भरी ईको कार उफनते नाले में बह गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 2 लोगों ने कार से कूदकर अपनी जान बचाई। 2 लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। कार में सवार सभी लोग देवास जिले के रहने वाले बताए गए हैं। गहरा नाला होने के कारण कार देखते ही देखते पानी में डूब गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

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तेज बहाव के बावजूद नाला पार करने की कोशिश

जानकारी के मुताबिक, सोमवार को क्षेत्र में तेज बारिश के कारण पड़ाना कस्बे में नाला उफान पर था। सड़क के ऊपर से पानी तेज बहाव के साथ बह रहा था। इसी दौरान ईको कार चालक ने पानी का बहाव तेज होने के बावजूद वाहन को नाले से पार कराने की कोशिश की।  कार जैसे ही पानी में उतरी, तेज बहाव की चपेट में आ गई। कुछ ही देर में कार सड़क से बहकर गहरे नाले की ओर चली गई और पानी में समा गई। कार में चार बच्चे, चार महिलाएं और तीन पुरुष समेत कुल 11 लोग सवार थे।

 

दो लोगों ने कूदकर बचाई जान

हादसे के बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। इस दौरान दो पुरुष कार से कूदकर बाहर निकलने में सफल रहे। ग्रामीणों ने भी रस्सियों की मदद से राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग किया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। सारंगपुर एसडीएम और एसडीओपी समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए।

 

कई घंटे के रेस्क्यू के बाद 7 शव बरामद

 

रेस्क्यू टीमों ने कई घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। दोपहर करीब 2 बजे तक 7 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे। वहीं, दो अन्य लोगों की तलाश जारी थी। बताया जा रहा है कि हादसे में सबसे पहले करीब तीन साल के बच्चे का शव बरामद हुआ। इसके बाद रेस्क्यू टीमों ने अन्य लोगों की तलाश तेज कर दी।

 

लोगों ने चालक को किया था सावधान

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे से पहले मौके पर मौजूद करीब पांच-छह लोगों ने चालक को कार आगे नहीं बढ़ाने की सलाह दी थी। लोगों ने तेज बहाव को देखते हुए बारिश रुकने और पानी कम होने तक इंतजार करने के लिए कहा था। आसपास मौजूद लोग भी उस समय नाला पार नहीं कर रहे थे। इसके बावजूद चालक ने कार को तेज बहाव वाले पानी में उतार दिया। कुछ ही पल में वाहन नियंत्रण से बाहर होकर नाले की ओर बहने लगा। पुलिस और प्रशासन की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। हादसे के कारणों और मृतकों की पहचान को लेकर प्रशासन की ओर से आगे की जानकारी जुटाई जा रही है।

80वां स्वतंत्रता दिवस 2026: सुभाषचंद्र बोस ने आजादी की लड़ाई को कैसे दी नई दिशा? जानिए उनका योगदान

netaji subhash chandra bose

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाषचंद्र बोस का योगदान अविस्मरणीय और क्रांतिकारी रहा है। वर्ष 2026 में जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तब स्वाधीनता संग्राम में उनके शौर्य, नेतृत्व और अमर बलिदान को याद करना अत्यंत प्रासंगिक है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भारत की आजादी में मुख्य योगदान को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

 

1. भारतीय राष्ट्रीय सेना (आज़ाद हिन्द फ़ौज – INA) का पुनर्गठन

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी ने विदेश में रहकर सशस्त्र क्रांति का बिगुल बजाया। उन्होंने 1943 में सिंगापुर पहुँचकर 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' की कमान संभाली और उसे एक अनुशासित व शक्तिशाली सेना में बदला। इसमें महिलाओं के लिए 'रानी झांसी रेजिमेंट' का भी गठन किया गया, जो महिला सशक्तिकरण का एक अप्रतिम उदाहरण था।

 

2. 'आज़ाद हिंद सरकार' की स्थापना

21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने सिंगापुर में भारत की पहली 'अस्थाई आज़ाद हिंद सरकार' (Provisional Government of Free India) का गठन किया। इस सरकार को दुनिया के 9 देशों (जिनमें जापान, जर्मनी, इटली आदि शामिल थे) ने आधिकारिक मान्यता दी। इस सरकार का अपना बैंक, मुद्रा, डाक टिकट और गुप्तचर प्रणाली थी।

 

3. दिल्ली चलो: 

नेताजी का मानना था कि अहिंसा के साथ-साथ सशस्त्र क्रांति भी जरूरी है। उन्होंने विदेशों में जाकर भारतीयों को लामबंद किया और 'आजाद हिंद फौज' (INA) की कमान संभाली। उनके 'दिल्ली चलो' के नारे ने पूरे देश में क्रांति की लहर पैदा कर दी थी।

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4. अमर नारे: “जय हिंद” और “तुम मुझे खून दो…”

नेताजी ने देशवासियों को एक सूत्र में पिरोने और युवाओं में देशभक्ति का नया जोश भरने के लिए ऐतिहासिक नारे दिए:

“जय हिंद”- जो बाद में पूरे देश का राष्ट्रीय अभिवादन बना।

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा!”- इस आह्वान ने भारत के युवाओं को आजादी की बलिदानी वेदी पर सब कुछ न्योछावर करने के लिए प्रेरित किया।

“दिल्ली चलो!”- यह आज़ाद हिंद फ़ौज का मुख्य सैन्य उद्घोष था।

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5. सैन्य अभियान और पूर्वोत्तर में तिरंगा फहराना

आज़ाद हिंद फ़ौज ने जापानी सेना के सहयोग से भारत की पूर्वी सीमाओं पर ब्रिटिश सेना के खिलाफ सीधा युद्ध लड़ा। 1944 में INA ने अंडमान और निकोबार द्वीपों को अंग्रेजों से मुक्त कराया और उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा। इसके अलावा, फ़ौज ने कोहिमा और इंफाल की सीमाओं तक पहुँचकर भारतीय भूमि पर तिरंगा फहराया।

 

6. ब्रिटिश सेना में विद्रोह और भारत छोड़ने पर विवशता

यद्यपि द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में INA को सैन्य रूप से पीछे हटना पड़ा, लेकिन दिल्ली के लाल किले में चले 'आज़ाद हिंद फ़ौज के मुकदमों' (Red Fort Trials) ने पूरे देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन-आक्रोश भड़का दिया। इसके परिणामस्वरूप:-

 

  • भारतीय नौसेना (Royal Indian Navy Mutiny, 1946) और थल सेना में विद्रोह की लहर दौड़ गई।
  • अंग्रेजों को यह स्पष्ट हो गया कि वे अब भारतीय सैनिकों के बल पर भारत पर शासन नहीं कर सकते, जिसने 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

 

नेताजी सुभाषचंद्र बोस केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक युगदृष्टा और क्रांति के प्रतीक थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ला खड़ा किया और सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। 80वें स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर देश उनके अमूल्य योगदान को नमन करता है।

Weather Update : MP-राजस्थान में मूसलाधार बारिश, 15 राज्यों में अलर्ट; असम में बाढ़ से 100 की मौत

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Weather Update 10 August : राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वोत्तर के कई इलाकों में सोमवार को भी बारिश का दौर जारी है। असम में बाढ़ से अब तक 100 से ज्यादा की मौत हो गई। मौसम विभाग ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश 15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया।

 

पिछले 24 घंटों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा और उत्तराखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश में बहुत भारी वर्षा तथा अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भारी वर्षा दर्ज की गई।

 

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से आज पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है।

 

 उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास 12 अगस्त 2026 के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 12 से 14 अगस्त 2026 के दौरान ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इस सप्ताह पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।

 

मध्यप्रदेश में कई जिलों में आफत की बारिश

मध्यप्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद कई जिलों में पिछले 24 घंटों में हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राजधानी भोपाल सहित सीहोर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, खरगौन, रतलाम, मंडला और डिंडौरी समेत कई जिलों में भारी बारिश होने के कारण इसका जनजीनवन पर असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कई जिले हाई अलर्ट पर हैं।

 

पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह 8 बजे तक भोपाल में 7 इंच, नर्मदापुरम में 4.84 इंच, रायसेन में 4.80 इंच, राजगढ़ में 4.41 इंच, पचमढ़ी में 3.43 इंच, नरसिंहपुर में 3.27 इंच और गुना में 2.99 इंच बारिश दर्ज की गई है। ALSO READ: मध्यप्रदेश में कई जिलों में आफत की बारिश, भोपाल में 7 इंच बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई जिलों में नदी-नाले उफान पर, निचले इलाके में जलभराव

 

असम में 100 की मौत

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, राज्य में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। सात जिलों में अभी भी 1,37,500 से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इस वजह से अब तक 100 लोगों की मौत हो गई। बाढ़ की वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

झालावाड़ में स्कूल बना टापू

राजस्थान में झालावाड़ जिले के कचराखेड़ी गांव में स्कूल के चारों ओर पानी भर गया। करीब 40 बच्चें और शिक्षक स्कूल में ही फंस गए। पुलिस के जवानों, प्रशासन और ग्रामीणों ने सावधानीपूर्वक स्कूल परिसर में पहुंचकर सभी सुरक्षित बाहर निकाला। समय रहते रेस्क्यू होने से बड़ा हादसा टल गया।

‘बोल कांवड़िया, बोल बम…’ जबलपुर में सीएम डॉ. मोहन यादव ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल, बजाया डमरू

भोपाल। 'बोल कांवड़िया, बोल बम…' जयकारा जब गूंजा तो भक्तों का रोम-रोम रोमांचित हो उठा। भक्त ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूम उठे। लगातार बजते ढोल-नगाड़ों ने माहौल को और उत्साह से भर दिया। दरअसल,  मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर का माहौल सोमवार को पूरी तरह भक्तिमय रहा। यहां के रांझी में संस्कार कांवड़ यात्रा निकाली गई। इस कांवड़ यात्रा में प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए। उन्होंने फूलों की बारिश कर कांवड़ियों का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने खुद कांवड़ उठाई, उत्साह से डमरू भी बजाया और दादा गुरु के साथ कांवड़ यात्रा में पैदल भी चले। इस दौरान कई जन-प्रतिनिधि भी उनके साथ थे। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज सावन मास का पवित्र सोमवार है। आज मां नर्मदा का आशीर्वाद सबको मिल रहा है। भगवान भोलेनाथ को जल अर्पण करने के लिए कांवड़िये मां नर्मदा का जल लेकर जा रहे हैं। कांवड़ियों का सैलाब समुद्र की लहर के समान दिखाई दे रहा है। जहां तक नजर जा रही है, वहां तक कांवड़िये ही कांवड़िये दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कह कि ये कांवड़िये अपनी साधना-भक्ति-संकल्प लेकर मां नर्मदा का जल लेकर निकले हैं। मां नर्मदा भी अपने भक्तों के साथ जल के रूप में इस यात्रा में शामिल हैं। 

 

धर्म के लिए सबकुछ कर रही सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांवड़ यात्रा तो बहुत देखीं, लेकिन इतनी बड़ी कांवड़ यात्रा में पहली बार देख रहा हूं। यह पवित्र महीना सावन भगवान भोलेनाथ की भक्ति का महीना है। यह कांवड़िये दादा गुरु के नेतृत्व में पूरे भक्ति भाव के साथ यात्रा में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार धार्मिक पर्यटन के लिए, श्रद्धालुओं के लिए, सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के कार्य कर रही है। हमारी सरकार एक तरफ इन कांवड़ यात्रियों को पूरी सुविधाएं देने का प्रयास कर रही है, दो दूसरी तरफ देव स्थानों को भी सुविधायुक्त कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की जड़ों में सनातन संस्कृति है। सनातन संस्कृति आत्म अनुशासन, प्रगति और उल्लास का मार्ग प्रशस्त करती है। सनातन संस्कृति जीवन की चुनौतियों से संघर्ष करना सिखाती है। 

 

जीवन का मर्म केवल खाना-पीना नहीं-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज इस यात्रा में शामिल संत ये संदेश भी देते हैं कि जीवन में खाने-पीने के बजाए, पवित्र मार्ग पर चल कर परमात्मा तक पहुंचा जा सकता है। दादा गुरु ने जीवन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है कि जल के आधार पर भी जीवन गुजारा जा सकता है। दादा गुरु नर्मदा के जल के भरोसे जीवन को चलायमान किए हुए हैं। उनका आशीर्वाद हम सभी को मिलता रहे। नर्मदा के कण-कण में शंकर है। मैं इस यात्रा के लिए सभी को बधाई देता हूं।

‘मक्का रक्षा समझौता 2026’: पाक, सऊदी और तुर्की की नई घेराबंदी — क्या भारत-पाक युद्ध की स्थिति में बदलेगा युद्ध क्षेत्र?

Mecca Defense Pact 2026

7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में एक ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defence Agreement) पर हस्ताक्षर किए गए। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा हस्ताक्षरित इस समझौते में नाटो (NATO) की धारा 5 की तर्ज पर “एक पर हमला, सभी पर हमला” (An attack on one is an attack on all) का सामूहिक रक्षा सिद्धांत लागू किया गया है।

यह समझौता केवल मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को ही नहीं बदलता, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत के रणनीतिक संतुलन और सुरक्षा तंत्र के लिए भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

1. मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के 4 मुख्य स्तंभ

इस त्रिस्तरीय गठबंधन में तीनों देश अपनी-अपनी अलग सामरिक शक्तियों के साथ एक-दूसरे के पूरक बन रहे हैं:

  1. सामूहिक प्रतिरोध (Collective Deterrence) : समझौते के तहत यदि किसी भी हस्ताक्षरकर्ता देश पर कोई बाहरी सशस्त्र आक्रमण होता है, तो बाकी दोनों देश उसे अपने खिलाफ हमला मानकर संयुक्त रक्षात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
  2. संसाधनों की तिकड़ी

    • सऊदी अरब : वित्तीय ताकत और विशाल पेट्रो-डॉलर पूंजी।
    • तुर्की : उन्नत रक्षा तकनीक, ड्रोन निर्माण (Bayraktar) और नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना का अनुभव।
    • पाकिस्तान : विशाल थलसेना, अनुभवी सैन्य जनशक्ति और एकमात्र मुस्लिम बहुल परमाणु शक्ति संपन्न देश।
       
  3. रक्षा उद्योग व तकनीक हस्तांतरण : तीनों देश मिलकर नए सैन्य हथियारों का सह-उत्पादन करेंगे और खुफिया जानकारियों (Intelligence Sharing) का वास्तविक समय पर आदान-प्रदान करेंगे।
  4. संयुक्त सैन्य अभ्यास व तैनाती : तीनों देशों के बीच बड़े स्तर पर थल, वायु और नौसेना के संयुक्त अभ्यास किए जाएंगे तथा आवश्यकतानुसार सुरक्षा बलों का आदान-प्रदान संभव होगा।

2. भारत के लिए चिंता के मुख्य बिंदु

इस समझौते से नई दिल्ली के सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में चिंता होना स्वाभाविक है:

  • तुर्की का भारत-विरोधी रुख : तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन लंबे समय से वैश्विक मंचों (जैसे संयुक्त राष्ट्र) पर कश्मीर मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान का समर्थन करते रहे हैं। तुर्की द्वारा पाकिस्तान को उन्नत सैन्य तकनीक और बायरकतार ड्रोन बेचे जाने से पाकिस्तान की पारंपरिक युद्ध क्षमता बढ़ी है।
  • सऊदी अरब का दोहरी कूटनीति का संतुलन : पिछले एक दशक में भारत ने सऊदी अरब के साथ मजबूत व्यापारिक, ऊर्जा और रणनीतिक संबंध स्थापित किए हैं। हालांकि, इस समझौते में पाकिस्तान को मिली प्रमुखता से भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी के सामने एक नई कूटनीतिक परीक्षा खड़ी हो गई है।
  • परमाणु छत्र (Nuclear Umbrella) की अटकलें : यद्यपि समझौते के आधिकारिक पाठ में परमाणु हथियारों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन पाकिस्तान की परमाणु क्षमता के इस त्रिकोण में शामिल होने से मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा है।

3. यदि भारत-पाक युद्ध हुआ तो क्या होगा? (परिदृश्य विश्लेषण)

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भविष्य में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बनती है, तो क्या सऊदी अरब और तुर्की सीधे तौर पर भारत के खिलाफ युद्ध में उतरेंगे?

संवैधानिक और भू-राजनीतिक वास्तविकताएं दर्शाती हैं कि स्थिति अत्यंत जटिल होगी:

Mecca Defense Pact 2026

(A) प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप की संभावना और सीमाएं

  • सऊदी अरब की व्यावहारिक सीमाएं : सऊदी अरब का भारत के साथ सालाना $40-$50 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार है। इसके अलावा, मक्का समझौते पर विवाद बढ़ने पर सऊदी विदेश मंत्रालय (डिप्टी मिनिस्टर डॉ. रायेद क्रिमली) ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा है कि यह समझौता किसी अन्य देश के खिलाफ कोई आक्रामक गुट नहीं है और यह क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सऊदी के रणनीतिक संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा। ऐसे में किसी भारत-पाक युद्ध में सऊदी अरब द्वारा सीधे भारत पर सैन्य हमला करने के बजाय कूटनीतिक मध्यस्थता या केवल आर्थिक/तेल आपूर्ति तक सीमित रहने की संभावना अधिक है।
  • तुर्की का कूटनीतिक व तकनीकी समर्थन : तुर्की सीधे अपनी सेना मैदान में न उतारकर पाकिस्तान को रियल-टाइम इंटेलिजेंस, उपग्रह डेटा, उन्नत ड्रोन और गोला-बारूद की त्वरित आपूर्ति कर सकता है, जो युद्ध के मैदान में पाकिस्तान को अतिरिक्त बढ़त दे सकता है।

(B) भारत का रणनीतिक काउंटर-एलायंस (Counter-Alliance)

भारत इस नई चुनौती का सामना करने के लिए पहले से ही वैकल्पिक गठबंधनों पर काम कर रहा है:

  1. पश्चिम एशिया में संतुलन (UAE और इजराइल): संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के संबंध पाकिस्तान और तुर्की के इस प्रभुत्व वाले गुट से बहुत अच्छे नहीं हैं। भारत UAE और इजराइल के साथ मिलकर अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत कर रहा है।
  2. भूमध्य सागर में घेराबंदी (ग्रीस और साइप्रस) : तुर्की के पारंपरिक विरोधियों—ग्रीस (Greece) और साइप्रस (Cyprus)—के साथ भारत ने अपने रक्षा संबंधों को काफी मजबूत किया है, जिससे तुर्की पर कूटनीतिक दबाव बना रहता है।

4. त्रिस्तरीय गठबंधन : शक्तियों, प्रेरणाओं और सीमाओं का तुलनात्मक मैट्रिक्स

Mecca Defense Pact 2026

'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता 2026' पश्चिम एशिया में अमेरिकी सुरक्षा तंत्र के कमजोर होने के बाद उभरती नई बहुध्रुवीय व्यवस्था का प्रमाण है। यद्यपि यह समझौता पहली नज़र में भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती पेश करता है, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर सऊदी अरब की भारत पर आर्थिक निर्भरता और भारत के इजराइल, यूएई तथा ग्रीस के साथ मजबूत रक्षा संबंध इस 'इस्लामी नाटो' के प्रभाव को संतुलित करने की क्षमता रखते हैं। भारत को आने वाले समय में अपनी थल और नौसेना की तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ बहुपक्षीय कूटनीति को और पैना करना होगा।

क्या अरुणाचल में हो रही है चीनी घुसपैठ? क्या है स्थानीय लोगों की चिंता

Arunachal Pradesh News

Arunachal Pradesh News: हाल ही में कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश के कुछ युवाओं के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में युवाओं ने दावा किया है कि चीन अरुणाचल में घुसपैठ कर रहा है। एक युवा ने अपने वीडियो में यहां तक दावा किया है कि बहुत जल्द आप मुझे चीन में देखेंगे। मुझे ही नहीं पूरा अरुणाचल चीन में दिखेगा। हालांकि भारतीय सेना और अरुणाचल प्रदेश सरकार ने इस तरह के दावों को निराधार बताया है। 

 

अरुणाचल प्रदेश के युवा तावा नागू ने एक वीडियो में दावा किया है कि 'Good bye India, बहुत जल्द आप लोग मुझे चीन में देखेंगे। सिर्फ़ मुझे ही नहीं पूरा अरुणाचल चीन में दिखेगा।' Taba का दावा है कि अरुणाचल की जमीन पर चीन कब्जा कर रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। 

इसी तरह एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें एक युवक खुद को अरुणाचल का स्थानीय निवासी बता रहा है और कह रहा है कि चीन ने पुखरेला में जमीन पर कब्जा किया है। उसने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी को कदम से कदम मिलाकर काम करना चाहिए। हम स्थानीय लोग हैं और हमें पता है कि चीन कहां एक्टिविटी कर रहा है। 

क्या है पुखरेला (पुकुर ला/ Pukur La) से जुड़ा विवाद?

दरअसल, अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले (तक्सिंग सेक्टर) के 'पुखरेला' (पुकुर ला/ Pukur La) को लेकर सोशल मीडिया कुछ दावे सामने आए हैं। हाल के दिनों में स्थानीय संगठनों और विपक्षी नेताओं द्वारा यह दावा किया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने तक्सिंग सेक्टर के पुखरेला (पुकुर ला) और आसपास के इलाकों में घुसपैठ की है और निर्माण/अस्थायी ढांचे बनाए हैं।

क्या है भारतीय सेना और सरकार का रुख?

भारतीय सेना और अरुणाचल प्रदेश सरकार ने किसी भी तरह की नई चीनी घुसपैठ या भारतीय जमीन पर कब्जे के दावों को पूरी तरह खारिज और निराधार बताया है। सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा 24×7 जारी है और घुसपैठ या जमीन छिनने की खबरें सोशल मीडिया की अफवाहें और भ्रामक जानकारी हैं। तक्सिंग और पुखरेला क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाएं हैं और बेहद दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण दोनों पक्षों की ओर से पेट्रोलिंग गतिविधियां होती रहती हैं।

 

दरअसल, चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के नाम बदलने की एकतरफा कोशिशों के जवाब में भारत सरकार (गृह मंत्रालय एवं सर्वे ऑफ इंडिया) ने आधिकारिक नक्शे पर 27 महत्वपूर्ण स्थानों को उनके मानक भारतीय नामों से औपचारिक रूप से दर्ज किया है।

इन 27 आधिकारिक स्थानों की सूची में 'पुखरेला' (पुकुर ला/Pukur La), माजा, लोंगजू और थाग ला जैसे रणनीतिक दर्रे और स्थान शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारतीय संप्रभुता को आधिकारिक नक्शों पर स्पष्ट रूप से रेखांकित करना और किसी भी भ्रामक दावे को खत्म करना है। पुखरेला का नाम मुख्य रूप से भारत सरकार द्वारा सीमावर्ती स्थानों के आधिकारिक भारतीय मानकीकरण की वजह से खबरों में आया है।

सब्जी बेचने वाले के हाथ में थे टमाटर और लहसुन, हवा से बरसी मौत’ खेरसॉन में रूसी ‘कामिकेज़’ का खौफनाक शिकार

drone attack

यूक्रेन के फ्रंट लाइन से कुछ ही दूरी पर बसे खेरसॉन शहर में 52 वर्षीय यूरी एक बाजार में अपनी दुकान चलाते हैं। पिछले दिनों जब वह अपनी दुकान पर सब्जियां सही कर रहे थे, तभी उन्हें हवा में रूसी ड्रोन की जानी-पहचानी और तेज भनभनाहट सुनाई दी।

पत्रकार ज़रीना जाब्रिस्की को अस्पताल में आपबीती सुनाते हुए यूरी ने बताया कि उस समय उनके हाथों में सिर्फ लहसुन की कुछ गांठें थीं— कोई हथियार नहीं, यहां तक कि फोन भी नहीं। उन्होंने ड्रोन के कैमरे की तरफ बार-बार अपने टमाटरों और मिर्चियों की ओर इशारा किया, ताकि उस मशीन को नियंत्रित कर रहा ऑपरेटर यह देख सके कि वह कोई सैनिक नहीं, बल्कि एक साधारण नागरिक हैं।

लेकिन वह ड्रोन उनका पीछा करता रहा। पुलिस फुटेज में साफ़ दिखता है कि ड्रोन यूरी के ट्रक के चारों ओर उनका पीछा कर रहा है। वह अपनी दुकान की छतरी के नीचे छिपते हैं, एक तरफ से दूसरी तरफ भागते हैं और लगातार सब्जियों की ओर इशारा करते हैं। फिर वह ड्रोन उनके ठीक बगल में गोता लगाता है और एक जोरदार धमाके के साथ फट जाता है।

अविश्वसनीय रूप से यूरी इस आत्मघाती हमले में बच गए—उन्हें केवल कुछ खरोंचें आईं और सिर में अंदरूनी चोट (Concussion) लगी। अस्पताल में पत्रकार जाब्रिस्की से बातचीत के दौरान वह पूरी तरह होश में थे और उनके चेहरे पर एक अजीब सी मानसिक स्थिरता थी।

इंसानी समझ से परे 'ड्रोन का खौफ'
'मानसिक स्थिरता' यहां सबसे महत्वपूर्ण शब्द हो सकता है, क्योंकि एक कातिल 'कामिकेज़' (Kamikaze) ड्रोन द्वारा शिकार बनाए जाने का अनुभव—एक ऐसी उड़ती हुई मशीन जो किसी जिंदा शिकारी की तरह व्यवहार करती है—ऐसा खौफ है जिसे समझने के लिए इंसानी दिमाग तैयार नहीं है।

प्राचीन काल में धार्मिक कट्टरपंथियों को उड़ते हुए राक्षसों के भ्रम (Hallucinations) हुआ करते थे। लेकिन आधुनिक युग में बहुत कम ऐसे आम नागरिक हैं, जिनका इस तरह यंत्रीकृत उड़ती हुई मशीनों ने शिकार की तरह पीछा किया हो—जब तक कि वे खेरसॉन या उसके आसपास के इलाकों में न रह रहे हों।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस घटना का मूल वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा करते हुए लिखा: “आज, खेरसॉन में आम नागरिकों के खिलाफ रूसियों द्वारा चलाई जा रही ड्रोन 'सफारी' के एक और वीडियो ने कई लोगों को झकझोर कर रख दिया। एक रूसी ड्रोन ने जानबूझकर सब्जी बेचने वाले एक व्यक्ति का शिकार किया और उसके ठीक बगल में विस्फोट कर दिया। रूसियों ने इस अपराध को स्वीकार भी किया है…”


युद्ध के पारंपरिक नियमों का खात्मा : ड्रोन कई सालों से इंसानों का पीछा कर रहे हैं। अमेरिका ने अफगानिस्तान में इनका इस्तेमाल किया, इजराइल गाजा में इनका उपयोग करता है, और रूस व यूक्रेन दोनों ही सीमा पर सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इनका उपयोग कर रहे हैं। लेकिन दक्षिण यूक्रेन और खासकर खेरसॉन शहर में जिस तरह से इनका इस्तेमाल किया जा रहा है, वह बेहद अलग और भयानक लगता है। ऊपर बताया गया वीडियो एक ऐसे ड्रोन को दिखाता है जो साफ तौर पर देखने में सक्षम है और जिसे कोई ऐसा व्यक्ति नियंत्रित कर रहा है जो उसकी स्क्रीन पर सब कुछ साफ देख सकता है। इसके हाई-टेक कैमरे और नेविगेशन सिस्टम इसे भागते और छिपते हुए शिकार का पीछा करने की पूरी इजाजत देते हैं।